Share Bazaar में गिरावट थमी, Sensex 444 अंक उछला, Nifty भी 24000 के पार

Decline in Indian stock market over past two days has come to halt

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में पिछले 2 दिनों से जारी गिरावट पर आज विराम लग गया। भारतीय शेयर बाजार में आज जोरदार उछाल आया। बीएसई का सेंसेक्स 443.97 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76922.64 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 140.10 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24005.85 अंक पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 631.41 अंक यानी 0.82 प्रतिशत चढ़कर 77110.08 अंक तक पहुंच गया  था।

भारतीय शेयर बाजार में पिछले 2 दिनों से जारी गिरावट पर आज विराम लग गया। भारतीय शेयर बाजार में आज जोरदार उछाल आया। बीएसई का सेंसेक्स 443.97 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76922.64 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 140.10 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24005.85 अंक पर पहुंच गया।

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कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स 631.41 अंक यानी 0.82 प्रतिशत चढ़कर 77110.08 अंक तक पहुंच गया  था। सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 22 तेजी के साथ बंद हुए। इटरनल में सबसे ज्यादा 5.89 फीसदी तेजी रही। इसके अलावा एशियन पेंट्स, हिंदुस्तान यूनिलीवर, महिंद्रा एंड महिंद्रा, अडाणी पोर्ट्स और अल्ट्राटेक सीमेंट में भी उल्लेखनीय तेजी रही।

निफ्टी मिडकैप में 0.34 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.36 फीसदी तेजी आई। कच्चे तेल की कीमतों में कमी और भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते की उम्मीदों से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है। एशियाई बाजारों में जापान का निक्की 225 और चीन का एसएसई कंपोजिट बढ़त में, जबकि दक्षिण कोरिया का कॉस्पी गिरावट में रहा। विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) ने मंगलवार को 2556.75 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

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इससे पहले यानी मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। कारोबार के अंत में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। बिकवाली के दबाव में बीएसई सेंसेक्स 249.70 अंक गिरकर 76478.67 पर बंद हुआ, वहीं एनएसई निफ्टी भी 80.50 अंकों की गिरावट के साथ 23865.75 के स्तर पर आ गया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और आईटी शेयरों में मुनाफावसूली से बाजार पर दबाव रहा। 

‘अमित शाह ने ढाई साल में एक बार भी रामलला के दर्शन क्यों नहीं किए?’ केजरीवाल के गृहमंत्री से 5 तीखे सवाल

kejriwal amit shah

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि राम मंदिर बनने के बाद पिछले ढाई साल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एक बार भी राम मंदिर में भगवान श्री राम के चरणों में माथा टेकने नहीं गए। उन्होंने कहा कि देश के गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के पास भगवान श्रीराम के नाम पर वोट मांगने का समय है, लेकिन भगवान रामलला से आशीर्वाद लेने का समय नहीं? ALSO READ: “नेताओं को राजनीतिक मजाक बर्दाश्त करना चाहिए”: राघव चड्ढा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

 

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम के मंदिर में सामने आए चंदा और चढ़ावा चोरी के मामले ने पूरे देश के सनातन समाज को आहत किया है। गृहमंत्री अमित शाह पूरे देश में भगवान श्रीराम और राम मंदिर के नाम पर वोट मांगते हैं, लेकिन रामलला के दर्शन करने तक नहीं जाते। सनातन के लिए सच्ची भावना से केवल आम आदमी पार्टी ही कैसे काम कर रही है? 

42 से ज्यादा बार राम का जिक्र

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तक एक बार भी अमित शाह राम मंदिर नहीं गए। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुए ढाई साल हो गए। इन ढाई साल में एक बार भी वे भगवान राम के दर्शन करने नहीं गए। इन ढाई सालों में उन्होंने 42 से ज़्यादा बार अपने भाषणों और इंटरव्यू में भगवान राम और मंदिर का जिक्र किया जिसमे कई बार राम और मंदिर के नाम पर वोट मांगा। लेकिन दर्शन करने नहीं गए। इनके लिए राम केवल सत्ता हासिल करने और पैसे कमाने का ज़रिया है। इनकी राम में कोई आस्था नहीं है।

 

केजरीवाल के अमित शाह से सवाल

  • आप अभी तक राम मंदिर क्यों नहीं गए?
  • क्या भगवान राम के दर्शन करने का आपका मन नहीं करता?
  • क्या राम मंदिर जाने का आपका मन नहीं करता?
  • क्या आपको भगवान राम का आशीर्वाद नहीं चाहिए?
  • क्या आप राम को भगवान मानते हो?

चोरों को बचाने में लगी सरकार

केजरीवाल ने कहा कि भगवान राम कोई पत्थर की मूर्ति नहीं हैं। भगवान राम सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान हैं। चंदा चोरी करने वालों को वह ऐसा दंड देंगे, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी। 

 

मौजूदा केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार चोरों को बचाने में लगी हैं। अगर चोरों को सजा दिलानी है, तो सरकार बदलना बेहद जरूरी है। पूरे समाज को ऐसे लोगों और उनका साथ देने वालों का पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए।

“नेताओं को राजनीतिक मजाक बर्दाश्त करना चाहिए”: राघव चड्ढा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

Raghav Chadha

दिल्ली हाईकोर्ट ने भाजपा नेता राघव चड्ढा मामले में बुधवार को बड़ा फैसला किया। अदालत ने सोशल मीडिया से 5 मानहानिकारक पोस्ट हटाने के आदेश दिया। बाकी कंटेंट हटाने की मांग खारिज की। हाईकोर्ट ने कहा कि नेताओं को राजनीतिक मजाक को बर्दाश्त करना चाहिए। व्यंग्यात्मक आलोचना का मतलब हमेशा मानहानि नहीं होता। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

 

मजाक राजनीति का एक अहम हिस्सा 

न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के गठबंधन, कामकाज या नीतियों में बदलाव को लेकर मजाक राजनीति का एक अहम हिस्सा है। किसी भी पार्टी के नेता के किसी भी काम पर जनता या विरोधी पार्टियों के सदस्यों की तरफ से आलोचना हो सकती है। कभी-कभी यह आलोचना व्यंग्यात्मक मजाक के रूप में भी सामने आ सकती है।

 

'पर्सनैलिटी राइट्स' का कोई मामला नहीं

राघव चड्ढा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पैसे के लिए खुद को बेचने के आरोप वाले कंटेंट को हटाने की मांग की थी। उन्होंने अपने पर्सनैलिटी और प्राइवेसी राइट्स की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी।

 

मामले में सुनवाई करते हुए अदालत ने राघव चड्ढा के खिलाफ पोस्ट किए गए 5 मानहानि करने वाले कंटेंट को हटाने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि उनके केस में 'पर्सनैलिटी राइट्स' का कोई मामला शामिल नहीं है। ALSO READ: एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल बना वाहनों का 'दुश्मन'? इंदौर के मैकेनिकों की चौंकाने वाली रिपोर्ट

 

अंतरिम अर्जी पर फैसला सुरक्षित रखते हुए जस्टिस प्रसाद ने कहा कि प्रथम दृष्टया, विवादित पोस्ट में चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने के राजनीतिक फैसले की आलोचना थी और मानहानि और आलोचना के बीच की रेखा बहुत बारीक है।

श्रीराम को चढ़ावे की नहीं, हमारे विश्वास की जरूरत है

Ayodhya Ram Mandir

Shri Ram Janmabhoomi Temple controversy: “Quis custodiet ipsos custodes?” — पहरेदारों की निगरानी कौन करेगा? लगभग दो हजार वर्ष पहले रोमन व्यंग्यकार जुवेनाल ने यह प्रश्न पूछा था। यह प्रश्न रोमन साम्राज्य के लिए था, लेकिन समय ने उसे सार्वभौमिक बना दिया। आधुनिक लोकतंत्रों से लेकर धार्मिक संस्थाओं तक, हर सभ्यता अंततः इसी प्रश्न के सामने आकर खड़ी होती है।

 

भारतीय सार्वजनिक जीवन में आज यह प्रश्न एक बार फिर प्रासंगिक हो उठा है। और इस बार इसका संबंध किसी सरकार, निगम या राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि उस नाम से जुड़ा है जो करोड़ों भारतीयों के लिए केवल धर्म नहीं, बल्कि संस्कृति, स्मृति और नैतिकता का पर्याय है—श्रीराम।

 

भारतीय सभ्यता के सबसे बड़े नैतिक और सांस्कृतिक प्रतीकों में से एक श्रीराम हैं। वे केवल एक देवता नहीं, बल्कि एक विचार हैं; केवल एक धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि एक सभ्यतागत स्मृति हैं। वे राजा भी हैं और निर्वासित भी। विजेता भी हैं और त्यागी भी। उन्होंने सत्ता पाई, लेकिन सत्ता के लिए नियम नहीं बदले। उन्होंने विजय प्राप्त की, लेकिन विजय के बाद अहंकार को स्थान नहीं दिया। उन्होंने राज किया, लेकिन स्वयं को राजधर्म से ऊपर कभी नहीं माना।

 

यही कारण है कि भारतीय परंपरा ने उन्हें केवल पूजा नहीं, बल्कि अनुकरण के योग्य माना। विडंबना यह है कि मर्यादा के इस सबसे बड़े प्रतीक के नाम पर खड़ी हुई संस्थाओं के सामने आज सबसे बड़ा प्रश्न भी मर्यादा का ही है—सार्वजनिक विश्वास की मर्यादा का। इतिहास हमें सिखाता है कि संस्थाएं बाहर से कम और भीतर से अधिक कमजोर होती हैं।

 

रोमन साम्राज्य का पतन केवल बर्बर आक्रमणों की कहानी नहीं था; वह आंतरिक संस्थागत क्षरण की भी कहानी था। यूरोप के मध्यकालीन चर्च केवल धार्मिक संकटों से नहीं जूझे; वे वित्तीय और नैतिक संकटों से भी जूझे। सोलहवीं शताब्दी में मार्टिन लूथर का सुधार आंदोलन केवल धर्मशास्त्र का विवाद नहीं था; उसके केंद्र में चर्च की वित्तीय पारदर्शिता और संस्थागत जवाबदेही के प्रश्न भी थे।

 

भारत भी इससे अलग नहीं रहा। दक्षिण भारत के चोल और विजयनगर काल के मंदिर केवल पूजा के स्थल नहीं थे; वे विश्वविद्यालय, नियोक्ता, वित्तीय संस्थान और स्थानीय अर्थव्यवस्था के केंद्र थे। मंदिरों को मिली भूमि, दान और संपत्तियों का विस्तृत विवरण पत्थरों पर अंकित किया जाता था ताकि समुदाय स्वयं उसका साक्षी बने। पारदर्शिता आधुनिक लोकतंत्र का आविष्कार नहीं है। यह सभ्यताओं का पुराना ज्ञान है।

 

अयोध्या आने वाला श्रद्धालु केवल धन नहीं देता। वह विश्वास देता है। किसी ने दानपात्र में बीस रुपये डाले होंगे। किसी ने परिवार की स्मृतियों से जुड़ा कोई आभूषण चढ़ाया होगा। किसी उद्योगपति ने करोड़ों रुपए का चेक सौंपा होगा। उनकी आर्थिक क्षमता अलग हो सकती है, लेकिन उनकी धार्मिक भावना का मूल्य समान है। उनकी अपेक्षा भी समान है। जो कुछ राम को अर्पित किया गया है, उसका उपयोग उसी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ हो, जिसके साथ वह दिया गया था।

 

यहीं एक बुनियादी अंतर समझना आवश्यक है। ईश्वर और संस्थाएं एक ही चीज़ नहीं हैं। आस्था दिव्य हो सकती है, लेकिन उसका प्रबंधन हमेशा मानवीय होता है। चमत्कार समुद्र को विभाजित कर सकते हैं, लेकिन वे खातों का मिलान नहीं करते। सोना अब भी तौला जाता है। नकदी अब भी गिनी जाती है। ताले अब भी मनुष्य लगाते हैं और रजिस्टर अब भी मनुष्य भरते हैं।

 

देवताओं ने इतिहास में अनेक चमत्कार किए होंगे, लेकिन लेखांकन उनमें कभी शामिल नहीं रहा। यह कार्य हमेशा मनुष्यों के हिस्से आया है। और मनुष्यों के साथ हमेशा एक शब्द जुड़ा रहता है—जवाबदेही। आधुनिक लोकतंत्र की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं है कि उसने मनुष्य को बेहतर बना दिया। उसकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उसने यह स्वीकार किया कि मनुष्य पूर्ण नहीं है। इसी स्वीकार्यता से संस्थाएं पैदा हुईं। इसी स्वीकार्यता से ऑडिट पैदा हुआ। इसी स्वीकार्यता से स्वतंत्र न्यायपालिका, सूचना का अधिकार और सार्वजनिक निगरानी की अवधारणा विकसित हुई। 

 

विश्वास और सत्यापन को विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे का पूरक माना गया। ब्रिटिश इतिहासकार लॉर्ड एक्टन ने लिखा था, “Power tends to corrupt, and absolute power corrupts absolutely.” शक्ति केवल राजनीतिक नहीं होती। धार्मिक प्रतिष्ठा भी शक्ति होती है। नैतिक वैधता भी शक्ति होती है। सांस्कृतिक प्रभाव भी शक्ति होता है। और हर शक्ति, चाहे वह किसी भी रूप में हो, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग करती है।

 

समस्या तब शुरू होती है जब संस्थाओं पर उठे प्रश्नों को आस्था पर हमला घोषित कर दिया जाता है। ऑडिट को अविश्वास का पर्याय बना दिया जाता है। पारदर्शिता को विरोध और आलोचना को ईशनिंदा का रूप दे दिया जाता है। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा है? क्या कोई धार्मिक संस्था अपने अनुयायियों के प्रति जवाबदेह हुए बिना भी उनकी आस्था की संरक्षक बनी रह सकती है? या फिर सच्चाई इसके ठीक विपरीत है कि जवाबदेही ही आस्था की सबसे बड़ी संरक्षक होती है?

 

भारत में राम केवल एक धार्मिक प्रतीक नहीं रहे हैं। पिछले चार दशकों में उन्होंने भारतीय राजनीति, सार्वजनिक विमर्श और राष्ट्रीय कल्पना को गहराई से प्रभावित किया है। बहुत कम प्रतीकों ने आधुनिक भारत के राजनीतिक भूगोल को उतना बदला है जितना श्रीराम के नाम ने बदला। लेकिन इतिहास एक कठोर शिक्षक है। वह विशेषाधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी देता है। जो प्रतीक जितना बड़ा होता है, उसके साथ जुड़ी संस्थाओं से समाज की अपेक्षाएं भी उतनी ही बड़ी होती हैं।

 

भव्य मंदिर केवल भव्य स्थापत्य नहीं बनाते। वे भव्य नैतिक दायित्व भी निर्मित करते हैं। जिस मजदूर ने अपनी दिनभर की कमाई में से बीस रुपए निकाले और जिस उद्योगपति ने करोड़ों रुपए का दान किया, दोनों की आस्था का मूल्य समान है। दोनों का अधिकार समान है। दोनों यह पूछ सकते हैं कि उनकी भेंट का क्या हुआ। आस्था अमीर और गरीब में भेद नहीं करती। जवाबदेही को भी नहीं करना चाहिए।

 

अंततः यह विवाद धन का नहीं है। यह विश्वास का है। सभ्यताओं की सबसे बड़ी संपत्ति उनके स्मारक नहीं होते। साम्राज्यों की सबसे बड़ी शक्ति उनकी सेनाएं नहीं होतीं। और मंदिरों की सबसे बड़ी पूंजी उनकी तिजोरियों में रखा सोना नहीं होता। उनकी सबसे बड़ी पूंजी वह विश्वास होता है, जिसे लोग स्वेच्छा से उनके चरणों में रख देते हैं।

 

श्रीराम को शायद कभी धन की आवश्यकता नहीं थी। उन्हें हमेशा केवल हमारे विश्वास की आवश्यकता थी। और विश्वास का स्वभाव बड़ा विचित्र होता है। उसे अर्जित करने में पीढ़ियां लग जाती हैं। उसे खोने में केवल एक क्षण।

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल बना वाहनों का ‘दुश्मन’? इंदौर के मैकेनिकों की चौंकाने वाली रिपोर्ट

Ethanol

इंदौर के ऑटोमोबाइल मार्केट और गैराजों से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। पर्यावरण को बचाने और ईंधन का विकल्प बनने का दावा करने वाला एथेनॉल (Ethanol-Blended Petrol) अब आम जनता की गाड़ियों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। शहर के मैकेनिकों के मुताबिक उनके पास रोज़ाना 4 से 5 वाहन ऐसे पहुंच रहे हैं, जो एथेनॉल के साइड इफेक्ट्स के कारण बीच सड़क पर दम तोड़ रहे हैं। गाड़ियों की टंकियों में कचरा जमने से लेकर कार्बोरेटर और फ्यूल पंप पूरी तरह चोक हो रहे हैं। मैकेनिकों का साफ तौर पर कहना है कि शुरुआती दौर में भले ही यह समस्या कम दिख रही हो, लेकिन अगर वाहनों की तकनीक में बदलाव किए बिना इसी तरह एथेनॉल मिक्स पेट्रोल का इस्तेमाल जारी रहा, तो आने वाले समय में बहुत बड़ी संख्या में गाड़ियां कबाड़ में तब्दील हो सकती हैं। जानते हैं इस जमीनी हकीकत पर इंदौर के मैकेनिकों और गैराज संचालक क्‍या कह रहे हैं।

मैकेनिक सागर (आस्‍था टॉकीज, भमोरी)
फ्यूल टैंक में पानी और कचरा जमने की समस्या बहुत बढ़ गई है : पिछले कुछ हफ्तों से हमारे पास रोज़ाना 4 से 5 गाड़ियां ऐसी आ रही हैं जो अचानक चलते-चलते बंद हो जाती हैं। जब हम उनकी जांच करते हैं, तो पता चलता है कि फ्यूल टैंक (टंकी) के अंदर अजीब सा कचरा जमा हो गया है। एथेनॉल हवा से नमी सोख लेता है, जिससे टंकी के अंदर जंग और पानी जैसी परत बन रही है। हमें पूरी टंकी खोलकर साफ करनी पड़ रही है। अभी तो लोग इसे हल्के में ले रहे हैं, लेकिन अगर यही हाल रहा तो आगे चलकर गाड़ियों का मेंटेनेंस का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा।

Ethanol

मैकेनिक संजय (विजय नगर क्षेत्र)
कार्बोरेटर और फ्यूल पंप पूरी तरह चोक हो रहे हैं : एथेनॉल मिला हुआ पेट्रोल गाड़ियों के पार्ट्स के लिए जहर साबित हो रहा है। यह ईंधन कार्बोरेटर को खराब कर रहा है और जो नई गाड़ियां हैं, उनके फ्यूल पंप को भी जाम कर रहा है। एथेनॉल के कारण रबर के पाइप और प्लास्टिक के पार्ट्स गलने लगते हैं, जिससे बारीक कचरा पंप में फंस जाता है। अभी ऐसी शिकायतों वाली गाड़ियां कम संख्या में दिख रही हैं, क्योंकि लोग अभी भी इस बदलाव से अनजान हैं। लेकिन अगर गाड़ियों को एथेनॉल-फ्रेंडली बनाए बिना इसी ईंधन का इस्तेमाल जारी रहा, तो आने वाले समय में बहुत बड़े पैमाने पर गाड़ियां खराब होंगी।

मैकेनिक इकबाल खान (मालवा मिल)
पुरानी गाड़ियों के लिए यह ईंधन एक बड़ा खतरा है : हमारे गैराज में आने वाले दोपहिया वाहनों में सबसे ज्यादा समस्या आ रही है। एथेनॉल के मिक्सिंग की वजह से इंजन सही से कंबशन (दहन) नहीं कर पा रहा है और गाड़ियां मिसिंग मार रही हैं। अभी तो यह समस्या शुरुआती दौर में है, इसलिए वाहनों की संख्या कम है। लेकिन मेरा मानना है कि अगर गाड़ियों की तकनीक में सुधार किए बिना इसी तरह एथेनॉल मिक्स पेट्रोल बिकता रहा, तो आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में गाड़ियां सड़कों पर खड़ी हो जाएंगी। खासकर जो पुरानी गाड़ियां हैं, वे इस ईंधन को बिल्कुल भी नहीं झेल पाएंगी।

मैकेनिक राजेश शर्मा (बडी भमौरी ट्रांसपोर्ट नगर, इंदौर)
बिना तैयारी के लागू की गई पॉलिसी, जिसका हर्जाना आम जनता भुगत रही है : सरकार ने अपनी एथेनॉल पॉलिसी तो लागू कर दी, लेकिन जमीन पर क्या हो रहा है, यह देखने कोई नहीं आ रहा। देश में करोड़ों गाड़ियां आज भी पुरानी तकनीक (BS4 या उससे पहले की) पर चल रही हैं, जिनके इंजन और पार्ट्स एथेनॉल झेलने के लिए बने ही नहीं हैं। कंपनियों ने गाड़ियां बदली नहीं और सरकार ने पेट्रोल में एथेनॉल बढ़ा दिया। नतीजा यह है कि रोज़ाना हमारे पास लोग रोते हुए आते हैं कि साहब, कल ही पेट्रोल डलवाया था और आज फ्यूल पंप फुक गया या कार्बोरेटर गल गया। सरकार को पहले कंपनियों को मजबूर करना चाहिए था कि वे एथेनॉल-फ्रेंडली गाड़ियां बनाएं, उसके बाद यह पॉलिसी लानी थी। यह सीधे-सीधे आम आदमी की जेब पर डाका है।

मैकेनिक गुरुप्रीत सिंह (पंढरीनाथ)
कागजों पर पर्यावरण का फायदा, पर हकीकत में गाड़ियों की बर्बादी : सरकार कह रही है कि एथेनॉल से प्रदूषण कम होगा और देश का पैसा बचेगा, लेकिन आम गाड़ी मालिक का जो नुकसान हो रहा है, उसका हिसाब कौन देगा? एथेनॉल मिक्स पेट्रोल गाड़ियों के इंजन को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। रबर की नली, प्लास्टिक के पार्ट्स और नोजल इतनी जल्दी खराब हो रहे हैं कि ग्राहकों को हर महीने गैराज के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अगर सरकार की यही पॉलिसी चलती रही, तो आने वाले दो-तीन सालों में इतनी बड़ी संख्या में गाड़ियां कबाड़ बनेंगी कि संभालना मुश्किल हो जाएगा। यह पॉलिसी सिर्फ कागजों पर अच्छी है, सड़कों पर चल रहे वाहनों के लिए यह किसी बुरे सपने जैसी है।

एथेनॉल के साइड इफैक्‍ट्स :  
पानी को सोखना (Moisture Attraction): एथेनॉल हवा से नमी (पानी) को बहुत जल्दी सोख लेता है। अगर गाड़ी लंबे समय तक खड़ी रहे, तो यह पानी और ईंधन को अलग कर देता है, जिससे इंजन के अंदर जंग लग सकती है।

पार्ट्स का गलना: एथेनॉल एक अच्छा विलायक (Solvent) है। यह पुरानी गाड़ियों में लगे रबर के पाइप, प्लास्टिक और एल्युमिनियम के पार्ट्स को धीरे-धीरे गला देता है।

अनाज का संकट: एथेनॉल बनाने के लिए मक्का, गन्ना और अन्य खाद्यान्नों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। अगर इसका उत्पादन बहुत ज्यादा बढ़ा दिया जाए, तो खाद्य फसलों की कमी हो सकती है, जिससे खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।

इंदौर के गैराजों से सामने आई जमीनी हकीकत के मुताबिक, पेट्रोल में बढ़ता एथेनॉल का मिश्रण (Ethanol Blending) अब आम वाहन चालकों के लिए बड़ी मुसीबत और आर्थिक बोझ बनता जा रहा है। मैकेनिकों के अनुभव बताते हैं कि बिना पुख्ता तकनीकी तैयारी और पुरानी गाड़ियों की क्षमता को नजरअंदाज कर लागू की गई सरकार की यह पॉलिसी, वाहनों के इंजन, कार्बोरेटर और फ्यूल पंप को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। रोज़ाना गैराजों में पहुंच रही खराब गाड़ियों की संख्या इस बात का संकेत है कि यदि इस समस्या का जल्द कोई तकनीकी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में बड़े पैमाने पर वाहन कबाड़ में तब्दील हो सकते हैं और आम जनता को इसका भारी हर्जाना भुगतना पड़ेगा।

Weather Update : जम्मू-कश्मीर के डोडा में फटे बादल, मचाई भारी तबाही, कई राज्‍यों में IMD का अलर्ट

Cloudburst in Doda Jammu and Kashmir

Weather Update News : आज जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में बादल फटने से फसलों, बागों और संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा क्षेत्र के कलालगीसर इलाके में कुछ ही घंटों के भीतर 2 बार बादल फटने की घटना हुई। अचानक आई बाढ़ ने कृषि भूमि को बुरी तरह प्रभावित किया। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। वहीं मौसम विभाग ने एक बार फिर कई राज्यों में भारी बारिश के साथ-साथ आंधी तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया है।

आज जम्मू कश्मीर के डोडा जिले में बादल फटने से फसलों, बागों और संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ। जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भलेसा क्षेत्र के कलालगीसर इलाके में कुछ ही घंटों के भीतर 2 बार बादल फटने की घटना हुई। अचानक आई बाढ़ ने कृषि भूमि को बुरी तरह प्रभावित किया। लगातार हो रही भारी बारिश के कारण भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है। कई सड़कें अवरुद्ध हो गईं।

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प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। लोगों को सलाह दी गई है कि जब तक सड़क संपर्क बहाल नहीं हो जाता, तब तक संवेदनशील इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचें। डोडा के कश्तीगढ़ क्षेत्र में भी भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। प्रशासन के अनुसार अब तक किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली है। अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया जा रहा है।

Weather Update News

उत्तर प्रदेश में एंट्री के बाद दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान की दहलीज पर मानसून पहुंच चुका है, लेकिन मानसून के घने बादलों के पहले ही प्री मॉनसून बारिश होने लगी है। नोएडा, गाजियाबाद समेत दिल्ली एनसीआर में आज सुबह के वक्त बारिश देखने को मिली। दिल्ली एनसीआर में अगले 4-5 दिनों के दौरान ऐसे ही बारिश का मौसम रहने की संभावना है।

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वहीं मौसम विभाग ने एक बार फिर कई राज्यों में भारी बारिश के साथ-साथ आंधी तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया है। आज उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, उधमसिंह नगर, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल और चंपावत में भारी बारिश का अलर्ट है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, प्रयागराज और सोनभद्र, उत्तराखंड के बागेश्वर, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, टेहरी गढ़वाल और उधम सिंह नगर जिलों के लिए आज चेतावनी जारी की गई है।

बिहार के पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सिवान, सारण, भोजपुर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, भागलपुर और अररिया में आज भारी बारिश का अलर्ट है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मानसून की पहली भारी बारिश ने ही आम जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, जहां अंधेरी वेस्ट में डीएन नगर मेट्रो स्टेशन के पास एक विशाल पेड़ उखड़ने से सड़क पर खड़ी बस और कई संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है।

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इसके साथ ही मुंबई के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स सहित कई निचले इलाकों में भारी जलभराव के कारण सड़कों पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गई हैं और स्थानीय प्रशासन लगातार पानी निकालने के काम में जुटा हुआ है। मध्य प्रदेश के बालाघाट, बैतूल, बुरहानपुर, छिंदवाड़ा, होशंगाबाद, राजगढ़, सीहोर और शाजापुर जिलों में भी आज ऑरेंज अलर्ट है।

अयोध्या राम मंदिर दान चोरी पर बागेश्वर बाबा का विस्फोटक दावा, कहा- अगर उनकी पर्ची खोल दी तो….

Dhirendra Krishna Shastri on Ram Mandir donations theft

Dhirendra Krishna Shastri on Ram Mandir donations theft: अपने बयानों और दिव्य दरबार को लेकर हमेशा सुर्खियों में रहने वाले बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे और दान में हुई कथित चोरी को लेकर एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है। इंडोनेशिया के जकार्ता में धीरेंद्र शास्त्री ने साफ तौर पर कहा है कि इस महाघोटाले के पीछे बेहद रसूखदार और बड़े 'मगरमच्छों' का हाथ है। बाबा ने यहां तक कह दिया कि अगर उन्होंने अपने दरबार में इस चोरी को लेकर पर्ची खोल दी और चोरों के नाम उजागर कर दिए, तो वे ताकतवर लोग उन्हें (धीरेंद्र शास्त्री को) निपटा देंगे।

 

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के मामले में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री से सवाल किया गया, तो उन्होंने कोई गोलमोल जवाब देने के बजाय सीधे व्यवस्था और इसमें शामिल सफेदपोशों पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अभी तो छोटी मछलियां ही पकड़ी गई हैं, मगरमच्छ भी पकड़े जाएंगे। शास्त्री ने कहा कि भगवान राम के चरणों में आया दान सीधे सनातनियों की भावना से जुड़ा है और इसमें एक रुपए की भी हेराफेरी महापाप है। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

बहुत ताकतवर हैं, मुझे ही निपटा देंगे

अपने तीखे अंदाज के लिए जाने जाने वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस मामले में अपनी जान का खतरा बताते हुए कहा कि अगर मैंने इस गर्भगृह और राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी को लेकर पर्ची निकाल दी, तो उसमें ऐसे-ऐसे नाम सामने आएंगे जो बेहद रसूखदार हैं। वो इतने बड़े मगरमच्छ हैं कि सच सामने आते ही वो मुझे निपटा देंगे। इसलिए कुछ मामलों में मौन रहना ही ठीक है, क्योंकि वो लोग बहुत शक्तिशाली हैं और किसी भी हद तक जा सकते हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर घोटाला, करोड़ों की चोरी से लेकर इस्तीफों और गिरफ्तारियों तक की पूरी टाइमलाइन

क्या वाकई बाबा को है जान का खतरा है?

धीरेंद्र शास्त्री का यह बयान सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों तक पर बहस छिड़ गई है। भक्त और आम जनता इस बात से हैरान हैं कि देश के सबसे लोकप्रिय संतों में से एक को आखिर किन 'मगरमच्छों' से अपनी जान का डर सता रहा है। जानकारों का मानना है कि बाबा बागेश्वर ने इशारों-इशारों में उन भ्रष्ट अधिकारियों या रसूखदारों को कड़ी चेतावनी दी है जो धर्म के नाम पर अपनी जेबें भर रहे हैं। फिलहाल, इस सनसनीखेज बयान के बाद राम मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं कि आखिर दान की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

चोरों को भगवान देंगे महादंड 

इससे पहले भी धीरेन्द्र शास्त्री इस मुद्दे पर बोल चुके हैं। इससे पहले उन्होंने कहा था कि चढ़ावा चोरों भक्तों का भरोसा चुरा लिया। धीरेंद्र शास्त्री ने चोरी करने वालों की तुलना सीधे रावण से की। उन्होंने कहा कि रावण तो ये भी हैं, बस इनके रूप बदल गए हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल पैसों की चोरी नहीं, बल्कि सनातन धर्म पर बहुत बड़ा आघात है। ऐसे लोगों को सरकारी सजा तो मिलेगी ही, भगवान भी 'महादंड' देंगे। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जो लोग भगवान और धर्म से नहीं डरे, उनका अंत निश्चित है। इन्हें प्रभु श्रीराम की तरफ से 'महादंड' भी भुगतना पड़ेगा।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

क्या एक हो जाएंगे पृथ्वी के सभी 7 महाद्वीप? वैज्ञानिकों ने बताया भविष्य का चौंकाने वाला नक्शा

7 continents

पृथ्वी पर मौजूद 7 महाद्वीप स्थिर नहीं हैं, बल्कि ये नीचे मौजूद पिघले लावे पर 'टेक्टोनिक प्लेटों' के जरिए तैर रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये प्लेटें 2 से 10 सेंटीमीटर प्रति वर्ष (नाखून बढ़ने की रफ्तार) की गति से खिसक रही हैं। हर 30 से 50 करोड़ साल में ये महाद्वीप आपस में जुड़ते हैं और फिर अलग हो जाते हैं। आज से 30 करोड़ साल पहले ये 'पैंजिया' के रूप में एक थे और अब अगले 25 करोड़ सालों में दोबारा टकराकर एक नया 'सुपरकॉन्टिनेंट' बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

 

1. महाद्वीपों की वर्तमान गति और बदलाव

ऑस्ट्रेलियाई प्लेट: यह सबसे तेज लगभग 7 सेमी प्रति वर्ष की दर से उत्तर (एशिया) की ओर बढ़ रही है।

अफ्रीकी प्लेट: यह यूरोप की तरफ बढ़ रही है, जिससे भूमध्य सागर लगातार सिकुड़ रहा है।

अमेरिकी प्लेट: उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका धीरे-धीरे यूरोप और अफ्रीका के करीब आ रहे हैं।

 

2. भविष्य की पृथ्वी: दो संभावित रूप (थ्योरी)

वैज्ञानिकों ने कंप्यूटर मॉडल्स के जरिए भविष्य के सुपरकॉन्टिनेंट के दो रूप बताए हैं:

पैंजिया अल्टिमा/प्रॉक्सिमा: इसमें अटलांटिक और हिंद महासागर सिकुड़कर बंद हो जाएंगे। अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अंटार्कटिका सब एशिया से जुड़ जाएंगे। प्रशांत महासागर पूरी पृथ्वी को घेरने वाला इकलौता महासागर (Panthalassan Ocean) बन जाएगा।

अमासिया: इसमें प्रशांत महासागर सिमट जाएगा और उत्तरी अमेरिका सीधे एशिया से जाकर टकराएगा।

 

3. महामिलन के भयंकर परिणाम (आशंकाएं)

जब ये महाद्वीप आपस में टकराएंगे, तो पृथ्वी का भूगोल और पर्यावरण पूरी तरह बदल जाएगा, जो जीवन के लिए एक 'नरक' जैसा परिदृश्य तैयार कर सकता है:

विशाल पर्वतों का निर्माण: जैसे भारत और यूरेशिया की टक्कर से हिमालय बना, वैसे ही महाद्वीपों की इस महाटक्कर से आज के हिमालय से भी कई गुना ऊंचे पर्वत खड़े हो जाएंगे।

तीन तरफा मार (Triple Whammy): ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक अलेक्जेंडर फार्न्सवर्थ के अनुसार, भविष्य में तीन आपदाएं एक साथ आएंगी—महाद्वीपों के जुड़ने से अंदरूनी इलाकों का सूखना, बूढ़े हो रहे सूर्य की 2.5% अधिक तेज चमक, और भयंकर ज्वालामुखियों के कारण भारी मात्रा में $CO_2$ गैस का निकलना।

जानलेवा तापमान (50°C से 70°C): समुद्र की हवाएं अंदरूनी हिस्सों तक नहीं पहुंच पाने के कारण केंद्र का भाग सूखा और भीषण गर्म रेगिस्तान बन जाएगा। गर्मियों में तापमान 70°C तक जा सकता है, जिससे अत्यधिक उमस के कारण स्तनधारी जीवों का पसीना सूख नहीं पाएगा।

सामूहिक विनाश (Mass Extinction): इस नए महाद्वीप का केवल 8% से 16% हिस्सा ही (ध्रुवों और तटों के पास) रहने योग्य बचेगा। बाकी 84% इलाका बंजर होने से इंसान, पेड़-पौधे और स्तनधारी जीव विलुप्त हो सकते हैं।

 

4. पृथ्वी की घूर्णन गति (रफ्तार) में बदलाव

महाद्वीपों के खिसकने के अलावा, पृथ्वी की अपनी धुरी पर घूमने की गति भी लगातार सूक्ष्म रूप से प्रभावित हो रही है:

गति में कमी: चंद्रमा के ज्वारीय घर्षण (Tidal Friction) के कारण पृथ्वी की गति हर 100 साल में करीब 1.7 मिलीसेकंड धीमी हो जाती है।

हालिया तेजी: इसके विपरीत, 2020 के बाद से कोर की आंतरिक हलचल, ग्लोबल वार्मिंग (ग्लेशियरों का पिघलना) और मौसमी बदलावों (जैसे अल नीनो) के कारण पृथ्वी अस्थाई रूप से थोड़ी तेज घूम रही है। साल 2022 में इतिहास का सबसे छोटा दिन (24 घंटे से 1.59 मिलीसेकंड छोटा) दर्ज किया गया था।

 

निष्कर्ष: क्या डरने की जरूरत है?

भौगोलिक दृष्टि से यह प्रक्रिया “तेजी से” हो रही है, लेकिन इंसानी पैमाने पर यह बेहद धीमी है। महाद्वीपों को पूरी तरह आपस में टकराने में अभी 25 करोड़ साल का लंबा समय लगेगा। इसलिए, वर्तमान मानव सभ्यता को इससे डरने की कोई आवश्यकता नहीं है।

चेंबूर में स्कूल वैन पर पेड़ गिरने से मासूम की मौत, क्या बोले जिम्मेदार?

chembur accident

मुंबई के चेंबूर में यूनिवर्सल हाई स्कूल की बस पर पेड़ गिरने से एक मासूम की मौत हो गई। हादसे में 10 बच्चे घायल हैं। सभी को अस्पताल ले जाया गया। इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई। मुंबई पुलिस और BMC की टीम मामले की जांच कर रही है। जानिए मामले पर क्या कहते हैं जिम्मेदार? ALSO READ: Operation Tiger: क्या देवेंद्र फडणवीस के साथ भी वही हो रहा है जो कभी आडवाणी, गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के साथ हुआ था?

 

क्या है पूरा मामला?

मंगलवार दोपहर करीब 2:58 बजे चेंबूर इलाके में एक बड़ा पीपल का पेड़ स्कूल बस पर गिरने गिर गया। पेड़ गिरते ही बस चालक, कंडक्टर और स्थानीय नागरिकों ने तुरंत तत्परता दिखाते हुए बच्चों को बचाने का प्रयास किया। 11 वर्षीय विहान श्रीवास्तव की दोपहर 4:23 बजे इलाज के दौरान मौत हो गई।

 

मेयर ने दिए जांच के आदेश

 

घटना की गंभीरता को देखते हुए, मेयर रितु तावड़े ने इस बात की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं कि क्या स्थानीय नागरिकों ने पहले इस पेड़ के संबंध में कोई शिकायत दर्ज कराई थी। यदि अधिकारियों ने शिकायतों की अनदेखी की होगी, तो संबंधित अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाएगा और उनके खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

क्या बोले मंत्री योगेश कदम?

महाराष्ट्र के मंत्री योगेश कदम ने चेंबूर हादसे पर कहा कि यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ऐसी घटना दोबारा न हो; जहां भी ऐसी घटनाएं होती हैं, वहां सख्त कार्रवाई की जाती है। ALSO READ: केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़: सिया गोयल के वकील ने भाई साहिल को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस

 

जनप्रतिनिधियों ने हादसे पर जताया दुख

शिवसेना MLC नीलम गोहे ने चेंबूर हादसे पर कहा कि यह बहुत ही बड़ी दुर्घटना है। जब कहीं बारिश होती है तो पेड़ अच्छे दिखते हैं लेकिन वो कब गिर जाएगा इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है जिसका मूल्यांकन किया जाता है। ऐसी घटनाएं बार-बार ना हों, इसे लेकर कुछ तो काम कर सकता है। इसे लेकर कुछ तो काम किया जा सकता है। इसे लेकर BMC का आपदा प्रबंधन विभाग और अधिक ध्यान दे सकता है।

 

भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि चेंबूर में पीपल का एक पेड़ स्कूल वैन पर गिरने के कारण एक बच्चे की मौत की घटना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। बरसात में समय पर पेड़ की छंटाई बहुत आवश्यक होती है और इसकी उपेक्षा करने के कारण इस तरह की घटनाएं होती हैं। पेड़ का जतन भी करना चाहिए लेकिन मनुष्य की जान की भी कीमत है। कल जो घटना हुई है उसकी भरपाई करना मुश्किल है। महानगरपालिका प्रशासन में पेड़ों की छंटाई करने की आवश्यकता है और जो पेड़ कमजोर हैं, उन्हें हटाने की भी आवश्यकता है।

झारखंड के CM सोरेन ने हूल दिवस पर शहीद सिदो-कान्हू को दी श्रद्धांजलि, बोले- क्रांति की आग कभी बुझती नहीं, उसकी चिंगारी हमेशा जीवित रहती है

Chief Minister Hemant Soren paid tribute to martyrs Sido-Kanhu on Hool Diwas

Chief Minister Hemant Soren : अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1855 में संथाल हूल का बिगुल फूंकने वाले अमर शहीद सिदो-कान्हू और उनके साथियों को हूल दिवस के अवसर झारखंड में श्रद्धापूर्वक याद किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन सहित कई लोगों ने रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अमर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद कहा कि हूल की मशाल बुझी नहीं है, वह आज भी हमें अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और न्याय, सम्मान तथा अधिकार की लड़ाई को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है।

 

अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ 1855 में संथाल हूल का बिगुल फूंकने वाले अमर शहीद सिदो-कान्हू और उनके साथियों को हूल दिवस के अवसर झारखंड में श्रद्धापूर्वक याद किया गया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन सहित कई लोगों ने रांची स्थित सिदो-कान्हू उद्यान पहुंचकर महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की।


मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अमर शहीद सिदो-कान्हू की प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद कहा कि हूल की मशाल बुझी नहीं है, वह आज भी हमें अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और न्याय, सम्मान तथा अधिकार की लड़ाई को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती है।

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उन्होंने कहा कि हूल केवल इतिहास नहीं, अन्याय के विरुद्ध हमारी चेतना है। हूल विद्रोह ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। सोरेन ने कहा कि जिस दौर में शोषित समाज के सामने प्रतिरोध का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था, उस समय सिदो-कान्हू, चांद-भैरव तथा वीरांगनाओं फूलो-झानो ने परिणाम की चिंता किए बिना अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका।

उन्होंने कहा कि झारखंड वीरों की धरती है और यहां के जननायकों का इतिहास सदैव स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उस दौर में जब देश में शोषण के खिलाफ कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था, तब आदिवासी समाज के वीरों ने साहस दिखाते हुए अंग्रेजी हुकूमत और शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोला।

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हूल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री सोरेन ने सभी लोगों से अपील की कि वे इन महान विभूतियों के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं और समाज के कमजोर वर्गों के हित में कार्य करें।