China की भारत के साथ चालाकी, बांग्लादेश के तीस्ता प्रोजेक्ट पर बयान, आखिर क्यों बढ़ी भारत की चिंता

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बांग्लादेश में प्रस्तावित तीस्ता बैराज एवं नदी प्रबंधन परियोजना को लेकर चीन ने बड़ा बयान दिया है। चीन ने कहा है कि इस परियोजना में उसकी संभावित भागीदारी किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने के लिए नहीं है और वह इस मामले में किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप का भी समर्थन नहीं करता। बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने साफ शब्दों में कहा कि चीन और बांग्लादेश का यह आपसी सहयोग किसी तीसरे देश को निशाना नहीं बनाता है, इसलिए इसे किसी तीसरे देश के प्रभाव या दखल से पूरी तरह मुक्त होना चाहिए। 

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चीन के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने इसे आम लोगों से जुड़ा प्रोजेक्ट बताया। तीस्ता नदी से जुड़े इस सहयोग का भारत और बांग्लादेश के संबंधों पर असर पड़ सकता है, क्योंकि भारत लंबे समय से तीस्ता नदी के जल बंटवारे और इस क्षेत्र से जुड़े रणनीतिक पहलुओं को लेकर संवेदनशील रहा है।

 

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीटीआई के पत्रकार ने कहा कि भारत को चीन और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी पर सहयोग को लेकर गंभीर चिंताएं हैं, क्योंकि यह परियोजना भारत-बांग्लादेश सीमा और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के काफी करीब स्थित है। पत्रकार ने सवाल किया कि क्या चीन इन चिंताओं को समझता है और क्या इस मुद्दे पर दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच चर्चा हुई है? इस पर जवाब देते हुए गुओ जियाकुन ने कहा कि तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और पुनर्वास की परियोजना बांग्लादेश के लिए एक महत्वपूर्ण जनकल्याण परियोजना है।

 

उन्होंने कहा कि चीन इस परियोजना में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि चीन और बांग्लादेश के बीच सहयोग किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाता और इसे किसी तीसरे पक्ष के प्रभाव से भी मुक्त रहना चाहिए। 

बांग्लादेश के नजदीक आया चीन 

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बीजिंग, ढाका के साथ विकास रणनीतियों में बेहतर तालमेल स्थापित करने और विशेष रूप से अर्थव्यवस्था, व्यापार, जल संसाधन प्रबंधन और जनकल्याण के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहता है।

क्या है चीन और बांग्लादेश का प्लान 

 

बांग्लादेश और चीन के बीच समेकित नदी प्रबंधन (Integrated River Management) को लेकर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है, जिसमें तीस्ता नदी परियोजना प्रमुख केंद्र में है। बांग्लादेश ने औपचारिक रूप से चीन से लंबे समय से लंबित तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन एवं पुनर्स्थापन परियोजना (Teesta River Comprehensive Management and Restoration Project) में तकनीकी और आर्थिक सहयोग देने का अनुरोध किया है।

 

भारत की चिंता क्यों बढ़ी 

तीस्‍ता नदी क्षेत्र भारत के पूर्वोत्‍तर इलाके के काफी करीब है और इसी वजह से भारत की टेंशन अब बढ़ने जा रही है। चीन और बांग्‍लादेश में जो समझौता हुआ है, उसके तहत तीस्‍ता समेत बांग्‍लादेश की नदियों पर सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। एक्‍सपर्ट का कहना है कि इस ऐलान पर भारत की पैनी नजर बनी रहेगी। इसी के पास में भारत का चिकननेक कहा जाने वाला सिलिगुड़ी कॉरिडोर है जो पश्चिम बंगाल को पूर्वोत्‍तर के अन्‍य राज्‍यों से जोड़ता है। इस कॉरिडोर पर चीन ने लंबे समय से नजर गड़ा रखी है। Edited by : Sudhir Sharma

योगी सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में तेजी से हो रहा आर्द्रभूमियों का संरक्षण

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Wetlands Conservation UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) के संरक्षण और विकास पर लगातार काम कर रही है। वेटलैंड (संरक्षण एवं प्रबंधन) नियम, 2017 के तहत प्रदेशभर में आर्द्रभूमियों की पहचान, सीमांकन और अधिसूचना की प्रक्रिया तेज गति से चल रही है।

 

मुख्य सचिव के समक्ष हुए प्रस्तुतीकरण के अनुसार, प्रदेश के 75 जिलों में से 26 जिलों की 101 आर्द्रभूमियों को अब तक अधिसूचित किया जा चुका है। इनमें कानपुर नगर सहित गोरखपुर, बाराबंकी, महाराजगंज, प्रयागराज, आगरा, सहारनपुर, कुशीनगर, उन्नाव और अन्य जिले शामिल हैं। इन आर्द्रभूमियों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2750 हेक्टेयर है। वहीं 36 जिलों से 44 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित करने के प्रस्ताव भी सरकार को प्राप्त हुए हैं।

इसलिए जरूरी हैं आर्द्रभूमियां

आर्द्रभूमियां केवल तालाब या झील नहीं होतीं, बल्कि ये प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने, भूजल स्तर बनाए रखने, सिंचाई में मदद करने, बाढ़ और सूखे के प्रभाव को कम करने, मछली पालन और अन्य आजीविका के साधन उपलब्ध कराने के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं के सुरक्षित आवास के रूप में भी काम करती हैं। इसके अलावा ये पर्यावरण को संतुलित रखने और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

सीमांकन और संरक्षण पर विशेष जोर

योगी सरकार आर्द्रभूमियों की सीमाओं का वैज्ञानिक तरीके से निर्धारण भी करा रही है ताकि उन पर अतिक्रमण न हो और उनका संरक्षण बेहतर ढंग से किया जा सके। प्रदेश के सभी 75 जिलों में 14,562 स्थानों पर सीमा निर्धारण का कार्य पूरा किया जा चुका है।

अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी

सरकार राज्य की प्रमुख आर्द्रभूमियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए भी प्रयास कर रही है। इसके लिए रामसर साइट के मानकों के अनुरूप आवश्यक दस्तावेज, मानचित्र, फोटोग्राफ और अन्य तकनीकी जानकारी तैयार की जा रही है, ताकि उत्तर प्रदेश की अधिक से अधिक आर्द्रभूमियां वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सके।

Edited by: Vrijenedra Singh Jhala 

साक्ष्य आधारित शिक्षा सुधारों का नया अध्याय लिखेगी योगी सरकार, सेमिनार मंगलवार को

Yogi Government Education Reforms: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा सुधारों को योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ साक्ष्य आधारित नीति निर्माण, प्रभावी कक्षा-कक्षीय शिक्षण और सीखने के परिणामों में सतत सुधार को नई दिशा देने की रणनीति पर तेजी से कार्य कर रही है।

मंगलवार को बेसिक शिक्षा विभाग, उत्तर प्रदेश शासन और लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (एलएलएफ) के संयुक्त तत्वावधान में 'टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (टीएलपीएस) रिपोर्ट-2025, उत्तर प्रदेश' पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संवाद एवं सेमिनार आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का मुख्य विषय 'नीति से व्यवहार तक संवाद' रखा गया है, जिसका उद्देश्य साक्ष्यों को क्रियान्वयन में बदलते हुए शिक्षा सुधारों को सीधे कक्षा-कक्ष तक पहुंचाना है। 

 

अध्यक्षता अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा करेंगे। इसमें शिक्षा नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, शैक्षिक विशेषज्ञों, एसआरजी, एआरपी, बीईओ, शिक्षकों तथा सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि भाग लेंगे। राज्य स्तर पर प्रभावी शिक्षण पद्धतियों, अधिगम सुधार और भविष्य की शैक्षणिक रणनीतियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा।

टीएलपीएस रिपोर्ट-2025 का होगा विमोचन

सेमिनार का प्रमुख आकर्षण टीएलपीएस उत्तर प्रदेश राज्य रिपोर्ट-2025 का विमोचन होगा। एलएलएफ द्वारा प्रदेश में आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता (एफएलएन) के अंतर्गत किए गए राज्यव्यापी अध्ययन के निष्कर्ष, प्रमुख अंतर्दृष्टियां और अनुशंसाएं प्रस्तुत की जाएंगी। इन निष्कर्षों के आधार पर विद्यालयों में शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाने की दिशा तय की जाएगी।

प्रभावी शिक्षण और कैच-अप रणनीतियों पर होगा मंथन

सेमिनार में प्रभावी शिक्षण के 10 प्रमुख शिक्षण अभ्यासों पर संवाद होगा। साथ ही अधिगम अंतर (लर्निंग गैप) को कम करने के लिए कैच-अप रणनीतियों, परख के निष्कर्षों पर आधारित शैक्षणिक सुधारों तथा साक्ष्य आधारित निर्णय प्रणाली पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके अतिरिक्त निपुण उत्तर प्रदेश 2.0 की दिशा में भविष्य की रणनीतियों पर भी विचार किया जाएगा।

जमीनी अनुभवों से मिलेगा शिक्षा सुधारों को बल

राज्य स्तरीय सेमिनार में राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक अपने नवाचारी शिक्षण अनुभव साझा करेंगे। इसके अलावा एसआरजी, एआरपी, बीईओ तथा अन्य शैक्षणिक नेतृत्वकर्ताओं के अनुभवों के साथ कक्षा-कक्ष से उभरती वास्तविक सफलता की कहानियों को भी मंच मिलेगा। इन अनुभवों के आधार पर शिक्षण की प्रभावी पद्धतियों को व्यापक स्तर पर लागू करने की रणनीति तैयार की जाएगी।

कक्षा-कक्ष तक पहुंचेगा शिक्षा सुधारों का लाभ

प्रदेश में निपुण भारत मिशन, शिक्षक क्षमता संवर्धन, गतिविधि आधारित शिक्षण, डिजिटल संसाधनों के उपयोग और विद्यालयी गुणवत्ता सुधार के लिए चल रहे प्रयासों के बीच यह राज्य स्तरीय संवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साक्ष्य आधारित नीति, प्रभावी शिक्षण अभ्यास और जमीनी अनुभवों के समन्वय से तैयार होने वाली रणनीतियां शिक्षा सुधारों को नई गति देंगी तथा उत्तर प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और बाल-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करेंगी।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

Bajaj Chetak, Ola S1 Pro, TVS iQube, Hero Vida V2 को टक्कर देने आ रहा है सस्ता विएतनामी इलेक्ट्रिक स्कूटर

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वियतनाम की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी VinFast भारतीय बाजार में अपने इलेक्ट्रिक दोपहिया पोर्टफोलियो की तैयारी करती नजर आ रही है। कंपनी की ओर से भारत में एक नए इलेक्ट्रिक स्कूटर का डिजाइन पेटेंट दाखिल किया गया है, जिसे VinFast Viper या उसके अपडेटेड मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इससे संकेत मिलते हैं कि कंपनी भविष्य में भारतीय इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में भी एंट्री कर सकती है।

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इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में Ola Electric, TVS, Bajaj, Ather और Hero MotoCorp जैसी कंपनियां पहले से मजबूत मौजूदगी रखती हैं।  इन्हें कड़ा मुकाबला मिलेगा और इसका फायदा ग्राहकों को होगा। यदि VinFast इस सेगमेंट में उतरती है, तो कंपनी केवल इलेक्ट्रिक कारों तक सीमित न रहकर बड़े शहरी ग्राहकों को भी अपना लक्ष्य बना सकेगी।

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फिलहाल VinFast ने भारत में Viper इलेक्ट्रिक स्कूटर के लॉन्च की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। हालांकि भारत में डिजाइन पेटेंट दाखिल होना इस बात का मजबूत संकेत माना जा रहा है कि कंपनी भविष्य में इस मॉडल को भारतीय बाजार में उतारने की तैयारी कर रही है। संभावना है कि कंपनी पहले अपने इलेक्ट्रिक कार कारोबार को मजबूत करेगी और उसके बाद इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में प्रवेश करेगी।

भारत में ही क्यों है इंट्री 

भारत दुनिया के सबसे बड़े दोपहिया बाजारों में शामिल है। कंपनी पहले ही भारत में VF 6 और VF 7 इलेक्ट्रिक SUV के जरिए अपनी रणनीति पर काम कर रही है। साथ ही स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और डीलरशिप नेटवर्क के विस्तार की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। 

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 क्या है स्कूटर का नाम 

ऑनलाइन सामने आई पेटेंट जानकारी के मुताबिक VinFast Trading and Production Joint Stock Company ने इस डिजाइन को भारत में 30 अप्रैल 2026 को Design Number 500341-001 के तहत पंजीकृत कराया है। पेटेंट में इसे “Motorcycle” नाम दिया गया है, हालांकि तस्वीर में स्पष्ट रूप से एक आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर दिखाई देता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में VinFast Viper को 3,000W BLDC हब मोटर के साथ पेश किया गया है, जिसकी दावा की गई अधिकतम गति 70 किमी/घंटा है।
 

ये होंगे फीचर्स 

  • स्मार्ट की
  • व्हीकल ट्रैकिंग
  • रिमोट व्हीकल फाइंड
  • एंटी-थेफ्ट सिस्टम
  • LED प्रोजेक्टर हेडलैंप
  • ड्यूल रियर शॉक एब्जॉर्बर

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें 1.5 kWh फिक्स्ड बैटरी मिलती है। इसके अलावा एक वैकल्पिक सेकेंडरी बैटरी पैक भी उपलब्ध है, जिससे रेंज बढ़ाई जा सकती है। स्टैंडर्ड बैटरी के साथ इसकी दावा की गई रेंज करीब 82 किलोमीटर है।

 

कैसा है डिजाइन  

सोशल मीडिया पर वायरल फोटो के मुताबिक स्कूटर का डिजाइन स्पोर्टी और मैक्सी-स्कूटर स्टाइल से प्रेरित है। इसमें ऊंचा फ्रंट एप्रन, शार्प LED हेडलाइट, कॉम्पैक्ट फ्लाईस्क्रीन, आकर्षक साइड पैनल और ड्यूल-टोन बॉडी फिनिश देखने को मिलती है।

 

इसका डिजाइन ग्लोबल मार्केट में उपलब्ध VinFast Viper से मिलता-जुलता है, लेकिन कुछ स्टाइलिंग अपडेट भी नजर आते हैं, जिससे माना जा रहा है कि यह इसका नया या फेसलिफ्ट वर्जन हो सकता है। स्कूटर में LED DRL, टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क, ट्विन रियर शॉक एब्जॉर्बर और अलॉय व्हील्स जैसे फीचर्स भी दिखाई देते हैं।  Edited by : Sudhir Sharma

जयपुर के अरावली पैलेस में दीवार गिरी, 3 की मौत, ठेकेदार पर FIR दर्ज

Jaipur Aravali Palace Wall Collapse

Jaipur Aravali Palace Wall Collapse: जयपुर ग्रामीण के आमेर थाना क्षेत्र स्थित 'अरावली पैलेस' (तालामोड़) रिसॉर्ट में हुए दर्दनाक हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़ गई है। मलबे को हटाने के लिए रात-दिन जारी युद्धस्तर के रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दल ने दो और मजदूरों के शव बरामद किए हैं। इसके साथ ही इस भीषण हादसे में आधिकारिक रूप से जान गंवाने वाले कुल मजदूरों की संख्या 3 हो गई है। जैसे-जैसे कंक्रीट और भारी पत्थरों को हटाया जा रहा है, हादसे की भयावहता और साफ होती जा रही है। बाद में निकाले गए दोनों मजदूरों को तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

कैसे हुआ हादसा?

तालामोड़ स्थित अरावली रिसॉर्ट के बेसमेंट में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP Plant) के निर्माण का कार्य चल रहा था। निर्माण कार्य के दौरान अचानक एक भारी निर्माणाधीन दीवार भरभराकर धंस गई। दीवार गिरने की वजह से वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के नीचे पूरी तरह दब गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया।

घायलों का अस्पताल में इलाज जारी 

इस हादसे में मलबे से सुरक्षित निकाले गए 4 अन्य घायल मजदूरों का जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल और स्थानीय ट्रॉमा सेंटर में इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों में से कुछ की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है और उन्हें सघन निगरानी में रखा गया है।

युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन, मौके पर डटा प्रशासन

हादसे के बाद से ही सिविल डिफेंस और पुलिस की टीमें लगातार भारी मलबे को हटाने में जुटी हुई हैं। प्रशासन के आला अधिकारी अभी भी घटना स्थल पर डटे हुए हैं। राहत एवं बचाव दल मलबे के कोने-कोने की गहनता से जांच कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि मलबे के नीचे अब कोई और व्यक्ति न फंसा हो। 3 मजदूरों की मौत की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद से मृतकों के परिवारों में कोहराम मच गया है और पूरे आमेर क्षेत्र में शोक की लहर है।

प्रबंधन और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज

इस मामले में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की बात सामने आई है। पुलिस ने इस घातक लापरवाही को बेहद गंभीरता से लेते हुए निर्माण ठेकेदार और संबंधित रिसॉर्ट प्रबंधन के खिलाफ मामला (FIR) दर्ज कर लिया है। प्रशासन ने घटना के वास्तविक कारणों की जांच शुरू कर दी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

अमरनाथ यात्रा 2026: ज्येष्ठ पूर्णिमा पर पवित्र गुफा में हुई प्रथम पूजा, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सबसे पहले किए दर्शन

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Amarnath Yatra 2026 : जयेष्ठ पूर्णिमा पर होने वाली अमरनाथ यात्रा की प्रथम पूजा को इस बार भी पवित्र गुफा में आयोजित किया गया। 3 जुलाई से शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा से पहले सोमवार को पवित्र में प्रथम पूजा की गई। जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल (एलजी) मनोज सिन्हा ने सबसे पहले अमरनाथ गुफा के दर्शन किए और विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना की। ALSO READ: गर्मी में तेजी से पिघल रहा अमरनाथ हिमलिंग, श्रद्धालुओं और प्रशासन की बढ़ी चिंता

इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो रही है। लेकिन परंपरा के अनुसार यात्रा शुरू होने से पहले अमरनाथ गुफा में एक विशेष पूजा अर्चना की गई। इस पूजा में जम्मू कश्मीर के उपराजपाल मनोज सिन्हा और अमरनाथ श्राइन बोर्ड के सभी बड़े अधिकारी मौजूद थे। सभी लोगों के अच्छे स्वास्थ्य, प्रगति और खुशहाली के लिए प्रार्थना की गई।

 

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को पवित्र अमरनाथ गुफा में विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच प्रथम पूजा कर वार्षिक अमरनाथ यात्रा का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने बाबा बर्फानी से देशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और कल्याण की प्रार्थना की। ALSO READ: अमरनाथ यात्रा में आतंक के साथ मौसम भी चुनौती, यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगाए गए हाईटेक डॉप्लर रडार
 

इस अवसर पर उपराज्यपाल ने कहा कि 3 जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के सफल आयोजन के लिए प्रशासन, श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड, सेना, पुलिस, सुरक्षाबल, स्थानीय लोग, सेवा प्रदाता और स्वयंसेवक पूरी समन्वय भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। सभी का उद्देश्य श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और यादगार यात्रा का अनुभव कराना है।

 

उन्होंने बताया कि इस वर्ष यात्रा के लिए आधारभूत ढांचे और श्रद्धालुओं की सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार किए गए हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों के सहयोग से प्रशासन पूरी तरह तैयार है और बाबा अमरनाथ के भक्तों के स्वागत के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं।

 

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीर्थयात्रियों को सभी सुविधाएं प्रदान करने पर जोर देते हुए श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएं, बुनियादी ढांचा और सुरक्षा प्रदान करने में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। प्रथम पूजा के बाद एलजी ने कहा कि मैं बाबा बर्फानी के सभी भक्तों से अनुरोध करता हूं कि वे पवित्र यात्रा के लिए बड़ी संख्या में आएं और महादेव से जम्मू-कश्मीर और देश की प्रगति के लिए प्रार्थना करें।

 

एसएएसबी और प्रशासन ने तीर्थयात्रियों की सुविधाओं में सुधार किया है। पुलिस, सेना, सीआरपीएफ, सीएपीएफ ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। वर्ष 2019 में इसे जम्मू में संपन्न किया गया था पर जबकि वर्ष 2022 से इसे पवित्र गुफा में ही संपन्न किया जा रहा था।
 

अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, अमरनाथ गुफा में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर प्रथम पूजा हुई। साधु-संत व विद्वानों ने हवन और आरती कर पवित्र हिमलिंग की विधिवत पूजा-अर्चना की। हालांकि वर्ष 2024 में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से प्रथम पूजा की थी।

 

कोरोना काल से पहले प्रथम पूजा चंदनबाड़ी में की जाती थी लेकिन कोरोना के कारण उपजे हालात में वर्ष 2019 में इसे जम्मू में संपन्न करवाया गया था तो वर्ष 2020 में यात्रा रद्द होने के बावजूद गुफा में। पवित्र गुफा से सुबह व शाम को आरती का सीधा प्रसारण भी करवाने का फैसला किया गया है।

 

इस अवसर पर उप राज्यपाल ने कहा कि दुनिया भर के लाखों भक्तों के लिए बाबा अमरनाथ की पवित्र गुफा की तीर्थ यात्रा जीवन भर का सपना होती है। 3 जुलाई से शुरू होने वाली यात्रा के सफल संचालन के लिए स्थानीय निवासियों का अत्यधिक योगदान है।

 

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शिवभक्तों को बेधड़क होकर अमरनाथ की यात्रा में शामिल होने का न्यौता देते हुए कहा कि सुरक्षा का त्रिस्तरीय प्रबंध हैं। यह यात्रा कश्मीरियत का प्रतीक है। यह कश्मीर के लिए सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व नहीं रखती, बल्कि यह स्थानीय अर्थ व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है।

तीन लाख परिवार इससे प्रत्यक्ष-परोक्ष रूप से आजीविका कमाते हैं। कश्मीर में सुधरते हालात कुछ लोगों को रास नहीं आते और वह यहां हालात बिगाड़ने की हरकते करते हैं, लेकिन किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। यह बाबा भोले की यात्रा है और बाबा भोले की कृपा से सुरक्षित, शांत और विश्वासपूर्ण वातावरण में ही संपन्न होगी।

edited by : Nrapendra Gupta

पर्यावरण संरक्षण को नई गति, योगी सरकार ने इको क्लब्स के लिए जारी की 65.64 करोड़ की लिमिट

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Yogi Government Eco Clubs: योगी सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को नई गति देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में समग्र शिक्षा अंतर्गत 'इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ' की गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु लगभग ₹65.64 करोड़ (₹6563.95 लाख) की लिमिट जारी कर दी है। इसके अंतर्गत प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों को ₹5,000 प्रति विद्यालय की दर से लिमिट उपलब्ध कराई जाएगी।

 

महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, सहायक लेखा अधिकारियों, खंड शिक्षा अधिकारियों एवं जिला समन्वयकों को निर्देश दिए हैं कि जारी की गई लिमिट का तीन दिन के भीतर विद्यालयों को हस्तांतरण सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही इको क्लब्स के उद्देश्य, गठन, अधिसूचना, कार्य एवं दायित्व, मासिक गतिविधि कैलेंडर तथा सुझावात्मक गतिविधियों के अनुरूप समयबद्ध क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जाए। 

निर्धारित मदों में होगा लिमिट का उपयोग

प्रत्येक विद्यालय को उपलब्ध कराई गई ₹5,000 की लिमिट का उपयोग निर्धारित मदों में किया जाएगा। इसमें इको क्लब की गतिविधियां, जागरूकता कार्यक्रम, पौधरोपण, कम्पोस्ट निर्माण, आवश्यक शिक्षण सामग्री, स्टेशनरी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी अन्य गतिविधियां शामिल हैं। विद्यालयों को निर्धारित वित्तीय मानकों का पालन करते हुए व्यय करना होगा तथा सभी खर्च के अभिलेख सुरक्षित रखना होगा।

अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी पर विशेष बल

योगी सरकार ने विद्यालय प्रबंधन समिति, अभिभावकों, स्थानीय निकायों तथा समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया है। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को विद्यालय परिसर से बाहर समाज तक पहुंचाने का भी लक्ष्य रखा गया है। सभी विद्यालयों को इको क्लब गठन, गतिविधियों, फोटो, वीडियो तथा प्रगति रिपोर्ट निर्धारित पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी एवं जिला स्तर के अधिकारी नियमित समीक्षा करेंगे।

प्रत्येक विद्यालय में गठित होगा इको क्लब

निर्देशों के अनुसार सभी पात्र प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों में इको क्लब्स फॉर मिशन लाइफ का गठन किया जाएगा। प्रधानाध्यापक क्लब के संरक्षक होंगे, जबकि एक शिक्षक को प्रभारी बनाया जाएगा। विभिन्न कक्षाओं के छात्र-छात्राओं को क्लब से जोड़कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। क्लब की अधिसूचना जारी होगी, उसका पंजीकरण निर्धारित पोर्टल पर कराया जाएगा तथा विद्यालय स्तर पर नियमित बैठकें आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक गतिविधि का अभिलेखीकरण और समय-समय पर उसकी समीक्षा भी की जाएगी।

मिशन लाइफ के सात विषयों पर होगा विशेष फोकस

इको क्लब्स के माध्यम से विद्यार्थियों को लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (मिशन लाइफ) के सात प्रमुख विषयों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्वस्थ एवं सतत जीवनशैली अपनाना, टिकाऊ खाद्य प्रणाली को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, कचरा कम करना एवं पुनर्चक्रण, ई-वेस्ट प्रबंधन तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी लाना शामिल है। उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना और दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार को बढ़ावा देना है।

मासिक कैलेंडर के अनुसार चलेंगी गतिविधियां

आदेश के साथ जुलाई से मार्च तक का विस्तृत गतिविधि कैलेंडर भी साझा किया गया है। जुलाई में पौधरोपण एवं हरित परिसर, अगस्त में किचन गार्डन और कम्पोस्ट निर्माण, सितंबर में ई-वेस्ट प्रबंधन, अक्टूबर में कचरा पृथक्करण एवं पुनर्चक्रण, नवंबर में ऊर्जा संरक्षण, दिसंबर में जल संरक्षण, जनवरी में सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त अभियान तथा फरवरी और मार्च में स्वच्छता, जैव विविधता संरक्षण एवं विश्व जल दिवस से संबंधित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके अतिरिक्त पोस्टर, निबंध, चित्रकला, प्रश्नोत्तरी, रैली, शपथ, प्रदर्शनी और जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों तथा समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाएगा। विद्यालय स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप अतिरिक्त गतिविधियां भी आयोजित कर सकेंगे।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

बहन और दृष्टिहीन भाई से धोखाधड़ी: सौतेले भाई पर पुश्तैनी जमीन बेचने का आरोप, पुलिस ने दर्ज किया केस

FIR Jjyoti

इंदौर। शहर के खुड़ैल थाना क्षेत्र से पारिवारिक विवाद और कथित धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने अपने दृष्टिहीन सौतेले भाई और बहन को बिना जानकारी दिए उनकी हिस्सेदारी वाली पुश्तैनी जमीन बेच दी। शिकायत की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

क्या है मामला : राजेंद्र नगर निवासी राजेश व्यास, जो दृष्टिहीन हैं, और उनकी बहन ज्योति शर्मा (55) का ग्राम बावल्या खुर्द स्थित पुश्तैनी कृषि भूमि में कानूनी हिस्सा है। यह भूमि खसरा नंबर 41/2 और 42/2 में दर्ज है, जिसका कुल रकबा 1.306 हेक्टेयर बताया गया है।

शिकायत के अनुसार, उनके सौतेले भाई अरविंद व्यास, निवासी अमृत पैलेस, निपानिया, ने अन्य परिजनों के साथ मिलकर कथित रूप से दोनों को बिना जानकारी दिए पूरी जमीन विद्या सिंह के नाम विक्रय कर दी। आरोप है कि इस सौदे में राजेश व्यास और ज्योति शर्मा की सहमति नहीं ली गई और उन्हें उनके हिस्से से वंचित कर दिया गया।

परिवार की पृष्ठभूमि : जानकारी के अनुसार, स्वर्गीय पुरुषोत्तम व्यास की पहली पत्नी पुष्पा व्यास से तीन संतानें थीं—संतोष व्यास (दिवंगत), राजेश व्यास और ज्योति शर्मा। पहली पत्नी के निधन के बाद पुरुषोत्तम व्यास ने दूसरी शादी की, जिससे अरविंद व्यास और अलका का जन्म हुआ। परिजनों का कहना है कि पुश्तैनी संपत्ति पर पहली और दूसरी पत्नी से हुई सभी संतानों का समान अधिकार है। इसके बावजूद कथित रूप से जमीन की बिक्री बिना सभी उत्तराधिकारियों की सहमति के कर दी गई।

शिकायत के बाद खुला मामला : ज्योति शर्मा और राजेश व्यास को जब जमीन की बिक्री की जानकारी मिली, तो उन्होंने खुड़ैल थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस द्वारा प्रारंभिक जांच में शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाए जाने पर आरोपी अरविंद व्यास के खिलाफ धोखाधड़ी (BNS की संबंधित धारा/पूर्व आईपीसी धारा 420 के समकक्ष प्रावधान) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

फरियादियों से मिले CM योगी, कहा- समयसीमा में दिलाएं लोगों को न्याय

CM Yogi Adityanath Janata Darshan: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘जनता दर्शन’ में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए फरियादियों की समस्याओं को ध्यान से सुना। उनका प्रार्थना पत्र लिया और संबंधित अधिकारियों को देकर निर्देशित किया कि सभी लोगों की समस्याओं का समाधान तय समयसीमा के भीतर हो। इसके उपरांत पीड़ित पक्ष से बात कर उनकी संतुष्टि के बारे में जानकारी ली जाए। मुख्यमंत्री ने पीड़ितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आप बेफिक्र होकर घर जाइए, हम हर मामले का उचित निस्तारण कराएंगे। 

आप स्वास्थ्य पर ध्यान दें, इलाज की चिंता सरकार करेगी

बरेली से एक महिला ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। उन्होंने कैंसर के इलाज के लिए मुख्यमंत्री से गुहार लगाई और आर्थिक सहायता की मांग की। सीएम ने उनसे हॉस्पिटल का एस्टिमेट मांगा, जिसे वह तत्काल उपलब्ध न करा सकीं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि आप हॉस्पिटल से एस्टिमेट मंगवा लीजिए। आप स्वास्थ्य पर ध्यान दें, इलाज की चिंता सरकार करेगी। मुख्यमंत्री ने मरीज को एडमिट कराने और उनके समुचित इलाज के लिए भी निर्देशित किया। 

वादकारियों को समय से न्याय दिलाना सरकार की मंशा 

‘जनता दर्शन’ में राजस्व संबंधी मामले भी आए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। इस पर निरंतर कार्रवाई जारी रहेगी। सीएम ने राजस्व मुकदमों के समयबद्ध निस्तारण पर भी जोर दिया। कहा कि इस पर जल्द निर्णय होने से वादकारियों को समय से राहत मिलती है। राजस्व से जुड़े अधिकारी समय से न्यायालय में बैठें। इस संबंध में निर्णय भी जल्द दें, क्योंकि ऐसा न होने से गरीब वादकारी अधिक प्रभावित होते हैं। वादकारियों को न्याय दिलाना सरकार की मंशा है। इसके अनुरूप राजस्व से जुड़े अधिकारी जरूरतमंदों को न्याय दिलाएं।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

अकाल तख्त का भगवंत मान सरकार को बड़ा अल्टीमेटम, 1 महीने में बेअदबी कानून बदलने का दिया आदेश

bhagwant mann

पंजाब की भगवंत मान सरकार के 9 मंत्री और 30 विधायक नंगे पांव श्री अकाल तख्त साहिब पर पहुंचे और बेअदबी कानून पर लिखित में अपना स्पष्‍टीकरण दिया। अकाल तख्त ने मान सरकार से एक माह में बेअदबी कानून में संशोधन करने को कहा। इस दौरान श्री अकाल तख्त साहिब की कार्यवाही का पहली बार सीधा प्रसारण भी किया गया। बताया गया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के अनुरोध पर कार्यवाही का सीधा प्रसारण कराया गया। ALSO READ: कौन हैं रिटायर्ड IAS योगेश्वर राम मिश्रा, जो हो सकते हैं राम मंदिर के CEO?

 

श्री अकाल तख्त साहिब में सोमवार को पंजाब सरकार की ओर से पारित जागत ज्योत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। अकाल तख्त साहिब से पंजाब सरकार के सिख मंत्रियों, विधायकों तथा विधानसभा अध्यक्ष को एक माह का समय दिया गया है। इस अवधि के भीतर श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से दिए गए सुझावों के अनुरूप कानून में आवश्यक संशोधन करने के लिए कहा गया है।

 

अकाल तख्त के आदेश पर पंजाब सरकार के सभी सिख मंत्री और विधायक श्री अकाल तख्त साहिब पहुंचे थे। सभी अपने साथ लिखित स्पष्टीकरण भी लेकर आए, जिसे पांच सिंह साहिबानों के समक्ष प्रस्तुत किया गया। इस दौरान कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और निर्दलीय विधायक भी मौजूद रहे। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

 

निज्जर ने रखा सरकार का पक्ष

विधानसभा की सेलेक्ट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब यह स्पष्ट करे कि अधिनियम में किन-किन प्रावधानों को शामिल किया जाना चाहिए। इस पर कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि कानून बनाना सरकार का अधिकार है, लेकिन धर्म से जुड़े किसी भी कानून में संशोधन या नया प्रावधान लाने से पहले शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और श्री अकाल तख्त साहिब से परामर्श करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सरकार को धार्मिक मामलों में सिख संस्थाओं की राय को प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

विपक्ष ने उठाए सवाल

विधायक प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि जिस दिन यह विधेयक पारित हुआ था, उसी दिन उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया था कि पहले सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट सदन में रखी जानी चाहिए थी। उनका कहना था कि कमेटी कई महीनों से इस विषय पर काम कर रही थी, इसलिए उसकी सिफारिशों पर पहले चर्चा होनी चाहिए थी।

edited by : Nrapendra Gupta