Azamgarh Triple Murder: पत्नी और 2 पुजारियों को गोलियों से भूना, फिर 3 मासूम बच्चों को बनाया बंधक… आजमगढ़ में अरविंद का 7 घंटे का खौफनाक ड्रामा!

Azamgarh Triple Murder: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार (22 सितंबर) शाम पूजा के दौरान हुए विवाद के बाद तीन लोगों की हत्या के आरोपी अरविंद सिंह को आजमगढ़ की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप और ATS की संयुक्त टीम ने देर रात मुठभेड़ में मार गिराया। आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि रात्रि साढ़े तीन बजे मुठभेड़ में घायल अहरौला पुलिस थाना अंतर्गत शंभूपुर गांव निवासी अरविंद सिंह की इलाज के दौरान मौत हो गई।

पत्नी और दो पूजारियों की हत्या

आजमगढ़ पुलिस के मुताबिक, अरविंद सिंह मंगलवार शाम छह बजे घर लौटा। उस समय, उसकी पत्नी बबिता सिंह (32) दो पंडितों से पूजा-पाठ करवा रही थी। घर में धार्मिक अनुष्ठान होता देख अरविंद भड़क गया। फिर नाराज अरविंद ने अपनी पत्नी एवं दो पंडितों को गाली देना शुरू कर दिया। पत्नी की आपत्ति पर विवाद बढ़ गया। इस बीच, अरविंद ने अपनी लाइसेंसी बंदूक निकाली और कथित तौर पर पत्नी बबिता सिंह को गोली मार दी। इसके बाद दोनों पंडितों को भी गोली मार दी। पंडितों की पहचान महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (50) के रूप में की गई है।

तीन बच्चों को बनाया बंधक

इस घटना के बाद उसने खुद को घर के भीतर बंद कर लिया। मामले की सूचना मिलने पर कई थानों से पुलिस टीमें मौके पर पहुंची और घर को चारों तरफ से घेर लिया। डॉक्टर अनिल कुमार ने बताया कि तीन हत्याओं के आरोपी ने तीन बच्चों के साथ खुद को कमरे में बंद कर लिया था। इस दौरान वह लगातार उन बच्चों को मारने की धमकी दे रहा था। आरोपी द्वारा चलाई गई गोली से एक बच्चे को भी गोली लगी है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

घायल बेटे ने भी तोड़ा दम, दो बेटियां बचाई गईं

पुलिस ने सबसे पहले घायल बेटे को कमरे से बाहर निकाला। ‘दैनिक जागरण’ की रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी पहचान आठ वर्षीय शौर्य के रूप में हुई। उसे गोली लगी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने अरविंद की दोनों बेटियों को सुरक्षित बाहर निकाला। दोनों बच्चियां सदमे में थीं। पुलिस के मुताबिक उनमें पानी और भोजन की कमी के संकेत दिखाई दिए। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

पुलिस पर की फायरिंग

अधिकारियों ने बताया कि आरोपी ने पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करनी शुरू कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी को गोली लगी। मंगलवार रात साढ़े तीन बजे आरोपी की इलाज के दौरान मौत हो गई। जबकि दो बच्चे खतरे से बाहर हैं। डॉक्टर अनिल कुमार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि आरोपी को लगभग सात घंटे तक समझाने का प्रयास किया गया। इसके साथ ही रिश्तेदारों और परिजनों को बुलाकर भी प्रयास किया गया। लेकिन वह लगातार बच्चों को मारने की धमकी दे रहा था।

भूत प्रेत और आत्मा के साए!

गांव के लोगों ने बताया कि आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। इसलिए भूत प्रेत और आत्मा के साए की बात को लेकर उसके घर में पूजा पाठ का आयोजन किया गया था। इसी बात से आरोपी नाराज था। वाराणसी के एडीजी नवीन अरोड़ा का कहना है कि लगातार सात घंटे के प्रयास के बाद भी आरोपी बाहर नहीं निकला। इसी बीच फायरिंग की आवाज आई जिसके बाद हमारे पास कोई विकल्प नहीं था।

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स्टन ग्रेनेड और टियर गैस ग्रेनेड का प्रयोग करके दरवाजा तोड़ा गया। इसके बाद डॉक्टर अनिल कुमार एसओजी टीम के साथ अंदर गए। उन्होंने बताया कि अंदर जाते ही लगातार आरोपी फायरिंग करने लगा। अधिकारियों ने बताया कि उसने पांच राउंड फायर किया। इसी दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी को गोली लगी। इस मुठभेड़ में आरोपी की मौत हो गई है।

5 मौतों से दहला आजमगढ़

इस पूरी वारदात में कुल पांच लोगों की मौत हुई। इनमें अरविंद सिंह, उसकी पत्नी बाबिता सिंह, दो पुजारी महेंद्र पाठक और अखिलेश मिश्रा तथा उसका आठ वर्षीय बेटा शौर्य शामिल है। इस हत्याकांड के बाद पूरे जिले में दहशत का माहौल है। फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। धार्मिक अनुष्ठान से शुरू हुए विवाद से लेकर गोलीबारी, बच्चों को कमरे में बंद करने और सात घंटे बाद पुलिस कार्रवाई तक की पूरी घटनाक्रम की जांच की जा रही है।

Azamgarh News: आजमगढ़ में घर में पूजा करने आए दो पंडितों और पत्नी को मारने वाले अरविंद के साथ क्या हुआ?

Azamgarh News: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। पत्नी और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या करने के आरोपी अरविंद सिंह को करीब सात घंटे चले गतिरोध के बाद पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। आरोपी ने खुद को एक कमरे में बंद कर तीन बच्चों को भी बंधक बना लिया था। इसके बाद वह पुलिस पर लगातार गोली चलाने की धमकी दे रहा था। पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान तीनों बच्चों को कमरे से सुरक्षित बाहर निकाला गया। हालांकि, आरोपी के बेटे को गोली लगी थी।इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बाकी दो बच्चों को अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया।

पूजा के दौरान शुरू हुआ विवाद

आजमगढ़ के SSP डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, स्थानीय निवासी अरविंद सिंह मंगलवार शाम करीब छह बजे घर लौटा। इस दौरान उसने अपनी पत्नी बबीता सिंह (32) को दो पुजारियों महेंद्र पाठक (60) और अखिलेश मिश्रा (50) के साथ धार्मिक अनुष्ठान करते देखा। सूत्रों के अनुसार, धार्मिक कार्यक्रम देखकर अरविंद कथित रूप से गुस्से में आ गया। उसने पत्नी तथा दोनों पुजारियों के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी। पत्नी के विरोध करने पर विवाद बढ़ गया।

इसके बाद अरविंद ने कथित रूप से अपना लाइसेंसी हथियार निकाला और सबसे पहले पत्नी बबीता सिंह को गोली मारी। इसके बाद उसने दोनों पुजारियों को भी गोली मार दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद आरोपी घर के अंदर बंद हो गया। बताया जा रहा है परिवार को शक था कि अरविंद किसी ‘बुरी आत्मा’ के प्रभाव में है।

इसी वजह से उसकी मां और पत्नी ने पूजा का आयोजन कराया था। पुलिस के मुताबिक, अरविंद पूजा से नाराज था। इसी दौरान उसकी पत्नी ने कथित तौर पर उसे पुजारी का अपमान करने से रोका, जिसके बाद वह गुस्से में आ गया। इस दौरान उसने गोली चला दी। इस दौरान तीन लोग वहां से भागने में सफल रहे। सूचना मिलने पर कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे घर को घेर लिया।

बच्चों को कमरे में बंद कर पुलिस को दी चुनौती

घटना के बाद अरविंद ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया था। उसके साथ उसके दो बच्चे और उसकी साली का एक बच्चा भी कमरे के अंदर था। पुलिस ने पहले बातचीत के जरिए उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए मनाने की कोशिश की। परिवार के सदस्यों को भी बातचीत में शामिल किया गया। हालांकि, पुलिस के मुताबिक अरविंद ने पुलिसकर्मियों और परिवार के लोगों को गोली मारने की धमकी दी। उसने बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दी। सुबह तक पुलिस को इंतजार करने के लिए कहा।

सात घंटे बाद पुलिस ने तोड़ा दरवाजा

वाराणसी जोन के एडीजी नवीन अरोड़ा के मुताबिक, पुलिस ने शुरुआती दौर में काफी संयम बरता। करीब सात घंटे तक आरोपी से बातचीत के जरिए बच्चों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई। लेकिन जब आरोपी ने अंदर से पुलिस पर गोली चला दी, तो एसएसपी और SOG टीम के कुछ सदस्यों को दरवाजा तोड़कर अंदर जाना पड़ा।

पुलिस ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का भी इस्तेमाल किया। कमरे के अंदर पहुंचने के बाद पुलिस टीम पर फिर गोली चलाई गई। इसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा और बच्चों की सुरक्षा के लिए गोलीबारी की, जिसमें अरविंद घायल हो गया।

बेटे को भी लगी थी गोली

पुलिस ने सबसे पहले अरविंद के बेटे को बाहर निकाला। इसके बाद दोनों बच्चियों को सुरक्षित बाहर लाया गया। पुलिस को पता चला कि बेटे को गोली लगी हुई थी। तीनों बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया। लेकिन अरविंद के बेटे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं, पुलिस की गोली लगने से घायल अरविंद की भी अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, दोनों बच्चियां काफी डरी हुई थीं। उन्हें भोजन-पानी की कमी के साथ मानसिक तनाव का भी सामना करना पड़ा था।

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परिवार ने पहले भी की थी शिकायत

SSP के अनुसार, शुरुआती जांच में सामने आया है कि अरविंद सिंह का व्यवहार परिवार के प्रति आक्रामक रहता था। उसकी मां और पत्नी ने कथित तौर पर उसके द्वारा परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट और आक्रामक व्यवहार की शिकायत की थी। पुलिस ने घटना के संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा कि इलाके में कानून-व्यवस्था की स्थिति कंट्रोल में है।