
नसरापुर में साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी बेरहमी से हत्या करने के मामले में पुणे की विशेष अदालत ने आरोपी भीमराव कांबले को भारतीय न्याय संहिता (BJS) और पॉक्सो (POCSO) कानून की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई है।
पुलिस द्वारा तेजी से जांच पूरी करने के बाद अदालत ने रिकॉर्ड समय के भीतर अपना निर्णय दिया। मामले में दोषसिद्धि के लिए सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट के साथ ही गवाहों के बयानों का उपयोग किया गया था। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को फांसी की सजा दी।
दुर्लभ से दुर्लभतम मामला
विशेष सरकारी वकील अजय मिसर ने इस अपराध को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) श्रेणी का बताया। सरकारी वकील ने दावा किया कि आरोपी में भविष्य में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि आरोपी ने सोची-समझी साजिश के तहत मासूम बच्ची का अपहरण किया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी।
इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से यह साफ हुआ है कि बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटें थीं और आरोपी ने अत्यंत क्रूरता से बच्ची को मौत के घाट उतारा। सरकारी वकील ने बच्ची के साथ हुई इस हैवानियत की तुलना में 'निर्भया मामले' का उदाहरण भी दिया।
पुख्ता सबूतों के आधार पर सजा
अदालत ने आरोपी के खिलाफ सभी सबूतों को बेहद ठोस और मजबूत माना। जांच के दौरान पुलिस द्वारा जुटाए गए निम्नलिखित सबूतों के कारण आरोपी का अपराध साबित हुआ, जिसके बाद अदालत ने उसे मृत्युदंड की सजा सुनाई।
edited by : Nrapendra Gupta

