AI निगरानी में शांतिपूर्वक संपन्न हुई UPTET-2026 की पहले दिन की परीक्षा, 15 फर्जी अभ्यर्थी पकड़े गए

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शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET-2026) की लिखित परीक्षा तीन दिन 02, 03 व 04 जुलाई 2026 को आयोजित की जा रही है। गुरुवार को पहले दिन  प्रथम पाली पूर्वाह्न 9.30 बजे से 12 बजे तक तथा द्वितीय पाली अपरान्ह 2.30 बजे से 5 बजे तक प्रदेश के 60 जनपदों के 955 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा शांतिपूर्वक, पारदर्शी एवं नकलविहीन वातावरण में संपन्न हुई।

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उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि  परीक्षा के दौरान आयोग में स्थापित एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से उनकी, सदस्यगण, सचिव, परीक्षा नियंत्रक एवं उपसचिव की उपस्थिति में सभी परीक्षा केंद्रों की सघन निगरानी की गई।

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एआई कैमरों के माध्यम से परीक्षार्थियों की गतिविधियों पर सतत दृष्टि रखी गई। एआई की मदद से संदिग्धों की जांच के पश्चात प्रथम पाली में 7 एवं द्वितीय पाली में 8 फर्जी परीक्षार्थी, जो दूसरे परीक्षार्थियों के स्थान पर परीक्षा दे रहे थे, पकड़े गए। इनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही हेतु उन्हें स्थानीय पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त सभी केंद्रों पर परीक्षा सुचारु, शुचितापूर्ण एवं निर्विघ्न रूप से संपन्न हुई।

 

 पहले दिन की दोनों पालियों में कुल 8,07,636 परीक्षार्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 6,84,614 यानी 84.76% अभ्यर्थियों ने प्रतिभाग किया। महिला परीक्षार्थियों की उपस्थिति 84.69% तथा पुरुष परीक्षार्थियों की उपस्थिति 84.86% रही। परीक्षा के सफल संचालन में जिला एवं पुलिस प्रशासन का सक्रिय सहयोग मिला।

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 डॉ. प्रशांत कुमार ने जानकारी दी कि तीन दिवसीय यूपीटीईटी-2026 के तहत 3 जुलाई को भी दो पालियों में तथा 04 जुलाई को एक पाली में परीक्षा आयोजित होगी। उन्होंने कहा कि शेष दो दिनों की परीक्षाएं भी इसी प्रकार एआई निगरानी, शुचिता व सुरक्षा के उच्च मानकों के साथ संपन्न कराई जाएंगी। अभ्यर्थियों से अपील है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं को ही प्रामाणिक मानें।

Indian Navy : भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS त्रिकंड ने अदन की खाड़ी में MV गोल्डन आर्सेनल पर समुद्री डकैती की कोशिश को नाकाम किया

भारतीय नौसेना का अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS Trikand ने अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) में एक समुद्री डकैती की कोशिश का त्वरित और सफलतापूर्वक जवाब दिया। यह घटना 1 जुलाई 2026 को उस समय हुई जब St. Vincent and the Grenadines के झंडे वाले मालवाहक जहाज MV गोल्डन आर्सेनल पर अज्ञात समुद्री लुटेरों ने हमला करने का प्रयास किया। यह जहाज यमन के अदन बंदरगाह से यात्रा कर रहा था और लगभग 300 समुद्री मील उत्तर-पूर्व दिशा में जिबूती के पास इस हमले की सूचना दी गई।

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भारतीय नौसेना ने यह कार्रवाई सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र (IFC-IOR) के समन्वय से शुरू की, जिसके बाद क्षेत्र में तैनात INS त्रिकंड को तुरंत जहाज की ओर भेजा गया।

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हमले के दौरान जहाज पर मौजूद 21 क्रू मेंबरों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल था। हमले में जहाज के ब्रिज सुपर-स्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा, लेकिन सभी चालक दल ने तुरंत जहाज के सुरक्षित “सिटाडेल” क्षेत्र में शरण ली और सुरक्षित रहे। 2 जुलाई 2026 की सुबह INS त्रिकंड की एक बोर्डिंग टीम ने MV गोल्डन आर्सेनल पर पहुंचकर पूरे जहाज की जांच (sanitisation operation) की। जांच में कोई भी संदिग्ध व्यक्ति नहीं मिला।

इसके बाद चालक दल सुरक्षित रूप से बाहर आया और नौसेना कर्मियों के साथ मिलकर जहाज की स्थिति का आकलन किया। स्थिति की निगरानी को और मजबूत करने के लिए भारतीय नौसेना ने P-8I मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट भी तैनात किया, जिसने क्षेत्र में हवाई निगरानी और समुद्री गतिविधियों पर नजर रखी।

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सभी आवश्यक जांच और सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद INS त्रिकंड का एंटी-पायरेसी ऑपरेशन समाप्त कर दिया गया और MV गोल्डन आर्सेनल ने अपनी आगे की यात्रा फिर से शुरू कर दी। भारतीय नौसेना ने दोहराया कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर व्यापारी जहाजों की सुरक्षा, समुद्री डकैती के खिलाफ कार्रवाई और सभी नाविकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

योगी सरकार ने बनवाए 3.31 करोड़ से ज्यादा शौचालय, अब होली और दिवाली पर मुफ्त रिफिल का तोहफा

Yogi government has constructed over 3.31 crore toilets, now comes gift of free refills on Holi and Diwali

– योगी सरकार आने पर पकड़ी केंद्रीय योजनाओं ने रफ्तार, 2017 तक एक भी जिला ओडीएफ नहीं

– पूर्ववर्ती सरकार ने केंद्र को लाभार्थियों की सूची भेजने और मैचिंग ग्रांट जारी करने में ढिलाई बरती

– योगी सरकार ने 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्के आवास उपलब्ध कराए

Chief Minister Yogi Adityanath : प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद आमजन को सभी केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2017 से पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि पिछली सरकारें राजनीतिक कारणों से केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में रोड़े अटकाती थीं। इतना ही नहीं, कई योजनाओं के मिलते-जुलते नाम रखकर लोगों को बरगलाने की भी चेष्टा की जाती थी। नतीजा यह कि उत्तर प्रदेश की जनता मोदी सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहती थी। लेकिन जैसे ही 2017 में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, केंद्र सरकार की योजनाओं पर लगे ताले खुल गए। इससे केंद्र व राज्य, दोनों सरकारों की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचा।         

 

प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीबों को मिला सहारा

केंद्र सरकार ने देश के हर गरीब को पक्का मकान देने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी। हालांकि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना को उत्तर प्रदेश में गति देने के बजाय अपनी समाजवादी आवास योजना और लोहिया ग्रामीण आवास योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था। इसके बाद आरोप लगे कि पूर्ववर्ती सरकार ने केंद्र को लाभार्थियों की सूची भेजने और मैचिंग ग्रांट (राज्य का हिस्सा) जारी करने में ढिलाई बरती।

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स्थिति यह थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2014 से 2017 तक वह सरकार 50 हजार आवास भी नहीं बना पाई। बाद में योगी सरकार आने पर इस कार्य को 'डबल इंजन' की रफ्तार दी गई। योगी सरकार ने 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया है।

 

पीएम फसल बीमा योजना में 6,283 करोड़ से अधिक भुगतान 

किसानों को सूखे, बाढ़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) लॉन्च की थी। इस योजना में राज्य सरकार की ओर से भी प्रीमियम का एक हिस्सा दिया जाना था और राज्य की एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभानी थी। हालांकि 2017 से पहले की सरकार की उदासीनता के कारण करीब 3 प्रतिशत किसानों का ही बीमा हो सका था, जिससे यूपी के किसान केंद्रीय मुआवजे से वंचित रह गए।

वहीं उस समय के दौरान भाजपा शासित राज्यों में जहां 60-70 प्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल चुका था। योगी सरकार में इस योजना के तहत पिछले 9 वर्षों में 79 लाख से अधिक कृषकों को 6,283 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया जा चुका है।

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत 100 प्रतिशत लक्ष्य

2014 में शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन पीएम मोदी के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट्स में एक था, जिसका उद्देश्य देश को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाना था। इस योजना के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए केंद्र से फंड जारी होना था, लेकिन इसके लिए राज्य को उपयोगिता प्रमाण पत्र देना था और अपनी हिस्सेदारी तय करनी थी। पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन में रुचि नहीं दिखाई।

वह इस योजना की ब्रांडिंग के खिलाफ थी, क्योंकि वह इसे भाजपा की योजना मानती थे। नतीजा यह हुआ कि 2014-2017 के बीच यूपी में शौचालय निर्माण की गति बेहद धीमी रही और राज्य ओडीएफ रैंकिंग में काफी पीछे छूट गया।

 

मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश का ग्रामीण स्वच्छता दायरा महज 35 प्रतिशत के आस-पास ही पहुंच पाया था। वहीं प्रदेश का एक भी जिला पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त घोषित नहीं हो सका था। दूसरी तरफ वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार के आने पर अब तक प्रदेशभर में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 3.31 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है।

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इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश 100 प्रतिशत ओडीएफ राज्य घोषित किया गया। वहीं 94 हजार से अधिक गांव ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के साथ ओडीएफ प्लस घोषित किए गए। यह सब 2017 में लगभग नामुमकिन लग रहा था।

 

उज्जवला योजना में घर-घर पहुंचे गैस सिलेंडर

पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान बेहद कम संख्या में महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन (सिलेंडर व रेगुलेटर) मिले। इनमें भी लगभग 35-40 प्रतिशत परिवारों ने पहला सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरा सिलेंडर नहीं भरवाया, क्योंकि उस वक्त रिफिलिंग पर राज्य सरकार की तरफ से कोई अतिरिक्त वित्तीय मदद या सब्सिडी टॉप-अप नहीं मिलता था।

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दूसरी तरफ योगी सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की लगभग 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का लाभ दिया। इसके साथ ही होली और दीपावली पर दो सिलिंडर मुफ्त रिफिल किए जा रहे हैं।

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, लगातार 7वें साल यूपी में नहीं बढ़ेंगी बिजली की दरें

Yogi government electricity rates: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं, किसानों, मध्यम वर्ग और व्यापारियों को बड़ी आर्थिक राहत दी है। सरकार ने इस वर्ष भी बिजली की दरों में एक पैसे की भी बढ़ोतरी न करने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी उपभोक्ताओं को उसी पुरानी दर पर ही बिजली मिलेगी, जो पिछले सात सालों से लागू है। लगातार सातवें वर्ष बिजली दरें स्थिर रखकर सरकार ने साबित कर दिया है कि उसका हर कदम आम जनता के जीवन को सुगम और खुशहाल बनाने के लिए समर्पित है।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के इस फैसले को जनहित में एक अभूतपूर्व कदम माना जा रहा है। सरकार के इस निर्णय से सीधे तौर पर प्रदेश के ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं, मध्यमवर्गीय परिवारों, अन्नदाता किसानों और छोटे-बड़े उद्योगों को भारी बचत होगी।

बिजली आपूर्ति में भी ऐतिहासिक सुधार

योगी सरकार ने न केवल जेब को राहत दी है, बल्कि बिजली की क्वालिटी और सप्लाई में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि प्रदेश के हर शहर, हर गांव, हर सड़क और हर गली तक 24×7 (चौबीसों घंटे) निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाई जाए। ग्रामीण इलाकों में अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा और निश्चित शेड्यूल पर बिजली मिल रही है, जिससे किसानों को सिंचाई में और बच्चों को पढ़ाई में बड़ी मदद मिल रही है।

बिजली सप्लाई का नया रिकॉर्ड

इस वर्ष पड़ी रिकॉर्डतोड़ गर्मी के बावजूद, प्रदेश सरकार ने बिजली कटौती की नौबत नहीं आने दी। इस सीजन में उत्तर प्रदेश ने विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए 32,673 मेगावाट की अधिकतम मांग को सफलतापूर्वक पूरा किया, जो राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।

 

यूपी के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने एक्स पर कहा कि उत्तर प्रदेश में लगातार सातवें वर्ष भी बिजली की दरें नहीं बढ़ाई गईं। सभी उपभोक्ताओं के लिए वर्ष 2026-27 में भी वही दरें रहेंगी जो सात वर्ष पहले थीं। यह राहत तब दी जा रही है जब राज्य में विद्युत आपूर्ति भी अपने ऐतिहासिक अधिकतम स्तर पर है।

936 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स संवारेंगे प्रदेश के 1 लाख से अधिक युवाओं का भविष्य

AI For All Course Uttar Pradesh: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगारपरक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कुशल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य कौशल विकास निधि (एसएसडीएफ) योजना के अंतर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के दूसरे चरण का लक्ष्य आवंटन जारी कर दिया गया है। 

 

प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्किल इंडिया’ विजन को साकार करते हुए उत्तर प्रदेश आज कौशल विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप युवाओं को टेक-सेवी बनाने के लिए हर बैच में 4 घंटे का 'एआई फॉर ऑल' और सॉफ्ट स्किल मॉड्यूल पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। कोर्सेज की अधिकतम अवधि 900 घंटे तय की गई है और आवासीय सेंटर्स पर रोज कम से कम 8 घंटे की क्लास अनिवार्य होगी।

पारदर्शिता के लिए सीसीटीवी अनिवार्य

पारदर्शिता के लिए पूरे सेंटर पर निर्धारित मानकों के अनुसार सीसीटीवी लगाना अनिवार्य किया गया है, जिससे मुख्यालय से सीधी निगरानी हो सके। साथ ही, युवाओं का सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए हर सेंटर पर रोज एक हिंदी और एक अंग्रेजी अखबार रखना होगा। नए सेंटर्स का उद्घाटन स्थानीय विधायक से कराना अनिवार्य होगा। संस्थाएं केवल एनसीवीईटी/एनक्यूआर पोर्टल पर लिस्टेड जॉब रोल ही चुन सकेंगी और डीपीएमयू द्वारा गहन जांच के बाद ही बैच को मंजूरी दी जाएगी। 

 

योगी सरकार ने कौशल प्रशिक्षण को पूरी तरह पारदर्शी और परिणाममूलक बनाने के लिए इस बार लक्ष्य आवंटन की प्रक्रिया में ‘कौशल दर्पण’ एआई डैशबोर्ड का उपयोग किया है। जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (डीपीएमयू) से प्राप्त केंद्र कैपेसिटी सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर ही सभी 936 प्रदाताओं को लक्ष्य दिए गए हैं।

उन्होंने कहा कि सभी प्रदाताओं को मिशन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवंटित टारगेट पूरा करना और सभी बैचों का अप्रूवल लेना अनिवार्य होगा। आधुनिक उद्योगों की मांग को देखते हुए हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, अपैरल और हैंडीक्राफ्ट्स जैसे न्यू-एज सेक्टर्स को विशेष प्राथमिकता दी गई है। न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाता अनिवार्य रूप से केवल फ्यूचरिस्टिक जॉब रोल में ही प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेंगे।

 

मंत्री ने स्पष्ट किया कि लक्ष्य मिलने का मतलब काम शुरू करना नहीं है। जब तक ट्रेनिंग प्रदाता मिशन के साथ लिखित एग्रीमेंट नहीं कर लेते और उसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक डीपीएमयू बैच बनाने की अनुमति नहीं देगी। मिशन के पास बजट या जरूरत के हिसाब से टारगेट घटाने-बढ़ाने का अधिकार सुरक्षित है। यदि किसी संस्था ने समय पर क्लास शुरू नहीं की या ग्राउंड से कोई शिकायत मिली, तो योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत बिना देर किए उनके खिलाफ सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। 

1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी

मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि कुल 936 प्रशिक्षण प्रदाताओं को 1 लाख से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें 831 निजी, राजकीय व स्टार्ट-अप प्रशिक्षण प्रदाताओं को 91,425 युवाओं तथा 105 औद्योगिक/न्यू-एज प्रशिक्षण प्रदाताओं को 14,650 युवाओं का प्रशिक्षण लक्ष्य दिया गया है। इससे पहले अप्रैल में पहले चरण में 957 ट्रेनिंग प्रोवाइडर्स को 99 हजार से अधिक युवाओं के प्रशिक्षण का लक्ष्य आवंटित किया गया था, जिनका प्रशिक्षण वर्तमान में सुचारू रूप से संचालित हो रहा है।

 

एसएसडीएफ योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को स्थानीय आवश्यकताओं और उद्योगों की मांग के अनुसार रोजगारपरक प्रशिक्षण देना है। ‘कौशल दर्पण’ डैशबोर्ड का उपयोग और एआई फॉर ऑल जैसे न्यू-एज व फ्यूचरिस्टिक मॉड्यूल्स को अनिवार्य करके हम उत्तर प्रदेश के युवाओं को भविष्य के वैश्विक बाजारों के लिए तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि चयनित संस्थाओं को हर हाल में 01 अगस्त, 2026 से कक्षाएं शुरू करनी होंगी। इसके लिए 17-चरणों का कड़ा टाइम-टेबल जारी किया गया है, जिसमें सेंटर सिलेक्शन, सत्यापन, जागरूकता कैंप, बैच अप्रूवल से लेकर प्लेसमेंट तक की समय-सीमा तय है। कोर्स पूरा होने के बाद केवल 70% या अधिक उपस्थिति वाले छात्रों को ही रोजगार मेले में बैठने का मौका मिलेगा और रिजल्ट के 90 दिनों के भीतर प्लेसमेंट कराना होगा। नौकरी मिलने के बाद भी 365 दिनों तक ट्रैकिंग की जाएगी।

ये हैं 2026 के Top 7 सबसे प्रैक्टिकल और पैसा वसूल Electric Scooters

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Best Electric Scooter in India 2026: भारत में पेट्रोल की कीमतें और जेब का खर्च दोनों ही आसमान छू रहे हैं। ऐसे में अगर आप भी 2026 में एक ऐसा इलेक्ट्रिक स्कूटर (EV Scooter) ढूंढ रहे हैं जो न सिर्फ आपके बजट में हो, बल्कि लंबी रेंज, दमदार बूट स्पेस और बेहतरीन रिलायबिलिटी (भरोसा) भी दे, तो आप बिल्कुल सही जगह आए हैं।

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अगर आप भी ओला के बड़े-बड़े विज्ञापनों या नए नवेले चीनी ब्रांड्स के चमकीले फीचर्स देखकर कन्फ्यूज हो चुके हैं, तो रुकिए! एक गलत फैसला आपके हजारों रुपये डुबा सकता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं भारत के Top 7 Most Practical Electric Scooters, जिन्हें उनके रियल-वर्ल्ड परफॉर्मेंस और वैल्यू फॉर मनी के आधार पर चुना गया है।

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Quick Comparison  

इलेक्ट्रिक स्कूटर शुरुआती ऑन-रोड कीमत (लगभग) रियल-वर्ल्ड रेंज (True Range) सबसे बेस्ट किसके लिए है?

  • Ather Rizta ₹1.20 – 1.28 Lakh 110-125 km परिवार और कम्फर्ट के लिए
  • TVS iQube ₹1.13 – 1.40 Lakh 100-145 km रिलायबिलिटी और डेली रनिंग
  • Bajaj Chetak ₹1.11 – 1.35 Lakh 100-125 km मजबूत मेटल बॉडी चाहने वालों के लिए
  • Ola S1 X ₹89,000 – 1.10 Lakh 140-150 km कम बजट में ज्यादा रेंज
  • Hero Vida ₹99,490 Onwards 95-130 km फ्लैट्स में रहने वालों के लिए

 क्या है एक्सपर्ट्‍स की सलाह (E-E-A-T Guide)

1. सर्टिफाइड रेंज बनाम ट्रू रेंज : हमेशा कंपनी द्वारा बताए गए IDC रेंज (लैब टेस्टिंग) पर भरोसा न करें। असली दुनिया में रेंज हमेशा 20-25% कम मिलती है। ऊपर दी गई लिस्ट में हमने केवल True Range ही लिखी है।

2. सर्विस सेंटर चेक करें : बुकिंग करने से पहले यह जरूर देख लें कि आपके शहर या इलाके में उस ब्रांड का फिजिकल सर्विस सेंटर मौजूद है या नहीं।

3. बैटरी वारंटी: सुनिश्चित करें कि आपको कम से कम 3 साल या 30,000 किलोमीटर की वारंटी मिल रही हो।



1. Ather Rizta – अल्टीमेट फैमिली स्कूटर

अगर आपकी प्राथमिकता आराम, बड़ी सीट और फैमिली यूज़ है, तो Ather Rizta इस समय मार्केट का राजा है।

True Range: 105–125 km

बूट स्पेस: 34-लीटर (मार्केट में सबसे बड़ी और चौड़ी सीट)

खासियत : इसकी सीट इतनी बड़ी है कि पूरी फैमिली आराम से बैठ सकती है। साथ ही एथर का सर्विस नेटवर्क और बैटरी सेफ्टी (BMS) इस समय देश में सबसे बेस्ट है।

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2. TVS iQube (ST/S) — भरोसा और सिंपल डिजाइन

बिना किसी तामझाम के एक ऐसा स्कूटर जो बिल्कुल आपकी पुरानी एक्टिवा जैसा फील दे, वो है TVS iQube। 2026 में भी यह भारत के टॉप-3 सबसे ज्यादा बिकने वाले स्कूटर्स में शामिल है।

 True Range: 100–145 km (वेरिएंट के अनुसार)

 खासियत: इसकी राइड क्वालिटी और सस्पेंशन भारतीय गड्ढों वाली सड़कों के लिए एकदम परफेक्ट हैं। बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह सबसे आसान और रिलायबल स्कूटर है।

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3. Bajaj Chetak — लोहे जैसी मजबूती (All-Metal Body)

जहाँ ज्यादातर स्कूटर्स फाइबर और प्लास्टिक बॉडी के साथ आते हैं, वहीं बजाज चेतक अपनी 'इंडस्ट्रक्टिबल' मेटल बॉडी के साथ आता है।

True Range: 110–125 km

खासियत: इसका सॉलिड मेटल पैनल इसे मॉनसून और संकरी गलियों में स्क्रैच और डेंट से बचाता है। इसका क्लासिक लुक और मजबूत चेसिस इसे बेहद प्रैक्टिकल बनाते हैं।

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4. Ola S1 X (4kWh) — बजट में लंबी रेंज का किंग

अगर आपका बजट थोड़ा टाइट है लेकिन आपको रेंज और टॉप स्पीड से समझौता नहीं करना है, तो Ola S1 X एक बेहतरीन ऑप्शन है।

True Range: 140-150 km (रियल वर्ल्ड)

खासियत: ₹1 लाख के बजट के आस-पास मिलने वाला यह इकलौता ऐसा स्कूटर है जो इतनी बड़ी बैटरी और 90 km/h की टॉप स्पीड आसानी से दे देता है। दैनिक कम्यूटर्स के लिए यह बेहद किफायती है।

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5. Hero Vida V1 / VX2 — अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए बेस्ट

अगर आप किसी ऐसी सोसाइटी या फ्लैट में रहते हैं जहाँ पार्किंग एरिया में चार्जिंग सॉकेट की सुविधा नहीं है, तो हीरो की विडा आपके लिए लाइफ-सेवर है।

True Range: 95–130 km

 खासियत : इसमें Removable Battery (निकाली जाने वाली बैटरी) मिलती है। आप बैटरी को निकालकर अपने घर या फ्लैट में ले जाकर आराम से चार्ज कर सकते हैं।
 

6. River Indie — स्कूटर्स का “SUV”

अगर आपको भारी सामान ले जाना होता है या आप रफ एंड टफ यूज के लिए स्कूटर चाहते हैं, तो रिवर इंडी एक अनोखा और बेहद प्रैक्टिकल स्कूटर है।

True Range: 110-120 km

बूट स्पेस: 43-लीटर (विशाल स्टोरेज)

खासियत: इसमें सामान बांधने के लिए पैनियर माउंट्स और फ्रंट फुटपेग्स मिलते हैं। इसके 14-इंच के बड़े व्हील्स इसे उबड़-खाबड़ रास्तों पर भी कमाल का बैलेंस देते हैं।

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7. Honda Activa e — ब्रांड का भरोसा और स्वैपेबल टेक्नोलॉजी

2026 में होंडा ने अपनी लेगेसी को बरकरार रखते हुए एक्टिवा का इलेक्ट्रिक वर्जन उतारा है, जो मार्केट में धूम मचा रहा है।

True Range: 90–102 km

 खासियत: इसमें होंडा की मोबाइल पावर पैक (Swappable Battery) टेक्नोलॉजी मिलती है। यानी बैटरी डिस्चार्ज होने पर आप होंडा के स्टेशन पर जाकर तुरंत दूसरी चार्ज्ड बैटरी बदल सकते हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सौंपे स्वीकृति पत्र, चाबी और टूल किट

Chief Minister Yogi handed over acceptance letters, keys and tool kits to beneficiaries of government schemes

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर में विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को आवास स्वीकृति पत्र, कस्टम हायरिंग सेंटर की चाबी, प्रशस्ति पत्र और ओडीओपी वुड क्राफ्ट टूल किट प्रदान किए। लाभार्थियों को योजनाओं से संबंधित सहायता प्रदान करने के साथ सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में आवास, कृषि और स्वरोजगार योजनाओं के लाभार्थी शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत सहारनपुर के वुड क्राफ्ट से जुड़े कारीगरों को भी टूल किट वितरित की। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर उनके कौशल और आजीविका को बढ़ावा देना है।

लाभार्थियों का विवरण

योजना – रचना (आवास योजना का स्वीकृति पत्र)

मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना – सावित्री (आवास योजना का स्वीकृति पत्र)

मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना – रीना (आवास योजना का स्वीकृति पत्र)

मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना – सौरभ (आवास योजना का स्वीकृति पत्र)

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी विकास – विजय पांडेय (आवास योजना का स्वीकृति पत्र)

प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी विकास – सोमती (आवास योजना का स्वीकृति पत्र)

‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ की चाबी प्रदान की गई – कृष्ण पाल 

नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (2024-25) – अनुपेक्षा (प्रशस्ति पत्र)

नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (2024-25) –अमित कुमार (प्रशस्ति पत्र)

मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना (2025-26) – मोहित कुमार (प्रशस्ति पत्र)

एक जिला एक उत्पाद के तहत काष्ठ कला टूल किट –प्रवीण कुमार

एक जिला एक उत्पाद के तहत काष्ठ कला टूल किट – अशोक कुमार

एक जिला एक उत्पाद के तहत काष्ठ कला टूल किट – अर्सलान अंसारी

एक जिला एक उत्पाद के तहत काष्ठ कला टूल किट – सैद।

कैलाश विजयवर्गीय ने बुलाई बैठक, 3 ही विधायक पहुंचे, सबसे भरोसेमंद भी नहीं आया, सज्‍जन बोले, पितृ पर्वत जाओ यार

Kailash Vijayvargiya

मध्यप्रदेश में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का मामला भोपाल से लेकर इंदौर तक इतना गरमा गया है कि भाजपाई नेताओं ने भी शायद उनसे फिलहाल दूरी बनाए रखना ही उचित समझा। खबर है कि आज इंदौर में एआईसीटीएसएल कार्यालय पर विजयवर्गीय ने इंदौर के सभी विधायकों के साथ सांसद, महापौर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी बुलाया था, लेकिन इस बैठक में सिर्फ तीन विधायक महेन्द्र हार्डिया, गोलू शुक्ला और मधू वर्मा ही पहुंचे।

जबकि मंत्री तुलसी सिलावट के अलावा उनके खास कहे जाने वाले रमेश मेंदोला से लेकर विधायक मालिनी गौड़, उषा ठाकुर, मनोज पटेल सहित अन्य नेता बैठक में पहुंचे ही नहीं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव के बारे में खबर मिली कि वे किसी विवाह समारोह के चलते खरगोन गए थे। उनका कहना है कि बैठक के समय लौटने के प्रयास थे, लेकिन वे जाम में फंस गए।

बता दें कि बैठक में अनुपस्थिति का कारण मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखे गए एक कथित पत्र को बताया जा रहा है। इस कथित 'चिट्ठी बम' में विजयवर्गीय ने ढाई साल से उपेक्षा और असहयोग का आरोप लगाया था। इसी राजनीतिक खींचतान के चलते मेयर पुष्यमित्र भार्गव सहित मालिनी गौड़, मनोज पटेल, उषा ठाकुर और रमेश मेंदोला जैसे कई दिग्गज नेताओं ने बैठक से दूरी बनाए रखी।

इंदौर विकास का आयोजन भी टला : उधर इंदौर के विकास को लेकर शहर में 3 जुलाई को होने वाला कार्यक्रम टल गया है। इस आयोजन में इंदौर के विकास को लेकर कई तरह के विमर्श होना थे। लेकिन ऐनमौके पर यह आयोजन टल गया है। इसकी वजह मुख्यमंत्री मोहन यादव की व्यस्तता बताई जा रही है। हालांकि अब नए सिरे से तिथि की घोषणा की जाएगी। इस आयोजन के लिए ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर तक बुक कर लिया गया था और शहर के गणमान्य नागरिकों को कार्ड भी बांट दिए गए थे।

सज्‍जन वर्मा ने दी विजयवर्गीय को सलाह : इधर पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने कैलाश विजयवर्गीय को नसीहत देते हुए कहा है कि जब कोई पावर नहीं है तो इस्तीफा दे दो यार। एक स्वाभिमानी मर्द की तरह जिओ, इसमें मजा आएगा। अब वो कह रहे हैं कि पत्र कैसे वायरल हो गया। मैंने कैलाश भाई को सलाह दी है कि हाथ कटे ठाकुर के पास दो लोग थे, जय और वीरु, उनकी ड्यूटी लगा दो भाई कि कैसे लीक हुआ। सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि पत्र कैसे लीक हुआ है। जानकर के लीक हुआ है या मुख्यमंत्री ने लीक किया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी कैलाश भाई मैं आपको सलाह देता हूं कि पितृ पर्वत तैयार है। कहां राजनीति के चक्कर में पड़े हो। उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को सलाह दी है कि आराम से पितृ पर्वत जाकर बैठो और भगवान की सेवा करो। आमजनों की सेवा करो। लेकिन एक बात का ध्यान रखना कि वहां चंदे की चोरी नहीं हो। अपना आशियाना और ठिकाना वहां बना लो।

सस्ती इलेक्ट्रिक बाइक RVX, 160KM रेंज, 90kmph टॉप स्पीड और फास्ट चार्जिंग के साथ आई

revolt rvx bike

भारत के इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Revolt Motors ने गुरुवार को अपनी नई इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल RVX लॉन्च कर दी है। कंपनी ने इसकी शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 1.24 लाख रुपए रखी है। यह शुरुआती कीमत PM eDRIVE योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) को शामिल करती है और सीमित समय के लिए उपलब्ध रहेगी। कंपनी के मुताबिक, नई दिल्ली ईवी पॉलिसी और लागू सरकारी प्रोत्साहनों के बाद राजधानी दिल्ली में RVX की प्रभावी एक्स-शोरूम कीमत 94,990 रुपये होगी।

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160KM की रेंज और 90kmph की टॉप स्पीड

 

Revolt RVX में 4kW मिड-ड्राइव परमानेंट मैग्नेट सिंक्रोनस मोटर (PMSM) दी गई है, जो 5.3kW की पीक पावर और 230Nm व्हील टॉर्क जनरेट करती है। कंपनी के अनुसार यह बाइक 0 से 40 किमी/घंटा की रफ्तार केवल 3.9 सेकंड में पकड़ लेती है, जबकि Boost मोड में इसकी अधिकतम गति 90 किमी/घंटा है। इस इलेक्ट्रिक बाइक में 3.24kWh की रिमूवेबल NMC बैटरी दी गई है, जो IDC प्रमाणित 160 किलोमीटर की सिंगल चार्ज रेंज प्रदान करती है। फास्ट चार्जर की मदद से बैटरी 0 से 80 प्रतिशत तक लगभग 80 मिनट में चार्ज हो जाती है।

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चार राइडिंग मोड और कई स्मार्ट फीचर्स

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नई RVX में Boost, Sport, City और Eco समेत चार राइडिंग मोड दिए गए हैं। इसके अलावा बाइक में 3.5-इंच डिजिटल डिस्प्ले, Bluetooth कनेक्टिविटी, OTA (Over-the-Air) सॉफ्टवेयर अपडेट, Geo-Fencing, Hill Hold Assist, Reverse Mode, Walk Assist और Vehicle Tracking जैसे आधुनिक स्मार्ट फीचर्स भी मिलते हैं।

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तीन रंगों में होगी उपलब्ध

Revolt RVX को Pearl Black, Electric Blue और Eclipse Red रंगों में पेश किया गया है। कंपनी की देशभर में मौजूद 200 से अधिक डीलरशिप के जरिए इसकी बिक्री की जाएगी।

पेट्रोल-डीजल के दाम कब घटेंगे? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया पूरा गणित

Petrol Diesel Price

Petrol Diesel Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई गिरावट के बाद भी देश में पेट्रोल और डीजल के दाम क्यों नहीं घट रहे हैं? इस सवाल का जवाब खुद केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया है। उन्होंने साफ किया है कि पश्चिम एशिया संकट के दौरान वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल के कारण देश की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों को 74 हजार 781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में नरमी के बावजूद आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने में थोड़ा वक्त लग रहा है।

कंपनियों ने उठाया भारी नुकसान

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को मीडिया से बातचीत में तेल की कीमतों और सरकारी कंपनियों की मौजूदा स्थिति को लेकर स्थिति स्पष्ट की। पुरी ने बताया कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मची थी।

इस दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे, लेकिन घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए तेल कंपनियों ने कीमतों में आक्रामक बढ़ोतरी नहीं की। लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी (LPG) बेचने के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को 30 जून तक की अवधि में कुल 74,781 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा है। ALSO READ: E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो क्या इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा? सरकार ने बताई सचाई, क्या बोलीं बीमा कंपनियां

क्रूड सस्ता होने पर भी क्यों नहीं घट रहे दाम?

आम जनता के मन में यह सवाल है कि जब पिछले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें कम हुई हैं, तो भारत में ईंधन सस्ता क्यों नहीं हो रहा? इस पर तकनीकी कारण समझाते हुए हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अब निश्चित रूप से कम हुई हैं, लेकिन पेट्रोलियम कंपनियां अभी भी उस कच्चे तेल का प्रसंस्करण कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट के चरम पर होने के दौरान महंगे दामों में खरीदा गया था। ALSO READ: पाकिस्तान समेत में कई देशों में सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल, भारत में क्यों नहीं मिली राहत? जानिए तेल कंपनियां दाम क्यों नहीं घटा रहीं?

 

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि रिफाइनरी कंपनियां ईंधन उत्पादन के लिए कच्चा तेल आमतौर पर कम-से-कम दो महीने पहले बुक या खरीदती हैं। ऐसे में वर्तमान में जिस कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल बनाया जा रहा है, वह मुख्य रूप से अप्रैल या मई की शुरुआत में खरीदा गया था, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर थीं।

आगे क्या होगा?

पेट्रोलियम मंत्री के इस बयान से साफ है कि जैसे ही महंगे कच्चे तेल का पुराना स्टॉक समाप्त होगा और कंपनियां कम कीमत पर खरीदे गए क्रूड का प्रसंस्करण शुरू करेंगी, वैसे ही उनका वित्तीय घाटा कम होने लगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी हफ्तों में वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 75-80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहता है और तेल कंपनियां अपने पिछले नुकसान की भरपाई कर लेती हैं, तो आगामी तिमाहियों में आम जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत देखने को मिल सकती है।