WhatsApp पर बिना मोबाइल नंबर शेयर किए करें चैट, आ रहा है नया Username फीचर, जानिए कैसे करेगा काम

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अगर आप किसी नए व्यक्ति से WhatsApp पर बात करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना चाहते तो जल्द ही यह संभव होगा। WhatsApp एक नया Username फीचर ला रहा है, जिसकी मदद से यूजर्स बिना फोन नंबर बताए भी बातचीत शुरू कर सकेंगे। कंपनी ने इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस सप्ताह से यूजर्स अपने पसंदीदा Username को पहले से रिजर्व कर सकेंगे।

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बिना नंबर शेयर किए होगी चैट

अब तक WhatsApp पर किसी से संपर्क करने के लिए मोबाइल नंबर देना जरूरी होता था। लेकिन नए Username फीचर के आने के बाद यूजर्स अपने फोन नंबर की जगह Username के जरिए दूसरे लोगों से जुड़ सकेंगे। इससे आपकी प्राइवेसी पहले की तुलना में और मजबूत होगी।

ग्रुप चैट में भी मिलेगा फायदा

यह फीचर उन लोगों के लिए भी उपयोगी होगा जो किसी नए ग्रुप, जैसे स्कूल, सोसायटी, स्पोर्ट्स टीम या किसी इवेंट के WhatsApp ग्रुप में शामिल होना चाहते हैं, लेकिन अपना मोबाइल नंबर सभी सदस्यों के साथ साझा नहीं करना चाहते।

अभी से रिजर्व कर सकेंगे Username

WhatsApp ने बताया कि दुनिया भर में उसके 3 अरब से अधिक यूजर्स हैं। ऐसे में कई लोगों के पसंदीदा नाम एक जैसे हो सकते हैं। इसी वजह से कंपनी ने फीचर लॉन्च होने से पहले ही Username रिजर्व करने की सुविधा शुरू की है, ताकि यूजर्स अपनी पसंद का नाम सुरक्षित कर सकें। अगर Username चुनने में परेशानी होती है तो WhatsApp एक Username Generator भी उपलब्ध कराएगा, जो आपके लिए उपयुक्त Username सुझाएगा।

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बिजनेस और क्रिएटर्स को मिलेगा खास विकल्प

 

छोटे कारोबार, कंटेंट क्रिएटर्स और संस्थानों के लिए WhatsApp अपने Instagram या Facebook पर पहले से इस्तेमाल किए जा रहे Username को WhatsApp पर भी क्लेम करने का विकल्प देगा। इससे सभी प्लेटफॉर्म पर एक जैसी डिजिटल पहचान बनाए रखना आसान होगा।

 

प्राइवेसी रहेगी और मजबूत

 

WhatsApp के अनुसार Username की कोई सार्वजनिक डायरेक्टरी नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति आपका Username खोज नहीं सकेगा। केवल वही लोग आपसे संपर्क कर पाएंगे जिन्हें आपका सटीक Username पता होगा। इसके अलावा कंपनी एक वैकल्पिक Username Key फीचर भी देगी, जिसके जरिए यूजर यह तय कर सकेगा कि कौन उससे संपर्क कर सकता है।

 

फोन नंबर रहेगा छिपा

 

जब Username फीचर पूरी तरह शुरू हो जाएगा और आपने इसे सक्रिय कर लिया होगा, तब किसी नए व्यक्ति या बिजनेस से पहली बार चैट करते समय आपका मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा।

 

  • ऐसे करें Username रिजर्व
  • WhatsApp का लेटेस्ट वर्जन अपडेट करें।
  • Settings में जाएं।
  • Account पर टैप करें।
  • Username विकल्प चुनकर अपना पसंदीदा Username रिजर्व करें।

कंपनी ने बताया है कि आने वाले महीनों में यह फीचर चरणबद्ध तरीके से सभी देशों में जारी किया जाएगा। आपके देश में उपलब्ध होने पर WhatsApp ऐप के भीतर ही इसकी सूचना दी जाएगी।

India-Iran : PM मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन से की बात, किन मुद्दों पर हुई चर्चा, क्या अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे प्रधानमंत्री

pm modi Masoud Pezeshkian

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से टेलीफोन पर बातचीत की। इस दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियन ने पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम और आगे की रणनीति की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को दी। प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में बने नए समझौते का स्वागत किया और भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दोहराते हुए कहा कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही होना चाहिए।

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उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। साथ ही समुद्री मार्गों पर नौवहन और वैश्विक व्यापार की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने के महत्व पर भी जोर दिया। इससे पहले ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। यह छह दिवसीय कार्यक्रम 4 जुलाई से ईरान के तीन शहरों में आयोजित किया जाएगा।

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हालांकि भारत सरकार ने अब तक आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया है कि कार्यक्रम में किस स्तर पर भागीदारी होगी। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे। उनकी जगह विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।

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कार्यक्रम की शुरुआत 4 और 5 जुलाई को तेहरान में श्रद्धांजलि समारोह से होगी। 6 जुलाई को मुख्य अंतिम यात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर क़ोम में विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा, जबकि 9 जुलाई को अयातुल्ला अली खामेनेई को उनके पैतृक शहर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। Edited by : Sudhir Sharma

UP में शिक्षा सुधार का नया मॉडल: कक्षा-कक्ष से मिली सीख के आधार पर तय होगी भविष्य की रणनीति, योगी सरकार का बड़ा कदम

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा सुधारों को नई ऊंचाई देते हुए अब कक्षा-कक्ष में होने वाले वास्तविक अधिगम को शिक्षा नीति का केंद्र बना दिया है। प्रदेश में पहली बार शिक्षकों के अनुभव, बच्चों के सीखने के साक्ष्य, परख के निष्कर्ष, टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज (टीएलपीएस) अध्ययन और निपुण भारत मिशन के जमीनी अनुभवों को एक मंच पर लाकर भविष्य की शैक्षणिक रणनीति पर व्यापक मंथन किया गया।

बेसिक शिक्षा विभाग और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान के प्लूटो ऑडिटोरियम में आयोजित 'पॉलिसी टू प्रैक्टिस डायलॉग' एवं टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 के विमोचन कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की अध्यक्षता में नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों, राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञों तथा शिक्षा क्षेत्र के अग्रणी संस्थानों ने विद्यालयी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, साक्ष्य-आधारित और परिणामोन्मुख बनाने की भावी कार्ययोजना पर विस्तार से विचार-विमर्श किया।

 

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा, स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार तथा बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी सहित बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, डायट विशेषज्ञ तथा लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। 

 

प्रारंभिक सत्र में उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन की प्रगति, अब तक हुए शिक्षा सुधारों, कक्षा-कक्ष में आए बदलाव तथा अधिगम गुणवत्ता सुधार के लिए अपनाई गई रणनीतियों का प्रस्तुतीकरण किया गया। इस दौरान परख के निष्कर्ष, शिक्षा सुधारों के प्रमुख आयाम, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण की 10 प्रमुख शिक्षण पद्धतियों, 15 कैच-अप रणनीतियों, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, अकादमिक कैलेंडर तथा निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रस्तुतीकरण क्वालिटी यूनिट के प्रभारी आनंद कुमार पाण्डेय ने किया।

 

टीएलपीएस रिपोर्ट ने दिखाई कक्षा-कक्ष में बदलाव की वास्तविक तस्वीर

कार्यक्रम में टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस)-2025 उत्तर प्रदेश रिपोर्ट का विमोचन भी किया गया। यह रिपोर्ट प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) को मजबूत बनाने के लिए कक्षा-कक्ष में हो रहे वास्तविक बदलावों का साक्ष्य-आधारित दस्तावेज है। रिपोर्ट में कक्षा 1 एवं 2 में भाषा और गणित शिक्षण की वर्तमान स्थिति, कक्षा का वातावरण, पाठ योजना, शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाएं, शिक्षण समय का उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, अकादमिक सहयोग तथा निपुण भारत मिशन के प्रभाव का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा सुधारों की वास्तविक सफलता का आधार कक्षा-कक्ष में दिखाई देने वाला परिवर्तन और बच्चों के सीखने के स्तर में होने वाला सुधार है। नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान बहराइच, रायबरेली, मिर्जापुर एवं बरेली के 200 विद्यालयों में किए गए इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, बच्चों की सहभागिता, शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक मेंटरिंग तथा विद्यालय स्तर पर आवश्यक सुधारों की पहचान की गई है। रिपोर्ट भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों को अधिक साक्ष्य आधारित, परिणामोन्मुख और बच्चों की सीखने की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती है।

 

प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण पर बनी साझा रणनीति

'स्ट्रेंथनिंग क्लासरूम प्रैक्टिसिज़ फॉर फाउंडेशनल लर्निंग' विषय पर आयोजित पैनल चर्चा में प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अधिक डेमो-आधारित और व्यावहारिक बनाने, अधिगम में पीछे रह गए बच्चों के लिए प्रभावी कैच-अप रणनीतियों को अपनाने, शिक्षकों की सतत मेंटरिंग को मजबूत करने तथा कक्षा-कक्ष में बच्चों के भीतर प्रश्न पूछने के संकोच और भय को दूर कर जिज्ञासापूर्ण शिक्षण वातावरण विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही एसआरजी, एआरपी एवं शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों की सराहना करते हुए ब्लॉक स्तर पर विद्यालयों की नियमित शैक्षणिक समीक्षा, प्रभावी अकादमिक सहयोग और सतत मार्गदर्शन को शिक्षा सुधारों की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। पैनल चर्चा में डायट वाराणसी के प्राचार्य उमेश कुमार शुक्ला, गाजीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी राजीव यादव, गौतम बुद्ध नगर की एसआरजी सदस्य रश्मि त्रिपाठी तथा पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय मूरघाट, बस्ती के प्रधानाध्यापक सर्वेष्ठ कुमार ने अपने अनुभव साझा किए।

 

अपर मुख्य सचिव ने शिक्षकों और अकादमिक नेतृत्व से किया सीधा संवाद

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण सत्र अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा का राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों, एसआरजी, एआरपी और बीईओ के साथ सीधा संवाद रहा। उन्होंने प्रभावी अकादमिक कैलेंडर, पठन अभियान, आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता, कैच-अप लर्निंग, हॉलीस्टिक प्रोग्रेस कार्ड, शिक्षक-नेतृत्व वाले नवाचार, बहुस्तरीय कक्षाओं के शिक्षण तथा कक्षा 3 से 5 तक निपुण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की। प्रतिभागियों ने अपने जमीनी अनुभव साझा करते हुए विद्यालयी शिक्षा को अधिक परिणामोन्मुख बनाने के सुझाव भी दिए।

 

भविष्य की शिक्षा व्यवस्था को मिलेगी नई दिशा

समापन सत्र में यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा सुधारों की अगली यात्रा साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, मजबूत शिक्षक क्षमता विकास, सतत अकादमिक सहयोग, प्रभावी मेंटरिंग और कक्षा-कक्ष केंद्रित नवाचारों पर आधारित होगी। विशेषज्ञों ने कहा कि नीति का वास्तविक प्रभाव तभी माना जाएगा, जब उसका परिणाम प्रत्येक बच्चे के अधिगम स्तर में दिखाई दे। Edited by : Sudhir Sharma

यूपी में विकास के नए कीर्तिमान, 3 महीने में दी 62 हजार करोड़ से अधिक की 5551 परियोजनाओं की सौगात

uttar pradesh development: बीते 9 साल से निरंतर विकास की बुलंदियों को छू रहा उत्तर प्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यदि वित्तीय वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निरंतर जनपदों के दौरे कर विकास की सौगात दे रहे हैं। वे पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्याचंल समेत प्रदेश के सभी जनपदों को विकास से जोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल, मई और जून के दौरान प्रदेशभर में आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, खेल, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी से जुड़ी 5,551 से अधिक विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

 

इन परियोजनाओं पर 62,282 करोड़ से अधिक रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जो प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। सीएम योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। 

हर क्षेत्र में विकास की समान गति

इन तीन महीनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़क, पुल, मेडिकल कॉलेज, खेल अवसंरचना, औद्योगिक पार्क, नगर विकास, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की गई। योगी सरकार ने केवल बड़े शहरों पर ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के जिलों में भी विकास कार्यों को समान प्राथमिकता दी।

गंगा एक्सप्रेसवे पर दौड़े विकास के पहिए, जेवर से हुई प्रगति की उड़ान

इस अवधि की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे व नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर का लोकार्पण रहा। मेरठ से प्रयागराज तक प्रदेश को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर से भी प्रगति की उड़ान हुई। एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान पहली फ्लाइट में बैठकर लखनऊ पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद भी किया। 

शिक्षा और तकनीक पर विशेष जोर

योगी सरकार ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक तकनीकी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की गई, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और थ्री-डी प्रिंटिंग जैसे भविष्य की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर में भी सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग की स्थापना के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ विस्तार

योगी सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी अनेक परियोजनाओं की शुरुआत की। ललितपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित स्वास्थ्य अवसंरचना से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। विभिन्न जिलों में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

उद्योग और निवेश को नई ऊर्जा

ललितपुर में 1,500 एकड़ में उत्तर प्रदेश का पहला फार्मा पार्क विकसित करने की घोषणा राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं विभिन्न जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक सुविधाओं और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के माध्यम से निवेश के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को मिला बढ़ावा

प्रदेश सरकार पर्यटन विकास को भी प्राथमिकता दे रही। संतकबीर नगर में तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर, बाबा बैजूनाथ धाम के विकास और बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। महोबा को एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में इको टूरिज्म को लेकर भी बड़े स्तर पर काम चल रहा है।

खेल और शहरी सुविधाओं का विस्तार

गोरखपुर में लगभग 393 करोड़ रुपये की लागत से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास किया गया, जिसमें 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। वहीं नगर निगमों में आधुनिक सदन भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, टू-लेन ब्रिज, ईको पार्क और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास से नागरिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया।

सामाजिक समरसता और जनकल्याण को भी प्राथमिकता

लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू परिवारों, पीलीभीत में हजारों बंगाली परिवारों को नागरिकता और भूमि अधिकार पत्र वितरित किए गए। इस तरह प्रदेश में कई अवसरों पर लोगों को नियुक्ति पत्र व अन्य सुविधाओं से जुड़े पत्र भी वितरित किए गए। वहीं श्रमिक कल्याण योजनाओं, कल्याण मंडपम और अन्य जनसुविधाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया।

विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव

इसी तरह रामपुर, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, उन्नाव, आजमगढ़, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद, ललितपुर और अन्य जिलों में सैकड़ों विकास परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जिस गति से हजारों विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ, उससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में विकास अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, खेल और शहरी विकास जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में एक साथ हो रहे निवेश प्रदेश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।

एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत सीएम योगी आदित्यनाथ स्वयं लोकार्पण और शिलान्यास से जुड़ी सभी परियोजनाओं को निगरानी करते आ रहे हैं। वहीं एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर, फार्मा पार्क और औद्योगिक क्लस्टर जैसी आधारभूत परियोजनाओं के साथ निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। कृषि, एमएसएमई, पर्यटन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी जा रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने, रोजगार सृजन, कौशल विकास और बेहतर कानून-व्यवस्था के माध्यम से उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य तेज आर्थिक विकास के साथ प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है।

योगी सरकार ने गन्ना किसानों को किया 31,682 करोड़ का भुगतान

up government sugarcane farmers payment: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की रक्षा और उनकी आर्थिक समृद्धि के क्षेत्र में नया कीर्तिमान बनाया है। प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 में गन्ना किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया। वहीं वर्ष 2017 से गन्ना किसानों को अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया है। देश का सर्वाधिक गन्ना मूल्य भुगतान करने वाला उत्तर प्रदेश निरंतर प्रथम स्थान पर बना हुआ है। 

 

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग विभाग के अनुसार वर्ष 1995 से 2017 तक के 22 वर्ष में किसानों को कुल 2,13,519 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था, जबकि वर्तमान सरकार ने मात्र नौ वर्ष में ही इससे 1,10,053 करोड़ रुपये अधिक भुगतान करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। वहीं वर्ष 2007 से 2017 (10 वर्ष) में कुल 1,47,346 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था, जबकि वर्ष 2017 से अब तक 3,23,572 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

मिलों ने 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया 

प्रदेश में योगी सरकार की किसान हितैषी नीतियों का असर वर्तमान पेराई सत्र 2025-26 में भी दिखाई दे रहा है। इस सत्र में अब तक किसानों को 31,682 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जो कुल देय राशि का 91.64 प्रतिशत है। गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की हैं। पेराई सत्र 2025-26 में प्रदेश की 121 संचालित चीनी मिलों ने 878.12 लाख टन गन्ने की पेराई कर 89.52 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है। 

10 लाख लोगों को मिला रोजगार 

मार्च 2017 से अब तक प्रदेश में 04 नई चीनी मिलों की स्थापना की गई है, जबकि 07 बंद चीनी मिलों का पुनर्संचालन किया गया है। इसके अलावा 42 निजी क्षेत्र, 01 निगम क्षेत्र और 01 सहकारी क्षेत्र की चीनी मिलों में क्षमता विस्तार किया गया है। इन प्रयासों से 1,28,500 टीसीडी अतिरिक्त पेराई क्षमता का सृजन हुआ है। नई औद्योगिक इकाइयों और क्षमता विस्तार के परिणामस्वरूप लगभग 10 लाख लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।

गन्ना के क्षेत्रफल में भी हुई काफी वृद्धि 

उत्तर प्रदेश में 2016-17 में प्रदेश का गन्ना क्षेत्रफल 20.54 लाख हेक्टेयर था, जो नौ वर्षों में 39.29 प्रतिशत बढ़कर 28.61 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसी अवधि में गन्ने की औसत उत्पादकता 72.38 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 83.25 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है। उन्नत गन्ना प्रजातियों, वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रयोग से प्रति हेक्टेयर 10.87 टन की वृद्धि दर्ज की गई है।

गन्ना किसानों की संख्या में भी बड़ी वृद्धि 

गन्ना किसानों की संख्या भी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2016-17 में प्रदेश में लगभग 33 लाख गन्ना किसान थे, जिनकी संख्या वर्तमान में बढ़कर 48 लाख हो गई है यानी नौ वर्ष में 15 लाख किसानों की वृद्धि हुई है। बढ़ते क्षेत्रफल, बेहतर उत्पादकता, रिकॉर्ड भुगतान और किसानों की संख्या में वृद्धि यह दर्शाती है कि प्रदेश सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण गन्ना किसानों की आय में वृद्धि हुई है। इन्हीं उपलब्धियों के बल पर उत्तर प्रदेश आज देश में गन्ना उत्पादन और गन्ना मूल्य भुगतान दोनों क्षेत्रों में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हो चुका है।

UPTET 2026 : मुख्यमंत्री योगी के सख्त निर्देश, 20 लाख अभ्यर्थियों के लिए सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था; सेवारत शिक्षकों के लिए होगी विशेष TET

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 प्रदेश के लाखों युवाओं की आकांक्षाओं से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण परीक्षा है। इसकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता किसी भी परिस्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। परीक्षा का संचालन केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की जवाबदेही का विषय है।

प्रत्येक अभ्यर्थी को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तनावमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि परीक्षा में शामिल होने वाले किसी भी अभ्यर्थी को आवागमन, प्रवास, सुरक्षा अथवा अन्य मूलभूत सुविधाओं के अभाव में किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

 

मुख्यमंत्री मंगलवार को आगामी 02, 03 एवं 04 जुलाई, 2026 को आयोजित होने वाली उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा कर रहे थे। 

 

इस दौरान, मुख्यमंत्री ने सेवारत शिक्षकों के हितों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता को देखते हुए कार्यरत शिक्षकों को अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सेवारत शिक्षकों के लिए पृथक शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) आयोजित करने के निर्देश दिए, ताकि उन्हें अधिक अवसर मिल सकें और केवल अवसर के अभाव में किसी शिक्षक को कठिनाई का सामना न करना पड़े।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रदेश के विभिन्न जनपदों के साथ अन्य राज्यों से भी आएंगे। ऐसे में रेलवे स्टेशन, बस अड्डों तथा प्रमुख यातायात केन्द्रों पर पर्याप्त सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्रों तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो। परिवहन निगम, रेलवे तथा आवश्यकतानुसार निजी स्थानीय परिवहन संचालकों के साथ समन्वय स्थापित कर अतिरिक्त परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। परीक्षा के पूर्व एवं पश्चात संभावित भीड़ को देखते हुए प्रभावी यातायात प्रबंधन किया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेष व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की जाएं। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि बड़ी संख्या में युवाओं के आवागमन के दौरान खाद्य एवं पेय पदार्थों के मूल्य अनावश्यक रूप से न बढ़ाए जाएं।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी परीक्षा केन्द्रों पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, छायादार प्रतीक्षास्थल, निर्बाध विद्युत आपूर्ति, अग्निशमन व्यवस्था तथा आकस्मिक चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध रहे। वर्तमान मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य एवं आपदा प्रबंधन तंत्र पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। प्रत्येक जनपद में स्थापित कंट्रोल रूम प्रभावी ढंग से कार्य करें तथा किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े सभी जिलाधिकारियों को मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परीक्षा के सफल एवं त्रुटिरहित संचालन के लिए एक दिन पूर्व सभी व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास अनिवार्य रूप से कर लिया जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा की शुचिता सर्वोपरि है। परीक्षा ड्यूटी में केवल स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों की ही तैनाती की जाए। गोपनीय परीक्षा सामग्री के भंडारण, परिवहन तथा परीक्षा उपरांत आयोग तक उसके सुरक्षित प्रेषण की पूरी प्रक्रिया उच्चतम सुरक्षा मानकों के अनुरूप संपन्न कराई जाए। उन्होंने सोशल मीडिया तथा अन्य माध्यमों पर अफवाह, भ्रामक अथवा गलत सूचनाएं प्रसारित करने के प्रयासों पर कड़ी निगरानी रखने और ऐसे मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

 

बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा-2026 का आयोजन प्रदेश के 60 जनपदों में स्थापित 955 परीक्षा केन्द्रों पर किया जाएगा। परीक्षा 02 से 04 जुलाई तक कुल पांच पालियों में आयोजित होगी। 02 जुलाई को दोनों पालियों में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा होगी। 03 जुलाई को प्रथम पाली में उच्च प्राथमिक तथा द्वितीय पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 04 जुलाई को प्रथम पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न होगी।

 

बैठक में बताया गया कि परीक्षा में कुल 19,94,661 अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। इनमें 17,67,180 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि 2,27,481 अभ्यर्थी अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे। परीक्षा में 1,85,791 सेवारत शिक्षक तथा 18,08,870 नए अभ्यर्थी सम्मिलित होंगे। प्राथमिक स्तर के लिए 3,88,179, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 8,16,436 तथा दोनों स्तरों के लिए 3,95,023 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।

 

बैठक में यह भी बताया गया कि सर्वाधिक परीक्षा केन्द्र एवं अभ्यर्थियों वाले जनपदों में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा तथा जौनपुर प्रमुख हैं। वाराणसी में 68 परीक्षा केन्द्रों पर 1,27,239 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रयागराज में 53 परीक्षा केन्द्रों पर 76,634 तथा लखनऊ में 43 परीक्षा केन्द्रों पर 76,720 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। इन जनपदों में बाहरी जिलों एवं अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के आगमन को देखते हुए यातायात, सुरक्षा, चिकित्सीय सहायता तथा प्रवास संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

‘हम पाकिस्तान का हिस्सा नहीं’, PoK में प्रदर्शनकारियों का ऐलान, आखिरी अल्टीमेटम से उड़ी शाहबाज और मुनीर की नींद

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन मंगलवार को और तेज हो गए। प्रदर्शनकारियों ने खुलकर इस्लामाबाद के अधिकार को चुनौती देते हुए कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह बयान रावलाकोट के ईदगाह ग्राउंड में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया गया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि आवश्यक खाद्य सामग्री और राशन की आपूर्ति बाधित की गई तो वे अपने अस्तित्व के लिए 'दूसरे रास्ते' अपनाने को मजबूर होंगे। प्रदर्शनकारियों ने तानाशाही के खिलाफ‍ बिगुल फूंक दिया है। 

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नहीं बर्दाश्त करेंगे सामूहिक सजा 

रावलाकोट के ईदगाह ग्राउंड में सैकड़ों लोग खाद्य संकट, महंगाई और खराब प्रशासन के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार जानबूझकर राशन और जरूरी सामान की आपूर्ति रोककर आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।

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 प्रदर्शनकारियों ने लगाए सामूहिक सजा देने के आरोप

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए PoK के नेता सरदार अमन खान ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान सरकार आम नागरिकों को सामूहिक रूप से सजा देने के उद्देश्य से जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित कर रही है। उन्होंने कहा कि हमें आपके राशन की जरूरत नहीं, बल्कि आपको हमारी जरूरत है।

अगर खाद्य आपूर्ति बंद रही तो लोग अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशेंगे। यह आंदोलन जम्मू-कश्मीर अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा है। पाकिस्तान सरकार ने इसी महीने आतंकवाद निरोधी कानूनों के तहत इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में प्रदर्शन लगातार जारी हैं।

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रक्षा मंत्री के बयान से बढ़ा विवाद

हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रावलाकोट और मीरपुर के लोगों को वास्तविक कश्मीरी नहीं” बताया था। उनके इस बयान के बाद स्थानीय नेताओं और लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली, जिससे इस्लामाबाद और स्थानीय नेतृत्व के बीच तनाव और बढ़ गया।

 

आतंकवाद विरोधी कानून के तहत कार्रवाई

रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में यह आंदोलन महंगाई, खाद्य संकट और बेहतर प्रशासन की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन अब पाकिस्तान सरकार इसे सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रही है। बताया जा रहा है कि सरदार अमन खान समेत अवामी एक्शन कमेटी के कई नेताओं के खिलाफ आतंकवाद निरोधी कानून के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। इससे आंदोलन से जुड़े लोगों की गिरफ्तारी और व्यापक कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।

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इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित

रिपोर्ट्स के मुताबिक जून की शुरुआत से ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में इंटरनेट सेवाओं पर प्रतिबंध लगा हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार आंदोलन की तस्वीरें और वीडियो दुनिया तक पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट बंद कर रही है।

 

लगातार जारी प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के साथ टकराव के कारण कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रभावित इलाकों में खाद्य सामग्री की कमी की भी खबरें हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले दो सप्ताह में हुई झड़पों में कम से कम 22 लोगों की मौत हो चुकी है। Edited by : Sudhir Sharma

CM योगी ने रामपुर और बिलासपुर को दी 700 करोड़ से ज्‍यादा लागत वाली विकास परियोजनाओं की सौगात, आस्था के अपमान पर विपक्ष पर किया कड़ा प्रहार

Chief Minister Yogi Adityanath targeted SP and Congress

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जनता समझ चुकी है इन कालनेमियों का झूठ व दोहरा चरित्र

– रामभक्तों की ताकत से सपा-कांग्रेस को बनना पड़ा उनका पिछलग्गू

– तीर्थस्थलों के विकास से चिढ़ी सपा-कांग्रेस कर रहीं जनता को गुमराह

– सपा शासन में अवैध कब्जों व प्रताड़ना के काम आता था रामपुर का चाकू

– बिलासपुर की रुद्रविलास चीनी मिल का होगा पुनरुद्धार व विस्तारी

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आस्था व विरासत के अपमान पर विपक्ष पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग 2017 से पहले कांवड़ यात्रा रोकने, त्योहारों पर बंदिशें लगाने और 'जय श्रीराम' बोलने पर लाठी-गोली चलवाते थे, आज वे अपनी राजनीतिक जमीन खिसकती देख आस्था की वकालत कर रहे हैं। जो कांग्रेस प्रभु श्रीराम व श्रीकृष्ण के अस्तित्व को ही नकार चुकी थी, वह भी 'राम सबके हैं' कहकर अयोध्या जाने के लिए मचल रही है। उन्होंने ऐसे लोगों की तुलना 'कालनेमी' के छल-कपट से करते हुए कहा कि जनता इनके झूठ व दोहरे चरित्र को अच्छी तरह समझ चुकी है।

 

मुख्यमंत्री मंगलवार को रामपुर जनपद के मिलक व बिलासपुर विधानसभा क्षेत्रों की 700 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाली 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इंटरमीडिएट/हाईस्कूल परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित किए। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि और मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मानित भी किया।

 

प्रभु श्रीराम जानते हैं कौन सही और कौन बुरा

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देखिए रामभक्तों पर लाठी-गोली चलाने वाले रामभक्ति की दुहाई दे रहे हैं, वकालत कर रहे हैं। यह रामभक्तों की, आपके वोटबैंक की ताकत है कि ये पार्टियां आपकी पिछलग्गू बन रही हैं। उन्हें अपने पापों, कर्मों पर पश्चाताप भी होता होगा।

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लेकिन प्रभु श्रीराम तो जग नियंता हैं, ब्रह्मांड के स्वामी हैं। उन्हें पता है कि कौन सही है और कौन बुरा। दरअसल, सपा-कांग्रेस को चिढ़ यह है कि अयोध्याधाम, काशी-विश्वनाथ धाम, मां विंध्यवासिनी धाम, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज धाम, नैमिषारण्य, शुक्रतीर्थ इतने सुंदर कैसे हो गए। वे इसे रोकना चाहते थे, नहीं कर सके तो चिढ़ गए। कुछ नहीं मिला तो झूठ का सहारा लेकर जनता को गुमराह करने लगे।

 

कांग्रेस-सपा का शासन अन्याय का प्रतीक

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा शासनकाल अन्याय व अराजकता का प्रतीक रहा है। 2017 से पहले सपा की निरंकुश सत्ता में रामपुर के गरीबों और बाल्मीकि समुदाय की जमीनों पर जबरन कब्जा किया जाता था और उनकी आवाज को दबा दिया जाता था। विकास केवल सैफई व रामपुर के दो परिवारों तक सीमित था, जबकि बाकी जनता को विकास से वंचित रखा जाता था। बिजली देने में भी 'पिक एंड चूज' की नीति अपनाई जाती थी, जिससे सैफई में बिजली आती थी लेकिन पीलीभीत व रामपुर जैसे क्षेत्र अंधेरे में रहते थे।

जनता जनार्दन ने इस अन्यायी सत्ता को पलटकर पूरे राज्य में संदेश दिया। डबल इंजन सरकार में ‘पिक एंड चूज’ नहीं होता। बिजली सभी 75 जनपदों में आएगी। जहां भी आवश्यकता थी, इंटर कॉलेज, डिग्री कॉलेज, पॉलिटेक्निक, आईटीआई दिए। अब कोई विकास नहीं रोक सकता, नौजवान के भविष्य से खिलवाड़ नहीं कर सकता, बहन-बेटी का अपमान नहीं कर सकता।

 

वसूली पर निकल पड़ती थी चाचा-भतीजा की जोड़ी

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सपा शासन में भ्रष्टाचार के चलते उद्योग बंद होते गए। अन्नदाता किसान हताश होकर आत्महत्या के लिए मजबूर हो गया। न तो गरीब कल्याण के लिए कोई योजना थी और न विकास कार्यों के लिए धन। युवाओं के भविष्य से जमकर खिलवाड़ किया गया।

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अराजकता का यह हाल था कि कोई सरकारी विज्ञापन निकलता था तो 'चाचा-भतीजा की जोड़ी' वसूली के लिए निकल पड़ती थी और कोर्ट को भर्तियों पर रोक लगानी पड़ती थी। सपा व कांग्रेस के इन्हीं पापों से यूपी बीमारू बना था।

 

विरासत और विकास का नया मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर की पावन धरा भगवान बामेश्वर महादेव, श्री पातलेश्वर महादेव, ओम नागेश्वर महादेव, कोसी मंदिर व मां बाला सुंदरी के दिव्य आशीर्वाद से निरंतर लाभान्वित है। सरकार इन पौराणिक व आध्यात्मिक विरासत स्थलों के पुनरुद्धार के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। 2017 से पहले जहां त्योहारों पर रोक लगाई जाती थी।

उपद्रव व दंगे होते थे, वहीं आज कांवड़ यात्रा, दुर्गा पूजा, दीपावली, रामनवमी व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे सभी पर्व पूरी भव्यता व सुरक्षा के साथ मनाए जा रहे हैं। अयोध्या नगरी ब्रॉडगेज डबल रेलवे लाइन, फोर-लेन सड़क मार्ग और महर्षि बाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट से जुड़कर त्रेतायुग का स्मरण करा रही है।

आर्थिक प्रगति व इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अब 'बीमारू राज्य' नहीं रहा, बल्कि यह भारत की टॉप-3 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर सबसे तेज गति से बढ़ने वाली इकोनॉमी बन चुका है। प्रदेश आज युवाओं को रोजगार और अन्नदाताओं को अनुदान देने में अग्रणी है। हम खाद्यान्न, दुग्ध, चीनी व एथेनॉल उत्पादन में देश में पहले या दूसरे नंबर पर गिने जाते हैं।

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'वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट' योजना के माध्यम से रामपुर के पैच वर्क, जरी वर्क, वायलिन निर्माण व मेंथा उत्पादन जैसे पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक पहचान और युवाओं को नए रोजगार मिले हैं। रामपुर के प्रसिद्ध चाकू का दुरुपयोग समाजवादी पार्टी जनता की जमीनों पर कब्जा करने और उन्हें प्रताड़ित करने में करती थी, लेकिन डबल इंजन सरकार में यही चाकू जनता की सुरक्षा में काम आ रहा है।

 

रामपुर में चौतरफा विकास

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि गोरखपुर-शामली नया इकोनॉमिक कॉरिडोर रामपुर से होकर गुजरेगा, जो गोरखपुर को सिलीगुड़ी और शामली को पानीपत से जोड़कर क्षेत्र में विकास को और मजबूत करेगा। रामपुर में ढांचागत विकास को गति देते हुए 3 मीटर चौड़ी सड़कों को 7 व 10 मीटर और फोर-लेन में परिवर्तित किया जा रहा है। बिलासपुर की रुद्रविलास चीनी मिल के पुनरुद्धार व विस्तारीकरण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सर्वे रिपोर्ट आते ही सरकार वित्तीय राशि जारी करेगी।

 

सबका साथ-सबका विकास ही मूलमंत्र

 मुख्यमंत्री ने कहा कि 'सबका साथ, सबका विकास' के मूलमंत्र के साथ डबल इंजन की सरकार तुष्टिकरण के बजाय आमजन के संतुष्टिकरण पर विश्वास करती है। प्रदेश की 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स को राज्य सरकार द्वारा 5 लाख रुपए का सुरक्षा बीमा कवर प्रदान किया गया है। हर महीने ई-पॉस मशीनों के माध्यम से लखनऊ से सीधे मॉनिटरिंग कर गरीबों को शत-प्रतिशत राशन मिल रहा है। रसोई गैस का सिलेंडर 2017 से पहले सपना था, आज हर गरीब के पास सिलेंडर अपना है।

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गरीबों को आयुष्मान भारत योजना के तहत 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य कार्ड मिला है। कार्ड न होने पर मुख्यमंत्री राहत कोष से उपचार के लिए संपूर्ण राशि दी जा रही है। प्रत्येक तहसील में फायर स्टेशन की स्थापना की जा रही है। इसके साथ ही 'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत बेसिक शिक्षा परिषद् के स्कूलों और 'प्रोजेक्ट अलंकार' के माध्यम से इंटर कॉलेजों को भव्य स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।

 

निवेश प्रस्तावों से मिली उद्योगों को गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत का सम्मान हो या नौजवानों को नौकरी देने का संकल्प, सरकार हर मोर्चे पर प्रतिबद्ध है। सरकारी भर्तियों के नियुक्ति पत्र वितरण में रामपुर के युवाओं का नाम देखकर संतोष मिलता है। पहले जो युवा वंचित थे, आज प्रदेश की सेवाओं में चयनित होकर विकास में भागीदार बन रहे हैं। रामपुर, मिलक, बिलासपुर, स्वार व चमरौआ विधानसभा क्षेत्रों के युवा आज सरकारी नौकरियों और उद्योगों में अवसर पा रहे हैं। निवेश प्रस्तावों से उद्योगों को गति मिली है।

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इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह, कृषि राज्य मंत्री सरदार बलदेव सिंह औलख, विधायक श्रीमती राजबाला सिंह, आकाश सक्सेना, शफीक अहमद अंसारी, एमएलसी जयपाल सिंह व्यस्त, हरी सिंह ढिल्लो, जिला पंचायत अध्यक्ष ख्यालीराम लोधी, सूर्य प्रकाश पाल, पूर्व सांसद घनश्याम लोधी, पूर्व विधायक शिव बहादुर सक्सेना, भाजपा जिला अध्यक्ष हरीश गंगवार आदि उपस्थित रहे।

जल गंगा संवर्धन में 10 हजार करोड़ से संवारी 3 लाख से ज्यादा संरचनाएं, सीएम डॉ. मोहन यादव बोले- जल संरक्षण में एमपी नंबर-1

भोपाल। 'कपिल मुनि की तपोस्थली राजगढ़ जिला जल संचय के कार्यों में अग्रणी बना है। यह जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अंतर्गत श्रेष्ठ कार्य करने वाले 6 जिलों में शामिल है। राज्य सरकार ने 19 मार्च से 30 जून तक 100 दिन के अभियान में कुएं, बावड़ी, तालाब, नदियों, अमृत सरोवर और प्राचीन जल स्त्रोतों के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया। यह प्रसन्नता का विषय है कि जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 में लगभग 10 हजार करोड़ लागत से 3 लाख 62 हजार के अधिक जल स्त्रोतों का पुनरोद्धार किया गया है। उन्होंने कहा कि इन्हीं प्रयासों से देश के बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में अग्रणी बना है।' यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कही। सीएम डॉ. मोहन यादव मंगलवार को राजगढ़ में आयोजित 'जल गंगा संवर्धन अभियान-2026' के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दिव्यांगों को ट्राय साइकिल और महिलाओं को स्कूटी की चाबी दी। इस दौरान राजगढ़ जिले के पर्यटन विकास पर केंद्रित कॉफी टेबल बुक का अनावरण भी हुआ। समारोह में राजगढ़ के 405 स्व-सहायता समूहों को 20 करोड़ की सहायता राशि सहित अन्य हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया गया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अब वर्षा जल के संचयन, नालों की सफाई और नदियों के पुनर्जीवन की दिशा में यह अभियान आगे बढ़ रहा है। जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 में राजगढ़ जिले में 341 करोड़ से अधिक लागत के 30 से अधिक विकास कार्य किए गए। आज 247 करोड़ 40 लाख के 14 भूमि-पूजन और 100 करोड़ से 17 विकास कार्यों का लोकार्पण हुआ है, जिसमें जीरापुर का सांदीपनि विद्यालय भी शामिल है। आज इस जिले में 30 करोड़ की लागत से निर्मित पुल का लोकार्पण हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के अंतर्गत देशभर में जल संरक्षण के लिए अनेक कार्य हुए हैं। जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि जल ही पृथ्वी पर प्रकृति और जीवन का आधार है। पंच तत्वों में जल ऐसा तत्व है, जिसका सनातन संस्कृति में जल का विशेष महत्व है। हमारे शरीर में 70 प्रतिशत से अधिक जल की मात्रा है। इसीलिए नदी, तालाब, कुएं, बावड़ी सहित सभी जल रचनाएं आनंदित करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की पार्वती, चंबल, कालीसिंध और क्षिप्रा आगे जाकर पवित्र गंगा नदी में मिलती हैं। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने जल संचयन के इस अभियान को जल गंगा नाम दिया। यह गंगा बेसिन का क्षेत्र है।  

 

भावी पीढ़ियों के लिए बचाना है जल-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता सभी के लिए मिसाल है। इससे सीख लेकर हमें कठिन समय में मित्र की सहायता करें, लेकिन एहसान नहीं जताना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने लगातार तीसरे वर्ष जल संरक्षण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस साल अलनीनो के प्रभाव से कम वर्षा का अनुमान है, इसीलिए प्रदेश में अमृत सरोवर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, नदी संरक्षण जैसे जल स्त्रोतों के संरक्षण कार्य निरंतर जारी रहेंगे। आज जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 का समापन हो रहा है, लेकिन हमें भावी पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए पानी की बूंद-बूंद का संरक्षण करने का संकल्प लेना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भव्य सांदीपनि विद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है। राज्य सरकार ने गेहूं उत्पादक किसानों को उपज का पूरा लाभ दिया और 100 लाख से अधिक मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन कर अन्नदाताओं को 2625 रुपए प्रति क्विंटल का भुगतान किया है। वर्ष 2023 में राज्य में सिंचित भूमि का रकबा 44 लाख हेक्टेयर था, जो अब बढ़ाकर 65 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। बीते 3 साल में ही राजगढ़ जिले में सिंचाई का रकबा 50 हजार हेक्टेयर से बढ़ाकर ढाई लाख हेक्टेयर हो चुका है। राजगढ़ में पालायन रुक गया और युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिलने लगा है। राज्य सरकार हम महीने लाड़ली बहनों को 1500 रुपए भेजकर रक्षाबंधन मना रही है। किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और स्कूली बच्चों को नि:शुल्क ड्रेस, कॉपी, किताबें, साइकिलें प्रदान कर रही है। हमारी सरकार हर वर्ग के कल्याण के लिए काम कर रही है। 

 

सिंहस्थ-2028 की भव्य तैयारियां जोरों पर-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में सिहस्थ-2028 के भव्य आयोजन के लिए बाबा महाकाल की कृपा से सभी तरह के प्रबंधन किए जा रहे हैं। सिंहस्थ में लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन आने का अनुमान है। श्रद्धालुओं के लिए आवागमन के मार्ग, भोपाल से राजगढ़, उज्जैन, मंदसौर तक नई सड़क परियोजनाओं पर काम चल रहा है। सिंहस्थ भारत ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा मेला है। ऐसे में उज्जैन में सभी प्रकार के प्रबंधन हो रहे हैं। इससे विपक्षी दल नाखुश है। लेकिन हमारी सरकार विकास यात्रा को जारी रखने में किसी से डरने और दबने वाली नहीं है। हमारी सरकार सभी प्रकार के विकास कार्यों पर काम करती रहेगी।

 

सीएम डॉ. यादव ने कीं ये घोषणाएं-इस मौके पर सीएम डॉ. यादव ने द्वारिका योजना के अंतर्गत सारंगपुर और पचोर सहित राजगढ़ की सभी नगरपालिकाओं में सड़क विकास के कार्यों की घोषणा की। उन्होंने भैंसवामाता के भव्य-दिव्य लोक निर्माण के लिए प्रस्ताव मंजूर करने की भी घोषणा की। इसके अलावा उन्होंने इसके प्रथम चरण के लिए 20 करोड़ की राशि भी प्रदान कर दी।

 

एक-एक बूंद करें संचित-पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान में अब तक हुए सभी कार्यों को सरकार प्रमाणित करती है। राजगढ़ ऐसा जिला है, जहां पानी की कमी है और यह जिला बाहर के पानी का संचय कर अपनी जरूरतों को पूरा करता है। इस साल बारिश के मौसम में कम वर्षा का अनुमान है। नदियों के उद्गम स्थल सूखे हैं। हम सभी को पानी की एक-एक बूंद संचित कर भावी पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना है। कम वर्षा से डरने की जरूरत नहीं है। राज्य सरकार और सभी अधिकारी-कर्मचारी जनभागीदारी से जल संरक्षण के प्रयास कर रहे हैं।

इंदौर कलेक्‍ट्रेट की जनसुनवाई की ‘कतार’ छोटी क्‍यों नहीं होती, क्‍या निचले विभागों में नहीं हो रही सुनवाई?

Jan Sunwai indore

आंखों में न्‍याय की उम्‍मीद। चेहरे पर तकलीफ और शिकन। हाथों में आवेदन जिसमें अपनी तकलीफों को दर्ज कर के इंदौर के कलेक्‍ट्रेट कार्यालय में हर मंगलवार को आम लोगों की भीड़ इस आस में पहुंचती है कि यहां उनकी सुनवाई होगी, उन्‍हें न्‍याय मिलेगा। सुबह 10 बजते ही यहां लोगों की कतार लगना शुरू हो जाती है। लेकिन ये भीड़ बहुत कुछ कह रही है। यह कह रही है कि या तो शहर में अन्‍याय बढ़ रहा है या फिर जिला प्रशासन के तमाम विभाग लोगों की समस्‍याएं हल नहीं कर पा रहे हैं और पीड़ितों को मजबूरन कलेक्‍टर कार्यालय का रुख करना पड़ रहा है।

इंदौर कलेक्ट्रेट की मंगलवार को होने वाली जनसुनवाई में लगातार बढ़ती भीड़ के पीछे कई प्रशासनिक, सामाजिक और जमीनी कारण हैं।

1. स्थानीय स्तर (निचले अधिकारियों) पर सुनवाई न होना
भीड़ बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि आम नागरिक जब अपनी समस्याओं को लेकर पटवारी, तहसीलदार, नगर निगम के जोन दफ्तरों या स्थानीय पुलिस थानों के चक्कर काटते हैं, तो वहां उनकी शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं होता। जब नीचे के स्तर पर सुनवाई नहीं होती, तो थक-हारकर लोग सीधे कलेक्टर दरबार (जनसुनवाई) का रुख करते हैं।

2. तुरंत एक्शन और 'स्पॉट सेटलमेंट' की उम्मीद
जनसुनवाई में कलेक्टर (जैसे वर्तमान में शिवम वर्मा) और एडीएम/एसडीएम स्तर के वरिष्ठ अधिकारी खुद बैठते हैं। कई गंभीर मामलों (जैसे स्वास्थ्य सहायता, आर्थिक मदद या वरिष्ठ नागरिकों के विवाद) में प्रशासन मौके पर ही फैसला लेता है या संबंधित विभाग को कड़े निर्देश देता है। इस त्वरित कार्रवाई (On-the-spot action) के भरोसे के कारण भी लोगों की उम्मीदें जनसुनवाई से ज्यादा जुड़ी हैं।

3. जमीन, मकान और धोखाधड़ी के बढ़ते मामले

  • इंदौर में रियल एस्टेट और कॉलोनियों का जाल तेजी से फैला है।
  • अवैध कॉलोनियों में प्लॉटों की हेराफेरी,
  • भूमाफियाओं द्वारा धोखाधड़ी
  • पुश्तैनी जमीन-जायदाद के आपसी विवाद
  • नामांतरण (Mutation) व सीमांकन (Demarcation) में हो रही देरी के कारण बड़ी संख्या में पीड़ित कलेक्ट्रेट पहुंच रहे हैं।

4. सरकारी योजनाओं और पेंशन से जुड़ी तकनीकी दिक्कतें
वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड या हाल ही में मतदाता सूची (Voter List) में नाम कटने/जुड़वाने जैसी समस्याओं के कारण बड़ी संख्या में गरीब और मध्यम वर्ग के लोग परेशान रहते हैं। जब इन योजनाओं का लाभ मिलने में तकनीकी खराबी या कागजी अड़चनें आती हैं, तो लोग न्याय की गुहार लगाने कलेक्ट्रेट आते हैं।

5. बुजुर्गों और महिलाओं के लिए विशेष संवेदनशीलता
कलेक्ट्रेट में वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं की समस्याओं को प्राथमिकता दी जाती है। भरण-पोषण और पारिवारिक विवादों के निपटारे के लिए विशेष कैंप भी लगाए जाते हैं। इस संवेदनशीलता के कारण भी बुजुर्ग और असहाय लोग सीधे यहां आना सुरक्षित और बेहतर समझते हैं। कुन जमा कहें तो कलेक्ट्रेट में बढ़ती भीड़ इस बात का प्रमाण है कि एक तरफ जनता का भरोसा जिला प्रशासन और कलेक्टर पर बहुत मजबूत है, लेकिन दूसरी तरफ यह इस बात का भी संकेत है कि निचले स्तर के सरकारी दफ्तरों (थानों और तहसीलों) को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने की सख्त जरूरत है ताकि लोगों को इतनी दूर न भागना पड़े।