योगी सरकार का ‘स्कूल चलो अभियान’ दूसरे चरण में तेज़ी, ₹163.60 लाख जारी; 1 से 15 जुलाई तक चलेगा विशेष नामांकन अभियान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लक्ष्य को और गति देते हुए स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा जारी कर दी है। नए शैक्षिक सत्र 2026-27 में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी विकास खंडों में 1 से 15 जुलाई तक विशेष अभियान संचालित किया जाएगा। 

 

महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य विद्यालय से बाहर रह गए प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, ड्रॉपआउट बच्चों का पुनः नामांकन सुनिश्चित करना तथा नामांकन को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप देना है। निर्देशों के अनुसार सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों, जिला समन्वयकों (समेकित शिक्षा) तथा खंड शिक्षा अधिकारियों को अभियान का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। अभियान में ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे प्रत्येक पात्र बच्चे तक विद्यालय की पहुंच बनाई जा सके।

 

प्रदेश में निपुण भारत मिशन, विद्यालय कायाकल्प, बालवाटिका, शिक्षक क्षमता संवर्धन और अधिगम गुणवत्ता सुधार जैसे व्यापक शिक्षा सुधारों के बाद स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण इन प्रयासों को नई मजबूती देगा। ₹163.60 लाख की वित्तीय सीमा के साथ शुरू होने जा रहा यह राज्यव्यापी अभियान शिक्षा के सार्वभौमिक लक्ष्य को साकार करने और किसी भी बच्चे को विद्यालय से वंचित न रहने देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

 

आउट ऑफ स्कूल बच्चों पर रहेगा विशेष फोकस

अभियान के दौरान घर-घर संपर्क, ग्राम एवं वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण तथा स्थानीय अभिलेखों के माध्यम से विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान की जाएगी। ऐसे बच्चों का प्राथमिकता के आधार पर नामांकन कराया जाएगा और उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अभिभावकों से सतत संवाद स्थापित किया जाएगा। विशेष रूप से कक्षा छोड़ चुके बच्चों को दोबारा विद्यालय से जोड़ने के लिए समन्वित प्रयास किए जाएंगे।

 

रैलियों से लेकर प्रवेशोत्सव तक चलेगा जनजागरूकता अभियान

अभियान के अंतर्गत प्रभात फेरियां, नामांकन रैलियां, घर-घर संपर्क, अभिभावक बैठकें, ग्राम सभाएं, विद्यालय प्रवेशोत्सव, विशेष नामांकन शिविर तथा अन्य जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य शिक्षा के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाना तथा प्रत्येक परिवार को बच्चों के नियमित विद्यालयी नामांकन के लिए प्रेरित करना है।

 

जागरूकता गतिविधियों पर खर्च होगी स्वीकृत धनराशि

जारी वित्तीय सीमा के अंतर्गत जनपदों को रैलियों, प्रचार-प्रसार सामग्री, बैनर, पोस्टर, फ्लेक्स, सामुदायिक बैठकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, प्रवेशोत्सव तथा अन्य अनुमन्य गतिविधियों के संचालन के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। शासन ने निर्देश दिए हैं कि धनराशि का उपयोग निर्धारित मानकों के अनुरूप पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाए, ताकि अभियान का अधिकतम प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

ITR, Aadhaar, Passport, EPFO के साथ ही 1 जुलाई से बदलेंगे 6 नियम, आप पर क्या होगा असर, जरूर पढ़ें

1 july rule changes

अगर आपका आधार अपडेट करना है, नया पासपोर्ट बनवाना है, क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करते हैं या नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो 1 जुलाई से लागू होने वाले नए नियम आपके लिए अहम हैं। पीएफ निकालने को लेकर भी बड़ा बदलाव हो सकता है। जुलाई की शुरुआत के साथ कई ऐसे बदलाव लागू हो रहे हैं, जिनका असर करोड़ों लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। इन बदलावों की जानकारी पहले से होने पर आप अपने जरूरी काम समय रहते और बेहतर तरीके से प्लान कर सकते हैं।

किन लोगों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?

  • आधार अपडेट कराने वाले
  • नया पासपोर्ट बनवाने वाले
  • नई कार खरीदने की योजना बना रहे लोग
  • क्रेडिट कार्ड यूजर्स
  • EPF खाताधारक

ALSO READ: OnePlus Nord N6 5G लॉन्च, 19,999 रुपए में 8,000mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले और 50MP कैमरा

आइए जानते हैं क्या-क्या बदल रहा है।

1. आधार से ईमेल लिंक कराना होगा मुफ्त

 

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बड़ा फैसला लेते हुए 1 जुलाई से 31 दिसंबर तक आधार से ईमेल आईडी लिंक कराने की सुविधा पूरी तरह मुफ्त कर दी है। पहले इस सेवा के लिए 75 रुपये शुल्क देना पड़ता था।

ALSO READ: Passport : 1 जुलाई से पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा! केंद्र सरकार ने बढ़ाई फीस, जानिए नई दरें

2. पासपोर्ट बनवाना होगा महंगा

 

1 जुलाई से नया पासपोर्ट बनवाने और पासपोर्ट रिन्यू कराने की फीस बढ़ जाएगी। सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपये से बढ़कर 2,500 रुपये हो जाएगी। तत्काल (Tatkal) पासपोर्ट की फीस 3,500 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दी गई है। नई फीस नए आवेदन और रिन्यूअल दोनों पर लागू होगी।

ALSO READ: Europe heatwave : यूरोप में 43 डिग्री सेल्सियस और भारत में 43 डिग्री सेल्सियस एक जैसे क्यों नहीं लगते? जानिए गर्मी का असली विज्ञान

3. कार खरीदना पड़ेगा महंगा

 

अगर आप जुलाई में नई कार खरीदने की सोच रहे हैं तो आपको पहले से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। कई ऑटोमोबाइल कंपनियों ने 1.5% से 3% तक कीमत बढ़ाने की घोषणा की है। कंपनियों का कहना है कि उत्पादन लागत और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण यह फैसला लिया गया है।

 

4. क्रेडिट कार्ड के नियम बदलेंगे

 

1 जुलाई से कई बैंकों और कार्ड कंपनियों के रिवॉर्ड पॉइंट्स और बेनिफिट्स में बदलाव होगा। कुछ ट्रांजैक्शन पर अब रिवॉर्ड पॉइंट्स नहीं मिलेंगे। फ्री एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस के लिए खर्च की न्यूनतम सीमा तय की गई है।

कई बैंक अब एक तिमाही में कम से कम 60,000 रुपये खर्च करने पर ही मुफ्त डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज सुविधा देंगे। 5. बैंक नहीं कर सकेंगे गलत तरीके से प्रोडक्ट बेचने की कोशिश

 

6. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए नियम 1 जुलाई से लागू होंगे।

 

अब बैंक ग्राहक की स्पष्ट सहमति (Explicit Consent) के बिना कोई वित्तीय उत्पाद नहीं बेच सकेंगे। भ्रामक तरीके (Dark Patterns) अपनाकर ग्राहकों को गुमराह नहीं कर सकेंगे। जबरन किसी अन्य प्रोडक्ट के साथ वित्तीय उत्पाद नहीं जोड़ सकेंगे। केवल ग्राहक की जरूरत के अनुसार ही उत्पाद की सलाह दे सकेंगे। यदि किसी मामले में मिस-सेलिंग (Mis-selling) साबित होती है तो ग्राहक को पूरा पैसा वापस पाने का अधिकार होगा।

 

6. UPI से निकाल सकेंगे PF का पैसा

 

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) जुलाई में अपना नया डिजिटल प्लेटफॉर्म EPFO 3.0 लॉन्च कर सकता है। इसके बाद EPF खाताधारक UPI के जरिए अपना PF का पैसा कुछ ही मिनटों में निकाल सकेंगे। अब तक PF निकालने में कई दिन लग जाते थे, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो जाएगी।

44 दिन के मासूम की पलंग से गिरकर मौत, मां वॉशरूम गई इतनी देर में ये हो गया, इलाज के दौरान तोड़ा दम

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में 44 दिन के मासूम की बेड से गिरने के बाद मौत हो गई। घटना सोमवार देर रात रुक्मणी नगर, छोटा बांगड़दा की है। हादसे के समय बच्चे की मां वॉशरूम गई हुई थी। इसी दौरान मासूम करवट लेते हुए करीब तीन फीट ऊंचे बेड से नीचे गिर गया। गंभीर रूप से घायल बच्चे को अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
 
पुलिस के अनुसार, घटना उस समय हुई जब परिवार रात में सो रहा था। बच्चे की मां कुछ देर के लिए वॉशरूम गई थीं। इसी दौरान मासूम प्रियांशु बेड से नीचे गिर गया। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर पिता चंद्रशेखर कुमार की नींद खुली। उन्होंने देखा कि बच्चे के चेहरे और मुंह पर चोट लगी हुई थी।

घटना के तुरंत बाद परिजन बच्चे को नजदीकी निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया। वहां इलाज के दौरान मंगलवार सुबह करीब 5 बजे मासूम ने दम तोड़ दिया।

एरोड्रम थाना प्रभारी वीरेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया कि मृत बच्चे की पहचान प्रियांशु पुत्र चंद्रशेखर कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमार्टम एमवाय अस्पताल में कराया जा रहा है।

पुलिस के मुताबिक परिवार मूल रूप से बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में इंदौर के छोटा बांगड़दा क्षेत्र में किराए के मकान में रहता है। बच्चे के पिता चंद्रशेखर कुमार सिलाई का काम करते हैं। परिवार में दो वर्ष की एक बेटी भी है। प्रारंभिक जांच में घटना को हादसा माना जा रहा है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

सिया के प्रेमी चेतन का होगा गेट एनालिसिस, आखिर क्या होता है यह टेस्ट और इस मामले में क्यों जरूरी है?

Chetan Chaudhary Gait Analysis

Chetan Chaudhary Gait Analysis Test: लोनावला के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले में 18 जून को हुए रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने जांच को एक नया और बेहद वैज्ञानिक मोड़ दे दिया है। पुलिस ने अब मुख्य आरोपी चेतन चौधरी का 'गेट एनालिसिस' (Gait Analysis यानी चाल विश्लेषण) टेस्ट कराने का फैसला किया है। इस अत्याधुनिक तकनीक के जरिए सीसीटीवी फुटेज में दिख रहे संदिग्ध और आरोपी चेतन की पहचान को कानूनी रूप से पक्का किया जाएगा। वहीं, अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके कथित प्रेमी चेतन चौधरी की पुलिस हिरासत 3 जुलाई तक बढ़ा दी है।

क्या होता है गेट एनालिसिस और इस मामले में क्यों जरूरी है?

सरल शब्दों में कहें तो 'गेट एनालिसिस' किसी व्यक्ति के चलने, दौड़ने या शारीरिक गतिविधियों के तरीके का एक वैज्ञानिक और बायोमैकेनिकल अध्ययन है। जिस तरह हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट्स (उंगलियों के निशान) अलग होते हैं, उसी तरह हर इंसान के चलने का अंदाज (कदमों की लंबाई, रीढ़ की मुद्रा, और हाथ-पैरों की गति का तालमेल) भी विशिष्ट होता है। ALSO READ: केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़: सिया गोयल के वकील ने भाई साहिल को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस

 

इस मामले में यह टेस्ट इसलिए सबसे बड़ा हथियार बनने जा रहा है क्योंकि वारदात वाले दिन (18 जून) लोहागढ़ किले के सीसीटीवी फुटेज में एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया था। भीषण गर्मी के बावजूद उस व्यक्ति ने हुडी (चेहरा छिपाने वाली कैप वाली शर्ट) पहनी हुई थी, जिससे उसका चेहरा साफ नहीं दिख रहा है। पुलिस का पूरा दावा है कि वह संदिग्ध कोई और नहीं बल्कि सिया का प्रेमी चेतन चौधरी ही था।

क्राइम सीन का होगा रिक्रिएशन

केस को अदालत में अकाट्य बनाने के लिए पुलिस अब एक अनोखा कदम उठाने जा रही है। जांच अधिकारियों के मुताबिक, चेतन चौधरी को ठीक उसी तरह की हुडी पहनाकर लोहागढ़ किले के उसी रास्ते पर चलाया जाएगा, जहां का सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास है। इस दौरान चेतन के चलने के तरीके का एक नया वीडियो रिकॉर्ड किया जाएगा। इसके बाद फोरेंसिक एक्सपर्ट्स पुराने सीसीटीवी फुटेज और इस नए वीडियो का डिजिटल मिलान करेंगे। यदि दोनों वीडियो में चलने का पैटर्न, कदमों की दूरी और शारीरिक झुकाव मैच कर जाता है, तो यह कानूनी रूप से साबित हो जाएगा कि हुडी में छिपा चेहरा चेतन का ही था। ALSO READ: केतन से क्यों नफरत करती थी सिया? पुलिस के सामने किया बड़ा खुलासा

अदालत में वकीलों को लेकर हाई-वोल्टेज ड्रामा

मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को अदालत परिसर में उस समय नाटकीय स्थिति पैदा हो गई, जब वकीलों के बीच प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोपी सिया गोयल के अधिकारिक वकील विपुल दुशिंग ने अदालत में दलील दी कि उनकी मुवक्किल की गिरफ्तारी पूरी तरह से गैरकानूनी है और पुलिस के पास कोई ठोस आधार नहीं है। वहीं चेतन के वकील राम शाहणे ने दावा किया कि एफआईआर में उनके मुवक्किल की भूमिका बहुत सीमित और अस्पष्ट है।

 

इसी बीच, एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने अचानक अदालत में सिया के हस्ताक्षर वाला वकालतनामा पेश करते हुए दावा किया कि वे उसका केस लड़ेंगे। हालांकि, आरोपी सिया गोयल और उसके परिवार ने तुरंत इस पर आपत्ति जताते हुए साफ कर दिया कि विपुल दुशिंग ही उनके असली कानूनी प्रतिनिधि हैं।

हादसा या सोची-समझी हत्या?

पुणे के आलीशान 'लोढ़ा बेलमोंडो' में रहने वाले केतन अग्रवाल अपनी पारिवारिक कंपनी 'सक्सेस ग्रुप' के निदेशक थे। इसी साल फरवरी में उनका विवाह सिया गोयल से तय हुआ था और नवंबर में उदयपुर में शाही शादी होने वाली थी। दोनों के परिवार एक ही व्यापारिक क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं। 18 जून को सिया के जन्मदिन के मौके पर दोनों लोनावला के पास लोहागढ़ किले में ट्रैकिंग के लिए गए थे। वहां से केतन की खाई में गिरने से मौत हो गई। पुलिस का आरोप है कि सिया और चेतन ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने के लिए इस पूरी खौफनाक साजिश को अंजाम दिया। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है। ALSO READ: सिया गोयल का वो खौफनाक कबूलनामा और बेकरी-ड्राई फ्रूट्स वाले इश्क की इनसाइड स्टोरी!

और किस काम आता है गेट एनालिसिस?

इस टेस्ट में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट केवल आपको चलते हुए देखकर आपके चलने के पैटर्न, पैरों की स्थिति और बॉडी बैलेंस को नोट करते हैं। इसमें व्यक्ति के शरीर पर विशेष सेंसर या मार्कर्स लगाए जाते हैं। फिर उसे एक खास ट्रेडमिल या वॉकवे (जिसमें प्रेशर पैड लगे होते हैं) पर चलाया जाता है। आस-पास लगे हाई-स्पीड कैमरे और कंप्यूटर सॉफ्टवेयर पैरों की मूवमेंट, जोड़ों के एंगल और जमीन पर पड़ने वाले दबाव का एक 3D मॉडल तैयार करते हैं। यदि किसी को बिना किसी स्पष्ट कारण के पीठ, कूल्हे, घुटने या टखने में लगातार दर्द रहता है, तो यह टेस्ट बताता है कि आपके चलने के गलत तरीके (जैसे पैर अंदर या बाहर की तरफ मोड़कर चलना) के कारण ऐसा हो रहा है।

विकास के नए कीर्तिमान रच रहा उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री योगी ने यूपी को 3 महीने में दी 62 हजार करोड़ से अधिक की 5551 परियोजनाओं की सौगात

Scaling new heights of continuous development Uttar Pradesh is setting fresh milestones

– पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्यांचल समेत प्रदेश के सभी जनपदों को विकास से जोड़ने पहुंच रहे मुख्यमंत्री योगी

– हर जिले में विकास, हर क्षेत्र में निवेश से उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को करेगा हासिल 

– लोकार्पण और शिलान्यास की नई रफ्तार से विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव रख रही योगी सरकार

– शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन समेत अन्य सेक्टरों को मिली नई गति, विकास की पहचान बना यूपी

Chief Minister Yogi Adityanath : बीते 9 साल से निरंतर विकास की बुलंदियों को छू रहा उत्तर प्रदेश नित नए कीर्तिमान रच रहा है। यदि वित्तीय वर्ष 2026-27 की बात करें तो पहली तिमाही में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ निरंतर जनपदों के दौरे कर विकास की सौगात दे रहे हैं। वे पूर्वांचल, पश्चिमांचल, बुंदेलखंड, मध्याचंल समेत प्रदेश के सभी जनपदों को विकास से जोड़ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रैल, मई और जून के दौरान प्रदेशभर में आधारभूत ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग, पर्यटन, खेल, शहरी विकास, ग्रामीण विकास और कनेक्टिविटी से जुड़ी 5,551 से अधिक विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया।

इन परियोजनाओं पर 62,282 करोड़ से अधिक रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जो प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में सरकार की प्राथमिकताओं को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी ने स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में विकास केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की तरफ तेजी से बढ़ रहा है। 

 

हर क्षेत्र में विकास की समान गति

इन तीन महीनों में प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़क, पुल, मेडिकल कॉलेज, खेल अवसंरचना, औद्योगिक पार्क, नगर विकास, शिक्षा, पेयजल, पर्यटन और डिजिटल सुविधाओं से जुड़ी परियोजनाओं की शुरुआत की गई। योगी सरकार ने केवल बड़े शहरों पर ही नहीं, बल्कि पूर्वांचल, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्र के जिलों में भी विकास कार्यों को समान प्राथमिकता दी।

 

गंगा एक्सप्रेसवे पर दौड़े विकास के पहिए, जेवर से हुई प्रगति की उड़ान

इस अवधि की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 36 हजार करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले गंगा एक्सप्रेसवे व नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर का लोकार्पण रहा। मेरठ से प्रयागराज तक प्रदेश को जोड़ने वाला यह एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास, व्यापार, निवेश और रोजगार के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। वहीं नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट जेवर से भी प्रगति की उड़ान हुई। एयरपोर्ट के लिए जमीन देने वाले किसान पहली फ्लाइट में बैठकर लखनऊ पहुंचे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संवाद भी किया। 

ALSO READ: मुरादाबाद में दिखा मुख्यमंत्री योगी का वात्सल्य, जिस बच्ची का कराया था दाखिला, उसी के हाथों कराया 'श्री राम वाटिका' का लोकार्पण

शिक्षा और तकनीक पर विशेष जोर

योगी सरकार ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप आधुनिक तकनीकी शिक्षा को भी प्राथमिकता दी। गोरखपुर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की गई, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी और थ्री-डी प्रिंटिंग जैसे भविष्य की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुजफ्फरनगर में भी सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग की स्थापना के माध्यम से युवाओं को नई तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

 

स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ विस्तार

योगी सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए भी अनेक परियोजनाओं की शुरुआत की। ललितपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज सहित स्वास्थ्य अवसंरचना से जुड़ी कई परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। विभिन्न जिलों में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया गया।

ALSO READ: योगी सरकार का बड़ा फैसला, 1.04 करोड़ रुपए से संवरेगा गोमती नदी का उद्गम स्थल, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उद्योग और निवेश को नई ऊर्जा

ललितपुर में 1,500 एकड़ में उत्तर प्रदेश का पहला फार्मा पार्क विकसित करने की घोषणा राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं विभिन्न जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों, लॉजिस्टिक सुविधाओं और कनेक्टिविटी परियोजनाओं के माध्यम से निवेश के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं।

 

पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को मिला बढ़ावा

प्रदेश सरकार पर्यटन विकास को भी प्राथमिकता दे रही। संतकबीर नगर में तामेश्वरनाथ धाम कॉरिडोर, बाबा बैजूनाथ धाम के विकास और बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई। महोबा को एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की गई। इसके साथ ही प्रदेशभर में इको टूरिज्म को लेकर भी बड़े स्तर पर काम चल रहा है।

 

खेल और शहरी सुविधाओं का विस्तार

गोरखपुर में लगभग 393 करोड़ रुपए की लागत से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास किया गया, जिसमें 30 हजार दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी। वहीं नगर निगमों में आधुनिक सदन भवन, मल्टीलेवल पार्किंग, टू-लेन ब्रिज, ईको पार्क और अन्य शहरी सुविधाओं के विकास से नागरिक जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया।

ALSO READ: हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए एक्शन में योगी सरकार, जल जीवन मिशन की होगी जमीनी मॉनिटरिंग

सामाजिक समरसता और जनकल्याण को भी प्राथमिकता

लखीमपुर खीरी में बांग्लादेश से विस्थापित हिंदू परिवारों, पीलीभीत में हजारों बंगाली परिवारों को नागरिकता और भूमि अधिकार पत्र वितरित किए गए। इस तरह प्रदेश में कई अवसरों पर लोगों को नियुक्ति पत्र व अन्य सुविधाओं से जुड़े पत्र भी वितरित किए गए। वहीं श्रमिक कल्याण योजनाओं, कल्याण मंडपम और अन्य जनसुविधाओं के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया गया।

 

विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत नींव

इसी तरह रामपुर, गोरखपुर, देवरिया, मऊ, उन्नाव, आजमगढ़, कुशीनगर, गोंडा, बलरामपुर, सहारनपुर, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, फिरोजाबाद, ललितपुर और अन्य जिलों में सैकड़ों विकास परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में जिस गति से हजारों विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ, उससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश में विकास अब केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर तेजी से क्रियान्वित हो रहा है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, पर्यटन, खेल और शहरी विकास जैसे लगभग सभी क्षेत्रों में एक साथ हो रहे निवेश प्रदेश को विकसित अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं।

 

एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य

उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं लोकार्पण और शिलान्यास से जुड़ी सभी परियोजनाओं को निगरानी करते आ रहे हैं। वहीं एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर, फार्मा पार्क और औद्योगिक क्लस्टर जैसी आधारभूत परियोजनाओं के साथ निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

ALSO READ: ओबीसी युवाओं को डिजिटल ताकत दे रही योगी सरकार, ओ लेवल-सीसीसी प्रशिक्षण बना सहारा

कृषि, एमएसएमई, पर्यटन, डिजिटल अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दी जा रही है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने, रोजगार सृजन, कौशल विकास और बेहतर कानून-व्यवस्था के माध्यम से उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य तेज आर्थिक विकास के साथ प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करना है।

 

मुख्यमंत्री योगी द्वारा अप्रैल, मई-जून में किए गए प्रमुख लोकार्पण व शिलान्यास

अप्रैल- 

5 अप्रैल: गोरखपुर-बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स के साथ घंटाघर के सौंदर्यीकरण कार्य का लोकार्पण 

7 अप्रैल: आगरा में 6466.37 करोड़ रुपए की 325 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। साथ ही ग्रेटर आगरा टाउनशिप विकसित करने की घोषणा की।

11 अप्रैल: लखीमपुर खीरी की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की 817 करोड़ की 314 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

11 अप्रैल: लखीमपुर खीरी में ही बांग्लादेश से विस्थापित 331 हिंदु परिवारों को भूमिधरी अधिकार पत्र दिया और 417 करोड़ की 231 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

13 अप्रैल: आदर्श माध्यमिक विद्यालय, जनभवन के नए भवन का शुभारंभ किया। इसकी लागत करीब 5.17 करोड़ रुपए है। 

13 अप्रैल: मुजफ्फरनगर में 951 करोड़ रुपए की 423 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इन योजनाओं में ‘सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड ट्रेनिंग जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। यहां युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और 3-डी प्रिंटिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।

15 अप्रैल: टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के साथ गोरखपुर में महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पूर्वी उत्तर प्रदेश के पहले सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का लोकार्पण किया। यह 50 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित हुआ है। इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कांप्लेक्स में ड्रोन टेक्नोलाजी एंड 3डी प्रिंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलाजी, साइबर सिक्युरिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, ड्रोन टेक्नोलाजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, थ्री डी प्रिंटिंग समेत एकीकृत पाठ्यक्रम संचालित होंगे।

23 अप्रैल: गोरखपुर में राप्ती नदी के एकला बंधा पर लिगेसी वेस्ट का निस्तारण कर बनाए गए ईको पार्क, नौसढ़-मलौनी फोरलेन सड़क सहित विकास की 1055 करोड़ रुपए की 497 विकास परियोजनाओं की सौगात दी।

29 अप्रैल: हरदोई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री योगी ने गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। 36 हजार करोड़ रुपए से अधिक की लागत का यह मेगा प्रोजेक्ट मेरठ से प्रयागराज को जोड़ता है।

 

मई- 

1 मई: लखनऊ में श्रमवीर गौरव समारोह 2026 और श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं का किया लोकार्पण-शिलान्यास किया।

5 मई: तारामंडल में वाटर बॉडी पर बने टू लेन ब्रिज का लोकार्पण किया। इसकी लागत 14 करोड़ रुपए से अधिक है।

5 मई: गोरखपुर में 612.32 करोड़ रुपए की 71 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग के लिए 'कल्याण मंडपम' का लोकार्पण भी शामिल है, ताकि आम जनता को कम खर्च पर मांगलिक आयोजनों के लिए भव्य जगह मिल सके।

7 मई: सहारनपुर में 2131 करोड़ रुपए की 325 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। 

15 मई: महराजगंज के नौतनवां में 208 करोड़ की 79 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इससे सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के विकास को गति मिलेगी।

16 मई: गोरखपुर में केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी संग अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का भूमिपूजन और शिलान्यास किया। इसकी लागत करीब 393 करोड़ रुपए होगी। इस विश्वस्तीय स्टेडियम में 30 हजार दर्शकों के बैठने की व्यवस्था होगी।

22 मई: देवरिया में 655 करोड़ की 19 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इसमें बिहार तक जुड़ने वाला फोर लेन मार्ग भी शामिल है। साथ ही इस परियोजनाओं के जरिए स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढ़ाचे को मजबूत किया जाना है।

26 मई: लखनऊ नगर निगम की 413 करोड़ की 342 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

26 मई: प्रयागराज में नगर निगम के नवनिर्मित सदन हॉल व विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इनकी लागत 400 करोड़ रुपए से अधिक है।

29 मई: मऊ को 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात दी। इसमें सड़क, आधारभूत ढांचा, जनकल्याण और अन्य विकास से जुड़ी परियोजनाएं शामिल हैं।

30 मई: लखनऊ में नौसेना शौर्य संग्रहालय का लोकार्पण किया।

 

जून-

2 जून: कुशीनगर में 424 करोड़ रुपए की 278 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

5 जून: बलरामपुर में 294 करोड़ रुपए की 75 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

6 जून: गोंडा में 516 करोड़ रुपए की 262 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

13 जून: आजमगढ़ में 955 करोड़ रुपए की 39 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

13 जून: गोरखपुर में 295 करोड़ रुपए की 319 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

14 जून: गोरखपुर में 926 करोड़ रुपए की 226 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। 

18 जून: उन्नाव में 570 करोड़ रुपए की विकास 101 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। 

20 जून: ललितपुर में राजकीय मेडिकल कॉलेज समेत 1,766 करोड़ रुपए की 221 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। ललितपुर में 1500 एकड़ में यूपी का पहला फार्मा पार्क भी बनेगा।

21 जून: हमीरपुर में 636 करोड़ रुपए से अधिक की 75 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

21 जून: महोबा में 697 करोड़ रुपए से अधिक की 88 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिले को एडवेंचर टूरिज्म डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

22 जून: अलीगढ़ में 462 करोड़ रुपए की 85 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

22 जून: फिरोजाबाद में 658 करोड़ रुपए की 81 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

25 जून: संतकबीर नगर में 475 करोड़ रुपए की 139 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। यहां मुख्यमंत्री योगी ने तामेश्वरनाथ धाम को कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की बात कही। बताया कि बाबा बैजूनाथ धाम सहित क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण पर भी कार्य प्रस्तावित है। साथ ही बखिरा झील को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी बताई।

26 जून: देवरिया में 456.38 करोड़ रुपए की 106 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। इसमें सड़क, पुल, बाढ़ नियंत्रण, शिक्षा और नगर विकास से जुड़ी योजनाएं सम्मलित हैं।

28 जून: हाथरस में 548 करोड़ रुपए की 143 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

29 जून: मुरादाबाद में 365 करोड़ रुपए से अधिक की 63 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

29 जून: पीलीभीत में 569 करोड़ रुपए से अधिक की 66 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया। साथ ही 2500 बंगाली परिवारों को नागरिकता एवं भूमि अधिकार पत्र वितरित किए।

30 जून: रामपुर में 690 करोड़ रुपए की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास किया।

Europe heatwave : यूरोप में 43 डिग्री सेल्सियस और भारत में 43 डिग्री सेल्सियस एक जैसे क्यों नहीं लगते? जानिए गर्मी का असली विज्ञान

इन दिनों यूरोप भीषण हीटवेव (Heatwave) की चपेट में है। इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट ने नई बहस छेड़ दी। अगर यूरोप और भारत दोनों जगह तापमान 43 डिग्री सेल्सियस है, तो फिर यूरोप में इतनी चिंता क्यों? भारत में तो कई शहरों में तापमान 48 डिग्री तक पहुंच जाता है। यह पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने-अपने अनुभव शेयर किए। किसी ने यूरोप में एयर कंडीशनर (AC) और पंखों की कमी को वजह बताया तो किसी ने नमी (Humidity), इमारतों की बनावट और वहां की जलवायु को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।

ALSO READ: OnePlus Nord N6 5G लॉन्च, 19,999 रुपए में 8,000mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले और 50MP कैमरा

 एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक सिर्फ थर्मामीटर पर दिखने वाला तापमान यह तय नहीं करता कि गर्मी कितनी महसूस होगी। इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण होते हैं।

ALSO READ: Electric Scooter खरीदने से पहले 14 जरूरी बातें जो आपके लिए जानना जरूरी

भारत और यूरोप की जलवायु में बड़ा अंतर

 

एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक भारत के कई हिस्सों में हर साल लंबे समय तक भीषण गर्मी पड़ती है। ऐसे में यहां के लोग और उनका शरीर काफी हद तक इस मौसम के अनुरूप खुद को ढाल चुका है।  इसके उलट यूरोप के अधिकांश देशों में पारंपरिक रूप से मौसम अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। वहां अचानक आने वाली तेज गर्मी लोगों और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक  हमारा शरीर पसीना निकालकर खुद को ठंडा करता है। लेकिन यदि हवा में नमी अधिक हो तो पसीना जल्दी नहीं सूखता और शरीर की गर्मी बाहर नहीं निकल पाती।

 

यही वजह है कि 35 डिग्री सेल्सियस तापमान भी अधिक नमी वाले क्षेत्रों में 43 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा गर्म महसूस हो सकता है। इसी कारण मौसम विभाग अक्सर वास्तविक तापमान के साथ 'Feels Like Temperature' भी जारी करता है, जो शरीर पर पड़ने वाले वास्तविक गर्मी के असर को बेहतर तरीके से दर्शाता है। 

ALSO READ: SC On Ethanol Blending Policy : SC में BPCL एथेनॉल विवाद पर सुनवाई, केंद्र ने कहा- 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य नहीं बदलेगा

घर की बनावट का असर 

यूरोप के अधिकांश घर लंबे और ठंडे सर्द मौसम को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इनमें मोटी दीवारें, बेहतर इंसुलेशन और अपेक्षाकृत छोटे खिड़की-दरवाजे होते हैं, जिससे गर्मी आसानी से बाहर नहीं निकलती।  कई घरों में एयर कंडीशनर नहीं होते और प्राकृतिक वेंटिलेशन भी सीमित होता है। ऐसे में दिनभर की गर्मी रात तक घरों के अंदर बनी रहती है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिलती। इसके विपरीत भारत में अधिकांश क्षेत्रों में गर्म मौसम को ध्यान में रखते हुए पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल अधिक आम है। Edited by : Sudhir Sharma

कांग्रेस की PAC की बैठक में दिग्विजय के खिलाफ नेताओं ने खोला मोर्चा, पटवारी के बयान से मतभेद पर उठे सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच अब आर-पार की लड़ाई होती दिख रही है। मंगलवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में वीर भारत न्यास के मुद्दें को लेकर जीतू पटवारी औऱ दिग्विजय सिंह के आमने सामने होने से पार्टी की हो रही किरकिरी का मुद्दा जोर शोर से उठा है। वहीं पार्टी के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के साथ अजय सिंह नहीं शामिल हुए, जो पार्टी की गुटबाजी को बताया है।
 
ऑनलाइन हुई बैठक में जब प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर गांव-गांव आंदोलन करने की बात कही तो  भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और ग्वालियर से आने वाले कांग्रेस के पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने वीर भारत न्यास के मामले को उठाया।
 
बैठक में दोनों ही कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पहले यह साफ किया जाए दिग्विजय सिंह सच बोल रहे हैं या जीतू पटवारी। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच में जो हुआ उसे गलत परसेप्शन जनता के बीच में बना। बैठक में विधायक आरिफ मसूद और वरिष्ठ नेता प्रवीण पाठक ने वीर भारत न्यास से जुड़े जमीन के मामले को प्रमुखता से उठाया। दोनों नेताओं का कहना था कि पार्टी को इस पूरे मामले पर स्पष्ट और एकरूप रुख अपनाना चाहिए, क्योंकि वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयानों से कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम जनता के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हुई है।

बैठक में यह सवाल भी उठाया गया कि आखिर इस मामले में सही कौन है। नेताओं ने कहा कि पहले यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि वीर भारत न्यास और उससे जुड़े जमीन के मुद्दे पर दिग्विजय सिंह का पक्ष सही है या फिर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की ओर से दी गई जानकारी। यदि पार्टी के दो शीर्ष नेताओं के बयान अलग-अलग होंगे तो विपक्ष को हमला करने का मौका मिलेगा और संगठन की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी। चर्चा के दौरान कई नेताओं ने माना कि पिछले कुछ दिनों में वीर भारत न्यास को लेकर जिस तरह सार्वजनिक बयानबाजी हुई, उससे पार्टी के भीतर मतभेद की तस्वीर सामने आई।
 
वहीं बैठक में मामला बढता देख प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने कहा कि यह पूरा मामला पार्टी हाईकमान की संज्ञान में है और इस पूरे मुद्दें पर हाईकमान जो रणनीति तय करेगी उसके आधार पर ही आगे रणनीति तय करेगी। 

UPTET 2026 अभ्यर्थी शिक्षकों को योगी सरकार का बड़ा तोहफा, परीक्षा के लिए मिलेगी विशेष छुट्टी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के व्यावसायिक विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 में सम्मिलित होने वाले बेसिक शिक्षा विभाग के सेवारत शिक्षकों को परीक्षा तिथि पर विशेष अवकाश स्वीकृत किया जाएगा। शासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र शिक्षक सेवा संबंधी दायित्वों के कारण शिक्षक पात्रता परीक्षा में शामिल होने से वंचित न रहे। 

 

विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी द्वारा शिक्षा निदेशक (बेसिक) को जारी पत्र में बताया गया है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा 2, 3 एवं 4 जुलाई, 2026 को उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 आयोजित की जा रही है। परीक्षा में बेसिक शिक्षा विभाग के बड़ी संख्या में सेवारत शिक्षक भी अभ्यर्थी के रूप में सम्मिलित होंगे। इसे देखते हुए शासन स्तर पर विचारोपरांत निर्णय लिया गया है कि परीक्षा में प्रतिभाग करने वाले शिक्षकों को संबंधित परीक्षा दिवस पर विशेष अवकाश प्रदान किया जाए। साथ ही शिक्षा निदेशक (बेसिक) को इस निर्णय का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 

 

शासनादेश की प्रति स्कूल शिक्षा महानिदेशक, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव तथा सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रेषित की गई है, ताकि पात्र शिक्षकों को समय पर विशेष अवकाश उपलब्ध कराया जा सके और परीक्षा आयोजन के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए।

Share Bazaar में लगातार दूसरे दिन गिरावट, Sensex 250 अंक टूटा, Nifty भी 24000 के नीचे

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में आज भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। कारोबार के अंत में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। बिकवाली के दबाव में बीएसई सेंसेक्स 249.70 अंक गिरकर 76478.67 पर बंद हुआ, वहीं एनएसई निफ्टी भी 80.50 अंकों की गिरावट के साथ 23865.75 के स्तर पर आ गया। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और आईटी शेयरों में मुनाफावसूली से बाजार पर दबाव रहा। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। रियल्टी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं को छोड़कर निफ्टी के सभी सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

 

भारतीय शेयर बाजार में आज भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। कारोबार के अंत में लगातार दूसरे दिन गिरावट रही। बिकवाली के दबाव में बीएसई सेंसेक्स 249.70 अंक गिरकर 76478.67 पर बंद हुआ, वहीं एनएसई निफ्टी भी 80.50 अंकों की गिरावट के साथ 23865.75 के स्तर पर आ गया।

ALSO READ: Share Bazaar में लगातार दूसरे दिन तेजी, Sensex 109 अंक चढ़ा, Nifty फिर 24000 के पार

वैश्विक बाजारों में कमजोरी और आईटी शेयरों में मुनाफावसूली से बाजार पर दबाव रहा। आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई। रियल्टी और उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं को छोड़कर निफ्टी के सभी सूचकांक लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

 

इंफोसिस, टीसीएस में 3 फीसदी से ज्यादा गिरावट आई। एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा के शेयर भी 2 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गए। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी, एशियन पेंट्स और एसबीआई में भी गिरावट रही। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी 15 पैसे टूटकर 94.65 के सर्वकालिक निचले स्तर पर बंद हुआ।

ALSO READ: Share Bazaar में आई बड़ी तेजी, Sensex 791 अंक उछला, Nifty भी 24000 के पार

आज का बाजार यह स्पष्ट करता है कि प्रमुख सूचकांकों में भले ही सुस्ती हो, लेकिन निवेशकों का रुझान विशिष्ट पॉलिसी-संचालित सेक्टर्स जैसे इलेक्ट्रिक वाहन और मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों की तरफ मजबूती से बना हुआ है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों और अगले कुछ सत्रों में बनने वाली धारणा पर निर्भर करेगी।

ALSO READ: Share Bazaar में बड़ी गिरावट, Sensex 893 अंक लुढ़का, Nifty भी 24000 के नीचे, आखिर क्यों ढहा बाजार?

इससे पहले यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। बाजार में 2 दिन से जारी बढ़त का सिलसिला थम गया। सेंसेक्स 372.10 अंक या 0.48 फीसदी लुढ़ककर 76,728.37 पर और निफ्टी 109.75 अंक या 0.46 फीसदी टूटकर 23,946.25 पर बंद हुआ।

राजस्थान के भीलवाड़ा में चोर नरेंद्र मोदी का मुखौटा लगाकर आए और दुकान से 40 मोबाइल चुराकर ले गए

rajasthan bhilwara mobile theft

rajasthan bhilwara mobile theft: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में एक चौंकाने वाली चोरी की घटना सामने आई है। एक चोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुखौटा लगाकर मोबाइल फोन की दुकान में घुसपैठ की और लगभग 40 मोबाइल फोन चुराकर फरार हो गया। घटना का पूरा वीडियो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

 

घटना की डिटेलसीसीटीवी फुटेज के अनुसार, चोर रात के अंधेरे में दुकान के बाहर पहुंचा। उसके चेहरे पर पीएम मोदी का मुखौटा लगा हुआ था। चोर ने शटर तोड़ने या खोलने के लिए कोई औजार इस्तेमाल किया और अंदर घुसकर मोबाइल फोन की दुकान से 40 मोबाइल चुरा लिए। फुटेज में साफ दिख रहा है कि वह मुखौटा पहने हुए है, लाल जैकेट पहने है और चोरी के बाद भाग निकला।

यह घटना भीलवाड़ा शहर के एक व्यावसायिक इलाके में हुई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और चोर की पहचान करने के प्रयास कर रही है। अभी तक चोर गिरफ्तार नहीं हुआ है।सोशल मीडिया पर चर्चाइस वीडियो के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया है। कई यूजर्स ने इसे राजनीतिक संदर्भ में जोड़कर मजाक उड़ाया, तो कुछ ने चोरी की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। एक यूजर ने लिखा- “चोर को भी पता है कि मोदी का नाम काम आता है!” जबकि दूसरे ने इसे अपराध की नई शैली बताया।

पुलिस की भूमिका

भीलवाड़ा पुलिस इस मामले को गंभीरता से ले रही है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोर की तलाश की जा रही है। पुलिस ने आसपास के इलाकों में छानबीन तेज कर दी है। मोबाइल चोरी की घटनाएं राजस्थान में पहले भी होती रही हैं, लेकिन मुखौटा लगाकर चोरी का यह तरीका काफी अनोखा और सनसनीखेज है।

 

अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मुखौटे या डिजाइन का चोर अब आमतौर पर करते हैं ताकि पहचान छिपाई जा सके। लेकिन आधुनिक सीसीटीवी और फॉरेंसिक तकनीक से ऐसे अपराधी आसानी से पकड़े जा सकते हैं। पुलिस को आसपास के अन्य कैमरों और मोबाइल लोकेशन डेटा की मदद से चोर तक पहुंचने की उम्मीद है।

 

यह घटना एक बार फिर से सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ते साइबर/फिजिकल अपराध पर सवाल उठाती है। आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की जरूरत है – दुकानों में बेहतर सुरक्षा, अलार्म सिस्टम और नियमित पुलिस गश्त अपराध को रोक सकती है। पुलिस की जांच जारी है। जैसे ही नई जानकारी आएगी, हम आपको बताएंगे। अगर आपके पास इस मामले से जुड़ी कोई जानकारी है तो पुलिस से संपर्क करें। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala