क्या सीजेपी की देखादेखी युवाओं के मुद्दे उठा रही है कांग्रेस

Gen Z  and Rahul Gandhi

आदर्श शर्मा

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक पिटीशन लॉन्च की है, जिसमें वे छात्र-छात्राओं से पूछ रहे हैं कि वे भारत की शिक्षा प्रणाली को 10 में से कितने नंबर देंगे। इसमें यह भी पूछा गया कि शिक्षा प्रणाली किस मामले में उनके लिए बेकार साबित हुई है। इसके विकल्पों में बढ़ती फीस, परीक्षा का दबाव, पेपर लीक, बेकार पाठ्यक्रम और शिक्षा के कमजोर बुनियादी ढांचे जैसे विकल्प दिए गए हैं। ALSO READ: 'कॉकरोच जनता पार्टी': सोशल मीडिया पर धमाल के बाद जमीनी हकीकत

 

यह पिटीशन कांग्रेस के नए ‘छात्रों की गूंज' अभियान का हिस्सा है। कांग्रेस इसे एक “देशव्यापी छात्र आंदोलन” बता रही है, जिसकी मांग “भारत की शोषणकारी शिक्षा प्रणाली को समाप्त करना” है। राजस्थान के कोटा में रैली के साथ इस अभियान की शुरुआत हुई और अगले महीने 10, 11 और 14 जुलाई को इसके तहत इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में रैलियों का आयोजन होगा।

 

कांग्रेस का यह नया अभियान दिखाता है कि भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी युवाओं के मुद्दों को कितनी गंभीरता से ले रही है। इस अभियान की घोषणा कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले प्रदर्शन के करीब 12 दिनों बाद की गई है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के एक बयान के विरोध में बनी सीजेपी भी युवाओं के मुद्दों पर ही विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

 

क्या सीजेपी के नक्शे-कदम पर चल रही है कांग्रेस

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार नीरजा चौधरी का मानना है कि यह कहना गलत होगा कि कांग्रेस, कॉकरोच जनता पार्टी को कॉपी कर रही है। उन्होंने डीडब्ल्यू हिंदी से बातचीत में कहा कि सीजेपी युवाओं के मुद्दों को केंद्र में ले आयी है और अब कांग्रेस उन्हें आगे बढ़ा रही है। वे कहती हैं कि कांग्रेस के पास संगठन है, इसलिए वे हर जगह जाकर रैलियां कर सकते हैं लेकिन सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के लिए ऐसा करना मुश्किल होगा क्योंकि अभी जमीन पर उनका संगठन नहीं है। हालांकि, वे सीजेपी को श्रेय देती हैं कि उसने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही युवाओं की चिंताओं से रूबरू करवाया है।

 

राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक त्रिभुवन की भी यही राय है कि कांग्रेस, सीजेपी की देखादेखी युवाओं के मुद्दों को नहीं उठा रही है। उन्होंने डीडब्ल्यू हिंदी से बातचीत में कहा कि कांग्रेस की छात्र इकाई भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के अध्यक्ष विनोद जाखड़ शुरुआत से ही नीट परीक्षा का मुद्दा उठा रहे हैं और उनके प्रदर्शनों में खूब भीड़ भी जुट रही है। वे कहते हैं कि विनोद जाखड़ खुद युवा हैं और युवाओं के मुद्दों को समझ भी रहे हैं। उनके मुताबिक, कॉकरोच जनता पार्टी के बनने से पहले से ही एनएसयूआई के बैनर तले कांग्रेस के प्रदर्शन जारी थे, लेकिन अब कांग्रेस ने इस मामले में अपनी आक्रामकता बढ़ाई है। ALSO READ: भविष्य की सैन्य ताकत के लिए भारत का स्वदेशी ड्रोन पर जोर

 

क्या सीजेपी को खतरे के रूप में देख रही है कांग्रेस

वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन का मानना है कि कॉकरोच जनता पार्टी के उदय से कांग्रेस को चिंता जरूर हुई है। वे कहते हैं कि कांग्रेस ने युवाओं के मुद्दों पर आक्रामकता इसलिए दिखाई क्योंकि उन्हें लगा कि कहीं उनके वोट या लोग टूटकर उधर न चले जाएं। उनके मुताबिक, कांग्रेस को लगा कि कहीं ऐसा न हो कि वे इस मामले में कुछ न करें और उनके समर्थक सीजेपी के पाले में चले जाएं, इसलिए उन्होंने भी देशव्यापी अभियान की योजना बनाई।

 

हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी खुद को कांग्रेस के प्रतिस्पर्धी के रूप में नहीं देखती है। सीजेपी के प्रवक्ता विजेता दहिया ने डीडब्ल्यू से कहा कि युवाओं के मुद्दों पर कांग्रेस के अभियान को कॉकरोच जनता पार्टी का पूरा समर्थन है। उन्होंने कहा कि यह हर इंसान का लोकतांत्रिक अधिकार है कि देश अच्छे से चले और इसके लिए अगर कांग्रेस अलग से प्रदर्शन कर रही है तो यह बहुत अच्छी बात है।

 

राजनीतिक टिप्पणीकार नीरजा चौधरी सीजेपी को कांग्रेस के लिए खतरे के रूप में नहीं देखती हैं। वे कहती हैं, “सीजेपी एक ऑनलाइन मूवमेंट की तरह है और वे अब एक पार्टी के तौर पर ऑफलाइन होने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन पार्टी बनाना बहुत आसान चीज नहीं होती है।” वे इस मामले में कांग्रेस की तारीफ करते हुए कहती हैं कि कांग्रेस ने इस बार यह अच्छी चीज की है कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी का पल्ला नहीं पकड़ा है।

 

क्या कांग्रेस को इन प्रदर्शनों से फायदा होगा

कोटा में हुई राहुल गांधी की रैली को भारत के पारंपरिक मीडिया खासकर न्यूज चैनलों पर तो बहुत ज्यादा कवरेज नहीं मिली, लेकिन सोशल मीडिया पर इस आयोजन से जुड़ी कई पोस्ट पर खूब प्रतिक्रियाएं आयीं। कांग्रेस ने जुलाई में इलाहाबाद, पटना और दिल्ली में भी ऐसी रैलियां आयोजित करने की योजना बनाई है तो ऐसे में सवाल पूछा जाने लगा है कि क्या कांग्रेस को बड़े स्तर पर युवाओं के मुद्दे उठाने का राजनीतिक फायदा मिलेगा।

 

नीरजा चौधरी कहती हैं कि इस समय यह कहना मुश्किल है कि फायदा मिलेगा या नहीं मिलेगा लेकिन यह इस पर निर्भर करेगा कि कांग्रेस का संगठन कितना मजबूत है, वह कितने उत्साह से सामने आता है और कौन लोग उसका नेतृत्व करते हैं। वे कहती हैं कि यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि कांग्रेस क्या संदेश देती है और युवाओं के सामने क्या विजन पेश करती है।

 

इस सवाल पर त्रिभुवन कहते हैं कि अगर जनता का कोई भी वर्ग सरकार से नाराज होता है, तो विपक्ष को इसका फायदा मिलता ही है। लेकिन वे यह चेतावनी भी देते हैं कि इस तरह के अभियानों का पूरा फायदा उठाने के लिए कांग्रेस को पहले अपनी अंदरूनी गुटबाजी से निपटना होगा। इसके लिए वे राजस्थान का उदाहरण देते हैं, जहां करीब 10 साल गुजरने के बाद भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट का झगड़ा पूरी तरह सुलझा नहीं है।