राम मंदिर ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगड़ी, मेदांता अस्पताल में भर्ती; जानिए कौन हैं 88 वर्षीय संत

Shri Ram Mandir Trust President Mahant Nritya Gopal Das

Nritya Gopal Das Maharaj Health Update : अयोध्या के राम मंदिर के ट्रस्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत बिगड़ गई है। उन्हें लखनऊ मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। 

 

88 वर्षीय महंत नृत्य गोपाल की तबीयत इसके पहले जनवरी के महीने में भी बिगड़ गई थी तब लखनऊ के मेदांता अस्पताल में उनका इलाज चला था। हालांकि, वो ठीक हो गए थे।

 

कौन हैं महंत नृत्य गोपाल दास?

महंत नृत्य गोपाल दास अयोध्या के एक प्रमुख हिंदू संत और आध्यात्मिक नेता हैं। वह राम जन्मभूमि न्यास और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के अध्यक्ष हैं। साथ ही वे मणि राम दास की छावनी के प्रमुख भी हैं। 

 

महंत नृत्य गोपाल दास मथुरा के रहने वाले हैं और इनका जन्म एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्होंने मथुरा से ही अपने शिक्षा ग्रहण की। कुछ साल बाद उन्होंने अपने आप को धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में लगा लिया। इसके बाद उन्होंने घर बार छोड़ दिया और अयोध्या चले गए। अयोध्या में इन्होंने महंत राम मनोहर दास द्वारा दीक्षा संस्कार की शिक्षा ग्रहण की। वाराणसी में संस्कृत विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और 'शास्त्री' के रूप में स्नातक की उपाधि हासिल की।

2026 की सबसे डिमांडिंग नौकरियां! अगर सीख लीं ये 3 स्किल्स, तो कंपनियां देंगी 30 लाख रुपए तक का पैकेज!

highest paying jobs 2026

highest paying jobs 2026: जून के अंत और जुलाई की शुरुआत भारत में कॉलेज ग्रेजुएट्स (Freshers) के पास आउट होने और वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए 'हाफ-इयरली' स्विच प्लान करने का समय होता है। यही कारण है कि इस समय इंटरनेट और गूगल ट्रेंड्स पर High-Paying Tech Skills की सर्च अपने चरम पर है।

 

पारंपरिक कोडिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से हटकर अब टेक इंडस्ट्री का पूरा फोकस AI (Artificial Intelligence), Data Science और Cloud Computing पर शिफ्ट हो चुका है। आइए समझते हैं कि 2026 में इन सेक्टर्स में कितनी सैलरी मिल रही है और कौन सी स्किल्स आपको सबसे आगे रख सकती हैं।

2026 Salary Snapshot : स्किल्स और कमाई का पूरा ब्योरा

भारतीय टेक मार्केट (विशेषकर बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और गुरुग्राम जैसे हब्स) में इन तीनों डोमेन के लिए अनुभव के आधार पर मिलने वाला सालाना पैकेज (LPA) इस प्रकार है:

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Deep Dive: इन 3 स्किल्स में ऐसा क्या खास है?

1. Artificial Intelligence (AI) & ML Engineer

आज कंपनियां सिर्फ AI टूल्स का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, बल्कि वे अपने खुद के कस्टम AI मॉडल्स और Generative AI (LLMs) ऐप्स बना रही हैं।

  • जरूरी स्किल्स : Python, TensorFlow, PyTorch, NLP (Natural Language Processing), और प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग।
  • कमाई का सच : इस फील्ड में सचमुच कुशल लोगों की भारी कमी है, इसलिए अनुभवी इंजीनियर्स को ₹30 लाख से ₹45 लाख तक का पैकेज आसानी से मिल रहा है।

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2. Cloud Computing (Architect/DevOps)

अब लगभग हर छोटी-बड़ी कंपनी अपना डेटा लोकल सर्वर्स से हटाकर क्लाउड पर ले जा चुकी है। नैसकॉम (NASSCOM) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जीडीपी में क्लाउड टेक का योगदान लगातार बढ़ रहा है।

  • जरूरी स्किल्स : Amazon Web Services (AWS), Microsoft Azure, Google Cloud Platform (GCP), और Docker/Kubernetes जैसी कंटेनराइजेशन टूल्स।
  • कमाई का सच : यदि आप क्लाउड सर्टिफाइड (जैसे AWS Certified Solutions Architect) हैं, तो फ्रेशर होने पर भी आपका शुरुआती पैकेज आम डेवलपर्स से 30% तक ज्यादा होता है।

3. Data Science & Analytics

  • “Data is the new oil” – कंपनियां रोज़ाना करोड़ों गीगाबाइट डेटा जनरेट करती हैं। इस डेटा को साफ करके, समझकर बिजनेस के काम लायक फैसले लेने का काम डेटा साइंटिस्ट करते हैं।
  • जरूरी स्किल्स : SQL, Advanced Excel, Power BI या Tableau (विजुअलाइजेशन के लिए), और Python (Pandas/NumPy)।
  • कमाई का सच : यह फील्ड उन लोगों के लिए भी बेहतरीन प्रवेश द्वार है जो नॉन-कंप्यूटर साइंस (जैसे कॉमर्स या प्योर साइंस) बैकग्राउंड से आते हैं।

Expert Advice : करियर की शुरुआत कैसे करें?

सीक्रेट टिप: आज के समय में सिर्फ सर्टिफिकेट्स (Certificates) की वैल्यू नहीं है। कंपनियां आपका GitHub Portfolio और लाइव प्रोजेक्ट्स देखना चाहती हैं। अगर आप कॉलेज स्टूडेंट हैं या जॉब बदलना चाहते हैं, तो आज ही से छोटे-छोटे AI या डेटा एनालिसिस प्रोजेक्ट्स बनाकर उन्हें LinkedIn पर शेयर करना शुरू कर दें।

 

गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों को 1.55 लाख और छात्राओं को मिलेगी 2.05 रुपए लाख की सहायता

Gujarat government's big decision regarding students preparing for UPSC

Gujarat government's big decision : गुजरात में यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) जैसी प्रतिष्ठित और कठिन सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। गांधीनगर स्थित स्पीपा (SPIPA सरदार पटेल लोक प्रशासन संस्थान) और उसके प्रशिक्षण केंद्रों में अध्ययन करने वाले होनहार उम्मीदवारों को दी जाने वाली वित्तीय प्रोत्साहन सहायता में सरकार ने भारी बढ़ोतरी की है। इस महत्वपूर्ण निर्णय का मुख्य उद्देश्य राज्य के मध्यम और सामान्य वर्ग के युवाओं को सिविल सेवा परीक्षा की ओर आकर्षित करना और राष्ट्रीय स्तर पर सिविल सर्विसेज में गुजरात का प्रतिनिधित्व मजबूत करना है।

 

इस नई व्यवस्था के तहत, यूपीएससी प्रारंभिक (प्रिलिम्स) परीक्षा की तैयारी कर रहे प्रशिक्षु उम्मीदवारों को उनकी पढ़ाई और किताबों आदि के नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए हर महीने 4,000 रुपए तक की मासिक सहायता (स्टाइपेंड) दी जाएगी। इस नियमित स्टाइपेंड के अलावा परीक्षा के प्रत्येक कठिन चरण को सफलतापूर्वक पार करने पर छात्रों का उत्साह बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रोत्साहन राशि भी तय की गई है। इस योजना में विशेष रूप से छात्राओं को अधिक आर्थिक सहायता देकर महिला सशक्तिकरण पर विशेष बल दिया गया है।

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योजना के ढांचे के अनुसार, जो उम्मीदवार यूपीएससी प्रिलिम्स परीक्षा पास करेंगे, उन छात्रों को 35,000 रुपए और छात्राओं को 50,000 रुपए की वित्तीय सहायता मिलेगी। इसके बाद दूसरे चरण की मुख्य परीक्षा (Mains) में सफलता प्राप्त करने वाले छात्रों को रुपए 45000 और छात्राओं को रुपए 55,000 का प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस कठिन सिविल सेवा परीक्षा को पास करने के लिए उम्मीदवार सालों तक कड़ी मेहनत करते हैं, ऐसे में यह सरकारी सहायता उनके लिए बहुत बड़ा आर्थिक संबल साबित होगी।

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परीक्षा के अंतिम चरण यानी साक्षात्कार (इंटरव्यू) पूरा होने के बाद यूपीएससी में फाइनल सिलेक्शन (अंतिम चयन) प्राप्त कर देश की सेवा में शामिल होने वाले छात्रों को 75,000 रुपए जबकि छात्राओं को 1 लाख रुपए की विशेष सहायता दी जाएगी। इस प्रकार सभी चरणों के संशोधित दरों को मिलाकर कुल प्रोत्साहन सहायता छात्रों के लिए 1.55 लाख रुपए तक और छात्राओं के लिए अधिकतम 2.05 लाख रुपए तक पहुंच जाएगी। राज्य सरकार के इस सराहनीय कदम से गुजरात के अनगिनत छात्र आर्थिक चिंता के बिना सिविल सेवा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होंगे।

अयोध्या में बनने वाली मस्जिद का क्या हाल है?

-समीरात्मज मिश्र

अयोध्या में रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले का निपटारा करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के निर्माण के अलावा मस्जिद निर्माण के लिए भी अलग से जमीन देने का फैसला सुनाया था। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने अयोध्या के बहुचर्चित और दशकों पुराने विवाद का पटाक्षेप करते हुए करीब 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम लला को सौंप दी थी। इसके बदले में मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन देने के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए थे। ALSO READ: भीषण गर्मी के चलते पेरिस के मुर्दाघरों में जगह कम पड़ी

 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केंद्र सरकार ने मंदिर निर्माण की देख-रेख के लिए ट्रस्ट बनाने के साथ ही मस्जिद निर्माण के लिए भी इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन नाम से एक ट्रस्ट का गठन किया गया। लेकिन मंदिर तो बन कर तैयार भी हो गया और इस वक्त चढ़ावा चोरी को लेकर काफी विवादों में भी है लेकिन मस्जिद को मिली जमीन अभी तकनीकी दांव-पेंच में ही उलझी है। मस्जिद निर्माण तो दूर की कौड़ी दिख रही है।

 

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कुछ महीनों बाद ही साल 2020 में अयोध्या से करीब 25 किमी दूर रौनाही थाने के पीछे धन्नीपुर गांव में मस्जिद निर्माण के लिए पांच एकड़ जमीन देने की घोषणा की थी लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।

 

मस्जिद निर्माण के लिए बना इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन अभी जमीन की कागजी कार्रवाइयों में ही उलझा हुआ है। हालांकि मस्जिद निर्माण में कई और तरह की भी बाधाएं हैं। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के भी चेयरमैन रह चुके हैं। डीडब्ल्यू से बातचीत में कहते हैं कि जमीन का तकनीकी मुद्दा तो अपनी जगह है लेकिन मस्जिद के लिए जरूरी फंड तक इकट्ठा नहीं हो पा रहा है, इसलिए बनने में देरी हो रही है। ALSO READ: पिछड़े देशों में पलायन से अमीर देशों को हुआ खूब फायदा

 

किसी की दिलचस्पी नहीं, पैसा भी नहीं मिल रहा

जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, “दरअसल, यह आस्था का विषय तो है नहीं। आम जनता की कोई दिलचस्पी नहीं है इसके निर्माण में। मुस्लिम संगठन तो पहले से ही विरोध में हैं। ये संगठन तो सरकार की ओर से जमीन लिए जाने का ही विरोध कर रहे थे। तो अब मस्जिद के निर्माण में भी कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा है। चंदा कोई दे नहीं रहा है। कुल मिलाकर कहा जाए तो इसके समर्थन में कोई नहीं है। फिर भी कोशिश की जा रही है कि जैसी संरचना और कैंपस की कल्पना की गई, वैसी न भी बने तो कम से कम छोटे स्तर पर ही कुछ निर्माण हो जाए।”

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद राज्य सरकार ने मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए धन्नीपुर गांव में जो पांच एकड़ जमीन दी है, वह मूल मस्जिद स्थल यानी जहां बाबरी मस्जिद थी, उससे करीब 25 किलोमीटर दूर है। हालांकि यह गांव अयोध्या जिले की सोहावल तहसील में ही आता है लेकिन अयोध्या कस्बे से भी यह बीस किमी दूर है। यही नहीं, अयोध्या में तमाम मुस्लिम लोग और मुस्लिम संगठन मस्जिद के लिए ट्रस्ट बनाने और सरकार से मस्जिद के लिए जमीन लेने का ही विरोध कर रहे थे। सरकार ने जमीन देने का जब ऐलान किया तो वो भी इतनी दूर है कि कस्बे के रहने वाले लोग 20-25 किमी दूर जाकर नमाज शायद ही पढ़ें। ऐसा इसलिए भी, क्योंकि अयोध्या कस्बे में और अयोध्या से धन्नीपुर के बीच कई मस्जिदें पहले से हैं।

 

अयोध्या में बाबरी मस्जिद की जमीन के लिए मालिकाना हक की लड़ाई लड़ चुके एक प्रमुख पक्षकार हाजी महबूब कहते हैं कि अयोध्या के मुसलमानों की तो इसमें पहले भी कोई दिलचस्पी नहीं थी। उनके मुताबिक, “इतनी दूर जमीन देने का कोई मतलब नहीं है। अयोध्या का मुसलमान वहां जाकर तो नमाज पढ़ेगा नहीं। और हम तो पहले ही कह रहे थे कि हमें जमीन नहीं चाहिए। जमीन देनी भी थी तो अयोध्या शहर में ही देनी चाहिए थी। बहरहाल, ये सुन्नी वक्फ बोर्ड और उस ट्रस्ट पर है कि वो क्या करते हैं। अयोध्या के मुसलमानों का उससे कोई बहुत लेना-देना नहीं है।” ALSO READ: फिर से भारतीय छात्रों की पसंद क्यों बनी सिविल इंजीनियरिंग?

 

शुरू से ही विरोध था

सरकार ने जब मस्जिद के लिए जमीन देने का ऐलान किया था तब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तमाम सदस्यों ने भी इसका विरोध किया था और सुन्नी वक्फ बोर्ड पर राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को स्वीकार न करने का दबाव बनाया था। लेकिन चूंकि सुन्नी वक्फ बोर्ड सरकार की संस्था है, इसलिए उसका प्रस्ताव को नकारना संभव नहीं था। बोर्ड ने प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया लेकिन ज्यादातर मुस्लिम संगठन और आम मुसलमान भी राज्य सरकार से मस्जिद लेने के फैसले को मुसलमानों का फैसला नहीं मानता बल्कि इसे वो सुन्नी वक्फ बोर्ड का ही फैसला मानता है।

 

नौ नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने भी अयोध्या में मंदिर-मस्जिद विवाद का फैसला सुनाते हुए विवादित अधिग्रहित जमीन राम लला को दी थी और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन देने का सरकार को निर्देश दिया था।

 

हालांकि जमीन मिलने के बाद ट्रस्ट ने इस पांच एकड़ जमीन पर आलीशान मस्जिद के अलावा अस्पताल और कई अन्य इमारतें बनाने का दावा किया था और उसकी एक रूपरेखा तैयार की थी। यहां तक कि इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन की वेबसाइट पर भी इस परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। इस परियोजना की जानकारी फाउंडेशन ने 19 दिसंबर 2020 को लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी थी।

 

बड़ी परियोजना, लेकिन सब कागज पर

आईआईसीएफ की वेबसाइट पर परियोजना के बारे में लिखा है, “आवंटित की गई 5 एकड़ जमीन के लिए, आईआईसीएफ ने एक आर्किटेक्चरल प्लान का प्रस्ताव रखा है, जिसमें मस्जिद के अलावा 200 से ज्यादा बेड वाले अस्पताल, एक आर्काइव सेंटर, जिसमें एक संग्रहालय भी होगा होगा और कुपोषित बच्चों और महिलाओं को मुफ्त खाना खिलाने के लिए एक कम्युनिटी किचन बनाने का भी प्रावधान है।”

 

लेकिन पांच साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी मस्जिद के लिए आवंटित जमीन पर सिर्फ पहले से मौजूद एक दरगाह ही है, इसके अलावा और कुछ नहीं। अयोध्या जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन आवंटित की थी लेकिन अयोध्या विकास प्राधिकरण ने मस्जिद का पहला ले आउट प्लान खारिज कर दिया था। हालांकि बाद में दूसरा ले-आउट प्लान पेश किया गया, लेकिन अभी भी कुछ प्रशासनिक अड़चनें मौजूद हैं।

1 जुलाई से आपकी जेब पर बड़ा असर: UPI से मिलेगा PF, क्रेडिट कार्ड के नियम बदलें, जानिए 10 बड़े बदलाव

1 जुलाई 2026 से देश में कई बड़े वित्तीय बदलाव लागू हो रहे हैं, जो सीधे आपकी जेब और बैंकिंग सेवाओं को प्रभावित करेंगे। अगर आपको आधार अपडेट करना है, नया पासपोर्ट बनवाना है, क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना है या

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नई कार खरीदना है तो 1 जुलाई से आपके लिए नियमों में बड़ा बदलाव हुआ है। इसका असर करोड़ों लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। इन बदलावों की जानकारी पहले से होने पर आप अपने जरूरी काम समय रहते और बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं।

1. आधार से ईमेल लिंक कराना होगा मुफ्त

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बड़ा फैसला लेते हुए 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक आधार से ईमेल आईडी लिंक कराने की सुविधा पूरी तरह मुफ्त कर दी है। पहले इस सेवा के लिए 75 रुपए शुल्क देना पड़ता था। ALSO READ: Top News : 183 रुपये सस्ता हुआ कमर्शियल LPG, VB-G RAM G कानून लागू

 

2. पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा

1 जुलाई से नया पासपोर्ट बनवाने और पासपोर्ट रिन्यू कराने की फीस बढ़ गई है। सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपए से बढ़कर 2,500 रुपए हो गई। तत्काल पासपोर्ट की फीस 3,500 रुपए से बढ़ाकर 5,000 रुपए कर दी गई है। नई फीस नए आवेदन और रिन्यूअल दोनों पर लागू होगी।

3. सस्ता हुआ कमर्शियल गैस सिलेंडर

2026 में पहली बार कमर्शियल गैस सिलेंडर सस्ता हुआ है। जुलाई के पहले दिन तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 183 रुपए घटाकर लोगों को महंगाई से बड़ी राहत दी। दिल्ली में 3,113 रुपए का मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब सस्ता होकर 2,930 रुपए का रह गया है। 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई है। ALSO READ: 183 रुपए सस्ता हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बड़ा बदलाव, महंगाई से मिली राहत

 

4. छोटे सिलेंडर भी सस्ता

तेल कंपनियों ने 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत में 13 रुपए की कटौती की गई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 808.50 रुपए रह गई है। दिल्ली में अब तक इसकी कीमत 821.50 रुपए प्रति सिलेंडर थी।

 

5. नायरा का पेट्रोल 5 रुपए सस्ता

नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपए की कटौती की गई है। वहीं डीजल के दाम भी 3 रुपए प्रति लीटर घटा दिए गए हैं। पिछले दो साल में किसी कंपनी ने पहली बार ईंधन की खुदरा कीमतों में कटौती की है। नई कीमतें आज से लागू कर दी गई हैं। मूल्य वर्धित कर (वैट) जैसे स्थानीय करों के कारण विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर कीमतें अलग-अलग होती हैं।

 

6. कार खरीदना पड़ेगा महंगा

अगर आप जुलाई में नई कार खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने 1.5% से 3% तक कीमत बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण यह फैसला लिया गया है।

 

7. क्रेडिट कार्ड के नियम बदलेंगे

1 जुलाई से कई बैंकों और कार्ड कंपनियों के रिवॉर्ड पॉइंट्स और बेनिफिट्स में बदलाव हो गया है। कुछ ट्रांजैक्शन पर अब रिवॉर्ड पॉइंट्स नहीं मिलेंगे। फ्री एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के लिए खर्च की न्यूनतम सीमा तय की गई है। कई बैंक अब एक तिमाही में कम से कम 60,000 रुपये खर्च करने पर ही मुफ्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज सुविधा देंगे।

 

8. बैंक नहीं कर सकेंगे गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने की कोशिश

अब बैंक ग्राहक की स्पष्ट सहमति के बिना कोई वित्तीय उत्पाद नहीं बेच सकेंगे। भ्रामक तरीके अपनाकर ग्राहकों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। जबरन किसी अन्य प्रोडक्ट के साथ वित्तीय उत्पाद नहीं जोड़ सकेंगे। केवल ग्राहक की जरूरत के अनुसार ही उत्पाद की सलाह दे सकेंगे। यदि किसी मामले में मिस-सेलिंग साबित होती है तो ग्राहक को पूरा पैसा वापस पाने का अधिकार होगा।

 

9. UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जुलाई में अपना नया डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 लॉन्च कर सकता है। इसके बाद EPF खाताधारक UPI के जरिए अपना PF का पैसा कुछ ही मिनटों में निकाल सकेंगे। अब तक PF निकालने में कई दिन लग जाते थे, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो जाएगी।

 

10. ITR फीलिंग डेडलाइन

नए वित्तीय साल के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 तय की गई है। अगर इस तारीख के बाद रिटर्न फाइल किया जाता है, तो आपको जुर्माना देना पड़ सकता है। देरी से फाइलिंग करने पर आपको 1,000 से 5,000 रुपए तक पेनल्टी लग सकती है। ऐसे में टैक्सपेयर्स को सलाह है कि आखिरी समय का इंतजार न करें और समय रहते रिटर्न फाइल कर लें।

 

edited by : Nrapendra Gupta

183 रुपए सस्ता हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर: पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भी बड़ा बदलाव, महंगाई से मिली राहत

commercial cylinder and petrol diesel

जुलाई के पहले दिन तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 183 रुपए घटाकर लोगों को महंगाई से बड़ी राहत दी। दिल्ली में 3,113 रुपए का मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब सस्ता होकर 2,930 रुपए का रह गया है। 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई है। नायरा एनर्जी ने पेट्रोल डीजल के दाम घटाने का फैसला किया है।

 

2026 में पहली बार घटे दाम

अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह तेल आपुर्ति प्रभावित होने और अंतरराष्‍ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने से पिछले 6 महीनों से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ रहे थे। जनवरी में दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 1691 रुपए प्रति सिलेंडर थी। जून में इसकी कीमत बढ़कर 3113.50 रुपए तक पहुंच गई।

 

इंडियन ऑयल के अनुसार, कोलकाता में अब कमर्शियल सिलेंडर 3255.50 रुपए से घटकर 3,081.50 रुपए का हो गया है। पटना में कमर्शियल सिलेंडर अब 3,227 रुपए में मिलेगा।

छोटे सिलेंडर भी सस्ता

तेल कंपनियों ने 5 किलो वाले छोटू सिलेंडर की कीमत में 13 रुपए की कटौती की गई है। दिल्ली में अब इसकी कीमत 808.50 रुपए रह गई है। दिल्ली में अब तक इसकी कीमत 821.50 रुपए प्रति सिलेंडर थी।

 

नायरा का पेट्रोल 5 रुपए सस्ता

नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमतों में 5 रुपए की कटौती की गई है। वहीं डीजल के दाम भी 3 रुपए प्रति लीटर घटा दिए गए हैं। पिछले दो साल में किसी कंपनी ने पहली बार ईंधन की खुदरा कीमतों में कटौती की है। नई कीमतें आज से लागू कर दी गई हैं। मूल्य वर्धित कर (वैट) जैसे स्थानीय करों के कारण विभिन्न राज्यों में पेट्रोल पंपों पर कीमतें अलग-अलग होती हैं।

 

पेट्रोल पर निर्यात शुल्क बढ़ा

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (एसएईडी) को 1.5 रुपए प्रति लीटर से बढ़ाकर सीधे 4 रुपए प्रति लीटर कर दिया गया है। सरकार ने यह कदम तेल कंपनियों द्वारा घरेलू बाजार के बजाय विदेशी बाजारों में मुनाफा कमाने के लिए किए जाने वाले पेट्रोल निर्यात को हतोत्साहित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

edited by : Nrapendra Gupta

Top News : 183 रुपये सस्ता हुआ कमर्शियल LPG, VB-G RAM G कानून लागू

top news 1 july

Top News 1 July : तेल कंपनियों ने कमर्शियल गैस सिलेंडर का दाम घटाकर लोगों को महंगाई से राहत दी। वीबी जीराम जी कानून आज से लागू हो गया। हरिद्वार से इंदौर आ रही बस में आग लगने से 8 लोगों की मौत हो गई। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने प्श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की। फ्रांस, मैक्सिको और नार्वे फीफा विश्व कप के राउंड ऑफ 16 में पहुंचे।

 

कर्मशियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घटे

जुलाई के पहले दिन कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 183 रुपए की भारी कटौती की गई है। दिल्ली में 3,113 रुपए का मिलने वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब सस्ता होकर 2,930 रुपए का रह गया है। 14 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमतें स्थिर रखी गई है।

 

VB-G RAM G कानून लागू

देश में आज से 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025' (वीबी-जी राम जी) कानून लागू होगा। इसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को अब 125 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। साथ ही न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन तय की गई है। 

 

हरिद्वार से इंदौर आ रही बस में आग, 8 की मौत

राजस्थान के दौसा में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर हरिद्वार से इंदौर जा रही बस ट्रेलर से टकराकर खाई में गिर गई और उसमें आग लग गई। हादसे में 8 लोगों की मौत हुई, जबकि 19 यात्री घायल हुए। राहत-बचाव अभियान जारी है। ALSO READ: दौसा में रात 3 बजे दर्दनाक हादसा: हरिद्वार से इंदौर जा रही बस में आग, 8 यात्रियों की मौत

 

राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग

भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की है। उन्होंने ट्रस्ट में भगवान श्रीराम के वंशजों, राम मंदिर आंदोलन के कारसेवकों के परिजनों और आंदोलन से जुड़े लोगों को प्रतिनिधित्व देने की मांग की।

 

फ्रांस, मैक्सिको और नार्वे अंतिम 16 में

किलियन एमबाप्पे के 2 गोल की मदद से फ्रांस स्वीडन को 3-0 से हराकर फीफा विश्‍व कप के अंतिम 16 में पहुंचा। इक्वाडोर को 2-0 से हराकर मैक्सिको ने भी राउंड 16 में एंट्री ली। नार्वे ने भी आइवरी कोस्ट को 2-1 से हराकर अगले दौर में प्रवेश किया।

दौसा में रात 3 बजे दर्दनाक हादसा: हरिद्वार से इंदौर जा रही बस में आग, 8 यात्रियों की मौत

bus travelling from Rishikesh to Indore caught fire

राजस्थान के दौसा में दिल्ली एक्सप्रेस वे पर हरिद्वारा से इंदौर आ रही बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। बस की ट्रैलर से भीषण टक्कर के बाद वह खाई में गिर गई और उसमें आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई। हादसे में 19 लोग घायल हुए हैं।

 

हादसे के समय सो रहे थे यात्री

पुलिस ने बताया कि ट्रेलर से टकराने के बाद बस अनियंत्रित हो गई और खाई में गिर गई। दुर्घटना के तुरंत बाद बस के पिछले हिस्से में आग लग गई। इससे यात्रियों में दहशत फैल गई। दुर्घटना के समय अधिकांश यात्री सो रहे थे। बताया जा रहा है कि टक्कर इतनी भीषण थी कि ऊपरी बर्थों पर सो रहे यात्री नीचे गिर गए, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।

 

24-25 लोगों को बचाया गया

हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। कलेक्टर और पुलिस अधिक्षक भी हादसे की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे। बताया जा रहा है कि मौके से 24-25 लोगों को बचा लिया गया है।

 

मौके पर पहुंचे कांग्रेस सांसद ने क्या बताया?

दौसा कांग्रेस सांसद मुरारी लाल मीणा ने कहा कि रात को 3 बजे के आसपास बहुत दुखद दुर्घटना हुई है। अभी तक 8 शव मिले हैं, जो जल गए हैं। 11 व्यक्ति अस्पताल में भर्ती हैं। ये लोग हरिद्वार से आ रहे थे। ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश के हैं, कुछ लोग महाराष्ट्र के हैं।

Live : हरिद्वार से इंदौर जा रही बस में आग, 8 की मौत

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Latest News Today Live Updates in Hindi : राजस्थान के दौसा में दिल्ली एक्सप्रेस वे पर बस की ट्रक से भीषण टक्कर के बाद 8 लोगों की मौत हो गई। बस हरिद्वार से इंदौर जा रही थी। पल पल की जानकारी…

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-दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सड़क हादसे में 8 लोगों की मौत हो गई।

-दौसा कांग्रेस सांसद मुरारी लाल मीणा ने कहा- रात को 3 बजे के आसपास बहुत दुखद दुर्घटना हुई है। अभी तक पता नहीं चल पाया है कि बस में कुल कितने लोग सवार थे। 8 शव मिले हैं, जो जल गए हैं। 11 व्यक्ति अस्पताल में भर्ती हैं। ये लोग हरिद्वार से आ रहे थे। ज्यादातर लोग मध्य प्रदेश के हैं, कुछ लोग महाराष्ट्र के हैं।

Operation Tiger: क्या देवेंद्र फडणवीस के साथ भी वही हो रहा है जो कभी आडवाणी, गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के साथ हुआ था?

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operation tiger devendra fadnavis: भारतीय जनता पार्टी में शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने का रास्ता केवल चुनाव जिताने, विकास कार्य कराने या संगठन के प्रति निष्ठा दिखाने से नहीं बनता। कई बार सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर मौजूद शक्ति संतुलन होता है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस को लेकर आज यही सवाल उठ रहा है।

 

पिछले एक दशक में फडणवीस ने लगभग वही राजनीतिक मॉडल अपनाया, जिसने कभी नरेंद्र मोदी को राष्ट्रीय राजनीति के शिखर तक पहुंचाया था। उन्होंने खुद को विकास पुरुष की छवि से जोड़ा, बड़े उद्योगपतियों और निवेशकों को महाराष्ट्र लाने की कोशिश की, बुनियादी ढांचे की राजनीति को आगे बढ़ाया और वैचारिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ‌(Rashtriya Swayamsevak Sangh) के साथ अपने संबंधों को मजबूत बनाए रखा।

 

राजनीतिक विरोधी अक्सर उन पर उद्योगपति समूहों के करीब होने का आरोप लगाते रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे कभी मोदी पर लगाए जाते थे। लेकिन भारतीय राजनीति में बड़े उद्योग और बड़े विजन की राजनीति अक्सर साथ-साथ चलती है। समस्या तब शुरू होती है जब कोई क्षेत्रीय नेता अपनी राज्य सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय संभावना में बदलने लगता है।

ऑपरेशन टाइगर की असल कहानी

महाराष्ट्र में चल रहा कथित 'ऑपरेशन टाइगर' केवल उद्धव ठाकरे या उनकी पार्टी को कमजोर करने की कहानी नहीं हो सकती। इसकी एक दूसरी व्याख्या यह भी है कि राज्य में किसी एक नेता को अत्यधिक शक्तिशाली बनने से रोकने की कोशिश हो रही है।

उद्धव ठाकरे ने अपनी राजनीतिक क्षति के बावजूद कई बार संकेत दिए हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में असली लड़ाई केवल शिवसेना की विरासत की नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व की भी है। वहीं राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि अमित शाह विभिन्न राज्यों में अलग-अलग शक्ति केंद्र तैयार कर रहे हैं ताकि भविष्य में राष्ट्रीय राजनीति में समर्थन का व्यापक आधार मौजूद रहे। ये आरोप राजनीतिक हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक बहस में इनका महत्व है।

 

सवाल यह है कि क्या एकनाथ शिंदे का राजनीतिक महत्व केवल महाराष्ट्र की सत्ता तक सीमित है या उसके पीछे राष्ट्रीय रणनीति भी काम कर रही है?

 

भाजपा का इतिहास बताता है कि पार्टी में राष्ट्रीय नेतृत्व का उभार बेहद नियंत्रित और संगठित प्रक्रिया के तहत होता है। लालकृष्ण आडवाणी के पास जनाधार था, वैचारिक स्वीकार्यता थी और संगठन पर गहरी पकड़ थी, लेकिन प्रधानमंत्री पद उनसे दूर रह गया। 
 

राजनाथ सिंह पार्टी अध्यक्ष और सफल मुख्यमंत्री रहे, लेकिन राष्ट्रीय उत्तराधिकार की चर्चा में कभी निर्णायक स्थान नहीं बना सके। नितिन गडकरी को उनकी प्रशासनिक क्षमता और विकास मॉडल के बावजूद सीमित दायरे में रखा गया। शिवराज सिंह चौहान चार बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन राष्ट्रीय नेतृत्व की दौड़ में उनका नाम कभी गंभीरता से आगे नहीं बढ़ा।

क्या अब वही पैटर्न फडणवीस के सामने खड़ा है?

उनके पास प्रशासनिक अनुभव है, शहरी मतदाताओं में स्वीकार्यता है, निवेशकों का भरोसा है और संगठन में भी उनका विरोध नगण्य है। यही कारण है कि कई राजनीतिक विश्लेषक उन्हें भाजपा की अगली पीढ़ी के संभावित राष्ट्रीय चेहरों में गिनते हैं। लेकिन भारतीय राजनीति में संभावना और उत्तराधिकार दो अलग-अलग चीजें हैं।

 

भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका केंद्रीय नेतृत्व रहा है। ऐसे में पार्टी शायद ही कभी किसी राज्य नेता को इतना बड़ा होने देना चाहेगी कि वह समानांतर राष्ट्रीय केंद्र बन जाए। यही कारण है कि मजबूत क्षेत्रीय नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखना भी संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा माना जाता है। 

 

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी और मात्र एक कयास होगा कि फडणवीस के प्रधानमंत्री बनने की राह में कोई राजनीतिक अवरोध खड़ा किया जा रहा है। लेकिन यह जरूर सच है कि महाराष्ट्र में बदलते समीकरणों को केवल राज्य की राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

 

क्योंकि दिल्ली की राजनीति में उत्तराधिकारी घोषित नहीं किए जाते, बल्कि समय के साथ तय होते हैं। और कई बार सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक लड़ाइयां चुनावी मंचों पर नहीं, बल्कि सत्ता के गलियारों में लड़ी जाती हैं।