कौन हैं रिटायर्ड IAS योगेश्वर राम मिश्रा, जो हो सकते हैं राम मंदिर के CEO?

who is IAS Yogeshwar Ram Mishra

who is IAS Yogeshwar Ram Mishra: अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े प्रशासनिक फेरबदल और पारदर्शिता लाने की तैयारी चल रही है। एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट और संस्तुतियों के बाद तिरुपति बालाजी और श्रीकाशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर राम मंदिर में भी एक मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की चर्चाएं तेज हैं। हालांकि इस पद की दौड़ में कुछ और नाम भी शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और एक अन्य ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे चुके हैं। 

 

इस रेस में उत्तर प्रदेश के पूर्व सीनियर आईएएस (IAS) अधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सबसे आगे चल रहा है। आइए जानते हैं कि कौन हैं योगेश्वर राम मिश्रा और क्यों उन्हें इस बेहद जिम्मेदारी भरे पद के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। योगेश्वर राम मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के 2005 बैच के आईएएस (IAS) अधिकारी रहे हैं। वे मूल रूप से प्रयागराज (इलाहाबाद) के रहने वाले हैं। वह प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (UP-PCS) से प्रमोट होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में शामिल हुए थे और उन्हें उत्तर प्रदेश शासन में प्रशासनिक कार्यों का लंबा और गहरा अनुभव है। सबसे खास बात यह है कि उन्हें योगी सरकार का विश्वासपात्र अफसर माना जाता है। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

अयोध्या से पुराना नाता

योगेश्वर राम मिश्रा अयोध्या के मिजाज और वहां की व्यवस्थाओं से भली-भांति वाकिफ हैं। वे जनवरी 2016 से मार्च 2016 के दौरान अयोध्या (तत्कालीन फैजाबाद) के जिलाधिकारी (DM) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। वे अपने सेवाकाल में वाराणसी (काशी), बाराबंकी और अयोध्या जैसे हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील जिलों में बतौर जिलाधिकारी (District Magistrate) तैनात रह चुके हैं। ALSO READ: अखिलेश जी, अयोध्या को रामभक्तों ने संवारा, आप पश्चाताप कर रामलला के दर्शन करिए : योगी आदित्यनाथ

 

वह विंध्याचल और देवीपाटन मंडल के मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) जैसे बड़े पदों पर भी काम कर चुके हैं और विंध्य कॉरिडोर के कामों को पूरा कराने का श्रेय भी उन्हें जाता है।  इसके अलावा वह 'उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग' (UPPSC) में सदस्य (प्रशासनिक) की भूमिका भी निभा चुके हैं। विंध्याचल मंडल के कमिश्नर रहे हैं 

क्यों हो रही है इनके नाम की चर्चा?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के बाद मंदिर की वित्तीय व्यवस्था और आंतरिक प्रबंधन में पारदर्शिता लाना सबसे बड़ी चुनौती है। ऐसे में योगेश्वर राम मिश्रा का नाम सामने आने के पीछे मुख्य वजह यह है कि उन्हें धार्मिक नगरियों के प्रबंधन का पुराना अनुभव है। वाराणसी और अयोध्या जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों में काम करने के कारण वे संतों, स्थानीय परंपराओं और श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं को गहराई से समझते हैं। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर घोटाला, करोड़ों की चोरी से लेकर इस्तीफों और गिरफ्तारियों तक की पूरी टाइमलाइन

बेदाग और कड़क छवि

प्रशासनिक हलकों में उनकी छवि एक सुलझे हुए और नियमों के पाबंद अधिकारी की रही है। बड़े प्रशासनिक और वित्तीय सुधारों को लागू करने में उन्हें माहिर माना जाता है। अयोध्या में पूर्व में डीएम रहने के कारण वहां के स्थानीय प्रशासन, पुलिस और काफी हद तक संत समाज में भी उनकी जान-पहचान और स्वीकार्यता है। हालांकि राम मंदिर के सीईओ के रूप में योगेश्वर राम मिश्रा के अलावा पूर्व आईएएस अवनीश अवस्थी और डॉ. अनिल पाठक जैसे कद्दावर नामों की भी चर्चा है।

क्या है चुनौतियां?

कानूनी जानकारों के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वर्तमान नियमों में 'सीईओ' का कोई पद नहीं है। ऐसे में इस पद को सृजित करने के लिए पहले ट्रस्ट के बायलॉज (नियमों) में संशोधन करना होगा। यदि सरकार और ट्रस्ट किसी प्रशासनिक अधिकारी को कमान सौंपने का अंतिम फैसला लेते हैं, तो योगेश्वर राम मिश्रा अपनी वरिष्ठता और अनुभव के कारण इस पद के लिए सबसे मजबूत और भरोसेमंद विकल्प साबित हो सकते हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

भोपाल में HIV पॉजिटिव युवक ने 50 से ज्‍यादा लोगों को जाल में फंसाकर बांटा मौत का वायरस, चौंकाने वाला खुलासा

HIV positive bhopal

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक ऐसा खौफनाक और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसे सुनकर हर कोई दंग है। यहाँ एक HIV पॉजिटिव युवक ने कथित तौर पर जानबूझकर 50 से ज्यादा लोगों को इस जानलेवा वायरस से संक्रमित कर दिया। जब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ और युवक से ऐसा करने की वजह पूछी गई, तो पुलिस से लेकर डॉक्टर तक सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई। युवक की इस हैरान कर देने वाली करतूत के पीछे जो 'वजह' सामने आई है, वह न सिर्फ चौंकाने वाली है बल्कि समाज के बदलते और डरावने चेहरे को भी बयां करती है..

भोपाल पुलिस ने Katara Hills Case में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। मेडिकल जांच में आरोपी HIV Positive पाया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपी ने कई लोगों को संक्रमित करने की कोशिश करने की बात कही है। इसके बाद पूरे भोपाल में हडकंप मचा है। जो लोग उससे मिले थे वो भी घबराए हुए हैं।

पुलिस के मुताबिकएक युवक की संदिग्ध मौत के मामले की जांच के दौरान आरोपी तक पहुंचा गया। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

बता दें कि भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में एक युवक की हत्या के मामले में गिरफ्तार 28 वर्षीय आरोपी HIV पॉजिटिव पाया गया है। पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह पिछले कुछ सालों में 50 से अधिक लोगों को जबरन शारीरिक संबंध बनाकर संक्रमित कर चुका था।

हत्‍या के मामले में आरोपी की गिरफ्तारी : पुलिस ने 24 मई को कटारा हिल्स में मिले एक फैक्ट्री वर्कर (मंडीदीप निवासी) के शव के मामले में आरोपी को पकड़ा था। पीड़ित द्वारा अप्राकृतिक संबंध बनाने से इनकार करने और पुलिस में शिकायत करने की धमकी देने पर आरोपी ने पत्थर से कुचलकर उसकी हत्या कर दी थी। पुलिस हिरासत में मेडिकल जांच के दौरान आरोपी HIV पॉजिटिव निकला और 2022 से सरकारी अस्पताल में इसका इलाज (ART) चल रहा था। आरोपी ने कबूल किया कि वह लोगों को जानबूझकर संक्रमित करना चाहता था। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम अब उसके संपर्क में आए अन्य लोगों (contacts) की पहचान करने में जुटी है।
Edited By: Naveen R Rangiyal

Share Market Today: 3 दिनों की छुट्टी के बाद बाजार का बुरा हाल! निफ्टी 24,000 के नीचे

share market 19 march

Stock Market Update Today: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स में 400 से अधिक गिरावट आई है जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 24,000 अंक से नीचे आ गया। बैंकिंग, ऑटो और आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट आई है। 

 

3 दिन की छुट्‍टी के बाद आज सुबह भारतीय शेयर बाजार में उत्साह दिखाई दिया। मंगलवार को दोहा में अमेरिका ईरान वार्ता से पहले आज सुबह शुरुआती कारोबार में निफ्टी 24,000 के पार था। सुबह 11:05 बजे सेंसेक्स 59 अंक बढ़कर 77159 पर था। निफ्टी भी 26 अंक बढ़कर 24082 पर था। हालांकि मुनाफावसूली की वजह से शेयर बाजार में जमकर बिकवाली हुई। देखते ही देखते 2:30 सेंसेक्स 373 अंक गिरकर 76728 पर आ गया वहीं निफ्टी भी 107 अंकों की गिरावट के साथ 23949 पर पहुंच गया।

 

इन शेयरों में भारी उठा पटक

सन फार्मा, पावरग्रिड, ट्रेंट, इटरनल और एनटीपीसी के शेयरों में तेजी रही तो कोटक महिंद्रा बैंक, इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति, रिलायंस और एसबीआई लाल निशान में दिखाई दिए।

 

इससे पहले गुरुवार, 25 जून को बाजार में गिरावट रही थी। सेंसेक्स 109 अंक की बढ़त के साथ 77,100 पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी में भी 34 अंक की बढ़त रही, ये 24,056 पर बंद हुआ।

अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।

edited by : Nrapendra Gupta

चंपावत में CSR के अंतर्गत MRI मशीन का लोकार्पण

Dhami

Uttarakhand Healthcare Upgrade: उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जनपद चंपावत में स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती देते हुए CSR के अंतर्गत ICICI फाउंडेशन फॉर इन्क्लूसिव ग्रोथ के सहयोग से लगभग 6 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित अत्याधुनिक MRI मशीन का लोकार्पण किया। इससे सीमांत क्षेत्र के लोगों को बेहतर, सुलभ और समय पर जांच की सुविधा मिलेगी।

 

मुख्यमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि जनपद में लगभग 20 करोड़ रुपए की लागत से 50 बेड वाले आधुनिक क्रिटिकल केयर ब्लॉक तथा 11.71 करोड़ रुपए की लागत से डायग्नोस्टिक विंग, ऑपरेशन थिएटर एवं पार्किंग का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे स्वास्थ्य सुविधाएं और सशक्त होंगी।

इस दौरान माननीय जिला पंचायत अध्यक्ष आनंद सिंह अधिकारी, भाजपा के जिला अध्यक्ष गोविंद सिंह सामंत, भाजपा के प्रदेश मंत्री निर्मल माहरा समेत अन्य गणमान्य जन उपस्थित रहे।

टपकेश्वर महादेव एक पावन स्थल

एक अन्य पोस्ट में मुख्‍यमंत्री धामी ने कहा- देहरादून में स्थित भगवान शिव को समर्पित टपकेश्वर महादेव मंदिर प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों में से एक है। प्राकृतिक गुफा में स्थापित शिवलिंग पर निरंतर टपकती जलधारा इस पावन स्थल की विशिष्ट पहचान है। देहरादून आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन कर इसकी दिव्यता एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव अवश्य करें।

Edited by: Vrijendra singh Jhala 

CM डॉ. मोहन यादव की राज्यपाल से मुलाकात के बाद कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज, कई मंत्रियों की होगी छुट्टी !

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में मोहन कैबिनेट के विस्तार की अटकलें तेज हो गई है। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अचानक लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल से मिलने को भी कैबिनेट के संभावित विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं पार्टी से जुड़े सूत्र बताते है कि कैबिनेट विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष के बीच अंतिम दौर की चर्चा हो चुकी है। 

हलांकि राज्यपाल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज लोक भवन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल से भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल को प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने को लेकर 9 लाख से अधिक प्राप्त सुझावों, व्यापक जनसमर्थन एवं आगामी कार्ययोजना से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्यपाल के साथ जल गंगा संवर्धन अभियान के सफल क्रियान्वयन, गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा में प्रस्तावित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों, 4 कृषि उपजों को प्राप्त जीआई टैग से किसानों को मिलने वाले लाभ, सौर ऊर्जा परियोजनाओं के विस्तार, एमएसएमई एवं स्टार्ट-अप को प्रोत्साहन, औद्योगिक निवेश और रोजगार सृजन से जुड़े विभिन्न प्रयासों एवं उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई।
 
कैबिनेट विस्तार की क्यों लग रही अटकलें?- मध्यप्रदेश में मोहन सरकार के ढ़ाई साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद अब पहले कैबिनेट विस्तार की अटकलें तेज हो गई है। खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट विस्तार के संकेत दे चुके है। शनिवार को जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हिल स्टेशन बैतूल के कुकरु में पहुंचे तो इसके विस्तार से पहले मंथन से जोड़कर देखा गया। वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ होने से इन संभावनाओं को और बल मिल गया है।
 
आधा दर्जन नए चेहरों को मिलेगी एंट्री!- वर्तमान में मोहन कैबिनेट में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित कुल 31 सदस्य हैं। चूंकि विधानसभा की सदस्य संख्या के मुताबिक राज्य में अधिकतम 35 मंत्री बनाए जा सकते हैं, इसलिए इस समय चार पद पूरी तरह खाली हैं। ऐसे में मोहन सरकार के पहले कैबिनेट विस्तार में इन खाली पदों को भरने के साथ नॉन परफॉर्मर मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कैबिनेट विस्तार में  4 से 6 मौजूदा मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है और 7 से 8 नए चेहरों को मौका मिल सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार का मुख्य आधार मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा और उनका रिपोर्ट कार्ड होने वाला है।
 
क्षेत्रीय और जातिगण समीकरण साधने की कवायद-मोहन सरकार का यह कैबिनेट विस्तार ऐसे समय होने जा रहा है, जब सरकार के ढाई साल पूरे हो चुकी है और अब सरकार और पार्टी 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत और 2028 के  विधानसभा चुनाव की तैयारियों में  जुट गई है। कैबिनेट विस्तार में पूरा फोकस क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने और आगामी नगरीय निकाय व 2028 के चुनावों के लिए जातिगत समीकरण साधने पर है।  
 
कैबिनेट विस्तार में कई सीनियर मंत्रियों के साथ विवादों में रहने वाले मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। पहली बाहर विधायक के साथ मंत्री बने चेहरों पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है। वहीं कैबिनेट महिला प्रतिनिधित्व को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। महिला वोट बैंक और क्षेत्रीय समीकरण को साधने के लिए अर्चना चिटनीस को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता  है। इसके साथ ही रीति पाठक भी दावेदार है। वहीं कैबिनेट में मौजूदा महिला चेहरे राज्यसभा मंत्री राधा सिंह और प्रतिमा बागरी की छुटटी हो सकती है।
 
इसके साथ  सागर और बुंदेलखंड क्षेत्र की नाराजगी दूर करने के लिए सागर, दमोह या पन्ना क्षेत्र के वरिष्ठ विधायकों को जगह मिल सकती है। इसमें सागर के आने  वाले पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के साथ पन्ना से आने वाले पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह की दोबारा सरकार में एंट्री हो सकती है। इसके साथ जातिगत समीकरण साधने के लिए सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्री प्रभुराम चौधरी की दोबारा सरकार में एंट्री हो सकती है।

मध्यप्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह बनाम जीतू पटवारी की सियासी जंग, जमीन पर खुलकर आई गुटबाजी

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में एक बार फिर बड़े नेताओं के बीच की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। इस बार विवाद वीर भारत न्यास को लेकर है, जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों को पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने खुलकर गलत ठहरा दिया। पार्टी के दो सीनियर नेताओं के आमने-सामने आने का मामला अब पार्टी हाईकमान तक पहुंच गया है और अब इसका रिएक्शन भी देखने को मिलना शुरु हो गया है। कांग्रेस महासचिव और मीडिया विभाग के चेयरपर्सन जयराम रमेश ने सोमवार को पीसीसी चीफ जीत पटवारी के एक्स पर किए गए पोस्ट को शेयर करते हुए लिखा कि कांग्रेस मुख्यमंत्री के इस्तीफे तक अपना संघर्ष लगातार जारी रखेगी। 

 

क्या है पूरा मामला?- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पिछले दिनों दिल्ली में हुई प्रेस कॉफ्रेस में आरोप लगाया था  कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को मात्र एक रुपये की टोकन राशि पर दे दी गई। उन्होंने इसे बड़ा भूमि घोटाला बताया और राज्य सरकार को घेरा था।  जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए  थे।

वहीं जीत पटवारी के इन आरोपों के बीच पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उज्जैन में मीडिया से  बात करते हुए ट्रस्ट से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए और कहा कि जीतू पटवारी के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा कि कि वह बिना रिसर्च के कोई बात नहीं करते और सांस्कृतिक संस्था वीर भारत न्यास को जमीन नियमानुसार ही आवंटित की गई है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहरों के लिए एक रुपये की टोकन राशि पर जमीन देना हमेशा से एक तय और सही प्रक्रिया रही है। वीर भारत न्यास निजी नहीं बल्कि सरकारी ट्रस्ट है। उनका कहना था कि वीर भारत न्यास एक पंजीकृत सार्वजनिक न्यास है और इसके पदेन अध्यक्ष राज्य के मुख्यमंत्री होते हैं। इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि  देश में दलालों की कमी नहीं है। दलालों का काम ही छोटे आरोप लगाना और इसके माध्यम से रुपये वसूली होता है। यह सब खेल दलालों का है। 

 

अपने बयान पर अड़े जीतू पटवारी- वहीं दिग्विजय सिंह के बयान के बाद भी पीसीसी चीफ जीतू पटवारी अपने आरोपों पर अड़े हुए है। दिग्विजय सिंह के बयान पर जीतू पटवारी ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष के नाते वह मुख्यमंत्री से आरोपों पर जवब मांग रहे है और सरकार  को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए वहीं जीतू ने कहा कि  दिग्विजय सिंह पार्टी के वरिष्ठ नेता है और उन्होंने जो कहा वहीं यह बता पाएंगे कि उन्होंने क्यों  कहा।

 

पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं दोनों नेता-यह पहला मौका नहीं है जब दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी के बीच मतभेद सामने आ है। जीतू पटवारी के पीसीसी चीफ बनने के बाद बैठकों की जानकारी नहीं देने पर भी दिग्विजय सिंह ने पटवारी की कार्यशैली पर सवालिया निशान उठाए थे। वहीं दिग्विजय सिंह के विधायक बेटे जयवर्धन सिंह को जब जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था तब भी राघौगढ़ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जीतू पटवारी का पुतला फूंका था। इसके साथ ही पटवारी के नेतृत्व, संगठन की कार्यशैली पर भी दिग्विजय सिंह कई बार सार्वजनिक मंचों पर सवाल उठा चुके है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े मुद्दें पर प्रदेश कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के आमने-समाने आने से पार्टी एकजुटता पर सवाल खड़े होते हैं और भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का अवसर मिलता है।

चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft

Ayodhya Ram Mandir theft: राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में एक बड़ा और अभूतपूर्व मोड़ आया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि राम मंदिर से जुड़े इस चोरी के मामले में पकड़े गए आरोपियों की पैरवी अयोध्या का कोई भी वकील नहीं करेगा। बार एसोसिएशन के इस कड़े रुख के बाद आरोपियों को कानूनी प्रतिनिधित्व मिलना मुश्किल हो गया है। आरोपियों की रिमांड अवधि आज खत्म हो रही है। 

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में अयोध्या के नवनिर्मित राम मंदिर के 'दानपात्र' (चढ़ावे) से नकदी चोरी होने का एक मामला सामने आया था। मंदिर परिसर की सुरक्षा और पवित्रता के लिहाज से इसे बेहद गंभीर चूक माना गया। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस मामले में कुछ संदिग्धों को गिरफ्तार किया और उनके पास से चोरी की गई राशि भी बरामद करने का दावा किया। उल्लेखनीय है कि रविवार को आरोपियों के घरों पर भी छापे की कार्रवाई हुई है। 

बार एसोसिएशन का कड़ा फैसला

आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अयोध्या बार एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। बैठक में वकीलों ने इस कृत्य की घोर निंदा की और सामूहिक रूप से एक बड़ा प्रस्ताव पारित किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्र ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय आम सभा की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है। इसलिए, अयोध्या का कोई भी अधिवक्ता अदालत में आरोपियों की जमानत या पैरवी के लिए खड़ा नहीं होगा। वकीलों का कहना है कि यह केवल एक साधारण चोरी का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों सनातनियों की आस्था पर आघात है। ऐसे तत्वों को कानूनी मदद देना उनके नैतिक सिद्धांतों के खिलाफ है।

मामले की जांच कहां तक पहुंची? 

​इस गंभीर मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है। अब तक की कार्रवाई इस प्रकार है। इस मामले में अब तक 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। जांच एजेंसियों ने कथित गबन की रकम से जुड़ी लगभग 79.85 रुपए लाख की राशि बरामद की है। पुलिस आरोपियों के घरों पर छापेमारी कर वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। साथ ही, दान गणना केंद्र से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका की भी गहन पड़ताल जारी है। इस बीच आरोपियों की रिमांड अवधि सोमवार को खत्म हो रही है। 

आरोपियों के पास अब क्या विकल्प हैं?

स्थानीय वकीलों के इस बहिष्कार के बाद आरोपियों के सामने कानूनी संकट खड़ा हो गया है। भारतीय संविधान के अनुसार, हर आरोपी को कानूनी सहायता पाने का अधिकार है। ऐसी स्थिति में आरोपियों के पास निम्नलिखित विकल्प बचते हैं। आरोपी पक्ष को अपनी पैरवी के लिए अन्य जिलों (जैसे लखनऊ, सुल्तानपुर या बस्ती) से निजी वकील बुलाने पड़ सकते हैं। यदि कोई भी वकील केस नहीं लेता है, तो अदालत नियमानुसार आरोपियों को अपनी बात रखने के लिए 'एमीकस क्यूरी' (अदालत का मित्र) या सरकारी विधिक सेवा प्राधिकरण से वकील मुहैया करा सकती है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

मौत के सेल्फी पॉइंट! इंदौर के वॉटरफॉल्स पर 5 साल में 66 मौतें, ‘डेथ जोन’ में नो एंट्री पर रोक नहीं लगा पा रही पुलिस

Picnic water fall death

इंदौर। मानसून की दस्तक के साथ ही इंदौर और उसके आसपास के खूबसूरत वॉटरफॉल्स पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है, लेकिन यह रोमांच जरा सी लापरवाही के चलते काल के गाल में समाने का सबब बन रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 वर्षों में इंदौर के आसपास के पिकनिक स्पॉट्स पर कुल 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद नौजवानों की है। पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही तमाम कोशिशों और सख्ती के बावजूद हादसों के इस सिलसिले पर लगाम नहीं लग पा रही है।

चोरल फॉल में टला बड़ा हादसा : हालिया मामला इसी रविवार का है, जहां चोरल फॉल के झरने में नहाने गए तीन युवक अचानक डूबने लगे। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाई और सूझबूझ से तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।

युवाओं में बढ़ता जानलेवा क्रेज : खतरनाक रास्तों और गहरे पानी के बावजूद युवा वर्ग इन वॉटरफॉल्स पर जोखिम उठाने से बाज नहीं आ रहा है। प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी बोर्ड लगाने और पुलिस बल तैनात करने के बाद भी लोग सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रतिबंधित और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में उतर रहे हैं, जो सीधे तौर पर हादसों को आमंत्रण दे रहा है।

ये आंकड़े डरावने हैं : इंदौर ग्रामीण पुलिस द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 से लेकर 23 जून 2026 के बीच ग्रामीण इलाकों में स्थित पिकनिक स्पॉट्स पर हादसों के चलते कुल 66 लोगों की मौत हो चुकी है। इन डराने वाले आंकड़ों के सामने आने के कुछ ही दिन पहले जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के लिए कई अत्यधिक जोखिम वाले और सुनसान पर्यटन स्थलों पर आम जनता के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।

Picnic water fall death

पिकनिक स्‍पॉट पर 5 साल में 66 मौतें

  • 2022 में 9 लोगों की मौत
  • 2023 में 17 लोगों ने गंवाई जान
  • 2024 में 14 नौजवनों की मौत
  • 2025 में भी 14 लोग हादसे का शिकार
  • 2026 में अब तक 12 लोगों की मौत

ऐसे साल दर साल हो रही मौतें : आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इन पिकनिक स्थलों पर होने वाली मौतों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2022 में जहां हादसों में 9 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 17 पर पहुंच गया। इसके बाद साल 2024 और 2025 में भी स्थिति गंभीर बनी रही और दोनों सालों में 14-14 लोगों ने अपनी जान गंवाई। चालू वर्ष 2026 में भी केवल 23 जून तक ही 12 लोगों की मौत पानी में डूबने या अन्य हादसों के कारण हो चुकी है।

कौन कौन से इलाके हैं खतरनाक : पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ग्रामीण इंदौर के बड़गोंदा और सिमरोल थाना क्षेत्र सबसे ज्यादा खतरनाक है, यहां कुल मौतों के आधे से अधिक मामले दर्ज किए गए। वहीं, बड़गोंदा का बामनिया कुंड सबसे खतरनाक माना जा रहा है, जहां सबसे ज्‍यादा मौतें हुईं। इसके बाद सिमरोल पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जैसे टिंचा फॉल्स, जूनापानी, लोधिया कुंड, चोरल और रोशियाबाबा दरगाह कुंड में सबसे ज्यादा हादसे दर्ज किए गए हैं।

पिकनिक स्‍पॉट पर सुरक्षा के क्‍या साधन होना चाहिए /
वॉटरफॉल्स और नदी-झरनों जैसे पिकनिक स्पॉट्स पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना बेहद जरूरी है, ताकि लोग एडवेंचर का आनंद भी ले सकें और किसी की जान भी जोखिम में न पड़े। ऐसे स्थानों पर मुख्य रूप से निम्नलिखित सुरक्षा साधन और व्यवस्थाएं होनी चाहिए:

1. प्राथमिक और तात्कालिक सुरक्षा उपकरण (Immediate Rescue Gear)
लाइफ बॉय रिंग्स (Lifebuoy Rings) और ट्यूब्स: पानी के किनारे निश्चित दूरी पर हवा भरे हुए लाइफ बॉय तैरते होने चाहिए, जिन्हें डूबते हुए व्यक्ति की तरफ तुरंत फेंका जा सके।

लाइफ जैकेट्स (Life Jackets): गहरे पानी या बोटिंग वाले क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होनी चाहिए।

लंबी और मजबूत रस्सियाँ (Rescue Ropes): तेज बहाव में किसी को खींचने के लिए घाटों और किनारों पर भारी-भरकम रस्सियों की उपलब्धता जरूरी है।

2. मानव संसाधन और निगरानी (Human Resource & Surveillance)
सर्टिफाइड लाइफगार्ड्स (Lifeguards): पानी के संवेदनशील और गहरे पॉइंट्स पर कुशल गोताखोरों और लाइफगार्ड्स की तैनाती 24 घंटे (विशेषकर मानसून में) होनी चाहिए।

सुरक्षा गार्ड और पुलिस चौकी: हुड़दंग मचाने वाले, शराब पीकर पानी में उतरने वाले या प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को रोकने के लिए पुलिस या निजी गार्ड्स की गश्त जरूरी है।

CCTV कैमरे: पूरे पिकनिक स्पॉट और मुख्य झरनों की निगरानी के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे होने चाहिए ताकि कंट्रोल रूम से नजर रखी जा सके।

3. चेतावनी और सूचना तंत्र (Warning & Communication System)
डेंजर साइन बोर्ड (Danger/Caution Boards): गहरे पानी, फिसलन भरी चट्टानों और प्रतिबंधित क्षेत्रों (No Go Zones) के पास स्पष्ट अक्षरों और स्थानीय भाषा में 'खतरा' दर्शाने वाले बोर्ड होने चाहिए।

लाउडस्पीकर/पब्लिक एड्रेस सिस्टम: अचानक पानी बढ़ने (फ्लैश फ्लड) या मौसम खराब होने पर पर्यटकों को तुरंत सतर्क करने के लिए अनाउंसमेंट सिस्टम होना चाहिए।

रेड फ्लैग्स (लाल झंडे): जो हिस्से सबसे ज्यादा खतरनाक या गहरे हैं, उन्हें लाल झंडे या फ्लोटिंग बैरिकेड्स (रस्सी और ड्रम की मदद से) लगाकर अलग किया जाना चाहिए।

4. मेडिकल और आपातकालीन सुविधाएं (Medical & Emergency Support)
फर्स्ट-एड किट (First-Aid Station): डूबने से बचे व्यक्ति को तुरंत सीपीआर (CPR) देने, ऑक्सीजन सपोर्ट और प्राथमिक उपचार के लिए एक मेडिकल बूथ होना चाहिए।

इमरजेंसी एम्बुलेंस: किसी भी गंभीर स्थिति में मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने के लिए मौके पर या बहुत पास में एक एम्बुलेंस तैनात होनी चाहिए।

5. बुनियादी ढांचागत सुरक्षा (Infrastructure Safety)
रेलिंग और बैरिकेडिंग: झरनों के व्यू-पॉइंट्स और ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर मजबूत लोहे की रेलिंग होनी चाहिए ताकि कोई पैर फिसलने से सीधे नीचे न गिरे।

एंटी-स्लिप वॉकवे: पानी के पास जाने वाले रास्तों पर ऐसी टाइल्स या खुरदरी सतह होनी चाहिए जिससे काई (Algae) जमने पर भी पैर न फिसले।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

पुणे कोर्ट का बड़ा फैसला: मासूम से दरिंदगी और हत्या के दोषी भीमराव कांबले को फांसी

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नसरापुर में साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी बेरहमी से हत्या करने के मामले में पुणे की विशेष अदालत ने आरोपी भीमराव कांबले को भारतीय न्याय संहिता (BJS) और पॉक्सो (POCSO) कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है।

 

पुलिस द्वारा तेजी से जांच पूरी करने के बाद अदालत ने रिकॉर्ड समय के भीतर अपना निर्णय दिया। मामले में दोषसिद्धि के लिए सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट के साथ ही गवाहों के बयानों का उपयोग किया गया था। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को फांसी की सजा दी।

 

दुर्लभ से दुर्लभतम मामला

विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने इस अपराध को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) श्रेणी का बताया। सरकारी वकील ने दावा किया कि आरोपी में भविष्य में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने सोची-समझी साजिश के तहत मासूम बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।

 

इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटें थीं और आरोपी ने अत्यंत क्रूरता से बच्ची को मौत के घाट उतारा। सरकारी वकील ने बच्ची के साथ हुई इस हैवानियत की तुलना में 'निर्भया मामले' का उदाहरण भी दिया।

 

पुख्ता सबूतों के आधार पर सजा

अदालत ने आरोपी के खिलाफ सभी सबूतों को बेहद ठोस और मजबूत माना। जांच के दौरान पुलिस द्वारा जुटाए गए निम्नलिखित सबूतों के कारण आरोपी का अपराध साबित हुआ, जिसके बाद अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।

edited by : Nrapendra Gupta

21 राज्यों में बारिश-तूफान, दिल्ली में 4 जुलाई तक मानसून की दस्तक, यहां लू का अलर्ट

rain alert in 22 states

Weather Updates 29 June : मौसम विभाग ने मध्यप्रदेश और महाराष्‍ट्र समेत 21 राज्यों में आंधी-बारिश और तूफान का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान कई स्थानों पर 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर के कुछ हिस्सों में गंभीर लू चलने की चेतावनी दी गई है।

देश में कितने चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय?

उत्तर तेलंगाना और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण अभी भी सक्रिय है और समुद्र तल से 3.1 से 4.5 किमी की ऊंचाई तक फैला हुआ है। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उससे सटे तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर भी समुद्र तल से लगभग 5.8 किमी की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण मौजूद है। उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी और म्यांमार तट के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण कमजोर हुआ है। ALSO READ: Top News : सेशेल्स के स्वतंत्रता दिवस समारोह में PM मोदी, असम में बाढ़ का कहर

 

दिल्ली में कब आएगा मानसून?

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली की ओर बढ़ रहा है। यूपी के कई हिस्सों में प्री-मॉनसून गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। यह 4 जुलाई को दिल्ली में दस्तक दे सकता है। 5-6 दिन के बाद मानसून की बारिश होने के साथ गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में भी जुलाई के पहले हफ्ते में मानसूनी बारिश हो सकती है।

 

इन राज्यों में बारिश का अलर्ट

महाराष्‍ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, बिहार, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश में आज बारिश की संभावना है। पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, छत्तीसगढ़, केरल और तमिलनाडु  में भी आज बारिश हो सकती है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 29 जून को तेज बारिश होने का अनुमान है।

 

मुंबई, गोवा में भारी बारिश 

कोंकण, गोवा और मुंबई सहित पश्चिमी भारत के तटीय इलाकों में मानसून सक्रिय है। मुंबई में भारी बारिश की वजह से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अंधेरी में सब वे डूब गया तो पनवेल में सड़के लबालब है। मौसम विभाग ने अगले 5 दिन बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है।

 

असम में बाढ़ से हाल बेहाल

असम और उसके पड़ोसी राज्य अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से बाढ़ की स्थिति बन गई है। राज्य के छह जिलों में 22,000 से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। रेलवे पुल क्षतिग्रस्त होने से ट्रेन सेवाएं रोक दी गई हैं। ALSO READ: गर्मी में तेजी से पिघल रहा अमरनाथ हिमलिंग, श्रद्धालुओं और प्रशासन की बढ़ी चिंता

edited by : Nrapendra Gupta