राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर RSS का सख्त संदेश: ‘दोषियों को मिले कड़ी सजा’, करोड़ों रामभक्तों की आस्था का बताया सवाल

Dattatreya Hosabale on Ram Mandir donation theft

अयोध्या में रामलला मंदिर चढ़ावा चोरी होने की घटना पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कड़ा बयान जारी किया। संघ ने कहा कि यह घटना केवल चोरी का मामला नहीं है, बल्कि इससे करोड़ों राम भक्तों की आस्था और श्रद्धा को गहरा आघात पहुंचा है। ALSO READ: 'राम मंदिर के पैसे से विधायक-सांसद तोड़े जा रहे?' उद्धव ठाकरे का BJP पर बड़ा हमला, 5 जुलाई को 'राम रक्षा आंदोलन' का ऐलान

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने एक बयान जारी कर कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर निर्मित भव्य मंदिर पीढ़ियों के संघर्ष तथा करोड़ों रामभक्तों के समर्पण, त्याग और बलिदान के परिणामस्वरूप संपूर्ण हिंदू समाज की आस्था, श्रद्धा और भक्ति का केंद्र बना है। अयोध्या स्थित श्रीरामलला मंदिर के दानपात्रों में हुई दुर्भाग्यपूर्ण चोरी की घटना ने पूरे समाज और रामभक्तों की भावनाओं तथा आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है। इस घटना से हम सभी अत्यंत दुखी और आक्रोशित हैं।

 

 

दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले

उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के आग्रह पर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया और उसकी सिफारिशों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की। यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिले। ALSO READ: कुंभ मेले से शुरू हुआ था राम मंदिर की दानराशि में गड़बड़ी का खेल, SIT जांच में सामने आईं चौंकाने वाली जानकारी

जल्द खत्म हो भ्रम और अनिश्चितता

होसबोले ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित संपूर्ण हिंदू समाज की यह स्वाभाविक अपेक्षा है कि ट्रस्ट इस अत्यंत निंदनीय घटना को असाधारण गंभीरता से लेते हुए मंदिर के प्रबंधन और संचालन में मौजूद सभी कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाए। यह इसलिए आवश्यक है ताकि अयोध्या के श्रीराम मंदिर के प्रति करोड़ों रामभक्तों की आस्था और श्रद्धा अटूट बनी रहे। वर्तमान में जो भ्रम और अनिश्चितता का वातावरण बना हुआ है, उसका शीघ्र अंत होना चाहिए। इस दिशा में मंदिर प्रबंधन और सरकार द्वारा गठित SIT से सभी आवश्यक पहल किए जाने की अपेक्षा है।

 

उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि बेहतर वित्तीय प्रबंधन, त्रुटिरहित एवं पारदर्शी संचालन व्यवस्था तथा पवित्रता, शुचिता और वास्तविक धार्मिक मूल्यों से युक्त वातावरण के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट हिंदू समाज के विश्वास और श्रद्धा को और अधिक मजबूत करेगा। ALSO READ: राम मंदिर ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं? जानिए सभी सदस्यों के नाम और उनके अधिकार

 

संघ की हिंदू समाज से अपील

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संपूर्ण हिंदू समाज से भी इस कठिन समय में आवश्यक धैर्य और संयम बनाए रखने का आह्वान करता है। साथ ही, वह सभी से अपील करता है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का सहारा लेकर हिंदू धर्म और हिंदू समाज को बदनाम करने की कोशिश कर रही हिंदू-विरोधी और राष्ट्र-विरोधी शक्तियों की साजिशों को विफल करें।

पाकिस्‍तान में भीषण हादसा, गहरी खाई में गिरी बस, 40 यात्रियों की मौत

Bus falls into deep gorge in Pakistan

Horrific road accident in Pakistan : पाकिस्तान में शुक्रवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। खबरों के अनुसार, बलूचिस्तान के शेरानी जिले के धनसार इलाके से निकलकर खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान की ओर जा रही एक तेज रफ्तार यात्री बस गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। भीषण सड़क हादसे को लेकर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जाहिर की और अधिकारियों को घायलों के सर्वोत्तम इलाज का निर्देश दिया है।

 

पाकिस्तान में शुक्रवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हो गया। खबरों के अनुसार, बलूचिस्तान के शेरानी जिले के धनसार इलाके से निकलकर खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान की ओर जा रही एक तेज रफ्तार यात्री बस गहरी खाई में गिर गई। इस हादसे में 40 लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

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क्षमता से ज्यादा भरी थी बस

खबरों के अनुसार, बस पहले से ही यात्रियों से भरी हुई थी। इसके अलावा रास्ते में खराब हुई दूसरी बस के यात्रियों को भी इसी बस में बैठा लिया गया था, जिससे बस क्षमता से ज्यादा भर गई थी। बस में कुल 48 लोग सवार थे। घायलों को झोब के डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर हॉस्पिटल (DHQ) ले जाया गया है। 

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दूसरी बस के कई यात्री थे सवार

बलूचिस्तान सरकार के बयान के मुताबिक, घटना की जांच की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके। इससे पहले शेरानी के डिप्टी कमिश्नर वली खान काकर ने घटना की जगह और अन्य विवरणों की पुष्टि करते हुए बताया कि बस 36 यात्रियों के साथ क्वेटा से निकली थी लेकिन रास्ते में एक और खराब हुई दूसरी बस से कई लोग इसमें सवार हो गए।

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राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने जताया गहरा दुख 

भीषण सड़क हादसे को लेकर राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जाहिर की और अधिकारियों को घायलों के सर्वोत्तम इलाज का निर्देश दिया है। बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती के निर्देश पर हादसे के तुरंत बाद बचाव कार्य शुरू हो गया।

‘राम मंदिर के पैसे से विधायक-सांसद तोड़े जा रहे?’ उद्धव ठाकरे का BJP पर बड़ा हमला, 5 जुलाई को ‘राम रक्षा आंदोलन’ का ऐलान

Uddhav Thackeray on Ram Mandir Donation Row

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राम मंदिर अब किसी और वजह से चर्चा में है। सांसदों और विधायकों को तोड़ा जा रहा है और इस पूरी प्रक्रिया को 'ऑपरेशन' कहा जा रहा है। क्या भाजपा 'ऑपरेशन राम मंदिर' चला रही है? ALSO READ: कुंभ मेले से शुरू हुआ था राम मंदिर की दानराशि में गड़बड़ी का खेल, SIT जांच में सामने आईं चौंकाने वाली जानकारी


उन्होंने कहा कि चोरी तो हो ही रही है और इसके पर्याप्त सबूत भी हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि राम मंदिर से चुराए गए पैसे का इस्तेमाल पार्टियों को तोड़ने के लिए किया जा रहा है। हिंदू अब उन्हें माफ नहीं करेंगे।

 

भाजपा की सत्ता के मूल में राम मंदिर

उद्धव ठाकरे ने कहा कि भाजपा की सत्ता के मूल में राम मंदिर है। 1990 के राम मंदिर आंदोलन में शिवसैनिक भी शामिल थे। उनका आरोप है कि भाजपा ने इन घटनाओं का राजनीतिक लाभ उठाया और अब बेलगाम सत्ता का आनंद ले रही है।

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर लगाए जा रहे आरोपों का उल्लेख करते हुए ठाकरे ने सवाल किया कि क्या कथित रूप से चोरी किया गया धन विपक्षी नेताओं को अपने पाले में लाने के लिए इस्तेमाल किया गया।

 

राम रक्षा आंदोलन का आह्वान

उद्धव ठाकरे ने 5 जुलाई को राम रक्षा आंदोलन का आह्वान किया। उद्धव खुद दादर में होने वाले विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि हम राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसके बाद महाराष्ट्र के सभी प्रमुख राम और हनुमान मंदिरों में 'रामरक्षा महाआरती' का भव्य आयोजन किया जाएगा। पार्टी ने सभी हिंदुत्व समर्थक को आंदोलन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। ALSO READ: राम मंदिर ट्रस्ट में कौन-कौन शामिल हैं? जानिए सभी सदस्यों के नाम और उनके अधिकार

 

शिवसेना यूबीटी में बड़ी टूट के बाद उद्धव ठाकरे के इस कदम पर सभी की नजरें लगी हुई है। हाल ही में 9 में से 6 पार्टी सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे। इसके बाद उसके शिवसेना यूबीटी के व‍र‍िष्‍ठ नेताओं ने दिल्‍ली पहुंचकर लोकसभा स्‍पीकर से मुलाकात की और मांग की कि उनकी पार्टी से टूटकर आने वाले सांसदों के अलग गुट को मान्‍यता नहीं दी जाए।  

edited by : Nrapendra Gupta

भारत की सबसे तेज मिसाइल कौन-सी है? जानिए इसकी ताकत, जिससे चीन और पाकिस्तान की बढ़ी चिंता

BrahMos missile

भारत की सबसे तेज़ मिसाइलों को उनकी श्रेणी (Category) के आधार पर दो भागों में देखा जाता है, क्योंकि क्रूज़ मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल दोनों की गति और तकनीक अलग होती है। इन मिसाइलों को अमेरिका और रशिया के एयर डिफेंस सिस्टम ही पकड़ सकते हैं बाकि किसी भी देश में इन्हें पकड़ने की क्षमता नहीं है। ब्रह्मोस ने ऑपरेशन सिंदूर में अपना दम बता ही दिया है जिसके चलते पूर्वी देशों के अलावा अरब देशों में भी इसकी मांग बढ़ गई है। पाकिस्तान और चीन के लिए यह बेहद ही चिंता का विषय है। 

भारत बना रहा है अग्नि-6, जिसके किसी के पास नहीं होगा तोड़:

अमेरिका में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक दिलचस्प वाकया हुआ था। अमेरिका के रक्षा विभाग (Pentagon) की ब्रीफिंग में एक पाकिस्तानी महिला पत्रकार (तंज़िला खलील) ने अमेरिकी रक्षा सचिव (Defense Secretary) पीट हेगसेथ (Pete Hegseth) से भारत की आगामी मिसाइल 'अग्नि-6' (Agni-VI) को लेकर सवाल पूछा था। पत्रकार ने भारत के लॉन्ग-रेंज मिसाइल प्रोग्राम, विशेषकर अग्नि-6 (Agni-VI) का ज़िक्र करते हुए अमेरिकी रक्षा सचिव को घेरने की कोशिश की। उन्होंने सवाल उठाया कि “भारत की अग्नि-6 मिसाइल की रेंज इतनी ज़्यादा (10,000+ किमी) है कि यह अमेरिका तक भी पहुँच सकती है, तो क्या अमेरिका इसे अपने लिए एक खतरे के रूप में देखता है?”

 

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस सवाल पर पाकिस्तान को बिल्कुल भाव नहीं दिया। उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रणनीतिक और रक्षा संबंधों (India-US Relations) का हवाला देते हुए इस चिंता को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ किया कि भारत और अमेरिका वैश्विक सुरक्षा के लिए मिलकर काम कर रहे हैं और भारत का रक्षा कार्यक्रम उनके लिए कोई खतरा नहीं है।

 

1. सबसे तेज़ क्रूज़ मिसाइल: ब्रह्मोस (BrahMos)

अगर बात क्रूज़ मिसाइल (जो ज़मीन के समानांतर कम ऊंचाई पर उड़ती है) की हो, तो ब्रह्मोस भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है।

रफ़्तार: मैक 2.8 से 3.0 (यानी ध्वनि की गति से लगभग 3 गुना तेज़—करीब 3,400 से 3,700 किमी प्रति घंटा)।

खासियत: इसे थल, नभ और जल (पनडुब्बी और जहाज) कहीं से भी दागा जा सकता है। इसकी सटीक मारक क्षमता और रफ़्तार के कारण दुनिया का कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम इसे आसानी से इंटरसेप्ट (रोक) नहीं पाता।

नोट: भारत और रूस मिलकर इसके अगले वर्ज़न ब्रह्मोस-II (BrahMos-II) पर काम कर रहे हैं, जो एक हाइपरसोनिक मिसाइल होगी और इसकी रफ़्तार मैक 7 से 8 (लगभग 9,800 किमी/घंटा) तक होने की उम्मीद है।

 

लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (LR-AShM)

परिचय: यह भारत की पहली हाइपरसोनिक मिसाइल है, जो देश की रक्षा तकनीक में एक क्रांतिकारी मील का पत्थर है।

रफ़्तार और रेंज: यह मैक 10 की शुरुआती और मैक 5 (6,125 किमी/घंटा) की औसत रफ़्तार से 1,500 किमी दूर मौजूद दुश्मन के युद्धपोतों को तबाह कर सकती है।

तकनीक: यह पारंपरिक मिसाइलों की तरह नहीं चलती, बल्कि पानी पर तैरते पत्थर की तरह हवा में “स्किप” (Atmospheric Skips) करती है। इस अनप्रेडिक्टेबल रास्ते के कारण इसे रडार से ट्रैक करना या मार गिराना नामुमकिन है।

रणनीतिक महत्व: इसके आने से हिंद महासागर में भारत को “सी-डिनायल” (दुश्मन को रोकने) की ताकत मिलेगी। साथ ही, भारत हाइपरसोनिक क्षमता वाले रूस, चीन और अमेरिका जैसे चुनिंदा देशों के एलीट क्लब में शामिल हो गया है।

 

2. सबसे तेज़ बैलिस्टिक मिसाइल: अग्नि-5 (Agni-V)

अगर बात इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) की हो (जो अंतरिक्ष में जाकर वापस नीचे टारगेट पर हमला करती है), तो अग्नी-5 भारत की सबसे तेज़ मिसाइल है।

रफ़्तार: इसकी टॉप स्पीड मैक 24 तक पहुंच जाती है (यानी लगभग 29,400 किमी प्रति घंटा)।

खासियत: यह भारत की सबसे लंबी दूरी (5,000+ किलोमीटर) तक मार करने वाली परमाणु-सक्षम मिसाइल है, जो कश्मीर से कन्याकुमारी तक की दूरी महज 10 से 12 मिनट में तय कर सकती है।

संक्षेप में कहें तो: पैंतरेबाज़ी और अचूक निशाने (Tactical) के मामले में ब्रह्मोस सबसे तेज़ है, जबकि अंतरिक्षीय रफ़्तार और लंबी दूरी (Strategic) के मामले में अग्नि-5 सबसे आगे है।

मुख्यमंत्री योगी के संकल्प से खुशहाल हुई ‘खुशी’ की जिंदगी, इलाज-शिक्षा के बाद अब आय का पक्का इंतजाम

Story of 19 year old Khushi Gupta, Divyang woman who walked from Kanpur to Lucknow

– कभी सुनने-बोलने में असमर्थ थी और परिवार आर्थिक संकट में था, अब इलाज-शिक्षा के अलावा पिता को मिला अपना रोजगार

– जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट परिसर में खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी

– खुशी बोली- ‘थैंक यू योगी जी’, मां ने कहा—योगी जी के आशीर्वाद से अब परिवार की रोजी-रोटी सुरक्षित

Uttar Pradesh News : कभी अपनी जिंदगी में उजाले की एक किरण तलाशते हुए कानपुर से पैदल लखनऊ पहुंची 19 वर्षीय दिव्यांग खुशी गुप्ता की कहानी अब उम्मीद, संवेदना और सुशासन की मिसाल बन चुकी है। जिस बेटी के सामने कभी सुनने-बोलने की दिक्कत थी और जिसका परिवार आर्थिक अभावों से जूझ रहा था, आज उसी परिवार के चेहरे पर खुशी की मुस्कान है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात के बाद शुरू हुई सहायता केवल आश्वासन तक सीमित नहीं रही, बल्कि एक-एक कर खुशी और उसके परिवार के जीवन की हर बड़ी चिंता का समाधान बनती चली गई। शुक्रवार को इस बदलाव की श्रृंखला में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया। कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी के पिता कल्लू गुप्ता को नए ई-रिक्शा की चाबी सौंपी।

 

जिलाधिकारी की पहल पर एनआरजे इलेक्ट्रिक मोटर व्हीकल प्राइवेट लिमिटेड ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के तहत यह ई-रिक्शा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया। वाहन का पंजीकरण खुशी की मां गीता गुप्ता के नाम पर कराया गया है, जिससे परिवार को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका का साधन मिल सके।

 

यह सहायता ऐसे समय मिली है, जब परिवार आर्थिक संकट के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। कल्लू गुप्ता वर्षों से किराये का ई-रिक्शा चलाकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। प्रतिदिन की कमाई का बड़ा हिस्सा वाहन के किराये में चला जाता था और शेष बची मामूली राशि से घर का खर्च चलाना पड़ता था। हाल ही में एक सड़क दुर्घटना में पैर में चोट लगने के कारण उनकी आय का यह साधन भी प्रभावित हो गया।

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परिवार के सामने रोजमर्रा के खर्च और बेटी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ने लगी थी। जैसे ही यह स्थिति जिलाधिकारी के संज्ञान में आई, उन्होंने कल्लू गुप्ता को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की पहल की, जो अब परिवार के लिए आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन गया है।

 

दरअसल, खुशी की संघर्षगाथा पिछले वर्ष उस समय पूरे प्रदेश के सामने आई थी, जब वह अपनी समस्याएं लेकर कानपुर से पैदल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने लखनऊ पहुंची थी। मुख्यमंत्री ने उससे आत्मीयता से मुलाकात की, उसकी पूरी बात सुनी और अधिकारियों को निर्देश दिए कि उसके उपचार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ लगातार उसके जीवन को सामान्य बनाने की दिशा में कार्य किया।

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मुख्यमंत्री योगी के निर्देशों के क्रम में फरवरी 2026 में खुशी का सफल कॉक्लियर इम्प्लांट कराया गया। लंबे समय तक सुनने और बोलने में असमर्थ रही खुशी अब पहले की तुलना में बेहतर सुन और समझ पा रही है। नियमित स्पीच थेरेपी के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं और उसने बोलना भी शुरू कर दिया है। उसकी शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा लखनऊ के मोहान रोड स्थित समेकित विशेष माध्यमिक (आवासीय) विद्यालय में कक्षा-9 में उसका प्रवेश कराया गया है।

 

शुक्रवार को ई-रिक्शा मिलने के बाद कलेक्ट्रेट परिसर का माहौल भी भावुक हो उठा। कभी अपनी बात भी व्यक्त न कर पाने वाली खुशी ने मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा- “थैंक यू योगी जी।” उसकी मां गीता गुप्ता की आंखों में संतोष साफ दिखाई दे रहा था।

उन्होंने कहा, “पहले बेटी के इलाज की चिंता थी, फिर उसकी पढ़ाई की। इन समस्याओं के समाधान के साथ-साथ अब रोजी-रोटी की चिंता भी खत्म हो गई है। योगी जी के आशीर्वाद और प्रशासन के सहयोग से हमारे परिवार को नया जीवन मिला है।”

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जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश था कि खुशी के पुनर्वास में कोई कमी न रहे। उसी सोच के अनुरूप उपचार, शिक्षा और अब परिवार की आजीविका सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि ऐसे परिवारों को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर उपलब्ध कराना है।

कुंभ मेले से शुरू हुआ था राम मंदिर की दानराशि में गड़बड़ी का खेल, SIT जांच में सामने आईं चौंकाने वाली जानकारी

Ram Temple

अयोध्या के राम मंदिर में दानराशि की कथित हेराफेरी की जांच अब एक बड़े वित्तीय और प्रशासनिक सवाल में बदलती दिखाई दे रही है। जांच से जुड़े सूत्रों और विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कथित गड़बड़ियों का सिलसिला 2025 की शुरुआत में आयोजित कुंभ मेले के दौरान अपने चरम पर पहुंचा, जब मंदिर में चढ़ावे की अभूतपूर्व आमद हुई थी।

रिपोर्टों के अनुसार शुरुआती दौर में इसे सीमित स्तर की चोरी माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे दानपेटियों में नकदी का प्रवाह बढ़ा, कथित तौर पर यह एक संगठित ऑपरेशन का रूप लेता गया।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस मामले में साले-बहनोई की जोड़ी— लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा— की भूमिका प्रमुख रूप से सामने आई है। पुलिस का दावा है कि कथित तौर पर चोरी की रकम से संपत्तियां खरीदी गईं और अब तक आधा दर्जन से अधिक संपत्तियों का पता लगाया जा चुका है। जांच का दायरा अब भारतीय स्टेट बैंक के कुछ कर्मचारियों तक भी पहुंच गया है।

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने जांचकर्ताओं को बताया है कि उन्हें कथित चोरी की जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने आने से पहले ही मिल चुकी थी। उनके अनुसार मई के अंतिम सप्ताह में आंतरिक स्तर पर जांच शुरू कर दी गई थी और संबंधित कर्मचारियों को बिना औपचारिक कार्रवाई के संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रखा गया।

हालांकि, इस दावे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो गया है कि यदि कथित गड़बड़ी की जानकारी पहले से थी तो तत्काल पुलिस शिकायत या एफआईआर दर्ज क्यों नहीं कराई गई। जांच के दौरान नियुक्तियों की प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में आ गई है। नकदी गिनने जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए नियुक्त लोगों की जवाबदेही और चयन प्रक्रिया पर अब गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट ने जांच एजेंसियों को बताया है कि नियुक्तियों का फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि इसमें कई स्तरों पर निर्णय लिए गए थे।

इसी बीच राज्य सरकार ने मामले की जांच कर रही एसआईटी को अतिरिक्त 15 दिनों का समय दिया है। वहीं राम मंदिर के रेडियो मेंटेनेंस अधिकारी अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। उनकी जिम्मेदारियों में मंदिर के सीसीटीवी नेटवर्क और वायरलेस संचार व्यवस्था की निगरानी शामिल थी। अब जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि इतनी लंबी अवधि तक कथित गड़बड़ी निगरानी व्यवस्था से कैसे बची रही।

भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी नए सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दानपेटियों से कथित गबन के आरोप में गिरफ्तार लोगों में से अधिकांश सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज़ के पेरोल पर थे, जिसे नकदी प्रबंधन में सहयोग के लिए नियुक्त किया गया था। इससे जांच की कड़ियां ट्रस्ट, बैंकिंग तंत्र, निजी एजेंसी और सुरक्षा निगरानी व्यवस्था तक फैल गई हैं।

इस बीच विश्व हिंदू परिषद ने आरोपियों की पैरवी करने वाले वकीलों पर संभावित प्रतिबंध से जुड़े प्रस्ताव का विरोध किया है और इसे संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ बताया है। मामले ने न्याय व्यवस्था और जनभावनाओं के बीच संतुलन के पुराने प्रश्न को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

राजनीतिक दृष्टि से यह मामला और अधिक संवेदनशील हो जाता है, क्योंकि राम मंदिर केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं, बल्कि पिछले तीन दशकों की भारतीय राजनीति और हिंदुत्व की सबसे महत्वपूर्ण प्रतीकात्मक परियोजनाओं में से एक रहा है। ऐसे में किसी भी वित्तीय अनियमितता के आरोप का असर केवल ट्रस्ट की विश्वसनीयता तक सीमित नहीं रह सकता।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि जांच में गंभीर प्रशासनिक या वित्तीय चूक साबित होती है तो इसका असर उन संस्थाओं और राजनीतिक शक्तियों की छवि पर भी पड़ सकता है, जिन्होंने इस परियोजना को अपने वैचारिक और राजनीतिक अभियान का केंद्रीय बिंदु बनाया था।

विशेष रूप से नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी की पहचान से जुड़े इस प्रतीकात्मक प्रोजेक्ट पर उठ रहे सवाल आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बन सकते हैं। अब सबकी निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों की कथित करतूत था या फिर निगरानी और जवाबदेही की व्यापक विफलता।

चलते ई-रिक्शा को दूर से रोक देता था चीनी BAT-BMS ऐप! सरकार ने तुरंत लिया एक्शन, ऐप स्टोर से हटाने का आदेश

bat bms app ban

ई-रिक्शा को दूर से रोकने वाले दो चीनी ऐप्स अब बंद होंगे। केंद्र सरकार ने BAT-BMS नाम के इन ऐप्स को ऐप स्टोर से हटाने का आदेश दे दिया है। पिछले कुछ दिनों से इन ऐप्स को लेकर लगातार सोशल मीडिया पर चर्चा का बाजार गर्म था। ALSO READ: इंदौर-उज्जैन में ई रिक्‍शा पर 'हाईटेक अटैक', ऐप और ब्लूटूथ से बंद कर रहे ई-रिक्शा, अनलॉक या मदद के बदले हो रही वसूली

 

सरकार ने कहा कि उसे ऐसे दो ऐप के बारे में पता चला था और उन्हें ऐप स्टोर से हटा दिया गया है। आईटी सेक्रेटरी एस. कृष्णन ने जोर देकर कहा कि ऐप स्टोर को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले को उनके सामने उठाएगी ताकि यह पक्का किया जा सके कि नुकसान पहुंचाने वाले ऐप उपलब्ध न हों। बताया जा रहा है कि अगर ऐसे किसी अन्य ऐप का भी इसी तरह दुरुपयोग पाया जाता है, तो उसे भी ब्लॉक किया जाएगा।

 

क्या है BAT-BMS ऐप? 

BAT-BMS एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System) ऐप है, जिसे चीन की कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने डेवलप किया है। यह ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से बैटरी से कनेक्ट होकर अधिकृत यूजर्स को बैटरी की स्थिति देखने और आवश्यकता पड़ने पर बैटरी के डिस्चार्ज सर्किट को ऑन या ऑफ करने की सुविधा देता है।

खबरों के मुताबिक भारत में कुछ कम कीमत वाले ई-रिक्शा की बैटरियों में ब्लूटूथ सुरक्षा या पासवर्ड प्रोटेक्शन नहीं होता। ऐसे में यदि बैटरी का ब्लूटूथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है, तो 10 से 15 मीटर की दूरी के भीतर मौजूद कोई भी व्यक्ति बैटरी से कनेक्ट होने की कोशिश कर सकता है। ALSO READ: BAT-BMS ऐप से ब्लूटूथ के जरिए बंद किए जा रहे ई-रिक्शा! वायरल प्रैंक ने बढ़ाई ड्राइवरों की परेशानी, जानिए क्या है पूरा मामला

 

क्या था इस ऐप का नुकसान?

दावा किया जा रहा है कि कुछ शरारती लोग BAT-BMS नाम के एक चीनी ऐप का इस्तेमाल कर ब्लूटूथ के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा की बिजली सप्लाई बंद कर रहे हैं। इससे बीच सड़क पर ई-रिक्शा अचानक रुक जाते हैं और चालक असमंजस में पड़ जाते हैं। वायरल वीडियो में कुछ युवक ई-रिक्शा का पीछा करते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद वे अपने मोबाइल में BAT-BMS ऐप खोलकर कथित तौर पर 'डिस्चार्ज स्विच' का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाता है। इसके बाद वे ड्राइवर के पास जाकर अनजान बनने का नाटक करते हुए मदद की पेशकश करते हैं।

 

एक अन्य वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग ई-रिक्शा चालक को वाहन बंद होने के बाद करीब 3 किलोमीटर तक रिक्शा धक्का लगाकर ले जाते हुए देखा गया। एक अन्य वीडियो में कथित तौर पर ऐसे ही हरकत करने वाले युवक को लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले करने की चेतावनी दी। कई जगह मारपीट खबरें भी हैं। हालांकि इन वायरल वीडियो और उनमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी घटनाएं वास्तविक हैं या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड की गई हैं।

 

इस वायरल ट्रेंड के बाद ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा तथा बैटरी प्रबंधन प्रणाली की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई थी। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक, बैटरी निर्माताओं को मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित ब्लूटूथ पेयरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए ताकि अनधिकृत लोग बैटरी तक पहुंच न बना सकें।

इंदौर-उज्जैन में ई रिक्‍शा पर ‘हाईटेक अटैक’, ऐप और ब्लूटूथ से बंद कर रहे ई-रिक्शा, अनलॉक या मदद के बदले हो रही वसूली

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इंदौर/उज्जैन: मध्य प्रदेश के इंदौर और उज्जैन शहरों में ई-रिक्शा चालकों के सामने एक अजीब और बेहद परेशान करने वाली मुसीबत खड़ी हो गई है। कुछ शरारती और आपराधिक तत्व एक मोबाइल ऐप और ब्लूटूथ तकनीक का गलत इस्तेमाल कर सिंगल बैटरी वाले ई- रिक्शा को चलते-चलते बंद कर रहे हैं। इस 'डिजिटल खेल' की वजह से सैकड़ों गरीब ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी संकट में आ गई है।

जहां कुछ लोग इसे महज 'मस्ती' के लिए कर रहे हैं, वहीं कुछ शातिर लोग बंद रिक्शे को दोबारा चालू करने के बदले चालकों से पैसों की डिमांड कर रहे हैं। कुछ ऐसे ही मामले उज्‍जैन में सामने आए हैं। इसके बाद उज्‍जैन पुलिस ने ई रिक्‍शा चालकों के लिए गाइडलाइन जारी की है। परेशान चालकों ने अब इस मामले की शिकायत पुलिस से की है और 'वेबदुनिया' के सामने अपना दर्द बयां किया है।

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क्या है पूरा मामला? ब्लूटूथ से थम रहे रिक्शों के पहिए : शहर में अचानक ई-रिक्शा चलते-चलते बंद होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। जांच करने पर पता चला कि यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है।

सिंगल बैटरी रिक्शा निशाने पर: बदमाश खासतौर पर सिंगल बैटरी वाले ई-रिक्शा को निशाना बना रहे हैं। जिन वाहनों में डबल, चार या पांच बैटरी है वे बंद नहीं हो रहे हैं। जबकि सिंगल बैटरी होने की वजह से ब्‍लू टूथ और ऐप से ऐसे रिक्‍शा बंद हो जाते हैं।

ऐप का खेल: एक विशेष मोबाइल ऐप की मदद से इन रिक्शों के ब्लूटूथ सिस्टम को हैक या डिस्कनेक्ट कर दिया जाता है, जिससे रिक्शा वहीं का वहीं ठप हो जाता है।

मस्ती और अवैध वसूली का नया धंधा : ई-रिक्शा चालकों के मुताबिक, इस हरकत के पीछे दो तरह के लोग सक्रिय हैं। कुछ युवा सिर्फ मजे लेने और चालकों को परेशान देखने के लिए ऐप से रिक्शा बंद कर देते हैं। जबकि कुछ लोग रिक्शा बंद करने के बाद बेबस चालक के पास पहुंचते हैं और उसे दोबारा चालू करने (अनलॉक करने) के एवज में पैसों की मांग करते हैं।

धंधा हुआ चौपट, चालकों ने पुलिस से लगाई गुहार : इस अजीबोगरीब परेशानी के कारण इंदौर और उज्जैन के सैकड़ों ई-रिक्शा चालकों का धंधा पूरी तरह चौपट हो गया है। सवारी बीच रास्ते में ही उतर कर चली जाती है, जिससे रोजाना की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है।

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वेबदुनिया से चालकों ने कहा: “हम दिनभर मेहनत करके बमुश्किल दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करते हैं। अब इस नए तरह के फ्रॉड ने हमें सड़क पर ला दिया है। समझ नहीं आता कि रिक्शा अचानक क्यों बंद हो जाता है, बाद में कुछ लोग आकर पैसे मांगते हैं।”

पुलिस में शिकायत दर्ज: बढ़ते मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न को देखते हुए कुछ पीड़ित ई-रिक्शा चालकों ने एकजुट होकर पुलिस को इस बारे में जानकारी दी है, हालांकि अभी चालकों ने मांग की है कि इस ऐप का गलत इस्तेमाल करने वाले और अवैध वसूली करने वाले गिरोह पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।

किस ऐप से बंद हो रहे हैं ई-रिक्शा?
ई-रिक्शा को बीच सड़क पर बंद करने के लिए जिस ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसका नाम “BAT-BMS” (या BAT BMS) है।

यह ऐप क्यों बना था : यह असल में चीन की एक कंपनी (Shenzhen Greenergy Technology) द्वारा बनाया गया ऐप है। इसका काम ई-रिक्शा में लगी लिथियम-आयन बैटरी की सेहत पर नजर रखना है (जैसे- बैटरी कितनी चार्ज है, तापमान क्या है आदि)। इसे BMS (Battery Management System) ऐप कहा जाता है।

कैसे करता है गड़बड़ी : इस ऐप में पहले कोई पासवर्ड या सुरक्षा लॉक (Pin) नहीं था। इसके चलते कोई भी व्यक्ति 10-15 मीटर के दायरे में इस ऐप को खोलकर आस-पास के ई-रिक्शा की बैटरी को ब्लूटूथ के जरिए बिना किसी परमिशन के कनेक्ट कर लेता है। ऐप के अंदर एक 'डिस्चार्ज स्विच' (पावर ऑन/ऑफ) होता है, जिसे दबाते ही बैटरी से मोटर में करंट जाना बंद हो जाता है और रिक्शा अचानक थम जाता है।

वसूली का तरीका: बदमाश जब BAT-BMS ऐप से रिक्शा बंद कर देते हैं, तो वे खुद ही ई-रिक्शा चालक के पास “मददगार” या “मैकेनिक” बनकर पहुंचते हैं। वे चालक को झांसा देते हैं कि गाड़ी चालू करने के लिए कोई विशेष ऐप डाउनलोड करना होगा या उनके पास उसे चालू करने का कोई 'सीक्रेट टूल' है।

अनलॉक का सच: असल में वे उसी BAT-BMS ऐप में जाकर सिर्फ 'ऑन' (ON) का बटन दबा देते हैं और रिक्शा तुरंत चालू हो जाता है। इस छोटे से काम के लिए वे गरीब चालकों से 200 से 300 रुपये या उससे ज्यादा की अवैध वसूली (सर्विस चार्ज के नाम पर) कर रहे हैं।

बचाव के लिए क्या करें : अब इस समस्या के सामने आने के बाद कंपनियों ने इस ऐप में पासवर्ड ऑथेंटिकेशन (Password Protection) अनिवार्य कर दिया है। ई-रिक्शा चालक अपने बैटरी डीलर या कंपनी के अधिकृत सर्विस सेंटर पर जाकर अपनी बैटरी के ब्लूटूथ सिस्टम में पासवर्ड या पिन (PIN) सेट करवा सकते हैं, ताकि कोई अनजान व्यक्ति उनके रिक्शे को कनेक्ट न कर सके। यदि कोई ऐसी हरकत करता मिले, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।

दतिया उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार पर सस्पेंस, टिकट की खींचतान और भितरघात से आसान हो सकती नरोत्तम मिश्रा की राह?

मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव प्रदेश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शामिल हो गया है। प्रदेश की सबसे हाईप्रोफइल सीट माने जाने वाली दतिया में 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। नामांकन प्रक्रिया 6 जुलाई से शुरू हो चुकी है और 13 जुलाई तक प्रत्याशी अपने नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 


दतिया सीट का उपचुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 2023 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन गृह मंत्री और भाजपा के दिग्गज नेता रहे नरोत्तम मिश्रा को अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2008 से लगातार दतिया से विधायक चुने जाते रहे नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र भारती ने 7,500 से अधिक मतों के अंतर से हरा कर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था। अब उपचुनाव में भाजपा इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने की रणनीति बना रही है, जबकि कांग्रेस अपनी जीत बरकरार रखने की चुनौती से जूझ रही है।

 

दतिया में चुनाव की  तारीखों के एलान के साथ अब उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा शुरु हो गई है। बीजेपी की ओर से पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा का सिंगल नाम दावेदारों में है। वहीं कांग्रेस की तरफ से कई नेता अपनी दावेदारी पेश कर रहे है। 

 

कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान-दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसके भीतर ही दिखाई दे रही है। पार्टी में टिकट के कई मजबूत दावेदार सामने हैं, जिससे आंतरिक खींचतान बढ़ गई है। कांग्रेस की ओऱ से टिकट के दावेदारों में पहला नाम 2023 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी से कांग्रेस में अवधेश नायक का है और वह टिकट के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले उन्हें टिकट दिया था, लेकिन दतिया से लेकर भोपाल तक राजेंद्र भारती समर्थकों के विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया गया और राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बनाया गया। ऐसे में यदि इस बार अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

 

वहीं 2023 विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले राजेंद्र भारती इस बार अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। हाल ही में राजेंद्र भारती और अनुज भारती की कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि पार्टी उन्हें मौका दे सकती है। कांग्रेस के एक वर्ग का मानना है कि राजेंद्र भारती को लेकर सहानुभूति का माहौल बन सकता है, जिसका लाभ उनके बेटे को मिल सकता है।

 

इसके अलावा दतिया से विधायक रह चुके घनश्याम सिंह भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। हालांकि 2023 में उन्होंने सेवढ़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद संगठन में उनकी पकड़ और क्षेत्रीय सक्रियता उन्हें दावेदारों की सूची में बनाए हुए है।

 

कांग्रेस की कमजोर कड़ी बन सकती है अंदरूनी कलह- राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी समस्या टिकट को लेकर बढ़ता असंतोष है। यदि पार्टी किसी एक दावेदार को टिकट देती है तो दूसरे खेमे के असंतुष्ट होने की आशंका बनी रहेगी। विशेष रूप से यदि अवधेश नायक को टिकट मिलता है तो राजेंद्र भारती का पूरा समर्थन मिलना आसान नहीं माना जा रहा। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि ऐसी स्थिति में अनुज भारती किसी अन्य दल या निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। ऐसा होने पर कांग्रेस के पारंपरिक वोटों में विभाजन हो सकता है, जिसका सीधा लाभ भाजपा को मिल सकता है।

 

इसके अलावा 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ जो एंटी-इंकम्बेंसी का माहौल था, वह अब पहले जैसा नहीं माना जा रहा। क्षेत्र में विकास और सरकारी योजनाओं को लेकर भाजपा नए सिरे से माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। वहीं सत्ता में होने के कारण प्रशासनिक और संगठनात्मक मजबूती भी भाजपा के पक्ष में महत्वपूर्ण कारक मानी जा रही है।

 

जातीय समीकरण तय करेंगे चुनाव की दिशा- दतिया उपचुनाव में जातीय समीकरण भी निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार विपक्षी वोटों में सेंध लगाने के लिए यादव और कुशवाहा समाज से भी उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं। इससे चुनाव का मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ सकती है। उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी के दमोदर यादव भी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। दमोदर यादव लंबे समय से दतिया क्षेत्र में सक्रिय हैं और चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय राजनीति में उन्हें ऐसे उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है जो विपक्षी मतों में सेंध लगा सकते हैं। हाल के दिनों में उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराए जाने के बाद दतिया की राजनीतिक फिजा में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि उनके चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस के वोटों का बंटवारा हो सकता है। 

 

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की क्यों गई सदस्यता?- कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को जिस मामले में सजा मिली है वह पूरा मामला 27 साल पुराना  साल 1998 का है, जब राजेंद्र भारती जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के अध्यक्ष थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम पर संचालित एक संस्थान की 10 लाख रुपये की एफडी कराई थी, जिस पर तत्कालीन ब्याज दर 13.5 प्रतिशत थी। बाद में जब बैंक ने ब्याज दरें कम कर दीं, तब राजेंद्र भारती ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक के तत्कालीन लिपिक रघुवीर प्रजापति के साथ मिलकर दस्तावेजों में काट-छाँट की और एफडी की समय सीमा को बढ़ाकर 15 साल कर दिया, जिससे पुरानी ब्याज दर का लाभ मिलता रहे। इस मामले का खुलासा साल 2011 में हुआ जब बैंक के तत्कालीन प्रशासक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की मांग की। हालांकि पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज न करने पर मामला जिला न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय तक पहुँचा। बाद में राजेंद्र भारती की मांग को पूरे मामले को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट में ट्रांसफर किए है। गुरुवार को दिल्ली की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 27 साल पुराने बैंक एफडी हेराफेरी और जालसाजी के  मामले में 3 साल की सजा सुनाई है।  कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को दो धराओं में 3–3 साल और एक धारा में 2 साल की सजा सुनाई है। हलांकि कोर्ट ने कांग्रेस विधायक को जमानत भी दे दी थी। कोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा सचिवालय ने राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता खत्म कर दी और अब उपचुनाव हो रहा है।

 

 

Weather Update : उत्‍तर भारत पहुंचा मानसून, मुंबई में बारिश बनी ‘आफत’, जानें देशभर का मौसम

Monsoon reaches several states including Delhi-NCR

Weather Update News : दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार सुबह तेज आंधी और बारिश के बाद आज भी बारिश के आसार हैं। दक्षिण-पश्चिम मानसून कई राज्‍यों में पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में लगातार बारिश हो रही है। बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन कई जगहों पर जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने का खतरा भी बढ़ गया है। मुंबई में मानसून घनघोर बारिश ला रहा है। अंधेरी इलाके में रातभर मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के चलते अंधेरी सब-वे को बंद कर दिया गया है। 

 

अब अगले 2-3 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर, गुजरात, मध्य प्रदेश के बाकी हिस्सों, हरियाणा और पंजाब और राजस्थान के कुछ और इलाकों में आगे बढ़ने के लिए हालात अनुकूल हैं। दिल्ली-एनसीआर में गुरुवार सुबह तेज आंधी और बारिश के बाद आज भी बारिश के आसार हैं।

दक्षिण-पश्चिम मानसून कई राज्‍यों में पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में लगातार बारिश हो रही है। बारिश से लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, लेकिन कई जगहों पर जलभराव, तेज हवाओं और बिजली गिरने का खतरा भी बढ़ गया है।

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मुंबई में भारी बारिश का कहर

मुंबई में मानसून घनघोर बारिश ला रहा है। अंधेरी इलाके में रातभर मूसलाधार बारिश का दौर जारी है। भारी बारिश के चलते अंधेरी सब-वे को बंद कर दिया गया है। साकीनाका की हालिया घटना के बाद मुंबई महानगरपालिका सतर्क हो गई है। मौसम विभाग ने मुंबई के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। मौसम विभाग ने मुंबई, ठाणे और पालघर के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। महाराष्ट्र के मंत्री उदय सामंत ने कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है।

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इन क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट

झारखंड के कई जिलों में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में भी बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में भारी बारिश और भूस्खलन का अलर्ट जारी किया है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के कुछ इलाकों में भी भारी बारिश का अलर्ट मौसम विभाग ने जारी किया है। उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में भी बारिश का अलर्ट है।

इन इलाकों में भूस्खलन की आशंका

केरल में भारी बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है। गुरुवार को मिर्जापुर के चुनार में सबसे ज्यादा 120 मिमी और आजमगढ़ में 114.6 मिमी बारिश दर्ज की गई। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। कुछ इलाकों में भूस्खलन की भी आशंका जताई गई है। 

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इंदौर, भोपाल, उज्जैन में भारी बारिश

मध्य प्रदेश के कई जिलों में गुरुवार शाम झमाझम बारिश हुई, जिसके बाद नदी-नाले उफान पर आ गए। इस दौरान उज्जैन के इंगोरिया थाना क्षेत्र के गांव गांवड़ी लोधा में सहायक सचिव नाले में बह गए, जिनका शुक्रवार सुबह तक कोई सुराग नहीं लग पाया। वहीं एक युवक रपट पुलिया पार करने के दौरान बाइक सहित पानी के तेज बहाव के साथ बह गया।

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गनीमत रही कि वह तैरकर किनारे पहुंचा। भारी बारिश के कारण मध्य प्रदेश के इंदौर में 3 युवक तेज बहाव के नाले में बह गए, जिसमें से 2 युवकों की मौत हो गई, जिसमें से 1 युवक का शव बरामद कर लिया गया और दूसरे का शव पुलिस तलाश रही है। भोपाल में बारिश की वजह से लोग घंटों जाम में फंसे रहे।