क्‍लीन सिटी इंदौर में लगी थलापति विजय की पेंटिंग, ऐसे दिया सफाई का संदेश

Thalapathy Vijay

थलापति विजय तमिलनाडु के सीएम हैं और साऊथ फिल्‍मों के जाने माने हीरो। लेकिन इन दिनों वे इंदौर में छाए हुए हैं। शहर के कुछ इलाकों में थलापति विजय की पेंटिंग नजर आ रही हैं, जो सफाई का संदेश दे रही है। बता दें कि थलापति विजय के फैन पूरे देश में हैं, लेकिन इंदौर में वे अलग ही तरह से अपनी छाप छोड रहे हैं।

दरअसल उनकी एक पेंटिग शहर के रक्षित केंद्र के बाहर बनाई गई है। बता दें कि थलापति विजय के इंस्‍पेक्‍टर वाली इमेज का हर कोई दीवाना है। यही वजह है कि शहर के चित्रकारों ने थलापति विजय की इंस्पेक्टर वाली इमेज को दीवार पर उतार दिया है और सफाइ का संदेश दे डाला है।

इंदौर के डीआरपी लाइन इलाके में थलापति की पुलिस ऑफिसर वाली फोटो को वॉल पेंटिंग के जरिए तैयार किया गया है। जिससे कि यहां से गुजरने वाले सामान्य लोगों के अलावा पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी भी विजय की फिल्मों की तरह ही स्वच्छता और अनुशासन के लिए प्रेरित हो सकें। यह पेंटिंग आर्टिस्ट संतोष राज ने बनाई है। वे खुद उनके फैन हैं।
Edited By: Naveen R Rangiyal

SC On Ethanol Blending Policy : SC में BPCL एथेनॉल विवाद पर सुनवाई, केंद्र ने कहा- 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य नहीं बदलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और केंद्र सरकार के बीच एथेनॉल आवंटन प्रक्रिया से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने का आदेश दिया। सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने कहा कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल करने का केंद्र सरकार का लक्ष्य पूरी तरह बरकरार है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है।

 

अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ को बताया कि देशव्यापी एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम एक बड़ा राष्ट्रीय प्रयोग है, जिसके परिणाम अगले वर्ष तक और स्पष्ट रूप से सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार इस महत्वाकांक्षी योजना को तय समय के अनुसार लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश से शुरू हुआ विवाद

यह विवाद कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद शुरू हुआ, जिसमें वर्ष 2025-26 के लिए एथेनॉल आवंटन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का निर्देश दिया गया था। BPCL का कहना है कि यदि आवंटन प्रक्रिया फिर से खोली जाती है, तो इससे केंद्र सरकार के राष्ट्रीय एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है।सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने पहले कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच का रुख क्यों नहीं किया।

  

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि संबंधित अवधि के लिए एथेनॉल आपूर्ति अनुबंध अक्टूबर 2025 में ही अंतिम रूप दिए जा चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह के कई मामले देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में लंबित हैं। यदि अलग-अलग अदालतों से अलग-अलग आदेश आते हैं, तो राष्ट्रीय नीति के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने सभी मामलों को एक साथ सुनने के लिए ट्रांसफर याचिका दायर करने की अनुमति भी मांगी। हालांकि, मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि ट्रांसफर याचिका केवल सुनवाई को टालने का प्रयास है।

 

वेंकटरमणी ने अदालत से कहा कि अक्टूबर से पहले इस मामले पर फैसला होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी अवधि में नए एथेनॉल आपूर्ति अनुबंध जारी किए जाने हैं। यदि पहले डिवीजन बेंच और फिर अन्य अदालतों में अलग-अलग सुनवाई होगी तो इसमें काफी समय लगेगा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्टेटस क्वो का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। सुनवाई के बाद अटॉर्नी जनरल ने स्पष्ट किया कि अदालत के सामने उनकी दलीलें केवल एथेनॉल की आपूर्ति की मात्रा (Quantum of Supply) से संबंधित थीं, न कि सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति से।

 

उन्होंने दोहराया कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का केंद्र सरकार का लक्ष्य पहले की तरह जारी रहेगा। हालांकि, तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies) को आवंटित किए जाने वाले एथेनॉल की मात्रा मांग और अन्य परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर तय की जाएगी।

क्या है पूरा मामला 

विन्प डिस्टिलरीज एंड शुगर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा है। कंपनी ने कर्नाटक हाईकोर्ट में कहा था कि उसने सिर्फ एथेनॉल बनाने का प्लांट लगाया है। उसकी सालाना क्षमता करीब 9.90 करोड़ लीटर है, लेकिन 2025-26 के लिए उसे सिर्फ 3.92 करोड़ लीटर एथेनॉल सप्लाई का ऑर्डर मिला। जबकि उसने 9.26 करोड़ लीटर की बोली लगाई थी। सरकार की तरफ से कहा गया कि पहले ज्यादा आवंटन मिलने का मतलब यह नहीं है कि कंपनी हर बार उतनी ही मात्रा मांग सकती है। अगर उसकी मांग मान ली गई तो सरकार की पूरी नीति बदल जाएगी।Edited by : Sudhir Sharma

ग्राम सचिवालय में 1 जुलाई से बैठेंगे लेखपाल, अब ग्रामीणों को नहीं लगाने पड़ेंगे तहसील के चक्कर

Yogi government's significant step regarding revenue related services in rural areas

-मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप उपस्थिति का तैयार होगा रोस्टर, आय-जाति-निवास प्रमाण पत्र व खतौनी आदि के लिए होगा त्वरित निस्तारण

– राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को जारी किए निर्देश, बुधवार से लेखपालों की नियमित उपस्थिति होगी सुनिश्चित

-मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर ग्राम सचिवालय बनेंगे 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर', ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत

– सुशासन की दिशा में योगी सरकार का एक और कदम, गांव में ही उपलब्ध होंगी राजस्व सेवाएं

Uttar Pradesh news : योगी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक सुगम और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप अब प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। इसको लेकर राजस्व परिषद की ओर से सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी किया गया है। पत्र में रोस्टर तैयार कर 1 जुलाई से नई व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। 

 

ग्रामीणों को नहीं लगाने पड़ेंगे तहसीलों के बार-बार चक्कर 

राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लगातार प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवाओं को गांव स्तर तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में प्रत्येक जनपद में लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों में पहले से स्थापित ग्राम सचिवालयों का उद्देश्य विभिन्न विभागों की सेवाओं को ग्रामीणों तक एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना है।

पंचायतीराज विभाग के पूर्व आदेशों के अनुरूप ग्राम सचिवालयों में विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था की गई है। अब इसी व्यवस्था को और प्रभावी बनाते हुए लेखपालों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि राजस्व विभाग से संबंधित कार्यों का त्वरित निस्तारण हो सके। बता दें कि ग्राम सचिवालयों के माध्यम से पंचायत सहायकों द्वारा संचालित ऑनलाइन सेवाओं में राजस्व विभाग की कई महत्वपूर्ण सेवाएं शामिल हैं।

इनमें आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, हैसियत प्रमाणपत्र, खतौनी की नकल सहित लगभग दस प्रमुख सेवाएं शामिल हैं। इन सेवाओं के समयबद्ध निस्तारण में लेखपाल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में ग्राम सचिवालय में उनकी नियमित उपलब्धता से ग्रामीणों को तहसील के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी हद तक कम होगी।

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ग्राम स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होने से लोग होते थे परेशान 

राजस्व परिषद ने अपने पत्र में यह भी स्पष्ट किया है कि लेखपाल केवल प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य ही नहीं करते, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की मजबूत कड़ी के रूप में भी कार्य करते हैं। तहसील दिवस, थाना दिवस, वरासत, स्वामित्व योजना, किसान सम्मान निधि, राहत एवं पुनर्वास, आपदा प्रबंधन, भूमि विवादों का निस्तारण, कृषि गणना, जनगणना, फसल गिरदावरी, प्राकृतिक आपदाओं की रिपोर्ट, अवैध कब्जों की जांच, खनन संबंधी सत्यापन, सार्वजनिक वितरण प्रणाली से जुड़े सत्यापन तथा धान-गेहूं क्रय केंद्रों के सत्यापन जैसे अनेक महत्वपूर्ण दायित्व भी लेखपाल निभाते हैं।

इसके अलावा विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन में भी लेखपालों की रिपोर्ट और सत्यापन की आवश्यकता पड़ती है। वहीं ग्राम पंचायत स्तर पर लेखपालों के बैठने के लिए कोई निश्चित व्यवस्था नहीं होने के कारण आम जनता को असुविधा का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों को कई बार लेखपाल से मिलने के लिए तहसील या अन्य स्थानों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और धन दोनों की हानि होती है। इस समस्या को समाप्त करने के उद्देश्य से अब प्रत्येक जनपद में रोस्टर बनाकर लेखपालों की ग्राम सचिवालयों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है।

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1 जुलाई से लागू होगी व्यवस्था

राजस्व परिषद ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि वे अपने-अपने जनपदों में लेखपालों के बैठने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करें और उनकी उपस्थिति का रोस्टर निर्धारित करें। यह व्यवस्था 1 जुलाई से प्रभावी रूप से लागू की जाएगी। इस नई व्यवस्था से ग्राम सचिवालय ग्रामीणों के लिए 'वन स्टॉप सर्विस सेंटर' के रूप में विकसित होंगे। इससे न केवल आमजन को राहत मिलेगी, बल्कि राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली भी अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कांग्रेस का PM मोदी पर बड़ा हमला, बोली- श्रेय लिया तो जिम्मेदारी भी लें

modi ayodhya ram mandir

राम मंदिर चंदा चोरी मामले में कांग्रेस ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर हमला किया। पार्टी ने चंदा चोरी पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए और कहा कि अगर प्रधानमंत्री किसी काम का श्रेय लेते हैं तो उन्हें जिम्मेदारी भी लेनी होगी। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पूछताछ में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मानी गलती

 

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीने‍त ने कहा-राम मंदिर का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया। लेकिन भूमि पूजन, शिलान्यास, उद्घाटन, प्राण प्रतिष्ठा और ध्वजारोहण जैसे सभी प्रमुख कार्यक्रमों का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। मंदिर के ट्रस्ट का गठन भी नरेंद्र मोदी ने किया और उसे RTI से बाहर रखने के काम भी उन्होंने ही किया। अगर प्रधानमंत्री किसी काम का श्रेय लेते हैं तो उन्हें जिम्मेदारी भी लेनी होगी। ऐसे में चंदा चोरी पर प्रधानमंत्री मोदी मौन क्यों हैं? इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी कई बड़े सवाल खड़े करती है।

चंपत राय एक बड़ी मछली

उन्होंने कहा कि चंपत राय बंसल ट्रस्ट के सर्वेसर्वा थे। उन्होंने बस इस्तीफा दे दिया है और बचकर निकल जाना चाहते हैं। मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि जब महिपाल और कई अन्य लोगों ने आपके संज्ञान में यह बात लाई थी कि एक बहुत बड़ी चोरी हो रही है, तो उन्हें क्यों हटा दिया गया? ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?

 

 कांग्रेस नेता ने कहा कि चंपत राय एक बड़ी मछली हैं। उन्हें बचाने की हर मुमकिन कोशिश की जा रही है। दान का पैसा कहां गया? यह वह सवाल है जिसका जवाब चंपत राय बंसल को देना ही होगा, और उन्हें ऐसे ही साफ़ बचकर निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उनके खिलाफ एक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जानी चाहिए।

 

क्या है कांग्रेस की मांग?

सुप्रिया श्रीने‍त ने कहा कि 'चढ़ावा चोरी' के मुद्दे पर योगी सरकार SIT की जांच सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग किया जाए। पार्टी ने चंपत राय और अन्य लोगों के खिलाफ FIR और जांच की भी मांग की। उन्होंने कहा कि शुरू से सारे चढ़ावों का निष्पक्ष ऑडिट किया जाए। इस महाघोटाले की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज द्वारा जांच हो। नरेंद्र मोदी चुप्पी तोड़ें और श्रद्धालुओं से इस धोखे और विश्वासघात के लिए माफी मांगें।

 

क्या बोले अजय राय?

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने भी कहा कि आज हम प्रभु श्री राम के दर्शन करना चाहते थे, लेकिन BJP सरकार ने हमें गिरफ्तार कर गेस्ट हाउस में बंद किया हुआ है। आज अयोध्या नगरी में चंदा चोरी और जमीन घोटाले हो रहे हैं। हम भगवान राम से प्रार्थना करना चाहते थे कि BJP-RSS के लोगों को सद्बुद्धि दें। 

 

उन्होंने कहा कि जिन छोटे कर्मचारियों को जेल भेजा गया है, इनको पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाए।नृपेंद्र मिश्रा, अनिल मिश्रा, गोपाल राव, चंपत राय और गोविंद गिरी इन सभी लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया जाए। ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए और ट्रस्ट में शंकराचार्यों के द्वारा नामित लोगों को शामिल किया जाए, जो धर्म से जुड़े हों।

तुम हमें खून दो, हम तुम्‍हें VIP दर्शन देंगे, ओंकारेश्‍वर में दर्शन के लिए अनोखी पहल, रक्‍तदान करो और कतार से बचो

Omkareshwar VIP

मध्‍यप्रदेश के इंदौर से सटे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में पुण्य के साथ 'VIP' दर्शन की सुविधा शुरू की गई है। इस अनोखी पहल के तहत अगर श्रद्धालु अपना रक्‍त दान करता है तो उसे वीआईपी दर्शन की सुविधा दी जाएगी। जी हां, आपने सही सुना। ओंकारेश्‍वर में भगवान शिव के ज्‍योर्तिलिंग दर्शन के लिए रक्तदान कीजिए और सीधे पाइए बाबा के दर्शन। यानी प्रसिद्ध ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए उन लोगों को कतार में नहीं लगना पडेगा जो वहां रक्‍त दान करेंगे।

मंदिर प्रशासन और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने यह नई मुहिम शुरू की है, जिसके तहत रक्तदान करने वाले श्रद्धालुओं को बिना किसी रुकावट के सीधे 'VIP दर्शन' कराए जा रहे हैं। जहां एक ओर इस पहल को लेकर युवाओं और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है, वहीं प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि जो लोग रक्तदान नहीं करना चाहते या अक्षम हैं, वे हमेशा की तरह सामान्य प्रक्रिया और कतारों के माध्यम से बाबा के दर्शन कर सकेंगे।

रक्त दो और दर्शन करो : इस योजना के तहत एक रक्त दान करने वाले के साथ उसके परिवार के दो अन्य सदस्य भी दर्शन कर सकते हैं। योजना का लाभ लेने के लिए श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर स्थित शांति निकेतन वृद्ध आश्रम में स्थापित रक्तदान केंद्र पर पहुंचना होता है। यहां काउंटर से आवेदन फॉर्म प्राप्त कर भरकर जमा करने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आवश्यक स्वास्थ्य जांच की जाती है। पात्र पाए जाने पर श्रद्धालु रक्तदान कर सकते हैं। रक्तदान के बाद उन्हें जूस, बिस्कुट एवं कुछ समय विश्राम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।

ब्‍लड डोनेट के बाद जारी होता है रिस्‍ट बैंड : रक्तदान के बाद प्रशासन की ओर से रक्त दान करने वाले को बकायदा प्रमाण-पत्र दिया जाता है। शीघ्र दर्शन के लिए उसकी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इसके बाद रक्तदाता के मोबाइल पर एक संदेश भेजा जाता है। इस संदेश को टिकट काउंटर पर दिखाने पर रिस्ट बैंड जारी किया जाता है, जिसके माध्यम से रक्तदाता अपने साथ दो अन्य परिजनों सहित नि:शुल्क शीघ्र दर्शन कर सकता है।

रोजाना 40 हजार श्रद्धालु पहुंच रहे ओंकारेश्‍वर : बता दें कि रोजाना करीब 40 हजार श्रद्धालु ओंकारेश्वर दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें से करीब 50 श्रद्धालु प्रतिदिन रक्तदान कर रहे हैं। उनके साथ दो-दो अन्य परिजन भी शीघ्र दर्शन की सुविधा प्राप्त कर रहे हैं। इस प्रकार रोज करीब 150 श्रद्धालु इस विशेष योजना के माध्यम से नि:शुल्क और शीघ्र दर्शन का लाभ ले रहे हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि इससे रक्तदान के प्रति जागरूकता के साथ ही लोगों में आस्था भी बढेगी। वहीं, जरूरतमंदों को रक्‍त भी मिल सकेगा।

राहुल शर्मा (24 वर्ष, इंदौर से आए श्रद्धालु)
“मैं पहली बार ओंकारेश्वर आया हूं। यहां आकर जब पता चला कि रक्तदान करने पर सीधे दर्शन मिल रहे हैं, तो मैंने तुरंत हाँ कर दी। वैसे भी कतारों में 2-3 घंटे खड़े रहना पड़ता है, यहाँ आधे घंटे में रक्तदान भी हो गया और बाबा के दर्शन भी बहुत अच्छे से हो गए। सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मेरा खून किसी जरूरतमंद की जान बचाने के काम आएगा। यह आस्था और सामाजिक सरोकार का बहुत ही शानदार संगम है।”

मंजू शुक्ला (45 वर्ष, भोपाल से आईं श्रद्धालु)
“गर्मी और भीड़ के कारण लाइन में लगना थोड़ा मुश्किल हो रहा था। जब प्रशासन की इस अनोखी पहल के बारे में सुना, तो मन खुश हो गया। भगवान शिव तो खुद दानी हैं, उनके दरबार में आकर अगर हम किसी बीमार के लिए थोड़ा सा खून दान कर सकें, तो इससे बड़ा पुण्य और क्या होगा? बिना किसी परेशानी के VIP दर्शन भी हो गए और दिल को एक अनोखा सुकून भी मिला। इस व्यवस्था के लिए मंदिर प्रशासन की जितनी तारीफ की जाए, कम है।”
Edited By: Naveen R Rangiyal

आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उम्र और बीमारी का हवाला भी नहीं आया काम, जमानत से इनकार

Asaram

नाबालिग के साथ बलात्कार करने के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राहत देने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस समय उनको जमानत नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने राजस्थान सरकार को नोटिस जारी उनसे 2 हफ्ते में इस संबंध में जवाब मांगा है। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पूछताछ में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मानी गलती

 

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की बेंच आसाराम की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आसाराम का प्रभाव काफी बड़ा माना जाता है, इसलिए जमानत पर फैसला लेने से पहले सभी पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है।

 

क्या था आसाराम के वकील का तर्क

सुनवाई के दौरान आसाराम की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी.एस. नायडू ने कहा कि आसाराम की उम्र 80 वर्ष से अधिक है और वह कई बीमारियों से पीड़ित हैं। इस पर अदालत ने कहा कि केवल उम्र या बीमारी के आधार पर फिलहाल जमानत नहीं दी जा सकती। 

 

कब मिलेगी जमानत?

अदालत ने कहा कि हम सजा निलंबित करने पर विचार नहीं कर रहे हैं। निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को जेल में दी जा रहीं मेडिकल सेवाएं जारी रखी जाएं। जमानत देने पर तभी विचार किया जाएगा, जब कोई गंभीर स्वास्थ्य स्थिति हो। अदालत के इस रुख को आसाराम के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?

 

गौरतलब है कि आसाराम ने 2013 में एक नाबालिग के साथ रेप के मामले में दोषी ठहराए जाने और उम्रकैद की सजा मुकर्रर करने वाले राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। उन्होंने खराब सेहत का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की भी मांग की है।

edited by : Nrapendra Gupta

‘जो जय श्रीराम बोलने पर लाठी चलाते थे, वही आज अयोध्या जाने की बात कर रहे हैं’, CM योगी का बड़ा हमला

yogi adityanath in rampur

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 690 करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने एक जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि जो 2017 से पहले जय श्री राम बोलने पर लाठी मारते थे। जो लोग राम भक्तों पर गोली चलाते थे, आज वे आस्था की वकालत कर रहे हैं। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?

 

राम जानते हैं कौन सही कौन गलत?

सीएम योगी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी, जिसने 2017 से पहले भगवान राम और भगवान कृष्ण में विश्वास करने से इनकार कर दिया था, आज अयोध्या जाने के लिए उत्सुक है। सीएम योगी ने आगे कहा कि भगवान राम जानते हैं कि कौन सही है और कौन गलत।

 

कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो वे झूठ का सहारा ले रहे हैं

उन्होंने कहा कि वे इस बात से परेशान हैं कि अयोध्या और काशी विश्वनाथ इतने सुंदर कैसे हो गए? मां विंध्यवासिनी धाम का कायाकल्प कैसे हो गया और प्रयागराज महाकुंभ ने देश-दुनिया को अपनी ओर कैसे आकर्षित कर लिया। सीएम योगी ने कहा कि अब जब वे कुछ नहीं कर पा रहे हैं, तो वे झूठ का सहारा ले रहे हैं।

रामभक्ति कालनेमियों को निपटाने में सहायक

मुख्‍यमंत्री ने हनुमान का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि रामभक्ति हर प्रकार की बाधा को दूर करने का सामर्थ्य देती है। रामभक्ति ऐसे कालनेमियों को निपटाने में पूरी सहायक है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पहले भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के अस्तित्व पर सवाल उठाती थीं, लेकिन आज अयोध्या जाने की होड़ लगी हुई है।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम सबके हैं और जनता सब कुछ देख रही है। भगवान श्रीराम की भक्ति व्यक्ति को अन्याय और षड्यंत्र से लड़ने की शक्ति देती है।

edited by : Nrapendra Gupta

गुजरात में अफसरों के बंगलों पर चला बुलडोजर, नर्मदा जिला प्रशासन की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई

bulldozer action Garudeshwar

गुजरात के नर्मदा जिले में प्रशासन ने अपने ही वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue of Unity) के पास गरुड़ेश्वर में सरकारी अफसरों द्वारा रियायती (सब्सिडी वाले) आवासीय प्लॉट का कमर्शियल इस्तेमाल करने के आरोप में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। नर्मदा जिला प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने ऐसे 5 अवैध आलीशान बंगलों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया है।

आरटीआई (RTI) से हुआ बड़ा खुलासा

इस अभूतपूर्व कार्रवाई के तहत स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से महज 1 किलोमीटर दूर गरुड़ेश्वर में इन निर्माणों को ढहाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, आवासीय उपयोग की शर्तों का खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन करके ये संपत्तियां बनाई गई थीं। इस पूरे वीआईपी घोटाले का खुलासा इस साल की शुरुआत में एक अन्य सरकारी अधिकारी द्वारा दायर की गई आरटीआई (RTI) जांच के बाद हुआ, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। ALSO READ: गुजरात शिक्षा बोर्ड का बड़ा फैसला: 10वीं में अब तीन भाषाएं पढ़ना होगा अनिवार्य

छुट्टी के दिन त्वरित कार्रवाई

नर्मदा जिला प्रशासन ने रविवार जैसे छुट्टी के दिन भारी पुलिस बंदोबस्त के साथ इस तव त्वरित एक्शन को अंजाम दिया। यह कार्रवाई मुख्य रूप से वर्ष 2019 में जिले के 13 वरिष्ठ अधिकारियों को आवंटित किए गए प्लॉट और निर्माणों को निशाना बनाकर की गई थी। इस जमीन आवंटन के आधिकारिक दस्तावेजों पर नर्मदा के तत्कालीन जिला कलेक्टर आरएस निनामा ने हस्ताक्षर किए थे।

कौड़ियों के भाव बांटी गई जमीन

ये सभी सरकारी प्लॉट वरिष्ठ अधिकारियों को उनके निजी निवास के उद्देश्य से बेहद कम और सस्ते दामों पर आवंटित किए गए थे। प्रत्येक अधिकारी को 135 वर्ग मीटर का प्लॉट दिया गया था, जिसके लिए उनसे सिर्फ 37 हजार 210 रुपए से लेकर 50,000 रुपए तक की मामूली रकम वसूली गई थी। अधिकारियों ने एक तरह से माटी (मिट्टी) के भाव यह बेशकीमती सरकारी जमीन हासिल कर ली थी। ALSO READ: मानसून से पहले गुजरात सरकार की नई गाइडलाइन: जर्जर कमरों में नहीं लगेगी क्लास, स्कूलों में फर्स्ट एड किट अनिवार्य

 

बाजार कीमत में भारी कटौती

इन प्लॉट्स की कीमत तय करने के लिए राजस्व विभाग के एक पुराने सर्कुलर का सहारा लिया गया था। इस सर्कुलर के तहत, जमीन की वास्तविक मूल्यांकन बाजार कीमत (Market Value) जो कि 99,255 रुपए थी, उसमें सीधे 50 से 75 प्रतिशत तक की भारी कटौती कर दी गई। इस तरह सरकारी अधिकारियों को भारी छूट देकर प्राइम लोकेशन पर जमीन सौंप दी गई।

समय सीमा का उल्लंघन और प्लॉट रद्दीकरण

गरुड़ेश्वर में बन रहे आदिवासी संग्रहालय (Tribal Museum) के ठीक बगल में स्थित इन प्रीमियम प्लॉट्स से दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी) का सीधा और खूबसूरत नजारा दिखता है। नियमों के मुताबिक, आवंटित 13 अधिकारियों में से 5 अधिकारी तय समय सीमा के भीतर अपना आवासीय मकान पूरा करने की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं कर पाए थे। इस नियम उल्लंघन के कारण वे प्लॉट डिफॉल्ट रूप से पहले ही सरकार को वापस मिल गए थे।

छोटे मकान की जगह 12 बेडरूम के आलीशान बंगले

बाकी बचे प्लॉट धारकों ने भी आवंटन पत्र की शर्तों का पालन नहीं किया और 2 साल के भीतर सामान्य आवासीय निर्माण नहीं कराया। जांच के दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को पता चला कि वहां किसी सामान्य सरकारी कर्मचारी के रहने लायक घर के बजाय 6 से 12 बेडरूम वाले बड़े, बहुमंजिला और बेहद आलीशान बंगले खड़े कर दिए गए थे। इनमें से 6 बंगलों का काम पूरी तरह से तैयार हो चुका था, जबकि 7वें बंगले का निर्माण चल रहा था।

होमस्टे के जरिए कमर्शियल कमाई का खेल

सरकारी जांच में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि ये सभी आलीशान संपत्तियां सरकारी कर्मचारियों के रहने के लिए नहीं, बल्कि व्यावसायिक रूप से 'होमस्टे' (Homestay) चलाने के इरादे से बनाई जा रही थीं। चूंकि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर्यटकों के लिए एक वैश्विक केंद्र है, इसलिए यहां होमस्टे का बिजनेस बेहद मुनाफे वाला है। प्रशासन की प्रारंभिक जांच के अनुसार, इन बंगलों का नक्शा और डिजाइन ही विशेष रूप से पर्यटकों को कमरे किराए पर देने के व्यावसायिक उद्देश्य से तैयार किया गया था।

दो अधिकारियों ने ली कोर्ट की शरण

इस बड़े डिमोलिशन ड्राइव (तोड़फोड़ अभियान) के बीच दो अधिकारियों — डीआरडीए (DRDA) निदेशक एलएस डिंडोर और जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी बी.डी. बारिया ने प्रशासन के इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में कानूनी अपील दायर कर दी है। कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण रविवार को उनके बंगलों पर बुलडोजर नहीं चलाया गया, जबकि अन्य 6 अधिकारियों के प्लॉट पहले ही वापस लिए जा चुके हैं।

सांसद मनसुख वसावा का कड़ा रुख

इस पूरे मामले पर भरूच लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई का पुरजोर समर्थन किया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और यह कार्रवाई चयनात्मक (Selective) या पक्षपातपूर्ण नहीं होनी चाहिए। वसावा ने इस क्षेत्र में बन रहे एक 5-star होटल प्रोजेक्ट के लिए बड़े पैमाने पर की जा रही लैंडफिलिंग (जमीन भराई) और संदिग्ध मंजूरियों की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

मुरादाबाद में दिखा मुख्यमंत्री योगी का वात्सल्य, जिस बच्ची का कराया था दाखिला, उसी के हाथों कराया ‘श्री राम वाटिका’ का लोकार्पण

Chief Minister Yogi Adityanath inaugurated ambitious projects in Moradabad

Chief Minister Yogi Adityanath : विकास और विरासत के संगम के बीच मुरादाबाद में एक भावुक नजारा देखने को मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब करोड़ों रुपए की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का लोकार्पण किया, तो सबसे खास और भावुक पल 'श्री राम वाटिका' के उद्घाटन का रहा। इस भव्य वाटिका का लोकार्पण किसी राजनेता या अधिकारी ने नहीं, बल्कि वहां मौजूद दो नन्ही बच्चियों वांची और आची ने मुख्यमंत्री के सानिध्य में किया।

 

मुख्यमंत्री और नन्ही बच्चियों का पुराना है स्नेह का नाता

मुख्यमंत्री के साथ फीता काटने वाली छह वर्षीय वांची और उसकी छोटी बहन आची का मुख्यमंत्री योगी से यह स्नेहिल जुड़ाव नया नहीं है। दरअसल, इसके पीछे एक बेहद भावुक कहानी है। मुरादाबाद के रहने वाले इन बच्चियों के पिता अमित कुमार अपनी बेटी वांची के स्कूल एडमिशन को लेकर तीन महीने से परेशान चल रहे थे। इसके बाद, जून 2025 में उन्होंने ‘जनता दर्शन’ में बेटी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर अपनी गुहार लगाई थी।

 

महज तीन घंटे में दूर की थी पिता की परेशानी

बच्चों के प्रति विशेष स्नेह रखने वाले मुख्यमंत्री ने न केवल उनकी फरियाद सुनी थी, बल्कि महज तीन घंटे के भीतर उनकी समस्या का समाधान भी कर दिया था। मुख्यमंत्री के त्वरित निर्देश पर आरटीई के तहत उसी दिन सोमवार दोपहर को वांची का एडमिशन मुरादाबाद के प्रतिष्ठित 'सीएल गुप्ता वर्ल्ड स्कूल' में हो गया था। 

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सुरक्षा घेरे के बीच बेटियों को दिया सम्मान

श्री राम वाटिका के लोकार्पण के दौरान जब मुख्यमंत्री का काफिला पहुंचा, तो उनसे मिलने यह दोनों बच्चियों भी पहुंची थी। एक पल की भी देरी किए बिना, मुख्यमंत्री ने पूरे वात्सल्य के साथ उन दोनों बहनों को अपने पास बुलाया और उन्हीं नन्हे हाथों से इस भव्य श्री राम वाटिका का फीता कटवाकर इसे जनता को समर्पित कर दिया। बच्चियों के चेहरों की मुस्कान और इस अनूठे पल ने वहां मौजूद हर शख्स का दिल जीत लिया।

Weather Update : 22 राज्यों में पहुंचा मानसून, असम और अरुणाचल में बाढ़ जैसे हालात, मुंबई में भारी बारिश

Flood like situation in Assam and Arunachal, heavy rain in Mumbai

Weather Update News : मानसून ने 24 जून तक देश के 22 राज्यों को कवर कर लिया है, लेकिन बीते 5 दिन से इसकी रफ्तार धीमी पड़ी है। यह मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में आगे नहीं बढ़ पा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून 5 जुलाई तक बाकी राज्यों को कवर कर सकता है। अरुणाचल प्रदेश और असम में लगातार बारिश ने बाढ़ जैसे हालात कर दिए हैं। अरुणाचल प्रदेश के 12 जिले बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हैं। अरुणाचल प्रदेश में अब तक 3 लोगों की मौत हो गई है। असम के 5 जिलों में लगभग 45000 लोग प्रभावित हुए हैं।

 

मानसून ने 24 जून तक देश के 22 राज्यों को कवर कर लिया है, लेकिन बीते 5 दिन से इसकी रफ्तार धीमी पड़ी है। यह मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में आगे नहीं बढ़ पा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, मानसून 5 जुलाई तक बाकी राज्यों को कवर कर सकता है। अरुणाचल प्रदेश और असम में लगातार बारिश ने बाढ़ जैसे हालात कर दिए हैं।

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असम के 5 जिलों में 45000 लोग प्रभावित

अरुणाचल प्रदेश के 12 जिले बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित हैं। अरुणाचल प्रदेश में अब तक 3 लोगों की मौत हो गई है। असम के 5 जिलों में लगभग 45000 लोग प्रभावित हुए हैं। असम के धामाजी जिले में सिमेन नदी पर बना पुल ढह गया है, जिसके चलते रेल यातायात रोका गया है। हालात को देखते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों (असम और अरुणाचल प्रदेश) के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बात की है और पर्याप्त मदद का आश्वासन दिया है।

Flood like situation in Assam and Arunachal, heavy rain in Mumbai

मुंबई के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न

महाराष्ट्र में मानसून की पहली तेज बारिश ने मुंबई महानगर क्षेत्र की रफ्तार थाम दी। रविवार रात हुई मूसलाधार बारिश से भिवंडी, नवी मुंबई और मुंबई के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं। मुंबई में भारी बारिश और तेज हवा से कई जगहों पर पेड़ गिरने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। निचले इलाकों, बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। मौसम विभाग ने 5 जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

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झारखंड के 9 जिलों में अलर्ट

पूर्वी यूपी, बिहार, झारखंड, पंजाब और हरियाणा के साथ पहाड़ी इलाकों में आज बारिश की संभावना है। साथ ही आंधी का भी अलर्ट जारी किया गया है। बिहार और ओडिशा में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। झारखंड में आज से भारी बारिश होने का अनुमान है। आईएमडी ने 9 जिलों के लिए इस संबंध में अलर्ट जारी किया है। झारखंड के नौ जिलों (सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, खूंटी, रांची, रामगढ़, बोकारो, धनबाद और जामताड़ा) के लिए भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

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गंगीय पश्चिम बंगाल और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में भारी वर्षा जारी रहने के आसार हैं। दक्षिण भारत में केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पुडुचेरी, लक्षद्वीप और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में हल्की से मध्यम बारिश होगी। कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। केरल और तटीय कर्नाटक के कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा भी हो सकती है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के कई इलाकों में प्री-मानसून बारिश जारी है। 

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मध्य प्रदेश के 42 जिलों में यलो अलर्ट

मध्य प्रदेश में इंदौर समेत 12 जिलों में बारिश हुई है, जबकि करीब 40 जिलों में मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ। प्रदेश में 1 जुलाई से जबरदस्त बारिश का दौर शुरू होने जा रहा है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 3 दिनों तक पूरे प्रदेश में बारिश होगी। मौसम विभाग ने आज इंदौर, भोपाल, जबलपुर, उज्जैन सहित 42 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है।
Edited By : Chetan Gour