जम्मू कश्मीर में ‘किताब जेहाद’ के आरोप में 8 सस्पेंड, सरकारी स्कूलों की लाइब्रेरी से हटाई विवादित किताब, लेखक व प्रकाशक हुए ब्लैकलिस्ट

Controversial book case in Jammu and Kashmir

Controversial book case : सरकार ने सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में उपलब्ध एक विवादित पुस्तक को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के आदेश दिए हैं। साथ ही, पुस्तक के अनुमोदन, खरीद और वितरण से जुड़े सभी जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जम्मू कश्मीर सरकार ने सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में कथित अलगाववादी सामग्री वाली विवादित किताब के मामले में सख्त कदम उठाया है। इन पुस्तकों की मंजूरी और खरीद से जुड़े स्कूल शिक्षा विभाग के 8 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही संबंधित लेखकों और प्रकाशकों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है तथा उनके सभी प्रकाशनों को केंद्र शासित प्रदेश के स्कूलों और पुस्तकालयों से हटाने का निर्णय लिया गया है।
 

दरअसल जम्मू कश्मीर के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई जा रही एक किताब को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। आरोप है कि समग्र शिक्षा के तहत छात्रों को उपलब्ध कराई गई इस किताब में आतंकी मकबूल भट्ट को ‘शहीद’ और कुछ अलगाववादी नेताओं को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ बताया गया है।

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मामला सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। जम्मू कश्मीर पीपुल्स फोरम ने सबसे पहले इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाया कि किताब में इतिहास को तथ्यों के विपरीत प्रस्तुत किया गया है। इस मामले में जम्मू कश्मीर सरकार ने शिक्षा विभाग के आठ अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
 

विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई जाने वाली किताबें तथ्यात्मक, निष्पक्ष और राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना के अनुरूप होनी चाहिए। फिलहाल इस मामले पर सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। वहीं विवादित को लेकर जम्मू कश्मीर में राजनीतिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।
 

संगठन ने विवादित सामग्री को तत्काल सिलेबस से हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस मुद्दे पर जम्मू कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी भी किताब को सरकारी स्कूलों के सिलेबस में शामिल करने से पहले एक निर्धारित प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में अगर यह पुस्तक छात्रों को पढ़ाई जा रही है तो इसे केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता।

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सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि यह सरकार की मंशा को दर्शाता है। उनके अनुसार, अगर विवादित सामग्री वाली किताब को मंजूरी देकर स्कूलों तक पहुंचाया गया है तो इससे यह संदेश जाता है कि सरकार अलगाववादी नेताओं और आतंकवाद से जुड़े व्यक्तियों का महिमामंडन करने वाली सामग्री को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

कहां गई 5 करोड़ की ‘सोने की रामचरितमानस’? ‘महाग्रंथ’ गायब होने पर अयोध्या में बवाल, केजरीवाल ने कहा- महापाप अयोध्या

missing gold Ramcharitmanas

missing gold Ramcharitmanas: अयोध्या का श्रीराम जन्मभूमि मंदिर इन दिनों चढ़ावे चोरी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। लेकिन, अब इस विवाद में एक ऐसा नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है, जिसने सियासत से लेकर आस्था के गलियारों तक हड़कंप मचा दिया है। दावा किया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय गृह सचिव द्वारा मंदिर में पूरी श्रद्धा के साथ भेंट की गई 5 करोड़ रुपए की सोने की रामचरितमानस भी कहीं गायब हो गई है। इस खुलासे के बाद दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी तीखा हमला बोलते हुए इसे 'महापाप' करार दिया है।

 

चढ़ावे और आभूषणों की हेराफेरी की लिस्ट दिन-ब-दिन लंबी होती जा रही है। ताजा विवाद पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण द्वारा भेंट किए गए उस बहुमूल्य महाग्रंथ को लेकर है, जिसकी चमक से कभी पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा था। अब आरोप लग रहे हैं कि करोड़ों रुपए की यह 'गोल्ड-प्लेटेड' रामचरितमानस मंदिर से नदारद है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर घोटाला, करोड़ों की चोरी से लेकर इस्तीफों और गिरफ्तारियों तक की पूरी टाइमलाइन

केजरीवाल का 'एक्स' पर तीखा वार

इस मुद्दे ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुद्दे को उठाते हुए सीधे निशाना साधा है। केजरीवाल ने लिखा कि पूर्व गृह सचिव द्वारा पूरी श्रद्धा से चढ़ाई गई एक किलो सोने की रामचरितमानस भी गायब है। चंदा चोरों ने महापाप किया है।

रसीद मिली न ठौर-ठिकाना

पूर्व केंद्रीय गृह सचिव का दावा है कि उन्होंने करोड़ों रुपए की इस बेशकीमती रामचरितमानस को राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपा था। हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी भेंट के बावजूद उन्हें ट्रस्ट की तरफ से कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई। उनका कहना है कि आज तक उन्हें यह भी नहीं बताया गया कि आस्था का यह अनमोल प्रतीक आखिर किस लॉकर या स्थान पर सुरक्षित रखा गया है।

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कैसी थी यह 5 करोड़ की 'सोने की रामचरितमानस'?

यह कोई साधारण ग्रंथ नहीं, बल्कि कला और आस्था का एक अद्भुत चमत्कार था। पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एस. लक्ष्मी नारायण ने इसे पिछले साल 10 अप्रैल 2024 को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ट्रस्ट को सौंपा था। इस अनोखे ग्रंथ का कुल वजन करीब 147 किलो था, जिसे तैयार करने में 24 कैरेट सोने, चांदी और तांबे का इस्तेमाल किया गया था। इसमें करीब 1 किलो शुद्ध सोना लगा था। ALSO READ: चढ़ावा चोरी के आरोपियों को झटका, अयोध्या का कोई वकील नहीं करेगा पैरवी

 

इसके 522 गोल्ड-प्लेटेड पन्नों पर विशेष तकनीक से रामचरितमानस के 10,902 दोहे, चौपाइयां और श्लोक उकेरे गए थे। इसकी अनुमानित कीमत 5 करोड़ रुपए है और इसे बनाने में कारीगरों को पूरे 8 महीने का वक्त लगा था।

क्या सबूत मिटाने के लिए पिघलाए गए गहने?

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और सोने-चांदी के आभूषणों में गड़बड़ी की गूंज पहले ही शासन तक पहुंच चुकी है। इस पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसकी जांच की समय-सीमा को भी बढ़ा दिया गया है। जांच एजेंसियां इस खौफनाक पहलू पर भी काम कर रही हैं कि कहीं चोरी किए गए सोने-चांदी के आभूषणों की पहचान छिपाने के लिए उन्हें पिघला तो नहीं दिया गया?

 

इस बीच, 5 करोड़ की रामचरितमानस के गायब होने के दावे ने आग में घी का काम किया है। हालांकि, इस पूरे बवाल और गंभीर आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक या स्पष्ट सफाई सामने नहीं आई है। भक्त और जनता अब केवल एक ही सवाल पूछ रहे हैं— 'आखिर कहां गई रामलला की सोने की रामचरितमानस'

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

एकनाथ शिंदे की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में कराया भर्ती, स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर क्‍या बोले डॉक्टर?

Eknath Shinde's health deteriorates, admitted to hospital

Eknath Shinde Health News : महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। उन्हें ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्पेशल डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। फिलहाल उनकी हालत पूरी तरह स्थिर है और इलाज जारी है। दरअसल शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र चल रहा था, तभी एकनाथ शिंदे को तेज बुखार और काफी कमजोरी महसूस हुई। इसके बावजूद उन्होंने शुरुआत में अपना काम जारी रखा, लेकिन बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें तुरंत ठाणे के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

 

स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर क्‍या बोले डॉक्टर?

महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की तबीयत अचानक बिगड़ गई है। उन्हें ठाणे के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्पेशल डॉक्टरों की टीम उनकी निगरानी कर रही है। फिलहाल उनकी हालत पूरी तरह स्थिर है और इलाज जारी है।

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दरअसल शुक्रवार को महाराष्ट्र विधानसभा का सत्र चल रहा था, तभी एकनाथ शिंदे को तेज बुखार और काफी कमजोरी महसूस हुई। इसके बावजूद उन्होंने शुरुआत में अपना काम जारी रखा, लेकिन बाद में तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर उन्हें तुरंत ठाणे के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

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स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर क्‍या बोली शिवसेना?

पिछले कुछ दिनों से लगातार व्यस्त राजनीतिक कार्यक्रमों, अत्यधिक शारीरिक मेहनत और काम के भारी दबाव के कारण उनकी सेहत पर असर पड़ा। राजनीतिक काम के दौरान उन्‍हें कई बार नई दिल्ली की यात्राएं भी करनी पड़ीं। हालांकि पार्टी सूत्रों ने साफ किया कि एकनाथ शिंदे इलाज और डॉक्टरों की निगरानी के लिए अस्पताल में हैं, लेकिन उनकी सेहत को लेकर किसी गंभीर चिंता की बात नहीं है।

वीर भारत न्यास जमीन विवाद मामले में बढ़ी जीतू पटवारी की मुश्किलें, श्रीराम तिवारी ने भेजा 5 करोड़ का मानहानि नोटिस

भोपाल। उज्जैन की कथित 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अब मामला अदालत की चौखट तक पहुंचने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार एवं वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता ने जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि का नोटिस भेजा गया है। 

 

भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश मेहता ने कहा कि दिल्ली में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान जीतू पटवारी ने सरकारी भूमि को श्रीराम तिवारी से जुड़े एक निजी ट्रस्ट को कौड़ियों के दाम पर सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि यह आरोप पूरी तरह असत्य, भ्रामक और तथ्यों से परे हैं। मेहता ने स्पष्ट किया कि वीर भारत न्यास को निजी ट्रस्ट बताना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि वीर भारत न्यास राज्य सरकार द्वारा गठित एक सरकारी संस्था है, जिसका संचालन शासन के निर्धारित नियमों और वैधानिक प्रावधानों के तहत होता है। ऐसे में इसे निजी संस्था बताकर जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया। 

वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा कि बिना किसी ठोस तथ्य के लगाए गए आरोपों से मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार एवं न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की व्यक्तिगत, सामाजिक और सार्वजनिक प्रतिष्ठा को गंभीर क्षति पहुंची है। इसी कारण उनकी ओर से जीतू पटवारी को 5 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा गया है।

 

मेहता ने बताया कि नोटिस में जीतू पटवारी से सार्वजनिक रूप से अपने आरोप वापस लेने, माफी मांगने अथवा लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यदि निर्धारित समय सीमा में ऐसा नहीं किया जाता, तो श्रीराम तिवारी की ओर से सक्षम न्यायालय में मानहानि का दावा सहित अन्य आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अधिवक्ता गुंजन चौकसे भी मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में आरोप लगाने की स्वतंत्रता है, लेकिन तथ्यों के बिना किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है और ऐसे मामलों में कानून अपना काम करेगा। उन्होंने कहा कि उन्ही के पार्टी के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह भी जीतू पटवारी के आरोपों का खंडन कर चुके है। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2013 में मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग ने वीर भारत न्यास की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि यह न्यास किसी निजी संस्था के रूप में नहीं बनाया गया था, बल्कि इसे सरकार ने सार्वजनिक उद्देश्य के लिए स्थापित किया था।

क्या था पटवारी का आरोप?-दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि उज्जैन स्थित लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन न्यास के सचिव और मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी से जुड़े एक ट्रस्ट को बेहद कम कीमत पर आवंटित की गई। वीर भारत न्यास के सचिव श्रीराम तिवारी की और से  इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें निराधार बताया है और अब कानूनी कार्रवाई का रास्ता अपनाया है।

योगी सरकार की मुफ्त आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना बनी युवाओं की उम्मीद

Yogi Govt Free IAS Coaching : उत्तर प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के गरीब व मेधावी युवाओं के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में संचालित निःशुल्क आईएएस-पीसीएस आवासीय कोचिंग योजना बड़ी राहत बनकर सामने आई है। समाज कल्याण विभाग की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पूरी तरह निशुल्क कराई जाएगी। 

10,175 अभ्यर्थी देंगे प्रवेश परीक्षा

5 जुलाई 2026 को प्रदेश के सभी मंडलों में प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में कुल 10,175 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। परीक्षा के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों को प्रदेश के विभिन्न आवासीय कोचिंग सेंटरों में प्रवेश दिया जाएगा। नियमित कक्षाएं 1 अगस्त 2026 से प्रारंभ होंगी, जबकि यह शैक्षणिक सत्र 31 मई 2027 तक संचालित किया जाएगा।

सात आवासीय कोचिंग सेंटरों में मिलेगी मुफ्त सुविधा

प्रदेश के सात आवासीय कोचिंग सेंटरों में कुल 865 चयनित छात्र-छात्राओं को निशुल्क आवासीय सुविधा के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जाएगी। इनमें से 25 प्रतिशत सीटें ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए आरक्षित हैं जो लेटरल एंट्री के माध्यम से प्री परीक्षा क्वालीफाई कर चुके हैं। चयनित अभ्यर्थियों को रहने, खाने, पुस्तकें, स्टडी मटेरियल और अनुभवी शिक्षकों द्वारा मार्गदर्शन जैसी सभी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का उद्देश्य है कि प्रतिभाशाली छात्र आर्थिक अभाव के कारण अपने सपनों से समझौता न करें।

गरीब और होनहार युवाओं को मिलेगा आगे बढ़ने का अवसर

यह योजना केवल कोचिंग कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने का बड़ा प्रयास है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि आर्थिक तंगी किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के भविष्य में बाधा न बने। इसी उद्देश्य से सरकार गरीब और होनहार युवाओं को निशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध करा रही है, ताकि वे यूपीएससी और यूपीपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में सफलता हासिल कर सकें।

प्रशासनिक सेवाओं में बढ़ रही वंचित वर्ग की भागीदारी

वर्तमान समय में निजी कोचिंग संस्थानों में आईएएस-पीसीएस की तैयारी पर लाखों रुपये खर्च होते हैं, जो गरीब परिवारों के लिए मुश्किल होता है। ऐसे में योगी सरकार की यह योजना एसी, एसटी और ओबीसी वर्ग के युवाओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है।गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और उचित मार्गदर्शन मिलने से वंचित वर्ग के युवा प्रशासनिक सेवाओं में अपनी मजबूत भागीदारी दर्ज कराएंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

गुजरात में बादलों का तांडव, हाईवे जाम, वाहनों की लंबी कतारें, कई जगह रास्ते ही बह गए

Gujarat heavy rain: गुजरात में मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से सुबह से ही सभी जगह बारिश का दौर शुरू हो गया है। सुबह 6 से 10 बजे के बीच 48 तालुकों में भारी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने आने वाले समय में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी करते हुए राज्य के 6 जिलों में रेड अलर्ट, 8 जिलों में ऑरेंज अलर्ट और अन्य 6 जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया है। बाकी के क्षेत्रों में भी हल्की से मध्यम बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।

दक्षिण गुजरात और सौराष्ट्र में सबसे ज्यादा बारिश

राज्य में अब तक सीजन की औसत 13.27 प्रतिशत बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिसमें पिछले 24 घंटों के भीतर ही भारी असाधारण स्थिति देखने को मिली है। इस समयावधि के दौरान 14 तालुकों में 5 से 10 इंच जितनी भारी बारिश दर्ज हुई है। क्षेत्रवार बात करें तो दक्षिण गुजरात में सीजन की सबसे अधिक 17.11 प्रतिशत और सौराष्ट्र में 15.38 प्रतिशत बारिश हो चुकी है, जबकि जूनागढ़ के मांगरोल तालुका में तो महज तीन ही दिनों में सीजन की 103 प्रतिशत बारिश हो जाने से वहां मानसून का औसत कोटा पूरा हो गया है।

सूरत और दक्षिण गुजरात के रास्तों को भारी नुकसान

भारी बारिश के चलते सूरत जिले के ग्रामीण इलाकों में व्यापक नुकसान की खबरें मिल रही हैं। अरेख के बौधान गांव में वाव्या खाड़ी पर पुल निर्माण के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्जन पानी के तेज बहाव में बह गया है। इस मुख्य मार्ग के क्षतिग्रस्त होने के कारण बारडोली, अरेख और मांडवी के बीच का सीधा संपर्क टूट गया है और स्थानीय लोगों को अब बारडोली जाने के लिए करीब 25 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।

हाईवे बंद और समंदर उफान पर, वाहनों की लंबी कतारें

सौराष्ट्र में भी इंद्रदेव ने रौद्र रूप धारण कर लिया है, जिसके कारण द्वारका-सोमनाथ हाईवे भारी बारिश में बह जाने से यातायात के लिए बंद करना पड़ा है। मांगरोल के पास नोली नदी का पुल और हुसैनाबाद के पास सड़क धंसने से कई वाहन चालक बीच रास्ते में ही फंस गए हैं। दूसरी ओर, अमरेली के जाफराबाद में समंदर में 15 फीट ऊंची लहरें उछल रही हैं, जिसके कारण बंदरगाह पर 3 नंबर का सिग्नल लगा दिया गया है और मछुआरों को 7 जुलाई तक समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है।

तापी नदी में बाढ़ और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत नजारा

भारी बारिश के बाद तापी नदी में पानी की भारी आवक होने से तापी का कॉज-वे ओवरफ्लो हो गया है और पानी का स्तर खतरे के निशान 6 मीटर को पार करके 6.82 मीटर तक पहुंच गया है। इस संकट के बीच जिले का प्राकृतिक सौंदर्य भी पूरी तरह खिल उठा है। सोनगढ़ के चीमेर गांव में स्थित प्रसिद्ध 'चीमेर झरना' पहाड़ियों के बीच अपने पूरे शबाब पर है। इससे सूरत, तापी और डांग सहित आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं।

शिक्षकों और कर्मचारियों को मिलेगा सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा का मजबूत कवच

CM Yogi in Pilibhit

UP Teachers Benefit MOU: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा को नई मजबूती देने जा रही है। इसी क्रम में 8 जुलाई को वाराणसी में मुख्यमंत्री की उपस्थिति में बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर होंगे। इस पहल के माध्यम से विभाग के लगभग 10 लाख स्थायी एवं संविदा शिक्षक तथा कर्मचारी एसबीआई के विशेष सैलरी पैकेज के साथ व्यापक बीमा सुरक्षा और अन्य बैंकिंग सुविधाओं का लाभ प्राप्त कर सकेंगे।

 

प्रस्ताव के अनुसार एमओयू के दायरे में विभाग के लगभग 4.50 लाख स्थायी तथा 5.50 लाख संविदा कार्मिक शामिल होंगे। इनमें शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, समग्र शिक्षा के कार्मिक, मध्याह्न भोजन योजना से जुड़े कर्मचारी तथा विभाग के अन्य संबद्ध कार्मिक शामिल हैं। उद्देश्य सभी पात्र कार्मिकों को एकीकृत सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराना है।

 

यह समझौता शिक्षकों और कर्मचारियों को केवल बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें व्यापक सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करेगा। प्रदेश सरकार का उद्देश्य है कि बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े प्रत्येक पात्र कार्मिक को आधुनिक बैंकिंग सेवाओं के साथ मजबूत वित्तीय सुरक्षा मिले, जिससे उनका भविष्य अधिक सुरक्षित और सशक्त बन सके।

स्थायी कार्मिकों को मिलेगा व्यापक सुरक्षा पैकेज

एसबीआई के सैलरी पैकेज के अंतर्गत पात्र स्थायी कार्मिकों को ₹10 लाख का ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस, ₹1 करोड़ का पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस, ₹1 करोड़ का स्थायी दिव्यांगता बीमा कवर तथा ₹1.60 करोड़ तक का एयर एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर मिलेगा। इसके साथ ही किसी अनहोनी की स्थिति में कार्मिकों के बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए भी एड-ऑन कवर उपलब्ध कराया जाएगा।

संविदा कार्मिकों को भी मिलेगा विशेष सुरक्षा कवच

एमओयू के अंतर्गत ₹10 हजार से अधिक नेट मासिक वेतन पाने वाले संविदा कार्मिकों को ₹30 लाख तक का पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस कवर मिलेगा। स्थायी विकलांगता की स्थिति में ₹30 लाख तथा आंशिक विकलांगता की स्थिति में ₹15 लाख का इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाएगा। इसके अलावा एयर एक्सीडेंट की स्थिति में ₹30 लाख का इंश्योरेंस कवर भी मिलेगा। किसी अनहोनी की स्थिति में कार्मिकों के बच्चों की शिक्षा तथा पुत्रियों के विवाह के लिए भी एड-ऑन कवर उपलब्ध कराया जाएगा। ₹10 हजार से कम नेट मासिक वेतन पाने वाले कार्मिकों को जीरो बैलेंस खाते एवं रुपे डेबिट कार्ड के आधार पर ₹1 लाख का इंश्योरेंस कवर प्रदान किया जाएगा।

एसबीआई वेतन खाताधारकों को मिलेगा स्वतः लाभ

एमओयू लागू होने के बाद जिन कार्मिकों के वेतन खाते पहले से भारतीय स्टेट बैंक में हैं, उन्हें एसबीआई के सैलरी पैकेज में परिवर्तित किया जाएगा। जिन कार्मिकों के वेतन खाते भारतीय स्टेट बैंक में नहीं हैं, उन्हें एसबीआई में वेतन खाता खोलने के लिए प्रेरित किया जाएगा, ताकि वे भी एमओयू के अंतर्गत उपलब्ध सभी लाभों का लाभ प्राप्त कर सकें।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, लगा एक और तगड़ा झटका, TMC की प्रदेश अध्‍यक्ष ने दिया इस्‍तीफा

Trouble mounts for Mamata Banerjee, Chandrima Bhattacharya has resigned as Trinamool Congress President

Mamata Banerjee's troubles have mounted : तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आज उन्‍हें एक और तगड़ा झटका है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। उन्होंने न सिर्फ अध्यक्ष के पद से बल्कि पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी। इस इस्तीफे से ममता बनर्जी और भी अकेली पड़ गई हैं, क्‍योंकि फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास जैसे पुराने करीबी सहयोगी पहले ही अलग हो चुके थे। दरअसल एक दिन पहले ही ममता बनर्जी के पार्टी ऑफिस पर बागी गुट ने कब्जा कर लिया था।

 

तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आज उन्‍हें एक और तगड़ा झटका है। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने तृणमूल कांग्रेस के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। उन्होंने न सिर्फ अध्यक्ष के पद से बल्कि पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

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चंद्रिमा भट्टाचार्य ने ममता बनर्जी को लिखा पत्र

उन्होंने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को पत्र लिखकर अपने फैसले की जानकारी दी। इस इस्तीफे से ममता बनर्जी और भी अकेली पड़ गई हैं, क्‍योंकि फिरहाद हकीम और अरूप बिस्वास जैसे पुराने करीबी सहयोगी पहले ही अलग हो चुके थे। दरअसल एक दिन पहले ही ममता बनर्जी के पार्टी ऑफिस पर बागी गुट ने कब्जा कर लिया था।

 

ममता बनर्जी को लेकर क्‍या बोलीं चंद्रिमा भट्टाचार्य? 

विधायक दल के 2 टुकड़े होने के बाद 3 जून को ममता बनर्जी ने चंद्रिमा भट्टाचार्य को पश्चिम बंगाल टीएमसी का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था। वह ममता बनर्जी की करीबी नेताओं में शुमार थीं। अब उनके अचानक ऐसे सभी पदों से इस्तीफे को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। चंद्रिमा भट्टाचार्य ने अपने पत्र में ममता बनर्जी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए लिखा कि उनके मन में हमेशा उनके लिए सर्वोच्च सम्मान रहेगा और भविष्य में भी वह उनका सम्मान करती रहेंगी।

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यह विवाद भी हो सकता है इस्‍तीफे की वजह

चंद्रिमा भट्टाचार्य पूर्व की ममता बनर्जी सरकार में राज्यमंत्री के रूप में वित्त और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुकीं भट्टाचार्य पार्टी की महिला इकाई की प्रमुख नेताओं में भी शामिल रही हैं। ममता बनर्जी और चंद्रिमा भट्टाचार्य के बीच विवाद बागी गुट के पार्टी ऑफिस पर कब्जा के बाद शुरू हुआ। जब बागी विधायक पार्टी के ऑफ़िस पर कब्जा कर रहे थे, तब चंद्रिमा भी वहां मौजूद थीं। इस घटना के बाद ममता बनर्जी ने उनसे कहा कि उन्होंने टीएमसी भवन को बागियों के हवाले कर दिया।

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चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि मैं कौन होती हूं टीएमसी भवन सौंपने वाली? इस इस्तीफे के पीछे की मुख्य वजह उनके पुत्र सौरव बसु का हाल ही में ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले 'बागी' गुट में शामिल होना माना जा रहा है। इस्तीफे के बाद चंद्रिमा ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, लेकिन जिस तरह से उनके कार्यों और निष्ठा पर सवाल उठाए गए, उसके बाद उनका बने रहना मुश्किल था।

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क्‍या इस फैसले से आहत थीं चंद्रिमा भट्टाचार्य? 

तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 15 जून को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के सचिव अश्विनी मोहाल को एक गोपनीय पत्र लिखा था। पत्र में ममता ने लिखा था कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) की ओर से चुनाव आयोग के साथ किसी भी प्रकार के आधिकारिक संवाद, पत्राचार या सांगठनिक फैसलों के लिए केवल 2 नेता राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और संयुक्त सचिव डेरेक ओब्रायन अधिकृत हैं। ऐसा माना जा रहा है कि ममता बनर्जी के 15 जून के फैसले से चंद्रिमा भट्टाचार्य आहत थीं।

दूसरे देशों में इथेनॉल की वजह से क्यों नहीं होते वाहन खराब?

Ethanol blending vehicle damage

Ethanol blending vehicle damage: सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है कि दुनिया के तमाम देशों में जहां पेट्रोलियम पदार्थों में इथेनॉल की ब्लेंडिंग की जाती है वहां गाड़ियां खराब क्यों नहीं होती है, जबकि भारत में यह बहुत ज्यादा हो रहा है। इसका उत्तर साफ है कि सरकार ने आधी-अधूरी तैयारियों के साथ इसे पूरी तरह लागू कर दिया। दरअसल जिन देशों में लंबे समय से पेट्रोल में इथेनॉल जैसे E10 या E85 का इस्तेमाल हो रहा है, वहां भी शुरुआत में गाड़ियां खराब होने और इंजन में दिक्कतें आने की शिकायतें आई थीं।

 

इथेनॉल नमी को सोखता है, जिससे ईंधन टैंक में जंग लगना, रबर के पाइप का गलना और इंजन में रुकावट जैसी समस्याएं होती हैं। विकसित देशों जैसे अमेरिका और ब्राजील ने इन समस्याओं से निपटने के लिए बड़े कदम उठाए। वहां की ऑटोमोबाइल कंपनियों ने बहुत पहले ही इंजनों में जंग-रोधी धातुओं जैसे स्टेनलेस स्टील और खास तरह के रबर व प्लास्टिक पाइपों का उपयोग शुरू कर दिया था। ALSO READ: 22% से 30% इथेनॉल वाले पेट्रोल पर टैक्स हुआ ज़ीरो, जानें आपकी गाड़ी के इंजन पर क्या होगा असर?

 

रिफाइनरी से लेकर पेट्रोल पंप तक ईंधन में नमी को रोकने के लिए वाटर-सेपरेटर फिल्टर और उन्नत स्टोरेज टैंक का उपयोग किया जाने लगा और ईंधन की स्थिरता बनाए रखने के लिए विशेष केमिकल मिलाए जा रहे हैं जो इंजन को नुकसान से बचाते हैं जो भारत में नहीं हुआ।

भारत में E20 से वाहनों को क्या नुकसान?

भारत में 2023 से पहले निर्मित अधिकांश पुराने वाहन E20 और E85 ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हैं। अप्रैल 2023 में BS6 Phase 2 लागू होने से पहले की गाड़ियां आमतौर पर केवल E5 या E10 के लिए डिज़ाइन की गई थीं। हालांकि, होंडा जैसी कुछ कंपनियों ने 2009 के बाद से ही अपने वाहनों को E20 मैटेरियल कंपैटिबल बनाना शुरू कर दिया था, लेकिन यह सभी ब्रांड्स पर लागू नहीं होता।यदि आप 2023 से पहले के पुराने वाहनों में उच्च इथेनॉल वाले इन ईंधनों का उपयोग करते हैं, तो इस तरह के प्रभाव पड़ सकते हैं:

  • इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान : इथेनॉल नमी पानी को सोखता है और स्वभाव से संक्षारक जंग लगाने वाला होता है। पुराने वाहनों के रबर पाइप, सील, गैस्केट और फ्यूल इंजेक्टर्स इसके संपर्क में आकर जल्दी खराब या लीक हो सकते हैं।
  • माइलेज में कमी : इथेनॉल की ऊर्जा सघनता शुद्ध पेट्रोल से कम होती है, जिससे पुराने वाहनों के माइलेज में गिरावट आ सकती है। स्वयं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस बात को स्वीकार किया है। 

सरकार के दावों में कितना दम

सरकार के अनुसार E20 ईंधन से वाहनों को कोई गंभीर मैकेनिकल नुकसान पहुंचने के ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिले हैं, फिर भी इसके व्यावहारिक प्रभावों की समीक्षा की जा रही है। नीति आयोग और मंत्रालय के प्रारंभिक अध्ययनों के अनुसार, E10 की तुलना में E20 ईंधन से वाहनों का एक्सेलरेशन बेहतर होता है और कार्बन उत्सर्जन में लगभग 30 फीसदी तक की कमी आती है। ALSO READ: भारत की पहली Flex Fuel कार लॉन्च! Maruti Suzuki WagonR अब चलेगी E85 इथेनॉल पर

 

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी कहते हैं कि हमने इस्तेमाल करने से पहले प्रयोग किए हैं लेकिन इसका विवरण अनुपलब्ध है। एक दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि जब तक इथेनॉल बनाने के लिए गन्ने का इस्तेमाल किया जाता था तब तक सब ठीक था लेकिन जबसे चावल का इस्तेमाल किया जाने लगा तबसे समस्या गहरा गई।

 

भारत में पेट्रोल में मिलाने और टूटे हुए चावल से एथेनॉल बनाने की आधिकारिक शुरुआत वर्ष 2020 में हुई। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति-2018 के तहत ‘राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति’ (NBCC) ने 20 अप्रैल 2020 को हुई अपनी बैठक में सरप्लस चावल को एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने की मंजूरी दी थी। इसके अलावा, अगस्त 2022 में देश में पराली से एथेनॉल बनाने के पहले कमर्शियल प्लांट की शुरुआत पानीपत में की गई। ALSO READ: इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल: फायदे ज्यादा या नुकसान? वाहन मालिकों के लिए जरूरी जानकारी

पहाड़ जैसी पर्यावरणीय चुनौतियां

एक बड़ा सवाल पर्यावरण का है। द लेंस ने अपनी रिसर्च में पाया कि देश में इस समय पेट्रोल में मिलाने (ब्लेंडिंग) के लिए औसतन 75 से 90 करोड़ लीटर प्रति माह  इथेनॉल का उत्पादन और आपूर्ति हो रही है। अगर हम देश में हर साल लगभग 1,000 करोड़ लीटर इथेनॉल उत्पादन का औसत मानकर चलें, तो पानी की खपत का अनुमान आपकी रूह कंपा देगा।

डिस्टिलरी में 1 लीटर इथेनॉल बनाने में लगभग 4 से 5 लीटर पानी खर्च होता है। एक हजार करोड़ लीटर के लिए फैक्ट्री में 5 हजार करोड़ लीटर पानी खर्च होगा। यह मात्रा बहुत बड़ी नहीं है। लेकिन ठहरिए असली पानी खेती में लगता है। 1 लीटर इथेनॉल के लिए आवश्यक गन्ने को उगाने में लगभग 2000 से 2500 लीटर पानी की जरूरत होती है। यानी एक हजार करोड़ लीटर इथेनॉल बनाने में कुल 25,000,000 करोड़ लीटर पानी लगेगा जो कावेरी और ताप्ती नदियों के वार्षिक बहाव दर के बराबर है। आप अंदाजा लगाएं इससे पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

निजी कंपनियां बाहर भेज रही शुद्ध ईंधन

निजी कंपनियां रिलायंस और नायरा आदि नीदरलैंड, चाड, फ्रांस और अन्य यूरोपीय संघ के देशों के साथ साथ सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, बांग्लादेश और श्रीलंकाई बाजार के पेट्रोलियम पदार्थ बेचती है। वाणिज्यिक आंकड़ों के अनुसार, भारत का कुल पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात लगातार मजबूत बना हुआ है। पिछले डेढ़ महीने के दौरान रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी और नायरा एनर्जी की वाडीनार रिफाइनरी ने मिलकर वैश्विक बाजारों में लाखों टन ईंधन की आपूर्ति की है। अकेले नायरा एनर्जी ने हाल ही में रूस को ही करीब 60 हजार मीट्रिक टन से अधिक पेट्रोल का निर्यात ट्रेडर्स के जरिए किया है।

 

इसके अलावा, दोनों कंपनियों का कुल मासिक पेट्रोलियम निर्यात औसतन 7 से 9 अरब डॉलर के बीच बना हुआ है। लेकिन यह तेल इथेनॉल मिश्रित नहीं था। यह दीगर है कि वो भारत में खुद अपनी टंकियों लड़ ब्लेंडेड ईंधन बेच रहे हैं। विदेशों में ब्लेंडिंग का काम खुद ही किया जा रहा हैं।

 

आईआईटियन और केमिनल इंजीनियर राघव अवस्थी कहते हैं कि इथेनॉल की एक रासायनिक विशेषता है कि यह पानी को बहुत तेजी से सोखता है। यदि इसे समुद्री जहाजों के जरिए लंबी दूरी तक भेजा जाए, तो नमी के कारण पेट्रोल और इथेनॉल अलग हो सकते हैं, जिससे ईंधन खराब होने का खतरा रहता है।

योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब 3 सदस्यीय विशेष पीठ करेगी शासकीय भूमि से जुड़े वादों की सुनवाई

Yogi government's major decision regarding government land matters

– मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तत्काल लागू की नई व्यवस्था

– हर बुधवार को होगी सुनवाई, लंबित और नए सभी वाद होंगे सूचीबद्ध

– लखनऊ और प्रयागराज में गठित हुई विशेष बेंच

Chief Minister Yogi Adityanath : योगी सरकार प्रदेश में राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण सुधार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद ने सार्वजनिक महत्व की भूमि से जुड़े मामलों के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति (यदि कोई हो) से संबंधित सभी वादों की सुनवाई तीन सदस्यीय विशेष पीठ (थ्री मेंबर बेंच) द्वारा की जाएगी। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

 

धारा-9 के तहत लागू की गई नई व्यवस्था

राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सरकारी एवं सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, भूमि विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने तथा राजस्व न्याय प्रणाली को आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर विशेष बल देते रहे हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-9 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए नई व्यवस्था लागू की गयी है। इसका उद्देश्य इन संवेदनशील मामलों के निस्तारण में पारदर्शिता, न्यायिक गुणवत्ता और एकरूपता सुनिश्चित करना है।

यह व्यवस्था तत्काल लागू कर दी गई है, जिसके तहत लखनऊ एवं प्रयागराज स्थित राजस्व परिषद न्यायालयों में इन श्रेणी के सभी लंबित और नए वाद अब विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। नई व्यवस्था के अनुसार आरक्षित श्रेणी की भूमि, शासकीय भूमि, ग्राम सभा, नजूल, निष्क्रांत संपत्ति तथा शत्रु संपत्ति से जुड़े मामलों की सुनवाई अब परिषद की एकल पीठ अथवा सर्किट कोर्ट द्वारा नहीं की जाएगी।

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इन मामलों पर विशेष रूप से गठित तीन सदस्यीय पीठ सामूहिक रूप से विचार करेगी। इससे महत्वपूर्ण मामलों में विभिन्न न्यायिक दृष्टिकोणों का समावेश होगा और निर्णय प्रक्रिया अधिक मजबूत, निष्पक्ष तथा न्यायसंगत बन सकेगी।

 

विशेष पीठ हर बुधवार को करेगी मामलों की सुनवाई

परिषद की अध्यक्ष ने बताया कि राजस्व परिषद ने लखनऊ और प्रयागराज दोनों न्यायालयों के लिए अलग-अलग तीन सदस्यीय विशेष पीठों का गठन किया है। इन विशेष पीठों द्वारा प्रत्येक बुधवार को नियमित रूप से इन मामलों की सुनवाई की जाएगी। इससे सरकारी और सार्वजनिक भूमि से जुड़े संवेदनशील प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण संभव होगा, साथ ही पूरे प्रदेश में निर्णय प्रक्रिया में एकरूपता भी स्थापित होगी।

वहीं संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस श्रेणी के सभी लंबित एवं नए वादों की पहचान कर उन्हें निर्धारित विशेष पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कराया जाए। इससे नई व्यवस्था का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा और मामलों के अनावश्यक लंबित रहने की संभावना भी कम होगी। व्यवस्थित सूचीकरण और नियमित सुनवाई से न्यायिक प्रक्रिया अधिक सुचारु एवं परिणामकारी बनेगी।

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सामूहिक निर्णय प्रणाली अपनाए जाने से न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही विभिन्न प्रकार के समान मामलों में एकरूप निर्णय आने से भविष्य में अनावश्यक विवादों और कानूनी असमंजस की स्थिति भी कम होगी।

 

राजस्व व्यवस्था को बनाया अधिक उत्तरदायी

योगी सरकार पहले ही राजस्व प्रशासन में व्यापक सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल कर चुकी है। डिजिटल भू-अभिलेख, ऑनलाइन नामांतरण एवं अन्य राजस्व सेवाएं, आधुनिक तकनीकों के माध्यम से भूमि पैमाइश, पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया तथा सरकारी भूमि की सुरक्षा जैसे कदमों ने राजस्व व्यवस्था को अधिक उत्तरदायी बनाया है।

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अब तीन सदस्यीय विशेष पीठ का गठन इसी सुधार श्रृंखला की महत्वपूर्ण कड़ी है। विशेषज्ञतापूर्ण सामूहिक निर्णय व्यवस्था से न केवल न्याय वितरण प्रणाली अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनेगी, बल्कि प्रदेश में राजस्व न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण को भी नई गति मिलेगी।