योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, गोरखपुर 80 करोड़ और मुरादाबाद 50 करोड़ के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करेंगे, शहरी विकास को मिलेगी रफ्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक में नगर निगम गोरखपुर एवं मुरादाबाद द्वारा म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने तथा अवस्थापना विकास निधि (इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड) से क्रेडिट रेटिंग बढ़ाने के लिए धनराशि उपलब्ध कराए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। इस निर्णय से दोनों नगर निगमों को शहरी अवसंरचना विकास के लिए बाजार से संसाधन जुटाने में सहायता मिलेगी।

 

वित्तमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य नगर निकायों को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना है। शहरी अवसंरचना एवं नागरिक सुविधाओं के विकास के लिए विभिन्न वित्तीय स्रोतों से धन जुटाने की आवश्यकता को देखते हुए नगर निकायों में सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन, मार्केट ओरिएंटेशन तथा क्रेडिट वर्थनेस बढ़ाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। भारत सरकार भी अपनी प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने वाले निकायों को प्रोत्साहन उपलब्ध करा रही है।

 

वित्तमंत्री ने बताया कि म्युनिसिपल बॉण्ड के माध्यम से बाजार से धन जुटाने पर भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत 100 करोड़ रुपए तक के बॉण्ड निर्गम पर 13 करोड़ रुपए तथा 200 करोड़ रुपए तक के बॉण्ड निर्गम पर अधिकतम 26 करोड़ रुपए का अनुदान प्रदान किए जाने का प्रावधान है। म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए सभी नगर निगम भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के निर्धारित प्रावधानों का अनुपालन करेंगे।

 

उन्होंने बताया कि अमृत 2.0 की गाइडलाइंस के अंतर्गत नगर निकायों को म्युनिसिपल बॉण्ड जारी करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है और इसे राज्य स्तरीय सुधारों में भी शामिल किया गया है। इसी क्रम में नगर निगम गोरखपुर द्वारा 80 करोड़ रुपए तथा नगर निगम मुरादाबाद द्वारा 50 करोड़ रुपए तक के म्युनिसिपल बॉण्ड जारी किए जाने के प्रस्ताव हैं। दोनों नगर निगमों ने नगर निगम सदन से अनुमोदन प्राप्त करते हुए संबंधित परियोजनाओं का चयन भी कर लिया है। इससे इन दोनों शहरों में आधारभूत ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी तथा नगर निकायों की वित्तीय क्षमता और सुदृढ़ होगी।

Agnipath Scheme 2026 : क्या बढ़ेगी Agniveers की Permanent Recruitment? जानिए 25% से 50-75% रिटेंशन की रिपोर्ट और सरकार का रुख

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अगर आप अग्निपथ योजना के तहत भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सशस्त्र बल (Indian Armed Forces) अग्निपथ भर्ती योजना की समीक्षा कर रहे हैं। इसमें चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों (Agniveers) की स्थायी भर्ती (Permanent Retention) का प्रतिशत बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। यह समीक्षा ऐसे समय में हो रही है, जब वर्ष 2023 में भर्ती हुए पहले बैच के अग्निवीर अक्टूबर 2026 में अपनी चार साल की सेवा पूरी करेंगे।

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क्या हो सकता है बदलाव?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तीनों सेनाओं ने Department of Military Affairs (DMA) को अपने-अपने सुझाव भेजे हैं।
 

  • भारतीय नौसेना ने 70% से 75% तक अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव दिया है।
  • भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना ने स्थायी भर्ती का प्रतिशत बढ़ाकर लगभग 50% करने का सुझाव दिया है।
  • सेवा के दौरान दिव्यांग होने वाले जवानों को आजीवन स्वास्थ्य सुविधाएं देने का भी प्रस्ताव बताया जा रहा है।

क्यों महसूस हुई बदलाव की जरूरत?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, चार साल की सेवा अवधि के कारण तकनीकी रूप से प्रशिक्षित जवानों का अनुभव पूरी तरह इस्तेमाल नहीं हो पाता। खासकर नौसेना में अत्याधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण पर काफी समय और संसाधन खर्च होते हैं। ऐसे में अधिकारियों का मानना है कि अधिक संख्या में प्रशिक्षित जवानों को स्थायी सेवा में रखना सेना की कार्यक्षमता और संचालन क्षमता के लिए बेहतर होगा।

क्या है अग्निपथ योजना?

अग्निपथ योजना जून 2022 में शुरू की गई थी। इसके तहत 17.5 से 21 वर्ष की आयु के युवाओं की चार वर्ष के लिए भर्ती की जाती है। शुरुआती छह महीने प्रशिक्षण के बाद वे सेना में सेवा देते हैं।

वर्तमान नियमों के अनुसार

 

  • चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर अधिकतम 25% अग्निवीरों को स्थायी कैडर में शामिल किया जाता है।
  • बाकी 75% अग्निवीर सेवा समाप्त होने के बाद लगभग 11.71 लाख रुपये का टैक्स-फ्री 'सेवा निधि' पैकेज प्राप्त करते हैं।
  • उन्हें पेंशन या ग्रेच्युटी जैसी दीर्घकालिक सुविधाएं नहीं मिलती हैं।

क्या सरकार ने कोई फैसला लिया है?

 

फिलहाल नहीं।

 

रक्षा मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक आदेश, अधिसूचना (Gazette Notification) या प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं की गई है। इसलिए वर्तमान में 25% स्थायी भर्ती का नियम ही लागू है। यदि भविष्य में अग्निपथ योजना में कोई बड़ा बदलाव किया जाता है, तो उसे कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी और सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही लागू किया जाएगा।

भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए सलाह

यदि आप अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे हैं, तो सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें। केवल रक्षा मंत्रालय, भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना या PIB की आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें।

CM योगी के जनता दर्शन कार्यक्रम में हर समस्या का हल

CM Yogi janata darshan

CM Yogi Janta Darshan: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार सुबह ‘जनता दर्शन’ किया। इस दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए प्रत्येक फरियादी से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने जरूरतमंद लोगों को आवास दिलाने और गंभीर बीमारियों से पीड़ितों के इलाज में भरपूर आर्थिक सहायता देने का आत्मीय भरोसा देते हुए कहा कि हमारी सरकार ‘नर सेवा को नारायण सेवा’ मानकर 25 करोड़ प्रदेशवासियों के हित के लिए कार्य कर रही है। 

 

‘जनता दर्शन’ के दौरान मुख्यमंत्री खुद फरियादियों तक पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याओं को सुना। उनके प्रार्थना पत्र लिए और निस्तारण के लिए संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध, निष्पक्ष और प्रभावी होना चाहिए।

मुख्‍यमंत्री के अधिकारियों को निर्देश

इस अवसर पर सीएम ने लोगों से कहा कि सरकार हर जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति को कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने तथा हर समस्या के प्रभावी निस्तारण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जन समस्याओं पर संवेदनशीलता दिखाएं। 

 

अवैध कब्जा संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने पुलिस को निर्देश दिया कि यदि कोई दबंग किसी की जमीन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। राजस्व व पुलिस से जुड़े मामले में समयसीमा के भीतर न्याय दिलाया जाए और मामले का निस्तारण कर पीड़ित की संतुष्टि पर ध्यान दिया जाए।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

नैनीताल में होटल की खिड़की से गिरे झाबुआ के 3 साल बच्चे की मौत

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झाबुआ के सराफा कारोबारी के 3 वर्षीय बेटे की नैनीताल में होटल की तीसरी मंजिल से गिरने के बाद उपचार के दौरान मौत हो गई। हादसे में उसकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी। नैनीताल, हल्द्वानी और दिल्ली में इलाज के बावजूद डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

इंदौर से नैनीताल अपने परिवार के साथ घूमने गए झाबुआ के सराफा कारोबारी के बच्चे की उपचार के दौरान मौत हो गई। वह होटल की खिड़की से गिर गया था। 20 फीट ऊंचाई से गिरने के कारण उसकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी। उसका दो अस्पतालों में इलाज चला। गंभीर चोट और सांस लेने में आ रही तकलीफ के कारण रविवार रात उसकी मौत हो गई। अब उसके शव को इंदौर से झाबुआ ले जाया जाएगा।

1 जुलाई को नैतीताल गए थे : बता दें कि झाबुआ के राणापुर के सराफा कारोबारी विशाल सोनी इंदौर से ट्रेन से नैनीताल के लिए 1 जुलाई को रवाना हुए थे। उनके साथ 22 सदस्य थे। उन्होंने नैनीताल के मल्लीताल क्षेत्र में एक होटल लिया था। होटल की खिड़की की फर्श से ऊंचाई कम थी। तीन साल का गौरांश खेलते-खेलते खिड़की के पास गया और तीसरी मंजिल से गिर पड़ा। गौरांश के गिरते ही होटल के कर्मचारी दौड़े और उसे उठाया। वह सिर के बल गिरा था और उसकी गर्दन एक तरफ लटक गई थी। परिजन उसे लेकर नैनीताल के निजी अस्पताल पहुंचे, लेकिन हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने उसे हल्द्वानी के अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां उसका इलाज चला, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे इलाज के लिए दिल्ली रेफर कर दिया गया।

पहलगाम हमला : NIA की चार्जशीट में हाफिज सईद का नाम, भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश का आरोप

hafeez saeed

राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA ने सोमवार को पहलगाम आतंकी हमले के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद को अपनी पूरक चार्जशीट में आरोपी बनाया है। एनआईए ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से आतंकी साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। ALSO READ: Pakistan के 23 आतंकियों पर मोदी सरकार का बड़ा 'प्रहार', UAPA के तहत जारी हुई नई List

 

NIA ने एक बयान जारी कर कहा कि उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के मामले में पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी और LeT/TRF के चीफ और फाउंडर हाफिज सईद के खिलाफ आरोप तय किए हैं।

 

जम्मू की NIA स्पेशल कोर्ट में दायर अपनी सप्लीमेंट्री चार्जशीट में, एंटी-टेरर एजेंसी ने हाफिज सईद पर व्यक्तिगत तौर पर और प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके सक्रिय प्रॉक्सी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) के चीफ के तौर पर आरोप लगाए हैं।

 

आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। NIA का कहना है कि चार्जशीट में आरोपी के खिलाफ भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और सीमा पार से साज़िश रचने से जुड़ी दंडात्मक धाराएं भी लगाई गई हैं। ALSO READ: जेडी वेंस को नेतन्याहू का करारा जवाब- मेरे पास भारत जैसा मजबूत दोस्त

 

पहली चार्जशीट में किसके नाम?

एनआईए ने 15 दिसंबर 2025 को दाखिल अपनी पहली चार्जशीट में पाकिस्तान के आतंकी हैंडलर साजिद जट्ट, जुलाई 2025 में ऑपरेशन महादेव के दौरान मारे गए तीन आतंकियों और गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों को नामजद किया था। 

 

पूरक चार्जशीट पहली चार्जशीट का विस्तार

एनआईए ने कहा कि यह पूरक चार्जशीट पहले दाखिल की गई 1,597 पन्नों की मूल चार्जशीट का विस्तार है। इसमें पाकिस्तान की साजिश, हाफिज सईद की भूमिका और जांच के दौरान जुटाए गए वैज्ञानिक एवं अन्य सबूतों का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है। 

मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर

egypt uncovers lost byzantine era city

-रीतिका

मिस्र के पुरातत्विदों ने दो बेहद अहम खोज की हैं। इसमें पूरा का पूरा प्राचीन शहर और एक जगह कई कब्रें मिली हैं। मिस्र को उम्मीद है कि इन नई खोजों से उसके पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

 

मिस्र के पश्चिमी रेगिस्तानी इलाके में बाइजेन्टाइन युग के एक बेहद अच्छी तरह से संरक्षित शहर को अब तक की सबसे प्रमुख पुरातात्विक खोजों में से एक माना जा रहा है। मिस्र के शहर अलेक्जेंड्रिया के पास दाखला ओएसिस और मरीना एल-अलामीन के पुरातात्विक स्थल पर हाल ही में हुई ये दोनों खोज बेहद अहम मानी जा रही हैं। ALSO READ: नया रक्षा बैंक क्यों बनाना चाहता है नाटो का सदस्य कनाडा

 

यहां के पर्यटन और पुरावशेष मंत्रालय ने कहा कि पहली खोज चौथी शताब्दी में दाखला ओएसिस में रोजमर्रा के जीवन, शहरी विकास और आर्थिक गतिविधियों के विवरण को उजागर करती है, जब मिस्र बाइजेन्टाइन साम्राज्य का हिस्सा था।

 

बाइजेन्टाइन युग के शहर में क्या क्या मिला

मिस्र में पुरातात्विक मिशन के अध्यक्ष महमूद मसूद ने कहा कि बाइजेन्टाइन युग का यह शहर चौथी शताब्दी के मध्य की एक बेसिलिका चर्च बस्ती के शीर्ष पर स्थित है, जो इसकी मुख्य सड़कों की ओर देखती है। साथ ही बाहरी इलाकों की सुरक्षा के लिए दो वॉच टावरों के अवशेष भी पाए गए हैं। उन्होंने बताया कि यहां सुरक्षा के लिहाज से बनाई गई मोटी दीवारों वाली एक भारी किलेबंद संरचना और कई घर मिले हैं जिनमें स्वागत कक्ष और गुंबददार छतें थीं।

 

मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि पुरातत्वविदों ने ब्रेड ओवन, रसोई और पत्थर से बने पीसने के उपकरण भी खोजे हैं जिनका इस्तेमाल खाना बनाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा बाइजेन्टाइन सम्राटों के चित्र, लैटिन शिलालेख और ईसाई प्रतीकों वाले अच्छी तरह से संरक्षित कांसे के सिक्के भी मिले हैं। इसके साथ ही रोमन सम्राट कॉन्सटेंटियस द्वितीय के शासनकाल के सोने के सिक्के भी मिले हैं।

 

इस्लामिक, कॉप्टिक और यहूदी पुरावशेष विभाग के प्रमुख दीया जहरान ने कहा कि उन्हें लगभग 200 मिट्टी के बर्तनों के टुकड़ों का एक संग्रह मिला है जिसका इस्तेमाल लेखन सामग्री के तौर पर किया जाता होगा। जहरान ने कहा कि इन टुकड़ों को ऑक्ट्राका के रूप में जाना जाता है, जिन पर आर्थिक लेनदेन, पत्राचार और दैनिक जीवन के विवरणों के शिलालेख हैं। ALSO READ: जर्मनी में बड़े टैक्स, श्रम और पेंशन सुधारों को मिली मंजूरी
 

कब्रों के साथ मिली ‘सुनहरी जीभ'

इसके साथ ही पुरातत्वविदों को मरीना एल-अलामीन पुरातात्विक स्थल में 18 प्राचीन कब्रें भी मिली हैं। मंत्रालय ने कहा कि आठ मीटर की गहराई वाली चट्टान को काटकर बनाई गई 11 कब्रें और सतह पर चूना पत्थर से बनी सात कब्रें शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि इससे इस स्थल पर पाई गई कुल कब्रों की संख्या 48 हो गई है। साथ ही स्थल पर, पुरातत्वविदों को मिट्टी के बर्तन, एम्फोरा (एक तरह की सुराही), लैंप, प्लेटें, वेदियां (पूजा करने की जगह) और चूना पत्थर के बेसिन मिले हैं।

 

मिशन के प्रमुख ईमान अब्देल खालिक ने कहा कि उन्हें 2.5 मीटर लंबा ग्रेनाइट का ताबूत मिला है, जिसमें कंकाल के अवशेष हैं। इनका फिलहाल अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ताबूत के करीब, उन्हें प्लास्टर की बनी स्फिंक्स मूर्ति के अवशेष मिले हैं। खालिक ने कहा कि उन्हें कुछ मृतकों के मुंह के अंदर रखे सोने के 4 टुकड़े भी मिले हैं, जिन्हें सुनहरी जीभ के रूप में जाना जाता है, जो उस युग के अंतिम संस्कार के विश्वासों से जुड़ी एक प्रथा थी।

 

मरीना एल-अलामीन मिस्र के उत्तरी तट पर अलामीन शहर के करीब एक पुरातात्विक स्थल है। मंत्रालय ने कहा कि 1986 में खोजी गई इस साइट के बारे में पुरातत्वविदों का मानना है कि यह भूमध्य सागर पर ल्यूकास्पिस का प्राचीन ग्रीको-रोमन बंदरगाह शहर था, जो दूसरी शताब्दी में बनाया गया था और चौथी शताब्दी तक फला-फूला। ALSO READ: सच्ची मुहब्बत के नाम पर कैसे दुनिया को ठग रहे हैं स्कैमर्स

 

मिस्र को नई खोज से पर्यटन बढ़ने की उम्मीद

मिस्र सरकार को उम्मीद है कि इस नई खोज से देश के महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। मिस्र का पर्यटन ज्यादातर वहां के पुराने इतिहास की बुनियाद पर चलता है। स्वेज नहर के साथ-साथ मिस्र के लिए पर्यटन देश में आने वाली विदेशी मुद्रा का एक प्रमुख स्रोत है। इसके साथ ही जिस जगह ये खोज हुई है वह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होने से सिर्फ एक कदम दूर है।

 

2011 के विद्रोह और कोरोना महामारी के बाद सालों की राजनीतिक उथल-पुथल और हिंसा के बाद मिस्र का पर्यटन फिर से उबरने लगा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल रिकॉर्ड 1.9 करोड़ पर्यटकों ने मिस्र का दौरा किया, जो 2024 से 21 फीसदी अधिक था। आंकड़ों से पता चलता है कि 2026 के पहले चार महीनों में 61 लाख पर्यटक आए, जबकि 2025 की इसी अवधि के दौरान यह संख्या 57 लाख थी।

किश्तवाड़ में बारिश बनी आफत: क्वार पावर प्रोजेक्ट के पास बड़ा भूस्खलन, मलबे में दबी कई गाड़ियां

landslide in kishtwar

जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में 540 मेगावाट क्वार हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के पास भारी बारिश के कारण बड़ा भूस्खलन हुआ। कई वाहन मलबे में दब गए, सड़क संपर्क बाधित हो गया और राहत-बचाव कार्य जारी है। ALSO READ: डोडा में दो बार बादल फटने का असर: गांव कटे, सड़कें बह गईं

 

अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को जम्मू कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में 540 मेगावाट के क्वार हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के पास भारी बारिश के कारण भूस्खलन हुआ, जिससे कई गाड़ियां मलबे के नीचे दब गईं। मलबे को हटाने, फंसी हुई गाड़ियों को निकालने और इलाके तक पहुंचने का रास्ता बहाल करने के लिए भारी मशीनों के साथ बचाव दल तैनात किए गए हैं।

 

अधिकारियों ने बताया कि पड़ोसी डोडा जिले में भी लगातार बारिश के कारण अचानक आई बाढ़ से जनजीवन प्रभावित हुआ और कई जगहों पर नुकसान पहुंचा। उन्होंने कहा कि दोनों जिलों में किसी के हताहत होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। बचाव और बहाली का काम जारी है और अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।

 

जानकारी के लिए किश्तवाड़ शहर से लगभग 28 किमी दूर चिनाब नदी पर स्थित 'क्वार प्रोजेक्ट' को 'चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स लिमिटेड' विकसित कर रहा है। ALSO READ: गर्मी में तेजी से पिघल रहा अमरनाथ हिमलिंग, श्रद्धालुओं और प्रशासन की बढ़ी चिंता
 

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि लगातार बारिश के बाद भूस्खलन हुआ, जिससे प्रोजेक्ट साइट तक जाने वाली सड़क पर भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया। भूस्खलन की चपेट में आकर ट्रक और टैंकर समेत कई भारी वाहन फंस गए और इलाके में सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाहन, मिलर और अन्य मशीनरी आंशिक रूप से कीचड़ और पत्थरों के नीचे दब गए, और सड़क का एक बड़ा हिस्सा मलबे से ढक गया। मलबे के बहाव और उसके असर से सड़क किनारे का इंफ्रास्ट्रक्चर भी क्षतिग्रस्त हो गया।

 

अधिकारियों और प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों ने फंसी हुई मशीनरी और वाहनों को निकालने और यातायात बहाल करने के लिए भारी मशीनों का इस्तेमाल करते हुए तुरंत मलबा हटाने का काम शुरू किया। प्रभावित वाहन अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं और बहाली का काम जारी है।

 

किसी के हताहत होने या घायल होने की तत्काल कोई खबर नहीं है। अधिकारी नुकसान का आकलन कर रहे हैं, जबकि संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि चिनाब घाटी के कुछ हिस्सों में बारिश जारी है।
edited by : Nrapendra Gupta

लखनऊ रोड शो में नितिन नबीन की गाड़ी के आगे नाचे ‘हनुमान’, सोशल मीडिया पर गुस्सा, भड़के केजरीवाल, कहा- हिंदू धर्म पर कलंक हैं ये लोग

Nitin Naveen Road Show: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान हुए एक रोड शो ने देश में एक बड़े राजनीतिक और धार्मिक विवाद को जन्म दे दिया है। लखनऊ में रोड शो के दौरान नितिन नबीन के वाहन के आगे भगवान हनुमान के स्वरूप में एक शख्स को भाजपा का झंडा लेकर नाचते हुए देखा गया, जिसका वीडियो वायरल होने के सोशल मीडिया पर लोगों भाजपा की जमकर खबर ली है। साथ ही आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। केजरीवाल ने इसे हिंदू आस्था का अपमान बताते हुए भाजपा से पूरे हिंदू समाज से माफी मांगने की मांग की है।

 

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के दो दिवसीय उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान लखनऊ की सड़कों पर जो नजारा दिखा, उसने अब एक बड़े सियासी घमासान का रूप ले लिया है। दरअसल, नितिन नबीन लखनऊ में एक भव्य रोड शो में शामिल हुए थे। वह एक खुले वाहन पर सवार होकर जनता और कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे।

 

इसी दौरान, उनके वाहन के ठीक आगे भगवान हनुमान का रूप धारण किए एक शख्स हाथ में भाजपा का झंडा लिए ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए आगे बढ़ रहा था। इस दृश्य का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, नेटिजन्स और विपक्षी नेताओं ने इसे आराध्य देव का राजनीतिकरण और मर्यादा का उल्लंघन बताते हुए नाराजगी जाहिर की है। एक यूजर ने प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें वे किसी अन्य प्रसंग पर कहते हुए दे रहे हैं कि ऐसा कौन बड़ा पदाधिकारी है, जिसके स्वागत में राधा-कृष्ण के भेष में नाचते हुए दिखाते हो, आपकी दुर्गति हो जाएगी। 

क्या शर्म आती है आपको?

इस विवाद में सबसे बड़ा राजनीतिक हमला दिल्ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से आया है। केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (ट्विटर) पर दो तस्वीरें साझा करते हुए भाजपा और नितिन नबीन पर चौतरफा निशाना साधा।

 

केजरीवाल ने अपनी पहली पोस्ट में लिखा- दोनों तस्वीरें हिंदू आस्था के प्रति दो विचारधाराओं की प्रतीक हैं। हमारी विचारधारा हम भगवान राम और हनुमान जी के भक्त हैं और उनमें हमारी श्रद्धा और आस्था है। हम उन्हें पूजते हैं, उनके सामने सर झुकाते हैं, उनका आशीर्वाद लेते हैं।

इनकी विचारधारा – ये लोग हनुमानजी और रामचंद्रजी को भगवान ही नहीं मानते। इनके लिए राम और हनुमान सत्ता और पैसा पाने का जरिया हैं। इन्हें भगवान का अपमान करने में कोई संकोच नहीं होता। इसके तुरंत बाद अपनी दूसरी पोस्ट में केजरीवाल ने और अधिक आक्रामक रुख अपनाते हुए लिखा- जितना नुकसान और अपमान आप लोगों ने हिंदू धर्म का किया है, शायद भारत के 5000 वर्ष के इतिहास में बाहर से आने वाले आतताइयों ने भी नहीं किया, जितना आप लोगों ने हिंदुओं को लूटा है, आज तक किसी ने नहीं लूटा। हिंदू धर्म पर आप लोग कलंक हैं। शर्म आती है आपको? माफी मांगिए पूरे हिंदू समाज से।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

केजरीवाल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया है। एक तरफ जहां आम लोग और विपक्षी समर्थक इसे भाजपा के अहंकार का प्रतीक बता रहे हैं और भगवान के स्वरूप को किसी नेता के आगे नचाने तथा हाथ में दलीय झंडा थमाने की कड़ी निंदा कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, भाजपा समर्थकों का तर्क है कि यह कार्यकर्ताओं का अति-उत्साह और एक सांस्कृतिक प्रदर्शन था, जिसे विपक्ष बेवजह तूल दे रहा है।

एक यूजर ने लिखा- BJP के नेशनल प्रेसिडेंट नितिन नबीन के स्वागत में, भगवान हनुमान को BJP का झंडा पकड़कर नाचते हुए देखा जा रहा है।  एक हिंदू होने के नाते, मुझे यह बात बुरी लगी। लेकिन जो हिंदू मोदी को अपना पिता कहते हैं, वे इसका बचाव कर रहे हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

इंदौर में जलभराव ने यादगार बना दिया शादी का लम्‍हा, दुल्‍हन को गोदी में उठाकर मंडप तक गया दूल्‍हा, वीडियो हुआ वायरल

Indore water

इंदौर में इन दिनों मौसम के बदले मिजाज ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया है, वहीं एक शादीशुदा जोड़े के लिए इसे हमेशा-हमेशा के लिए यादगार बना दिया। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में, भारी जलभराव के बीच एक दूल्हा अपनी नई-नवेली दुल्हन को गोद में उठाए नजर आ रहा है।

दरअसल, विदाई के वक्त मंडप के बाहर घुटनों तक पानी भरा हुआ था, और अपनी दुल्हन के महंगे लहंगे और खूबसूरत यादों को खराब होने से बचाने के लिए दूल्हे राजा ने बिना वक्त गंवाए उसे गोद में उठा लिया। शादी का यह रोमांटिक और केयरिंग अंदाज अब इंटरनेट पर लोगों का दिल जीत रहा है।

हालांकि यह दृश्‍य इंदौर प्रशासन की लापरवाही की पोल भी खोल रहा है। एक ही बारिश में जल जमाव हो रहा है। कहीं गड्डे हो गए हैं तो जल जमाव ने लोगों की हालत खराब कर दी है। बारिश ने नगर निगम की मानसून पूर्व की सारी तैयारी की पोल खोल दी है।

क्‍या है पूरा मामला : दरअसल इंदौर में एक शादी थी। उसके कुछ घंटे पहले ही बारिश हुई थी। शादी में तैयार होकर आए मेहमान कपड़े बचाते हुए भोजन स्थल तक जाते नजर आए। इस बीच दुल्हा और दुल्हन ने बरसते पानी में फेरे लिए। मंडप के चारों तरफ पानी ही पानी था और उसमें कई मेहमानों के जूते-चप्पल भी तैरते नजर आए। फेरे लेने के लिए दुल्हे ने दुल्हन को गोद में उठाकर मंडप तक पहुंचाया और फेरे लेने के बाद भी दुल्हन शर्माती हुई दुल्हे की गोद में भोजन स्थल तक पहुंची। बारिश में भीगे इन पलों को दोनों ने मुस्कराते हुए यादगार बना लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।

दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा की अग्निपरीक्षा, क्या बदली हुई छवि दिला पाएगी वापसी?

दतिया विधानसभा उपचुनाव का ऐलान होते ही सबसे ज्यादा निगाहें भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा पर टिक गई हैं। दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का बीजेपी उम्मीदवार बनाना लगभग तय है और नरोत्तम मिश्रा ने उम्मीदवारी का आधिकारिक एलान के पहले ही अपना चुनाव प्रचार शुरु कर चुके है। नरोत्तम मिश्रा इस बार कुछ अलग ढ़ंग से चुनाव प्रचार करते हुए अपने मंच से अपने भाषणों में अपने में सुधार करने की बात कह रहे है। इतना ही नहीं वह अपने आचार-विचार और व्यवहार में परिवर्तन लाने की बात कह रहे है।

 

2023 की हार से सबक,नरोत्तम का बदला अंदाज-15 साल तक दतिया की राजनीति के निर्विवाद केंद्र रहे नरोत्तम मिश्रा के सामने अब केवल चुनाव जीतने की चुनौती नहीं है, बल्कि 2023 की हार के बाद बनी अपनी राजनीतिक छवि को बदलने की भी परीक्षा है। 2008, 2013 और 2018 में दतिया से जीत की हैट्रिक लगाने वाले बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा 2023 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के राजेंद्र भारती से 7,742 वोटों से  हार गए थे। यह इस बात का इशारा है कि नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ नाराजगी केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं थी, बल्कि शहर के मतदाताओं ने भी उनसे दूरी बनाई।

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2023 के विधानसभा चुनाव में करारी हार से सबक लेते हुए उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा बेहद सरल, सहज होने के बाद अपने व्यवहार में भी बदलाव का साफ संकेत दे रहे है।  राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2023 की हार ने नरोत्तम मिश्रा को अपनी राजनीतिक शैली पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। लंबे समय तक सत्ता में रहने से पैदा हुई एंटी इनकंबेंसी,स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी, कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहने की छवि और विभिन्न सामाजिक वर्गों में बढ़ती दूरी 2023 के चुनाव में नरोत्तम मिश्रा के लिए बेहद नुकसानदेह साबित हुई।

 

उपचुनाव की  तारीखों के एलान के बाद नरोत्तम मिश्रा अब अपनी सभाओं में अपने में सुधार की बात कह रहे है। नरोत्तम कह रहे है कि “हम सुधारवादी है और अपने में सुधार करेंगे। हमारी कोई भी गलती है,हम सुधार करेंगे। हम अपने कार्य में, व्यवहार में, विचार में और आचरण में सब में परिवर्तन लाएंगे और झुककर आपके सामने आएंगे। आप घर पर भी आओगी तो आप बैठोगे हम खड़े रहेंगे”। 

 

2023 की हार के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा ने अपने राजनीतिक व्यवहार में बदलाव का संदेश देना शुरू किया है। अब वे लगातार कार्यकर्ताओं और आम लोगों के बीच जाकर संवाद बढ़ा रहे हैं। पुराने भाजपा नेताओं के घर पहुंचना, नाराज कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत मुलाकात करना, सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी, विभिन्न समाजों के सम्मेलन आयोजित करना और घर-घर संपर्क अभियान चलाना उनकी नई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद डबरा स्थित उनके निवास पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं का जुटना भी इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मिश्रा चुनावी तैयारियों में पूरी तरह सक्रिय हैं।

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2023 की हार क्यों बनी सबसे बड़ा झटका?- 2023 के विधानसभा चुनाव में बतौर गृहमंत्री दतिया चुनाव में उतरने वाले नरोत्तम मिश्रा की हार की एक नहीं कई  वजह थी। राजनीतिक विश्लेषकों और पार्टी स्थानीय कार्यकर्ताओं के अनुसार चुनाव में नरोत्तम मिश्रा का ओवर कॉन्फिडेंस उनकी हार की सबसे बड़ी वजह रहा। वहीं लगातार 15 साल एक सीट से विधायक रहने के कारण नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ क्षेत्र में एंटी इनकंबेंसी बढ़ी। उन पर आरोप लगे कि पंचायत और नगर निकाय चुनावों में उन्होंने सीधा दखल दिया, जिसका असर यह हुआ है कि पार्टी संगठन का ही एक वर्ग उनसे  नाराज हो गया था।

 

इसके अलावा विरोधियों के प्रति आक्रामक रवैये, कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहने की छवि और स्थानीय नेताओं की उपेक्षा जैसे मुद्दों की भी चर्चा रही। कई क्षेत्रों, विशेषकर ग्रामीण इलाकों में, भाजपा को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।स्थानीय राजनीति में यह धारणा भी बनी कि विभिन्न सामाजिक वर्गों, खासकर एससी, ओबीसी, कुशवाह, यादव और जाटव समाज के बीच भाजपा को अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया। इसी सामाजिक समीकरण ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया।


जातीय समीकरण साधने की कोशिश- 2023 का विधानसभा चुनाव हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने अपनी राजनीतिक रणनीति में बदलाव किया। उन्होंने सामाजिक और जातीय समीकरणों पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। जातीय समीकरण को साधने के लिए उन्होंने कुशवाह वर्ग से आने  वाले रघुवीर कुशवाह को भाजपा जिला अध्यक्ष बनवाया। इसके साथ जाने को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना गया। उपचुनाव की आहट शुरु होते  ही नरोत्तम मिश्रा लगातार विभिन्न समाजों के सम्मेलन आयोजित कर रहे हैं। गुर्जर समाज सहित अलग-अलग वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। साथ ही पुराने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के घर जाकर व्यक्तिगत संपर्क भी बढ़ाया गया है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मिश्रा अपने पारंपरिक प्रभाव वाले शहरी क्षेत्रों और बसई बेल्ट पर भी विशेष फोकस कर रहे हैं, जहां से उन्हें पहले बढ़त मिलती रही है।

 

दतिया विधानसभा में उपचुनाव में मुद्दा केवल भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं है। यह उपचुनाव बीजेपी के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक अस्तित्व की अग्निपरीक्षा है। यदि उनकी बदली हुई कार्यशैली और संवाद की राजनीति मतदाताओं को प्रभावित करती है, तो यह चुनाव उनकी राजनीतिक वापसी की कहानी लिख सकता है। लेकिन यदि पुरानी नाराजगी और एंटी इनकंबेंसी का असर कायम रहा, तो दतिया उपचुनाव उनके राजनीतिक करियर की सबसे कठिन परीक्षा साबित हो सकता है।