ईरान की ‘फटकार’ के बाद घुटनों पर आए शहबाज शरीफ! ‘बड़बोलेपन’ पर यू-टर्न लेकर अब ट्रंप को ही सिखा रहे पाठ

Pakistan PM Shehbaz Sharif: पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अपनी ‘इंटरनेशनल बेइज्जती’ कराने का कोई मौका हाथ से जाने नहीं देते। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा ही तीर हवा में चलाया, जो सीधा घूमकर उन्हीं को लग गया। हाल ही उन्होंने अपनी संसद में खड़े होकर सीना ठोकते हुए दावा कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच तेहरान के ‘बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम’ को लेकर बातचीत चल रही है।

बस फिर क्या था, ईरान को शहबाज शरीफ का यह ‘ज्ञान’ कतई रास नहीं आया। ईरान ने सरेआम पाकिस्तान को ऐसी फटकार लगाई कि शहबाज शरीफ को तुरंत ‘यू-टर्न’ लेना पड़ा। अब वह कल तक जिस मिसाइल प्रोग्राम पर अमेरिका-ईरान की पंचायत करा रहे थे, आज उसी मिसाइल प्रोग्राम के सबसे बड़े रक्षक बन गए हैं! आइए समझते हैं पाकिस्तान के इस नए कूटनीतिक ब्लंडर की पूरी कहानी।

जब ईरान के राष्ट्रपति के सामने ही खुल गई शहबाज की ‘ज्ञान की पोटली’

ये पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान खुद इस्लामाबाद के दौरे पर थे। मेहमान घर में बैठा था और शहबाज शरीफ ने पाकिस्तानी संसद में खड़े होकर अपनी कूटनीतिक समझ का ढिंढोरा पीट दिया। उन्होंने कह डाला कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच ईरान की मिसाइलों को लेकर गुपचुप चर्चा चल रही है।

ईरान का करारा जवाब

ईरान के वार्ताकारों और अधिकारियों को जैसे ही इस ‘अफवाह’ की भनक लगी, उन्होंने तुरंत शहबाज शरीफ के बयान को सरेआम खारिज कर दिया। ईरानी टीम ने दो टूक कहा, ‘पाकिस्तानी पीएम को चल रही राजनयिक प्रक्रियाओं के बारे में कोई जानकारी ही नहीं है, उनका यह दावा पूरी तरह गलत है।’ ईरान ने साफ कर दिया कि उनकी मिसाइलें उनका संप्रभु रक्षा मामला हैं और यह किसी भी टेबल पर बातचीत का हिस्सा नहीं हैं।

फटकार पड़ते ही पलटे शहबाज

अंतरराष्ट्रीय मंच पर ‘नो-इंफॉर्मेशन’ का तमगा मिलने के बाद शहबाज शरीफ ने जो यू-टर्न लिया, उसे देखकर गिरगिट भी शरमा जाए। एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में अचानक शहबाज शरीफ के सुर बदल गए। अब वह ईरान के मिसाइल कार्यक्रम का खुलकर बचाव करने लगे।

शहबाज शरीफ ने उलटे दुनिया से ही सवाल पूछ लिया कि आखिर सिर्फ तेहरान के बैलिस्टिक मिसाइल जखीरे की ही आलोचना क्यों की जा रही है? उन्होंने यह ज्ञान भी दे डाला कि इस मुद्दे को विवाद बनाना क्षेत्रीय तनाव को कम करने के प्रयासों को और उलझा सकता है।

एक तरफ ट्रंप, दूसरी तरफ ईरान; ‘सैंडविच’ बन गया पाकिस्तान!

इस पूरे वाकये ने इस्लामाबाद को सांप-छछूंदर वाली स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं, जो ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को लेकर लगातार आंखें लाल किए रहते हैं। दूसरी तरफ पड़ोसी देश ईरान है, जिससे पाकिस्तान को अपनी सीमाएं और संबंध बचाकर रखने हैं।

अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएंगे ट्रंप! अमेरिकी सीनेट ने दिया बड़ा झटका, इस प्रस्ताव के बाद क्या पंगु हो गए राष्ट्रपति?

शहबाज शरीफ का यह यू-टर्न अब कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारों का कहना है कि तेहरान से मिली सीधी और तीखी सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद शहबाज शरीफ केवल अपनी गलती को सुधारने और ईरान के गुस्से को शांत करने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान में बलोच एक्टिविस्ट महरंग बलोच को उम्रकैद, हत्या और आतंकवाद मामले में दोषी करार

पाकिस्तान की एक अदालत ने बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच और उनके दो सहयोगियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। क्वेटा की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने तीनों को हत्या और आतंकवाद से जुड़े मामले में दोषी ठहराया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह और बलाच कादिर ने एक भीड़ को उकसाया था, जिसने अर्धसैनिक बल के जवान शब्बीर अहमद की हत्या कर दी थी। 33 वर्षीय महरंग बलोच बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) की प्रमुख हैं और बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी के मामलों को लेकर लंबे समय से अभियान चलाती रही हैं। उन्हें पिछले साल मार्च में कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। फैसले के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने इसकी समीक्षा की मांग की है। आयोग का कहना है कि मानवाधिकारों की वकालत करने वालों के साथ चरमपंथियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। वहीं बलोच यकजेहती कमेटी ने फैसले को बलोच समुदाय के खिलाफ बताया है। स्वीडिश कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी मुकदमे की आलोचना करते हुए इसे न्याय का मजाक करार दिया है। फैसले के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… सिंगापुर की दो कंपनियों पर मजदूरों का वेतन रोकने का आरोप, 400 भारतीय-बांग्लादेशी बोले- महीनों से नहीं मिला पैसा सिंगापुर में काम कर रहे करीब 400 प्रवासी मजदूरों, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों और बांग्लादेशियों की है, ने दो कंपनियों पर वेतन नहीं देने का आरोप लगाया है। शिकायतों के बाद सिंगापुर का श्रम मंत्रालय जांच में जुट गया है, जबकि प्रवासी श्रमिकों की मदद करने वाले संगठन प्रभावित मजदूरों को भोजन और कानूनी सहायता दे रहे हैं। श्रम मंत्रालय ने सोमवार को KPA इंजीनियरिंग और SK इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच शुरू की थी। शुरुआत में करीब 100 मजदूरों ने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में प्रभावित कर्मचारियों की संख्या बढ़कर करीब 400 पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों के भुगतान नहीं करने के कारण भोजन सप्लाई करने वालों ने भी कुछ दिन पहले मजदूरों को खाना देना बंद कर दिया था। इसके बाद माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर ने 300 से ज्यादा मजदूरों को भोजन और दूसरी मदद उपलब्ध कराई। सरकार ने कहा है कि प्रभावित मजदूर नई नौकरी भी तलाश सकते हैं। वहीं श्रमिक संगठनों का कहना है कि कई मजदूर नौकरी और वर्क परमिट खोने के डर से समय पर शिकायत नहीं करते। मामले की जांच जारी है। अधिकारियों के साथ-साथ कई गैर-सरकारी संगठन भी मजदूरों की शिकायतों और कंपनियों की स्थिति की जांच कर रहे हैं। उत्तर कोरिया को अगले पांच वर्षों तक हर साल 2 युद्धपोत बनाने चाहिए: किम
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कहा है कि देश को अगले पांच वर्षों तक हर साल दो बड़े युद्धपोत बनाने चाहिए। उन्होंने मंगलवार को नए विध्वंसक युद्धपोत ‘चोए ह्योन’ के कमीशनिंग समारोह में कहा कि देश की नौसेना का आधुनिकीकरण तेज गति से आगे बढ़ेगा और इसकी परमाणु क्षमता भी मजबूत होगी। राज्य समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक किम ने नामपो बंदरगाह पर आयोजित समारोह में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम 5,000 टन क्षमता वाले बहुउद्देशीय विध्वंसक युद्धपोत चोए ह्योन की तैनाती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। किम ने कहा कि अगले पांच वर्षों में हर साल इसी क्षमता के दो युद्धपोत बनाए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तर कोरिया जल्द ही कांग कोन नामक एक और 5,000 टन क्षमता वाला विध्वंसक युद्धपोत तैनात करेगा। इसके अलावा 10,000 टन क्षमता वाले रणनीतिक युद्धपोतों को भी नौसेना में शामिल करने की योजना है। कांग कोन युद्धपोत पिछले वर्ष लॉन्चिंग समारोह के दौरान आंशिक रूप से पलट गया था, जिसके बाद उसकी मरम्मत की गई। किम जोंग उन ने कहा कि अब तक उत्तर कोरिया की नौसेना उसकी सैन्य शक्ति का सबसे कमजोर हिस्सा थी, लेकिन नए कार्यक्रमों के बाद इसकी क्षमता “कल्पना से परे” स्तर तक पहुंच जाएगी।

होर्मुज में फंसे 11,000 नाविकों का रेस्क्यू शुरू:US-ईरान मिलकर काम कर रहे; अमेरिकी विदेश मंत्री पीस डील पर UAE को मनाने पहुंचे

संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) ने कहा है कि होर्मुज में फंसे करीब 11 हजार सीफेयरर्स, यानी नाविकों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यह बड़ा अभियान अमेरिका, ईरान, खाड़ी इलाके के तटीय देशों, शिपिंग कंपनियों की मदद से चलाया जाएगा। इस दौरान यह भी सुनिश्चित कर लिया गया है कि जहाज सुरक्षित तरीके से इस रास्ते से गुजर सकें। इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो खाड़ी देशों के दौरे पर पहुंच गए हैं। उनका मकसद अमेरिका-ईरान समझौते को उन देशों के सामने रखना है, जो इस समझौते को लेकर सबसे ज्यादा संदेह में माने जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, UAE, बहरीन और कुवैत को इस समझौते की कुछ बातों पर चिंता है। उन्हें लगता है कि इससे होर्मुज में ईरान का प्रभाव बढ़ गया है। साथ ही समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर भी कोई स्पष्ट शर्त नहीं रखी गई है। इसके अलावा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए प्रस्तावित 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए के फंड में खाड़ी देशों से मदद मांगे जाने की संभावना है। ऐसे में अमेरिका इन देशों को भरोसा दिलाने और समझौते के समर्थन के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरानी राष्ट्रपति पाकिस्तान पहुंचे: ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान एक दिन की यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे। इस दौरान अमेरिका और ईरान के बीच हुई पीस डील पर चर्चा हुई। 2. भारत से जुड़े 11 जहाजों ने होर्मुज पार किया: अमेरिका-ईरान के बीच 17 जून को हुए समझौते के बाद अब तक 11 जहाज होर्मुज पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं। 3. होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल गुजरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सोमवार को होर्मुज से 1.9 करोड़ बैरल तेल की आवाजाही हुई, जो अब तक का रिकॉर्ड है। 4. इजराइल अपने हथियार खुद बनाएगा: इजराइली PM ने कहा कि इजराइल को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर सैन्य निर्भरता कम करनी होगी और खुद हथियार बनाना सीखना होगा। 5. ट्रम्प ने ईरान को फिर से धमकी दी: ट्रम्प ने कहा कि अगर ईरान समझौते का पालन नहीं करता या सही तरीके से व्यवहार नहीं करता, तो वह फिर से कार्रवाई करने को तैयार हैं। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

सिंधु नदी के पानी को तरसा पाकिस्तान:आर्मी चीफ भारत के खिलाफ जंग की सा​जिश रचने में जुटे, LoC पर 35 ड्रोन यूनिट तैनात

भारत ने सिंधु नदी का पानी रोक कर पाकिस्तान को तरसा दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में छेड़े ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सिंधु का पानी रोकने से पाक की कमर टूट गई है। पानी के लिए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भी मुंह की खाने के बाद जहां पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जंग छेड़ने की भभकियां दे रहे हैं। वहीं, जंग का मंसूबा पाले आर्मी चीफ आसिम मुनीर साजिश रचने में जुटे हैं। एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर पाक सेना की 8 ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की हैं। पाक ने एआई फेंसिंग भी की है। इसके तहत टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया गया है। पाकिस्तान ने हाल में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर ड्रोन ग्रिड भी तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से जुड़ी अपनी सीमाओं से 5 बटालियन को इस महीने की शुरुआत में ही मूव करा कर एलओसी के रावलाकोट, कोटली और भीम्बर सेक्टर में तैनात किया है। बता दें कि इन्हीं जगहों से पाक भारत में आतंकियों की घुसपैठ भी करता रहा है। चीन 5वीं जेनरेशन का फाइटर जेट देगा ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने पाक को 36 मल्टी रोल जे-सीरीज फाइटर जेट की सप्लाई की है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी एफ-35 जेट का चीनी वर्जन जे-35 भी साल के अंत तक पाकिस्तान को मिलने वाला है। इस जेट की टेस्ट फ्लाइट्स हो चुकी हैं। तुर्किये ड्रोन प्लांट लगा रहा है, MILGEM सबमरीन भी देगा पाक को ड्रोन सप्लाई करने के बाद अब तुर्किये कराची के पास साझा कॉम्बैट ड्रोन असेंबली प्लांट भी लगाया है। यहां हर साल 700 ड्रोन बनेंगे। पाकिस्तान ने इन ड्रोन को बांग्लादेश को एक्सपोर्ट करने का एमओयू भी किया है। तुर्किये पाक के लिए मिलजैम क्लास पनडुब्बी भी बना रहा है। पाकिस्तान को इस पनडुब्बी की साल के अंत तक डिलीवरी भी मिल जाएगी। दो दिन पहले पाकिस्तानी रक्षामंत्री बोले थे- भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी थी। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत-पाकिस्तान के बीच का सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाक के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला: हमारे मामलों में दखल न दें पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

सिंधु नदी के पानी को तरसा पाकिस्तान:आर्मी चीफ भारत के खिलाफ जंग की सा​जिश रचने में जुटे, LoC पर 35 ड्रोन यूनिट तैनात

भारत ने सिंधु नदी का पानी रोक कर पाकिस्तान को तरसा दिया है। पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में छेड़े ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद सिंधु का पानी रोकने से पाक की कमर टूट गई है। पानी के लिए अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भी मुंह की खाने के बाद जहां पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ जंग छेड़ने की भभकियां दे रहे हैं। वहीं, जंग का मंसूबा पाले आर्मी चीफ आसिम मुनीर साजिश रचने में जुटे हैं। एलओसी (नियंत्रण रेखा) पर पाक सेना की 8 ब्रिगेड ने 35 एंटी ड्रोन यूनिट तैनात की हैं। पाक ने एआई फेंसिंग भी की है। इसके तहत टारगेटिंग और सर्विलांस को तेज किया गया है। पाकिस्तान ने हाल में इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और काउंटर ड्रोन ग्रिड भी तैयार किया है। सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने अफगानिस्तान से जुड़ी अपनी सीमाओं से 5 बटालियन को इस महीने की शुरुआत में ही मूव करा कर एलओसी के रावलाकोट, कोटली और भीम्बर सेक्टर में तैनात किया है। बता दें कि इन्हीं जगहों से पाक भारत में आतंकियों की घुसपैठ भी करता रहा है। चीन 5वीं जेनरेशन का फाइटर जेट देगा ऑपरेशन सिंदूर के बाद चीन ने पाक को 36 मल्टी रोल जे-सीरीज फाइटर जेट की सप्लाई की है। पेंटागन की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी एफ-35 जेट का चीनी वर्जन जे-35 भी साल के अंत तक पाकिस्तान को मिलने वाला है। इस जेट की टेस्ट फ्लाइट्स हो चुकी हैं। तुर्किये ड्रोन प्लांट लगा रहा है, MILGEM सबमरीन भी देगा पाक को ड्रोन सप्लाई करने के बाद अब तुर्किये कराची के पास साझा कॉम्बैट ड्रोन असेंबली प्लांट भी लगाया है। यहां हर साल 700 ड्रोन बनेंगे। पाकिस्तान ने इन ड्रोन को बांग्लादेश को एक्सपोर्ट करने का एमओयू भी किया है। तुर्किये पाक के लिए मिलजैम क्लास पनडुब्बी भी बना रहा है। पाकिस्तान को इस पनडुब्बी की साल के अंत तक डिलीवरी भी मिल जाएगी। दो दिन पहले पाकिस्तानी रक्षामंत्री बोले थे- भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकते हैं पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी थी। पाकिस्तानी चैनल ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा कि अगर पाकिस्तान को लगा कि उसकी जल सुरक्षा खतरे में है, तो वह भारत के खिलाफ जंग छेड़ सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत पाकिस्तान के हिस्से के पानी के प्रवाह में दखल दे रहा है और रणनीतिक हथियार के तौर पर इसका इस्तेमाल कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि पिछले एक साल में इस मामले में क्या नए घटनाक्रम हुए हैं, इसकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत-पाकिस्तान के बीच का सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाक के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला: हमारे मामलों में दखल न दें पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…

Aliya Riaz: टी-20 विश्व कप से बाहर हुई पाकिस्तान टीम, स्टार क्रिकेटर आलिया रियाज क्यों हो रही हैं ट्रोल?

टी-20 विश्व कप 2026 में पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम का सफर काफी निराशाजनक रहा। टीम अपने शुरुआती तीनों मैच हार कर टूर्नामेंट से बाहर हो गई है। इस खराब प्रदर्शन के बाद खिलाड़ियों को सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर अनुभवी क्रिकेटर आलिया रियाज चर्चा में हैं। महिला टी-20 विश्व कप 2026 में आलिया रियाज अब तक अपनी छाप छोड़ने में सफल नहीं रही हैं। टूर्नामेंट के शुरुआती तीन मैचों में उनका प्रदर्शन कोई खास नहीं रहा, जहां वह बल्ले और गेंद दोनों से बड़ी भूमिका नहीं निभा सकीं। टीम के खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है

सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें और प्रदर्शन को लेकर कई तरह की रिएक्शन सामने आ रही हैं। आइए जानते हैं कौन है पाकिस्तान की आलिया रियाज

अब तक आलिया का प्रदर्शन

आलिया रियाज पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम की अनुभवी ऑलराउंडर खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। आलिया रियाज ने पाकिस्तान के लिए वनडे और टी-20 दोनों प्रारूपों में लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर बनाया है। वनडे क्रिकेट में वह 80 से अधिक मैच खेल चुकी हैं और बल्ले से 1600 से ज्यादा रन बना चुकी हैं। इस दौरान 39 पारियों में 12 विकेट हासिल की है। वहीं, टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भी आलिया 100 से ज्यादा मुकाबलों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। इस दौरान उन्होंने 1300 से अधिक रन बनाने के साथ-साथ गेंद से भी 20 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए हैं, जिससे वह टीम की प्रमुख ऑलराउंडर खिलाड़ियों में शामिल हैं।

साल 2024 में हुई था निकाह

आलिया रियाज का जन्म 24 सितंबर 1992 को रावलपिंडी में हुआ था। आलिया साल 2014 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और तब से लगातार टीम के लिए खेल रही हैं। आलिया दाएं हाथ से बल्लेबाजी करने के साथ-साथ मीडियम गति की गेंदबाजी भी करती हैं। आलिया कई वर्षों से पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं और सीमित ओवरों के दोनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। आलिया रियाज सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहती हैं और अक्सर अपनी निजी जिंदगी से जुड़ी तस्वीरें शेयर करती हैं। आलिया ने साल 2024 में पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज वकार यूनिस के छोटे भाई यूनिस अली से निकाह किया था। दोनों समय-समय पर अपनी साथ की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हैं।

डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि, जानें 5 अनसुने तथ्य

A photo in the image providing information regarding the death anniversary of Dr. Syama Prasad Mukherjee

Dr. Syama Prasad Mukherjees Martyrdom Day: भारतीय राजनीति में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने देश की एकता, अखंडता और वैचारिक राजनीति की एक नई नींव रखी। आज, 23 जून को उनकी पुण्यतिथि है। वे एक प्रखर शिक्षाविद्, महान बैरिस्टर और स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री थे। उन्होंने 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का नारा देकर कश्मीर को भारत का पूर्ण अंग बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। 

 

आइए, उनकी पुण्यतिथि के विशेष अवसर पर जानते हैं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन से जुड़े 5 अनसुने और बेहद दिलचस्प तथ्य:

 

1. महज 33 वर्ष की उम्र में बने सबसे युवा वाइस चांसलर

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की बुद्धिमत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति बन गए थे। उनके कार्यकाल (1934-1938) के दौरान ही महान कवि रवींद्रनाथ टैगोर ने पहली बार कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को बंगाली भाषा में संबोधित किया था, जो उस दौर में एक बहुत बड़ा बदलाव था।

 

2. नेहरू कैबिनेट के पहले मंत्री, जिन्होंने खुद इस्तीफा दिया

देश आजाद होने के बाद प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपनी पहली कैबिनेट में उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बनाया था। हालांकि, साल 1950 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच 'नेहरू-लियाकत समझौता' हुआ, तो डॉ. मुखर्जी ने इसका कड़ा विरोध किया। वे पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों/ हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंतित थे। नीतिगत मतभेदों के कारण उन्होंने कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया। वे आजाद भारत के पहले ऐसे मंत्री थे जिन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया था।

 

3. भारतीय जनसंघ (बीजेपी की नींव) की स्थापना

नेहरू कैबिनेट से अलग होने के बाद, डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से 21 अक्टूबर 1951 को 'भारतीय जनसंघ' की स्थापना की। यही जनसंघ आगे चलकर 1980 में 'भारतीय जनता पार्टी' (BJP) के रूप में सामने आया। आज बीजेपी उन्हें अपना मार्गदर्शक और वैचारिक संस्थापक मानती है।

 

'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।' 

– यह ऐतिहासिक नारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के विरोध में दिया था।

 

4. कश्मीर में प्रवेश के लिए बिना परमिट के किया सफर

1950 के दशक में जम्मू-कश्मीर जाने के लिए भारत के ही नागरिकों को एक विशेष 'परमिट' या अनुमति पत्र लेना पड़ता था। वहां का अपना अलग झंडा या निशान और अलग प्रधानमंत्री/ प्रधान होता था। डॉ. मुखर्जी ने इस व्यवस्था को भारत की संप्रभुता के खिलाफ माना। मई 1953 में, उन्होंने इस कानून को चुनौती देने के लिए बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश किया, जहां लखनपुर बॉर्डर पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

 

5. जेल में रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु

गिरफ्तारी के बाद उन्हें श्रीनगर की एक जेल में नजरबंद रखा गया। वहां उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। 23 जून 1953 को रहस्यमयी परिस्थितियों में अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मां जोगमाया देवी और देश के कई बड़े नेताओं ने इस मौत की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। उनकी यह मृत्यु आज भी भारतीय इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों में से एक मानी जाती है।

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आलिया रियाज को सिर्फ खूबसूरती के कारण मिली पाक टीम में जगह, टीम पर भड़के फैंस

Aliya Riyaz

पाकिस्तान की खिलाड़ी आलिया रियाज अपनी खूबसूरती के कारण सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि क्रिकेट कला और ताकत का खेल है और भारी भरकम शरीर की आलिया ना गेंदबाजी में और ना ही बल्लेबाजी में ताकत दिखा पाई है। साथ ही उनकी फील्डिंग भी खासी खराब है। इस कारण पाक क्रिकेट फैंस ही उनकी आलोचना कर रहे हैं। (Pic Courtesy: Facebook Official page of Aliya Riyaz)


भारत, बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका से हारने के बाद पाकिस्तान पहले दौर से ही बाहर हो गया था।पुरूष टीम के पूर्व टेस्ट कप्तान राशिद लतीफ ने कहा कि हर कोई महिला क्रिकेट का समर्थन करना चाहता है और करना भी चाहिये लेकिन पाकिस्तानी महिला क्रिकेट आगे बढ ही नहीं रहा है।उन्होंने  कहा ,‘‘ पाकिस्तान महिला टीम कई साल से खेल रही है और यह हैरानी की बात है कि आईसीसी टूर्नामेंटों में प्रदर्शन में कोई सुधार नहीं है।’’

पूर्व टेस्ट क्रिकेटर और महिला टीम के पूर्व कोच कबीर खान ने कहा ,‘‘ इन खिलाड़ियों को किसी सुविधा या अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर की कमी नहीं है ।’’उन्होंने कहा ,‘‘मुझे लगता है कि हमारे खिलाड़ी दबाव को झेलने के लिये मानसिक रूप से मजबूत नहीं है। दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के खिलाफ इस विश्व कप में कम स्कोर वाले मैचों को ही देख लो।’’ अगर आप लगातार हारते रहे तो पाकिस्तान में महिला क्रिकेट आगे नहीं बढ सकेगा।’

ट्रम्प बोले- ईरान परमाणु ठिकानों की जांच कराने को तैयार:इससे लंबे समय तक भरोसा बनेगा; UN के अधिकारी फिर तैनात होंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। ट्रम्प के मुताबिक, इससे दुनिया को लंबे समय तक भरोसा रहेगा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार बनाने के लिए नहीं है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी IAEA के अधिकारी फिर से ईरान में तैनात किए जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह 2015 के परमाणु समझौते जैसी व्यवस्था की वापसी होगी, जिससे ट्रम्प ने 2018 में अमेरिका को बाहर कर लिया था। इसके बाद ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी सीमित कर दी थी। स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच हुई हालिया वार्ता के बाद अमेरिका ने ईरानी तेल पर लगी कुछ पाबंदियों में 60 दिन की ढील दी है। वहीं, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार से जुड़े सबसे कठिन मुद्दों पर बातचीत अभी बाकी है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. PAK पीएम बोले- अमेरिका-ईरान वार्ता सफल: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत सकारात्मक रही। दोनों पक्ष 60 दिन के भीतर अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ने, हाई लेवल कमेटी बनाने और तकनीकी स्तर की वार्ता जारी रखने पर सहमत हुए। 2. अमेरिका ने ईरान को 60 दिन तेल बेचने की छूट दी: ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन और बिक्री पर 21 अगस्त तक के लिए प्रतिबंधों में ढील दे दी। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही जारी रखने पर ईरानी सहमति के बाद लिया गया। 3. ईरान ने कहा- बातचीत के बीच भी सेना पूरी तरह अलर्ट: ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के डिप्टी सेक्रेटरी गदीर नेजामी ने कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत जारी रहने के बावजूद सेना की तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए ईरानी सेना पूरी तरह तैयार है। 4. होर्मुज से तेल टैंकरों की आवाजाही फिर बढ़ने लगी: करीब 20 लाख बैरल तेल लेकर दो टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। यह टैंकर किस देश के हैं इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई हैं। हालांकि, जहाजों की संख्या अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से काफी कम है। 5. स्विट्जरलैंड वार्ता के बाद गालिबाफ और अराघची ओमान रवाना: ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अमेरिका के साथ बातचीत के बाद ओमान पहुंचे हैं। वहां होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर चर्चा होगी। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

BrahMos बनी ग्लोबल सेंसेशन, UAE भारत से खरीदेगा ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर!

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस पर तबाही मचाने लाली ब्रह्मोस मिसाइल ग्लोबल सेंसेशन बन गई है। दुनिया के कई देश भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल में दिलचस्पी दिखाई है। कुछ दिनों पहले भारत और वियतनाम की बीच BrahMos मिसाइल सप्लाई की बड़ी डिफेंस डील पर सहमती बनी है। वहीं अब इस मिसाइल को लेकर एक और बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत और UAE के बीच रक्षा क्षेत्र में नई बातचीत शुरू हुई है। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, UAE भारत की ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर एयर डिफेंस सिस्टम खरीद सकता है।

UAE ने दिखाई दिलचस्पी

यूएई पश्चिम एशिया में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करना चाहता है। बताया गया है कि अबू धाबी ने भारत के कई रक्षा उपकरणों और हथियार प्रणालियों में रुचि दिखाई है। हालांकि यह बातचीत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसे तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। ईरान-इजराइल जंग और मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण सुरक्षा चुनौतियां बढ़ी हैं। इसी वजह से UAE अपनी सैन्य ताकत मजबूत कर रहा है।

दोनों देशों के बीच चल रही है बातचीत

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि यूएई ने भारत के कई आधुनिक रक्षा उपकरणों में रुचि दिखाई है। इनमें ब्रह्मोस मिसाइल और आकाशतीर वायु रक्षा प्रणाली प्रमुख हैं। सूत्र ने कहा कि भारत और यूएई के बीच इस विषय पर बातचीत अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन यह तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत और रूस के सहयोग से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी खासियत यह है कि इसे जमीन, समुद्र और लड़ाकू विमानों से दागा जा सकता है। वहीं, आकाशतीर एक स्वदेशी वायु रक्षा कमांड और कंट्रोल सिस्टम है, जिसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने भारतीय सेना के साथ मिलकर तैयार किया है। यह प्रणाली हवाई खतरों की निगरानी और उनसे निपटने में सेना की मदद करती है।

यूएई लगातार मजबूत कर रहा अपनी सुरक्षा

हाल के क्षेत्रीय तनाव और ईरान के हमलों के बाद यूएई अपनी सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है। साथ ही वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा बढ़ाने पर भी ध्यान दे रहा है। यह समुद्री मार्ग यूएई के ऊर्जा निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस साल की शुरुआत में अबू धाबी ने दक्षिण कोरिया के साथ 35 अरब डॉलर से अधिक के रक्षा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। संघर्ष और सुरक्षा मामलों पर नजर रखने वाली संस्था ‘आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा’ की दक्षिण एशिया विशेषज्ञ पर्ल पांड्या ने कहा कि अलग-अलग देशों से रक्षा उपकरण खरीदने से यूएई को रणनीतिक रूप से अधिक स्वतंत्रता मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मजबूत संबंधों का एक फायदा यह भी है कि इससे अमेरिका को कोई आपत्ति नहीं होती, क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच भी अच्छे सहयोगी संबंध हैं।