राम मंदिर चढ़ावा चोरी, पूछताछ में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मानी गलती

Ayodhya Ram Mandir donation theft case

Ayodhya Ram Mandir donation theft case: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुए दान चोरी मामले की जांच को यूपी पुलिस और एसआईटी (SIT) ने तेज कर दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के बयान दर्ज किए गए हैं, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि दान चोरी की बात सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने में उनसे देरी हुई। दूसरी ओर, पुलिस अब चंपत राय समेत ट्रस्ट के कई प्रमुख सदस्यों की वित्तीय संपत्तियों और बैंक खातों की गहन जांच कर रही है।

 

पुलिस और एसआईटी के सामने दिए अपने बयान में पूर्व महासचिव चंपत राय ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। चंपत राय ने बताया कि ट्रस्ट को जून के पहले हफ्ते में ही इस बात की भनक लग गई थी कि मंदिर के दान में हेराफेरी और चोरी हो रही है। जानकारी मिलते ही ट्रस्ट के लोगों ने आंतरिक स्तर पर कार्रवाई की थी और भारी मात्रा में कैश भी बरामद किया था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

 

चंपत राय ने जांचकर्ताओं से कहा कि मैंने खुद एसआईटी को इस मामले की शिकायत दी थी, जिसके आधार पर केस दर्ज हुआ। लेकिन हां, यह मेरी गलती है कि मैंने आधिकारिक तौर पर पुलिस शिकायत दर्ज करने में देरी की। हम अपने स्तर पर आंतरिक जांच करने में लगे हुए थे। उल्लेखनीय है कि इस मामले में 8 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया था, जिन्हें सोमवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। 

5 जून का फुटेज और कैश रिकवरी का सच

चंपत राय ने पूछताछ में 5 जून की उस घटना का भी जिक्र किया, जब ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारी आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट को पहले ही इसकी जानकारी मिल गई थी और छापेमारी के दौरान अविनाश शुक्ला के घर से भारी मात्रा में कैश बरामद किया गया था। हालांकि, जांच अधिकारियों का मानना है कि इस पूरे मामले को संभालने में चंपत राय एक अच्छे प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) साबित नहीं हुए और उनकी ओर से गंभीर लापरवाही बरती गई। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?

तीखे सवालों पर साधी चुप्पी

सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान जब जांचकर्ताओं ने चंपत राय से कुछ कड़े और तकनीकी सवाल पूछे, तो वे उनका स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए और कई मौकों पर चुप्पी साध गए। इस बीच, पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के कई वरिष्ठ सदस्यों की फाइनेंशियल डिटेल्स (वित्तीय विवरण) खंगालना शुरू कर दी है। इन सभी नेताओं और पदाधिकारियों के बैंक खातों, लेन-देन और संपत्तियों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इस मामले के तार किसी बड़े वित्तीय नेटवर्क से तो नहीं जुड़े हैं।

70 से अधिक लोगों को नोटिस जारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मचारियों और संदिग्ध गतिविधियों से संबंध रखने वाले लगभग 70 लोगों को नोटिस जारी कर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस मामले में शामिल अन्य आरोपियों और इसके पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।

Edited by: Vrijendar Singh Jhala 

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में योगी का बड़ा दांव! क्या संघ और भाजपा के भीतर बदल रहे हैं शक्ति समीकरण?

अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा और दान अनियमितता विवाद ने केवल एक धार्मिक संस्थान की पारदर्शिता पर सवाल नहीं खड़े किए हैं, बल्कि इसने भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली शक्ति केंद्रों के बीच मौजूद समीकरणों को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस विवाद से राजनीतिक रूप से कमजोर होंगे या पहले से अधिक मजबूत होकर उभरेंगे?

 

योगी आदित्यनाथ ने इस मामले में जिस आक्रामकता के साथ विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और सार्वजनिक रूप से यह संदेश दिया कि “किसी को बख्शा नहीं जाएगा”, उससे यह स्पष्ट संकेत गया कि वे इस मामले को केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रखना चाहते। यह कदम उनकी उस राजनीतिक छवि को और मजबूत करता है जिसमें वे कानून और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी प्रकार के समझौते के लिए तैयार नहीं दिखाई देते।

 

हालांकि इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक परत यह है कि विवाद के केंद्र में मौजूद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कई प्रमुख चेहरे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद की पृष्ठभूमि से जुड़े माने जाते हैं। ऐसे में योगी सरकार की सख्त कार्रवाई को संघ परिवार के कुछ प्रभावशाली वर्गों द्वारा केवल प्रशासनिक निर्णय के बजाय राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी आदित्यनाथ इस अवसर का उपयोग स्वयं को एक ऐसे हिंदुत्व नेता के रूप में स्थापित करने के लिए कर रहे हैं जो संगठन, पद या प्रभाव की परवाह किए बिना कार्रवाई करने की क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है। यदि यह धारणा जनता के बीच मजबूत होती है तो इसका सीधा लाभ उन्हें उत्तर प्रदेश की राजनीति से आगे राष्ट्रीय राजनीति में भी मिल सकता है।

 

यही कारण है कि इस पूरे घटनाक्रम को कई लोग भाजपा के भीतर उभरते नेतृत्व संतुलन के नजरिए से भी देख रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद पार्टी और व्यापक हिंदुत्व राजनीति में भविष्य के नेतृत्व को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। योगी आदित्यनाथ पहले से ही भाजपा के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्रियों में गिने जाते हैं और उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाती है।

 

इस विवाद के दौरान ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे और एसआईटी जांच की दिशा ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि मुख्यमंत्री इस मामले को अंत तक ले जाने के पक्ष में हैं। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या प्रशासनिक लापरवाही साबित होती है, तो योगी की “जीरो टॉलरेंस” वाली छवि और मजबूत हो सकती है।


लेकिन इस रणनीति के जोखिम भी कम नहीं हैं। राम मंदिर केवल उत्तर प्रदेश या भाजपा का राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह संघ परिवार के दशकों लंबे वैचारिक और सामाजिक आंदोलन का प्रतीक रहा है। ऐसे में यदि जांच की दिशा संघ और उससे जुड़े वरिष्ठ चेहरों तक पहुंचती है, तो इससे संगठन के भीतर असहजता बढ़ सकती है। यही वजह है कि इस पूरे मामले पर संघ नेतृत्व की चुप्पी भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षक यह भी मानते हैं कि योगी आदित्यनाथ और राम मंदिर ट्रस्ट के बीच दूरी की पृष्ठभूमि नई नहीं है। गोरखनाथ मठ और राम जन्मभूमि आंदोलन के ऐतिहासिक संबंधों के बावजूद ट्रस्ट गठन के समय गोरखनाथ परंपरा का कोई प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व न होना लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में वर्तमान घटनाक्रम को कुछ लोग पुराने राजनीतिक और संस्थागत असंतोष के विस्तार के रूप में भी देखते हैं।

 

दूसरी ओर, भाजपा और संघ के लिए यह स्थिति दोहरी चुनौती लेकर आई है। यदि जांच को कमजोर करने की कोशिश होती है तो विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के संरक्षण के रूप में पेश करेगा, जबकि यदि जांच पूरी कठोरता से आगे बढ़ती है तो संगठन के कुछ प्रभावशाली चेहरों की साख प्रभावित हो सकती है।

 

सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जनता इस पूरे विवाद को किस नजरिए से देखती है। यदि मतदाता इसे “आस्था की रक्षा के लिए कार्रवाई” के रूप में देखते हैं, तो इसका सबसे बड़ा राजनीतिक लाभ योगी आदित्यनाथ को मिल सकता है। लेकिन यदि यह धारणा बनती है कि मामला केवल आंतरिक शक्ति संघर्ष या राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश है, तो इसका असर उल्टा भी पड़ सकता है।

 

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि राम मंदिर चढ़ावा विवाद केवल एक कथित वित्तीय अनियमितता की जांच नहीं रह गया है। यह भाजपा, संघ परिवार और हिंदुत्व राजनीति के भीतर बदलते शक्ति संतुलन की एक महत्वपूर्ण परीक्षा बन चुका है।

 

आने वाले महीनों में एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाएं यह तय करेंगी कि यह प्रकरण योगी आदित्यनाथ के लिए जोखिम साबित होता है या फिर उनके राष्ट्रीय राजनीतिक कद को और ऊंचा उठाने वाला मोड़ बन जाता है।

2,000 साल पुरानी कार्ला गुफाओं में बड़ा रहस्य, सिंह स्तंभ के नीचे मिली गुप्त गुफा

gupta gufa ka rahasya Karla Caves

महाराष्ट्र के लोनावला (पुणे) के पास स्थित प्रसिद्ध कार्ला गुफाओं (Karla Caves) को लेकर हाल ही में एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम जब कार्ला गुफा परिसर में एक पुराने पानी के टैंक (cistern) की सफाई और वहां से अतिक्रमण हटाने का काम कर रही थी, तब उन्हें गुफा के मुख्य आकर्षण 'लायन पिलर' (Lion Pillar/सिंह स्तंभ) के बिल्कुल नीचे एक छिपी हुई गुप्त जगह (Cavity) मिली।

 

खतरे की बात:

इस खोखली जगह के कारण स्तंभ के नीचे की चट्टानें आपस में जुड़ी हुई नहीं थीं। मौसम के प्रभाव और पानी के रिसाव के कारण यह खोखलापन बढ़ गया था, जिससे इस 2,000 साल पुराने ऐतिहासिक स्तंभ के ढहने या उसमें दरारें आने का बड़ा खतरा पैदा हो सकता था।

 

ASI की तुरंत कार्रवाई:

गनीमत यह रही कि स्तंभ को कोई नुकसान पहुँचने से पहले ही पुरातत्व विभाग ने इसे ढूंढ निकाला। एएसआई (ASI) ने तुरंत कदम उठाते हुए स्तंभ के आधार को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त सपोर्ट (स्ट्रक्चरल स्टेबलाइजेशन) तैयार किया है, ताकि खंभे का वजन बराबर बंटा रहे और भविष्य में इसके गिरने का कोई खतरा न रहे।

 

कार्ला गुफाओं के बारे में कुछ खास बातें:

  • यह भारत के सबसे बड़े और सबसे सुरक्षित बौद्ध चैत्य गृह (प्रार्थना हॉल) के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
  • इस गुफा के ठीक बाहर एक विशाल स्तंभ है, जिसके ऊपर चार सिंह (शेर) चारों दिशाओं में मुंह किए बैठे हैं (यह काफी हद तक हमारे राष्ट्रीय प्रतीक अशोक स्तंभ जैसा दिखता है)। इसी स्तंभ के नीचे यह खराबी पाई गई थी।
  • इस गुफा परिसर के बाहर ही प्रसिद्ध एकवीरा देवी का मंदिर भी स्थित है।
  • इनका निर्माण दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से पांचवीं शताब्दी ईस्वी के बीच मुख्यतः मौर्य और उत्तर-मौर्य काल के दौरान हुआ था।
  • यह मुंबई-पुणे मार्ग पर लोनावला के पास बनघटा पहाड़ियों पर स्थित है।
  • इन्हें बौद्ध भिक्षुओं द्वारा सिर्फ छेनी और हथौड़े से पहाड़ी को तराश कर बनाया गया था।
  • गुफा संख्या 8 में यहाँ भारत का सबसे बड़ा, भव्य और सबसे सुरक्षित रॉक-कट चैत्यगृह (प्रार्थना हॉल) स्थित है, जो 45 मीटर लंबा और 14 मीटर चौड़ा है।
  • गुफाओं का प्रवेश द्वार एक विशाल मेहराब (Arch) से सुसज्जित है। हॉल के भीतर बौद्ध देवी-देवताओं और रूपांकनों की सुंदर नक्काशीदार मूर्तियां हैं।
  • इस परिसर में भिक्षुओं के रहने और ध्यान लगाने के लिए कई आवासीय कक्ष (विहार) बने हैं।
  • यह लगभग 2 वर्ग किलोमीटर में फैला 16 गुफाओं का समूह है, जिसकी देखरेख भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) करता है।

 

बेडसे की गुफाएं:

इन गुफाओं के पास ही बेडसे की गुफाएं भी हैं। ये पहली शताब्दी ईस्वी पूर्व (ईसा पूर्व) की हैं, जिनका निर्माण सातवाहन साम्राज्य के काल में हुआ था।  यह पुणे (महाराष्ट्र) के पास कार्ला और भाजा गुफाओं के समीप स्थित है। यद्यपि ये कार्ला गुफाओं की तुलना में आकार में छोटी हैं, लेकिन बेहद कलात्मक हैं। दोनों ही गुफाएं भिक्षुओं के निवास (विहार) और पूजा स्थल (चैत्य) के रूप में विकसित की गई थीं। जहाँ कार्ला गुफाएं अपने विशालकाय चैत्य हॉल के लिए विख्यात हैं, वहीं बेडसे गुफाएं अपनी अनूठी स्तंभ कला और बारीक वेदिका अलंकरण के लिए जानी जाती हैं। ये स्थल प्राचीन भारत की धार्मिक प्रथाओं, व्यापारिक मार्गों और शिल्पकला के क्रमिक विकास का जीवंत प्रमाण हैं।

 

Fact Check: क्या दिल्ली में Petrol Bike की बिक्री पर 1 जुलाई 2026 से लग रहा है बैन? जानिए पूरा सच!

Electric Vehicle

दिल्ली सरकार ने अपनी नई Electric Vehicle (EV) Policy 2.0 (2026-2030) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। यह नीति 1 जुलाई 2026 से लागू हो रही है। सोशल मीडिया और खबरों में 'पेट्रोल बाइक बैन' को लेकर कई तरह की अफवाहें चल रही हैं। आइए सीधा फैक्ट-चेक करते हैं कि असलियत क्या है।

Fact Check: क्या है नया नियम और कब से लागू होगा?
इंटरनेट पर चल रहे दावों और सरकार के आधिकारिक नोटिफिकेशन के बीच का सच नीचे दी गई तालिका से समझिए:

अफवाह (Myth) सच (Fact) लागू होने की तारीख
दिल्ली में पुरानी पेट्रोल बाइक चलाना तुरंत बंद हो जाएगा। गलत। यह नियम सिर्फ नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर लागू होगा। आपकी मौजूदा बाइक सुरक्षित है। कोई बैन नहीं (पुरानी गाड़ियां वैध रहेंगी)
अब दिल्ली में कभी पेट्रोल-सीएनजी ऑटो नहीं मिलेंगे। सच (सिर्फ नए रजिस्ट्रेशन के लिए)। नए पेट्रोल/CNG थ्री-व्हीलर्स का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह बंद होगा। 1 जनवरी, 2027
दिल्ली में नई पेट्रोल बाइक और स्कूटर की बिक्री पर पूरी तरह रोक। सच। इस तारीख के बाद दिल्ली में सिर्फ इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स का ही नया रजिस्ट्रेशन (RTO) होगा। 1 अप्रैल, 2028

दिल्ली कैबिनेट (मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में) और परिवहन विभाग द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार:

Electric Vehicle

  • पुरानी गाड़ियों का क्या होगा?: आपके पास जो पेट्रोल बाइक या स्कूटर पहले से मौजूद है, उसे आप उसकी पूरी वैध लाइफ (15 साल) तक दिल्ली की सड़कों पर कानूनी रूप से चला सकते हैं। यह बैन सिर्फ 1 अप्रैल 2028 या उसके बाद खरीदी जाने वाली नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर लागू है।
  • हाइब्रिड कारों को झटका: नई नीति में स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड (Strong Hybrid) कारों को टैक्स में छूट देने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। सरकार का पूरा ध्यान सिर्फ प्योर (Pure) इलेक्ट्रिक वाहनों पर है।
  • बड़ा बजट और सब्सिडी: दिल्ली सरकार इस बदलाव के लिए 15,000 करोड़ खर्च कर रही है। नीति के पहले साल में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर 30,000 तक की सीधी सब्सिडी और रोड टैक्स/रजिस्ट्रेशन फीस में 100% की छूट मिलेगी।

नोट: यदि आप अपनी पुरानी BS-IV या उससे पुरानी पेट्रोल बाइक को स्क्रैप (Scrap) करते हैं, तो सरकार आपको 10,000 का अतिरिक्त स्क्रैपेज इंसेंटिव (Incentive) भी देगी।
क्या आप अगले दो सालों में दिल्ली में नई बाइक खरीदने की योजना बना रहे हैं, या इस नीति को लेकर आपके मन में कोई और उलझन है?

IPL किक्रेटर शशांक सिंह और रि. IPS शैलेश सिंह पर FIR, जानें क्या हैं पूरा मामला?

भोपाल। क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके रिटायर्ड IPS पिता शैलेश सिंह पर भोपाल में घरेलू नौकर से मारपीट के मामले में FIR दर्ज हुई है। पंजाब किंग्स के लिए खेलने वाले IPL क्रिकेटर शशांक सिंह और उनके पिता रिटायर्ड आईपीएस अफसर शैलेश सिंह पर भोपाल में स्थित अपने घर में काम करने वाले कुक से मारपीट का आरोप है। पुलिस को दर्ज में शिकायत के मुताबिक  पीड़ित कुक विपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि शशांक सिंह, उनके पिता शैलेश सिंह और उनके ड्राइवर मिश्रा ने उसके साथ मारपीट की और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। पुलिस ने शिकायत के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
 
क्या है पूरा मामला?- राजधानी भोपाल के रातीबढ़ इलाके में रहने वाले रिटायर्ड IPS शैलेश सिंह और उनके क्रिकेटर बेटे शशांक सिंह पर आरोप है कि उन्होंने अपने घर पर काम करने वाले कुक विपेन्द्र सिंह से गाली-गलौज औऱ मारपीट की। रीवा के रहने वाले विपेन्द्र सिंह ने पूरे मामले की शिकायत भोपाल के रातीबढ़ थाने में की। विपेन्द्र का आरोप है कि उन्हें शैलेश सिंह के घर पर खाना बनाने के लिए धोखे से भोपाल बुलाया गया था। इसके बदले 15 हजार रुपये वेतन और रहने की सुविधा देने का ऑफर दिया गया। इसके साथ उन्हें यह भी कहा गया था कि केवल दो लोगों का खाना बनाना है और काम का कोई खास बोझ नहीं रहेगा। पीड़ित का दावा है कि उसे 3 महीने में सरकारी नौकरी का झांसा भी दिया गया था। इसी भरोसे पर विपेन्द्र अपने सारे जरूरी दस्तावेज लेकर भोपाल आया था।
 
विपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि इस दौरान उसका मोबाइल छीन लिया गया और उसे जबरन काम करने के लिए कहा। डर के कारण वह खुद को कमरे में बंद कर लिया, लेकिन इसके बावजूद आरोप है कि शैलेश सिंह, शशांक सिंह और ड्राइवर ने उसके साथ मारपीट की। पीड़ित के शरीर और चेहरे पर चोट के निशान भी बताए जा रहे हैं।
 
पुलिस ने इस मामले में शैलेश सिंह, शशांक सिंह और एक अन्य पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296(बी), 115(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
 

राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस पर ओवैसी का बड़ा बयान: ‘अगर ट्रस्ट में मुस्लिम होता तो बुलडोजर चलता, एनकाउंटर कर देते’

Asaduddin Owaisi on Ram Mandir Donation Theft Case

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बिजनौर जिले के नजीबाबाद में एक जनसभा में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि अगर ट्रस्ट में कोई मुस्लिम होता तो उसके घर बुलडोजर चला देते और उसका एनकाउंटर कर देते। ALSO READ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा एक्शन: चंपत राय और कृष्ण मोहन से 3 घंटे पूछताछ

 

ओवैसी ने कहा कि मुझे याद है सुप्रीम कोर्ट ने अपने जजमेंट में कहा था कि 6 दिसंबर 1992 को जो हुए वो कानून का खुला उल्लंघन था। मुझसे पूछा गया कि राम मंदिर चंदा चोरी पर आप क्या कहेंगे। अगर ट्रस्ट में कोई मुस्लिम होता तो और बाद जैसे ये घोटाला सामने आया तो उसका एनकाउंटर कर देते। बुलडोजर से उसका घर तोड़ देते और केस क्लोज। चंपत तो मजे में है। जिनकी गिरफ्तार हुई उनकी पुलिस कस्टडी भी नहीं ली जाती।

 

ओवैसी की मुसलमानों से अपील

उन्होंने कहा कि 70 साल से राजनीतिक दलों ने मुसलमानों को नेतृत्व नहीं दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को सत्ता से रोकने के लिए उनकी पार्टी किसी भी दल से गठबंधन करने को तैयार है। उन्होंने मुसलमानों से जागरूक होने का आह्वान किया। ALSO READ: कौन हैं रिटायर्ड IAS योगेश्वर राम मिश्रा, जो हो सकते हैं राम मंदिर के CEO?

 

मुसलमान को केवल दरी बिछाने तक सीमित

एआईएमआईएम नेता ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों ने मुसलमानों को केवल वोट की राजनीति और दरी बिछाने तक सीमित रखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा मुसलमानों को टिकट नहीं देती, जबकि सपा ने उन्हें गुलाम बनाकर रखा है। उन्होंने मुसलमानों से कहा कि यदि वे केवल वोटर बनकर रहेंगे तो उनके बच्चों का भविष्य नहीं संवरेगा और बुजुर्गों के लिए अस्पताल भी नहीं बनेंगे। 

 

गौरतलब है कि पुलिस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एफआईआर दर्ज कर 8 लोगों को गिरफ्तार किया है। ये सभी 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने मंगलवार को इस मामले राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय और कृष्ण मोहन से पूछताछ की। पुलिस ने दोनों से एक हफ्ते तक चोरी छिपाने और देर से एफआईआर करवाने पर सवाल किया। 

edited by : Nrapendra Gupta 

CM धामी तोड़ेंगे एनडी तिवारी का रिकॉर्ड, उत्‍तराखंड में जश्‍न की तैयारी

Chief Minister Pushkar Singh Dhami is set to break former Chief Minister ND Tiwari's record

Chief Minister Pushkar Singh Dhami : उत्‍तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए 5 साल का कार्यकाल 4 जुलाई 2026 को पूरा होने जा रहा है। ऐसे में सरकार और भाजपा संगठन दोनों ही जश्‍न की तैयारी में हैं। यह जश्न इसलिए भी खास है, क्‍योंकि उत्तराखंड में एनडी तिवारी के बाद धामी ही ऐसे मुख्यमंत्री है, जिन्होंने अपने 5 साल का कार्यकाल पूरा किया है। मुख्यमंत्री धामी पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत एनडी तिवारी का रिकॉर्ड तोड़ने जा रहे हैं। इस दौरान धामी सरकार द्वारा पिछले 5 साल में किए गए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ ही पात्र लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से आच्छादित करने के लिए जिला स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

 

2 मार्च 2002 को एनडी तिवारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का कार्यकाल 2 मार्च 2002 से 7 मार्च 2007 रहा था। खास बात ये रही कि एनडी तिवारी ने अपना 5 साल का कार्यकाल पूरा किया, लेकिन उसके बाद कोई भी मुख्यमंत्री 5 साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए, हालांकि अब 4 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री धामी के 5 साल पूरे होने जा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 4 जुलाई 2021 को राज्य की कमान संभाली थी जिसके बाद वर्तमान समय यानी 29 जून 2026 तक 1821 दिन का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का 5 साल का कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में सेवा, सुशासन एवं समर्पण के अंतर्गत 4 जुलाई से प्रदेशभर में सेवा सप्ताह मनाया जाएगा।

इस दौरान धामी सरकार द्वारा पिछले 5 साल में किए गए विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आमजन तक पहुंचाने के साथ ही पात्र लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं से आच्छादित करने के लिए जिला स्तर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। सेवा सप्ताह के दौरान जिलों में जनसेवा शिविर भी लगेंगे।

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इसके तहत जिलों में चिकित्सा शिविर, दिव्यांगजनों के लिए शिविर व उपकरण वितरण, महिलाओं व बालिकाओं के लिए स्वास्थ्य शिविर, जिला मुख्यालयों में मैराथन व खेलकूद प्रतियोगिताएं, 4 जुलाई को सांस्कृतिक संध्या के आयोजन होंगे।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं। सेवा सप्ताह के दौरान जिलों में प्रभारी मंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा नामित प्रतिनिधियों की अध्यक्षता में व्यापक जनभागीदारी के साथ कार्यक्रम होंगे। Edited By : Chetan Gour

केतन अग्रवाल हत्याकांड में नया मोड़: सिया गोयल के वकील ने भाई साहिल को भेजा 10 करोड़ का मानहानि नोटिस

siya goyal

पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में उस समय नया मोड़ आ गया जब हत्या के आरोप में जेल में बंद सिया गोयल के वकील एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव ने सिया के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेज दिया। इस नोटिस के बाद मामला केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब सिया के परिवार और वकील के बीच भी कानूनी लड़ाई शुरू होती नजर आ रही है। ALSO READ: केतन अग्रवाल मर्डर केस: सगाई से पहले चेतन संग उदयपुर ट्रिप, 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर का खुलासा

 

साहिल गोयल ने मीडिया के सामने एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव के सिया गोयल का वकील होने पर सवाल उठाए थे। उसने दावा किया था कि परिवार ने आशीष श्रीवास्तव को कभी नियुक्त नहीं किया। यह भी आशंका जताई गई कि सिया के हस्ताक्षर धोखे से लिए गए हो सकते हैं। इसके बाद श्रीवास्तव ने कानूनी नोटिस जारी कर कहा कि उनके पास सिया द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित वकालतनामा मौजूद है, जिसे अदालत में भी दाखिल किया जा चुका है।

 

एडवोकेट आशीष श्रीवास्तव ने नोटिस में दावा किया है कि सिया गोयल ने स्वेच्छा से उन्हें अपना कानूनी प्रतिनिधि नियुक्त किया है। सिया ने बाकायदा वकालतनामा पर हस्ताक्षर किए हैं और यह दस्तावेज सक्षम अदालत के रिकॉर्ड में भी शामिल है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। ALSO READ: 'अगर बेटी दोषी है तो उसे भी सबसे कड़ी सजा मिले', केतन अग्रवाल हत्याकांड में सिया गोयल के माता-पिता का बड़ा बयान
 

साहिल गोयल को क्यों भेजा नोटिस?

नोटिस में आरोप लगाया गया है कि साहिल गोयल ने बिना किसी तथ्य की पुष्टि किए मीडिया में ऐसे बयान दिए, जिससे आशीष श्रीवास्तव की पेशेवर छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा। साहिल के बयानों से यह संदेश गया कि आशीष श्रीवास्तव ने झूठा दावा किया कि वह सिया के वकील हैं। इन आरोपों के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग, धमकियों, अपमानजनक टिप्पणियों और पेशेवर स्तर पर नुकसान का सामना करना पड़ा है।

 

क्या है वकील की मांग?

कानूनी नोटिस में साहिल गोयल से कथित मानहानिकारक बयानों को तत्काल वापस लेने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और भविष्य में इस तरह के आरोप नहीं लगाने का लिखित आश्वासन देने को कहा गया है। नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ दीवानी और अन्य कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसमें 10 करोड़ रुपये के हर्जाने का दावा भी शामिल हो सकता है।

edited by : Nrapendra Gupta

गुजरात बना स्पोर्ट्स हब, अहमदाबाद में सजेगा खेलों का महाकुंभ

Gujarat emerges as sports hub, Ahmedabad set to host grand sporting extravaganza

FIBA Basketball World Cup Qualifiers 2026 : गुजरात के लिए गर्व का विषय बनने जा रहे FIBA Basketball World Cup Qualifiers 2026 का आयोजन अहमदाबाद के अत्याधुनिक वीर सावरकर इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। गुजरात सरकार और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ गुजरात के सहयोग से आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट गुजरात को वैश्विक खेल मानचित्र पर एक मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

 

2 और 5 जुलाई को होंगे भारत के मुकाबले

बास्केटबॉल प्रेमियों को भारतीय टीम के दो रोमांचक मुकाबले देखने का अवसर मिलेगा। 2 जुलाई 2026 को शाम 6 बजे भारत और कतर के बीच मुकाबला खेला जाएगा, जबकि 5 जुलाई 2026 को रात 8:30 बजे भारत का सामना लेबनान से होगा। हाल ही में सफलतापूर्वक आयोजित अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल चैंपियनशिप के बाद अब अहमदाबाद एक और वैश्विक खेल आयोजन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है।

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वैश्विक स्पोर्ट्स हब के रूप में उभर रहा है गुजरात

गुजरात स्टेट बास्केटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि गुजरात के लिए पहली बार FIBA Basketball World Cup Qualifiers की मेजबानी करना गर्व की बात है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय गुजरात सरकार और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ गुजरात के निरंतर सहयोग को दिया। उनके अनुसार, राज्य खेलों के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

 

एसोसिएशन के शफीक शेख ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल टूर्नामेंट के बाद अब FIBA Basketball World Cup Qualifiers का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि गुजरात बड़े वैश्विक खेल आयोजनों की सफल मेजबानी करने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने सभी विदेशी टीमों, अधिकारियों और खेल प्रेमियों का गुजरात में गर्मजोशी से स्वागत किया।

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खेल के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश

गुजरात स्टेट बास्केटबॉल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष उमेश पाठक ने कहा कि यह टूर्नामेंट केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का भी एक प्रयास है। एसोसिएशन द्वारा 'Say No to Drugs, Say Yes to Life' और 'ड्रग मुक्त भारत' जैसे जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खेल युवाओं को अनुशासित और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इस अभियान में सहयोग के लिए उन्होंने गुजरात पुलिस का आभार व्यक्त किया।

 

वैश्विक मेहमानों के स्वागत के लिए तैयार है अहमदाबाद

अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट बास्केटबॉल एसोसिएशन (ABDA) के अध्यक्ष मुकेश अमीन ने कहा कि भारत का पहला यूनेस्को विश्व धरोहर शहर अहमदाबाद कतर, लेबनान और FIBA के प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है। शहर की समृद्ध संस्कृति, पारंपरिक आतिथ्य और आधुनिक खेल अवसंरचना इस टूर्नामेंट को और भी यादगार बनाएगी।

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विश्वस्तरीय आयोजन के लिए पूरी तैयारी

गुजरात स्टेट बास्केटबॉल एसोसिएशन और बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) खिलाड़ियों, कोचों, रेफरी और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। वीर सावरकर इंडोर स्टेडियम की तकनीकी टीम, प्रशासनिक स्टाफ, कोच और स्वयंसेवक इस आयोजन को सफल बनाने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

 

अगस्त 2026 में होगी इससे भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप

एसोसिएशन के अधिकारियों ने बताया कि यह टूर्नामेंट गुजरात के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इसके अलावा अगस्त 2026 में अहमदाबाद में इससे भी बड़ी अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल चैंपियनशिप का आयोजन किया जाएगा, जिससे गुजरात वैश्विक खेल केंद्र के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा।

 

गुजरात स्टेट बास्केटबॉल एसोसिएशन ने सभी खेल प्रेमियों, विद्यार्थियों और परिवारों से स्टेडियम पहुंचकर टीम इंडिया का उत्साहवर्धन करने तथा इस अंतरराष्ट्रीय खेल महोत्सव का हिस्सा बनने की अपील की है।
Edited By : Chetan Gour

अमेरिका-ईरान वार्ता पर बड़ा सस्पेंस: ट्रंप ने दोहा बैठक का किया दावा, ईरान बोला- अंतिम समझौते पर कोई बातचीत तय नहीं

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अमेरिकी और ईरान के बीच कतर में होने वाली बातचीत को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। अमेरिका का दावा है कि आज कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात में MoU पर आगे बढ़ने पर चर्चा होगी। हालांकि ईरान ने अमेरिका के साथ अंतिम समझौता वार्ता की खबरों को खारिज कर दिया है। ALSO READ: इजराइल-लेबनान समझौते पर हिजबुल्ला का विरोध, कहा- निरस्त्रीकरण मंजूर नहीं, लड़ाई रहेगी जारी

 

क्या है ट्रंप का दावा?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि मंगलवार को कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत होगी। उनका कहना है कि ईरान ने खुद इस बैठक का अनुरोध किया था। उन्होंने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MoU) को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

 

बताया जा रहा है कि अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ दोहा के लिए रवाना हो चुके हैं। हालांकि, यह पता नहीं चला है कि ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर उनके साथ यात्रा कर रहे हैं या नहीं।

 

क्या बोला ईरान?

ईरान के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि आने वाले दिनों में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर कोई बातचीत तय नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि अंतिम समझौते पर औपचारिक वार्ता शुरू होने की स्थिति अभी नहीं बनी है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ अंतिम समझौते पर अभी बातचीत शुरू नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि 17 जून को हुए समझौता ज्ञापन (MoU) की प्रमुख शर्तों को लागू किए बिना अंतिम समझौते पर वार्ता शुरू नहीं की जा सकती।

 

मंत्रालय ने साफ किया कि ईरान केवल एक एक्सपर्ट प्रतिनिधिमंडल दोहा भेजेगा, जो MoU को आगे बढ़ाने और कतर में फंसी ईरानी संपत्तियों को जारी करने जैसे तकनीकी मुद्दों पर काम करेगा।

 

कतर जारी करेगा 6 अरब डॉलर

इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि कतर में फंसी ईरान की 12 अरब डॉलर की राशि में से 6 अरब डॉलर जल्द जारी कर दिए जाएंगे।

edited by : Nrapendra Gupta