AC Blast: धड़ाधड़ हो रहे हैं AC ब्लास्ट! अगर आपके घर में हो जाए ऐसा हादसा, तो क्या बीमा कंपनी देगी नुकसान का पैसा? जानें

Home Insurance Cover for AC Blast: दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश में इस समय भीषण गर्मी जारी है। इसी तपती गर्मी के बीच आजकल एसी ब्लास्ट और उससे घरों में आग लगने की डरावनी घटनाएं खूब सुनने को मिल रही हैं। हाल ही में नोएडा की एक हाईराइज सोसाइटी की 21वीं मंजिल पर भी एसी ब्लास्ट के कारण भीषण आग लग गई, जिसने लोगों को गहरी चिंता में डाल दिया है।

AC ब्लास्ट की ये घटनाएं जितनी खतरनाक हैं, उतनी ही बड़ी वित्तीय चपत भी लगाती हैं। ऐसे में हर घर के मालिक के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या होम इंश्योरेंस पॉलिसी एसी फटने से होने वाले नुकसान की भरपाई करती है? आइए बताते हैं कि बीमा नियमों के हिसाब से आपको क्लेम मिलेगा या नहीं।

पहले जानिए AC में ब्लास्ट क्यों होता है?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एसी यूनिट में धमाका या आग लगने के दो मुख्य कारण होते हैं:

कंप्रेशर फेल होना: अत्यधिक दबाव और लगातार चलने से जब सबसे ज्यादा प्रेशराइज्ड पार्ट यानी कंप्रेशर ओवरलोड हो जाता है, तो बेहद दुर्लभ मामलों में वह फट सकता है।

शॉर्ट सर्किट: भीषण गर्मी में ओवरहीटिंग के कारण तारों में शॉर्ट सर्किट होता है, जिससे उठी चिंगारी तेजी से पूरी यूनिट और घर में आग फैला देती है।

पॉलिसी में क्या-क्या कवर होता है?

बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस के हेड (कमर्शियल अंडरराइटिंग) गुरदीप सिंह बत्रा के मुताबिक, भारत गृह रक्षा या हाउसहोल्डर पैकेज पॉलिसी जैसी स्टैंडर्ड होम इंश्योरेंस पॉलिसियों में ‘धमाके’ को एक जोखिम माना गया है।

अगर एसी ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट के कारण घर में आग लगती है, तो पॉलिसी के तहत दीवारों, छत, फर्नीचर, फिटिंग्स और घर के अन्य सामान को हुए नुकसान की पूरी भरपाई की जाती है।

इंश्योरेंस टेक प्लेटफॉर्म Securenow.in के मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक बोंदिया के अनुसार, भले ही कुछ नीतियां खुद AC यूनिट के नुकसान को बाहर रख दें, लेकिन आग के कारण आसपास की दीवारों, पेंट या डेकोर को जो नुकसान होगा, उसका क्लेम मिलेगा।

पेच कहां है? खुद AC का पैसा कब मिलेगा?

स्टैंडर्ड होम इंश्योरेंस आग से जले घर का पैसा तो दे देगा, लेकिन खुद फटने वाले एसी का पैसा सामान्य तौर पर नहीं देता है। अगर आप चाहते हैं कि ब्लास्ट हुए एसी या फ्रिज का पैसा भी कंपनी दे, तो आपको अपनी पैकेज पॉलिसी में ‘डोमेस्टिक अप्लाइंस ब्रेकडाउन’ या ‘मशीन ब्रेकडाउन कवर’ का ऐड-ऑन लेना होगा। यह आपके घर के घोषित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आकस्मिक मैकेनिकल या इलेक्ट्रिकल खराबी से सुरक्षा देता है।

क्या कवर नहीं होता?

बीमा लेते समय और क्लेम करते समय इन बातों का ध्यान रखें, क्योंकि इन स्थितियों में क्लेम रिजेक्ट हो सकता है:

घोर लापरवाही या जानबूझकर किया गया नुकसान: अगर एसी की सालों से सर्विस नहीं हुई है या उसे जानबूझकर ऐसी स्थिति में चलाया गया जिससे हादसा हो, तो कंपनी मना कर सकती है।

कीमती सामान: घर में रखा कैश, चेक, जरूरी दस्तावेज, और बिना घोषित किए रखे गए सोने-चांदी के जेवरात या कीमती पत्थर साधारण पॉलिसी में कवर नहीं होते। आग लगने के दौरान या उसके तुरंत बाद होने वाली चोरी भी इसमें शामिल नहीं होती।

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AIIMS CRE-5 recruitment 2026: एम्स में ग्रुप बी और ग्रुप सी के पदों पर बंपर भर्ती, 12वीं पास कर सकते हैं आवेदन

AIIMS CRE-5 recruitment 2026: सरकारी नौकरी की आस लगाए बैठे 12वीं पास उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ग्रुप बी और ग्रुप सी के पदों पर बंपर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। यह उन सभी उम्मीदवारों के लिए अच्छी खबर है जो मेडिकल क्षेत्र में सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे थे। एम्स में ये भर्ती कॉमन रेक्रूटमेंट एग्जामिनेशन-5 (CRE-5) के जरिए की जाएगी। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए एम्स नई दिल्ली ने 28 अलग-अलग संस्थानों में 1484 ग्रुप बी और सी पदों पर CRE-5 भर्ती 2026 निकाली है, जिसके लिए योग्य उम्मीदवार 3 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। खास बात ये है कि 12वीं पास उम्मीदवार भी इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं।

CRE-5 में शामिल हैं ये संस्थान

CRE-5 परीक्षा एक सिंगल-विंडो सिस्टम है, जिसे युवाओं की सहूलियत के लिए बनाया गया है। इसके तहत आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को अलग-अलग एम्स के लिए बार-बार फॉर्म भरने या अलग से फीस चुकाने की कोई जरूरत नहीं है। इसके जरिए उम्मीदवार सिर्फ एक बार परीक्षा देंगे और मेरिट के आधार पर 28 अलग-अलग संस्थानों में अपनी जगह पक्की कर सकते हैं। इन संस्थानों में एम्स नई दिल्ली, भोपाल, पटना, गोरखपुर, ऋषिकेश, बठिंडा, नागपुर के अलावा आईसीएमआर और लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज शामिल हैं।

57 अलग-अलग भर्ती समूह में बांटे गए हैं पद

इस भर्ती में कुल 57 अलग-अलग ग्रुप्स के पद रखे गए हैं। इनमें जूनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ऑफिसर, असिस्टेंट डाइटीशियन, जूनियर इंजीनियर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग ऑफिसर और क्लर्क जैसी ढेरों शानदार पोस्ट शामिल हैं।

जरूरी तारीखें

इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 03 जुलाई 2026 (शाम 5:00 बजे तक) तय की गई है। इसके अलावा, जो लोग पहले से सरकारी नौकरी में हैं, उन्हें अपनी NOC हर हाल में 6 जुलाई तक जमा करनी होगी। फॉर्म स्वीकार होने या नहीं होने का स्टेटस 9 जुलाई 2026 को चेक किया जा सकेगा। वहीं, अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के मुताबिक रहा, तो कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) 25 से 27 जुलाई 2026 के बीच आयोजित किया जाएगा।

कौन कर सकता है अप्लाई?

शैक्षिक योग्यता : हर पद की जिम्मेदारी और योग्यता अलग-अलग तय की गई है। क्लर्क और असिस्टेंट पदों पर 12वीं पास युवाओं से लेकर ग्रेजुएट कर चुके लोग आवेदन कर सकते हैं। इनकी कंप्यूटर पर टाइपिंग स्पीड अच्छी होनी चाहिए। वहीं, टेक्निकल और मेडिकल पदों के लिए खास डिग्रियां मांगी गई हैं। मसलन, फार्मासिस्ट के लिए फार्मेसी में डिप्लोमा होना चाहिए, जूनियर इंजीनियर के लिए संबंधित ट्रेड में ग्रेजुएशन की डिग्री जरूरी है और लैब टेक्नोलॉजिस्ट के लिए बीएससी पास होना लाजमी है।

उम्र सीमा : ज्यादातर ग्रुप-C के पदों के लिए उम्र 18 से 30 साल के बीच रखी गई है। हालांकि, कुछ खास टेक्निकल पदों के लिए यह लिमिट 35 साल तक भी है। सरकारी नियमों के मुताबिक SC/ST उम्मीदवारों को उम्र में 5 साल और OBC (नॉन-क्रीमी लेयर) वालों को 3 साल की छूट दी जाएगी।

आवेदन शुल्क

परीक्षा में शामिल होने के लिए जनरल और OBC वर्ग के उम्मीदवारों को 3,000 रुपये की फीस भरनी होगी, जबकि SC, ST और EWS वालों के लिए यह फीस 2,400 रुपये तय की गई है। दिव्यांगों को फॉर्म की फीस से पूरी तरह छूट दी गई है। परीक्षा में शामिल होने वाले SC/ST उम्मीदवार का आवेदन शुल्क रिजल्ट के बाद उनके बैंक अकाउंट में वापस भेज दिया जाएगा।

आवेदन का तरीका

  • अप्लाई करने के लिए आपको एम्स की ऑफिशियल वेबसाइट www.aiimsexams.ac.in पर जाना होगा।
  • वहां OTR (वन टाइम रजिस्ट्रेशन) पूरा करने के बाद CRE-5 वाले लिंक पर क्लिक करें।
  • अपने सभी जरूरी दस्तावेज, नाम, पढ़ाई की जानकारी, फोटो और सिग्नेचर ध्यान से अपलोड करें।
  • इसके बाद अपनी सहूलियत के हिसाब से परीक्षा केंद्र चुनकर ऑनलाइन फीस जमा कर दें।
  • अंत में फॉर्म को सबमिट करके कन्फर्मेशन स्लिप जरूर डाउनलोड कर लें, ताकि भविष्य में कोई परेशानी न हो।

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Video: 35°C में फ्रांस बेहाल, AC-कूलर की लूट, 51°C में भारत वाले चाय पीकर भी चिल!

ये लो भाई, फ्रांस में जरा सी गर्मी क्या बढ़ी, लोगों ने AC-कूलर की दुकान ही लूट डाली। भारत वाले चिलचिलाती धूप और 51 डिग्री तापमान में भी गरमा गर्म चाय पीकर चिल कर रहे हैं, फिर भले ही वे पसीने में तरबतर क्यों न हो 

बिल्डिंग में 10वीं मंजिल तक गधों की पीठ पर ढो रहे थे भारी सीमेंट-ईंट, बेजुबानों की हालत थी खराब फिर कोर्ट ने ये किया

देहरादून में एक निर्माण स्थल से सामने आई घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। यहां काम कर रहे कुछ जानवरों की हालत इतनी खराब थी कि उन्हें देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए। शिकायत मिलने के बाद पशु कल्याण संगठन और स्थानीय प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और चार गधों और खच्चरों को रेस्क्यू किया गया। ये सभी जानवर लंबे समय से भारी सामान ढोने के लिए मजबूर किए जा रहे थे और उनकी स्थिति बेहद कमजोर और थकी हुई पाई गई। इस घटना ने एक बार फिर जानवरों के प्रति होने वाले व्यवहार और कामकाजी जगहों पर उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों में इस घटना को लेकर गुस्सा और चिंता दोनों देखने को मिल रही है

10 मंजिल तक भारी सामान ढोने को मजबूर थे जानवर

पशु कल्याण संगठन PFA की ट्रस्टी गौरी मौलेखी के अनुसार, इन जानवरों को रोजाना निर्माण सामग्री लेकर करीब 10 मंज़िल तक सीढ़ियां चढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में यह दर्दनाक दृश्य साफ देखा गया, जिसने लोगों को झकझोर दिया।

रेस्क्यू के बाद सामने आई गंभीर हालत

जानवरों की जांच के बाद पशु चिकित्सकों ने बताया कि उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी। वे डिहाइड्रेशन, थकान, जोड़ों की गंभीर समस्या और खुरों की खराब स्थिति से जूझ रहे थे। तुरंत उन्हें “हैप्पी होम सेंचुरी” में इलाज और देखभाल के लिए भेजा गया।

मालिक की याचिका खारिज

जानवरों के मालिक ने अदालत में उनकी वापसी की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि जब तक मामला चल रहा है, तब तक किसी भी क्रूरता के शिकार जानवरों को आरोपी को वापस नहीं दिया जा सकता। जानवर फिलहाल पशु कल्याण संगठन की देखरेख में रहेंगे।

सेंचुरी में मिल रहा नया जीवन

इन जानवरों को अब सुरक्षित माहौल में रखा गया है, जहां उन्हें भोजन, इलाज और आराम दिया जा रहा है। इस सेंचुरी में पहले से ही 250 से अधिक बचाए गए जानवर रह रहे हैं।

लोगों में गुस्सा और भावनात्मक प्रतिक्रिया

इस घटना के सामने आने के बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर प्रतिक्रिया दी। कई यूजर्स ने इस क्रूरता की निंदा की और जानवरों को बचाने वालों का धन्यवाद किया। लोगों ने ऐसे मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने की भी मांग की।

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Monsoon Fish Alert: इन 5 मछलियों में छिपे हो सकते हैं जहरीले तत्व, किडनी और हार्ट पर पड़ सकता है असर

बरसात के मौसम में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर फूड पॉइजनिंग का। इस समय वातावरण में नमी और गंदगी बढ़ने के साथ-साथ पानी के स्रोत भी आसानी से दूषित हो जाते हैं। नदियों, झीलों और समुद्री पानी में मौजूद प्रदूषण सीधे तौर पर जलीय जीवन पर असर डालता है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव मछलियों और समुद्री भोजन की गुणवत्ता पर देखा जाता है। दूषित पानी में रहने वाली मछलियां कई तरह के हानिकारक तत्व अपने शरीर में जमा कर सकती हैं, जो आगे चलकर इंसानों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन जाते हैं। इसलिए मानसून के दौरान खानपान को लेकर अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, ताकि संक्रमण और बीमारियों से बचा जा सके।

पानी में घुलते हैं खतरनाक धातु तत्व

औद्योगिक कचरे, खनन और प्रदूषण की वजह से पानी में पारा (Mercury), सीसा (Lead) और कैडमियम जैसी भारी धातुएं मिल जाती हैं। मछलियां इन्हें अपने गलफड़ों, पानी और छोटे जीवों के जरिए शरीर में ले लेती हैं।

खाने की चेन से बढ़ता है खतरा

छोटी मछलियां और जलीय पौधे इन धातुओं को पहले ही अपने अंदर जमा कर लेते हैं। जब बड़ी शिकारी मछलियां इन्हें खाती हैं, तो उनके शरीर में इन धातुओं की मात्रा और बढ़ जाती है।

पारा सबसे ज्यादा खतरनाक

पारा मछलियों की मांसपेशियों में जमा हो जाता है, जो इंसान खाते हैं। शार्क, स्वोर्डफिश और टूना जैसी बड़ी मछलियों में इसका स्तर ज्यादा पाया जाता है। यह दिमाग, नसों और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है और बच्चों के विकास पर भी असर डाल सकता है। इसे पकाने से भी हटाया नहीं जा सकता।

सीसा और कैडमियम का असर

पुरानी पाइपलाइन, खेती और उद्योगों से पानी में सीसा और कैडमियम पहुंचता है। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से किडनी की समस्या, ब्लड प्रेशर, हड्डियों की कमजोरी और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

आर्सेनिक भी बन सकता है खतरा

आर्सेनिक के कुछ रूप बेहद जहरीले होते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े पाए गए हैं। यह त्वचा, फेफड़ों और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।

लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं

इन भारी धातुओं का असर तुरंत नहीं दिखता। धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर थकान, सिरदर्द, पाचन समस्या और तंत्रिका संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकता है, जिसे अक्सर दूसरी बीमारी समझ लिया जाता है।

मछली चुनते समय रखें सावधानी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शार्क, टूना, स्वोर्डफिश और किंग मैकेरल जैसी बड़ी मछलियों का सेवन कम किया जाए। इसके बजाय छोटी ताजा मछलियां चुनना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, खासकर मानसून के समय।

मछली के हर हिस्से में नहीं होता एक जैसा खतरा

मछली के सभी हिस्सों में भारी धातु समान रूप से नहीं होती। लीवर, किडनी और गलफड़ों में इनकी मात्रा ज्यादा हो सकती है, जबकि मांस (फिलेट) में अपेक्षाकृत कम स्तर पाया जाता है।

AC की ये सच्चाई जानकर रह जाएंगे हैरान, इंसानों के लिए नहीं हुआ था आविष्कार

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गर्मी बढ़ते ही ज्यादातर लोगों का पहला सहारा एयर कंडीशनर (AC) बन जाता है। घर, ऑफिस, स्कूल, अस्पताल और मॉल जैसी जगहों पर इसके बिना रहना मुश्किल लगता है। आज AC हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस मशीन का इस्तेमाल हम ठंडी हवा के लिए करते हैं, उसका असली मकसद कुछ और था? इसकी शुरुआत इंसानों को आराम देने के लिए नहीं हुई थी। इसके पीछे एक ऐसी दिलचस्प कहानी छिपी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यही वजह है कि AC का इतिहास आज भी लोगों को हैरान कर देता है।

आराम नहीं, एक बड़ी परेशानी का हल था AC

साल 1902 में अमेरिका के युवा इंजीनियर विलिस कैरियर ने आधुनिक एयर कंडीशनर तैयार किया। उस समय एक प्रिंटिंग कंपनी को गर्मी और नमी की वजह से बड़ी दिक्कत हो रही थी। कागज बार-बार फैल और सिकुड़ रहा था, जिससे रंगों की छपाई खराब हो जाती थी।

ऐसे मिला इस समस्या का समाधान

विलिस कैरियर ने ऐसी मशीन बनाई जो कमरे का तापमान और नमी दोनों को नियंत्रित कर सकती थी। मशीन ठंडे पानी से भरी धातु की पाइपों के जरिए हवा को ठंडा करती थी। इससे हवा की नमी कम हो जाती थी और कागज अपनी सही स्थिति में रहता था। इसके बाद प्रिंटिंग का काम आसानी से होने लगा।

कई साल तक फैक्ट्रियों तक ही सीमित रहा AC

शुरुआत में इस तकनीक का इस्तेमाल सिर्फ उन उद्योगों में किया गया, जहां नमी नियंत्रित रखना जरूरी था। इसमें कपड़ा, तंबाकू, फिल्म और फूड प्रोसेसिंग जैसी फैक्ट्रियां शामिल थीं। उस समय AC आम लोगों की पहुंच से काफी दूर था।

फिर घरों और ऑफिसों तक पहुंचा AC

करीब दो दशक बाद एयर कंडीशनर का इस्तेमाल सिनेमाघरों, बड़े स्टोर और सरकारी इमारतों में शुरू हुआ। धीरे-धीरे यह तकनीक घरों और दफ्तरों तक पहुंच गई। आज AC सिर्फ आराम का साधन नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है।