Gujarat : सूरत में बारिश का कहर, 6 घंटे में 10 इंच बारिश से शहर जलमग्न, 2100 लोगों का रेस्क्यू, रेड अलर्ट जारी

सूरत में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सरथाणा इलाके में स्थित आदर्श निर्वासित स्कूल में पानी भर जाने के कारण वहां 37 बच्चे और स्कूल का स्टाफ फंस गया था, जिन्हें सूरत पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इसी तरह, व्रजचौक इलाके में भारी जलजमाव के कारण एक एसटी (ST) बस बीच रास्ते में फंस गई। फायर ब्रिगेड की टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर बस में सवार २८ यात्रियों को ट्रैक्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला।

व्यापक जलजमाव: 2100 लोगों का रेस्क्यू और पानी में फंसी एम्बुलेंस

शहर के वेसु इलाके में स्थित प्रसिद्ध खाटूश्याम मंदिर के पास सड़कों पर तीन से चार फीट तक पानी भर गया, जिसमें मरीजों की सेवा में लगी एक एम्बुलेंस भी पानी के तेज बहाव में फंस गई। मूसलाधार बारिश के चलते निचले इलाकों में बाढ़ जैसी आपातकालीन स्थिति पैदा हो गई है। प्रशासन द्वारा युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू कर अलग-अलग इलाकों से लगभग 2100 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। मुख्य रास्ते पानी में डूबने के कारण वाहन फंसे हुए हैं और जगह-जगह भारी ट्रैफिक जाम देखने को मिल रहा है।

पूर्णा नदी में उफान और प्रशासन द्वारा 'रेड अलर्ट' की घोषणा

डांग, सूरत और तापी जिलों में हो रही अत्यधिक भारी बारिश के कारण नवसारी की पूर्णा नदी में पानी की भारी आवक हुई है। नदी का जलस्तर 19 फीट के करीब पहुंचने से बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है, जिसके चलते नदी तटीय इलाकों में कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं। सूरत जिला कलेक्टर ने 'रेड अलर्ट' जारी करते हुए छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर सभी स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ियों को आगामी आदेश तक बंद रखने का फैसला किया है। साथ ही कलेक्टर ने नागरिकों से पैनिक न होने और बिना वजह घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

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प्रभारी पुलिस कमिश्नर खुद उतरे पेट्रोलिंग पर; कीम गांव के मंदिर डूबे

हालात की गंभीरता को देखते हुए सूरत के प्रभारी पुलिस कमिश्नर वाबांग जामीर खुद ग्राउंड जीरो पर उतरे और निचले इलाकों में घूमकर स्थिति का जायजा लिया। दूसरी ओर, सूरत के कीम गांव में स्थित ऐतिहासिक हरिहरेश्वर महादेव, राधाकृष्ण और अंबाजी मंदिर के गर्भगृह तक पानी पहुंच गया है, जिससे शिवलिंग भी जलमग्न हो गया है। पिछले तीन साल से कमजोर ड्रेनेज सिस्टम के कारण पैदा होने वाली इस समस्या को लेकर स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश है।

बालेश्वर गांव का संपर्क टूटा: प्राकृतिक जल निकासी बंद होने से बढ़ी मुसीबत

भारी बारिश के चलते बालेश्वर गांव की ३२ गंगा खाड़ी में पानी का बहाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इस बाढ़ के कारण बालेश्वर से नेशनल हाईवे-48 और टुंडी-बगुमरा गांव को जोड़ने वाली सड़कें पूरी तरह पानी में डूब गई हैं, जिससे गांव का संपर्क टूट गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, हाईवे पर हुए अंधाधुंध निर्माण और प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों (कांस) के बंद होने के कारण हर साल मानसून में यह स्थिति पैदा होती है। यदि बारिश इसी तरह जारी रही, तो खाड़ी किनारे बने अन्य 45 घरों का संपर्क भी पूरी तरह कट जाने की आशंका है।

योगी सरकार का मेगा ग्रीन मिशन, गंगा-यमुना समेत 13 नदियों के किनारे लगेंगे 3.83 करोड़ से अधिक पौधे

योगी सरकार पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत उत्तर प्रदेश में 13 प्रमुख नदियों के किनारे बड़े पैमाने पर पौधरोपण करेगी। गंगा, यमुना, गोमती, सरयू, समेत कई प्रमुख नदियों के किनारे पौधरोपण होगा। गंगा के किनारे 4495.72 हेक्टेयर में 79.86 लाख से अधिक पौधरोपण होगा तो यमुना किनारे सर्वाधिक 647 स्थल चिह्नित किए गए हैं, जहां पौधरोपण कराए जाएंगे। नदियों के तट से पांच किमी. की परिधि में कुल 2673 स्थल चिह्नित किए गए हैं, इनके किनारे 22240 हेक्टेयर से अधिक में 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण होगा। 

 

यमुना नदी के तट क्षेत्र पर होंगे सर्वाधिक पौधरोपण 

सीएम योगी के निर्देश पर नदियों के किनारे पौधरोपण होंगे। अविरल धारा पौधरोपण कार्यक्रम के तहत यमुना नदी के तट पर सर्वाधिक पौधे रोपित किए जाएंगे। यमुना के कैचमेंट एरिया में 647 स्थलों पर 6531.77 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 1 करोड़, 8 लाख, 18 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। वहीं गंगा नदी के किनारे 603 स्थलों पर 4495.72 हेक्टेयर में पौधे लगाए जाएंगे। इसके किनारे 79.86 लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। गंगा किनारे के वन प्रभागों प्रयागराज, प्रतापगढ़, कौशांबी, फतेहपुर, वाराणसी, गाजीपुर, मीरजापुर, भदोही, काशी वन्यजीव व बलिया आदि में यह पौधरोपण प्रस्तावित है। 

 

इन 13 नदियों के समीप होगा अविरल धारा पौधरोपण

 

क्रम  नदी    स्थल   क्षेत्रफल (हेक्टेयर)   पौधों की संख्या 

1  यमुना       647      6531.77 1,08,18,731

2 गंगा         603       4495.72          79,86,512

3 गोमती        297      1521.5          31,37,845

4 सरयू/घाघरा   254      1635.58         27,75,860

5  सई        238      1032.52          23,29,609

6  बेतवा       171       3281.76         52,35,132

7 राप्ती       155          1037.67         16,60,272

8 छोटी गंडक   105       513.00          8,20,800

9  सोन        67        970.63         14,77,158 

10  रामगंगा    51        268.51         4,49,978

11  केन       39       667.9            10,68,381

12  हिंडन     33        131.55          3,16,480

13  चंबल     13         152.00           2,28,200

 

कुल–     2673        22240.11        3,83,04,958 

 

 

मुख्य वन संरक्षक (प्रचार/प्रसार), वन विभाग अदिति शर्मा ने कहा कि पौधरोपण महायज्ञ-2026 के दौरान वन विभाग की तरफ से प्रदेश में 13 नदियों के किनारे अविरल धारा पौधरोपण कराया जाएगा। इसमें मां गंगा, मां यमुना, मां सरयू आदि के नदियों के तट से 5 किमी. की परिधि में पौधरोपण होगा। नदियों के किनारे 3.83 करोड़ से अधिक पौधरोपण को लेकर भी विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। मुख्यमंत्री जी के दिशा-निर्देशन में पौधरोपण महायज्ञ उत्सव के साथ मनाया जाएगा।

E20 पेट्रोल से गाड़ियों को नुकसान के दावे ‘पेड कैंपेन’ का हिस्सा, नितिन गडकरी ने परिवार पर लगे आरोपों कर क्या कहा

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को E20 पेट्रोल (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर उठ रहे सवालों पर तीखा जवाब दिया। उन्होंने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा कि यदि E20 पेट्रोल से किसी वाहन को नुकसान हुआ है तो उसका सिर्फ एक उदाहरण सामने लाकर दिखाएं। उन्होंने ईंधन दक्षता में कमी और वाहनों को नुकसान पहुंचने जैसे दावों को 'पेड कैंपेन' का हिस्सा बताया।

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देश की राजधानी में आयोजित 'विकसित भारत कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि E20 पेट्रोल से किसी भी कार में खराबी आने का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि देश में कोई एक ऐसी कार का नाम बताइए जिसे E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने से कोई समस्या हुई हो। ऐसा एक भी मामला नहीं है। 

 

केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि अधिक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के खिलाफ झूठा प्रचार किया जा रहा है और इसके पीछे प्रायोजित अभियान चलाए जा रहे हैं। गडकरी ने कहा कि भारत आज भी ईंधन आयात पर हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। ऐसे में जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए स्वच्छ एवं वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है।

 

उन्होंने बताया कि भारत पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर चुका है। गन्ना, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों से बनने वाला एथेनॉल न केवल कच्चे तेल के आयात को कम करने में मदद करेगा, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत करेगा।

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अपने परिवार के चीनी मिल कारोबार और एथेनॉल नीति को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी गडकरी ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके परिवार के पास चीनी मिलें जरूर हैं, लेकिन उनका कारोबार एथेनॉल उत्पादन पर निर्भर नहीं है। गडकरी ने यह भी दावा किया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की आय में करीब 45,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई है। इससे किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिला है।

योगी सरकार का बड़ा तोहफा, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगी कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा, छात्रों के खातों में जाएंगे ₹1320 करोड़

CM Yogi in Pilibhit

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कार्मिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को नई मजबूती देने जा रही है। मुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी से 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना' का शुभारंभ करेंगे। इसी कार्यक्रम में परिषदीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के अभिभावकों के खातों में डीबीटी से धनराशि हस्तांतरित की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी समझौता (एमओयू) का आदान-प्रदान होगा। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों को भी सम्मानित किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना से प्रदेश के बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक (सीडब्ल्यूएसएन), अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डेन, पूर्णकालिक एवं अंशकालिक शिक्षक-शिक्षिकाएं, प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइये तथा अन्य पात्र कार्मिक और उनके परिवार लाभान्वित होंगे। इस योजना से लगभग 12 लाख शिक्षक, रसोइये एवं अन्य कार्मिक परिवार सहित स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आएंगे।

 

योजना में प्रति शिक्षक ₹3000 वार्षिक प्रीमियम का पूरा भुगतान राज्य सरकार करेगी। इसके लिए प्रतिवर्ष लगभग ₹447 करोड़ का व्यय किया जाएगा। योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेन्सिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज के माध्यम से होगा। लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में प्रति परिवार पांच लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। योजना में लगभग 1900 उपचार पैकेज शामिल किए गए हैं। इनमें सामान्य उपचार से लेकर गंभीर बीमारियों, जटिल सर्जरी, हृदय रोग, कैंसर, किडनी रोग सहित अनेक उपचार शामिल हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री प्रतीकात्मक रूप से शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा कार्ड भी वितरित करेंगे।

 

अभिभावकों के खातों में ₹1320 करोड़ की धनराशि डीबीटी से भेजी जाएगी 

 

कार्यक्रम में शैक्षिक सत्र 2026-27 के प्रथम चरण में 1 करोड़ 10 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के अभिभावकों के खातों में ₹1320 करोड़ की धनराशि डीबीटी से भेजी जाएगी। यह राशि यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, स्वेटर, जूते-मोजे और स्टेशनरी की खरीद के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। इससे अभिभावकों को बच्चों की आवश्यक शैक्षणिक सामग्री समय पर उपलब्ध कराने में सुविधा मिलेगी।

 

शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच होगा एमओयू 

समारोह के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग और भारतीय स्टेट बैंक के बीच सामाजिक सुरक्षा संबंधी एमओयू भी होगा। इससे लगभग 10 लाख शिक्षक एवं अन्य कार्मिक सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जुड़ेंगे। उन्हें समूह जीवन बीमा, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, स्थायी एवं आंशिक दिव्यांगता कवर, एयर एक्सीडेंट कवर तथा आकस्मिक परिस्थितियों में बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए अतिरिक्त सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। जिन कार्मिकों के वेतन खाते पहले से भारतीय स्टेट बैंक में हैं, उन्हें इन सुविधाओं का लाभ स्वतः मिलेगा। अन्य पात्र कार्मिकों को भी बैंक में वेतन खाता खोलने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापक होंगे सम्मानित

कार्यक्रम में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय (एसएचवीआर) योजना के राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भी सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, शौचालय, हाथ धुलाई और बेहतर विद्यालयी वातावरण विकसित करने के उत्कृष्ट प्रयासों के लिए दिया जाएगा।

योगी सरकार का हाईटेक मिशन : साइबर अपराध पर लगाम के लिए उन्नत तकनीक और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक क्षमता को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस  में रक्षा लेखा विभाग, क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, लखनऊ के 40 अधिकारियों को साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। इस अवसर पर संस्थापक निदेशक डॉ. जी.के. गोस्वामी ने कहा कि भौतिक दुनिया से निकलकर अपराध अब डिजिटल दुनिया में पैर पसार चुका है।

तकनीक के इस दौर में यदि हम सतर्क नहीं रहे, तो कभी भी साइबर ठगी का शिकार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज जिसके पास जितना अधिक डेटा है, वह उतना ही शक्तिशाली है। दुनिया के कई देश सिर्फ इसलिए ताकतवर हैं, क्योंकि वे अपनी तकनीक और डेटा किसी से साझा नहीं करते।

 

डीएनए और एआई लैब में देखीं फॉरेंसिक की बारीकियां

पुलिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने अधिकारियों को साइबर फॉरेंसिक के बढ़ते महत्व से रूबरू कराया। इन अफसरों ने संस्थान की अत्याधुनिक डीएनए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब का भी भ्रमण किया, जहां उन्होंने देखा कि कैसे आधुनिक तकनीक और फॉरेंसिक साइंस मिलकर पेचीदा मामलों को सुलझाते हैं।

 

डॉ. इंद्रजीत ने साइबर सुरक्षा के तकनीकी पहलुओं पर विशेष व्याख्यान दिया और जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने संचालन किया। वहीं, उप निदेशक जितेन्द्र श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस विशेष सत्र के दौरान संस्थान के उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉ. आनंद प्रकाश, अमित मिश्र, राहुल द्विवेदी, डॉ. पलक, शैलेन्द्र सिंह और कार्तिकेय सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

Champat rai : इस्तीफे के बाद चंपत राय का पहला बयान, क्यों हैं चुप, रामभक्तों को लिखे पत्र में क्या कहा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने मंगलवार को कहा कि राम मंदिर के दानपात्रों से कथित दान चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही वह अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों का बिंदुवार जवाब देंगे।

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राम भक्तों के नाम लिखे एक पत्र में चंपत राय ने कहा कि 7 जून 2025 से राम मंदिर परिसर के दानपात्रों से चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। इस दौरान कई लोगों ने उनके खिलाफ व्यक्तिगत रूप से बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक उन्होंने जानबूझकर चुप्पी साधे रखी।

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चंपत राय ने अपने पत्र में लिखा कि 7 जून 2025 से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर के दानपात्रों में प्राप्त दान की गिनती के दौरान कथित चोरी को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं। कई लोगों ने मुझ पर व्यक्तिगत रूप से निराधार आरोप लगाए हैं। मैंने जांच पूरी होने तक मौन रहने का फैसला किया था। 

 

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट की हालिया बैठक के दौरान SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट, जिसे पहले 'टॉप सीक्रेट' रखा गया था, अब सार्वजनिक हो चुकी है। राय ने कहा कि SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद वह क्रमवार हर आरोप का जवाब देंगे और सच्चाई सभी के सामने होगी।

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अपने सार्वजनिक जीवन का जिक्र करते हुए चंपत राय ने कहा कि उन्हें अक्टूबर 1991 में संगठन की ओर से अयोध्या भेजा गया था और उन्होंने 45 वर्षों तक प्रचारक के रूप में सेवा की है। उन्होंने कहा, “जहां-जहां मैंने काम किया, मेरा जीवन हमेशा एक खुली किताब की तरह रहा है।”

गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने दान चोरी विवाद के बीच चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे। ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इस्तीफे मंजूर होते ही दोनों तत्काल प्रभाव से ट्रस्टी नहीं रहे।

योगी सरकार बड़े पैमाने पर स्थापित करेगी बायोगैस संयंत्र, आईआईटी दिल्ली का लेगी सहयोग

Yogi government will set up biogas plants on large scale

– मुख्यमंत्री योगी के गो संरक्षण अभियान के तहत यूपी के हर जिले में बनेगा मॉडल विलेज 

–  झांसी के ग्राम पलींदा में 18 बायोगैस स्थापित, पूरा गांव बनेगा प्राकृतिक कृषि ग्राम

– गो संरक्षण से ग्रीन एनर्जी तक : गांवों में तैयार होगी नवीकरणीय गोबर गैस

Uttar Pradesh news : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गो संरक्षण अभियान को आईआईटी दिल्ली की टेक्नोलॉजी से नई गति मिलने वाली है। आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर और विशेषज्ञों की टीम यूपी में बड़े पैमाने पर बायोगैस संयंत्र स्थापित करने में तकनीकी सहयोग करेगी। इससे प्रदेश के हर जिले में मॉडल विलेज का सपना साकार होगा। गो सेवा और बायोगैस के जरिए यूपी की तस्वीर पूरी तरह बदलने का योगी सरकार का विजन अब धरातल पर उतर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर झांसी के ग्राम पलींदा में 18 बायोगैस स्थापित किए गए हैं।

इस समूचे गांव को प्राकृतिक कृषि ग्राम बनाया जा रहा है। इसी तरह से प्रदेश के हर जिले में एक मॉडल विलेज बनाने की दिशा में बड़ी शुरुआत की गई है। आईआईटी दिल्ली के बायोगैस डेवलपमेंट ट्रेनिंग सेंटर के प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय के नेतृत्व में छात्रों की टीम यूपी में इस अभियान को आगे बढ़ा रही है। टीम में रत्नेश तिवारी, अक्षय श्रीवास्तव, चिंतन दवे और डॉ. मंगाराम शामिल हैं। ये विशेषज्ञ गांवों में बायोगैस प्लांट लगाने, रखरखाव में सहयोग और तकनीकी सपोर्ट देंगे।

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झांसी का पलींदा गांव बनेगा मिसाल

झांसी के ग्राम पलींदा में पहले चरण में 18 बायोगैस प्लांट स्थापित किए गए हैं। योजना है कि यहां हर घर में बायोगैस पहुंच जाए, जिससे पूरा गांव प्राकृतिक कृषि ग्राम के रूप में विकसित किया जाएगा। गोबर से बनी बायोगैस के जरिए खाना पकाने का ईंधन सहजता से उपलब्ध होगा।

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किसानों को मिलेगी बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि बायोगैस संयंत्र होने से गांवों में रासायनिक खादों की जरूरत समाप्त हो जाएगी। किसानों को बेहतरीन ऑर्गेनिक खाद मिलेगी और बाजार में रसायन मुक्त खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। प्रोफेसर वीरेंद्र कुमार विजय के नेतृत्व में आईआईटी दिल्ली की टीम पूरे प्रदेश में इस मॉडल को स्केल-अप करने के लिए काम कर रही है। यह न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि स्वच्छ गांव, स्वस्थ किसान और आत्मनिर्भर यूपी का नया मॉडल पेश करेगा।

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गो सेवा के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि योगी सरकार का यह अभियान गो सेवा के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला साबित होगा। जल्द ही यूपी के सभी जिलों तक इस योजना को पहुंचाने की तैयारी है। जिससे आने वाले समय में गांव-गांव इस मॉडल को अपनाते नजर आएंगे।

राजनीति से संन्यास की ओर दिग्विजय सिंह, दशहरे से शुरु करेंगे उज्जैन से अयोध्या तक की यात्रा

भोपाल। मध्यप्रदेश कांग्रेस में क्या सब कुछ ठीक नहीं है? उज्जैन में वीर भारत न्यास को जमीन आवंटन विवाद मामले पर अपनी ही पार्टी पर सवाल उठाने वाले प्रदेश अध्यक्ष सवाल उठाने वाले दिग्विजय सिंह क्या अब राजनीति से संन्यास लेने जा रहे है? क्या दिग्विजय सिंह अब कांग्रेस में मार्गदर्शन की भूमिका रहेंगे? यह कुछ ऐसे सवाल है जो इन दिनों मध्यप्रदेश के सियासी गलियारों में बेहद चर्चा के केंद्र में है।

दरअसल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सक्रिय चुनावी राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। मंगलवार को मीडिया से  बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान धर्म-कर्म और अध्यात्म की ओर रहेगा। 

 

अब मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं- मीडिया से  बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन का जिक्र करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि वह अब 80 वर्ष के हो चुके हैं और कांग्रेस ने उन्हें हर बड़ा अवसर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं सांसद रहा, विधायक रहा और मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री भी रहा। पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया है। अब मेरी कोई व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा नहीं बची है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने स्वयं पार्टी नेतृत्व से कहा था कि उनकी जगह अब किसी नए चेहरे को अवसर दिया जाए।

 

दशहरे से शुरू होगी धार्मिक यात्रा-दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक होने वाले यात्रा के बारे में कहा कि  पहले यह यात्रा 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब इसे दशहरा पर शुरु करने का फैसला किया गया है।दिग्विजय सिंह ने कहा कि उनकी प्रस्तावित यात्रा में किसी भी राजनीतिक दल का कोई स्थान नहीं होगा। यात्रा का उद्देश्य केवल धार्मिक और सामाजिक समरसता का संदेश देना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा में कांग्रेस या किसी अन्य राजनीतिक दल का झंडा नहीं रहेगा। इसके बजाय विभिन्न धर्मों के प्रतीक झंडे शामिल किए जाएंगे, जो सर्वधर्म समभाव का संदेश देंगे। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान वह न तो कोई राजनीतिक भाषण देंगे और न ही धार्मिक प्रवचन करेंगे। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी इस यात्रा का कोई प्रचार-प्रसार नहीं किया जाएगा।

 

कारसेवक संतोष दुबे होंगे मुख्य अतिथि- दिग्विजय सिंह की यात्रा की खास बात यात्रा में शामिल होने वाले मुख्य अतिथि का है।  दिग्विजय सिंह ने घोषणा की कि अयोध्या आंदोलन के दौरान गोली लगने वाले कारसेवक संतोष दुबे यात्रा के मुख्य अतिथि होंगे। दिग्वजिय सिंह ने कहा कि संतोष दुबे कारसेवक है और उन्हें 4 गोलियां लगी थी। गौरतलब है कि दिग्विजय सिंह ने राममंदिर में चोरी की घटना के विरोध में पहले 2 अक्टूबर से यात्रा निकालने  का एलान किया था। 

 

उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को दक्ष बनाने में जुटी योगी सरकार

Yogi government is working to equip youth with skills aligned with industry demands

– आईटीआई, कौशल विकास केंद्रों की होगी नियमित मॉनिटरिंग, शॉर्ट टर्म रोजगारपरक कोर्स पर जोर 

– अगले माह से आश्रम पद्धति विद्यालयों में भी आधुनिक कौशल के विकास के लिए शुरू होंगे कोर्स

– अटल आवासीय विद्यालयों में विद्यार्थियों को दिया जा रहा आधुनिक कौशल आधारित प्रशिक्षण

– कौशल विकास में यूपी को देश का अग्रणी राज्य बनाने का प्रयास कर रही योगी सरकार

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक तकनीक, उद्योगों की आवश्यकताओं तथा रोजगारोन्मुखी कौशल से जोड़ने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने सोमवार को विधानभवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में विभागीय समीक्षा बैठक में कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक युवा को हुनरमंद बनाकर रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभाग की सभी योजनाओं का समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

 

मंत्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग द्वारा संचालित सभी योजनाओं की जनपद एवं मुख्यालय स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए तथा प्रत्येक प्रशिक्षण केंद्र की प्रगति की सतत निगरानी रखी जाए। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी जवाबदेही एवं संवेदनशीलता के साथ करें। कौशल विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।

 

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकताओं को देखते हुए युवाओं के लिए अधिक से अधिक शॉर्ट टर्म एवं रोजगारपरक कौशल पाठ्यक्रम प्रारंभ किए जाएं। प्रशिक्षण कार्यक्रमों में सॉफ्ट स्किल, डिजिटल लर्निंग, संवाद कौशल, इंटरव्यू तैयारी, रिज्यूमे लेखन तथा व्यक्तित्व विकास जैसे विषयों को भी शामिल किया जाए, जिससे प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की रोजगार क्षमता और अधिक बढ़ सके।

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मंत्री ने कहा कि योगी सरकार की मंशा केवल प्रशिक्षण उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को रोजगार से जोड़ना भी है। इसलिए विभाग उद्योगों के साथ मजबूत समन्वय स्थापित करे तथा स्थानीय उद्योगों की मांग के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि आईटीआई एवं कौशल विकास संस्थानों में आयोजित होने वाले रोजगार मेलों की जानकारी अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाई जाए ताकि प्रत्येक इच्छुक अभ्यर्थी को अपनी योग्यता एवं रुचि के अनुसार रोजगार प्राप्त करने का अवसर मिल सके।

 

बैठक में अटल आवासीय विद्यालयों में संचालित स्किलिंग कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।  जिसमें  बताया गया कि इन विद्यालयों में विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। साथ ही अगले माह से आश्रम पद्धति विद्यालयों में भी स्किलिंग कोर्स प्रारंभ किए जाएंगे, जिससे सामाजिक एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों को भी तकनीकी दक्षता प्राप्त हो सके।

 

मंत्री अग्रवाल ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं की सफलता की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। ऐसे युवाओं के वीडियो, अनुभव एवं उपलब्धियों को सोशल मीडिया सहित अन्य माध्यमों से साझा किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा प्रेरित होकर कौशल विकास कार्यक्रमों से जुड़ें।

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कौशल विकास मंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीकों जैसे रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, सीएनसी, डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग तथा इंडस्ट्री 4.0 से संबंधित प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने उद्योगों के साथ साझेदारी मजबूत करने, प्रशिक्षण सामग्री को समय-समय पर अद्यतन करने तथा विद्यार्थियों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण के अनुरूप तैयार करने पर विशेष बल दिया।

 

बैठक में विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्लेसमेंट, उद्योगों के साथ समन्वय, डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रशिक्षण भागीदारों, निर्माण कार्यों तथा भविष्य की कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। इस दौरान प्रशिक्षण संस्थानों की क्षमता वृद्धि, ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार, प्रशिक्षण भागीदारों के प्रदर्शन मूल्यांकन तथा लंबित कार्यों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने पर भी विस्तार से चर्चा की गई। 

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मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने  कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप उत्तर प्रदेश को देश का अग्रणी कौशलयुक्त मानव संसाधन वाला राज्य बनाने के लिए विभाग पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगा। प्रत्येक योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, प्रत्येक प्रशिक्षित युवा को रोजगार अथवा स्वरोजगार का अवसर मिले तथा प्रदेश के औद्योगिक विकास को कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो, यही योगी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

Ali Khamenei Funeral : खामेनेई की अंतिम यात्रा पर बवाल, रूट बदलने से भड़के समर्थक, ईरान ने भारत को क्यों कहा धन्यवाद

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के दौरान अंतिम समय में जुलूस का मार्ग बदल दिए जाने को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। कई दिनों तक सरकारी प्रचार और आधिकारिक घोषणाओं के बाद अंतिम यात्रा के तय रूट में अचानक बदलाव होने से हजारों लोग भ्रमित हो गए। इस मामले पर सरकार समर्थक नेताओं और कट्टरपंथी खेमे से जुड़े मीडिया कार्यकर्ताओं ने भी आयोजन समिति पर कुप्रबंधन, गलत सूचना देने और लोगों को गुमराह करने के आरोप लगाए हैं।

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हजारों लोग पुराने रूट पर करते रहे इंतजार

इस्लामिक रिपब्लिक के अधिकारियों द्वारा पहले जारी कार्यक्रम के अनुसार, खामेनेई के पार्थिव शरीर को लेकर वाहन पूर्वी तेहरान की दमावंद स्ट्रीट से आजादी स्क्वायर तक लगभग 20 किलोमीटर लंबे मार्ग से गुजरने वाला था, लेकिन अंतिम यात्रा के दिन ट्रक ने केवल शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के पास से आजादी स्क्वायर तक का छोटा रास्ता तय किया। रूट में अचानक बदलाव की जानकारी समय पर नहीं मिलने के कारण पूर्वी तेहरान में सुबह से इंतजार कर रहे हजारों लोग अंतिम दर्शन से वंचित रह गए।

आयोजकों ने मांगी माफी

लोगों के विरोध के बाद तेहरान में आईआरजीसी की मोहम्मद रसूलुल्लाह कोर के कमांडर और अंतिम यात्रा आयोजन समिति के प्रमुख हसन हसनजादेह ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी। उन्होंने दावा किया कि भारी भीड़ के कारण रास्ते पूरी तरह बंद हो गए थे, इसलिए रूट बदलना पड़ा। हालांकि उनका यह स्पष्टीकरण लोगों के गुस्से को शांत नहीं कर सका।

सरकार समर्थक भी हुए नाराज

खामेनेई के कार्यालय से जुड़े मेहदी फजाएली ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कार्यक्रम में कई सकारात्मक पहलू थे, लेकिन सरकारी मीडिया लोगों की नाराजगी दिखाने में पूरी तरह विफल रहा। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे थे।

 

प्रिंसिपलिस्ट खेमे से जुड़े मीडिया एक्टिविस्ट मेयसाम सईदी ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि उनसे झूठ क्यों बोला गया। उन्होंने पूछा कि यदि भीड़ की वजह से रूट बदला गया था तो पार्थिव शरीर को कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही नए स्थान पर कैसे पहुंचा दिया गया।

 

एक अन्य मीडिया कार्यकर्ता अबूजर नसर ने भी आयोजन समिति पर खराब प्रबंधन और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पार्थिव शरीर को एक रात पहले ही मिकदाद सैन्य अड्डे पर पहुंचा दिया गया था, लेकिन इसकी जानकारी लोगों को नहीं दी गई। इससे हजारों लोग घंटों तक पुराने रूट पर बेवजह इंतजार करते रहे।

अंतिम विदाई से वंचित रहे लोग

'जिहाद-ए-तबयीन' नामक टेलीग्राम चैनल ने भी आयोजन समिति की आलोचना करते हुए कहा कि लोगों से वादा किया गया था कि अंतिम यात्रा पूर्वी तेहरान से निकलेगी, लेकिन वास्तविकता इससे अलग थी। कई लोग दूसरे शहरों से अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन वे खामेनेई को अंतिम विदाई भी नहीं दे सके। हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया इस अंतिम यात्रा को देश के इतिहास की सबसे बड़ी जनसभाओं में से एक बता रहा है, लेकिन रूट बदलने का विवाद अब इस पूरे आयोजन का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

 ईरान ने  भारत को कहा धन्यवाद

इस बीच ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए भारत सरकार और भारतीय प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त किया है। भारत की ओर से कांग्रेस नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने तेहरान पहुंचकर अंतिम संस्कार में भाग लिया।

भारत स्थित ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा कि भारत सरकार, भारतीय जनता और आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों का प्रतीक है। दूतावास ने इसे आपसी सम्मान और सच्ची एकजुटता का मजबूत संदेश बताया।

 

ईरान ने खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए भारत समेत लगभग 100 देशों को आमंत्रित किया था। अंतिम यात्रा तेहरान के अलावा इराक के नजफ और कर्बला सहित कई शहरों से होकर गुजरेगी। अधिकारियों के अनुसार पार्थिव शरीर को लगभग 12 घंटे की यात्रा के बाद मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक ले जाया जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।