मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी, किसे मिलेगा मौका और किसकी होगी छुट्‍टी, किसका बदलेगा विभाग

modi cabinet reshuffle: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मोदी सरकार 3.0 के पहले बड़े 'मिड-टर्म रीसेट' यानी केंद्रीय मंत्रिमंडल फेरबदल की तैयारियां अंतिम चरण में मानी जा रही हैं। हाल ही में केंद्रीय राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। इस फेरबदल में न केवल कई मंत्रियों के विभाग बदलेंगे, बल्कि खराब परफॉर्मेंस वाले चेहरों की छुट्टी भी हो सकती है, जबकि चुनावी राज्यों के युवा चेहरों को टीम मोदी में एंट्री मिलने की उम्मीद है।

 

जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से पहले इस पूरी कवायद को अंजाम दिया जा सकता है। यह फेरबदल केवल प्रशासनिक स्तर पर विभागों का बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए आगामी विधानसभा चुनावों (उत्तर प्रदेश, बिहार) और 2029 के सियासी समीकरणों को साधने की भी कोशिश की जाएगी। मंगलवार यानी 30 जून को मोदी सभी विभागों के सचिवों के साथ भी बैठक करने वाले हैं। संभवत: इस बैठक के माध्यम से वे मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा भी कर लें। ALSO READ: भारत की समुद्री शक्ति को नई उड़ान, PM मोदी ने INS Dunagiri, Agray और Sanshodhak किए कमीशन

 

यह बदलाव सरकार के साथ-साथ भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में भी दिखेगा, जहां पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में 'टीम नितिन नबीन' का भी ऐलान होने जा रहा है। माना जा रहा है कि जिन मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा, उन्हें संगठन में एडजस्ट किया जा सकता है। अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव खासकर उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात को ध्यान में रखते हुए वहां के नेताओं को मंत्रिमंडल में स्थान ज्यादा मिल सकता है। इसके साथ ही जिन मंत्रियों का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो चुका है, साथ ही उन्हें दोबारा नहीं चुना गया है, उनकी छुट्‍टी भी तय मानी जा रही है। 

किसकी हो सकती है छुट्टी?

इस फेरबदल में 'परफॉर्मेंस' और 'संगठनात्मक जरूरत' को सबसे बड़ा पैमाना बनाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कई बड़े और चौंकाने वाले नाम इस लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। कुछ मंत्रालयों से जुड़े हालिया विवादों के बाद मंत्रियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। विशेष रूप से पेपर लीक मामलों और अन्य प्रशासनिक विसंगतियों के चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के राजनीतिक भविष्य को लेकर कयासों का बाजार गर्म है।

 

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष बने पंकज चौधरी और दिल्ली भाजपा की कमान संभालने वाले हर्ष मल्होत्रा जैसे नेताओं को 'एक व्यक्ति-एक पद' के नियम के तहत संगठन में पूरी तरह सक्रिय करने के लिए मंत्री पद से मुक्त किया जा सकता है। हाल ही में जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और पार्टी द्वारा उन्हें दोबारा न भेजे जाने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। इसी तरह हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा के संदर्भ में भी चर्चाएं तेज हैं। ALSO READ: नीट विवाद के बीच 11 छात्रों ने की खुदकुशी, अभिजीत दीपके ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, 1 करोड़ मुआवजे की मांग

किसे मिल सकता है मौका?

कैबिनेट विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ युवाओं को तरजीह दी जाएगी। उत्तर प्रदेश और पंजाब के आगामी चुनावों को देखते हुए इन राज्यों से नए सामाजिक समीकरणों को साधने वाले चेहरों को शामिल किया जाएगा। बिहार से मुख्‍यमंत्री पद छोड़कर केन्द्र में आए नीतीश कुमार को भी मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय है। उन्हें उनकी पसंद का रेल मंत्रालय भी दिया जा सकता है।

पंजाब चुनाव को देखते हुए आप छोड़कर आए राघव चड्‍ढा और भाजपा नेता चुघ को मंत्री बनाया जा सकता है। टीएमसी और शिवसेना यूबीटी छोड़कर आए नेताओं को भी मौका मिल सकता है। शिवसेना से एकनाथ शिंदे के बेटे एकनाथ शिंदे का नाम प्रमुखता से चल रहा है। इनके साथ ही कुछ महिला चेहरों को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है। 

किसका बदलेगा विभाग?

वित्त मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े भारी-भरकम मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की गई है। चर्चा है कि नितिन गडकरी को कुछ अतिरिक्त या नए महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि कुछ अन्य आर्थिक मंत्रालयों में मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदले जा सकते हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का विभाग बदलकर उन्हें शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। सरकार से संगठन में बदलाव: कुछ कद्दावर मंत्रियों को सरकार से हटाकर संगठन (BJP) में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष या महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भेजा जा सकता है, ताकि राज्य स्तर पर पार्टी को मजबूत किया जा सके।

क्या है इस फेरबदल की मुख्य वजह?

सरकार चाहती है कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले नए मंत्री अपने विभागों को संभाल लें ताकि विपक्ष के हमलों का मजबूती से जवाब दिया जा सके। बीजेपी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम की घोषणा भी इसी के साथ होनी है, जिससे सरकार और संगठन में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सके। कहा जा रहा है कि विभिन्न राज्यों के आगामी चुनावों में किसी भी प्रकार के असंतोष को थामने के लिए जमीनी पकड़ रखने वाले नेताओं को आगे लाने की योजना है।

 

दिल्ली के सियासी गलियारों में बैठकों का दौर जारी है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की जेपी नड्डा और नितिन नबीन के साथ अंतिम दौर की चर्चा पूरी हो चुकी है और जल्द ही नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तारीख सामने आ सकती है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी के अगले विदेश दौरे से पहले नए मं‍त्री शपथ ले सकते हैं। 

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

ओबीसी युवाओं को डिजिटल ताकत दे रही योगी सरकार, ओ लेवल-सीसीसी प्रशिक्षण बना सहारा

OBC Digital Training

Yogi Government OBC Digital Training: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार युवाओं को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगारपरक योजनाओं को नई दिशा मिली है। इसी क्रम में पिछड़ा वर्ग के युवाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई ओ लेवल एवं सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना युवाओं के लिए बड़ी सौगात बनकर सामने आई है।

 

योगी सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दिया है। इच्छुक छात्र-छात्राएं 10 जुलाई 2026 तक आधिकारिक वेबसाइट http://obccomputertraining.upsdc.gov.in पर आनलाइन आवेदन कर सकते हैं। 1 अगस्त 2026 से प्रशिक्षण शुरू हो जाएगा।

नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है प्रशिक्षण

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित इस योजना के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के युवक-युवतियों को 'ओ' लेवल और 'सीसीसी' कंप्यूटर प्रशिक्षण निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना का लाभ उन्हीं ओबीसी छात्र-छात्राओं को मिलेगा, जिन्होंने इंटरमीडिएट उत्तीर्ण किया हो। साथ ही उनके माता-पिता या अभिभावक की वार्षिक आय 1 लाख रुपये या उससे कम होनी चाहिए। इसके अलावा लाभार्थी किसी अन्य शिक्षण संस्थान से छात्रवृत्ति प्राप्त नहीं कर रहा हो। विशेष बात यह है कि प्रशिक्षण भारत सरकार की नीलिट से मान्यता प्राप्त संस्थाओं के माध्यम से कराया जाता है। 

तीन महीने में पूरा होता है सीसीसी कोर्स

'ओ' लेवल कंप्यूटर प्रशिक्षण की अवधि एक वर्ष निर्धारित है, जबकि 'सीसीसी' कोर्स तीन महीने में पूरा होता है। दोनों ही पाठ्यक्रम रोजगार की दृष्टि से बेहद उपयोगी माने जाते हैं। इस योजना के तहत 'ओ' लेवल प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15,000 रुपये की राशि सरकार द्वारा वहन की जाती है। वहीं 'सीसीसी' प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 3,500 रुपये का भुगतान सीधे विभाग द्वारा किया जाता है। इससे छात्रों पर किसी प्रकार का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता है और वे पूरी तरह निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त कर पाते हैं।

पिछले वर्ष हजारों छात्रों ने प्रशिक्षण किया प्राप्त

वित्तीय वर्ष 2025-26 में इस योजना के अंतर्गत कुल 29,191 युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 22,407 छात्रों ने 'ओ' लेवल और 6,784 छात्रों ने 'सीसीसी' कोर्स पूरा किया है। प्रदेश में वर्तमान समय में कुल 299 संस्थाएं इस योजना के तहत चयनित हैं। इनमें 52 संस्थान केवल ओ लेवल, 43 संस्थान केवल सीसीसी और 204 संस्थान दोनों कोर्स संचालित कर रहे हैं। 

 

पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने सभी पात्र छात्र-छात्राओं से अपील की कि वे 10 जुलाई 2026 तक विभाग की ओर से जारी आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन जरूर करें। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण न केवल युवाओं को डिजिटल रूप से दक्ष बनाएगा, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और रोजगार के लिए सक्षम बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

Edited by: Vrijenedra Singh Jhala 

योगी सरकार का बड़ा फैसला, 1.04 करोड़ रुपए से संवरेगा गोमती नदी का उद्गम स्थल, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

उत्तर प्रदेश में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। अयोध्या, काशी, मथुरा, नैमिषारण्य और विंध्य धाम जैसे प्रमुख तीर्थ स्थलों के व्यापक विकास के बाद अब प्रदेश सरकार ने जीवनदायिनी मां गोमती नदी के उद्गम स्थल को भी विश्वस्तरीय पर्यटन एवं आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

इसी क्रम में पीलीभीत जनपद के पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र की कलीनगर तहसील स्थित गोमती उद्गम स्थल के विकास के लिए पर्यटन विभाग ने 1.04 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है। इसके तहत प्रथम चरण में 78 लाख रुपये की धनराशि जारी कर दी गई है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद यह स्थल धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन का नया आकर्षण बनेगा।

 

करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मानव सभ्यता का विकास सदैव नदियों के तटों पर हुआ है। प्रदेश की जीवनदायिनी एवं सांस्कृतिक आस्था की प्रतीक गोमती नदी का उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा ग्राम के समीप गोमत ताल (पूर्व नाम फुलहर झील) से होता है। सनातन परंपरा में अत्यंत प्रतिष्ठित गोमती नदी प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करते हुए करोड़ों लोगों के जीवन और आजीविका का आधार है। उन्होंने बताया कि पर्यटन विभाग द्वारा गोमती उद्गम स्थल को एक प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है।

 

पर्यटन आकर्षण के लिए होंगे कई काम

परियोजना के अंतर्गत श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। इसके तहत लगभग 48.69 लाख रुपये की लागत से बहुउद्देशीय हॉल बनाया जाएगा, जबकि 13.44 लाख रुपये से आधुनिक शौचालय ब्लॉक और 9.45 लाख रुपये से शेड का निर्माण कराया जाएगा।

इसके अतिरिक्त इंटरलॉकिंग मार्ग, आकर्षक उद्यान एवं सौंदर्यीकरण, सोलर आधारित सुविधाओं, अन्य यात्री सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) को मिली है।

 

धार्मिक विरासत को मिलेगा सम्मान

गोमती नदी को सनातन परंपरा में विशेष सम्मान प्राप्त है। इसका उद्गम पीलीभीत जनपद के माधोटांडा क्षेत्र स्थित पौराणिक फुलहर झील (गोमत ताल) से होता है। लगभग 960 किलोमीटर की यात्रा करते हुए यह नदी पीलीभीत, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, सुल्तानपुर और जौनपुर आदि जनपदों को जीवन प्रदान करती हुई अंततः गाजीपुर जिले में गंगा नदी में समाहित हो जाती है।
 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम ने गोमती नदी में स्नान कर पुण्य अर्जित किया था। वहीं नैमिषारण्य में 33 कोटि देवी-देवताओं की तपस्थली भी गोमती नदी के तट पर ही मानी जाती है। यही कारण है कि गोमती नदी प्रदेश की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत की वाहक मानी जाती है।

 

मां गोमती सनातन आस्था की प्रतीक

मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश अपनी प्राकृतिक धरोहरों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मां गोमती का उद्गम स्थल महज एक भौगोलिक बिंदु न होकर, हमारी सनातन आस्था और लोकजीवन का महत्वपूर्ण स्थल भी है। इसके समग्र विकास से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। हमारा प्रयास है कि प्रदेश की प्रत्येक पवित्र धरोहर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर सम्मानजनक स्थान दिलाया जाए। Edited by : Sudhir Sharma

कासगंज में ट्रेनी विमान क्रैश, 50 फुट की ऊंचाई से गिरा, महिला पायलट घायल, जानिए कैसे हुआ हादसा

उत्तरप्रदेश के कासगंज में सोमवार दोपहर 3.30 बजे एक ट्रेनी विमान क्रैश हो गया। विमान उड़ा रही 27 साल की महिला ट्रेनी पायलट घायल हो गईं। संतुलन बिगड़ने के वक्त विमान करीब 50 फुट ऊपर था। इसके बाद विमान हाईटेशन तारों में उलझकर नीचे गिर गया।  हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। अलीगढ़ से ट्रेनिंग सेंटर के अधिकारी-कर्मचारी मौके पर पहुंचे। घायल पायलट को अपने साथ अलीगढ़ ले गए। 

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घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस प्रशासन और संबंधित एजेंसियां पहुंच गई। वहीं, एजेंसियां दुर्घटना के कारणों की जांच में जुट गई हैं। इस घटना से आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। Edited by : Sudhir Sharma (फाइल फोटो)

रामपुर को 690 करोड़ की सौगात देंगे CM योगी, मेधावी छात्रों का करेंगे सम्मान, बरेली में करेंगे समीक्षा बैठक

cm yogi

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार 30 जून को रामपुर व बरेली के दौरे पर रहेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री मुरादाबाद से सीधे रामपुर पहुंचेंगे, जहां शाहाबाद में वह रामपुर के मिलक एवं बिलासपुर विधानसभा

क्षेत्रों में 690 करोड़ रुपये से अधिक लागत की 102 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करेंगे। यहां वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे। 

 

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी इंटरमीडिएट/हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा 2026 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्राओं को पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देंगे। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभार्थियों को लैपटॉप, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के लाभार्थियों को चेक वितरित करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के पात्र परिजनों को अनुदान राशि देंगे। मुख्यमंत्री सामाजिक विकास में विशेष योगदान देने वाले व्यापारियों का सम्मान भी करेंगे। 

 

रामपुर के बाद मुख्यमंत्री बरेली पहुंचेंगे, जहां वह सर्किट हाउस में बरेली मंडल के लोक निर्माण विभाग के पुराने कार्यों की समीक्षा और नए कार्यों की कार्ययोजना के संबंध में बैठक करेंगे। इसके बाद मुख्यमंत्री बरेली के विकास कार्यों एवं कानून व्यवस्था की समीक्षा करेंगे। Edited by : Sudhir Sharma

सपा की साइकिल चलेगी तो दंगा ही कराएगी, बबुआ तो 12 बजे सोकर उठते हैं, योगी का अखिलेश पर निशाना

CM Yogi in Pilibhit

CM Yogi Adityanath: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विस्थापित 2500 बंगाली परिवारों को नागरिकता एवं भूमि अधिकार पत्र वितरित किए। उन्होंने इस अवसर पर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जनता जनार्दन ने समाजवादी पार्टी की साइकिल पंक्चर कर दी है, क्योंकि यह साइकिल चलेगी तो दंगा कराएगी, कर्फ्यू लगाएगी और बेटी-व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाएगी। पूर्व मुख्यमंत्री दंगाइयों को सरकारी विमान से बुलाकर आवास पर सम्मानित करते थे। कांग्रेस नेतृत्व अडिग रहता और जिन्ना अपनी मौत मर गया होता तो देश का विभाजन नहीं होता, लाखों हिंदू परिवारों को घर व जमीन छोड़नी न पड़ती। बंटवारे के बाद भी कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण में ही जुटी रही और उसके पापों का खामियाजा हिंदू समाज भुगतता रहा।

 

मुख्यमंत्री पीलीभीत के बरखेड़ा और बीसलपुर विधानसभा क्षेत्र में 569 करोड़ रुपए से अधिक लागत की 66 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित हिंदू, बौद्ध, सिख व जैन परिवारों को नागरिकता व भूमि अधिकार पत्र और विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र व सहायता राशि के चेक वितरित किए। सीएम ने सभी लाभार्थी परिवारों को बधाई व शुभकामनाएं दीं।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन इसलिए विशेष है, क्योंकि लगभग 56 वर्ष पहले पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) से प्रताड़ित होकर भारत आए हिंदू, बौद्ध, सिख व जैन परिवारों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप पीलीभीत में पुनर्वास और भारतीय नागरिकता का अधिकार मिल रहा है। अब कोई भी ताकत इन लोगों को यहां से नहीं निकाल सकती। अब कोई इन्हें पराया नहीं कह सकेगा। यह ऐतिहासिक कार्य पीएम मोदी जी व केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी के नेतृत्व में संभव हुआ है। इन परिवारों को यूपी में सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार मिल गया है। अब इन लोगों को पुलिस, राजस्व, वन अथवा किसी अन्य सरकारी विभाग द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा।

… तो देश का विभाजन नहीं होता

सीएम ने कहा कि कांग्रेस की नीतियों व सत्ता लोलुपता के कारण देश का विभाजन हुआ। यदि कांग्रेस नेतृत्व अडिग रहता, जिन्ना अपनी मौत मर गया होता तो पाकिस्तान का निर्माण नहीं होता और लाखों हिंदुओं को अपनी पैतृक भूमि छोड़ने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। विभाजन के बाद विस्थापित हिंदुओं, बौद्धों, सिखों व जैनियों की कांग्रेस ने कभी सुधि नहीं ली। जिन लोगों को आज नागगिरका और आवास व भूमि के अधिकार पत्र दिए जा रहे हैं, उनमें ज्यादातर दलित हैं, वंचित हैं, अति पिछड़ी जाति के हैं। लंबे समय तक देश-प्रदेश में शासन करने वाली कांग्रेस व सपा ने इनके लिए आवाज क्यों नहीं उठाई? उन्हें शर्म से डूब जाना चाहिए।

कांग्रेस-सपा की चिंता सिर्फ मुसलमानों तक सीमित

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस व सपा की चिंता केवल मुसलमानों तक सीमित रही। हिंदू, सिख, बौद्ध व जैन समाज के कत्लेआम की कीमत पर भी सत्ता प्राप्त करना इन दलों की प्राथमिकता थी। डबल इंजन सरकार बनने के बाद पीएम मोदी जी के नेतृत्व में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) लागू किया गया, जिससे पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, बौद्ध, सिख व जैन परिवारों को नागरिकता और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराने का रास्ता खुला।

विस्थापितों को अधिकार देने का विरोध किया कांग्रेस-सपा ने

मुख्यमंत्री ने कहा कि सीएए का कांग्रेस व सपा ने देशभर में विरोध किया और आंदोलन किए। इन दलों की सोच हमेशा देश के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार सुनिश्चित करने की रही। उनके इस पाप का खामियाजा हिंदू, सिख, बौद्ध व जैन समाज को उठाना पड़ा। आज लगभग 2500 परिवार यानी करीब 15 हजार लोग इसी सीएए का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। सीएम ने उन सभी जनप्रतिनिधियों को भी धन्यवाद दिया, जिन्होंने इन बंगाली परिवारों को उनका अधिकार दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए।

प्रदेश के अन्य जिलों में भी विस्थापितों को मिलेगी नागरिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 55 हजार ऐसे विस्थापित परिवार रह रहे हैं। बाराबंकी, बहराइच, बिजनौर और अब पीलीभीत में प्रथम चरण का कार्य पूरा किया जा रहा है। यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है। कुछ मामलों में वन विभाग व भारत सरकार से स्वीकृति मिलना शेष है। जैसे ही यह स्वीकृति प्राप्त होगी, अन्य पात्र परिवारों को भी उनका अधिकार दिया जाएगा। रामपुर में भी बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों को नागरिकता व भूमि अधिकार दिए जाएंगे।

सपा ने कभी गरीबों की तकलीफ सुनने की कोशिश नहीं की

मुख्यमंत्री ने कहा कि सपा को चार बार प्रदेश में शासन करने का अवसर मिला, लेकिन उसने कभी गरीबों की तकलीफ सुनने की कोशिश नहीं की। जब बबुआ 12 बजे सोकर उठेंगे, 2 बजे तक तैयार होंगे और फिर 5 बजे जिम चले जाएंगे तो गरीबों की पीड़ा सुनने का समय कहां होगा। उनके लिए विकास का मतलब केवल सैफई था। पीलीभीत उनके एजेंडे में होता तो मेडिकल कॉलेज बन जाता। पीलीभीत की बांसुरी को वैश्विक पहचान मिल चुकी होती। पीलीभीत व लखीमपुर को जोड़ने वाला पुल बन गया होता तथा टाइगर रिजर्व को भी विश्वस्तरीय पहचान मिल गई होती। विस्थापित परिवारों को भी उसी समय नागरिकता व जमीन का अधिकार मिल गया होता, लेकिन उनके पास परिवार से बाहर किसी के बारे में सोचने का समय नहीं था।

जनता जनार्दन ने पंक्चर की सपा की साइकिल

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग केवल अपने परिवार तक सीमित रहते हैं, वे समाज व देश का कल्याण नहीं कर सकते। जनता जनार्दन ने इसी कारण सपा की साइकिल पंचर कर दी। आज जहां गौशालाएं बनी हैं, उन सार्वजनिक जमीनों पर 2017 से पहले सपाइयों ने कब्जा कर रखा था। भाजपा सरकार बनने के बाद पहले ही दिन घोषणा की गई थी कि कब्जा छोड़ दें, अन्यथा 48 घंटे में जो कार्रवाई होगी, सात पीढ़ियां याद रखेंगी। कार्रवाई के डर से कई लोगों ने स्वयं जमीन वापस कर दी।

 

पिछली सरकारों में माफिया सीना तानकर चलते थे। थानों व तहसीलों पर दबाव बनाते थे। किसी की भी जमीन पर कब्जा कर लेते थे और विकास कार्यों को रोक देते थे। बहन-बेटियों की सुरक्षा खतरे में रहती थी। दंगे होने पर पूर्व मुख्यमंत्री दंगाइयों को सरकारी विमान से बुलाकर आवास पर सम्मानित करते थे। 2017 से पहले यही प्रदेश की पहचान थी।

आज जान की भीख मांग रहे माफिया

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब ‘नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा’ है। कभी सीना तानकर चलने वाले माफिया गले में तख्ती लटका कर जान की भीख मांग रहे हैं। कह रहे हैं, साहब जान बख्श दो, ठेला लगाकर पेट भर लेंगे। भाजपा सरकार की प्रतिबद्धता गरीब, युवा, महिला, व्यापारी व किसान के प्रति है, किसी गुंडे या माफिया के प्रति नहीं। सरकार किसी भी अपराधी को संरक्षण नहीं देगी। पीलीभीत के लोगों ने अच्छे जनप्रतिनिधि चुने हैं, इसलिए विकास कार्य तेजी से हो रहे हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों की सराहना करते हुए कहा कि इनके प्रयासों से मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल व अन्य विकास योजनाएं धरातल पर उतर रही हैं। पीलीभीत जैव विविधता और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है।

पिछली सरकारों में कट्टा-बम बनते थे, अब ब्रह्मोस मिसाइल

सीएम योगी ने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ हर वर्ग तक पहुंच रहा है। किसी युवा को मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना का लाभ मिल रहा है, किसी को प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना का, किसी को मुख्यमंत्री आवास योजना का तो कहीं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत लखपति दीदियों को सहायता दी जा रही है। विस्थापित परिवारों को नागरिकता व जमीन के दस्तावेज दिए गए। भविष्य में किसी भी हिंदू को विस्थापित न होना पड़े, इसके लिए मोदी जी के विजन के अनुरूप यूपी में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर विकसित कर ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण हो रहा है। पिछली सरकारों में कट्टा-बम बनते थे, आज यूपी देश की सुरक्षा मजबूत करने वाली मिसाइलें बना रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल की ताकत से पाकिस्तान भी घबरा कर बाप-बाप चिल्लाता है।

पीलीभीत बनेगा इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र

सीएम ने कहा कि प्रदेश में इकोनॉमिक कॉरिडोर व आधुनिक सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार हो रहा है। पीलीभीत से शामली, पानीपत, मुरादाबाद, गोरखपुर और आगे सिलीगुड़ी तक बेहतर संपर्क स्थापित किया जा रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे जैसी विश्वस्तरीय परियोजनाएं प्रदेश को मिली हैं। पीलीभीत की जनता को स्वास्थ्य सुविधाओं, बेहतर सड़क संपर्क और विकास परियोजनाओं की बधाई देते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में पीलीभीत इको-टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री ने जनता से अपने प्रतिनिधियों का सहयोग करने की अपील करते हुए कहा कि जो भी विकास प्रस्ताव सरकार के सामने आएंगे, उन्हें पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जाएगा।

CM Yogi in Pilibhit

सीएम के हाथों मिले नागरिकता व भूमि प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री के हाथों नागरिकता एवं भूमि संबंधित अधिकार पत्र प्राप्त करने वालों में कृष्णापद मंडल, अधीर कुमार बैरागी, मनोस मंडल, नोनी गोपाल, नरेश विश्वास, सुनीता मंडल, तारा चंद्र सरकार, जनक सरकार, राम चंद्र, राम मिलन, रामजी, सतीश रॉय व संतोष पाल प्रमुख हैं। 

इन्हें मिले विभिन्न योजनाओं के चेक व चाबी 

सीएम ने अपने हाथों से पुष्पा देवी, अंशिका, मीनू, सोनी देवी, हेमंत राठौर, पुष्पा देवी, पूजा देवी, कमलेश गंगवार,धीरेन्द्र सिंह,अनुराग शर्मा, प्रीति सिंह, अरविंद, इन्द्रावती को विभिन्न लाभार्थी योजनाओं के तहत चेक, चाबी व प्रमाण पत्र वितरित किए।

 

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद, राज्य सरकार के मंत्री बलदेव सिंह औलख, संजय सिंह गंगवार, विधायक स्वामी प्रवक्तानंद, बाबूराम पासवान, विवेक कुमार वर्मा, विधान परिषद सदस्य सुधीर गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती दलजीत कौर, भाजपा जिलाध्यक्ष गोकुल प्रसाद मौर्य, पूर्व मंत्री विनोद तिवारी, महिला आयोग की सदस्य श्रीमती पुष्पा पांडेय, पूर्व विधायक किशन लाल राजपूत, पीलीभीत नगर पालिका अध्यक्ष आस्था अग्रवाल, पूरनपुर नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र गुप्ता, सुरेश गंगवार, गुलशन आनंद आदि मौजूद रहे।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Delhi EV Policy : ₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों पर रोड टैक्स-रजिस्ट्रेशन शुल्क माफ, ई-ऑटो होंगे अनिवार्य, क्या है दिल्ली ईवी पॉलिसी

delhi ev policy

दिल्ली सरकार ने सोमवार को इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0 को मंजूरी दे दी। नई नीति के तहत 1 जुलाई 2026 से 31 मार्च 2030 तक लगभग 15,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक दिल्ली में 95 प्रतिशत नए वाहन पंजीकरण इलेक्ट्रिक (EV) करना है। एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि यह नीति केवल सब्सिडी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग वाहन श्रेणियों के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय कर इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर चरणबद्ध बदलाव का रोडमैप तैयार किया गया है।

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₹30 लाख तक की इलेक्ट्रिक कारों पर बड़ी राहत

नई EV पॉलिसी के तहत दिल्ली में 30 लाख रुपये तक की एक्स-शोरूम कीमत वाली इलेक्ट्रिक कारों के पंजीकरण पर 100 प्रतिशत रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस माफ रहेगी। इस कदम का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को इलेक्ट्रिक कार खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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ई-टू-व्हीलर खरीदने पर मिलेगी सब्सिडी

सरकार ने इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की खरीद पर तीन वर्षों तक चरणबद्ध सब्सिडी देने का फैसला किया है।

 

  • पहले वर्ष: 30,000 रुपये
  • दूसरे वर्ष: 20,000 रुपये
  • तीसरे वर्ष: 10,000 रुपये
  • ई-थ्री-व्हीलर पर भी मिलेगा प्रोत्साहन

इलेक्ट्रिक ऑटो और अन्य ई-थ्री-व्हीलर खरीदने वालों को भी आर्थिक सहायता मिलेगी।

 

  • पहले वर्ष: 50,000 रुपये
  • दूसरे वर्ष: 40,000 रुपये
  • तीसरे वर्ष: 30,000 रुपये
  • कब से बंद होंगे पेट्रोल और CNG ऑटो?

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नई नीति के अनुसार 

  • 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में केवल इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा का ही नया पंजीकरण होगा।
  • 1 अप्रैल 2028 से नए पेट्रोल और CNG दोपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन बंद कर दिया जाएगा। इसके बाद केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही पंजीकृत किए जाएंगे।
  • इलेक्ट्रिक ट्रक और स्क्रैपिंग पर भी मिलेगा लाभ
  • N1 श्रेणी के इलेक्ट्रिक ट्रक खरीदने पर 1 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
  • BS-IV या उससे पुराने चारपहिया वाहन स्क्रैप कर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को 1 लाख रुपये की स्क्रैपिंग इंसेंटिव दी जाएगी।

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हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि हाइब्रिड वाहनों पर किसी प्रकार की सब्सिडी नहीं मिलेगी।

 

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर रहेगा जोर

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अगले चार वर्षों में लगभग 15,000 करोड़ रुपये खर्च कर राजधानी में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा दिया जाएगा और वाहन प्रदूषण को कम किया जाएगा। नई नीति के तहत शहर में EV चार्जिंग स्टेशन, वाहन स्क्रैपिंग सेंटर और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया जाएगा। सरकार एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल भी विकसित करेगी, जहां नागरिक EV से जुड़ी सभी सब्सिडी और प्रोत्साहन योजनाओं के लिए आवेदन कर सकेंगे। Edited by : Sudhir Sharma

पहले शराब पी, फिर खूनी संघर्ष और दोस्‍त को चाकुओं से गोद कर उतार दिया मौत के घाट

murder

इंदौर के गांधीनगर क्षेत्र में पार्टी के दौरान तीन दोस्तों के बीच विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। दो युवकों ने हेमू जाट पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की पहचान कर ली है और उनकी तलाश जारी है।

रविवार की सुबह तीन दोस्तों के बीच हुए विवाद ने खूनी रूप ले लिया। मामूली कहासुनी के बाद दो युवकों ने अपने ही दोस्त पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह के अनुसार घटना सिद्धार्थ नगर की है। यहां रहने वाला हेमू जाट अपने दोस्त राजू और एक अन्य युवक के साथ क्षेत्र के एक खुले मैदान में बैठकर पार्टी कर रहा था। इसी दौरान किसी बात को लेकर तीनों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि राजू और उसके साथी ने हेमू पर चाकू से कई वार कर दिए। हमले में हेमू गंभीर रूप से घायल होकर मौके पर गिर पड़ा, जबकि दोनों आरोपी फरार हो गए।

घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और गंभीर हालत में हेमू को तत्काल नजदीकी अस्पताल लेकर गए। चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की सूचना मिलते ही गांधीनगर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हत्या आपसी विवाद के चलते की गई। पुलिस ने हत्या का प्रकरण दर्ज कर दोनों आरोपियों की पहचान कर ली है। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

CBSE की नई भाषा नीति लागू, जानिए किन छात्रों पर नहीं होंगे नए नियम और किसे पढ़नी होगी अतिरिक्त भारतीय भाषा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोमवार को तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों पर नई भाषा व्यवस्था लागू नहीं होगी। CBSE ने यह भी कहा कि कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को भी जब वे कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की अनिवार्यता नहीं होगी।

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दो विदेशी भाषाएं चुनने वाले छात्रों को मिलेगी राहत

बोर्ड के अनुसार, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाओं (Foreign Languages) का विकल्प चुना है, उन्हें उसी भाषा संयोजन (Language Combination) के साथ आगे पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ऐसे छात्रों को इसके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (भारतीय भाषा/Bhartiya Bhasha) का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।

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पहले भी दी थी राहत

शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया था कि कक्षा 7 से 9 के वे छात्र, जिन्होंने तीन-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं का चयन किया है, उन्हें कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। CBSE के इन नए दिशा-निर्देशों से लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच नई भाषा नीति को लेकर बनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

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समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी नई अध्ययन सामग्री

CBSE ने कहा कि संशोधित भाषा नीति के तहत छात्रों के लिए कक्षा-उपयुक्त (Grade-Appropriate) अध्ययन सामग्री तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी। बोर्ड का कहना है कि नई भाषा नीति का उद्देश्य भाषा सीखने की प्रक्रिया को अधिक अर्थपूर्ण, रोचक और समृद्ध बनाना है, ताकि छात्रों के समग्र विकास (Holistic Development) को बढ़ावा मिल सके। Edited by : Sudhir Sharma

CBSE की नई भाषा नीति लागू, जानिए किन छात्रों पर नहीं होंगे नए नियम और किसे पढ़नी होगी अतिरिक्त भारतीय भाषा

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सोमवार को तीन-भाषा नीति (Three-Language Policy) को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में कक्षा 10 में पढ़ रहे छात्रों पर नई भाषा व्यवस्था लागू नहीं होगी। CBSE ने यह भी कहा कि कक्षा 7, 8 और 9 में पढ़ रहे छात्रों को भी जब वे कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा देने की अनिवार्यता नहीं होगी।

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दो विदेशी भाषाएं चुनने वाले छात्रों को मिलेगी राहत

बोर्ड के अनुसार, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाओं (Foreign Languages) का विकल्प चुना है, उन्हें उसी भाषा संयोजन (Language Combination) के साथ आगे पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, ऐसे छात्रों को इसके साथ एक अतिरिक्त भारतीय भाषा (भारतीय भाषा/Bhartiya Bhasha) का अध्ययन करना अनिवार्य होगा।

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पहले भी दी थी राहत

शुक्रवार को अधिकारियों ने बताया था कि कक्षा 7 से 9 के वे छात्र, जिन्होंने तीन-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं का चयन किया है, उन्हें कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जाएगी। CBSE के इन नए दिशा-निर्देशों से लाखों छात्रों और अभिभावकों के बीच नई भाषा नीति को लेकर बनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।

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समय पर उपलब्ध कराई जाएंगी नई अध्ययन सामग्री

CBSE ने कहा कि संशोधित भाषा नीति के तहत छात्रों के लिए कक्षा-उपयुक्त (Grade-Appropriate) अध्ययन सामग्री तय समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाएगी। बोर्ड का कहना है कि नई भाषा नीति का उद्देश्य भाषा सीखने की प्रक्रिया को अधिक अर्थपूर्ण, रोचक और समृद्ध बनाना है, ताकि छात्रों के समग्र विकास (Holistic Development) को बढ़ावा मिल सके। Edited by : Sudhir Sharma