NMC Advertising Guidelines for Doctors: खुद को नं. 1 या ‘गारंटीड इलाज’ का दावा नहीं कर सकेंगे डॉक्टर, एनएमसी ने जारी की गाइडलाइन

NMC Advertising Guidelines for Doctors: एआई और सोशल मीडिया के दौर में यह समझना बहुत मुश्किल है कि कौन सच बोल रहा है और कौन झूठ? खासतौर से खुद को नंबर 1 बताने वाले डॉक्टर या ‘गारंटीड इलाज’ का दावा करने वाले अस्पतालों को देखते हुए यह और भी मुश्किल हो जाता है। इस समस्या की गंभीरता को समझते नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने अस्पतालों और डॉक्टरों के विज्ञापनों के संबंध में गाइडलाइन जारी की है। एनएमसी की इन सख्त दिशा-निर्देशों को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

एनएमसी के नए नियमों के दायरे में अखबार-होर्डिंग और इंस्टाग्राम-यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म शामिल किए गए हैं। बहुत से डॉक्टर या अस्पताल अपनी लोकप्रियता बढ़ाने के लिए सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर्स या पेड रिव्यू का सहारा लेते हैं। एनएमसी की नई गाइडलाइन के बाद इन सभी तौर-तरीकों पर रोक लगा दी गई है।

एनएमसी की नई गाइडलाइन

एनएमसी के नए नियमों के अनुसार, इलाज से पहले और बाद की तस्वीरें (Before-After Photos) दिखाने या फर्जी लाइक्स और व्यूज के जरिए अपना विज्ञापन करने वालों पर कमीशन की नजर रहेगी। एनएमसी के नियमों का उल्लंघन करने पर डॉक्टरों का रजिस्ट्रेशन निलंबित होने के साथ-साथ भारी जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार के इस कदम से हेल्थ सर्विस के क्षेत्र में पारदर्शिता और भरोसे का माहौल तैयार होगा।

एनएमसी रखेगी ‘गारंटीड इलाज’ का दावा करने वालों पर नजर

नेशनल मेडिकल कमीशन की नई गाइडलाइंस के अनुसार, अब कोई भी डॉक्टर या हॉस्पिटल अपने प्रचार के लिए ‘100% सफलता’, ‘गारंटीड इलाज’, ‘चमत्कारी इलाज’, ‘दर्द रहित इलाज’ और ‘नंबर-1 स्पेशलिस्ट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। इसके अलावा ‘सबसे अच्छा’ या ‘सबसे भरोसेमंद’ जैसे दावों पर भी रोक लगा दी गई है, जब तक कि उन्हें किसी ठोस और निष्पक्ष तरीके से साबित न किया जा सके।

मरीजों के रिव्यू और सेलिब्रिटी प्रचार पर पाबंदी

डॉक्टर अपने प्रचार के लिए मरीजों की सिफारिशों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। इतना ही नहीं, मरीजों से सोशल मीडिया पर रिव्यू मांगने की भी अनुमति नहीं होगी। अपनी सेवाओं का प्रचार करने के लिए किसी सेलिब्रिटी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर या तीसरे व्यक्ति का सहारा लेने पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है। ऐसा करने वाले डॉक्टरों या अस्पतालों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

रेफरल फीस और डर पैदा करने वाले विज्ञापनों पर रोक

हॉस्पिटल और डॉक्टर अब फ्री इलाज, कैशबैक, डिस्काउंट, या कूपन का प्रचार नहीं कर सकेंगे। ऐसा करने पर रोक लगा दी गई है। कमीशनखोरी, रेफरल फीस और डर पैदा करके इलाज बेचने वाले विज्ञापनों को भी अवैध करार दिया गया है। हालांकि, डॉक्टर आम जनता को जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य अभियानों और शैक्षणिक चर्चाओं में हिस्सा ले सकते हैं।

नियम टूटने पर होगी सख्त कार्रवाई

नेशनल मेडिकल कमीशन ने स्पष्ट किया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों और हॉस्पिटल के खिलाफ चेतावनी, सुधार के निर्देश, भारी जुर्माने और रजिस्ट्रेशन का निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि डॉक्टर इस कार्रवाई के खिलाफ 60 दिनों के अंदर NMC के एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड में अपील कर सकते हैं।

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