Weather Update : इन राज्यों में आगे बढ़ा मानसून, यहां बारिश और बाढ़ ने मचाई तबाही, कैसा है मुंबई का हाल?

monsoon has advanced into these states,  Heavy damage has been caused here by rain and floods

Weather Update News : देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर बेहद सक्रिय हो गया है। भारी बारिश से महाराष्ट्र, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और ओडिशा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग ने आज गुजरात और कोंकण तथा कल मध्य महाराष्ट्र, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। साथ ही कई जगहों पर आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी है। 

 

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर बेहद सक्रिय हो गया है। भारी बारिश से महाराष्ट्र, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और ओडिशा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है।

ALSO READ: Weather Update: मुंबई और कोंकण में बारिश का रेडअलर्ट, पहाड़ों पर आफत, दिल्ली NCR में गर्मी से राहत

मौसम विभाग ने आज गुजरात और कोंकण तथा कल मध्य महाराष्ट्र, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल व सिक्किम में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। साथ ही कई जगहों पर आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी दी है। मुंबई और आसपास के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

मौसम विभाग के मुताबिक, झारखंड और ओडिशा के ऊपर एक 'डिप्रेशन' बना हुआ है, जो धीरे-धीरे मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ रहा है। इसके असर से उत्तर से लेकर पश्चिम भारत तक के राज्यों में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में झमाझम बारिश की संभावना जताई गई है।

ALSO READ: Weather Update : उत्‍तर भारत पहुंचा मानसून, मुंबई में बारिश बनी 'आफत', जानें देशभर का मौसम

वहीं दक्षिण भारत में केरल और कर्नाटक के तटीय व अंदरुनी इलाकों में भारी बारिश की संभावना है। बांदा जिले में आज सुबह कई इलाकों में रुक-रुक कर झमाझम बारिश हुई। इससे पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और उमस से लोगों को राहत मिली। बारिश के बाद मौसम सुहाना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। 

monsoon has advanced into these states,  Heavy damage has been caused here by rain and floods

मुंबई में भारी बारिश का कहर

मुंबई और नासिक समेत महाराष्ट्र में मंगलवार को भारी बारिश का दौर जारी है। मुंबई में भारी बारिश की वजह से पिछले 4 दिनों से जनजीवन प्रभावित हुआ है। स्कूल कॉलेज बंद है और त्रयंबकेश्वर और सप्तऋंगी मंदिर भी आज नहीं खुलेंगे। सेना और एनडीआरएफ को भी अलर्ट पर रखा गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज विशेष रूप से रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

ALSO READ: Weather Update : दिल्‍ली पहुंचा मानसून, महाराष्‍ट्र में बारिश से हाल बेहाल, 19 राज्यों में IMD का अलर्ट

मुंबई, पालघर और पुणे में भी ऐसी ही स्थिति है। मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विभाग ने पूरे राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। नासिक में भारी बारिश के साथ बादल फटने की चेतावनी भी जारी की है।

पीएम मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान, कई समझौतों पर लगी मुहर

pm modi in indonesia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान 'इंडोनेशिया गणराज्य के बिंटांग आदिपूर्णा' प्रदान किया गया। इसके बाद इंडोनेशिया के राष्‍ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भारत और इंडोनेशिया के बीच समझौतों के आदान-प्रदान के गवाह बने। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और आत्मीय संबंधों का है, जिसे मिलकर दोनों देश आगे बढ़ाएंगे। ALSO READ: SIT जांच में बड़ा खुलासा, 40 दिनों में 70 बार चढ़ावे की चोरी, गिनती कक्ष में सुरक्षा मानकों की अनदेखी

किन लोगों को दिया जाता है यह सम्मान?

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान 'बिंटांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया मेडल ऑफ ऑनर' दिया है। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने इंडोनेशिया की एकता, निरंतरता और समृद्धि के लिए असाधारण सेवा की है। इंडोनेशिया ने पीएम मोदी को इस सम्मान के लिए चुना है।

 

सर्वोच्च सम्मान मिलने पर क्या बोले पीएम मोदी?

उन्होंने कहा कि मैं इस गर्मजोशी से स्वागत के लिए अपने मित्र राष्ट्रपति प्रबोवो का आभार व्यक्त करता हूं। पिछले वर्ष भारत के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में हमें उनका स्वागत करने का अवसर मिला। आज उनके आत्मीयता भरे निमंत्रण पर इंडोनेशिया की यात्रा करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज सुबह मुझे बहुत स्नेह के साथ, आदर के साथ इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। ये सम्मान कोटि-कोटि भारतवासियों का है। इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं का है, भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और आत्मीय संबंधों का है। मैं राष्ट्रपति प्रबोवो, इंडोनेशिया की सरकार और यहां की जनता का आभार व्यक्त करता हूं।

 

प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट पर क्या बोले पीएम मोदी?

पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति प्राबोवो के साथ योग्याकार्ता में प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करने का सौभाग्य मिलेगा। प्रम्बानन मंदिर एक हजार साल से भी पुराना है और भारत-इंडोनेशिया की साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।

अहमदाबाद 2008 सीरियल ब्लास्ट केस, गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा रखी बरकरार

Death sentences of 38 convicts upheld in 2008 Ahmedabad serial blast case

वर्ष 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) के फैसले को पूरी तरह मान्य रखते हुए 38 दोषियों को सुनाई गई फांसी की सजा और 11 दोषियों को दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। इसके साथ ही कोर्ट ने दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दायर की गई सभी अपीलों को खारिज कर दिया है। इस फैसले के मद्देनजर गुजरात हाईकोर्ट परिसर में बम स्क्वॉड और भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

 

साल 2008 का वो काला दिन : 21 धमाके, 56 मौतें और देश के इतिहास का सबसे बड़ा फैसला

गौरतलब है कि 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद शहर के 20 अलग-अलग स्थानों पर हुए 21 सीरियल बम ब्लास्ट में 56 बेकसूर लोगों ने अपनी जान गंवाई थी और 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में साल 2022 में अहमदाबाद सिटी सेशंस कोर्ट ने एक साथ 38 आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे देश के न्यायिक इतिहास में सबसे बड़ा फैसला माना गया था। इस मामले में कुल 78 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चलाया गया था, जिसमें से सेशंस कोर्ट ने 49 आरोपियों को दोषी करार दिया था और 29 आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।

ALSO READ: गुजरात के साणंद में 7,500 रुपए करोड़ के CG Semi सेमीकंडक्टर प्लांट से उत्पादन शुरू, जापान-मलेशिया को होगा चिप्स निर्यात

घायलों को मुआवजा देने का आदेश : मार्च 2027 तक की समय सीमा तय

गुजरात हाईकोर्ट ने सजा बरकरार रखने के साथ ही पीड़ितों के लिए मुआवजे की भी घोषणा की है। कोर्ट ने अपने फैसले में आदेश दिया है कि इस ब्लास्ट में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को 5 लाख रुपए और मामूली रूप से घायल हुए लोगों को 1 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए। मुआवजे की यह राशि चुकाने के लिए हाईकोर्ट ने 31 मार्च, 2027 तक की समय सीमा (डेडलाइन) तय की है।

ALSO READ: गुजरात ATS का बड़ा ऑपरेशन, रथयात्रा से पहले जैश के 8 आतंकी गिरफ्तार

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब दोषियों के पास सुप्रीम कोर्ट का आखिरी विकल्प

निचली अदालत के फैसले के बाद राज्य सरकार ने फांसी की सजा की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जबकि दूसरी तरफ दोषियों ने भी सजा के खिलाफ अपील की थी। अब गुजरात हाईकोर्ट द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाने के बाद, कानूनी प्रक्रिया के तहत दोषियों के पास देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का आखिरी विकल्प बचा है। यदि दोषी वहां याचिका दायर करते हैं, तो इस मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी।

धरती का विकल्प बन सकते हैं ये 4 ग्रह? जेम्स वेब और केप्लर की खोज ने चौंकाया

Earth 4 Exoplanets discover

हमारी आकाशगंगा (Milky Way) में अरबों तारे यानी हमारे सूर्य जैसे सूर्य हैं और वैज्ञानिक अब तक 5,500 से अधिक एक्सोप्लैनेट्स की पुष्टि कर चुके हैं। एक्सोप्लैनेट उन ग्रहों को कहा जाता है जो हमारे सौर मंडल से बाहर किसी अन्य तारे की परिक्रमा करते हैं। हाल के वर्षों में जेम्स वेब और केप्लर जैसे स्पेस टेलिस्कोप के कारण इन पर रिसर्च बहुत तेज़ हुई है। वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसे 'सुपर-अर्थ' और 'सुपर-हैबिटेबल' ग्रहों की पहचान की है, जो आकार में पृथ्वी से बड़े हैं और वहां की परिस्थितियां जीवन के पनपने के लिए पृथ्वी से भी बेहतर हो सकती हैं।

 

एलियन लाइफ: 

यहाँ उन 4 सबसे रोमांचक एक्सोप्लैनेट्स की वास्तविक जानकारी दी जा रही है, जहाँ जीवन या एलियन लाइफ होने की संभावना सबसे ज़्यादा जताई जा रही है।

1. केप्लर-452b (Kepler-452b) – पृथ्वी का बड़ा भाई

इसे अक्सर 'पृथ्वी 2.0' या 'अर्थ कज़िन' कहा जाता है। यह पृथ्वी से लगभग 1,400 प्रकाश वर्ष दूर सिग्नस तारामंडल में स्थित है। यह ग्रह अपने तारे से ठीक उतनी ही दूरी पर है जितनी दूरी पर पृथ्वी सूर्य से है। इसका मतलब है कि यह अपने तारे के 'हैबिटेबल ज़ोन' (गोल्डीलॉक्स ज़ोन) में है, जहाँ पानी तरल रूप में मौजूद रह सकता है। यह आकार में पृथ्वी से करीब 60% बड़ा है और यहाँ का एक साल 385 दिनों का होता है।

 

2. केप्लर-22b (Kepler-22b)– महासागरों वाली दुनिया

यह नासा के केप्लर मिशन द्वारा खोजा गया पहला ऐसा ग्रह था जो अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र में पाया गया था। यह पृथ्वी से करीब 600 प्रकाश वर्ष दूर है। इसका आकार पृथ्वी से लगभग 2.4 गुना बड़ा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस ग्रह पर बड़े पैमाने पर पानी या एक विशाल महासागर मौजूद हो सकता है, जो जीवन के अनुकूल वातावरण तैयार करता है। (नोट: मूल खबरों में दिखने वाला “08:41” कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं बल्कि वीडियो टाइमस्टैम्प या टाइपो त्रुटि थी, और केप्लर कोई वीडियो फुटेज नहीं बल्कि डेटा और प्रकाश की तीव्रता की तस्वीरें भेजता है)।

 

3. प्रॉक्सिमा सेंटॉरी बी (Proxima Centauri b)– हमारा सबसे करीबी पड़ोसी

यह हमारे सौर मंडल का सबसे नज़दीकी एक्सोप्लैनेट है, जो पृथ्वी से केवल 4.2 प्रकाश वर्ष दूर है। यह हमारे सबसे पास के तारे 'प्रॉक्सिमा सेंटॉरी' की परिक्रमा करता है। यह ग्रह द्रव्यमान (mass) में पृथ्वी के लगभग बराबर है और इसके चट्टानी होने की पूरी संभावना है। यह अपने तारे के रहने योग्य क्षेत्र में आता है, जिससे यह भविष्य के मानव मिशनों और जीवन की खोज के लिए सबसे महत्वपूर्ण टारगेट बन गया है।

 

4. के2-18बी (K2-18b)– पानी के बादलों वाला ग्रह

यह पृथ्वी से लगभग 120 प्रकाश वर्ष दूर एक रेड ड्वार्फ (लाल बौने) तारे की परिक्रमा कर रहा है। जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) की हालिया स्टडीज में इसके वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन के साथ-साथ जलवाष्प (Water Vapor) की उपस्थिति पाई गई है। यह एक 'हाइसियन' (Hycean) ग्रह हो सकता है, जिसका अर्थ है कि इसके पास हाइड्रोजन से समृद्ध वायुमंडल और पानी से ढकी हुई सतह हो सकती है, जो इसे एलियन लाइफ की खोज के लिए सबसे हॉट स्पॉट बनाती है।

ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

king charles

-निखिल रंजन

ब्रिटेन के किंग चार्ल्स पहले राजा हैं जिन्होंने यह बताया है कि वह कितना टैक्स देते हैं। अब अगर राजा टैक्स दे रहे हैं तो जाहिर है कि कमाते भी होंगे। आखिर यह कमाई कहां से और कैसे होती है? चलिए जानते हैं। ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर

 

ब्रिटेन के आलीशान महलों में रहने वाले शाही खानदान के लोग ना सिर्फ राजसी ठाठ बाट से रहते हैं बल्कि दुनिया भर में इसी शानो शौकत के साथ यात्रा भी करते हैं। शाही खानदान के पास आने वाले धन की व्यवस्था थोड़ी जटिल है। यह बीते कई सदियों में विकसित हुई है। शाही परिवार के सदस्यों का कहना है कि वे इस आमदनी और खर्च को ज्यादा पारदर्शी बनाना चाहते हैं हालांकि फिर भी बहुत सारा हिस्सा है जो निजी और गुप्त है।

 

राजा यानी ब्रिटेन के किंग को राष्ट्रप्रमुख के रूप में अपनी भूमिका निभाने में आधिकारिक दायित्वों को पूरा करने, निजी खर्चे और परिवार के शाही कर्तव्यों के लिए कई तरीकों से धन मिलता है।

 

राजा के लिए सरकारी धन

हर साल राजा को सरकार की ओर से एक निश्चित धन मिलता है। ब्रिटेन की सरकार यह धन राजा और उनके परिवार को उनकी आधिकारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए देती है। इनमें शाही महल और उनके दूसरे आवासों और ऐतिहासिक इमारतों की देखरेख और यात्रा के खर्चे भी शामिल हैं। हालांकि शाही परिवार के सदस्यों को इससे निजी तौर पर कोई आमदनी नहीं होती।

 

यह धन कितना होगा इसकी गणना क्राउन इस्टेट से होने वाले मुनाफे के आधार पर की जाती है। इसमें शाही परिवार के पास मौजूद ढेर सारी जमीनें और सागर के हिस्से शामिल हैं। कानूनी रूप से ये इस्टेट शाही परिवार की मिल्कियत हैं लेकिन 1760 में राजा ने इससे होने वाली आय को एक सालाना भुगतान के बदले ब्रिटेन की सरकार को दे दिया। इन्हें व्यापारिक तरीके से इस्तेमाल किया जाता है।

 

सरकारी फंड इन संपत्तियों से होने वाली आय का करीब 12 फीसदी होता है। हाल के वर्षों में यह सागर तट से दूर बनने वाली विंडफार्मों के लाइसेंस की वजह से काफी ज्यादा बढ़ी है 2025/26 में इसके जरिए शाही परिवार को करीब 13.21 करोड़ पाउंड की रकम मिली। 2026/27 में यह रकम 13.97 करोड़ पाउंड है।

 

2027 से 2032 में यह सरकारी धन घटा कर 10 करोड़ पाउंड कर दिया जाएगा। इसकी एक वजह यह है कि बकिंघम पैलेस की नई साजसज्जा के लिए 36.9 करोड़ पाउंड के रकम की जरूरत नहीं रहेगी। इसके साथ ही क्राउन इस्टेट के मुनाफे में भी कमी होने के आसार हैं क्योंकि विंडफार्मों की लीज में गिरावट आ रही है। ALSO READ: दुर्गा स्क्वॉड कैसे बदलेगा बंगाल में महिला सुरक्षा का हाल?

 

डची ऑफ लैंकस्टर

1399 से ही सत्तासीन राजा को डची ऑफ लैंकस्टर से आय होती है। यह इस्टेट करीब 41,910 एकड़ में फैला है। इनमें लंदन के मध्य और कुछ दूसरे शहरों में व्यापारिक इमारतें भी हैं। मार्च 2026 में इस संपत्ति की कीमत 68.73 करोड़ पाउंड आंकी गई।

 

राजा इसकी जमीन बेच कर कोई धन हासिल नहीं कर सकता हालांकि हर साल इस एस्टेट से होने वाले शुद्ध मुनाफे पर उसका अधिकार है। 2025/26 में यह मुनाफा करीब 2.52 करोड़ पाउंड था। राजा इस पैसे का इस्तेमाल अपने निजी घरों और शाही परिवार के उन सदस्यों की आय के लिए करता है। ये लोग शाही कामकाज में हिस्सा लेते हैं और उसके बदले आधिकारिक आवासों में रहते हैं। इन्हें बाहर से कमाई करने की इजाजत नहीं है।  

 

फिलहाल इस लिस्ट में प्रिंसेस ऐन उनके छोटे भाई प्रिंस एडवर्ड और उनकी पत्नी, ड्यूक और डचेस ऑफ ग्लूसेस्टर, ड्यूक ऑफ केंट और प्रिंसेस अलेक्जैंड्रा शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की निजी आमदनी का मतलब है कि राजा पर कोई राजनीतिक दबाव या बाहरी प्रभाव का असर नहीं  होगा। 

 

चार्ल्स के छोटे बेटे प्रिंस हैरी और उनके भाई एंड्रयू माउंटबेटेन विंडसर अब भी शाही परिवार के सदस्य हैं। हालांकि उन्हें कोई सार्वजनिक धन नहीं मिलता क्योंकि ये दोनों उन शाही सदस्यों में नहीं हैं जिन्हें कोई आधिकारिक कर्तव्य निभाना हो।

 

राजा के पास निजी अघोषित संपत्तियां और निवेश भी हैं। इसके अलावा उन्हें स्कॉटलैंड के बालमोरल कासल और पूर्वी इंग्लैंड के सांदरिंघम से भी कमाई होती है। यहां से होने वाली आय को सार्वजनिक नहीं किया जाता है। ALSO READ: नया रक्षा बैंक क्यों बनाना चाहता है नाटो का सदस्य कनाडा

 

डची ऑफ कॉर्नवाल

1337 में बना डची ऑफ कॉर्नवाल शाही परिवार के वारिस के लिए आमदनी मुहैया कराता है। फिलहाल प्रिंस विलियम और उनकी पत्नी केट को यह आमदनी मिलती है।

 

करीब 128,151 एकड़ का यह एस्टेट इग्लैंड और वेल्स में फैला है। इसकी संपत्ति का मूल्य मार्च 2026 के आखिर में करीब 1.2 अरब पाउंड था। विलियम को इसका विशुद्ध राजस्व हासिल होता है। 2025/26 में यह धन 2.155 करोड़ पाउंड था।

 

किंग चार्ल्स और शाही परिवार का टैक्स

कानून के मुताबिक ब्रिटेन के राजा को आयकर, पूंजी लाभ और विरासत टैक्स नहीं देना होता है। 1993 में क्वीन एलिजाबेथ अपनी मर्जी से आयकर देने के लिए तैयार हुई थीं। उस वक्त शाही परिवार एक अलगाव के दौर से गुजर रहा था और उसकी छवि काफी बिगड़ गई थी। यह वही समय था जब चार्ल्स आधिकारिक रूप से अपनी पहली पत्नी प्रिंसेस डायना से अलग हुए। इसी समय एंड्रयू माउंटबेटेन विंडस अपनी पत्नी सारा फर्ग्युसन से अलग हुए और प्रिंसेस ऐन ने अपने पहले पति को तलाक दिया। आयकर के रूप में महारानी ने कितना धन दिया इसकी जानकारी कभी नहीं दी गई।

 

महारानी के वारिस चार्ल्स ने भी अपनी मर्जी से टैक्स दिया है। शुक्रवार, 3 जुलाई को इन रकमों की जानकारी पहली बार सार्वजनिक की गई। शाही अधिकारियों का कहना है कि चार्ल्स ने 2024/25 csx 1.29 करोड़ पाउंड टैक्स दिया जबकि 2023/24 में 1.17 करोड़ पाउंड। अधिकारियों के मुताबिक राजा बनने के बाद चार्ल्स 3 करोड़ पाउंड की रकम टैक्स में दे चुके हैं। इन भुगतानों से वह ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा टैक्स देने वाले 100 लोगों में शामिल हो एक हैं। हालांकि इस टैक्स की गणना का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया है।

 

प्रिंस विलियम के कार्यालय ने बताया है कि उन्होंने 2024/25 में 77.6 लाख पाउंड और 2023/24 में 83.4 लाख पाउंड टैक्स दिया। वारिस बनने के बाद अब तक उन्होंने 2 करोड़ पाउंड टैक्स में दिया है।

अब डोडा के ठाठरी में बाढ़ से जबरदस्‍त तबाही, नेशनल हाईवे बंद, संपत्ति को भारी नुकसान

Flash floods wreaked havoc at several places in Thathri area of ​​Doda district

Jammu & Kashmir weather update : मंगलवार को डोडा जिले के ठाठरी इलाके में कई जगहों पर फिर से अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) आई, जिससे संपत्ति को भारी नुकसान हुआ और आम जनजीवन प्रभावित हुआ। पिछले 24 घटों में डोडा में यह तबाही दूसरी बार आई है। इससे पहले प्रेम नगर में बादज फटने से भयानक तबाही हुई थी।

अधिकारियों ने बताया कि जबरदस्त बाढ़ के कारण ठाठरी शहर में कई इमारतों और ढांचों को नुकसान पहुंचा है। अनुमान है कि लाखों रुपए की संपत्ति प्रभावित हुई है। बाढ़ के बाद नेशनल हाईवे भी बंद हो गया, जिससे ट्रैफिक में रुकावट आई और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

ALSO READ: डोडा में दो बार बादल फटने का असर: गांव कटे, सड़कें बह गईं

अधिकारियों का कहना है कि वे जमीनी स्तर पर स्थिति का जायजा ले रहे हैं, साथ ही प्रभावित इलाकों में कनेक्टिविटी और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए मरम्मत और सफाई का काम चल रहा है। कल भी डोडा के प्रेम नगर में अचानक बाढ़/भूस्खलन (मडस्लाइड) के कारण सड़क बंद हो गई थी, जिससे ज़िले में सड़क संपर्क बाधित हुआ था। 

Flash floods wreaked havoc at several places in Thathri area of ​​Doda district

अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है कि डोडा जिले में भारी बारिश के कारण मंगलवार को ठाठरी शहर के ऊपरी इलाकों में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे कई घरों, दुकानों और गाड़ियों को आंशिक नुकसान पहुंचा। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।


पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद डोडा और किश्तवाड़ जिलों में पिछले दो दिनों में अचानक बाढ़ आने की यह तीसरी घटना है। अधिकारियों ने बताया कि ऊपरी इलाकों में भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई, जिससे ठाठरी शहर में बड़े पत्थर, कीचड़ और मलबा जमा हो गया। कीचड़ और पत्थरों के बहाव से कई रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।

ALSO READ: Weather Update: मुंबई और कोंकण में बारिश का रेडअलर्ट, पहाड़ों पर आफत, दिल्ली NCR में गर्मी से राहत

यह घटना लगातार बारिश के कारण आई अचानक बाढ़ से डोडा-किश्तवाड़ हाईवे के उस हिस्से को नुकसान पहुंचने के एक दिन बाद हुई है, जो निर्माणाधीन 540 मेगावाट की क्वार जलविद्युत परियोजना के पास है। डोडा के डिप्टी कमिश्नर कृष्ण लाल ने कहा कि प्रशासन ने जिले भर में बारिश से जुड़ी घटनाओं पर तुरंत कार्रवाई की और प्रभावित सड़कों को बहाल किया।
Edited By : Chetan Gour

बाबा बर्फानी अंतर्ध्यान: अमरनाथ यात्रा शुरू होने के सिर्फ 5 दिन में पिघला हिमलिंग, एक्सपर्ट्स ने बताई बड़ी वजह

amarnath himling

अमरनाथ यात्रा का प्रतीक हिमलिंग इस बार यात्रा शुरू होने के 5 दिनों में ही पिघल गया। इस बार 5 दिनों में ही सरकारी तौर पर एक लाख श्रद्धालु गुफा तक पहुंचे और गैर सरकारी तौर पर यह आंकड़ा डेढ़ लाख है। ऐसे में हर बार रक्षा बंधन से पहले ही भक्तों के सांसों की गर्मी और मौसम की गर्मी से तेजी से पिघलता अमरनाथ यात्रा का प्रतीक हिमलिंग एक बार फिर विवाद का मुद्दा बन गया है। 

 

अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड ने झाड़ा पल्ला

अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने इसके पिघलने की प्रक्रिया से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि कश्मीर के पर्यावरणविद इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने की अनुमति देने से ऐसा हुआ है।

 

भक्तों की गर्म सांसों से पिघल रहा है हिमलिंग!

पिछले कई सालों से जिस तेजी से हिमलिंग पिघल रहा है उसे रोकने की खातिर किए जाने वाले उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। दरअसल गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से हिमलिंग को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि लाखों भक्तों की गर्म सांसों को हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है। श्राइन बोर्ड के अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर भक्तों की सांसों की थ्योरी को मानते हैं पर प्रत्यक्ष तौर पर वे इसे कुदरती प्रक्रिया करार देते थे।

 

क्या थी नीतिन सेन गुप्ता कमेटी की सिफारिश

श्राइन बोर्ड के अधिकारी कहते हैं कि ग्लोबल वार्मिंग भी इसे प्रभावित कर रही है। वे इससे इंकार करते हैं कि गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। वर्ष 1996 के अमरनाथ हादसे के बाद नीतिन सेन गुप्ता कमेटी की सिफारिश थी कि 75 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल न होने दिया जाए। पर ऐसा कभी नहीं हो पाया। इस बार अभी तक डेढ़ लाख श्रद्धालु गुफा में पहुंचे हैं।

 

नाराज हैं पर्यावरणविद

इस पर पर्यावरणविद खफा हैं। वे कहते हैं कि यात्रियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि न सिर्फ हिमलिंग को पिघलाने में अहम भूमिका निभा रही है, यात्रा मार्ग के पहाड़ों के पर्यावरण को भी जबरदस्त क्षति पहुंचा रही है। श्राइन बोर्ड श्रद्धालुओं की संख्या को कम करने को राजी नहीं दिखता है।

 

यात्रा शुरू होने के बाद भक्तों के अलावा गुफा के आस-पास बड़ी तादाद में सुरक्षाकर्मी भी मौजूद हैं। भारी भीड़ की वजह से अमरनाथ गुफा के आसपास का तापमान और बहुत बढ़ गया है, हालांकि श्राइन बोर्ड ने दावा किया था कि पिछले दो तीन साल में उन्होंने कुछ ऐसे उपाय किए हैं, जिससे गुफा तापमान ना बढ़े। एक बार फिर बढ़ती गर्मी को भी एक कारण ठहराया जा रहा है।
edited by : Nrapendra Gupta

Live : पीएम मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान

pm modi in indonesia

Latest News Today Live Updates in Hindi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंगलवार को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान 'इंडोनेशिया गणराज्य के बिंटांग आदिपूर्णा' प्रदान किया गया। पल पल की जानकारी…

मुंबई और नासिक समेत महाराष्ट्र में मंगलवार को भारी बारिश का दौर जारी है। मुंबई में भारी बारिश की वजह से पिछले 4 दिनों से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने पूरे राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। नासिक में भारी बारिश के साथ बादल फटने की चेतावनी भी जारी की गई है। स्कूल कॉलेज बंद है और त्रयंबकेश्वर और सप्तऋंगी मंदिर भी आज नहीं खुलेंगे। सेना और एनडीआरएफ को भी अलर्ट पर रखा गया है।

इंडोनेशिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान 'इंडोनेशिया गणराज्य के बिंटांग आदिपूर्णा' सम्मान पदक से सम्मानित किया।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो भारत और इंडोनेशिया के बीच समझौतों के आदान-प्रदान के गवाह बने।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैं इस गर्मजोशी से स्वागत के लिए अपने मित्र राष्ट्रपति प्रबोवो का आभार व्यक्त करता हूं। पिछले वर्ष भारत के गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में हमें उनका स्वागत करने का अवसर मिला। आज उनके आत्मीयता भरे निमंत्रण पर इंडोनेशिया की यात्रा करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज सुबह मुझे बहुत स्नेह के साथ, आदर के साथ इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। ये सम्मान कोटि-कोटि भारतवासियों का है। इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं का है, भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और आत्मीय संबंधों का है। मैं राष्ट्रपति प्रबोवो, इंडोनेशिया की सरकार और यहां की जनता का आभार व्यक्त करता हूं।'

Maharashtra Rain: मुंबई में भारी बारिश का कहर, नासिक में बादल फटने की चेतावनी

heavy rain in nashik cloud burst alert

Maharashtra Rain : मुंबई और नासिक समेत महाराष्ट्र में मंगलवार को भारी बारिश का दौर जारी है। मुंबई में भारी बारिश की वजह से पिछले 4 दिनों से जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने पूरे राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। नासिक में भारी बारिश के साथ बादल फटने की चेतावनी भी जारी की गई है। स्कूल कॉलेज बंद है और त्रयंबकेश्वर और सप्तऋंगी मंदिर भी आज नहीं खुलेंगे। सेना और एनडीआरएफ को भी अलर्ट पर रखा गया है। ALSO READ: Top News 7 July: राम मंदिर चढ़ावा चोरी SIT रिपोर्ट में बड़े खुलासे, महाराष्ट्र में रेड अलर्ट, ट्रंप की ईरान को धमकी

 

मिली जानकारी के अनुसार, बीएमसी ने मंगलवार को भी स्कूल और कॉलेज बंद रखने की घोषणा की है। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और महाराष्ट्र फिलहाल गंभीर मौसम की स्थिति का सामना कर रहे हैं। पिछले तीन से चार दिनों से बारिश जारी है और इसके थमने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

 

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज विशेष रूप से रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। मुंबई, पालघर और पुणे में भी ऐसी ही स्थिति है।

नासिक में बादल फटने की चेतावनी

इस बीच, मौसम विभाग की चेतावनी के बाद नासिक प्रशासन अब नासिक को लेकर अधिक चिंतित है। पालखेड़ सिंचाई उप-मंडल और पिंपलगांव सहित नासिक और आसपास के इलाकों में आज भारी बारिश और बादल फटने जैसी स्थिति बनने वाली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने अनुमान जताया है कि राज्य में बुधवार, 8 जुलाई तक इसी तरह की भारी बारिश जारी रहेगी।

 

मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है। लोगों को जरूरी काम के बिना घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, उन्हें स्ट्रीट लाइट, बिजली के खंभों और पुरानी इमारतों से दूर रहने को कहा गया है। प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने छात्रों की सुरक्षा के मद्देनजर मंगलवार को भी स्कूल और कॉलेज बंद रखने का निर्णय लिया है।

यूपी में 12 जुलाई को होगा वृक्षारोपण महायज्ञ, 1 दिन में 35 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य

yogi adityanath plantation drive on 12th july

Yogi Adityanath Tree Plantation Campaign 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वृक्षारोपण केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण, जल सुरक्षा, जलवायु संतुलन और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का व्यापक जनआंदोलन है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान को जनभागीदारी का महायज्ञ बनाते हुए आगामी 12 जुलाई को उत्साह और उत्सवपूर्ण वातावरण में इस वर्ष वृक्षारोपण महायज्ञ आयोजित किया जा रहा है, इसमें प्रत्येक नागरिक, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी, किसान, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सभी सरकारी विभागों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान की सफलता केवल लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं, बल्कि लगाए गए प्रत्येक पौधे के संरक्षण और उसके वृक्ष बनने से तय होगी। यह औपचारिकता नहीं प्रतिबद्धता के भाव के साथ सफल होगा। ALSO READ: योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी, यूपी बनेगा Green और AI-Ready Data Center Hub

 

मुख्यमंत्री सोमवार देर शाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वृक्षारोपण महाभियान 2026 की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, विकसित उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने में हरित विकास की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। पर्यावरण संरक्षण को जनसहभागिता से जोड़ते हुए उत्तर प्रदेश को हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल बनाया जाए तथा प्रत्येक विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरी गंभीरता और उत्तरदायित्व के साथ पूरा करे। उन्होंने निर्देश दिए कि 12 जुलाई को प्रस्तावित वृहद वृक्षारोपण अभियान को पूरी तैयारी, समन्वय और जवाबदेही के साथ संपन्न कराया जाए।

 

पौधरोपण स्थलों का पूर्व सत्यापन, गड्ढों की तैयारी, पौधों की उपलब्धता, स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रजातियों का चयन, सिंचाई, जियो टैगिंग तथा नियमित अनुश्रवण की समुचित व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि पौधरोपण के समय प्रत्येक एक घंटे के अंतराल पर प्रगति रिपोर्ट जारी की जाए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश ने वर्ष 2030 तक हरित आवरण को 15 प्रतिशत तथा वर्ष 2047 तक 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए आगामी पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 35 करोड़ पौधों के रोपण की कार्ययोजना बनाई गई है, जिससे लगभग 72 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण की क्षमता विकसित होगी। ALSO READ: यूपी के पशुपालकों को बड़ी सौगात, योगी कैबिनेट ने दी पशुधन बीमा योजना को मंजूरी, सरकार देगी 85% प्रीमियम

 

बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार उत्तर प्रदेश ने हरित क्षेत्र बढ़ाने में उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित की हैं। वर्ष 2017 से 2023 के बीच वन एवं वृक्षावरण में लगभग 3.38 लाख एकड़ की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश का वन एवं वृक्षावरण वर्ष 2017 के 9.18 प्रतिशत से बढ़कर 9.96 प्रतिशत हो गया है। वन क्षेत्र के बाहर वृक्षावरण का प्रतिशत राष्ट्रीय औसत से अधिक है तथा कार्बन स्टॉक में वृद्धि की दर भी राष्ट्रीय औसत से बेहतर दर्ज की गई है। वर्ष 2017 से 2025 के बीच प्रदेश में 242 करोड़ पौधों का रोपण किया गया, जबकि वर्ष 2009 से 2016 के बीच यह संख्या 51.48 करोड़ थी।

 

बैठक में बताया गया कि पौधों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश में पौधशालाओं का व्यापक विस्तार किया गया है। वर्तमान में 1,939 विभागीय पौधशालाओं के साथ उद्यान, रेशम तथा निजी पौधशालाओं के माध्यम से 50 करोड़ से अधिक पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। इसके अतिरिक्त 38 नई पौधशालाएं भी स्थापित की गई हैं।

 

मुख्यमंत्री ने 12 जुलाई के महाअभियान के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, ग्राम्य विकास, कृषि, उद्यान, पंचायतीराज, राजस्व, नगर विकास सहित सभी संबंधित विभागों से उन्हें आवंटित लक्ष्यों के अनुरूप विभागीय माइक्रोप्लान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थी किसानों को इस अभियान से जोड़ा जाए। रोपे जाने वाले पौधों में अधिकतम जैव विविधता सुनिश्चित की जाए तथा फलदार, छायादार, औषधीय और इमारती प्रजातियों का संतुलित समावेश हो।

उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान में रेलवे, रक्षा मंत्रालय, हाईकोर्ट सहित सभी न्यायालयों, जनप्रतिनिधियों, सरकारी कार्मिकों, किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, विद्यार्थियों, अधिवक्ताओं तथा स्वयंसेवी संस्थाओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। इस संबंध में अगले तीन दिनों के भीतर सभी स्तरों पर संवाद और समन्वय की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाए। ALSO READ: यूपी बनेगा देश का स्टार्टअप हब, नई नीति में एआई और डीप-टेक स्टार्टअप्स पर विशेष फोकस

 

बैठक में आगामी विशेष पहलों की भी जानकारी दी गई। इसके अंतर्गत मिशन छाया, समरस वन, समृद्धि वन, सिटी वन, कपि वन, महर्षि चरक औषधि वन, ऊर्जा वन, पौराणिक वन तथा अविरल धारा वन जैसी अभिनव अवधारणाओं पर कार्य किया जा रहा है। हीट वेव के प्रभाव को कम करने के लिए सड़कों एवं सार्वजनिक स्थलों पर छायादार वृक्ष लगाने हेतु मिशन छाया संचालित किया जाएगा। खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए समृद्धि वन, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए समरस वन तथा मानव और वानर संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से नगर क्षेत्रों के बाहर कपि वन विकसित किए जाएंगे।

 

बैठक में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी, सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी, पुलिस आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, उप महानिरीक्षक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक तथा संबंधित विभागों के मंडल एवं जिला स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।