Monsoon Fish Alert: इन 5 मछलियों में छिपे हो सकते हैं जहरीले तत्व, किडनी और हार्ट पर पड़ सकता है असर

बरसात के मौसम में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, खासकर फूड पॉइजनिंग का। इस समय वातावरण में नमी और गंदगी बढ़ने के साथ-साथ पानी के स्रोत भी आसानी से दूषित हो जाते हैं। नदियों, झीलों और समुद्री पानी में मौजूद प्रदूषण सीधे तौर पर जलीय जीवन पर असर डालता है। इसका सबसे बड़ा प्रभाव मछलियों और समुद्री भोजन की गुणवत्ता पर देखा जाता है। दूषित पानी में रहने वाली मछलियां कई तरह के हानिकारक तत्व अपने शरीर में जमा कर सकती हैं, जो आगे चलकर इंसानों के स्वास्थ्य के लिए जोखिम बन जाते हैं। इसलिए मानसून के दौरान खानपान को लेकर अधिक सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, ताकि संक्रमण और बीमारियों से बचा जा सके।

पानी में घुलते हैं खतरनाक धातु तत्व

औद्योगिक कचरे, खनन और प्रदूषण की वजह से पानी में पारा (Mercury), सीसा (Lead) और कैडमियम जैसी भारी धातुएं मिल जाती हैं। मछलियां इन्हें अपने गलफड़ों, पानी और छोटे जीवों के जरिए शरीर में ले लेती हैं।

खाने की चेन से बढ़ता है खतरा

छोटी मछलियां और जलीय पौधे इन धातुओं को पहले ही अपने अंदर जमा कर लेते हैं। जब बड़ी शिकारी मछलियां इन्हें खाती हैं, तो उनके शरीर में इन धातुओं की मात्रा और बढ़ जाती है।

पारा सबसे ज्यादा खतरनाक

पारा मछलियों की मांसपेशियों में जमा हो जाता है, जो इंसान खाते हैं। शार्क, स्वोर्डफिश और टूना जैसी बड़ी मछलियों में इसका स्तर ज्यादा पाया जाता है। यह दिमाग, नसों और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है और बच्चों के विकास पर भी असर डाल सकता है। इसे पकाने से भी हटाया नहीं जा सकता।

सीसा और कैडमियम का असर

पुरानी पाइपलाइन, खेती और उद्योगों से पानी में सीसा और कैडमियम पहुंचता है। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से किडनी की समस्या, ब्लड प्रेशर, हड्डियों की कमजोरी और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

आर्सेनिक भी बन सकता है खतरा

आर्सेनिक के कुछ रूप बेहद जहरीले होते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जुड़े पाए गए हैं। यह त्वचा, फेफड़ों और अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।

लक्षण धीरे-धीरे दिखाई देते हैं

इन भारी धातुओं का असर तुरंत नहीं दिखता। धीरे-धीरे शरीर में जमा होकर थकान, सिरदर्द, पाचन समस्या और तंत्रिका संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकता है, जिसे अक्सर दूसरी बीमारी समझ लिया जाता है।

मछली चुनते समय रखें सावधानी

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शार्क, टूना, स्वोर्डफिश और किंग मैकेरल जैसी बड़ी मछलियों का सेवन कम किया जाए। इसके बजाय छोटी ताजा मछलियां चुनना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है, खासकर मानसून के समय।

मछली के हर हिस्से में नहीं होता एक जैसा खतरा

मछली के सभी हिस्सों में भारी धातु समान रूप से नहीं होती। लीवर, किडनी और गलफड़ों में इनकी मात्रा ज्यादा हो सकती है, जबकि मांस (फिलेट) में अपेक्षाकृत कम स्तर पाया जाता है।

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