UP के शिक्षकों को बड़ी सौगात, 8 जुलाई से शुरू होगी कैशलेस चिकित्सा योजना, परिवार को भी मिलेगा मुफ्त इलाज का लाभ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 8 जुलाई वाराणसी में शिक्षकों को मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ करेंगे। योजना के माध्यम से बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों तथा उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अनुरूप कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना की घोषणा की थी। 

 

बेसिक विभाग के 7 लाख से अधिक लाभार्थियों ने पोर्टल पर दर्ज कराई डिटेल्स

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के प्रभावी और पारदर्शी संचालन के लिए डिजिटल व्यवस्था को अपनाया गया है। इसके लिए विभाग की ओर से पात्र लाभार्थियों का विवरण संकलित करने के लिए ऑनलाइन डेटा संग्रह पोर्टल विकसित किया गया। पोर्टल के माध्यम से शिक्षकों का पंजीकरण, सत्यापन और अनुमोदन डिजिटल प्रक्रिया के जरिये किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग के लिए विकसित पोर्टल पर अब तक 7,89,032 लाभार्थी अपना विवरण दर्ज करा चुके हैं। लाभार्थियों द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण का सत्यापन संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) द्वारा किया जाएगा। इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अंतिम अनुमोदन प्रदान करेंगे। बीएसए स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के बेनिफिशरी एडेंटिफिकेशन सिस्टम (बीआईएस) पोर्टल से एकीकृत किया जाएगा। इसके पश्चात लाभार्थी आधार आधारित ईकेवाईसी की प्रक्रिया पूरी कर अपना डिजिटल कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

 

माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 3 जुलाई से पोर्टल शुरू

माध्यमिक शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों के लिए भी डेटा संग्रह पोर्टल 3 जुलाई से संचालित कर दिया गया है। पोर्टल पर शिक्षक अपना विवरण ऑनलाइन दर्ज करेंगे। उनके आवेदन का सत्यापन संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य द्वारा किया जाएगा, जिसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अंतिम अनुमोदन देंगे। अनुमोदन के बाद लाभार्थियों का डेटा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण को भेजा जाएगा। आधार आधारित ई-केवाईसी पूरी होने के बाद शिक्षक अपना कार्ड डाउनलोड कर सकेंगे और कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। साचीज सीईओ ने बताया कि पात्र लाभार्थियों को आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। योजना के तहत लाभार्थियों को वही सभी सुविधाएं और उपचार संबंधी लाभ प्राप्त होंगे, जो आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत उपलब्ध हैं। इसके साथ ही वे देशभर में आयुष्मान भारत योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस उपचार की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज के दौरान शिक्षकों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ में उल्लेखनीय कमी आएगी।

 

उच्च शिक्षा विभाग के लिए भी जल्द संचालित होगा पोर्टल

योगी सरकार ने योजना का दायरा और अधिक व्यापक बनाने की दिशा में भी तैयारी शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा विभाग के पात्र शिक्षकों एवं कार्मिकों के लिए भी शीघ्र ही अलग डेटा संग्रह पोर्टल उपलब्ध कराया जाएगा। इसके माध्यम से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षक एवं कर्मचारी भी अपना विवरण ऑनलाइन दर्ज कर योजना से जुड़ सकेंगे और स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

योगी सरकार का बड़ा दावा, जून में आबकारी विभाग को ₹5,173 करोड़ का राजस्व, 1500 से ज्यादा अवैध शराब कारोबारी गिरफ्तार

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में पारदर्शी प्रशासन और सख्त निगरानी व्यवस्था का असर लगातार स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आबकारी विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत में ही राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करते हुए नया रिकॉर्ड बनाया है। साथ ही अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई कर माफियाओं पर शिकंजा कसा है।

 

जून में 16.05 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त

जून 2026 में विभाग ने 5,173.56 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जबकि पिछले वर्ष जून माह में यह आंकड़ा 4,458.23 करोड़ रुपये था। इस प्रकार जून माह में 16.05 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त हुआ। सरकार द्वारा लागू की गई पारदर्शी नीतियां, तकनीकी निगरानी, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और सख्त प्रशासनिक व्यवस्था का सकारात्मक असर राजस्व संग्रह में देखने को मिल रहा है। इससे प्रदेश के विकास कार्यों को भी मजबूती मिल रही है।

अवैध शराब के खिलाफ व्यापक अभियान

योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई जारी है। आबकारी विभाग ने जून 2026 तक प्रदेशभर में 2,65,870 छापेमारी अभियान चलाए। इस दौरान 29,267 अभियोग दर्ज किए गए और लगभग 9 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान 4,641 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 804 आरोपियों को जेल भेजा गया। इसके अलावा अवैध शराब की तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 31 वाहनों को भी जब्त किया गया।

राजस्व में 11.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज

आबकारी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नितिन अग्रवाल ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में आबकारी विभाग को 71,278 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य दिया गया है। विभागीय अधिकारी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता और जवाबदेही के साथ कार्य कर रहे हैं। जून 2026 तक विभाग ने 15,809.25 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि में प्राप्त 14,228.91 करोड़ रुपये की तुलना में 1,580.34 करोड़ रुपये अधिक है। इस प्रकार विभाग ने 11.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है।

1500 से ज्यादा लोग गिरफ्तार 

 

आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि जून माह में ही 87,646 छापे डाले गए। इस दौरान 9,764 अभियोग दर्ज किए गए और 2.56 लाख लीटर अवैध शराब बरामद की गई। कार्रवाई के दौरान 1,513 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 283 को जेल भेजा गया। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे 7 वाहनों को जब्त किया गया।

यूपी में EV चार्जिंग पर बड़ी राहत: सोलर आवर्स में 20% सस्ती बिजली, योगी सरकार का नया फैसला

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने बिजली उत्पादन, आपूर्ति और उपभोक्ता राहत के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश में बिजली दरें देश की सबसे न्यूनतम दरों में हैं, जबकि बिजली आपूर्ति देश की सर्वाधिक एवं सबसे बेहतर श्रेणी में है। इसके साथ ही योगी सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) को बढ़ावा देने और हरित ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है।

प्रदेश सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल (ईवी) पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और दिन के समय उपलब्ध सस्ती सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रातः 9 बजे से सायं 4 बजे तक निर्धारित सोलर आवर्स में 20 प्रतिशत टैरिफ छूट की व्यवस्था लागू की है। 

 

ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जानकारी दी कि इससे न केवल ईवी चार्जिंग को बढ़ावा मिलेगा बल्कि स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा के उपयोग को भी प्रोत्साहन मिलेगा जोकि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

 

योगी सरकार का लक्ष्य प्रत्येक उपभोक्ता को सस्ती, गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध कराना है। लगातार सातवें वर्ष भी प्रदेश में बिजली की दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है। सभी उपभोक्ता श्रेणियों के लिए देय टैरिफ को यथावत रखा गया है। यह निर्णय सरकार की जनकल्याणकारी सोच तथा गरीबों, किसानों, घरेलू एवं अन्य उपभोक्ताओं के हितों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है। वहीं उत्तर प्रदेश विद्युत आपूर्ति के क्षेत्र में प्रतिदिन अपने ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है। प्रदेश ने 32,673 मेगावाट की अब तक की सर्वाधिक विद्युत मांग को सफलतापूर्वक पूरा कर नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड स्थापित किया है।

 

पूर्ववर्ती सरकारों के समय तापीय विद्युत उत्पादन मात्र 5,180 मेगावाट तक सीमित था, जबकि आज प्रदेश सौर ऊर्जा से ही इससे अधिक उत्पादन कर रहा है। लगभग 4,000 मेगावाट क्षमता सोलर पार्कों से तथा लगभग 2,500 मेगावाट क्षमता प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के माध्यम से विकसित की जा रही है। इसके साथ ही मिर्जापुर एवं मेजा सहित विभिन्न क्षेत्रों में तापीय विद्युत परियोजनाओं पर कार्य तेजी से चल रहा है। साथ ही पुराने तापीय विद्युत संयंत्रों की दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार किया गया है। पहले जहां ये संयंत्र लगभग 65 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर पर संचालित होते थे, वहीं अब उनकी कार्यक्षमता बढ़कर लगभग 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। 

 

ऊर्जा मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की ये उपलब्धियां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व का परिणाम हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में और भी तेजी से आगे बढ़ेगा तथा देश के लिए आदर्श मॉडल के रूप में अपनी पहचान को और मजबूत करेगा।

मथुरा में मानसून की धमाकेदार एंट्री, पहली ही बारिश में शहर डूबा, नगर निगम के दावों की खुली पोल

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उत्तर भारत में मानसून की दस्तक के साथ शुक्रवार को मथुरा में आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने पूरे शहर की रफ्तार थाम दी। तेज हवाओं के साथ मानसून की पहली ही बारिश ने नगर निगम और जिला प्रशासन की मानसून पूर्व तैयारियों की पोल खोल कर रख दी। महज कुछ मिनट की बारिश में श्रीकृष्ण जन्मभूमि शहर की सड़कें डूब, जिसके चलते यहां की प्रमुख सड़कें, चौराहे और रेलवे अंडरपास जलमग्न हो गये। आम लोगों और दूर-दराज से मथुरा नगरी पहुंचे श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

 

मथुरा शहर में सबसे खराब स्थिति श्रीकृष्ण जन्मभूमि के पास मथुरा-वृंदावन रोड, भूतेश्वर चौराहा, नया बस स्टैंड, द्वारकाधीश मंदिर मार्ग और कंकाली रोड की रही। यहां सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, सडकों पर घुटनों तक पानी भरने के कारण राहगीरों को पैदल चलने में भी दिक्कत महसूस हुई, कई स्थानों पर सड़क तथा नाले का अंतर तक समझ में नहीं आ रहा था। सड़कों पर जलभराव के कारण हादसों का खतरा भी मंडराता हुआ दिखाई दिया।

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श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कत

देश-विदेश से श्रीकृष्ण जन्मस्थली के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं को नालों के गंदे और बदबूदार पानी के बीच होकर गुजरना पड़ रहा था। जलमग्न हुई सड़कों पर पैदल चलना कठिन लग रहा था, वहीं पानी के तेज बहाव के कारण कई वाहनों की रफ्तार थम गई, वाहन चालक रास्ता पार करने का साहस भी जुटा नही पा रहें थे। द्वारकाधीश मंदिर के आसपास का नजारा देखकर ऐसा लग रहा था, मानो यमुना का पानी शहर की गलियों में उतर आया हो।

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यातायात व्यवस्था चरमराई

 

मथुरा नगरी में जलभराव के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमा गई। जहां ई-रिक्शा, कारें और दोपहिया वाहन पानी में रूक गए, ऐसे में वाहन स्वामी को पानी से बाहर वाहन लाने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। आईएसबीटी बस स्टैंड सहित कई शहर के मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया। जिसके चलते कई जगह लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक को ही आने-जाने का रास्ता बना लिया।

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रेलवे अंडरपास बने जलकुंड

 

भूतेश्वर समेत कई रेलवे अंडरपासों में गर्दन तक पानी भर गया, जिसके चलते वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। वहीं तेज बहाव में दोपहिया वाहनों के बहने की तस्वीरे भी सामने आईं। अंडरपास बंद होने से वैकल्पिक मार्गों पर भी भारी जाम की स्थिति बन गई।

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जल निकासी व्यवस्था पहली बारिश में ही फेल

बारिश थमने के काफी देर बाद भी सड़कों से पानी नहीं निकला। इससे साफ हो गया कि शहर की जल निकासी व्यवस्था पहली ही परीक्षा में विफल साबित हुई। जाम नालियों के कारण गंदा पानी सड़कों से होते हुए निचले इलाकों और कई घरों तक पहुंच गया।

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हर साल वही समस्या, समाधान अब भी अधूरा

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर साल ऐसे ही हालात बनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। लोगों ने नगर निगम और जिला प्रशासन से नालों की नियमित सफाई, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और मानसून से पहले प्रभावी तैयार करें ताकि लोगों और श्रृद्धालुओं को मुसीबत का सामना न करना पड़े।

बड़ा सवाल

आधा घंटे की पहली ही बारिश में जब मथुरा की सड़कें, अंडरपास और मुख्य मार्ग जलमग्न हो गए, तो पूरे मानसून के दौरान शहर की स्थिति कैसी होगी? क्या नगर निगम और जिला प्रशासन इस बार जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान निकाल पाएंगे, या फिर हर साल की तरह लोगों को राहत देने वाली बारिश आफत लगेगी?

E20 पेट्रोल से माइलेज घटेगा या नहीं, क्या सच में आएंगी चींटियां और बीमा पर पड़ेगा असर? हरदीप सिंह पुरी ने बताई सचाई

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भारत में ई20 (E20) फ्यूल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जहां एक तरफ लोगों की ये शिकायतें आ रही हैं और ई20 फ्यूल की वजह से बीते कुछ महीनों से उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो गया है। वहीं, दूसरी तरफ लोग यह भी शिकायत कर रहे हैं कि इंजन में खराबी और परफॉर्मेंस में गिरावट आई है, क्योंकि उन्हें लगता है कि पेट्रोल में इथेनॉल की ब्लेंडिंग ज्यादा हो रही है। सरकार के इस फैसले पर खूब राजनीति भी हो रही है और विपक्षी पार्टियां आरोप भी लगा रही हैं। 

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भारत में ज्यादातर वाहन 2023 से पहले के हैं, जो E10 (10 फीसदी इथेनॉल) या शुद्ध पेट्रोल के लिए बने थे। ऐसे में लाखों कार मालिक सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि उनपर ई20 या इससे आगे E85 या E100 थोपने की कोशिश की जा रही है। इस पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीपसिंह पुरी ने सरकार के एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) का जोरदार बचाव किया है। 

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क्या कहा केंद्रीय मंत्री ने 

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया पर फैल रही उन आशंकाओं को खारिज किया जिसमें E20 (20% एथेनॉल मिश्रित) पेट्रोल की सुरक्षा और माइलेज को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।  प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग 'भ्रामक और मनगढ़ंत नैरेटिव' फैला रहे हैं, जबकि एथेनॉल एक वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त ईंधन घटक है, जो वाहनों की परफॉर्मेंस को बेहतर बनाता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रेसिंग कारों में भी एथेनॉल का उपयोग किया जाता है, जिससे एक्सेलेरेशन बेहतर होता है और इंजन नॉकिंग कम होती है।

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क्या गिरेगा गाड़ी का माइलेज, चींटी और बीमा का क्या  

माइलेज को लेकर उठ रही चिंताओं पर उन्होंने स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल से माइलेज में मामूली 1 से 2 प्रतिशत तक की गिरावट हो सकती है, लेकिन यह सामान्य तकनीकी कारणों से होती है। उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह स्थापित है कि एथेनॉल इंजन की परफॉर्मेंस को कई मामलों में सुधारता है।

 

 मंत्री ने वायरल अफवाहों का भी खंडन किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि E20 ईंधन से चींटियां आकर्षित होती हैं या बीमा पॉलिसी प्रभावित होती है। पेट्रोलियम मंत्रालय और बीपीसीएल जैसे सार्वजनिक उपक्रमों ने स्पष्ट किया कि फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल में कोई अवशिष्ट शर्करा नहीं होती, जिससे कीट आकर्षित नहीं होते।  सरकार ने बताया कि भारत का E20 ईंधन की ओर संक्रमण अचानक नहीं बल्कि वर्षों के परीक्षण और नियामक जांच के बाद किया गया निर्णय है।
 

SIAM और ARAI की तकनीकी समीक्षा रही शामिल

इसमें SIAM और ARAI जैसी संस्थाओं की तकनीकी समीक्षा भी शामिल रही है। इसके अलावा सरकार देश में एथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तेजी से बढ़ा रही है। दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में 50 से 100 E100 (शुद्ध एथेनॉल) पंप शुरू किए जा रहे हैं, जिन्हें 2027 तक बढ़ाकर 5000 आउटलेट तक ले जाने की योजना है।  मंत्री ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच पेट्रोल और डीजल के दाम घटाने का मुद्दा भविष्य में उठ सकता है, लेकिन अभी किसी तरह की आधिकारिक घोषणा करना जल्दबाजी होगी।

 

गाड़ी के कौनसे पार्ट्‍स को हो रहा है नुकसान

सामने आई खबरों के मुताबिक इससे 2023 के बाद से बनी गाड़ियों में कोई परेशानी नहीं कर रही है, लेकिन पुरानी गाड़ी जैसे की क्लासिक कारों का सबसे नाजुक हिस्सा उनका फ्यूल सिस्टम होता है। पुरानी गाड़ियों में लगे रबर के होज़ पाइप, सील, ओ-रिंग्स और वाशर साधारण पेट्रोल के हिसाब से डिजाइन किए गए थे जबकि एथेनॉल एक साल्वेंट की तरह काम करता है जो इन रबर और प्लास्टिक के हिस्सों को धीरे-धीरे गला देता है। इसके पुरानी कारों के कार्बोरेटर में एथेनॉल की वजह से एक सफेद रंग का कचरा जमा होने लगता है। इससे फ्यूल की सप्लाई रुक जाती है और गाड़ी बीच रास्ते में झटका देकर बंद हो जाती है।

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बीमा को लेकर भी आई थीं खबरें

बीते दिनों ऐसी खबरें भी आईं कि कुछ बीमा कंपनियों ने इथेनॉल मिश्रित ईंधन से खराब हुए इंजन को कवर करने से इनकार कर दिया है। हालांकि बाद में सरकार ने स्पष्ट किया कि ऐसा कुछ नहीं है। मंत्रालय ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और इसके इस्तेमाल से मोटर इंश्योरेंस क्लेम पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।​

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मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

कांग्रेस का कहना है कि ई20 फ्यूल बिना उचित परीक्षण के करोड़ों नागरिकों पर थोपा गया प्रयोग है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और फिर सरकार का पक्ष आया कि यह पॉलिसी पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से जांची-परखी और नैशनल एनर्जी सिक्यॉरिटी के लिए काफी अहम है। सरकार के अनुसार इस फ्यूल पॉलिसी से भारत ने 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है और गन्ना किसानों को बड़ी आर्थिक मदद मिली है।

धीरेन्द्र शास्त्री चोर है! बागेश्वर बाबा पर क्यों भड़के भाजपा के पूर्व सांसद विनय कटियार?

Vinay Katiyar on Dhirendra Shastri

Vinay Katiyar on Dhirendra Shastri: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले में बजरंग दल के संस्थापक और भाजपा के पूर्व सांसद विनय कटियार इन दिनों काफी सुर्खियों में बने हुए हैं। अयोध्या कांड को लेकर वे काफी मुखर हैं। इस बीच, उन्होंने बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेन्द्र शास्त्री को लेकर बेहद तीखा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि धीरेन्द्र शास्त्री चोर है। 

 

दरअसल, सोशल मीडिया पर आईएएनएस का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में धीरेन्द्र शास्त्री के उस बयान का हवाला दिया कि उन्होंने अयोध्या चढ़ावे कांड कहा है कि अगर हम पर्ची खोलेंगे तो कई नाम बेनकाब हो जाएंगे। इतना सुनते ही ‍कटियार बुरी तरह भड़क गए। उन्होंने धीरेन्द्र शास्त्री… हमारी बात कराओ, फिर हम बताएं। काहे धीरेन्द्र शास्त्री को लाए बीच में चोर को… हमारे साथ चलो दिल्ली तक हम बताएंगे धीरेन्द्र शास्त्री कौन है?

…और क्या कहा विनय कटियार

दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कटियार ने कहा कि मंदिर में भारी गबन हुआ है, जिससे श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है। उन्होंने दावा किया कि इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बेहद गंभीर हैं और उन्होंने आधी रात को फोन कर उनसे स्थिति की जानकारी ली।

 

कटियार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, अनिल मिश्रा और विनोद राव को इस गबन के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने चेतावनी दी कि एसआईटी (SIT) जांच के बाद चंपत राय समेत इन तीनों को जेल जाना पड़ सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी इस घटना को 'चोरी नहीं बल्कि डाका' करार दिया था। फिलहाल पूरे मामले की एसआईटी जांच जारी है और जल्द ही किसी बड़े एक्शन की संभावना जताई जा रही है।

क्या कहा था धीरेन्द्र शास्त्री ने? 

इंडोनेशिया के जकार्ता में धीरेंद्र शास्त्री ने साफ तौर पर कहा कि अयोध्या के इस महाघोटाले के पीछे बेहद रसूखदार और बड़े 'मगरमच्छों' का हाथ है। बाबा ने यहां तक कह दिया कि अगर उन्होंने अपने दरबार में इस चोरी को लेकर पर्ची खोल दी और चोरों के नाम उजागर कर दिए, तो वे ताकतवर लोग उन्हें (धीरेंद्र शास्त्री को) निपटा देंगे। उन्होंने कहा- अभी तो छोटी मछलियां ही पकड़ी गई हैं, मगरमच्छ भी पकड़े जाएंगे। भगवान राम के चरणों में आया दान सीधे सनातनियों की भावना से जुड़ा है और इसमें एक रुपए की भी हेराफेरी महापाप है।

गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतरे यूपी का आम : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath inaugurated the Mango Festival 2026

– मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में किया आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ, स्टॉल्स का अवलोकन किया और आम की 800 प्रजातियों के बारे में जानकारी ली

– मुख्यमंत्री ने की काकोरी ब्रांड की चर्चा, कहा- इसमें देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास

– उद्यान विभाग को आम की अधिक से अधिक किस्मों को जीआई टैग दिलाने के लिए आवेदन करने का निर्देश

– आम की फसल से काफी मुनाफा कमा रहे किसान, देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेश

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शुक्रवार को आम महोत्सव-2026 का शुभारंभ किया। उन्होंने स्टॉल्स का अवलोकन कर आम की 800 से अधिक प्रजातियों के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी तैयारी इस तरह होनी चाहिए कि यूपी के किसानों का आम गुणवत्ता, विश्वास व वैश्विक मानकों पर खरा उतर सके। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित न रहे, बल्कि ब्रांडिंग, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग के साथ ही प्रोडक्ट की ट्रेसेबिलिटी व ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन पर भी ध्यान देना होगा। तभी यह एक्सपोर्ट के लिए स्वीकार्य होगा। एक बाग आय के कई मॉडल के रूप में फल उत्पादन, प्रोसेसिंग, टूरिज्म, ऑर्गेनिक उत्पाद, मधुमक्खी पालन, खाद्य उद्योग और एक्सपोर्ट के जरिए किसानों की आमदनी बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। 

 

माटी की खुशबू व मिठास से आकर्षित कर रहा आम 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार के स्तर पर प्लेटफॉर्म मिलता है, शोकेसिंग का अवसर प्राप्त होता है तो यूपी के आम की प्रजातियों का पता चलता है। यहां प्रदेश व देश के अलग-अलग राज्यों से आम की 800 वैरायटी प्रदर्शित हो रही हैं। वाराणसी-गोरखपुर का लंगड़ा, गोरखपुर का गौरजीत, बस्ती का आम्रपाली, मलिहाबाद लखनऊ का दशहरी, बागपत व सहारनपुर के रटौल समेत प्रदेश के अलग-अलग जनपदों व मंडलों में पैदा होने वाली आम की किस्में वहां की माटी की सुगंध व मिठास के जरिए इस महोत्सव में आए हर व्यक्ति को आकर्षित कर रही है और यही यूपी की ताकत है। 

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प्लेटफार्म पर साझा हों किसानों के अनुभव

मुख्यमंत्री ने मंच पर सम्मानित होने वाले किसानों से उत्पादन के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि एक दिन औद्यानिक फसल से जुड़े किसान से बातचीत हो रही थी। वह प्राकृतिक तरीके से बाग में कीड़ों को नष्ट करने के तरीके बता रहे थे।

उनका कहना था कि वह खुद तो इसका उपयोग करते हैं, लेकिन उनके अनुभव को प्लेटफॉर्म न मिलने से अन्य किसानों को व्यापक लाभ नहीं मिल पाता। इसे देखते हुए किसानों को उनके अनुभव साझा करने के लिए अधिक से अधिक प्लेटफॉर्म दिलाने के प्रयास में तेजी लाई जाएगी। 

 

आम की फसल से अच्छा मुनाफा कमा रहे किसान

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान सामान्यत: एक एकड़ में आम की फसल से दो से तीन लाख रुपये मुनाफा कमा रहे हैं। इसमें वैल्यू एडिशन, प्रोसेसिंग जोड़ेंगे, एक्सपोर्ट के लिए तैयार करेंगे मुनाफा और बढ़ जाता है। आम महोत्सव उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के किसानों के लिए भी शोकेसिंग का आधार है। वे अपने उत्पाद प्रस्तुत कर बायर्स-सेलर मीट के माध्यम से इसे वैश्विक पहचान दिला सकते हैं। मलिहाबाद के आम को जीआई टैग प्राप्त होने से उसे वैश्विक पहचान मिली है। 

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प्रदेश के हर हिस्से में पैदा होता है आम

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से यह आयोजन अनवरत हो रहा है। पहले वर्ष महोत्सव में कम वैरायटी आई, लेकिन साल दर साल यह बढ़ता गया। इस साल आम की 800 वैरायटी आईं हैं। इसके साथ ड्रैगन फ्रूट व कमल की ब्रांडिंग भी देखने को मिली। यूपी के सभी 18 मंडलों, 75 जनपदों, 350 तहसीलों और 825 विकास खंडों में आम पैदा होता है। यहां 100 ग्राम से लेकर डेढ़-दो किलो तक वजन वाले आम दिखे। वैरायटी व स्वाद, अन्नदाता किसान व प्रदेश की ताकत को बढ़ाता है। 

Chief Minister Yogi Adityanath inaugurated the Mango Festival 2026

देश में 26 फीसदी आम का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेश

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के कुल आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश 26 फीसदी हिस्सेदारी करता है। महोत्सव में 7 श्रेणियों के 56 वर्गों में 800 से अधिक वैरायटी हैं। मुख्यमंत्री ने आम महोत्सव में बायर्स-सेलर्स मीट की सराहना की। कहा कि यूपी में हम लोग ओडीओपी से जुड़े आयोजन करते हैं तो बायर्स-सेलर्स मीट अवश्य रखते हैं। इससे किसानों व उद्यमियों को अपने उत्पाद आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।

औद्यानिक फसलों से जुड़े किसान, स्वयं सहायता समूह, पैक हाउस, एक्सपोर्ट, फूड प्रोसेसिंग, नर्सरी मालिक, बैंकर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने वाला मैकेनिज्म, मशीनरी व उपकरण आपूर्तिकर्ता, रिसर्च व डवलपमेंट से जुड़े वैज्ञानिक भी इस कार्यक्रम से जुड़े हैं। उद्यान विभाग ने यूपी में औद्यानिक फसलों के लिए ईकोसिस्टम बनाने का कार्य किया है।

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वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं ऐसे महोत्सव

मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया बदल रही है। तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में यूपी में ग्रामीण अर्थव्यवस्था, खाद्य प्रसंस्करण, महिला सशक्तीकरण, कृषि आधारित उद्योगों, पर्यटन, रोजगार व निर्यात संवर्धन की दृष्टि से यह बेहतरीन प्लेटफॉर्म है। ऐसे महोत्सव प्रधानमंत्री जी के वोकल फॉर लोकल को प्रोत्साहित करते हैं और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्रस्तुत करते हैं। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा आगे बढ़ने को प्रेरित करती है।

 

कई देशों में होता है यूपी के आम का निर्यात 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी ने खुद को भारत की बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। यूपी के आम का निर्यात यूके, यूएई, कुवैत, मलेशिया, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, रूस, कतर आदि देशों में हो रहा है। एपीडा जैसी एजेंसियां विदेशों में खरीदार व एफपीओ के बीच सीधा संपर्क स्थापित करती हैं। 

 

काकोरी ब्रांड में दिखता है देश के प्रति समर्पण 

मुख्यमंत्री ने मलिहाबादी आम की चर्चा करते हुए कहा कि हमने इसे ‘काकोरी ब्रांड’ दिया है। काकोरी के अमर शहीदों ने देश की आजादी के लिए खुद का बलिदान दिया। उनकी स्मृति को जीवंत बनाए रखने के लिए हमने इसे यह नाम दिया। काकोरी ब्रांड में देश के प्रति समर्पण का भाव और किसानों की मेहनत की मिठास है। 

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जेवर एयरपोर्ट के पास बनेगा इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि सहारनपुर, वाराणसी, लखनऊ, अमरोहा में आम के आधुनिक पैक हाउस काम कर रहे हैं। इसके माध्यम से आम की ग्रेडिंग, शॉर्टिंग, पैकिंग कर निर्यात करने की व्यवस्था है। हम नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर के पास इंटीग्रेटेड टेस्टिंग एंड ट्रीटमेंट पार्क का निर्माण करने जा रहे हैं, जिससे स्थानीय उत्पाद को आसानी से विदेशों में भेज सकें। आम के उत्पादन व गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए फ्रूट कवर बैग तकनीक का भी प्रयोग कर रहे हैं। विभाग ने आम किसानों को डेढ़ करोड़ से अधिक बैग उपलब्ध कराए हैं। 

 

यूपी को बनाएंगे विश्व के सर्वश्रेष्ठ मैंगो वैल्यू चेन का केंद्र 

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को विश्व के सर्वश्रेष्ठ मैंगो वैल्यू चेन का केंद्र बनाने के लिए सामूहिक प्रयास हों। रिसर्च, आम की नई पौध के उत्पादन की तकनीक, ड्रोन व एआई बेस्ड फॉर्मिंग को बढ़ाने पर काम करने, क्वालिटी टेस्टिंग, फूड प्रोसेसिंग, कोल्ड चेन, ब्रांडिंग, ई-कॉमर्स व ग्लोबल एक्सपोर्ट की पूरी व्यवस्था को इंटीग्रेट करने के लिए प्रयास करना होगा।

 

जीआई टैग के लिए आवेदन करे उद्यान विभाग

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी के आम की अधिक से अधिक वैरायटी को जीआई टैग मिले, इसके लिए उद्यान विभाग अभी से आवेदन करे। मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि खाद्यान्न, सब्जी, फल आदि यूपी के उत्पाद केमिकल फर्टिलाइजर व पेस्टिसाइड से मुक्त हों। बीज से बाजार तक यह सावधानी बरती जाए। दुनिया आज ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग कर रही है। हमें ऑर्गेनिक व ट्रेसेबल उत्पाद को पहुंचाने के लिए अभी से तैयारी करते हुए प्रशिक्षण देना होगा। 

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मैंगो टूरिज्म की नई पहचान पर जोर 

मुख्यमंत्री ने ओडीओसी की चर्चा कर आम के व्यंजनों पर जोर दिया। कहा कि पहले जुलाई में स्कूल, घऱ, गांवों आदि में आम की दावत होती थी। मुख्यमंत्री ने मैंगो टूरिज्म को नई पहचान दिलाने पर जोर दिया। कहा कि किसानों को एग्री इंटरप्रेन्योर्स बनाने की दिशा में बढ़ाना होगा। इसके लिए वैल्यू क्रिएशन, इनोवेशन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करना होगा। एआई ड्रोन, सेटेलाइट मैपिंग, प्रिसीजन फॉर्मिंग, सेंसर आधारित सिंचाई और डिजिटल मंडियों के माध्यम से स्मार्ट हॉर्टिकल्चर की तरफ अग्रसर होने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। 

 

उपज का उचित मूल्य मिलेगा तो युवा भी होंगे आकर्षित 

मुख्यमंत्री ने प्रत्येक जनपद में पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड चेन, रैपनिंग सेंटर, पैक हाउस, फूड प्रोसेसिंग यूनिट और एक्सपोर्ट सुविधा को विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके लिए उद्यान विभाग के साथ ही पीपीपी मोड पर भी काम करना होगा।

उपज का उचित मूल्य मिलेगा तो युवा भी कृषि व उद्यमिता की ओर आकर्षित होंगे। स्वयं सहायता समूह मूल्य संवर्धन का नेतृत्व करेंगे और जब हमारे उत्पाद विश्व के प्रमुख बाजारों तक पहुंचेंगे तो पीएम मोदी के विजन ‘विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत’ की संकल्पना को साकार करने में मदद मिलेगी। 

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इस अवसर पर कृषि मंत्री सूर्यप्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख, चिल्लूपार के विधायक राजेश त्रिपाठी, कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार, अपर मुख्य सचिव (उद्यान/खाद्य प्रसंस्करण) बीएल मीणा आदि मौजूद रहे। अतिथियों का स्वागत उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने किया।

60 दिनों में खाते में आएगा पैसा, EV खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत, दिल्ली के परिवहन मंत्री ने बताई योजना

delhi ev policy

दिल्ली की नई ईवी पॉलिसी को और अधिक प्रभावी एवं जनसुलभ बनाने की दिशा में EV Subsidy Portal का शुभारंभ किया गया। इस डिजिटल पोर्टल के माध्यम से अब दिल्लीवासी घर बैठे ईवी सब्सिडी एवं अन्य प्रोत्साहनों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे, अपने आवेदन की रियल-टाइम स्थिति देख सकेंगे तथा सत्यापन पूर्ण होने के उपरांत अधिकतम 60 दिनों के भीतर डीबीटी (DBT) के माध्यम से प्रोत्साहन राशि सीधे अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने, नागरिकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाने तथा स्वच्छ, हरित और प्रदूषण-मुक्त दिल्ली के संकल्प को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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परिवहन मंत्री ने कहा कि 30 दिन की अवधि पूरी तरह से निर्धारित है। सके भीतर उपभोक्ताओं को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना होगा और संबंधित पोर्टल पर उसकी जानकारी अपलोड करनी होगी। इसके बाद सरकार की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।

मंत्री के अनुसार, आवेदन और सत्यापन के बाद उपभोक्ताओं के बैंक खाते में 60 दिनों के भीतर राशि ट्रांसफर कर दी जाएगी। सरकार ने इस पूरी प्रणाली के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सब्सिडी से जुड़े सभी प्रावधान पहले ही तैयार कर लिए हैं।

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उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य है कि लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने में किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। इसके लिए न केवल तकनीकी व्यवस्था मजबूत की गई है, बल्कि सब्सिडी वितरण प्रणाली को भी पारदर्शी और तेज बनाया गया है। सरकार का दावा है कि वह लगातार इस योजना पर काम कर रही है ताकि दिल्ली में ई-मोबिलिटी को बढ़ावा दिया जा सके और प्रदूषण को कम किया जा सके।

राम मंदिर चढ़ावा चोरों की दिग्विजय के घर में एंट्री बैन, भोपाल बंगले के बाहर लगाया पोस्टर, अयोध्या जाकर दर्ज कराएंगे केस

भोपाल। अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड को लेकर छिड़े सियासी घमासान के बीच मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का भोपाल स्थित अपने निवास पर एक पोस्टर लगाना चर्चा के केंद्र में आ गया है। दिग्विजय सिंह ने पोस्टर के जरिए चंदा चोरों के अपने घर में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। दिग्विजय सिंह की ओर से लगाए गए पोस्टर में लिखा है कि “हमारी आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए समूचे देश के द्वारा दिए गए  चंदा के चोरों एवं चढ़ावा चोरों का मेरे निवास पर प्रवेश निषेध है”।

 

इसके साथ ही दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपए का चंदा दिया था और अब चंदा गड़बड़ी के मामले में अयोध्या की अदालत में मुकदमा दायर करेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनके पास चंदा जमा करने की रसीद और चेक की प्रति आज भी सुरक्षित है। वह 5 या 6 जुलाई को अपने अधिवक्ता से चर्चा करने के बाद अयोध्या जाकर कोर्ट में मुकदमा दायर करेंगे।

 

इसके साथ दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह  2 अक्टूबर से उज्जैन महाकाल मंदिर से अयोध्या राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र तक पदयात्रा करेंगे। उनकी यह पदयात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी। उन्होने कहा कि वह अयोध्या जाकर चंदे का हिसाब मांगेंगे। इसके लिए वह चंदे की रसीद चेक की कॉपी लेकर चलेंगे। जिन लोगों ने चंदा दिया था उन सभी को अपनी पदयात्रा में आमंत्रित करेंगे। 

 

दिग्विजय सिंह ने राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की भूमिका पर सवाल उठाए है। उन्होंने कहा कि धार्मिक चंदे और गुरुदक्षिणा के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि पूरे मामले में चंपत राय और अनिल मिश्रा को बचाया जा रहा है। 

E20 पेट्रोल और एथेनॉल मिश्रण पर फिर छिड़ी बहस, मनीष कश्यप का वीडियो क्यों हो रहा है वायरल

सोशल मीडिया पर पूर्व भाजपा नेता मनीष कश्यप से जुड़ा एक वीडियो और दावा तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें उन्होंने भारत में लागू किए जा रहे E20 एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। इस वायरल बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि देश के पेट्रोल पंपों पर मिलावट की संभावना बढ़ सकती है, और उपभोक्ताओं को 'शुद्ध पेट्रोल' और 'एथेनॉल पेट्रोल' अलग-अलग विकल्प के रूप में देने की मांग उठाई गई है।

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फिलहाल सरकार की ओर से पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण को आयात निर्भरता कम करने और पर्यावरण सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जाता रहा है। वायरल दावे के अनुसार उन्होंने लगभग 40 लाख रुपए की एक टोयोटा कार खरीदी। इस पर 18 लाख रुपए तक टैक्स चुकाने का दावा किया गया। इसके बाद 20,000 किलोमीटर चलने पर वाहन में खराबी आने की बात कही गई और इसे ईंधन में अधिक एथेनॉल मिश्रण से जोड़ दिया गया। 

इस वीडियो पर लोगों ने कई कमेंट्‍स भी किए हैं। हालांकि, ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्‍स और सरकारी नीतियों के अनुसार यह दावा एकतरफा और तकनीकी रूप से प्रमाणित नहीं माना जाता, क्योंकि आधुनिक E20-फ्यूल कम्पैटिबल वाहनों को इसी ईंधन के अनुसार डिजाइन किया जाता है।