फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता की सजा घटी लेकिन चुनौतियां नहीं

Marine Le Pen Sentence Reduced

निखिल रंजन 

फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन की सजा घटा कर कोर्ट ने उनके चुनाव लड़ने के राह की बाधा मिटा दी है। हालांकि उनकी चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

मरीन ले पेन के राजनीतिक भविष्य को लेकर मंगलवार को कोर्ट का फैसला आने के बाद भी ऊहापोह जारी है। उनकी सजा तो कम हो गई है लेकिन इसके साथ ही एक साल तक कोहनी पर एक इलेक्ट्रॉनिक टैग लगाने की शर्त लगा दी गई है। इससे अगले साल राष्ट्रपति चुनाव में उनकी पार्टी की जीत की प्रबल उम्मीदों को झटका लग सकता है।

 

पिछले साल फ्रांस में एक निचली अदालत ने ले पेन को पांच साल तक सार्वजनिक पद हासिल करने पर रोक लगा दी थी। इसके साथ ही उन्हें यूरोपीय संसद के फर्जी नौकरी घोटाले में 2 साल के जेल की भी सजा सुनाई थी। ऐसे में तीन बार से राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारी ठोक रही मरीन ले पेन की उम्मीदें बिखर गई थीं। पेरिस की अपील अदालत ने ले पेन को इस घोटाले का दोषी माना है हालांकि उनकी सजा घटा दी गई है। सार्वजनिक पद हासिल करने पर लगी रोक 15 महीने तक ही रहेगी जबकि एक साल के जेल की सजा वह कोहनी पर इलेक्ट्रॉनिक टैग लगा कर काट सकती हैं।

 

मार्च, 2025 से शुरू हुई सजा इस साल खत्म हो जाने के आसार है। ऐसे में सैद्धांतिक रूप से वह अगले साल अप्रैल-मई में होने वाले चुनाव में हिस्सा ले सकती हैं। पिछले हफ्ते टीवी पर प्रसारित एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “जब आप राष्ट्रपति पद के उम्मीवार हैं तो आपको पूरी तरह से मुक्त हो कर घूमना होगा। मैं रैली में जाने की अनुमति के लिए मजिस्ट्रेट के आदेश पर निर्भर नहीं रह सकती।” ऐसी स्थिति में कयास लग रहे थे कि मरीन ले पेन उम्मीदवारी पार्टी के नेता जॉर्डन बार्देला को सौंप सकती हैं। हालांकि मंगलवार शाम उन्होंने चुनाव में उतरने का ऐलान किया और अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया।  ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर

 

फर्जी नौकरी घोटाला

ले पेन पर आरोप है कि यूरोपीय संसद के जिस धन का इस्तेमाल संसदीय सहायकों के लिए किया जाना था वह उन्होंने अपने राजनीतिक दल के कर्मचारियों को वेतन देने में किया। फ्रांस की इन्वेस्टिगेटिव न्यू वेबसाइट मीडियापार्ट ने 2013 में खबर दी थी की ले पेन ने अपनी पार्टी के दो हाई रैंक वाले कर्मचारियों को संसदीय सहायक के रूप में नियुक्त किया। जांच अधिकारियों ने बाद में पता लगाया कि ये नियुक्तियां अकेले मामले नहीं थे बल्कि ये एक फर्जी नौकरियों के व्यापक तंत्र का हिस्सा थे।

 

यूरोपीय संघ के सांसदों ने संसदीय सहायकों को वेतन देने के लिए फंड जारी किए थे लेकिन इनका इस्तेमाल पार्टी की गतिविधियों के लिए नहीं हो सकता था। सात साल की जांच के बाद 2023 में ले पेन को इस मामले में दो दर्जन और लोगों के साथ धन के दुरुपयोग मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए कहा गया। ले पेन और उनकी पार्टी ने इन्हें चुनौती दी। ALSO READ: नया रक्षा बैंक क्यों बनाना चाहता है नाटो का सदस्य कनाडा

 

अदालत का फैसला

मार्च 2025 में पेरिस की एक अदालत ने फैसला दिया कि करीब 40 लाख यूरो के फंड के दुरुपयोग मामले में मरीन ले पेन की “मुख्य भूमिका” थी। ले पेन को पांच साल के लिए सार्वजनिक पद के चुनाव में खड़े होने पर रोक लगा दी गई। इसके अतिरिक्त चार साल के जेल की सजा भी सुनाई गई जिसमें दो साल की निलंबित सजा और बाकी के दो साल नजरबंदी में बिताने को कहा गया। इतना ही नहीं, उन पर 1 लाख यूरो का जुर्माना भी लगाया गया। अदालत ने उनकी पार्टी पर भी 20 लाख का जुर्माना लगाया, जिसका आधा हिस्सा निलंबित कर दिया गया। ले पेन के साथ ही यूरोपीय संघ के 8 पूर्व सांसद और 12 संसदीय सहायकों को भी फंड के दुरुपयोग का दोषी करार दिया गया।

 

यूरोप की धुर दक्षिणपंथी पार्टियों के बीच प्रमुख चेहरा रहीं मरीन ले पेन के लिए यह काफी बड़ा झटका था। 2027 के फ्रांस के चुनावों के लिए उन्हें प्रमुख दावेदारों में गिना जा रहा था। मरीन ली पेन ने इसके बाद अपील कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

 

ले पेन का बचाव 

ले पेन ने इस मामले को राजनीतिक प्रताड़ना करकार दिया। पहली सुनवाई के दौरान ले पेन ने दावा किया कि पैसा का उपयोग पूरी तरह वैध था और अभियोजकों ने संसदीय सहायकों के कार्य की बहुत संकीर्ण परिभाषा को लागू किया है।

 

यह रणनीति नाकाम रही। पीठासीन जज ने इसे खारिज करते हुए कहा कि ले पेन और दूसरे आरोपियों का अफसोस नहीं जाहिर करना उन प्रमुख कारणों में था जिसकी वजह से अदालत ने उनके चुनाव में हिस्सा लेने पर तुरंत रोक लाने का फैसला किया।

 

अपील के दौरान ले पेन ने अपने रुख में बदलाव किया और संयमित लहजा अपनाया। उन्होंने अदालत से कहा, “अगर कोई गलती हुई है तो मैं चाहती हूं कि अदालत यह समझे कि हमें बिल्कुल भी यह अहसास नहीं था कि हम कुछ गलत कर रहे हैं।” हालांकि उनकी रणनीति में कोई खास बदलाव नहीं हुआ और वह आरोपों को खारिज करती रहीं।

Weather Update : मानसून का कहर : महाराष्‍ट्र, गुजरात और राजस्थान में कई शहर पानी-पानी, IMD ने फिर जारी किया अलर्ट

monsoon has unleashed its full force, sweeping from northern to eastern parts of country

Weather Update News : देशभर में मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। देश के उत्तरी भाग से लेकर पूर्वी भाग तक मानसून का जोरदार प्रहार शुरू हो चुका है। दिल्ली-एनसीआर, महाराष्‍ट्र, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई शहरों में सड़कें जलमग्न हैं, नदियां उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। वहीं केरल के वायनाड में भूस्खलन से 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बार फिर अलर्ट जारी किया है। महाराष्ट्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। 

 

देश के उत्तरी भाग से लेकर पूर्वी भाग तक मानसून का जोरदार प्रहार शुरू हो चुका है। देशभर में मानसून ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। दिल्ली-एनसीआर, महाराष्‍ट्र, गुजरात, राजस्थान समेत कई राज्यों में लगातार हो रही भारी बारिश से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई शहरों में सड़कें जलमग्न हैं, नदियां उफान पर हैं और बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं।

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केरल के वायनाड में भूस्खलन से 4 लोगों की मौत

केरल के वायनाड में भूस्खलन से 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने एक बार फिर अलर्ट जारी किया है। महाराष्ट्र में बिगड़ते हालात को देखते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बात कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिया।

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हिमाचल प्रदेश में मानसून फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने बुधवार को हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। प्रदेश में 11 जुलाई तक मौसम खराब बने रहने का पूर्वानुमान है। मौसम विभाग ने भूस्खलन, जलभराव और फिसलन की आशंका को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। 

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राजस्थान में मूसलधार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ाई

राजस्थान के नागौर सहित कई जिलों में लगातार 2 दिनों से हो रही मूसलधार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारी वर्षा के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि में जलभराव की स्थिति बन गई है, जिससे खरीफ फसलों को बड़े नुकसान की आशंका जताई जा रही है। 

 

मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित

मुंबई और उसके आसपास के इलाकों में भारी बारिश के कारण आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आर्थिक राजधानी में भारी बारिश का सबसे ज्यादा असर वेस्टर्न रेलवे पर पड़ा है। नवसारी-मारोली सेक्शन में पटरियों पर पानी भर जाने के कारण रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बुधवार को चलने वाली कई प्रमुख ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। पानी भरने से जहां एक तरफ रेल यातायात ठप हो गया है, वहीं दूसरी तरफ जलभराव के कारण जंगली जानवर भी रिहायशी इलाकों का रुख कर रहे हैं।

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रेलवे ने यात्रियों को दी सलाह

ऐसी ही घटना पवई के चांद शाह वली दरगाह के पास से सामने आई। जहां खड़ी गाड़ियों के नीचे एक 6 फीट लंबा मगरमच्छ देखा गया। मौसम विभाग (IMD) ने बुधवार को मुंबई, ठाणे, पालघर और रायगढ़ में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। रेलवे ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे घर से निकलने से पहले हेल्पलाइन नंबर 139 या ऐप के जरिए अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक कर लें।

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गुजरात के नवसारी में अब तक 16 इंच बारिश

गुजरात के नवसारी जिले में मानसून अब आफत बन चुका है। लगातार 2 दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार रोक दी है। बुधवार तक जिले में 16 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जिसके चलते रिहायशी इलाके टापू में तब्दील हो गए हैं। यहां करीब 500 घरों में पानी घुस चुका है, जिसके चलते कई परिवार सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं।

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सूरत में 6 घंटे में 10 इंच बारिश से शहर जलमग्न

जम्मू कश्मीर में डोडा के थाथरी इलाके में बादल फटने से कई घर और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं। सूरत में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। 6 घंटे में 10 इंच बारिश से शहर जलमग्न हो गया। निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात हैं। मध्‍य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में भारी बारिश के बाद शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई मंदिर पानी में डूब गए हैं।

इंडोनेशिया में पीएम मोदी की शिव भक्ति, प्रम्बानन मंदिर में ॐ नमः शिवाय

PM Modi in prambanan temple

इंडोनेशिया दौरे के आखिरी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडोनेशियाई राष्‍ट्रपति सुबियांतो के साथ प्रम्बानन मंदिर पहुंचे। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी यात्रा से जुड़ा वीडियो शेयर करते हुए ओम नम: शिवाय भी लिखा। इस धरोहर को देखने के बाद उन्होंने कहा कि इंडोनेशिया की हवा में संस्कृति की खुशबू है।

पीएम ने मंदिर परिसर में आरती की और पुजारियों से आशीर्वाद भी लिया। उन्होंने मंदिर परिसर में अपने संबोधन में कहा- मुझे किसी न किसी रूप में हमेशा भगवान शिव से जुड़ने का मौका मिला है। सोमनाथ, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाद प्रम्बानन मंदिर के विकास का मौका मिलना मेरा सौभाग्य है। ALSO READ: पीएम मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान, कई समझौतों पर लगी मुहर

 

प्रधानमंत्री मोदी के प्रम्बानन मंदिर दौरे के बाद दोनों देशों ने संयुक्त बयान जारी किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति सुबियांतो ने 2029 से पहले जीर्णोद्धार पूरा करने का वादा लिया है। वे योजना बनाकर काम करते हैं, ऐसे में पूरा भरोसा है कि काम पूरा होगा और वे इंडोनेशिया आकर एकसाथ इसका जश्न मनाएंगे। 

 

यात्रा से पहले क्या बोले पीएम मोदी?

अपनी यात्रा से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो के साथ योग्याकार्ता से प्रम्बानन मंदिर जा रहा हूं।' उन्होंने एक विमान में दोनों नेताओं की हाथ मिलाते हुए एक तस्वीर भी साझा की।

प्रम्बानन मंदिर में क्या है खास?

प्रम्बानन मंदिर परिसर योग्याकार्ता शहर से लगभग 17 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित एक यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इसे इंडोनेशिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर माना जाता है। 10वीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर रामायण के महाकाव्य को दर्शाने वाली नक्काशी से सजा है। यूनेस्को की वेबसाइट के अनुसार, इन संकेंद्रित वर्गों के अंतिम केंद्र के ऊपर तीन मंदिर हैं। ये 3 महान हिंदू देवताओं (शिव, विष्णु और ब्रह्मा) को समर्पित हैं।

 

भारत और इंडोनेशिया ने एक दिन पहले मंदिर परिसर के संरक्षण और जीर्णोद्धार परियोजना शुरू करने पर सहमति जताई थी। दोनों देशों के बीच इस संबंध में समझौता भी हुआ है।

सौराष्ट्र में आपदा के बीच राज्य सरकार अलर्ट, मंत्री जीतूभाई वाघानी ने की समीक्षा बैठक

State government on alert amidst disaster in Saurashtra, Minister Jitubhai Vaghani holds review meeting

सौराष्ट्र क्षेत्र में हुई मूसलधार बारिश और उसके कारण उत्पन्न वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। अमरेली और राजकोट जिले के प्रभारी मंत्री जीतूभाई वाघानी ने आज सुबह गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अमरेली, राजकोट और भावनगर जिलों के प्रशासनिक तंत्र के साथ एक उच्चस्तरीय वर्चुअल समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मंत्री वाघानी ने तीनों जिलों की वर्तमान स्थिति, प्रशासनिक व्यवस्थाओं, निचले इलाकों की स्थिति और आपदा प्रबंधन योजना के तहत नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर प्रशासन को आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

 

उच्च पदाधिकारियों और प्रभारी मंत्रियों की उपस्थिति में एक्शन प्लान पर चर्चा

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मंत्री कुंवरजीभाई बावलिया, भावनगर के प्रभारी मंत्री कौशिकभाई वेकरिया सहित स्थानीय सांसद और विधायक वर्चुअली जुड़े थे। स्थानीय नेताओं के अलावा तीनों जिलों के कलेक्टर, जिला विकास अधिकारी (DDO), महानगरपालिका के कमिश्नर और जिला आपदा प्रबंधन के उच्च अधिकारी अपने-अपने एक्शन प्लान और लाइव रिपोर्ट के साथ उपस्थित रहे। बैठक के दौरान नदी-नालों की स्थिति और जलाशयों में पानी की आवक पर गहराई से चर्चा की गई तथा बांधों की सुरक्षा और ओवरफ्लो की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए गए।

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आपातकालीन सेवाएं स्टैंडबाय : जोखिमभरे होर्डिंग्स और मकानों को हटाने का आदेश

भारी बारिश के कारण नागरिकों को परेशानी न हो, इसके लिए बिजली या पानी की आपूर्ति बाधित होने अथवा रास्ते ब्लॉक होने जैसी तात्कालिक समस्याओं के त्वरित निपटारे के लिए PGVCL, जलापूर्ति, सिंचाई और सड़क-मकान विभाग को स्टैंडबाय मोड पर रहने का आदेश मंत्री ने दिया है। इसके अलावा संभावित दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खतरनाक मकानों और होर्डिंग्स की एक बार फिर से जांच करके जोखिम भरी इकाइयों को तत्काल प्रभाव से हटाने की ताकीद की गई है।

 

स्वास्थ्य विभाग मुस्तैद : आश्रय स्थलों में भोजन-पानी और स्वास्थ्य टीमें तैनात

बारिश के मौसम के बाद संभावित महामारी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग को तालुका स्तर पर रैपिड रिस्पांस टीम कार्यशील करने के लिए कहा गया है, साथ ही क्लोरीन टैबलेट और ORS का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। विशेष रूप से गर्भवती माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य की विशेष देखभाल करने के निर्देश कलेक्टरों को दिए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर लोगों को सुरक्षित आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने और वहां उनके लिए भोजन-पानी की पर्याप्त एवं उचित व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन को कह दिया गया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल के नेतृत्व में सरकार 'जीरो कैजुअल्टी' (शून्य जनहानि) के दृष्टिकोण के साथ काम कर रही है।

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अमरेली जिले की स्थिति : 12 इंच बारिश, 2 NDRF की टीमें और हाई अलर्ट पर बांध

अमरेली जिले में चालू वर्ष में अब तक औसतन 12 इंच बारिश हो चुकी है, जो सीजन की कुल औसत बारिश के 42 प्रतिशत से भी अधिक है, जिसमें पिछले 24 घंटों में ही 2 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है। बचाव कार्य के लिए अमरेली में वर्तमान में NDRF की 2 टीमें तैनात की गई हैं। अब तक कुल 76 नागरिकों का रेस्क्यू और 641 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है।

बंद हुई 25 सड़कों में से 19 सड़कों को बहाल कर दिया गया है। जलाशयों की बात करें तो धातरवड़ी (100%), सुरजवाड़ी (100%), खोडियार (96%) और रायडी (95%) बांध भर जाने के कारण हाई अलर्ट पर हैं, जबकि धातरवड़ी-2 को अलर्ट पर और शेल-देदुमल बांध को वॉर्निंग लेवल पर रखा गया है।

 

भावनगर जिले की स्थिति : मालन नदी में 8 लोगों का रेस्क्यू और 4 बांध हाई अलर्ट पर

भावनगर जिले में चालू वर्ष में औसतन 8 इंच बारिश हुई है, जो कुल औसत बारिश के 30 प्रतिशत से अधिक है और पिछले 24 घंटों में 3 इंच से अधिक बारिश गिरी है। राहत-बचाल के लिए यहां NDRF की 1 टीम तैनात है और नागरिकों के लिए 982 आश्रय स्थल निर्धारित किए गए हैं, जबकि 859 आपदा मित्रों को प्रशिक्षित किया गया है।

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महुआ तालुका के ओथा गांव में मालन नदी के तेज बहाव में अहमदाबाद के 8 नागरिक कार सहित बह गए थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया है। जिले में पंचायत के अधीन आने वाली 7 बंद सड़कों पर डायवर्जन और वैकल्पिक व्यवस्था शुरू कर दी गई है। पानी की भारी आवक होने से भावनगर का मालन (100%), शेत्रुंजी (100%), रोजकी (98%) और रंघोळा (96%) बांध हाई अलर्ट पर हैं।

 

राजकोट जिले की स्थिति : तालुका वार लायजन अधिकारियों की नियुक्ति और बांध वॉर्निंग पर

राजकोट जिले में चालू वर्ष में औसतन 5 इंच से अधिक बारिश हुई है, जो कुल औसत बारिश के 18 प्रतिशत से अधिक है और पिछले 24 घंटों में यहां 1 इंच से कम बारिश दर्ज की गई है। स्थिति से निपटने के लिए राजकोट में वर्तमान में NDRF की 1 और SDRF की 1 टीम को तैनात रखा गया है। जिले के वेणु-2 (76% भरा हुआ) तथा आजी-2 (73% भरा हुआ) बांध में पानी की निरंतर आवक के चलते उन्हें वॉर्निंग पर रखा गया है।

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किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति में बेहतर समन्वय बना रहे, इसके लिए प्रत्येक तालुका में एक डिप्टी कलेक्टर स्तर के लायजन अधिकारी की नियुक्ति की गई है और स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रत्येक तालुका में रैपिड रिस्पांस टीम का गठन भी कर दिया गया है।

बारुईपुर रेप-मर्डर केस: नाबालिग से दरिंदगी का आरोपी पुलिस एनकाउंटर में ढेर, भागने की कोशिश में मारा गया

west bengal police encounter

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में नाबालिग से रेप और मर्डर का एक आरोपी प्रभास मंडल को पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। पुलिस के मुताबिक, एनकाउंटर उस समय हुआ जब आरोपी पूछताछ के दौरान पुलिस कर्मी की बंदूक छिनकर पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश कर रहा था। पुलिस द्वारा आत्मरक्षा में चलाई गोली से आरोपी मारा गया। ALSO READ: क्या शादीशुदा थी सिया गोयल? केतन अग्रवाल हत्याकांड में वॉट्सऐप चैट से खुला बड़ा राज

 

बताया जा रहा है कि क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान प्रभास मंडल ने एक पुलिसकर्मी की राइफल छीन ली। इसके बाद पुलिस और आरोपी के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें प्रभास को गोली लगी। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

क्या था मामला?

बारुईपुर में 4 जुलाई को 12 साल की लड़की लापता हो गई थी। 5 जुलाई को उसका शव एक तालाब से मिला। पोस्टमॉर्टम में रेप की पुष्टि हुई, इसके बाद इलाके में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। पुलिस ने रेप-मर्डर के आरोप में प्रभास सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया था।

 

पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज की जांच भी की, जिसमें 4 लोग लड़की को अपने साथ ले जाते हुए दिखाई दिए थे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लड़की के सिर और प्राइवेट पार्ट्स पर चोट के निशान मिले। लड़की के सिर पर या तो किसी भारी चीज से वार किया गया था या उसे किसी सख्त सतह पर पटका गया था। शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर खरोंच और काटने के निशान थे। उसके फेफड़ो और पेट में पानी मिला। आरोपियों ने उसे जिंदा ही तालाब में फेंक दिया था। डूबने और ज्यादा खून बहने के कारण उसकी मौत हो गई। ALSO READ: घर के बाहर मौत बनकर पहुंचा शेर! चरवाहे को जमीन पर दबोचा, लोगों ने पत्थर बरसाकर बचाई जान, VIDEO वायरल

 

अब तक मामले में क्या हुआ?

पुलिस ने अब तक इस मामले में 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। भीड़ ने पीट पीटकर एक आरोपी की जान ले ली। मामले की विस्तृत और गहनता से जांच करने के उद्देश्य से प्रशासन द्वारा एक 6 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) का भी गठन किया गया है। 

LIVE: मानसून मेहरबान, भारी बारिश से कई शहर पानी-पानी

rain update 8 july

Latest News Today Live Updates in Hindi : देश में इन दिनों मानसून मेहरबान है। दिल्ली, मुंबई, सूरत समेत देश के कई इलाकों में भारी बारिश हुई। पल पल की जानकारी… 

राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने तीर्थ क्षेत्र भवन में चंपत राय से मुलाकात की। चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट से चंपत राय के इस्तीफे के बाद दोनों की यह पहली मुलाकात है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान के कई ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सरकार ने ईरानी तेल कारोबार के लिए दी गई अस्थायी राहत भी वापस लेते हुए तेल निर्यात से जुड़ा लाइसेंस रद्द कर दिया।

 

ईरान ने भी पलटवार करते हुए खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर बमबारी की। कुवैत में बजे सायरन।

-दिल्ली, एनसीआर में भारी बारिश का दौर जारी।

-मुंबई और नवी मुंबई के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हुई। सड़कों पर भरा पानी। कुरला समेत कई इलाकों में लगा भारी जाम।

-जम्मू कश्मीर में डोडा के थाथरी इलाके में बादल फटने से कई घर और गाड़ियां क्षतिग्रस्त हुईं।

-सूरत में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। 6 घंटे में 10 इंच बारिश से शहर जलमग्न। निचले इलाकों में बाढ़ से हालात।

-उज्जैन में भारी बारिश के बाद शिप्रा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई मंदिर पानी में डूब गए हैं।

FBI का लॉरेंस बिश्नोई गैंग के खिलाफ बड़ा एक्शन, कई देशों में 50 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी

FBI action against Lawrence Bishnoi gang

एफबीआई ने अमेरिका, कनाडा और यूरोप में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गैंग के खिलाफ ऑपरेशन हार्ड बॉल शुरू किया है। एफबीआई ने गैंग के 50 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी करते हुए 24 लोगों को गिरफ्तार किया है।

 

बिश्नोई गैंग के ठिकानों पर छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में हेरोइन और कोकीन जैसे ड्रग्स, कई आग्नेयास्त्र और हजारों डॉलर की नकदी बरामद की गई है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लॉरेंस बिश्नोई के ग्लोबल सिंडिकेट को पूरी तरह से तोड़ना है।

 

इस ऑपरेशन में केवल लॉरेंस बिश्नोई के वफादारों को ही नहीं निशाना बनाया गया, बल्कि उसके सहयोगी गोल्डी बराड़, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा जैसे अन्य गिरोहों के नेटवर्क को भी ध्वस्त करने की कोशिश की गई।

 

लारेंस बिश्नोई गैंग पर क्यों हुआ एक्शन?

लारेंस बिश्नोई गैंग से जुड़कर कई वांटेड अपराधी अमेरिका, कनाडा और यूरोप से न सिर्फ भारत में अपने अपराध का साम्राज्य चला रहे हैं। बल्कि इन देशों में रह रहे भारतीयों को भी निशाना बनाकर उनसे रंगदारी वसूल कर रहे हैं।

 

बिश्नोई-बराड़ गिरोह पर खालिस्तान समर्थक आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की 2023 में हुई हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। कनाडा सरकार ने पिछले साल लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकी संगठन घोषित किया था।

महिलाओं का यौन शोषण यूरोप-अमेरिका में बना नया शौक

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Europols Project Medusa: यूरोप-अमेरिका अपने आप को न केवल बहुत सुशिक्षित, सुसभ्य और सुसपंन्न समाज मानते हैं, नारी-समानता का प्रखर पैरोकार भी बताते हैं। दावा करते हैं कि उनके यहाँ महिलाओं और लड़कियों को न केवल समान अधिकार प्राप्त हैं, वे पूर्णतः सुरक्षित भी हैं। लेकिन, इस ढोल में कितना पोल या दिया तले कितना अंधेरा है, अखिल यूरोपीय पुलिस अधिकरण 'यूरोपोल' के एक सफ़ाई अभियान ने इन्हीं दिनों उजागर कर दिया है।

 

अपनी महिला परिचितों या संगिनियों को नशीली दवाएं देकर उनका यौन शोषण करना और ऑनलाइन नेटवर्क पर अपने अनुभवों का आदान-प्रदान करना, यूरोप-अमेरिका में पुरुषों का एक नया शौक बन गया है। यूरोपोल की रिपोर्ट के अनुसार, 9 देशों— जर्मनी, ब्रिटेन, ब्राज़ील, कनाडा, फ्रांस, हंगरी, नीदरलैंड, स्पेन और संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) के जांचकर्ताओं ने पहली बार उन पुरुषों की पहचान कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई की है, जो अपनी महिला संगिनियों को बेहोश करने के लिए उन्हें नशीली दवाएँ देकर उनका यौन शोषण किया करते थे।

अपने कुकर्मों के वीडियो भी बनाते हैं

यही नहीं, वे अपने कुकर्मों के वीडियो भी बनाते और उन्हें ऑनलाइन पोस्ट कर देते थे। यूरोपोल का कहना है कि जून, 2026 में चलाए गए इस जाँच अभियान से इस गोरखधंधे के 274 नए मामले मिले हैं। इन मामलों में बलात्कार, यौन उत्पीड़न, गंभीर शारीरिक चोट पहुंचाने और हत्या तक की कोशिशों जैसे अपराध शामिल हैं।

 

यूरोपोल ने नीदरलैंड की राजधानी हेग में बताया कि 156 संदिग्ध पीड़ितों और अपराधियों की पहचान की गई है। अपराधियों या पीड़ितों के बारे में मिली जानकारी जारी नहीं की गई, ताकि अभी भी चल रही जांचों पर कोई असर न पड़े। 9 देशों के इस सामूहिक अभियान का नेतृत्व जर्मनी और ब्रिटेन के अधिकारियों ने किया और यूरोपीय पुलिस एजेंसी यूरोपोल ने तालमेल बिठाया। 'प्रोजेक्ट मेदूसा' नाम के इस बहुराष्ट्रीय अभियान की सफलता में जर्मनी के संघीय अपराध कार्यालय (BKA) और जर्मनी के ही हैम्बर्ग राज्य के आपराधिक पुलिस कार्यालय की भी प्रमुख भूमिका रही है।

बलात्कारियों का नेटवर्क पकड़ा गया

यूरोपोल के अभियान से पता चला कि लड़कियों-महिलाओं के साथ यौन दुराचार करने वाले सभी 9 देशों के पुरुष, खुद बनाए वीडियो और अपनी सीख-सलाहों का आपस में आदान- प्रदान करते रहे हैं। यूरोपोल के अनुसार, पुरुष अपने शिकार को अधिकतर नशीली दवाएं देकर बेहोश कर दिया करते हैं और फिर उनका जमकर यौन शोषण करते हैं। जर्मनी के संघीय अपराध कार्यालय (BKA) का कहना है कि यह दुराचार, पीड़िताओं को अक्सर अपने ही करीबी लोगों के द्वारा झेलना पड़ता है और वह लंबे समय तक—कभी-कभी सालों तक—चलता रहता है।

 

यूरोपोल के अनुसार, यौन दुराचार के वीडियो मुख्य रूप से 'पोर्नोग्राफ़ी' कहलाने वाली अश्लील सामग्री के इंटरनेट प्लेटफ़ॉर्मों और महिलाओं के प्रति घृणा फैलाने वाली चैट- मंडलियों में शेयर किए जाते हैं। अपराधी, इस्तेमाल की जाने वाली नशीली या बेहोशी की दवाओं के असर के साथ-साथ उन्हें कहाँ और कैसे पाया जाए, इस बारे में भी जानकारी आपस में बाँटते हैं। हाल ही में चलाए गए एक अभियान में ऐसे चार नेटवर्कों की पहचान की गई और उनका सफ़ाया किया गया।

“पेलिको का मामला अकेला मामला नहीं है”

यूरोपोल के अभियान से जो तथ्य सामने आए हैं, वे फ़्रांसीसी महिला जिज़ेल पेलिको के साथ वर्षों तक चले अकल्पनीय दुराचार कांड की याद दिलाते हैं। इस समय 74 वर्ष की इस महिला को लगभग दस वर्षों तक, उसके अपने ही पति ने उसे बार-बार नशीली दवाएं देकर, दर्जनों लोगों द्वारा उसका बलात्कार करवाया। जर्मनी के संघीय अपराध कार्यालय (BKA) का कहना है कि पीड़िताओं को बेबस करने के लिए नशीली दवाएं अक्सर शराब के साथ मिलाकर उन्हें पिलाई जाती हैं, जो जानलेवा भी हो सकती हैं। कई पीड़िताओं को पता ही नहीं चलता कि उनका कैसा और कितना यौन उत्पीड़न हुआ है। यूरोपोल का कहना है कि 'दी गई नशीली दवाओं और दर्द निवारक दवाओं की वजह से पीड़िताएं या तो घटना को याद नहीं रख पातीं या अपने साथ बलात्कार के शारीरिक प्रभाव को तुरंत महसूस नहीं कर पातीं।' इस तरह के दुराचार के पीछे काम करने वाले ऑनलाइन नेटवर्क का सफ़ाया करने के उद्देश्य से, अप्रैल 2026 में “प्रोजेक्ट मेदूसा” शुरू किया गया।

 

यूरोपोल के अनुसार, तब से अब तक इस परियोजना में शामिल देशों में 57 पुरुषों को गिरफ़्तार किया गया है और 158 पीड़िताओं को बचाया गया है। पिछले जून महीने में, डच पुलिस ने ब्रिटिश और जर्मन पुलिस से मिली जानकारी के आधार पर चार संदिग्ध अपराधियों को गिरफ़्तार किया।

बलात्कारियों का नेटवर्क बढ़ता ही गया

यह सारी जांच वास्तव में जर्मन टेलीविज़न NDR की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई। ब्रिटेन की “नैशनल क्राइम एजेंसी” (NCA) के अनुसार, जांचकर्ताओं द्वारा किया गया अब तक का काम इससे पहले NDR की दो महिला पत्रकारों की खोज का परिणाम है। दोनों जर्मन महिला पत्रकारों ने 2024 के अंत में बताया कि अपनी खोज से उन्हें पता चला कि बलात्कारी गिरोहों के सदस्य, महिलाओं को नशीली दवाएं देकर कैसे उनके साथ बलात्कार करते थे और उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग अपने चैट ग्रुप में कैसे शेयर किया करते थे। ये वीडियो अश्लीलता (पोर्नोग्राफ़ी) के प्लेटफ़ॉर्मों के द्वारा भी शेयर किए जा रहे थे।

 

जर्मन टेलीविज़न NDR के पत्रकार, 2022 से ही कानून मनवाने वाली घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों प्रकार की एजेंसियों को इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के बारे में आगाह कर रहे थे। जर्मनी के ही “लोअर सैक्सनी” राज्य की एक महिला के मामले में — जिसके पति ने कम से कम 15 सालों तक उसे बार-बार नशीली दवाएं देकर उसका यौन शोषण किया और करवाया था— NDR के पत्रकारों की लगातार पूछताछ के बाद ही जांच शुरू हुई।

“प्रोजेक्ट मेदूसा”

22 से 24 जून 2026 तक, 29 जांचकर्ता लंदन में “नैशनल क्राइम एजेंसी” (NCA) के मुख्यालय में इकट्ठा हुए। वहाँ, उन्होंने “प्रोजेक्ट मेदूसा” के तहत अपराधियों, पीड़ितों, महिलाओं के प्रति घृणा फैलाने वाले समूहों और आवश्यक जांच के लिए नई कड़ियों की पहचान करने के उपायों पर चर्चा की। अप्रैल 2026 में शुरू किया गया “प्रोजेक्ट मेदूसा” एक संयुक्त प्रयास है, जिसका उद्देश्य महिलाओं के साथ यौन दुराचार को बढ़ावा देने वाले ऑनलाइन नेटवर्क को फैलने से रोकना और तहस-नहस करना है; साथ ही इन अपराधों की जांच और दोषियों पर मुकदमा चलाने के लिए राष्ट्रीय सीमाओं के आर-पार जाने वाली रणनीतियों को मज़बूत करना है। इस प्रोजेक्ट का नेतृत्व जर्मनी और ब्रिटेन मिल कर कर रहे हैं।

बेंगलुरु डेकेयर कांड कामकाजी पेरेंट्स के लिए कितना बड़ा झटका

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प्रभाकर मणि तिवारी

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक आईटी कंपनी के क्रेच में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार की घटना ने देश में खासकर कामकाजी दंपतियों की चिंता तो बढ़ाई ही है, थर्ड पार्टी सेवाओं के बढ़ते प्रचलन पर भी सवाल खड़ा कर दिया है। ALSO READ: दुर्गा स्क्वॉड कैसे बदलेगा बंगाल में महिला सुरक्षा का हाल?

 

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले की रहने वाली अनुष्का चटर्जी बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में नौकरी करती है। उनके पति भी एक विदेशी कंपनी में मैनेजर हैं। लेकिन अनुष्का ताजा घटना के बाद अपने बच्चे  के लिए परेशान है। वो डीडब्ल्यू से कहती है, “मैं बच्चे को दफ्तर के क्रेच में छोड़ कर नौकरी करती हूं। पति तो देर रात लौटते हैं। लेकिन ताजा घटना से परेशान हूं।”

 

अनुष्का के घर पर बूढ़ी मां और एक छोटी बहन है, लेकिन वो उनको बच्चे की देख-रेख के लिए नहीं बुला सकती। वो बताती हैं कि उनके ससुराल में भी ऐसा कोई नहीं है जो यहां आकर रह सके।

 

भारत में कामकाजी दंपतियों का कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। मोटे अनुमान के मुताबिक, दक्षिण भारतीय राज्यों में यह आंकड़ा करोड़ों में है। अकेले बेंगलुरु की करीब 1.30 करोड़ की आबादी में इनकी तादाद 15 से 20 लाख के बीच होने का अनुमान है।

 

दरअसल, देश में एकल परिवारों की बढ़ती संख्या ने एक नई समस्या को जन्म दिया है।  वह है बच्चों का लालन-पालन। इसी वजह से शहरी इलाकों में डे-केयर क्रेच की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। निजी क्षेत्र की कई कंपनियां अपने महिला कर्मचारियों की सहूलियत के लिए परिसर में ही क्रेच की सुविधा देती हैं। लेकिन यह सेवा थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडरों के जरिए मुहैया कराई जाती है। खासकर बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसी आईटी हब समझे जाने वाले शहरों में ऐसे सर्विस प्रोवाइडरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।

 

कोलकाता की मौमिता सान्याल और उनके पति पुणे स्थित एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते हैं। मौमिता डीडब्ल्यू से बताती है, “परिसर में स्थित क्रेच में बेटी को छोड़ कर वह निश्चिंत हो जाती थी। लेकिन बेंगलुरु की घटना के बाद पता चला कि यह क्रेच भी थर्ड पार्टी की ओर से ही चलाया जाता है। इससे चिंता बढ़ गई है।” उनका कहना है कि फ्लैट और कार की ईएमआई का बोझ होने के कारण वो नौकरी भी नहीं छोड़ सकतीं। ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर

 

थर्ड पार्टी का बढ़ता चलन

जानकारों का कहना है कि देश में विभिन्न क्षेत्रों में आउटसोर्सिंग बढ़ने के कारण थर्ड पार्टी सेवा मुहैया कराने वाली कंपनियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें विभिन्न कंपनियों के सफाईकर्मी और सुरक्षाकर्मी जैसे निचले स्तर के कर्मचारियों के अलावा क्रेच की सुविधा मुहैया कराने वाली कंपनियां शामिल हैं।

 

बच्चों के हित में काम करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन के कार्यकर्ता एम। वेणुगोपाल डीडब्ल्यू से कहते हैं, “थर्ड पार्टी की सेवाएं लेना बड़ी कंपनियों के लिए मुफीद है। किसी अप्रिय घटना की स्थिति में उन पर कोई आंच नहीं आती। पूरा दोष इन सर्विस प्रोवाइडरों पर मढ़ दिया जाता है। इसमें कंपनी का फायदा है।”

 

पश्चिम बंगाल की स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन सोसाइटी की सदस्य निकिता चटर्जी डीडब्ल्यू से कहती हैं, “हम थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडरों के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन ऐसे प्रोवाइडरों से क्रेच जैसी अहम सेवा लेने वाली बड़ी कंपनियों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। कामकाजी दंपतियों की बढ़ती संख्या के कारण उनके लिए क्रेच की सुविधा बेहद अहम और जरूरी है। बड़ी कंपनियों को थर्ड पार्टी की सेवाएं लेते समय मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और वहां काम करने वालों की निगरानी के लिए एक तंत्र विकसित करना चाहिए।” ALSO READ: सच्ची मुहब्बत के नाम पर कैसे दुनिया को ठग रहे हैं स्कैमर्स

 

कैपजेमिनी घटना में आगे क्या हो रहा है 

कर्नाटक स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के अध्यक्ष संतोष कुमार ने पत्रकारों को बताया, “जिस क्रेच में वह घटना हुई वहां 35 बच्चे रहते थे और 14 कर्मचारी उनकी देख-रेख करते थे। हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। बेंगलुरु के ऐसे सभी डे-केयर सेंटरों की जांच के आदेश दे दिए गए हैं।”

 

इस बीच, कैपजेमिनी कंपनी के जिस डे-केयर क्रेच में वह घटना हुई थी, उसे फिलहाल बंद कर दिया गया है। कंपनी ने एक बयान में कहा है कि वह भारत में अपनी सभी यूनिट्स में डे-केयर सेवा मुहैया कराने वालों की नए सिरे से समीक्षा कर रही है। इसके अलावा इससे प्रभावित महिला कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वर्क फ्रॉम होम की सुविधा देने पर भी विचार किया जा रहा है।

 

लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कामकाजी दंपतियों के लिए क्रेच की सुविधा बहुत अहम है। इसलिए इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार को इस मामले में कुछ नियम तय कर कंपनियों के लिए उसका पालन अनिवार्य करना चाहिए।

तेल टैंकरों पर हमलों से ट्रंप भड़का, अमेरिका ने ईरान पर बरसाए बम, तेल निर्यात से जुड़ा लाइसेंस भी रद्द

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने दक्षिण-पश्चिमी ईरान के कई ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की। ALSO READ: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच Hormuz में फिर टेंशन, 24 घंटे में 3 टैंकरों पर अटैक

 

अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार और शोक समारोह के बीच अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सरकार ने ईरानी तेल कारोबार के लिए दी गई अस्थायी राहत भी वापस लेते हुए तेल निर्यात से जुड़ा लाइसेंस रद्द कर दिया।

 

ईरानी सरकारी मीडिया ने दक्षिणी ईरान में सिलसिलेवार धमाकों की खबर दी। दक्षिणी शहर सिरिक में सात धमाकों की आवाज सुनी गई। सिरिक के ताहेरुई पियर क्षेत्र में 6 मिसाइलें गिरने की खबर हैं। ईरान के प्रेस टीवी ने बताया कि धमाकों से हुए नुकसान या किसी के हताहत होने की तत्काल कोई जानकारी नहीं मिली है। दक्षिणी ईरान के केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में भी धमाकों की आवाज सुनी गई।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान पर सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं। वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों को अमेरिका ने युद्धविराम का उल्लंघन बताया है।

 

अमेरिका ने ईरान पर क्यों बरसाए बम?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्‍ट में कहा, उसकी सेनाओं ने ईरान पर जोरदार हमले शुरू किए हैं। अमेरिका ने कहा कि ये हमले होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तीन जहाजों पर हुए ईरानी हमलों के जवाब में हैं। अमेरिका ने ईरान के इस आक्रामक रवैये को अनुचित, खतरनाक और युद्धविराम का स्पष्ट उल्लंघन बताया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का विदेश मंत्रालय, अमेरिका द्वारा समझौते का उल्लंघन किए जाने के नतीजों के बारे में चेतावनी देता है। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए ज़रूरी कोई भी कदम उठाएगा।

 

अमेरिका की इस कार्रवाई से ईरान में कई लोगों के कई होने की खबर है। इससे दोनों देशों के बीच युद्धविराम संकट में पड़ता नजर आ रहा है।