Top News 2 July: अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना, WhatsApp के Username फीचर पर रोक

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Top News 2 July : अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था जम्मू से पहलगाम और बालटाल के लिए रवाना हुआ। राम मंदिर ट्रस्ट पर शिकंजा कसा। सरकार ने WhatsAPP के नए फीचर पर रोक लगाई।  भारत-इंग्लैंड मैच के बीच पहला टी20 मैच बारिश की वजह से रद्द हो गया। बेल्जियम, अमेरिका और इंग्लैंड फीफा वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ 16 में पहुंचे। आज की बड़ी खबरें :

 

अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था रवाना

अमरनाथ यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का पहला जत्था आज जम्मू से रवाना हो गया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सुबह 4 बजे दिखाई हरी झंडी। कल बाबा बर्फानी के दर्शन-पूजन करेंगे श्रद्धालु। यात्रा के सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।

 

राम मंदिर ट्रस्ट पर शिकंजा

चढ़ावे में मिले जेवरात का ब्योरा नहीं मिलने के बाद राम मंदिर दान गबन मामले में ट्रस्ट के 5 साल के ऑडिट का फिर से ऑडिट करने का फैसला किया गया है। शुरुआती जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका को देखते हुए हर वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच की जाएगी।

 

WhatsAPP के नए फीचर पर रोक

केंद्र सरकार ने भारत में WhatsApp के प्रस्तावित Username फीचर को लेकर Meta को नोटिस जारी किया है। सरकार ने कंपनी को निर्देश दिया है कि इस फीचर को भारत में तब तक लॉन्च न किया जाए, जब तक इस संबंध में चल रही परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। Meta से इस नए फीचर पर 3 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा गया है। ALSO READ: WhatsApp के Username फीचर को लेकर क्यों चिंतित है सरकार, भारत में लॉन्च पर फिलहाल रोक, Meta को नोटिस, 3 दिन में मांगा जवाब

 

बारिश में धुला भारत-इंग्लैंड मैच

भारत और इंग्लैंड के बीच पहला टी20 मैच बेनतीजा रहा। इस मैच में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 189 रन बनाए। बारिश के कारण इंग्लैंड की पारी शुरू नहीं हो सकी और अंतत: मैच को रद्द करना पड़ा।

 

बेल्जियम, अमेरिका और इंग्लैंड अगले दौर में

बेल्जियम ने सेनेगल को 3-2 से हराकर फीफा विश्व कप में राउंड ऑफ 16 में प्रवेश किया। 2 गोल से पिछड़ने के बाद रूडी गार्सिया की टीम ने मैच में जबरदस्त वापसी की। अमेरिका और इंग्लैंड भी अगले दौर में पहुंचे। 

 

25,000 से कम कीमत वाले स्मार्टफोन होंगे सस्ते, GSTघटाकर 5% करने की सिफारिश

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अगर आप स्मार्टफोन खरीदने वाले हैं तो आपके लिए खुशखबर है। 25,000 रुपए से कम कीमत वाले स्मार्टफोन्स पर GST घटाकर 5 प्रतिशत किए जाने की सिफारिश की गई है, जबकि महंगे डिवाइसों पर 18 प्रतिशत की दर बरकरार रखी जा सकती है। 

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खबरों के मुताबिक किफायती स्मार्टफोन्स पर लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) ढांचे की समीक्षा की मांग की गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में लागू 18 प्रतिशत की समान GST दर अब भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में स्मार्टफोन की बदलती भूमिका को सही तरीके से नहीं दर्शाती।

 

 रिचर्स के मुताबिक इस तरह की अलग-अलग कर संरचना से पहली बार फोन खरीदने वाले और कीमत के प्रति संवेदनशील उपभोक्ताओं के लिए स्मार्टफोन सस्ते हो सकते हैं। इससे सरकार के ‘डिजिटल इंडिया’, वित्तीय समावेशन और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के लक्ष्यों को भी समर्थन मिलेगा।

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 25,000 रुपए से कम कीमत वाला स्मार्टफोन सेगमेंट भारत की लगभग दो-तिहाई हैंडसेट शिपमेंट का प्रतिनिधित्व करता है। यह मुख्य रूप से पहली बार खरीदने वाले ग्राहकों, ग्रामीण परिवारों, महिलाओं, छात्रों और कम आय वर्ग के उपभोक्ताओं को लक्षित करता है। स्मार्टफोन को अब केवल वैकल्पिक उपभोक्ता वस्तु नहीं, बल्कि  पहली डिजिटल पहुंच के रूप में देखा जाना चाहिए। साथ ही कहा गया कि भारत में स्मार्टफोन्स पर कई समान इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे अधिक अप्रत्यक्ष कर दरों में से एक लागू है।

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 रिपोर्ट में कहा गया है कि एंट्री-लेवल और प्रीमियम स्मार्टफोन्स पर एक ही GST दर लागू होने से डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने वाले वर्ग पर असमान रूप से बोझ पड़ता है।  रिचर्स के मुताबिक लगभग 35 करोड़ भारतीय अभी भी फीचर फोन का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किफायती कीमत डिजिटल भागीदारी में एक बड़ी बाधा बनी हुई है।

Pakistan में 125 साल पुराना गुरुद्वारा ध्वस्त, पंजाब में सिख समुदाय का विरोध प्रदर्शन, भारत ने क्या कहा

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पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक दशकों पुराना ऐतिहासिक गुरुद्वारा एक स्थानीय व्यवसायी द्वारा ध्वस्त कर दिया गया। इसके बाद अल्पसंख्यक सिख समुदाय ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। भारत ने पाकिस्तान के फारूकाबाद स्थित 125 वर्ष पुराने श्री गुरु सिंह सभा साहिब गुरुद्वारा के विध्वंस की घटना को अत्यंत दुखद और निंदनीय बताते हुए कड़ी निंदा की है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमने इस ऐतिहासिक और पवित्र गुरुद्वारे के तोड़े जाने की रिपोर्ट देखी है। 

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हम इस अत्यंत निंदनीय और लक्षित तोड़-फोड़ की घटना की घोर निंदा करते हैं। इस विध्वंस को लेकर स्थानीय प्रशासन और इवेक्यूई ट्रस्ट प्रापर्टी बोर्ड (ईटीपीबी) की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने की खबरें गंभीर चिंता का विषय हैं।  जायसवाल ने कहा कि यह कोई एकाकी घटना नहीं है। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों को निशाना बनाकर हमले जारी हैं।

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भारत ने पाकिस्तान सरकार से इस घटना की तुरंत जांच करने और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग की है। भारत ने यह भी कहा है कि गुरुद्वारे के तोड़े गए हिस्सों का शीघ्र पुनर्निर्माण किया जाए और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित की जाए। भारत ने कहा है कि पाकिस्तान में सांप्रदायिक हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता के लगातार बने माहौल को समाप्त किया जाए। भारत ने पाकिस्तान को याद दिलाया कि वह अपने अल्पसंख्यकों के प्रति अंतरराष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करे।

WhatsApp Username फीचर पर सरकार की सख्ती, Meta को नोटिस; भारत में लॉन्च पर फिलहाल रोक

whatapp

केंद्र सरकार ने भारत में WhatsApp के प्रस्तावित Username फीचर को लेकर Meta को नोटिस जारी किया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कंपनी को निर्देश दिया है कि इस फीचर को भारत में तब तक लॉन्च न किया जाए, जब तक इस संबंध में चल रही परामर्श प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

 

सरकार इस फीचर के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल सरकार और मेटा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने Meta से इस नए फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण भी मांगा है। सरकार इस बात का आकलन कर रही है कि कहीं इस फीचर का दुरुपयोग फर्जी पहचान (Impersonation), साइबर धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए तो नहीं किया जा सकता।

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प्रस्तावित Username फीचर के तहत WhatsApp यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक यूनिक यूजरनेम के माध्यम से दूसरे लोगों से संपर्क कर सकेंगे। हाल ही में WhatsApp ने घोषणा की थी कि इस वर्ष व्यापक रोलआउट से पहले यूजर्स को अपना यूनिक यूजरनेम रिजर्व करने की सुविधा दी जाएगी।

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हालांकि, सरकारी सूत्रों का कहना है कि Meta को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि भारत में यह फीचर तब तक लागू नहीं किया जाएगा, जब तक सरकार और कंपनी के बीच इस विषय पर सभी आवश्यक परामर्श पूरे नहीं हो जाते।

स्वास्थ्य क्षेत्र का हारावल दस्ता बनीं आशा वर्कर, UP में 1.60 लाख से ज्यादा संख्‍या

ASHA Workers

National Rural Health Mission: हाल के वर्षों में आशा कार्यकर्ता (एक्रेडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट) भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बनकर उभरी हैं। आशा कार्यकर्ता गांव की अपने ही समुदाय से चुनी जाती हैं और स्वास्थ्य सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने का काम करती हैं। इन्हें “स्वास्थ्य क्षेत्र का हारावल दस्ता” इसलिए कहा जाता है क्योंकि ये गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों और पूरे परिवार की स्वास्थ्य सुरक्षा एवं जागरूकता के लिए सबसे आगे रहती हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्ष 2005 में शुरू की गई यह योजना आज सामुदायिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में पूरी दुनिया के लिए एक सफल मॉडल बन चुकी है।

 

दो दशक का काम और कमाल

आशा कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2005 में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत हुई। वर्ष 2006 से इनकी नियुक्ति और प्रशिक्षण शुरू हुआ तथा अगले कुछ वर्षों में इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। आज भारत में लगभग 10.5 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ताएं कार्यरत हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता नेटवर्क माना जाता है। इनकी सबसे अधिक तैनाती ग्रामीण क्षेत्रों में है।

 

काम का तरीका : आशा कार्यकर्ता उसी गांव की 25 से 45 वर्ष आयु वर्ग की महिलाएं होती हैं। सामान्यतः उन्होंने कम से कम आठवीं या दसवीं तक शिक्षा प्राप्त की होती है। वे घर-घर जाकर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाती हैं, गर्भवती महिलाओं की पहचान और पंजीकरण कराती हैं, प्रसवपूर्व जांच सुनिश्चित कराती हैं तथा लाभार्थियों को स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाने में मदद करती हैं।

 

मुख्य कार्य :

  • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना और जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिला के साथ अस्पताल तक जाना।
  • प्रसव के बाद मां और नवजात की देखभाल (होम बेस्ड न्यूबॉर्न केयर) सुनिश्चित करना।
  • बच्चों का नियमित टीकाकरण, कुपोषण की रोकथाम तथा परिवार नियोजन के बारे में जागरूकता फैलाना।
  • टीबी, मलेरिया, डेंगू सहित अन्य संचारी रोगों के संभावित मरीजों की पहचान कर उन्हें सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाना।
  • स्वास्थ्य दिवसों का आयोजन, रिकॉर्ड संधारण तथा समुदाय को विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ना।
  • आशा कार्यकर्ताएं एएनएम  आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और चिकित्सकों के साथ समन्वय बनाकर काम करती हैं। इन्हें विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं के आधार पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।

कोविड-19 महामारी में भी बनीं फ्रंटलाइन योद्धा

कोविड-19 महामारी के दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने अग्रिम पंक्ति के योद्धा के रूप में उल्लेखनीय भूमिका निभाई। उन्होंने घर-घर सर्वेक्षण किया, संदिग्ध मरीजों की पहचान की, मास्क वितरण, होम आइसोलेशन की निगरानी, टीकाकरण के प्रति जागरूकता तथा लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

इनके काम से स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या सुधार आया?

आशा कार्यक्रम ने देश के स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार किया है। वर्ष 2005-06 में संस्थागत प्रसव 40.8 प्रतिशत था, जो 2019-21 में बढ़कर 88.6 प्रतिशत हो गया। मातृ मृत्यु अनुपात वर्ष 2000 के आसपास 301 प्रति एक लाख जीवित जन्म था, जो 2020-22 में घटकर 93 प्रति एक लाख जीवित जन्म रह गया है। इसी प्रकार शिशु मृत्यु दर वर्ष 2005 में 58 प्रति 1000 जीवित जन्म थी, जो घटकर हाल के वर्षों में लगभग 26 प्रति 1,000 जीवित जन्म रह गई है।

 

विभिन्न अध्ययनों में पाया गया है कि जिन महिलाओं तक आशा कार्यकर्ताओं की नियमित पहुंच होती है, उनमें संस्थागत प्रसव, प्रसवपूर्व जांच तथा बच्चों के पूर्ण टीकाकरण की संभावना उल्लेखनीय रूप से अधिक होती है। कुल मिलाकर आशा कार्यकर्ताओं ने गरीब, ग्रामीण और हाशिए पर रहने वाले समुदायों को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

उत्तर प्रदेश में आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका

उत्तर प्रदेश में लगभग 1.60 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत कड़ी के रूप में कार्य कर रही हैं। विशाल आबादी वाले इस राज्य में वे गांव-गांव जाकर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, नवजात एवं शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, पोषण, टीबी, मलेरिया तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

 

प्रदेश के दूरदराज और वंचित क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। चूंकि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वास्थ्य और इससे जुड़ी सेवाओं और चुनौतियों की बहुत बेहतर समझ है,इसलिए वह अक्सर इनके सेवाओं की तारीफ भी करते हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में विधानसभा में आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय व इंसेंटिव को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने के संकेत दिए हैं।

 

आशा कार्यकर्ता केवल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समुदाय को जागरूक और सशक्त भी बनाती हैं। “आशा” नाम अपने आप में सार्थक है—वे वास्तव में समाज के लिए आशा की किरण हैं। बेहतर प्रशिक्षण, समय पर प्रोत्साहन राशि, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान मिलने से उनका मनोबल और बढ़ेगा तथा देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था और मजबूत होगी। एक पंक्ति में कहें तो आशा कार्यकर्ताओं ने स्वयं को भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र का वास्तविक हारावल दस्ता सिद्ध किया है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

सांसद महुआ मोइत्रा पर फिर बरसाए अंडे, TMC भड़की, भाजपा पर लगाया आरोप

Mahua Moitra News

Mahua Moitra egg attack: तृणमूल कांग्रेस (TMC) की फायरब्रैंड सांसद महुआ मोइत्रा इन दिनों अपने बयानों से ज्यादा अपने ऊपर हो रहे 'अंडा हमलों' को लेकर सुर्खियों में हैं। बुधवार को बंगाल के नादिया जिले में कुछ ऐसा हुआ जिसने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया। महुआ मोइत्रा जब पार्टी की एक बैठक में शामिल होने पहुंचीं, तो बाहर खड़े प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ उन्हें काले झंडे दिखाए, 'चोर-चोर' के नारे लगाए, बल्कि उन पर अंडों की बौछार भी कर दी।

TMC का फूटा गुस्सा

इस घटना के बाद ममता बनर्जी की पार्टी बैकफुट पर आने के बजाय आक्रामक हो गई है। टीएमसी विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय ने इसे बंगाल के गिरते स्तर से जोड़ते हुए कहा कि यह अब पश्चिम बंगाल का नया कल्चर बन गया है। यहां कोई सुरक्षित नहीं है। हम ममता दीदी के नेतृत्व में फिर से सड़कों पर उतरेंगे। वहीं टीएमसी नेता कुणाल घोष ने पुलिस की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को बेअसर कर के असल में टीएमसी का गला घोंटा जा रहा है। ALSO READ: TMC के बाद शिवसेना UBT में बगावत, महुआ मोइत्रा का तंज- सिर्फ 15 करोड़ रुपए? सस्ते में क्यों जा रहे हैं?

महुआ बोलीं- कोर्ट जाऊंगी

महुआ मोइत्रा ने इस हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए सीधे बीजेपी (BJP) पर उंगली उठाई है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था चरमरा गई है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि मैं चुप नहीं बैठूंगी। मैं पुलिस थाने जाऊंगी, हाई कोर्ट जाऊंगी और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाऊंगी।

मेटल डिटेक्टर अंडा नहीं पकड़ सकता

इस पूरे मामले पर भाजपा ने बेहद तंज भरे लहजे में पल्ला झाड़ लिया है। बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने चुटकी लेते हुए कहा कि इसमें बीजेपी का कोई हाथ नहीं है। यह या तो आम जनता का गुस्सा है या फिर टीएमसी की आपसी गुटबाजी। वैसे भी पुलिस के पास सिर्फ मेटल डिटेक्टर होते हैं, ऐसी कोई मशीन नहीं बनी जो यह बता सके कि कौन अपनी जेब में अंडा छिपाकर घूम रहा है। ALSO READ: पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज मार्कंडेय काटजू ने बनाई 'इश्क करो पार्टी', महुआ मोइत्रा को भी दे डाला ये ऑफर!

आखिर क्या है पूरा मामला?

यह घटना बुधवार को पश्चिम बंगाल के नादिया जिले के कालीगंज (पलाशी) में हुई। टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा वहां अपनी ही पार्टी की विधायक अलीफा अहमद के घर पर आयोजित एक संगठित तृणमूल बैठक में हिस्सा लेने गई थीं। महुआ जैसे ही वहां पहुंचीं, अहमद के घर के बाहर प्रदर्शनकारियों का एक बड़ा हुजूम इकट्ठा हो गया।

 

प्रदर्शनकारियों ने महुआ मोइत्रा के खिलाफ 'गो बैक' (वापस जाओ) और 'चोर-चोर' के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते विरोध इतना उग्र हो गया कि भीड़ में से महुआ मोइत्रा को निशाना बनाकर अंडे फेंके जाने लगे। महुआ का आरोप है कि ये आम लोग नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से भेजे गए भाजपा के कार्यकर्ता थे। स्थिति बिगड़ती देख मौके पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को मोर्चा संभालना पड़ा, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को वहां से खदेड़ा गया। ALSO READ: फ्लाइट के अंदर महुआ मोइत्रा के साथ क्या हुआ? नारेबाजी और हंगामे का वीडियो वायरल होने पर भड़कीं सांसद

पहले भी हुई है ऐसी घटना

खास बात यह है कि महुआ मोइत्रा के साथ अंडे फेंकने की यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले 13 जून को भी जब महुआ कृष्णानगर जिला अदालत में एक मामले के सिलसिले में पेश होने पहुंची थीं, तब वहां मौजूद भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने उन पर अंडा फेंकने का प्रयास किया था। तभी से महुआ और भाजपा के बीच यह 'अंडा युद्ध' लगातार जारी है।

बिना सात फेरे के कैसा विवाह? गुजरात हाईकोर्ट ने शून्य घोषित की शादी, मैरिज सर्टिफिकेट को किया खारिज

MP High court News

landmark verdict Gujarat High Court: गुजरात हाई कोर्ट ने हिंदू विवाह की वैधता को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि विवाह के दौरान 'सप्तपदी' (सात फेरे) जैसी पारंपरिक और अनिवार्य धार्मिक रीतियां नहीं निभाई गई हैं, तो केवल सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज विवाह पंजीकरण या मैरिज सर्टिफिकेट को कानूनी रूप से मान्य नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद पिछले साल नवंबर महीने में फैमिली कोर्ट द्वारा पारित किया गया एक आदेश रद्द हो गया है।

पारंपरिक रीतियों का आध्यात्मिक और सामाजिक महत्व

जस्टिस इलेश वोरा और जस्टिस आरटी वाछाणी की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए हिंदू संस्कृति में विवाह संस्कार के महत्व पर विशेष जोर दिया। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत में भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताओं के बावजूद, पारंपरिक धार्मिक रीतियां व्यक्ति के आध्यात्मिक अस्तित्व को शुद्ध और रूपांतरित करती हैं। सप्तपदी जैसी अनिवार्य रीतियां ही हिंदू विवाह का असली आधार हैं और इसके बिना विवाह अधूरा है।

क्या है पूरा विवाद और फैमिली कोर्ट का फैसला?

यह पूरा मामला फैमिली कोर्ट के एक आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में दायर अपील से जुड़ा है। इससे पहले, फैमिली कोर्ट ने पक्षों के बीच हुए कथित विवाह को शून्य (अवैध) घोषित करने से इनकार कर दिया था। फैमिली कोर्ट के इस फैसले से असंतुष्ट होकर यूनाइटेड किंगडम (UK) में रहने वाले अपीलकर्ता युवक कौशल सोनार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और न्याय की गुहार लगाई थी।

अपीलकर्ता का कोर्ट के सामने चौंकाने वाला दावा

अपीलकर्ता कौशल सोनार ने हाई कोर्ट को बताया कि वह इस कथित विवाह से पूरी तरह अनजान था। जब प्रतिवादी महिला ने उसके माता-पिता से संपर्क किया और विवाह का सरकारी प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर खुद को कानूनी रूप से विवाहित पत्नी होने का दावा किया, तब जाकर उसे इस बात का पता चला। युवक ने कोर्ट के समक्ष दृढ़ता से दावा किया कि उसने महिला से कभी शादी नहीं की, कोई हिंदू रीति-रिवाज नहीं निभाए गए और वे कभी भी पति-पत्नी के रूप में साथ नहीं रहे।

फैमिली कोर्ट से हुई बड़ी चूक

इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब खुद प्रतिवादी महिला ने भी फैमिली कोर्ट के समक्ष स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि उनके बीच कोई विवाह समारोह या धार्मिक रीतियां नहीं हुई थीं और वे कभी भी पति-पत्नी के रूप में एक साथ नहीं रहे। हाई कोर्ट ने नोट किया कि महिला की इस स्पष्ट स्वीकारोक्ति के बावजूद, फैमिली कोर्ट ने युवक की शादी रद्द करने की याचिका को खारिज करके बहुत बड़ी गलती की थी।

हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7 का महत्वपूर्ण उल्लेख

गुजरात हाई कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान 'हिंदू विवाह अधिनियम, 1955' की धारा 7 का विशेष रूप से उल्लेख किया। इस कानूनी धारा के अनुसार, किसी भी हिंदू विवाह को कानूनी रूप से पूर्ण और बाध्यकारी बनाने के लिए निर्धारित पारंपरिक रीति-रिवाजों और धार्मिक अनुष्ठानों का पालन करना अनिवार्य है।

 

कोर्ट ने माना कि इस मामले में विवाह की इन मूलभूत और कानूनी शर्तों का पालन ही नहीं किया गया था। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब पक्षों के बीच कोई धार्मिक रीतियां ही नहीं निभाई गईं, तो केवल रजिस्ट्रेशन के आधार पर विवाह सिद्ध नहीं होता है। इसलिए हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के पुराने आदेश को पलट दिया और विवाह को शून्य घोषित कर दिया। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

ईरान ने BJP और कांग्रेस अध्यक्ष को खामेनेई के अंतिम संस्कार का भेजा निमंत्रण, जानिए कौन करेगा भारत का प्रतिनिधित्व

ईरान ने अपने दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं को निमंत्रण भेजा है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अध्यक्ष नितिन नवीन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को 9 जुलाई को होने वाले अंतिम संस्कार समारोह के लिए आमंत्रित किया गया है। यह निमंत्रण ऐसे समय आया है, जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान भारत के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

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भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे केंद्रीय मंत्री और बिहार के राज्यपाल

सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार की ओर से विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल आटा हसनैन ईरान में आयोजित अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होंगे। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी समारोह में शामिल होने का निमंत्रण दिया था।

 

अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 5 जुलाई से 9 जुलाई तक आयोजित होंगे। समारोह तेहरान, क़ोम और अंत में मशहद में संपन्न होंगे, जहां 9 जुलाई को अंतिम दफन संस्कार किया जाएगा।

फरवरी में हुई थी खामेनेई की मौत

 

अयातुल्ला अली खामेनेई, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान का नेतृत्व किया, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त सैन्य हमलों के दौरान मारे गए थे। उनकी मृत्यु को पश्चिम एशिया की राजनीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

 

पीएम मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति से की बातचीत

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बातचीत की। इस दौरान दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और क्षेत्रीय शांति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और वैश्विक व्यापार के लिए होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में निर्बाध नौवहन की स्वतंत्रता बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने क्षेत्र के सभी विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से निकालने पर जोर देते हुए स्थायी शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता दोहराई। Edited by : Sudhir Sharma

CM योगी ने लॉन्च किया Digi Rover अभियान, अब आधुनिक तकनीक से होगी जमीन की सटीक पैमाइश

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को सहारनपुर में प्रदेशव्यापी “डिजी रोवर (डिजी रोवर-जीएनएसएस) विशेष भूमि पैमाइश अभियान” का शुभारंभ किया। यह अभियान 1 जुलाई से शुरू होकर 15 अगस्त तक पूरे प्रदेश में संचालित किया जाएगा। अभियान के दौरान सभी तहसीलों में सीमांकन एवं पैमाइश से जुड़े लंबित मामलों का निस्तारण अत्याधुनिक डिजी रोवर (जीएनएसएस) तकनीक के माध्यम से किया जाएगा। बता दें कि योगी सरकार प्रदेश में भूमि संबंधी विवादों के त्वरित समाधान और राजस्व सेवाओं को अधिक पारदर्शी, सटीक एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। 

 

डिजी रोवर तकनीक से सीमांकन संबंधी त्रुटियों में कमी आएगी 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को भूमि से संबंधित सभी सेवाएं सरल, पारदर्शी, समयबद्ध और तकनीक आधारित व्यवस्था के माध्यम से उपलब्ध कराना उत्तर प्रदेश सरकार का संकल्प है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक भूमि की पैमाइश पारंपरिक जरीब जैसी विधियों से होती रही, लेकिन बदलते समय और बढ़ते भूमि विवादों को देखते हुए अब आधुनिक तकनीक को अपनाना आवश्यक हो गया है।
 

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजी रोवर (जीएनएसएस) तकनीक के माध्यम से भूमि की पैमाइश पहले की तुलना में अधिक सटीक, पारदर्शी और विश्वसनीय होगी। इससे सीमांकन संबंधी त्रुटियों में कमी आएगी, भूमि विवादों और अनावश्यक मुकदमेबाजी पर प्रभावी नियंत्रण होगा तथा नागरिकों को समयबद्ध राजस्व सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। 

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग सुशासन की दिशा में बड़ा कदम है और इससे राजस्व प्रशासन अधिक प्रभावी एवं जवाबदेह बनेगा। राज्य सरकार किसानों एवं आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। भूमि संबंधी विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बड़ी चुनौती रहे हैं। डिजी रोवर अभियान के माध्यम से इन विवादों के समाधान की प्रक्रिया में तेजी आएगी और लोगों को अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी। सरकार का उद्देश्य केवल लंबित मामलों का निस्तारण करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में भी तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित कर भूमि संबंधी विवादों को न्यूनतम स्तर तक लाना है।

 

पैमाइश की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप हो : मुख्यमंत्री 

मुख्यमंत्री ने सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान को पूरी गंभीरता, पारदर्शिता और मिशन मोड में संचालित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को अभियान का लाभ निष्पक्ष एवं समयबद्ध तरीके से मिलना चाहिए। साथ ही अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि पैमाइश की प्रक्रिया पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप हो और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया जाए। बता दें कि प्रदेश में वर्तमान समय में धारा-24 के तहत भूमि पैमाइश एवं सीमांकन से संबंधित करीब 79,157 प्रकरण लंबित हैं। योगी सरकार का अभियान के माध्यम से इन मामलों का मिशन मोड में गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण करने का लक्ष्य है, जिससे किसानों एवं आम नागरिकों को वर्षों से लंबित समस्याओं से राहत मिल सके। सीएम योगी के निर्देश पर राजस्व परिषद द्वारा सभी जनपदों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए। अभियान का समग्र पर्यवेक्षण एवं उच्च स्तरीय अनुश्रवण राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल द्वारा किया जाएगा, जबकि अभियान की नियमित समीक्षा, प्रगति की मॉनिटरिंग तथा आवश्यक दिशा-निर्देश आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद द्वारा दिए जाएंगे।

 

तय समयावधि के भीतर अधिकतम लंबित पैमाइश प्रकरणों के निस्तारण का लक्ष्य

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि अभियान के सफल संचालन में मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी (राजस्व), उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक तथा लेखपाल समन्वित रूप से कार्य करेंगे। सभी अधिकारियों को निर्धारित समयावधि के भीतर अधिकतम लंबित पैमाइश प्रकरणों के निस्तारण का लक्ष्य दिया गया है। यह अभियान न केवल लंबित पैमाइश मामलों के त्वरित निस्तारण में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि भूमि संबंधी विवादों में कमी लाने, किसानों के भूमि अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और तकनीक आधारित सुशासन को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सहारनपुर में CM योगी का सपा-कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- दंगाइयों के मुकदमे वापस लेना चाहती थी पिछली सरकार

CM Yogi Adityanath

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़ व मथुरा दंगों और कर्फ्यू की आग में झुलसते थे। कैराना व कांधला से पलायन की स्थिति थी, बेटियां और व्यापारी असुरक्षित थे। तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार दंगाइयों और उपद्रवियों के मुकदमे वापस लेने का कुत्सित प्रयास करती थी। लेकिन डबल इंजन सरकार ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया और हाल में मुरादाबाद के उपद्रवियों को कड़ी सजा भी दिलवाई है। अब उत्तर प्रदेश में दंगे नहीं होते, बल्कि विकास की योजनाएं धरातल पर उतरती हैं।

 

मुख्यमंत्री बुधवार को सहारनपुर नगर एवं सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों के लिए ₹620 करोड़ से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विपरीत मौसम व बारिश की चुनौतियों के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों, किसानों, मातृशक्ति व स्थानीय जनप्रतिनिधियों का हृदय से आभार व अभिनंदन किया। सीएम ने जनपदवासियों को विकास की इन सौगातों के लिए बधाई भी दी। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए।

 

आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं

सीएम ने कहा कि जाति व क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले लोग आपको कमजोर कर रहे हैं। इनके बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं। वे कभी मां शाकंभरी के दर्शन करने के लिए नहीं गए। वे काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन, श्रीराम मंदिर का विरोध कर रहे थे। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में कह दिया कि भगवान राम व श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले  आस्था पर उपदेश दे रहे हैं! आस्था के साथ कोई खिलवाड़ स्वीकार नहीं है, जो अपराधी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी।

 

वैश्विक पटल पर चमक रही अयोध्या

सीएम ने कहा कि कभी संकरी गलियों व अव्यवस्था की पहचान बन चुकी अयोध्या में आज चारों ओर से फोर लेन कनेक्टिविटी है। ब्रॉडगेज की डबल लाइन, इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन गया है। सपा को चार बार सरकार बनाने का मौका मिला, लेकिन उसने अयोध्या धाम के लिए कुछ नहीं किया। आज प्रधानमंत्री मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में अयोध्या धाम त्रेतायुग की दिव्यता व भव्यता के साथ वैश्विक पटल पर चमक रहा है। संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि व बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों की विरोधी समाजवादी पार्टी व कांग्रेस ने सिर्फ अपने परिवार का नाम आगे बढ़ाने का काम किया। 

 

2017 से पहले दंगा-पलायन थी पहचान

सीएम योगी कहा कि 2017 से पहले दंगा, कर्फ्यू हमारी नियति बन गई थी। कैराना व कांधला से पलायन होता था। ये सभी क्षेत्र हिंदू विहीन कर दिए गए थे। बेटी व व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। कानून-व्यवस्था तहस नहस हो चुकी थी। 2011 में मुरादाबाद में डीआईजी पर हमला किया गया। उपद्रवी उन्हें मरा हुआ समझ छोड़कर चले गए। सपा सरकार ने उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनके केस वापस लेने का कुत्सित प्रयास कर रही थी। हमारी सरकार ने उन सभी उपद्रवियों को सजा दिलाई। मजबूत कानून-व्यवस्था अब यूपी की नई पहचान है।

 

कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में लगता था पैसा

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के नेताओं के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उनकी आस्था तब कहां थी जब कांवड़ यात्राओं, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा के पंडालों पर प्रतिबंध लगाए जाते थे और विकास का पैसा या तो सपा के गुर्गों द्वारा खा लिया जाता था या कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में खर्च हो जाता था। आज वही पैसा मां शाकंभरी कॉरिडोर, इकोनॉमिक कॉरिडोर, फोर व टू लेन सड़क, पुल, विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स कॉलेज, सरसावा में सिविल टर्मिनल निर्माण, रनवे की लंबाई बढ़ाने और वुड कार्विंग के कारीगरों का जीवन स्तर उठाने में खर्च हो रहा है। यह दृष्टिकोण का अंतर है। सपा को केवल सैफई की चिंता होती थी, जबकि डबल इंजन सरकार सभी 75 जनपदों, 1,07,000 गांवों, 57,000 ग्राम पंचायतों, 825 विकास खंडों, 12,000 वार्डों और 762 नगर निकायों की चिंता करती है।

 

कनेक्टिविटी व इंफ्रास्ट्रक्चर से अर्थव्यवस्था को नई उड़ान

सहारनपुर की बदलती तस्वीर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (ग्रीन फील्ड कॉरिडोर) का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली व सहारनपुर के बीच की दूरी महज डेढ़ घंटे की रह गई है। अब सहारनपुर एयर कनेक्टिविटी के लिए भी पूरी तरह तैयार हो रहा है। सरसावा में सिविल टर्मिनल के निर्माण और रनवे के विस्तार का कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे जल्द ही सहारनपुर का अपना चालू एयरपोर्ट होगा और यहां के नागरिकों को दिल्ली या देहरादून जाने की बाध्यता नहीं रहेगी।

 

मां शाकंभरी देवी का भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर

धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुद्धार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मां शाकंभरी देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है। पिछले दिनों शिवालिक की पहाड़ियों में अचानक हुई भारी वर्षा के दौरान प्रशासनिक मुस्तैदी और समय पर जारी अलर्ट के कारण जन-धन की हानि रोकने में सफलता मिली थी। भविष्य में मौसम चाहे कैसा भी हो, श्रद्धालुओं का आवागमन बाधित न हो, इसके लिए एलिवेटेड कॉरिडोर और बेहतरीन फैसिलिटेशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है, जो पहले की सरकारों के लिए सपना था। सहारनपुर के कारीगरों व हस्तशिल्पियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी वुड कार्विंग की परंपरा को जीवित रखा। यहां से 600 करोड़ रुपये से अधिक के वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात किया गया है।

 

सहारनपुर में सुनिश्चित किया चौतरफा विकास

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहरानपुर का अपना मेडिकल कॉलेज भी बन गया है। इसके प्रथम चरण का काम पूरा हो चुका है और दूसरे चरण के लिए आज आधारशिला रखी जा रही है। पेयजल की शुद्ध व्यवस्था के साथ ही एसटीपी का काम शुरू किया जा रहा है। सरकार युवाओं को रोजगार और आधी आबादी को सुरक्षा व स्वावलंबन देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकारी नौकरियों और पुलिस भर्ती के नियुक्ति पत्र वितरण में स्थानीय युवाओं को भी बिना किसी सिफारिश के पूर्ण पारदर्शिता के साथ उनका हक मिल रहा है।

 

इस अवसर पर बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, लोक निर्माण मंत्री कुंवर बृजेश सिंह, संसदीय कार्य तथा औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, सहारनपुर नगर विधायक राजीव गुंबर, महापौर डॉ. अजय सिंह, नकुड़ विधायक मुकेश चौधरी, गंगोह विधायक किरत सिंह, रामपुर मनिहारन विधायक देवेन्द्र कुमार निम, विधान परिषद सदस्य वंदना वर्मा, यूपी सिडको अध्यक्ष वाईपी सिंह, पूर्व सांसद राघव लखनपाल शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष मांगेराम चौधरी आदि उपस्थित रहे।