Trading Strategy : बाजार में बुल्स ने की दमदार वापसी, अनुज सिंघल से जाने निफ्टी-बैंक निफ्टी में कैसे बनेगा मोटा पैसा

Trading Strategy : बाजार में बुल्स की दमदार वापसी देखने को मिल रही है। निफ्टी 140 अंक से ज्यादा चढ़कर 24025 के करीब कारोबार कर रहा है। निफ्टी एक दिन बाद ही 20 DEMA, 100 DMA हासिल करने में कामयाब रहा है। बैंक निफ्टी में 600 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी है। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स आउटपरफॉर्म कर रहे हैं। दोपहर 2:35 बजे के आसपास सेंसेक्स 632.03 अंक या 0.83% बढ़कर 77,135.63 पर और निफ्टी 186.40 अंक या 0.78% बढ़कर 24,068.45 पर दिख रहा था। अज सभी सेक्टर इंडेक्स बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं, जिसमें रियल्टी इंडेक्स 3% से ज़्यादा चढ़ा है। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.5% और स्मॉलकैप इंडेक्स 2% ऊपर है।

बाजार: शानदार रिकवरी

बाजार की आगे की चाल और रणनीति पर बात करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि बाजार में आज बढ़िया रिकवरी का सत्र रहा। पूरे दिन कोई भी इंट्राडे गिरावट नहीं आई। हालांकि निफ्टी 24,050-24,100 के जोन में आकर अटका है। आज की क्लोजिंग काफी अहम रहेगी। मिडकैप्स में शानदार रिवर्सल है। Advance/Decline 4:1 से भी बेहतर रहा। कोई बड़ा सेक्टोरल मूव नहीं, सभी सेक्टर्स चले हैं। उम्मीद के मुताबिक इंटरग्लोब और श्रीराम फाइनेंस ने लीड किया। EMS और ज्वेलरी शेयरों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली।

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बाजार: अब क्या?

बाजार में 24,050 के ऊपर की क्लोजिंग जरूरी है। 24,150 के ऊपर क्लोज हो जाए तो सबसे बढ़िया रहेगा। अब निफ्टी को 23,950 के नीचे नहीं फिसलना चाहिए। इसके नीचे क्लोज हुआ तो दिक्कत होगी। बैंक निफ्टी ने शानदार लीडरशिप दिखाई है। कच्चा तेल भी फिसलकर $77 पर आ गया है। रुपये में भी मजबूती है। ट्रंप ने भी कहा है कि वे दोबारा लड़ाई नहीं चाहते। लग रहा है कि कल की गिरावट सिर्फ एक दिन की गिरावट थी

निफ्टी-बैंक निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए 24,150-24,250 पर रेजिस्टेंस और 23,950-24,050 पर सपोर्ट है। बैंक निफ्टी के लिए 57,000-57,200 पर सपोर्ट और 57,600-57,800 पर रेजिस्टेंस है।

कल के लिए रणनीति

बाजार में भरोसा हिल गया है। इसलिए क्लोजिंग दिन के हाई से काफी नीचे हो रही है। अभी कुछ दिन इंट्रा-डे ही रहना बेहतर है।

 

डिस्क्लेमर:मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Jewellery Stocks : ज्वेलरी शेयरों पर जेपी मॉर्गन के बुलिश रिपोर्ट के बाद टाइटन और सेनको गोल्ड में आई तेजी, जानिए क्या कहती है ये रिपोर्ट

Jewellery Stocks : कल की भारी गिरावट के बाद आज बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिल रही है। निफ्टी 150 प्वाइंट से ज्यादा उछलकर 24050 के ऊपर आ गया है। बैंक निफ्टी में 550 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी नजर आ रही है। छोटे-मझोले शेयरों में भी अच्छी खरीदारी आई है। इसके चलते मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी के उछाल के साथ आज आउटपरफॉर्म कर रहे हैं। वहीं, वोलैटिलिटी इंडेक्स इंडिया VIX में 10% से ज्यादा की गिरावट दिख रही है। यह तेजड़ियों के लिए राहत की बात है।

इस बीच JPMorgan की बुलिश रिपोर्ट के बाद ज्वेलरी शेयरों की चमक बढ़ गई है। कल्याण ज्वेलर्स 15 फीसदी तेजी के साथ वायदा का टॉप गेनर बना हुआ है। सेनको गोल्ड में भी 7 फीसदी से ज्यादा की तेजी है। आइए इस रिपोर्ट पर डालते हैं एक नजर।

ज्वेलरी सेक्टर पर बुलिश जेपी मॉर्गन

जेपी मॉर्गन ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि गोल्ड रीसाइकलिंग ट्रेंड से ज्वेलरी स्टॉक्स को सपोर्ट मिलने की संभावना है। ग्राहकों के डिमांड पैटर्न में भी बड़ा बदलाव आया है। गोल्ड एक्सचेंज स्कीम को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। रीसाइकलिंग में ग्राहक पुराने गोल्ड का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। हल्के और कम कैरेट (18K/14K) ज्वेलरी की मांग बढ़ी है। रिटेलर एक्सचेंज & एनकैशमेंट स्कीम से फुटफॉल बढ़ा है। ऊंची गोल्ड कीमतों से ग्राहकों के खरीदारी का ट्रेंड बदला है। वित्त 2027 की पहली तिमाही में ज्वेलरी सेक्टर में मांग में मजबूती रही है। ऑर्गेनाइज्ड ज्वेलर्स के लिए मार्केट शेयर बढ़ाने का मौका है। इससे टाइटन, कल्याण ज्वेलर्स और सेनको को बड़ा फायदा होगा।

जेपी मॉर्गन ने 5,182 रुपये के टारगेट के साथ टाइटन पर ओवरवेट (Overweight) की रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज का कहना है कि बुलियन को छोड़कर तनिष्क, मिया, ज़ोया और बियॉन की रेवेन्यू में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जो अनुमान से बेहतर है। उन्होंने यह भी कहा कि खरीदारों की संख्या में बढ़ोतरी ‘लो डबल डिजिट’ तक पहुंच गई और टिकट साइज़ भी मजबूत बना रहा है। इसके अलावा, त्योहारों की मांग और सोने की कीमतों में स्थिरता के कारण प्लेन गोल्ड, स्टडेड ज्वेलरी और सोने के सिक्कों की अच्छी मांग से कंपनी के अपनी ग्रोथ की रफ्तार बनाए रखने में मदद मिलनी चाहिए।

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ज्वेलरी कंपनियों की चमक बढ़ी

ज्वेलरी कंपनियों के प्रदर्शन और वैल्यूएशन पर नजर डालें तो पहली तिमाही में टाइटन की आय में 39 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली है। यह स्टॉक 80 गुना पीई पर ट्रेड कर रहा है। वहीं, कल्याण ज्वेलर्स की आय में पहली तिमाही में 38 फीसदी की ग्रोथ देखने को मिली है। यह शेयर 28 80 गुना पीई पर ट्रेड कर रहा है। सेनको गोल्ड की आय में पहली तिमाही में 60 फीसदी की ग्रोथ दिखी है। यह शेयर 10 गुना पीई पर ट्रेड कर रहा है।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

घर से निकला 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और 1.6 करोड़ कैश! यूपी में इस रिटायर ARTO के यहां छापा पड़ा तो हर कोई चौंका

उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में आगरा में तैनात रहे पूर्व असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर पर छापा मारा। तलाशी के दौरान अधिकारियों को 1.62 करोड़ रुपये नकद, 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और करीब 35 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले। आधिकारिक बयान के अनुसार, अदालत से सर्च वारंट मिलने के बाद विजिलेंस की टीम ने मंगलवार और बुधवार को ललित कुमार के घर की तलाशी ली।

जांच में पहले ही सामने आया था कि ललित कुमार ने अपनी वैध आय से कहीं ज्यादा संपत्ति बनाई है। इसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया गया था। राज्य सरकार के निर्देश पर इस मामले की जांच उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट की लखनऊ सेक्टर टीम कर रही है।

घर में मिला 13 किलो सोना 

लखनऊ के अलीगंज स्थित चंद्रलोक कॉलोनी में ललित कुमार के घर की तलाशी के दौरान जांच अधिकारियों को घर के अलग-अलग हिस्सों में पैकेटों में छिपाकर रखे गए करीब 1.62 करोड़ रुपये नकद मिले। इसके अलावा टीम ने करीब 13 किलो सोना और 9 किलो चांदी भी बरामद की। सोना बार और गहनों के रूप में मिला, जबकि चांदी बार, बिस्कुट और गहनों के रूप में मिली। सरकार की ओर से अधिकृत वैल्यूअर ने बरामद सोने, चांदी और गहनों की कुल कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी है।

कई जगह घर 

तलाशी के दौरान अधिकारियों को कई चल और अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी मिले। इनमें लखनऊ में कई मकान और प्लॉट, लखनऊ, बाराबंकी और रायबरेली में कृषि भूमि, साथ ही लखनऊ और नोएडा में फ्लैट बुकिंग के कागजात शामिल हैं। इन अचल संपत्तियों की अनुमानित कीमत करीब 13 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच टीम को बैंक जमा, डाकघर की योजनाओं, म्यूचुअल फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में 1 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले।

इसके अलावा घर से एक टोयोटा इनोवा, एक हुंडई i20 कार और एक रिवॉल्वर भी बरामद हुई। अधिकारियों ने जांच के दौरान घर में मौजूद महंगे फर्नीचर और अन्य कीमती सामान की भी सूची तैयार की है।

35 करोड़ की संपत्ति

उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट के मुताबिक, छापेमारी के दौरान बरामद नकदी, सोना-चांदी, गहने, चल-अचल संपत्तियां और निवेश को मिलाकर कुल संपत्ति की कीमत करीब 35 करोड़ रुपये आंकी गई है। विभाग ने बताया कि तलाशी में मिली संदिग्ध और बेहिसाब संपत्ति की जांच की जा रही है। इसे चल रही जांच का हिस्सा बनाया गया है, जिसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बयान के अनुसार, इस सफल छापेमारी को अंजाम देने वाली लखनऊ सेक्टर की विजिलेंस टीम को उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट के पुलिस महानिदेशक (DGP) और निदेशक ने 1 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।

सरकार जल्द नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का कर सकती है ऐलान, जानिए क्या है पूरा प्लान

सरकार नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम का ऐलान कर सकती है। मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने यह बताया। इस बारे में आधिकारिक घोषणा दो हफ्ते के अंदर हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि इस स्कीम के तहत 1,000 टन से ज्यादा सोना आने की उम्मीद है।

नई स्कीम में ज्वेलर्स होंगे कलेक्शन पार्टनर्स

देशभर के ज्वेलर्स को नई स्कीम में बतौर ‘कलेक्शन पार्टनर्स’ शामिल किया जा सकता है। उन्हें परिवारों से गोल्ड डिपॉजिट लेने की इजाजत होगी। पहले सिर्फ बैंकों को इसकी इजाजत थी। ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा, “प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बतौर कलेक्शन पार्टनर्स शामिल किया जा सकता है।”

गोल्ड के इंपोर्ट में कमी लाने में मिल सकती है मदद

देश में ज्वेलर्स से जुड़ी संस्थाओं ने सरकार से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम में बदलाव करने की गुजारिश की है। गोल्ड का इंपोर्ट घटाने के लिए उनका जोर ऐसे सॉल्यूशंस पर है, जिसका खराब असर इस सेक्टर से जुड़े लोगों की रोजीरोटी पर नहीं पड़े। अगर देश में परिवारों में रखा 5 फीसदी सोना भी मॉनेटाइज होता है तो इससे 90 अरब डॉलर की लिक्विडिटी मुमकिन हो सकती है।

पीएम मोदी ने की थी सोना नहीं खरीदने की अपील

हाल में प्रधानमंत्री ने देश के लोगों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। इंडिया दुनिया में सोने की सबसे ज्यादा खपत वाले देशों में शामिल है। भारत में ज्वेलरी के साथ ही सुरक्षित निवेश के लिए लोग सोना खरीदते हैं। ज्वेलरी के खरीदने से सोने का ज्यादा इस्तेमाल नहीं हो पाता है। इसलिए गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम के जरिए काफी सोना आ सकता है।

2015 में हुई थी गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम की शुरुआत

सरकार ने 2015 में गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS) की शुरुआत की थी। इसका मकसद सोने के इंपोर्ट में कमी लाकर करेंट अकाउंट डेफिसिट को घटाना था। इनवेस्टर्स को फिजिकल गोल्ड खरीदने की जगह गोल्ड स्कीम का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। इनवेस्टर्स अपना सोना बैंक लॉकर्स में डिपॉजिट कर 2.25 से 2.5 फीसदी इंटरेस्ट कमा सकते हैं। विड्रॉल के समय इनवेस्टर्स के पास फिजिकल गोल्ड या उसके बराबर पैसा वापस लेने की इजाजत थी।

पुरानी स्कीम में 10 सालों में सिर्फ 38 टन सोना आया

स्कीम की शुरुआत के 10 साल बाद तक सिर्फ 38 टन सोना ही आ सका। यह इंडिया में परिवारों के पास रखे कुल सोना का बहुत कम हिस्सा है। इंडिया में परिवारों के पास 25,000 टन सोना होने का अनुमान है। सरकार ने स्कीम में मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म डिपॉजिट रोक दी थी। इस स्कीम में इनवेस्टर्स को इंटरेस्ट का पेमेंट सरकार करती है। इस वजह से यह स्कीम सरकार के लिए नुकसानदेह रही।

पुरानी स्कीम में सरकार को उठाना पड़ा लॉस

ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भाविक पटेल ने कहा, “आखिर में सरकार को इस स्कीम में लॉस उठाना पड़ा। सरकार को सोने की कीमतों में आए तेजी का बोझ उठाना पड़ता था। साथ ही उसे इनवेस्टर्स को सालाना 2 फीसदी इंटरेस्ट चुकाना पड़ता था।” यह स्कीम हेज्ड (Hedged) नहीं थी, जिससे विड्रॉल के समय सरकार को सोने की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उठाना पड़ता था।

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इन वजहों से असफल रही पुरानी स्कीम

इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का मानना है कि स्ट्रक्चरल वजहों से गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम विफल रही। AIJGF ने कहा कि इस स्कीम में दिलचस्पी दिखाने के लिए बैंकों को किसी तरह के इनसेंटिव की व्यवस्था नहीं थी। नई गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से गोल्ड के इंपोर्ट पर निर्भरता में कमी आ सकीत है। साथ ही घरों में बेकार पड़े सोने का इस्तेमाल इकोनॉमी के हित में हो सकेगा।