दुर्गा स्क्वॉड कैसे बदलेगा बंगाल में महिला सुरक्षा का हाल?

West Bengal Durga Squad

प्रभाकर मणि तिवारी

महिला सुरक्षा के लिहाज से बदतर राज्यों के मामले में पश्चिम बंगाल बीते कई वर्षों से देश के चार शीर्ष राज्यों में शुमार रहा है। लेकिन अब सरकार बदलने के बाद इस तस्वीर को बदलने की पहल शुरू हुई है। ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर

 

पश्चिम बंगाल सरकार ने महिलाओं में सुरक्षा की भावना को मजबूत करने के लिए एक 'दुर्गा स्क्वॉड' के गठन का एलान किया है। इसके लिए करीब 16 हजार महिला पुलिस कांस्टेबलों को विशेष तौर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। यह राज्य के विभिन्न हिस्सों में मोटरसाइकिल से गश्त लगाएंगी। उनके लिए फिलहाल 213 मोटरसाइकिलें मुहैया कराई गई हैं।

 

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस स्क्वॉड के गठन के साथ ही राज्य के सभी पांच सौ थानों में चौबीसों घंटे चलने वाले महिला हेल्प डेस्क और साइबर क्राइम हेल्प डेस्क की स्थापना करने का एलान किया है। ALSO READ: नया रक्षा बैंक क्यों बनाना चाहता है नाटो का सदस्य कनाडा

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा, “महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में सरकार जीरो टालरेंस यानी शून्य सहनशीलता की नीति पर चलेगी। तमाम थानों को बिना किसी हिचकिचाहट और राजनीतिक हस्तक्षेप के महिलाओं के खिलाफ किसी भी किस्म के अपराध के मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। साइबर क्राइम की शिकार महिलाओं की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए हर थाने में इसकी शिकायत दर्ज कराने के लिए अलग हेल्प डेस्क रहेगा।”

 

अधिकारी ने पुलिस को महिलाओं के खिलाफ अपराध की हर शिकायत दर्ज करने का निर्देश दिया है। उनका आरोप था कि राज्य की पूर्व सरकार के कार्यकाल में खासकर महिलाओं और बच्चों को खिलाफ अपराधों के आंकड़े बहुत कम कर दिखाए जाते थे। इसलिए एनसीआरबी के कड़ो में सही तस्वीर नहीं उभरती थी। लेकिन अब यहां एक भी मामला नहीं छिपाया जाएगा। सही आंकड़ा सामने आने की स्थिति में ही इस समस्या से निपटने की प्रभावी रणनीति बनाई जा सकती है।

 

महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध

नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध की दर तो ऊंची है। लेकिन ऐसे में मामलों में सजा मिलने की दर बहुत कम है। इसलिए महिला मुख्यमंत्री के सत्ता में होने के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल उठते रहे हैं। ममता बनर्जी के मुख्यमंत्रित्व काल के आखिरी वर्षो में कोलकाता के आर.जी. कर मेडिकल कालेज अस्पताल में एक जूनियर डाक्टर के साथ रेप के बाद उसकी हत्या के बाद कोलकाता के ही एक ला कालेज में एक छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बटोरी थी।

 

एनसीआरबी के आंकड़ों में बताया गया है कि वर्ष 2021 से 2023 के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले में बंगाल पूरे देश में चौथे स्थान पर था। लेकिन महिला कार्यकर्ताओं का दावा है कि यह तो उन आंकड़ों पर आधारित है जो पुलिस के पास पहुंचे थे। असली तस्वीर और भयावह है। ऊपर जिन दो बड़ी घटनाओं का जिक्र किया गया है, वो इसके बाद हुई थी।

 

यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं के साथ काम करने वाले एक गैर-सरकारी संगठन से जुड़ी सोमा दास डीडब्ल्यू से कहती हैं, “सरकारी आंकड़ों से पूरा सच सामने नहीं आता। खासकर ग्रामीण इलाकों में ऐसे सैकड़ों मामले स्थानीय स्तर पर या कंगारू अदालतों के जरिए दबा दिए जाते हैं। पुलिस तक नहीं पहुंचने के कारण ऐसे मामले आंकड़ों में नहीं झलकते।”

 

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी भी नाम नहीं छापने की शर्त पर इसकी पुष्टि करते हैं। वो डीडब्ल्यू से कहते हैं, “ज्यादातर मामलों में यौन उत्पीड़न या रेप की शिकार महिला या उसके परिजन लोकलाज और कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाने के डर से पुलिस में औपचारिक शिकायत नहीं करते। ऐसे मामले सरकारी आंकड़ों में शामिल नहीं हो पाते।”

 

उनका कहना था कि एनसीआरबी के आंकड़ों से साफ है कि उसमें शामिल ज्यादातर मामले ग्रामीण इलाकों से ही सामने आए थे। लेकिन वो सिर्फ वही मामले हैं जो पुलिस तक पहुंचे थे।

 

यह राज्य महिलाओं की तस्करी के मामले में भी बदनाम रहा है। वर्ष 2016 में इस मामले में यह देश में पहले स्थान पर रहा था।  वर्ष 2023 में राज्य में ऐसे 3,579 मामले सामने आए थे जो पूरे देश में ऐसे मामलों का 44 फीसदी था। तब दूसरे स्थान पर रहे राजस्थान से 1,422 मामले सामने आए थे। वर्ष 2023 में ऐसे महज 29 मामले ही दर्ज किए गए। ALSO READ: सच्ची मुहब्बत के नाम पर कैसे दुनिया को ठग रहे हैं स्कैमर्स

 

आर.जी. कर की रेप एंड मर्डर घटना ने और बढ़ाया था डर

गैर-सरकारी संगठनों का दावा है कि इस तस्वीर में खास बदलाव नहीं आया है। सुंदरबन इलाके में तस्करी से बचाई गई महिलाओं के पुनर्वास के लिए काम करने वाले संगठन गोरान बोस ग्राम विकास केंद्र की शुभश्री सरकार डीडब्ल्यू से कहती हैं, “बीते 10-15 वर्षों में जमीनी स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। हर महीने हम औसतन 20-22 लड़कियों को तस्करी से बचाते हैं। पहले भी यह संख्या इतनी ही थी।”

 

एक अन्य संगठन से जुड़े कौशिक मित्र डीडब्ल्यू से कहते हैं, “तस्करी के लिए महिलाओं को जाल में फंसाने का तरीका ही बदला है। अब उनको सोशल मीडिया के जरिए नए-नए प्रलोभन दिए जाते हैं। किसी को बेहतर नौकरी के सपने दिखाए जाते हैं तो किसी को बढ़िया लड़के से शादी के। एक बार जाल में फंसने के बाद चोरी-छिपे उनकी वीडियो बना कर ब्लैकमेल किया जाता है।”

 

खासकर, आर.जी. कर की घटना के बाद तो महिलाओं में असुरक्षा की भावना बहुत बढ़ गई है। सौम्यदीपा चटर्जी (बदला हुआ नाम) डीडब्ल्यू से कहती हैं, “मैं दफ्तर से रात को 11 बजे तक घर लौटती हूं। लेकिन अब घर पहुंचने तक दिल धड़कता रहता है कि कहीं कोई अनहोनी नहीं हो जाए। जब कामकाज की जगह ही सुरक्षित नहीं है तो रास्ते में कुछ भी हो सकता है।”

 

महिलाओं में बढ़ती असुरक्षा की भावना के कारण ही आरजी कर की घटना के बाद महीनों राज्यव्यापी प्रदर्शन हुए। इस घटना को राज्य में सत्ता बदलने की एक प्रमुख वजह माना जाता है।

 

एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक,वर्ष 2023 में रेप के प्रयास के मामले में बंगाल राजस्थान के बाद दूसरे स्थान पर रहा। यहां ऐसे 825 मामले सामने आए थे।

 

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बंगाल में ऐसे मामलों में सजा की दर भी बहुत कम, महज 3.2 फीसदी है। इस मामले में 3.7 फीसदी के साथ कर्नाटक सबसे नीचे है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक, बंगाल में हर साल महिलाओं के खिलाफ अपराध के 34 हजार से ज्यादा मामले दर्ज किए जाते हैं। यह अपराध दर 71.3 लाख प्रति लाख है जो 64.6 की राष्ट्रीय औसत से ज्यादा है। ALSO READ: क्या भविष्य में बचा रहेगा इंडिया गठबंधन?

 

कितना असर डाल सकती है 'दुर्गा स्क्वॉड'

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार की इस पहल की सराहना की है। लेकिन उनका कहना है कि इसका क्या और कितना असर होगा, यह तो बाद में पता चलेगा। एक गैर-सरकारी संगठन से जुड़ी शुचिता सान्याल डीडब्ल्यू से कहती हैं, “कागज पर तो यह पहल ठीक लगती है। वैसे, पहले की सरकार भी महिला सुरक्षा पर बड़े-बड़े दावे करती रही थी। लेकिन जमीनी हकीकत उससे अलग थी। ऐसा नहीं होता तो राजधानी कोलकाता में सरकार की नाक के नीचे ही आरजी कर समेत कई बड़ी घटनाएं नहीं होती।”

 

उनका कहना था कि ऐसे मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप, पुलिस की उदासीनता और कंगारू अदालतों के दबाव के कारण ज्यादातर मामले दर्ज नहीं हो पाते। सरकार को ग्रामीण इलाकों में इस मानसिकता पर अंकुश लगाने के लिए जागरुकता अभियान भी चलाना होगा। उसी स्थिति में सरकार की ताजा पहल का असर नजर आएगा।

 

राज्य महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष लीना गांगुली भी इससे सहमत हैं। उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “सिर्फ घोषणाओं से जमीनी हालात में बदलाव की उम्मीद करना बेमानी है। सरकार को इस पहल को जमीनी स्तर पर लागू करने और इस पर निगाह रखने का भी समुचित तंत्र विकसित करना होगा। उसी स्थिति में महिलाओं में मजबूती से जड़ें जमा चुकी असुरक्षा की भावना को दूर करने में कामयाबी मिलेगी।”

SIT जांच में बड़ा खुलासा, 40 दिनों में 70 बार चढ़ावे की चोरी, गिनती कक्ष में सुरक्षा मानकों की अनदेखी

SIT report on ram mandir donation scam

राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा 70 बार नकदी छिपाने के मामले पाए गए हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है।

 

SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध CCTV फुटेज में गिनती कक्ष के अंदर कई बार कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुले रुपये अपने कपड़ों, जेबों, जूतों व अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया। जांच रिपोर्ट में ऐसे करीब 70 संदिग्ध मामलों का उल्लेख किया गया है।

 

6  कर्मचारियों की संलिप्तता

SIT ने चढ़ावा चोरी मामले में 6 कर्मचारियों की संलिप्तता पाई है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामशंकर मिश्र के नाम शामिल हैं।

 

निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं

रिपोर्ट के अनुसार गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया। प्रवेश और निकास के समय तलाशी नहीं ली गई, कर्मचारियों के निजी सामान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं था, 

 

विस्तृत जांच की आवश्यकता

कई हंडियों की नकदी मिलाकर गिनी जाती थी और मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड एवं सत्यापन में भी गंभीर कमियां पाई गईं। संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद जमा और वित्तीय लेन-देन मिले हैं। इसकी विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है।

 

एसआईटी ने 15 जून से अपनी प्रारंभक जांच शुरू की थी और एक सप्ताह बाद शासन को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी थी। इसे राम मंदिर ट्रस्ट को सौंप दिया गया है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी के अनुसार, इसे ट्रस्ट की बैठक में रखा गया। हालांकि जांच जारी होने से इस पर कोई चर्चा नहीं हो सकी। ट्रस्ट ने मामले में चंपत राय और डॉ अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। 

इंदौर के खजराना सिविल अस्पताल के नाम पर दवाओं-उपकरणों की नहीं हुई कोई खरीदी, जानें पूरा सच

इंदौर के खजराना में प्रस्तावित 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल को लेकर विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में प्रसारित समाचारों के परिप्रेक्ष्य में जिला प्रशासन ने तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट की है। कलेक्टर शिवम वर्मा द्वारा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से प्राप्त विस्तृत प्रतिवेदन के आधार पर बताया गया है कि अस्पताल निर्माण में विलंब का प्रमुख कारण स्वास्थ्य विभाग को आवंटित भूमि का वास्तविक हस्तांतरण नहीं हो पाना है। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि अस्पताल के लिए नियुक्त मानव संसाधन का उपयोग वर्तमान में जनहित में शहर की अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं में किया जा रहा है तथा अस्पताल के नाम पर अब तक किसी प्रकार की दवा अथवा उपकरणों की खरीदी नहीं की गई है।

 

जिला प्रशासन के अनुसार ग्राम खजराना स्थित सर्वे क्रमांक 435/1/1 पैकी, रकबा 0.700 हेक्टेयर भूमि सिविल अस्पताल निर्माण के लिए स्वास्थ्य विभाग को आवंटित की गई थी। हालांकि, संबंधित भूमि का वास्तविक कब्जा और हस्तांतरण स्वास्थ्य विभाग को अब तक प्राप्त नहीं हो सका है। बताया गया कि वर्तमान में उक्त भूमि का उपयोग नगर निगम इंदौर द्वारा किया जा रहा है, जिसके कारण अस्पताल भवन निर्माण की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो सकी है।

इस संबंध में 6 जुलाई को आयोजित बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को आश्वस्त किया कि सिविल अस्पताल के लिए आवंटित भूमि से कब्जा हटवाकर उसे स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल के लिए आवश्यक भूमि आवंटन की औपचारिकताएं पूरी कर भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति संबंधी कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इसलिए भवन निर्माण का कार्य अभी प्रारंभ नहीं किया जा सकता।

 

चिकित्सक की पदस्थापना के आदेश किसी भी स्तर से जारी नहीं-मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा वर्ष 2021 में खजराना सिविल अस्पताल के लिए कुल 87 पद स्वीकृत किए गए थे। इनमें से अब तक 29 स्टाफ नर्स, 5 फार्मासिस्ट तथा 1 लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना की जा चुकी है। चूंकि अस्पताल भवन अभी अस्तित्व में नहीं है और संस्था क्रियाशील नहीं हो सकी है, इसलिए कोविड-19 के बाद बढ़ी स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता को देखते हुए इन कर्मचारियों से शहर की विभिन्न शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में सेवाएं ली जा रही हैं।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इन कर्मचारियों को आवश्यकता के अनुसार विभिन्न अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थानों में कार्य आवंटित किया गया है तथा नियमानुसार उन्हें वेतन का भुगतान किया जा रहा है। जिन-जिन संस्थाओं में यह कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां के संस्था प्रभारियों द्वारा उनके कार्य का प्रमाणीकरण भी उपलब्ध कराया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में सिविल अस्पताल खजराना के लिए किसी भी चिकित्सक की पदस्थापना के आदेश किसी भी स्तर से जारी नहीं किए गए हैं।

 

शासन के नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही किए जाएंगे काम

जिला प्रशासन ने मीडिया में प्रसारित उन खबरों का भी खंडन किया है, जिनमें अस्पताल के लिए बड़े पैमाने पर पदस्थापना अथवा अन्य वित्तीय व्यय किए जाने का उल्लेख किया गया था। प्रतिवेदन के अनुसार प्रस्तावित सिविल अस्पताल खजराना के लिए अब तक किसी प्रकार की औषधि, चिकित्सा उपकरण अथवा अन्य सामग्री की खरीदी नहीं की गई है। इसके लिए वरिष्ठ कार्यालय से कोई वित्तीय आवंटन भी प्राप्त नहीं हुआ है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल परियोजना से संबंधित सभी कार्य शासन के नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप ही किए जाएंगे। भूमि स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित होने तथा भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त होने के बाद ही 100 बिस्तरीय सिविल अस्पताल खजराना के निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई प्रारंभ की जाएगी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि प्रस्तावित सिविल अस्पताल खजराना के संबंध में तथ्यात्मक स्थिति यही है और आमजन से अपील की गई है कि वे अपुष्ट अथवा भ्रामक सूचनाओं के बजाय प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर ही विश्वास करें।

Top News 7 July: राम मंदिर चढ़ावा चोरी SIT रिपोर्ट में बड़े खुलासे, महाराष्ट्र में रेड अलर्ट, ट्रंप की ईरान को धमकी

SIT Report ayodhya ram mandir

Top News 7 July : राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है। इसमें कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। महाराष्‍ट्र में भारी बारिश का दौर जारी। अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को धमकी। पीएम मोदी आज इंडोनेशिया के राष्‍ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात करेंगे। स्पेन और बेल्जियम फीफा वर्ल्ड कप के क्वार्टर फाइनल में पहुंचेंगे। 7 जुलाई की बड़ी खबरें :

 

चढ़ावा चोरी मामले में SIT रिपोर्ट में बड़े खुलासे

राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा बार-बार नकदी छिपाने के कथित मामले पाए गए हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है। ALSO READ: Ram temple donation theft row : राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की बड़ी रिपोर्ट, नकदी छिपाने के कई मामले उजागर, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर

 

नासिक, ठाणे और रायगढ़ में भारी बारिश का रेड अलर्ट

महाराष्‍ट्र के नासिक, ठाणे और रायगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी देते हुए मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। आज स्कूल कॉलेज बंद रहेंगे। त्रयंबकेश्वर और सप्तऋंगी मंदिर भी नहीं खुलेंगे। मुंबई, सतारा, अमरावती, रत्नागिरी समेत कई जिलो में भी आज भारी बारिश का अलर्ट। 

  

ट्रंप की ईरान को धमकी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान समझौता करे या अमेरिका अपना काम खत्म करेगा। ट्रंप ने ईरान के बुनियादी ढांचे को तबाह करने की धमकी दी। वहीं, ईरान ने ट्रंप के बयान की निंदा की है। 

 

पीएम मोदी की इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता

इंडोनेशिया की यात्रा पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय बैठक में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा व रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे। इस दौरान 2500 करोड़ के ब्रह्मोस सौदे पर भी मुहर लग सकती है।  

 

स्पेन और बेल्जियम क्वार्टर फाइनल में

स्पेन ने फीफा विश्व कप 2026 के राउंड ऑफ-16 में पुर्तगाल को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। मैच का एकमात्र और निर्णायक गोल मिकेल मेरिनो ने इंजरी टाइम में किया। अमेरिका को 4-1 से हराकर बेल्जियम भी क्वार्टर फाइनल में पहुंचा।

Ram temple donation theft row : राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT की बड़ी रिपोर्ट, नकदी छिपाने के कई मामले उजागर, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई गंभीर तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चढ़ावे की गिनती के दौरान कुछ कर्मचारियों द्वारा बार-बार नकदी छिपाने के कथित मामले पाए गए हैं। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली में भी गंभीर खामियों की ओर इशारा किया गया है। SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी गई है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि बैठक में रिपोर्ट पढ़कर सुनाई गई, लेकिन इस पर कोई चर्चा या बहस नहीं हुई, क्योंकि जांच अभी जारी है।

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आरोपी ने पूछताछ में किए कई खुलासे

पुलिस सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा गबन मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसने कथित रूप से करीब 19 लाख रुपये अपने परिवार और दोस्तों पर खर्च किए। जांच में सामने आया कि उसने एक भाई की शादी में लगभग 6 लाख रुपये खर्च किए, दूसरे भाई को 5 लाख रुपये दिए और करीब 3.5 लाख रुपये की कार भी खरीदी, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है।

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चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार

मामले के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सोमवार को महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपाल दास महाराज की अध्यक्षता में राम जन्मभूमि परिसर स्थित अतिथि गृह में बैठक आयोजित की गई।

ट्रस्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया कि SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद दोनों पदाधिकारियों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया, जिसे सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया। साथ ही कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

CEO चयन के लिए बनी समिति

ट्रस्ट ने नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। इसमें सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, विष्णुकांत चतुर्वेदी और सुरेश हवड़े को शामिल किया गया है। इसके अलावा भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए एक अलग समिति भी बनाई गई है, जो अतिरिक्त सुरक्षा और प्रशासनिक सुधारों पर सुझाव देगी। अंतिम निर्णय SIT की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद लिए जाएंगे।

ट्रस्ट ने रखे वित्तीय आंकड़े

ट्रस्ट ने कहा कि वर्ष 2020 में गठन के बाद से अब तक मंदिर निर्माण और संबंधित कार्य 6 वर्ष से कम समय में पूरे किए गए हैं। ट्रस्ट ने कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहता है। साथ ही आरोप लगाया कि कुछ लोग इस मामले का राजनीतिक और प्रचारात्मक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

Bankipur by-election : प्रशांत किशोर की पहली चुनावी परीक्षा, बांकीपुर उपचुनाव में दांव पर जनसुराज का भविष्य, क्या है पार्टी की रणनीति

बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर अब पहली बार खुद चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। यदि जन सुराज पार्टी (जेएसपी) उन्हें बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित करती है, तो यह सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक स्वीकार्यता, जन सुराज के भविष्य और भाजपा की शहरी पकड़—तीनों की एक साथ परीक्षा होगी।

 

क्यों खास है बांकीपुर सीट?

पटना शहर की बांकीपुर विधानसभा सीट बिहार की सबसे प्रतिष्ठित शहरी सीटों में गिनी जाती है। 1995 से यह सीट लगातार भाजपा के कब्जे में रही है। पहले नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा और बाद में उनके पुत्र नितिन नवीन ने यहां पार्टी का मजबूत आधार तैयार किया। अब नितिन नवीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा जाने के बाद यह सीट खाली हुई है। ऐसे में होने वाला उपचुनाव केवल रिक्त सीट भरने का चुनाव नहीं, बल्कि भाजपा के संगठनात्मक प्रभाव और विपक्ष की चुनौती का महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेतक माना जा रहा है।

 

प्रशांत किशोर के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक परीक्षा

 

अब तक प्रशांत किशोर पर्दे के पीछे रहकर चुनावी रणनीति बनाते रहे हैं। विभिन्न राज्यों में कई दलों की चुनावी जीत की रणनीति तैयार करने वाले किशोर ने अपनी पार्टी बनाने के बाद पहली बार स्वयं चुनाव लड़ने का संकेत दिया है।

 

पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ा था। जन सुराज ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन एक भी सीट जीतने में सफल नहीं हुई और उसका वोट शेयर लगभग 3.4 प्रतिशत तक सीमित रहा। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव उनके राजनीतिक नेतृत्व की पहली वास्तविक परीक्षा माना जा रहा है।

 

जन सुराज के लिए 'मेक ऑर ब्रेक' क्यों?

जन सुराज पार्टी अभी तक खुद को एक वैकल्पिक राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित नहीं कर पाई है। यदि प्रशांत किशोर इस उपचुनाव में मजबूत प्रदर्शन करते हैं—चाहे जीत दर्ज करें या भाजपा को कड़ी चुनौती दें—तो इससे पार्टी की विश्वसनीयता और संगठन दोनों को नई ऊर्जा मिल सकती है।

 

इसके विपरीत यदि पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो यह धारणा और मजबूत हो सकती है कि जन सुराज का प्रभाव जनसभाओं और अभियानों तक ही सीमित है तथा उसे चुनावी सफलता में बदलना अभी बाकी है।

 

भाजपा के लिए भी कम महत्वपूर्ण नहीं यह मुकाबला

 

यह चुनाव भाजपा के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बन चुका है। नितिन नवीन वर्षों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करते रहे हैं। ऐसे में उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के तुरंत बाद पार्टी यदि अपनी पारंपरिक सीट पर कमजोर पड़ती है, तो इसका राजनीतिक संदेश पूरे बिहार ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी जाएगा।

 

इसके अलावा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भाजपा की यह पहली बड़ी चुनावी परीक्षा होगी। जीत का अंतर कम होना भी विपक्ष को भाजपा की शहरी पकड़ पर सवाल उठाने का अवसर दे सकता है।

 

शहरी वोटर तय करेंगे मुकाबले की दिशा

 

बांकीपुर का सामाजिक और राजनीतिक समीकरण ग्रामीण सीटों से अलग माना जाता है। यहां शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारी समुदाय और पारंपरिक भाजपा समर्थक शहरी मतदाताओं की बड़ी भूमिका रहती है।

 

प्रशांत किशोर ने अब तक अपनी राजनीति का आधार ग्रामीण बिहार और पदयात्राओं के जरिए तैयार किया है। ऐसे में पहली बार उन्हें ऐसे शहरी मतदाताओं को अपने पक्ष में करना होगा, जो लंबे समय से भाजपा के साथ जुड़े रहे हैं।

 

महागठबंधन और भाजपा की रणनीति पर भी नजर

 

भाजपा और महागठबंधन दोनों ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की औपचारिक घोषणा नहीं की है। भाजपा अपने गढ़ को बचाने की रणनीति बना रही है, जबकि विपक्ष भी इस हाई-प्रोफाइल सीट पर मजबूत उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। इसी कारण यह उपचुनाव केवल तीन दलों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि बिहार विधानसभा चुनाव 2030 से पहले राजनीतिक समीकरणों का ट्रेलर भी माना जा रहा है।

क्या होगा राजनीतिक संदेश?

बांकीपुर उपचुनाव का परिणाम केवल एक विधायक तय नहीं करेगा। यह बताएगा कि क्या प्रशांत किशोर एक सफल चुनावी रणनीतिकार से जननेता बनने की दिशा में आगे बढ़ पाए हैं, क्या जन सुराज बिहार में तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर सकती है और क्या भाजपा अपनी पारंपरिक शहरी ताकत को बरकरार रख पाएगी। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह उपचुनाव बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित और निर्णायक मुकाबला बन गया है।

मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों के शामिल करने पर सियासत, विधायक आतिफ अकील के मेंबर बनने पर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद खफा

भोपाल। मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए नई कार्यकारिणी का गठन कर दिया है। राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुसार डॉ. सनवर पटेल को वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया है। बोर्ड में अध्यक्ष और आयुक्त समेत कुल 9 सदस्यों को शामिल किया गया है। सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि पहली बार बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को सदस्य बनाया गया है। हिंदू सदस्यों को वक्त बोर्ड का सदस्य बनाए जाने पर मुस्लिम संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। वहीं कांग्रेस विधायक आतिफ अकील के वक्फ बोर्ड का सदस्य पर उन्हीं के पार्टी के विधायक आरिफ मसूद ने सवाल उठा दिए है।

 

मुस्लिम संगठनों ने उठाए सवाल-वक्फ बोर्ड में  इंदौर से आने वााले मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को शामिल किए जाने पर मुस्लिम संगठनों ने विरोध जताया है। मुस्लिम स्कॉलर इमरान खोखर ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिन लोगों को इस्लाम और वक्फ व्यवस्था की जानकारी नहीं है, उन्हें बोर्ड का सदस्य बनाकर सरकार क्या संदेश देना चाहती है। उन्होंने कहा कि क्या किसी मुस्लिम को महाकाल मंदिर समिति या राम मंदिर ट्रस्ट का सदस्य बनाया जा सकता है। उनके मुताबिक सरकार का यह फैसला सांप्रदायिक सोच को दर्शाता है और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।

 

कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों मे दो फाड़-वहीं कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन का विरोध करते हुए कहा कि वह सरकार के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन से जुड़ा मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, ऐसे में सरकार ने इतनी जल्दबाजी क्यों की। मसूद ने सवाल उठाया कि जब संशोधन प्रक्रिया अभी जारी है तो दो की जगह तीन गैर-मुस्लिम सदस्य कैसे बनाए गए। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड एक ट्रस्ट है और धार्मिक मामलों में इस तरह की “सद्भावना” स्वीकार्य नहीं है। राम मंदिर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यदि वहां कोई मुस्लिम ट्रस्टी होता तो स्थिति अलग होती। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील को सदस्य बनाए जाने के सवाल पर मसूद ने कहा कि उन्हें भी पहले हज कमेटी का सदस्य बनाए जाने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि आतिफ अकील ने सदस्यता क्यों स्वीकार की, इसका जवाब वही दे सकते हैं।

 

बीजेपी का दावा-नए वक्फ अधिनियम के तहत हुआ गठन- भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि वर्ष 2025 में लागू किए गए नए वक्फ अधिनियम के प्रावधानों के तहत मध्य प्रदेश सरकार ने बोर्ड का पुनर्गठन किया है। उनके अनुसार मध्य प्रदेश इस कानून के तहत सबसे पहले वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को बोर्ड में शामिल किया गया है। शर्मा का कहना है कि वक्फ की जमीन देश की संपत्ति है और उसका उपयोग गरीबों के हित में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदू सदस्यों का उद्देश्य भी गरीबों का कल्याण करना है और इससे किसी मुस्लिम को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आपत्ति केवल उन लोगों को हो सकती है, जिन्होंने वक्फ संपत्तियों पर कब्जा कर रखा है।

 

हिंदू धर्मगुरु ने फैसले का किया समर्थन– हिंदू धर्मगुरु अनिलानंद महाराज ने बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने का समर्थन करते हुए कहा कि इससे केवल उन लोगों को परेशानी हो रही है, जिन्होंने वक्फ की करोड़ों रुपये की जमीनों पर कब्जा कर रखा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि भविष्य में सनातन बोर्ड का गठन होता है और कोई मुस्लिम सनातन को अपनाता है, तो उसे भी उसमें शामिल किया जा सकता है।

 

होमगार्ड जवानों को 5 लाख तक की कैशलेस चिकित्सा, CM योगी ने निभाया वादा

Home Guard cashless medical facility

Home Guard cashless medical facility: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश होमगार्ड विभाग के अंतर्गत कार्यरत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवारों को बड़ी राहत देते हुए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। यह सुविधा स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा पुलिस समेत कई विभागों के कर्चमारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी पर भी मंजूरी दी गई है।

 

मुख्यमंत्री ने 6 दिसंबर 2025 को होमगार्ड दिवस के अवसर पर होमगार्ड जवानों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। अब कैबिनेट की मंजूरी के साथ इस घोषणा को अमली जामा पहनाया जाएगा।

राजकीय और निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि योजना के तहत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवारों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत सूचीबद्ध राजकीय अस्पतालों और संबद्ध निजी अस्पतालों में आईपीडी (अंतर्रोगी विभाग) उपचार के लिए प्रति परिवार प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इससे गंभीर बीमारी की स्थिति में परिवारों को आर्थिक राहत मिलेगी।

सरकार वहन करेगी योजना का खर्च

कैबिनेट से मंजूर योजना के तहत प्रति होमगार्ड स्वयंसेवक एवं अवैतनिक अधिकारी 3 हजार रुपए वार्षिक प्रीमियम की दर से योजना संचालित की जाएगी। इसके लिए सरकार पर लगभग 35.50 करोड़ रुपए का वार्षिक वित्तीय व्यय अनुमानित है। इस कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना का संचालन साचीज के माध्यम से किया जाएगा। इस योजना से प्रदेश में लगभग 69 हजार होमगार्ड्स और उनके आश्रित लाभान्वित होंगे।

पुलिस समेत कई विभागों के कर्मचारियों के वर्दी भत्ते में बढ़ोतरी

कैबिनेट बैठक में वेतन समिति (2016) की संस्तुतियों पर मुख्य सचिव समिति द्वारा दी गई सिफारिशों को मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट ने इन संस्तुतियों को यथावत स्वीकार करने का निर्णय लिया। इसके तहत गृह (पुलिस) विभाग के कर्मचारियों को मिलने वाले भत्तों में संशोधन किया जाएगा। साथ ही न्याय विभाग के अधीनस्थ न्यायालयों, कारागार प्रशासन एवं सुधार विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग तथा आयुष विभाग के कर्मचारियों के वर्दी, वर्दी नवीनीकरण और वर्दी धुलाई भत्ते में वृद्धि को मंजूरी दी गई है। हालांकि अन्य भत्तों और मामलों में किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया गया है।

20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार

सरकार के अनुसार इस निर्णय से विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को राहत मिलेगी और उन्हें बढ़ी हुई दरों पर वर्दी संबंधी भत्ते प्राप्त होंगे। इन संस्तुतियों को लागू करने से राज्य सरकार पर लगभग 20 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार आएगा।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

अहमदाबाद में रथयात्रा से पहले सुरक्षा सख्त : वेजलपुर, सैटेलाइट और सरखेज सहित कई इलाकों में पुलिस की सघन चेकिंग, वांटेड आरोपी जेल भेजे गए

Ahmedabad News

Ahmedabad Rathyatra 2026: अहमदाबाद में 16 जुलाई को निकलने वाली रथयात्रा से पहले शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने और शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार मनाने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस सुरक्षा व्यवस्था के तहत जोन-7 डीसीपी (DCP) के सीधे मार्गदर्शन में 'ऑपरेशन क्लीन स्वीप मेगा कॉम्बिंग' शुरू किया गया था। इस ऑपरेशन के दौरान विभिन्न थानों के वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों की टीमों ने संयुक्त रूप से शहर के अलग-अलग संवेदनशील और व्यस्त इलाकों में सघन चेकिंग अभियान चलाया।

180 से अधिक आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई

पुलिस द्वारा चलाए गए इस मेगा कॉम्बिंग ऑपरेशन के दौरान आपराधिक गतिविधियों में शामिल कुल 180 से अधिक आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। इस सघन तलाशी के दौरान निषेध (शराबबंदी) के मामलों, मोटर वाहन अधिनियम के तहत नियमों के उल्लंघन के मामलों और लंबे समय से फरार चल रहे वांटेड अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने पकड़े गए सभी आरोपियों के खिलाफ कानून की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

जोन-7 के तहत आने वाले इन सात प्रमुख क्षेत्रों में गहन तलाशी

यह विशेष कॉम्बिंग ऑपरेशन मुख्य रूप से अहमदाबाद शहर के जोन-7 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर केंद्रित था। इसमें वेजलपुर, सरखेज, सैटेलाइट, वासना, पालड़ी, एलिसब्रिज और बोदकदेव सहित पश्चिमी क्षेत्र के प्रमुख इलाके शामिल हैं। पुलिस की अलग-अलग विशेष टीमों ने अपने-अपने निर्धारित क्षेत्रों में सड़कों, होटलों और सार्वजनिक स्थानों पर गहन तलाशी ली और सभी संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी।

वांटेड अपराधियों की गिरफ्तारी

इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य त्योहार के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोकना और अपराध पर पूरी तरह नियंत्रण पाना था, जिसमें पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। विशेष रूप से शराबबंदी से जुड़े अपराधों में शामिल असामाजिक तत्वों और विभिन्न मामलों में लंबे समय से पुलिस को चकमा दे रहे वांटेड आरोपियों को ढूंढकर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है। इसके अलावा, एम.वी. एक्ट (MV Act) के तहत ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाते हुए दंडात्मक कार्रवाई की गई।

जोन-7 डीसीपी के नेतृत्व में पुलिस की सतर्कता से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत

जोन-7 डीसीपी के कुशल मार्गदर्शन में चलाए गए इस पूरे सुरक्षा ऑपरेशन में पुलिस तंत्र को उल्लेखनीय सफलता मिली है। एक ही दिन में 180 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर पुलिस ने असामाजिक तत्वों को साफ और सख्त संदेश दिया है कि रथयात्रा के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। वेजलपुर से लेकर बोदकदेव तक के सभी इलाकों में की गई इस मेगा कॉम्बिंग से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है और पुलिस की मुस्तैदी और मजबूत हुई है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला, डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी, यूपी बनेगा Green और AI-Ready Data Center Hub

yogi cabinet

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दी गई। यह नीति 27 जनवरी 2026 को समाप्त हो गई थी, इसलिए सरकार नई उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 लेकर आई है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्रीन, एआई-रेडी और वैश्विक प्रतिस्पर्धी डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित करना है। नीति के तहत 2 गीगावाट अतिरिक्त क्षमता विकसित करने और 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

 

आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति में जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा दक्षता और टिकाऊ विकास पर विशेष जोर दिया गया है। इसके साथ ही बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रस्तावित किए गए हैं। टियर/रेटिंग-3 व 4 वाले डेटा सेंटर्स को प्रोत्साहन, एआई कंप्यूट बूस्टर प्रोत्साहन तथा ग्रीन एवं सस्टेनेबल परिचालन प्रोत्साहन जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

 

50 हजार को रोजगार मिलने की संभावना

डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डेटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा। डेटा सेंटर इकाइयों के आसपास सूचना प्रौद्योगिकी और आईटी आधारित अन्य इकाइयों की स्थापना से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। प्रस्तावित नीति से 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार और निर्माण अवधि में लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।

 

सुनियोजित नीति से मिले ठोस परिणाम

मंत्री ने बताया कि योगी सरकार ने जनवरी 2021 में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 लागू की थी, जिसे बाद में 7 नवंबर 2022 को संशोधित किया गया। उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 (प्रथम संशोधन-2022) के तहत लगभग 21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डेटा सेंटर पार्क तथा 40 मेगावाट से कम क्षमता वाली 2 डेटा सेंटर इकाइयों में से 7 परियोजनाएं परिचालन में आ चुकी हैं।