शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में हुआ है भारी नुकसान? तब भी क्यों जरूरी है ITR फाइल करना, जानें टैक्स छूट का यह सीक्रेट फॉर्मूला

ITR Filing Rules: क्या शेयर बाजार में मुनाफे की बजाय नुकसान होने पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना चाहिए? अक्सर देखा जाता है कि जिन निवेशकों को किसी फाइनेंशियल ईयर के दौरान इक्विटी या म्यूचुअल फंड में घाटा होता है, वे मान लेते हैं कि उन्हें ITR फाइल करने की कोई जरूरत नहीं है। खासकर तब, जब उनकी कोई अन्य टैक्स योग्य आय न हो।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स की मानें तो घाटे वाले साल में आईटीआर फाइल न करना लंबे समय में आपको बहुत भारी पड़ सकता है। अगर आप तय समय सीमा के भीतर अपना रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आप अपने इस कैपिटल लॉस को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड का अधिकार खो देते हैं।

इसका सीधा असर यह होगा कि भविष्य में जब आपको प्रॉफिट होगा, तब आप इस घाटे को उस मुनाफे से एडजस्ट नहीं कर पाएंगे और आपको ज्यादा टैक्स चुकाना पड़ेगा। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि नुकसान के बावजूद आईटीआर भरना क्यों फायदेमंद है।

लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का क्या है नियम?

टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नुकसान के बावजूद समय पर आईटीआर भरने से आपको अपने नुकसान को भविष्य के मुनाफे से एडजस्ट करने की कानूनी अनुमति मिलती है। एनए शाह एसोसिएट्स के टैक्स पार्टनर गोपाल बोहरा बताते हैं कि भले ही किसी टैक्सपेयर की कोई टैक्स देनदारी न बन रही हो और सिर्फ इक्विटी या म्यूचुअल फंड से कैपिटल लॉस हुआ हो, तब भी ड्यू डेट पर या उससे पहले आईटीआर फाइल करना बेहद फायदेमंद है।

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समय पर आईटीआर दाखिल करने से आप इस नुकसान को अगले 8 सालों तक कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। भविष्य के सालों में जब भी आपको शेयरों या म्यूचुअल फंड से कमाई होगी, तो आप इस पुराने घाटे को उस मुनाफे से घटाकर अपनी टैक्स देनदारी को काफी कम या शून्य कर सकते हैं।

क्या इक्विटी, डेट म्यूचुअल फंड और गोल्ड ETF के नियम अलग हैं?

कई निवेशकों को लगता है कि यह नियम सिर्फ शेयरों के लिए है, लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स ने साफ किया है कि निवेश का माध्यम कोई भी हो, नियम सभी के लिए बिल्कुल एक समान हैं। चाहे आपका नुकसान इक्विटी शेयर्स से हुआ हो, इक्विटी म्यूचुअल फंड से हो, डेट म्यूचुअल फंड से हो या फिर गोल्ड ईटीएफ से, अगर आप इस अन-एडजस्टेड लॉस को आगे ले जाना चाहते हैं, तो आपको तय तारीख के भीतर ही आईटीआर भरना होगा। नियत तारीख चूकने पर घाटे को आगे ले जाने की अनुमति नहीं मिलेगी।

इक्विटी के घाटे को क्या दूसरे एसेट्स के मुनाफे से एडजस्ट कर सकते हैं?

हां, नियमों के दायरे में रहकर आप इक्विटी के घाटे को दूसरे कैपिटल एसेट्स से हुए मुनाफे के खिलाफ एडजस्ट कर सकते हैं और अपना टैक्स बचा सकते हैं:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस(STCL): अगर आपको शेयरों से शॉर्ट-टर्म कैपिटल लॉस हुआ है, तो इसे आप शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म दोनों तरह के कैपिटल गेन्स से एडजस्ट कर सकते हैं। फिर चाहे वह मुनाफा शेयरों से हो, प्रॉपर्टी बेचने से हो, गोल्ड से हो या डेट म्यूचुअल फंड से।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल लॉस(LTCL): अगर आपको शेयरों में लंबी अवधि में घाटा हुआ है, तो नियम कड़े हैं। इसे केवल और केवल लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) के खिलाफ ही एडजस्ट किया जा सकता है।

निवेशकों को कौन सा ITR फॉर्म चुनना चाहिए?

सही आईटीआर फॉर्म का चुनाव पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी कमाई या नुकसान के स्रोत क्या हैं:

ITR-2: जो निवेशक शेयरों, म्यूचुअल फंड या अन्य कैपिटल एसेट्स से होने वाले केवल कैपिटल गेन्स या कैपिटल लॉस को रिपोर्ट कर रहे हैं, उन्हें आमतौर पर ITR-2 फॉर्म भरना होता है।

ITR-3: लेकिन, अगर आप शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग करते हैं या फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेड करते हैं, जिसे टैक्स की भाषा में बिजनेस इनकम माना जाता है, तो आपको ITR-3 फॉर्म चुनना चाहिए।

कैपिटल लॉस रिपोर्ट करते समय किन बातों का रखें ध्यान?

टैक्सपेयर्स को हमेशा यह याद रखना चाहिए कि केवल वही नुकसान आगे ले जाए जा सकते हैं जो समय सीमा के भीतर फाइल किए गए रिटर्न में दिखाए गए हों। इसके अलावा, अपने कॉन्ट्रैक्ट नोट्स, ब्रोकर स्टेटमेंट्स और कैपिटल गेन्स स्टेटमेंट्स जैसे सभी जरूरी दस्तावेजों को संभालकर रखें, क्योंकि टैक्स अधिकारियों द्वारा मांगे जाने पर ये सबूत के तौर पर काम आते हैं।

गोपाल बोहरा सलाह देते हैं कि आईटीआर दाखिल करने से पहले निवेशकों को अपने AIS और TIS में दर्ज ट्रांजैक्शन का मिलान अपने ब्रोकर की रिपोर्ट से जरूर कर लेना चाहिए। आईटीआर में शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म नुकसान का सही खुलासा सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में टैक्स छूट का लाभ लेने में कोई रुकावट न आए।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल पर विशेषज्ञों द्वारा व्यक्त किए गए विचार और निवेश टिप्स उनके अपने हैं, वेबसाइट या उसके प्रबंधन के नहीं। मनीकंट्रोल यूजर्स को सलाह देता है कि वे कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट्स से जांच कर लें।

Passport Fee Hike: 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा, सरकार ने बढ़ाई फीस; जानिए नए रेट

Passport Fee Hike: अगर आप नया पासपोर्ट बनवाने या पुराना रिन्यू कराने की सोच रहे हैं, तो आपको जेब ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार रहना चाहिए। 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने के लिए पहले से ज्यादा पैसे देने होंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट नियम, 1980 में बदलाव करते हुए नई फीस तय की है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी।

सरकार ने 20 जून को जारी अधिसूचना में बताया कि पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही पासपोर्ट नियम, 1980 की Schedule-IV को भी नए शुल्क के साथ बदल दिया गया है।

नए पासपोर्ट के लिए कितनी फीस देनी होगी?

अगर आप 36 पेज वाला नया पासपोर्ट बनवाते हैं या उसे दोबारा जारी (Reissue) कराते हैं, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹2,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹1,500 लगते थे। अगर आप तत्काल (Tatkaal) सेवा चुनते हैं, तो अब ₹5,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹3,500 थी।

अगर आपको 60 पेज वाला पासपोर्ट चाहिए, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹3,500 फीस देनी होगी। पहले इसके लिए ₹2,000 लगते थे। वहीं, तत्काल सेवा के लिए अब ₹6,000 देने होंगे। पहले इसकी फीस ₹4,000 थी।

ये नई फीस बालिगों पर लागू होगी। इसके अलावा 15 से 18 साल के वे नाबालिग भी इसी श्रेणी में आएंगे, जो बालिग कैटेगरी में पासपोर्ट के लिए आवेदन करते हैं।

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खोया या खराब पासपोर्ट बनवाना पड़ेगा महंगा

सबसे ज्यादा बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट के रीप्लेसमेंट की फीस में की गई है।

अगर 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो नया पासपोर्ट बनवाने के लिए सामान्य प्रक्रिया में ₹5,000 और तत्काल सेवा में ₹7,500 देने होंगे।

अगर 60 पेज वाला पासपोर्ट रीप्लेस कराना है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹6,000 और तत्काल सेवा में ₹8,500 खर्च होंगे। अगर किसी नाबालिग का 36 पेज वाला पासपोर्ट खो जाता है या खराब हो जाता है, तो सामान्य प्रक्रिया में ₹4,250 और तत्काल सेवा में ₹6,750 फीस देनी होगी।

PCC और दूसरी सेवाओं की फीस भी बदली

पासपोर्ट से जुड़ी दूसरी सेवाएं भी महंगी हो गई हैं। पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए अब ₹750 फीस देनी होगी। वहीं, सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी बनवाने के लिए ₹1,000 देने होंगे।

अगर ये सेवाएं विदेश में ली जाती हैं, तो इमरजेंसी सर्टिफिकेट के लिए 15 अमेरिकी डॉलर और सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी के लिए 50 अमेरिकी डॉलर फीस देनी होगी। इन सेवाओं के लिए तत्काल (Tatkaal) सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।

इन्हें मिलेगी 10% तक की छूट

सरकार ने एक और राहत भी दी है। 8 साल तक के बच्चों और 60 साल से ज्यादा उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को नया पासपोर्ट बनवाने (फ्रेश आवेदन) पर फीस में 10% की छूट मिलेगी। हालांकि, यह छूट पासपोर्ट दोबारा जारी (री-इश्यू) कराने पर नहीं मिलेगी।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है। यह एक यात्रा दस्तावेज है। इसका इस्तेमाल विदेश यात्रा करने और विदेश में धारक की पहचान साबित करने के लिए किया जाता है।

पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं

सरकार ने साफ किया है कि सिर्फ फीस बदली है। पासपोर्ट की वैधता में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बालिगों को जारी होने वाला पासपोर्ट पहले की तरह 10 साल तक वैध रहेगा। वहीं, नाबालिगों का पासपोर्ट 5 साल या 18 साल की उम्र पूरी होने तक, जो भी पहले हो, वैध रहेगा।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

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क्या आपने निपटा लिए टैक्स से जुड़े ये 5 जरूरी काम? जेब पर भारी पड़ सकती है जरा सी भी देरी, ये है डेडलाइंस

ITR Filing 2026: नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और कंपनियों के लिए जुलाई 2026 का महीना टैक्स और कंप्लायंस के लिहाज से बेहद व्यस्त रहने वाला है। इस महीने इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने से लेकर TDS जमा करने जैसी कई महत्वपूर्ण तारीखें आ रही हैं। अगर आप इनमें से किसी भी डेडलाइन को चूक जाते हैं, तो आपको भारी पेनाल्टी, लेट फीस और ब्याज का भुगतान करना पड़ सकता है।

अपनी जेब को नुकसान से बचाने के लिए टैक्स से जुड़ी इन 5 बड़ी डेडलाइंस को पहले ही नोट कर लें और समय रहते अपना काम पूरा करें।

1. 31 जुलाई: ITR फाइल करने की आखिरी तारीख

जुलाई महीने की सबसे बड़ी और सबसे महत्वपूर्ण डेडलाइन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए ITR-1 और ITR-2 भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं को 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न हर हाल में दाखिल करना होगा। इस तारीख के बाद रिटर्न भरने पर भारी लेट फीस देनी होगी और आप अपने नुकसान को अगले सालों के लिए कैरी फॉरवर्ड भी नहीं कर पाएंगे।

2. 7 जुलाई: टीडीएस जमा करने की डेडलाइन

महीने की शुरुआत में ही 7 जुलाई को एक बड़ा कंप्लायंस आ रहा है। जिन करदाताओं या संस्थाओं को असेसिंग ऑफिसर से तिमाही टीडीएस जमा करने की मंजूरी मिली हुई है, उन्हें अप्रैल-जून तिमाही का टीडीएस 7 जुलाई तक जमा करना होगा। इसके अलावा, जून 2026 को समाप्त हुई तिमाही के दौरान मिले विशेष डिक्लेरेशन और फॉर्म्स को अपलोड करने की आखिरी तारीख भी यही है।

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3. 15 जुलाई: इन संस्थाओं के लिए बड़ी रिपोर्टिंग

15 जुलाई की तारीख सरकारी दफ्तरों, स्टॉक एक्सचेंजों, ऑथराइज्ड डीलर्स, आईएफएससी यूनिट्स और गैर-निवासी भारतीय (NRI) निवेशकों के साथ काम करने वाले बिचौलियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इन्हें इस तारीख तक अपनी जरूरी रिपोर्टिंग और टैक्स से जुड़े दस्तावेज जमा करने होंगे।

4. 30 जुलाई: चालान-कम-स्टेटमेंट भरने की अंतिम तिथि

टैक्स कटौती करने वाले लोगों या संस्थाओं के लिए 30 जुलाई की तारीख अहम है। जून के महीने में की गई कुछ खास कैटेगरी की टैक्स कटौतियों से संबंधित चालान-कम-स्टेटमेंट को इस तारीख तक सबमिट करना अनिवार्य है।

5. 31 जुलाई: टीडीएस/टीसीएस रिटर्न और जरूरी फॉर्म्स की बाढ़

31 जुलाई सिर्फ आईटीआर के लिए ही नहीं, बल्कि कई अन्य बड़े टैक्स कंप्लायंस के लिए भी साल का सबसे व्यस्त दिन है:

TDS/TCS तिमाही स्टेटमेंट: सैलरी से टैक्स काटने वाले एम्प्लॉयर्स और टीसीएस कलेक्ट करने वाली संस्थाओं को 30 जून को खत्म हुई तिमाही का रिटर्न 31 जुलाई तक फाइल करना होगा। इसके अलावा, अनिवासियों को किए गए गैर-सैलरी भुगतानों का तिमाही टीडीएस स्टेटमेंट भी इसी दिन तक देना है।

ये खास फॉर्म भरने की भी आखिरी तारीख: अगर आप टैक्स छूट या राहत का दावा करना चाहते हैं, तो 31 जुलाई तक ये फॉर्म जरूर भरें:

  • Form 10E: एरियर या एडवांस सैलरी पर टैक्स रिलीफ पाने के लिए।
  • Form 10BA: धारा 80GG के तहत किराए के मकान पर डिडक्शन का दावा करने के लिए।
  • Form 10H: विदेशी आय पर डिडक्शन का दावा करने वाले लेखकों और पेटेंट धारकों के लिए।
  • Form 10CCE और Form 10CCD: रॉयल्टी से जुड़ी टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए।

एक सबसे जरूरी सलाह ये है कि आखिरी दिनों में इनकम टैक्स पोर्टल पर हैवी ट्रैफिक के कारण आने वाली दिक्कतों से बचने के लिए आज ही अपने पेंडिंग टैक्स कंप्लायंस निपटा लें।

ITR Filing 2026: AI से फाइल कर रहे रिटर्न? एक्सपर्ट्स बोले- डेटा लीक होने से लेकर टैक्स नोटिस आने तक का खतरा

ITR Filing 2026: अब तकरीबन सभी सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ईमेल लिखने से लेकर निवेश और टैक्स प्लानिंग तक में लोग AI टूल्स की मदद ले रहे हैं।

लेकिन टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने के लिए केवल सामान्य AI चैटबॉट्स पर भरोसा करना महंगा पड़ सकता है। खासकर जब मामला कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति, क्रिप्टोकरेंसी या बिजनेस इनकम से जुड़ा हो।

AI पर पूरी तरह भरोसा करना क्यों गलत?

ClearTax के फाउंजर और CEO अर्चित गुप्ता का कहना है कि कई लोग अपना Form 16, सैलरी स्लिप और निवेश से जुड़ी जानकारी सीधे सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर रहे हैं। इससे टैक्स कैलकुलेशन में गलती होने का खतरा रहता है।

उनके मुताबिक, सामान्य AI टूल्स के पास टैक्स नियमों का तय ढांचा नहीं होता। यही वजह है कि एक ही Form 16 अपलोड करने पर अलग-अलग बार अलग टैक्स देनदारी दिख सकती है। अगर रिटर्न में कोई गलती होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी टैक्सपेयर की होगी, AI टूल की नहीं।

डेटा लीक का भी खतरा

रिटर्न फाइल करने में AI के इस्तेमाल से डेटा लीक होने का खतरा भी रहता है। अर्चित गुप्ता के मुताबिक, सार्वजनिक AI प्लेटफॉर्म पर सैलरी स्लिप, PAN, बैंक डिटेल या दूसरे वित्तीय दस्तावेज अपलोड करना सुरक्षित नहीं है। इससे आपकी निजी जानकारी लीक हो सकती है।

उन्होंने कहा कि यह कई कंपनियों की डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी का उल्लंघन भी माना जा सकता है। कुछ मामलों में कर्मचारियों पर कार्रवाई तक की नौबत आ चुकी है।

AI कहां तक मददगार है?

Deloitte India के पार्टनर तरुण गर्ग का कहना है कि AI को टैक्स फाइलिंग का विकल्प नहीं, बल्कि एक सहायक टूल की तरह इस्तेमाल करना चाहिए। यह टैक्स नियम समझाने, जरूरी दस्तावेजों की सूची तैयार करने और पुराने-नए टैक्स रिजीम की तुलना करने में मदद कर सकता है।

हालांकि, AI से तैयार रिटर्न को अंतिम मानने के बजाय ड्राफ्ट की तरह देखें। रिटर्न फाइल करने से पहले सभी जानकारियों का मिलान आधिकारिक दस्तावेजों से जरूर करें।

रिटर्न भरने से पहले ये जांच जरूर करें

  • AIS, TIS और Form 26AS से सभी आय का मिलान करें।
  • सही ITR फॉर्म का चयन हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।
  • पुराना या नया टैक्स रिजीम सही तरीके से चुना गया है या नहीं, यह जांचें।
  • TDS और TCS क्रेडिट का मिलान करें।
  • कैपिटल गेन, क्रिप्टो, विदेशी संपत्ति और अन्य जरूरी खुलासों की दोबारा जांच करें।
  • बैंक अकाउंट प्री-वैलिडेटेड है या नहीं, इसकी पुष्टि करें।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI टैक्स फाइलिंग को आसान जरूर बना सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी हमेशा टैक्सपेयर की ही रहती है। इसलिए ITR फाइल करते समय AI की सलाह पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय आधिकारिक पोर्टल या टैक्स प्रोफेशनल की मदद लेना ज्यादा सुरक्षित रहेगा।

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ITR Filing 2026: क्या पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं?

ITR Filing 2026: कई टैक्सपेयर्स के मन में हमेशा यह सवाल चलता रहता है कि क्या पति और पत्नी अलग-अलग इनकम टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की अंतिम तारीख नजदीक आने के साथ मनीकंट्रोल ने एक्सपर्ट से इस सवाल का जवाब जानने की कोशिश की। दरअसल, इस बारे में एक रीडर ने सवाल पूछा है।

पति और पत्नी अलग रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं

रीडर ने पूछा था कि हम पति और पत्नी दोनों नौकरी करते हैं। मैं इनकम टैक्स की नई रीजीम के तहत सेकेक्ट 87ए के तहत मिलने वाले रिबेट का फायदा उठाना चाहती हूं। लेकिन, मेरे पति सेक्शन 80सी के बेनेफिट्स क्लेम करने के लिए इनकम टैक्स की पुरानी रीजीम में रिटर्न फाइल करना चाहते हैं। क्या हम पति और पत्नी अलग-अलग टैक्स रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं? मनीकंट्रोल ने इस सवाल का जवाब मशहूर टैक्स एक्सपर्ट बलवंत जैन से पूछा।

परिवार का हर सदस्य इनकम टैक्स के लिहाज से अलग इकाई है

जैन ने कहा कि टैक्स के लिहाज से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट परिवार के हर सदस्य को अलग-अलग मानता है। सिर्फ कुछ खास स्थितियों में इनकम की क्लबिंग का प्रावधान है। सामान्य स्थितियों में हर सदस्य अपने हिसाब से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर सकता है। इंडिया में इनकम टैक्स के नियम में परिवार को टैक्स के लिहाज से एक इकाई मानने का प्रावधान नहीं है।

परिवार के सदस्य को कम लायबिलिटी वाली रीजीम चुनने का हक

उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्य जैसे पति और पत्नी इनकम टैक्स की उस रीजीम का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिसमें उनकी टैक्स लायबिलिटी कम आती हो। अगर किसी परिवार में पत्नी नई रीजीम के तहत सेक्शन 87ए के तहत 12 लाख रुपये तक की इनकम पर रिबेट का फायदा उठाना चाहती है तो वह नई रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकती है। पति सेक्शन 80सी के तहत मिलने वाले डिडक्शन का फायदा उठाने के लिए इनकम टैक्स की ओल्ड रीजीम में रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

ओल्ड रीजीम का इस्तेमाल करने के लिए डेडलाइन तक रिटर्न फाइल करना होगा

जैन ने कहा कि ध्यान देने वाली बात यह है कि पति को पुरानी रीजीम के तहत तय अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल कर देना होगा। अगर उनकी सैलरी के अलावा कोई बिजनेस इनकम नहीं है तो रिटर्न फाइल करने के लिए उनकी डेडलाइन 31 जुलाई, 2026 होगी। अगर सैलरी के साथ उनकी कोई बिजनेस इनकम भी है तो वह 31 अगस्त तक रिटर्न फाइल कर सकते हैं।

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डेडलाइन बीत जाने के बाद नई रीजीम में रिटर्न फाइल करना होगा 

उन्होंने कहा कि अगर पति अंतिम तारीख तक रिटर्न फाइल नहीं करते हैं तो ओल्ड टैक्स रीजीम का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। फिर उन्हें नई टैक्स रीजीम के तहत रिटर्न फाइल करना होगा। पति संबंधित वित्त वर्ष से जुड़े होम लोन के इंटरेस्ट पर भी डिडक्शन क्लेम कर सकते है। अगर होम लोन ज्वाइंट है तो वह अपने शेयर पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।