जन-कल्याण के लिए 2300 करोड़ स्वीकृत, जानें सीएम डॉ. मोहन की कैबिनेट ने क्या-क्या लिए फैसले?

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 8 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में कई अहम निर्णय लिए। उनकी अध्यक्षता में कैबिनेट ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक और प्रस्ताव अनुसार ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तहत स्वामित्व योजना के निष्पादित हस्तांतरण अभिलेखों पर अतिरिक्त स्टांप शुल्क से छूट दिए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा प्रस्तुत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक:2026 को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है।

स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव अनुसार मंत्रि-परिषद ने मुख्यमंत्री स्कूटी योजना को वर्ष 2031 तक निरंतर रखे जाने के लिए 495 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। इसी तरह खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश उपार्जित गेहूं, चना, ज्वार एवं बाजरा निस्तारण नीति : 2026 को भी मंत्रि-परिषद ने स्वीकृति दी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के प्रस्ताव अनुसार मध्यप्रदेश के 65 नगरीयों निकायों और उनके आस-पास के वन क्षेत्रों में नगरीय वन विकसित करने के लिए नमो हरित नगर योजना को 100 करोड़ की स्वीकृति दी है। कुल मिलाकर कैबिनेट ने प्रदेश में अधोसंरचना विकास और पुनर्वास कार्यों के लिए 2300 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की। 

 

कैबिनेट ने जल संसाधन विभाग द्वारा पृथक-पृथक 3 सिंचाई परियोजनाओं में पुनर्वास और पुन: विस्थापन के लिए 3 प्रस्ताव अनुसार मंत्रि-परिषद ने पन्ना जिले की केन-बेतवा लिंक परियोजना, रूंज सिंचाई परियोजना और मझगांव सिंचाई परियोजना के डूब प्रभावितों के पुनर्वास और विस्थापन के लिए अतिरिक्त रूप से 202 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि स्वीकृति दी है। कैबिनेट ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राजपत्रित सेवा भर्ती नियम : 2022 के तहत भर्ती प्रक्रिया को स्वीकृति दी। इसी तरह कैबिनेट द्वारा लीगल और डिफेंस काउंसिल सिस्टम योजना की वर्ष 2031 तक निरंतरता के लिए 42 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई। वित्त विभाग के प्रस्ताव अनुसार विभिन्न लिखतों पर देय उपकार में छूट देने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने शिक्षा विभाग की लोक-वित्त पोषित कार्यक्रमों योजनाओं एवं परियोजनाओं के परिक्षण की योजना को 1 अप्रैल 2026 से मार्च 2031 तक की निरंतरता के लिए 543 करोड़ रुपये की मंजूरी दी।

 

स्टेट डाटा सेंटर के आधुनिकीकरण, आईटी एवं डिजास्टर रिकवरी पर फोकस-कैबिनेट ने एमपीएसईडीसी द्वारा संचालित एवं संग्रहीत मप्र स्टेट डाटा सेंटर के विस्तार और अद्यतन डाटा सेंटर 3.0 परियोजना के लिए 800 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी। स्वीकृति अनुसार मप्र स्टेट डाटा का आधुनिकीकरण, आईटी एवं डिजास्टर रिकवरी क्षमता विस्तार तथा संबंधित नॉन-आईटी अवसंरचना विकास किया जाएगा। प्रदेश में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस परियोजना अंतर्गत सरकार की सेवाओं को संगठित करने व दक्ष इलेक्ट्रॉनिक सर्विस प्रदान करने के लिए भारत सरकार, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय एवं मध्यप्रदेश शासन की संयुक्त भागीदारी से भोपाल में स्टेट डाटा सेंटर की स्थापना की गई है।

प्रदेश स्टेट डाटा सेंटर 12 दिसंबर 2012 से सफलतापूर्वक संचालित है। परियोजना अंतर्गत राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के आईटी एप्लीकेशन्स के लिए होस्टिंग सेवाएं प्रदान की जाती है। स्टेट डाटा सेंटर ई-गवर्नेंस क्षेत्र की बहु-उपयोगी एवं डिजिटल भारत की अवधारणा को साकार करने हेतु डिजीटल मध्यप्रदेश के लिए अति आवश्यक अधोसंरचना है। उक्त अधोसंरचना पूर्णतः सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी आधारित है, जो 365 दिन 24 घंटे निरंतर संचालित रहती है। स्टेट डाटा सेंटर के माध्यम से ही प्रदेश में विभिन्न विभागों द्वारा प्रदत्त की जाने वाली नागरिक सेवाओं को नागरिकों को उनके निकटतम स्थल पर सुगमता पूर्वक ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाती है।

 

सुरक्षित एवं उच्च दक्षता युक्त डेटा सेंटर का होगा विकास-बदलते तकनीकी परिदृश्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कम्प्यूटिंग आदि इमर्जिंग फ्रंटियर टेनोलॉजीज़ के परिप्रेक्ष्य में ऐसी नवीन अधोसंरचना स्थापित किए जाने की आवश्यकता है, जो राज्य शासन को नागरिक सेवाओं को अधिक दक्षतापूर्वक प्रदान करने हेतु इन तकनीकों को अपनाने में सक्षम बनाए। अधोसंरचना में वृद्धि के फलस्वरूप विद्युत आपूर्ति, कूलिंग अधोसंरचना आदि संबंधित नॉन-आईटी अधोसंरचना के संवर्द्धन की आवश्यकता भी होगी। 
 

शोधकर्ताओं-युवाओं को मिलेंगे उच्चस्तरीय अध्ययन-अनुसंधान के अवसर-कैबिनेट ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अंतर्गत विज्ञान पार्क, एकल नागरिक डाटाबेस परियोजना और बॉयो टेक्नालॉजी पार्क की स्थापना एवं आगामी 5 वर्षों 1 अप्रैल 2029 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए संचालन की निरंतरता के लिए 123 करोड़ की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार विज्ञान पार्क की स्थापना संबंधी योजना के लिए 39 करोड़ 39 लाख रुपये, एकल नागरिकता डाटाबेस के लिए 75 करोड़ और बायो टेक्नोलॉजी पार्क की स्थापना और संचालन संबंधी योजनाओं के लिए 8 करोड़ 59 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।

उज्जैन स्थित आचार्य वराह मिहिर न्यास परिसर में अत्याधुनिक तारामंडल एवं खगोलीय वेधशाला स्थापित की जा रही है। इसमें 1 मीटर ऑप्टिकल टेलीस्कोप एवं 4.5 मीटर रेडियो टेलीस्कोप जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं एवं युवाओं को उच्चस्तरीय अध्ययन एवं अनुसंधान के अवसर प्राप्त होंगे। विज्ञान पार्क संबंधी योजना खगोल विज्ञान के अध्ययन, अनुसंधान एवं जन-जागरूकता को बढ़ावा देने के साथ समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने तथा अंधविश्वासों के निराकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। साथ ही, यह उज्जैन को राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख खगोलीय अनुसंधान एवं विज्ञान प्रसार केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

 

मुख्यमंत्री स्कूटी योजना की निरंतरता के लिए राशि मंजूर-कैबिनेट ने शासकीय हायर सेकेन्डरी स्कूलों में प्रथम स्थान पाने वाली बालिकाओं एवं बालक को मुख्यमंत्री स्कूटी योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-2031 तक निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की है। प्रदेश मे स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग द्वारा संचालित शासकीय हायर सेकेन्डरी स्कूलों में प्रथम प्रयास में नियमित परीक्षार्थी के रूप में न्यूनतम 70 प्रतिशत अंक प्राप्त कर प्रथम स्थान पाने वाली बालिका एंव बालक को मुख्यमंत्री स्कूटी प्रदाय योजना के अन्तर्गत लाभांवित किया जाएगा।

प्रदेश में संचालित मुख्यमंत्री स्कूटी प्रदाय किये जाने के लिए संचालित योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतरता के लिए राशि 495 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई । दूसरी ओर, भारत सरकार द्वारा राज्य में गेहूं, धान (चावल), ज्वार एवं बाजरा का उपार्जन खाद्य विभाग द्वारा किया जाता है। विक्रय कार्य व्यवस्थित रूप से किये जाने एवं उपज का अधिकतम मूल्य दिलाए जाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा मध्यप्रदेश उपार्जित खाद्यान्न (गेहूं, धान, ज्वार एवं बाजरा) निस्तारण नीति 2026 को मंत्रि-परिषद द्वारा स्वीकृति दी गई है। नीति अनुसार एक राज्य स्तरीय कमेटी मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित होगी। समिति द्वारा उपज के मात्रा निर्धारण के बाद प्रस्तावित उक्त मात्रा विक्रय करने के पूर्व रिजर्व प्राईज अपसेट मूल्य तय करना एवं ई-निविदा/ई-ऑक्शन प्रक्रिया के माध्यम से दरें आमंत्रित करना, प्राप्त दरों का परीक्षण के बाद अनुमोदन तथा निस्तारण की कार्यवाही का अनुमोदन किया जाएगा।

 

मध्यप्रदेश आईटी, आईटीइएस एंड ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी:2023 का संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत

कैबिनेट ने मध्यप्रदेश आईटी, आईटीइएस एंड ईएसडीएम इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी : 2023 के संशोधन प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। नीति की कंडिका 15, 12.6 और 12.11 में नए प्रावधान प्रतिस्थापित किए गए हैं। इसका मुख्य उद्देश्य नीति को निवेश प्रोत्साहन विभाग की मध्यप्रदेश इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी अनुरूप बनाकर ईएसडीएम इकाइयों के लिए अधिक आकर्षक एवं अनुकूल बनाई गई है, ताकि इस नीति के तहत निवेशकर्ता एवं प्रदेश को लाभ प्राप्त हो सके।

स्वीकृति अनुसार, अगर कोई पुरानी आईटी या डेटा सेंटर कंपनी अपना काम बढ़ाना चाहती है, तो उसे अपने मौजूदा निवेश में कम से कम 30% और पैसा लगाना होगा या अपनी जगह का एरिया 30% बढ़ाना होगा। इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाने वाली (ईएसडीएम) कंपनियों को अपनी मशीनों में कम से कम 30% (न्यूनतम 15 करोड़ रुपये) या 50 करोड़ रुपये (जो भी कम हो) का नया निवेश करना होगा और उत्पादन क्षमता 20% बढ़ानी होगी। ऐसा करने पर इन सभी कंपनियों को नई कंपनी की तरह ही सरकारी मदद मिलेगी। जमीन मिलने की प्रक्रिया को भी पूरी तरह ऑनलाइन और आसान बनाया गया है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे जाएंगे। अगर एक ही जमीन के लिए एक से ज्यादा कंपनियां आवेदन करेंगी, तो ऑनलाइन बोली (ई-बिडिंग) लगाई जाएगी। हालांकि, बहुत बड़े प्रोजेक्ट्स (मेगा प्रोजेक्ट) को इस बोली से छूट मिलेगी और उन्हें 'पहले आओ-पहले पाओ' के आधार पर सीधे जमीन मिल सकेगी। कंपनियां एमपीआइडीसी या अन्य सरकारी विभागों की जमीन भी ले सकती हैं, लेकिन किराया और बाकी शर्तें उसी विभाग के नियमों के मुताबिक ही तय होंगी।

 

अभिलेख पंजीयन पर उपकर-अतिरिक्त स्टॉम्प ड्यूटी से छूट को मंजूरी-कैबिनेट ने राजस्व विभाग की स्वामित्व योजना अंतर्गत अभिलेखों के पंजीयन पर देय उपकर और अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी से छूट प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है। कैबिनेट द्वारा “भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक : 2026” का अनुमोदन दिया गया। कैबिनेट ने कमजोर वर्गों को प्रभावी और कुशल विधिक सेवाएं प्रदान करने की लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम योजना को निरंतर रखे जाने के लिए राज्य की बढ़ती निर्भरता के क्रम में वर्ष-2026 से 2028 की अवधि में व्यय का 25%, वर्ष 2028 से 2030 में व्यय का 50%, वर्ष 2030-2031 में व्यय का 75 प्रतिशत तथा वर्ष 2031 व्यय का 100 प्रतिशत की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। वर्ष 2026 से 2028 की अवधि में राज्य शासन इसके व्यय का 25% वहन करेगा, जिसकी अनुमानित राशि रुपये प्रतिवर्ष 4 करोड़ 20 लाख, वर्ष 2028 से 2030 तक राज्य शासन इसके व्यय का 50% वहन करेगा, जिसकी अनुमानित राशि रुपये प्रतिवर्ष 8 करोड़ 40 लाख इसी प्रकार वर्ष 2030-2031 में राज्य शासन इसके व्यय का 75% वहन करेगा जिसकी अनुमानित राशि रुपये प्रति वर्ष 12 करोड़ 60 लाख अंत में पूर्ण निर्भरता वर्ष 2031 से राज्य शासन पर 100% होगी जिसकी अनुमानित राशि रुपये 16 करोड़ 80 लाख होना संभावित है।

 

“नमो हरित-नगर योजना” के लिए 100 करोड़ रुपये स्वीकृ‌त-कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग अंतर्गत लोक वित्त पोषित कार्यक्रमों, योजनाओं एवं परियोजनाओं के परीक्षण तथा प्रशासकीय अनुमोदन की प्रक्रिया अंतर्गत 16 वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतरता की स्वीकृति प्रदान की है। एनसीसी से सम्बंधित इस योजना वरिष्ठ संभाग-3755 के अंतर्गत कार्यरत कर्मचारियों को वेतन का भुगतान, एनसीसी कार्यालय को सुचारू रूप से चलाने के लिए कार्य किया जाता है साथ ही एनसीसी कैडेट्स के प्रशिक्षण देने संबंधित समस्त कार्य किया जाता है। इस योजना के संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए 543 करोड़ 9 लाख रुपये की निरंतरता के लिए स्वीकृति प्रदान की। कैबिनेट ने नगरीय निकायों में आगामी 5 वर्षों में 65 नगरीय निकाय क्षेत्रों में नगर वन विकास के लिए “नमो हरित-नगर योजना” के लिए 100 करोड़ रुपये की स्वीकृ‌ति प्रदान की। योजना का उद्देश्य शहरी क्षेत्र में नगरवासियों को स्वस्थ जीवन जीने के लिए वातावरण प्रदाय करना, पर्यावरण सौंदर्यीकरण करना, स्वच्छ वायु प्रदाय करना, जैव विविधता सृजित करना एवं अनुकूल जलवायु बनाना आदि है। योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक निकाय में कम से कम एक नगर वन न्यूनतम आधा एकड़ क्षेत्रफल में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए निकायों को राशि 3 किश्तों में दी जाएगी।

 

डूब प्रभावितों के पुनर्वास-विस्थापन के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत-कैबिनेट ने केन-बेतवा लिंक परियोजना के अंतर्गत पन्ना जिले के 8 ग्रामों में विशेष विस्थापन पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन पैकेज के संबंध में कटऑफ दिनांक की वृद्धि को स्वीकृति देते हुए नवीन संभावित 313 परिवारों को विशेष पैकेज की कुल अनुदान राशि 39.125 करोड़ को सम्मिलित करते हुए परियोजना के लिए कुल व्यय 439 करोड़ 325 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान किए जाने का निर्णय लिया है।

पूर्व में डूब प्रभावित ग्रामों के कृषि भूमि अर्जन हेतु भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा-11 की प्रकाशन तिथि 21 जनवरी 2022 को कट-ऑफ मानते हुए कुल 1890 परिवारों की गणना की गई थी। इन्हीं ग्रामों के आबादी भूमि/निजी भूमि पर स्थित मकानों के मुआवजा निर्धारण हेतु धारा-11 अंतर्गत मप्र के राजपत्र में प्रकाशन 15 मार्च 2024 को हुआ। प्रभावित परिवारों/जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही मांग तथा परियोजना का निर्माण कार्य सुचारू एवं त्वरित गति से क्रियान्वयन के दृष्टिगत आबादी भूमि एवं मकान के लिए धारा-11 के प्रकाशन 15 मार्च 2024 को आधार मानकर कट-ऑफ दिनांक में वृद्धि की स्वीकृति देते हुए 313 परिवारों को विशेष पुनर्वास पैकेज दिया जाना निर्णीत हुआ।

 

हर परिवार का रखा ध्यान-कैबिनेट ने रूंज मध्यम सिंचाई परियोजना से 730 डूब प्रभावितों को पूर्व में एक मुश्त पुनर्वास अनुदान राशि 5 लाख रुपये प्रति परिवार के मान से स्वीकृत की गई राशि के स्थान पर, डूब प्रभावित परिवारों द्वारा पन्ना जिले की ही केन-बेतवा लिंक परियोजना से डूब प्रभावितों को विस्थापन हेतु स्वीकृत राशि 12.50 लाख प्रति परिवार के समान की जा रही मांग एवं जन-प्रतिनिधियों द्वारा भी केन-बेतवा लिंक परियोजना से डूब प्रभावितों को विस्थापन के लिए स्वीकृत पुनर्वास पैकेज के समान राशि दिए जाने की मांग की जाती रही है। डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत रखते हुए, केन-बेतवा लिंक परियोजना के समान, रूंज मध्यम परियोजना से प्रभावित 730 विस्थापित परिवार के लिए प्रति परिवार अतिरिक्त रू. 7.5 लाख (साढ़े सात लाख) की राशि का विशेष पुनर्वास पैकेज कुल रू. 54 करोड़ 75 लाख की स्वीकृति प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया। यह राशि रूज मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए प्रशासकीय स्वीकृति राशि 269 करोड़ 79 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी। कैबिनेट द्वारा मझगांव मध्यम सिंचाई परियोजना से 1450 डूब प्रभावितों को पूर्व में एक मुश्त पुनर्वास अनुदान राशि 5 लाख रुपये प्रति परिवार के स्थान पर, (पन्ना जिले की ही केन-बेतवा लिंक परियोजना से डूब प्रभावितों को विस्थापन के लिए स्वीकृत राशि 12.50 लाख रुपये प्रति परिवार के मान से) डूब प्रभावितों के हित एवं परियोजना के क्रियान्वयन के दृष्टिगत प्रति परिवार अतिरिक्त रू. 7.5 लाख (साढ़े सात लाख) रुपये की राशि का विशेष पुनर्वास पैकेज कुल 108 करोड़ 75 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। यह राशि मझगवां मध्यम सिंचाई परियोजना के ‍लिए भूमि एवं परिसंपत्ति अधिग्रहण के लिए कुल स्वीकृत राशि 364 करोड़ 56 लाख रुपये के अतिरिक्त होगी।

 

मप्र लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी-कैबिनेट ने प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं में विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए वर्तमान प्रचलित प्रक्रिया में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के माध्यम से पर्याप्त संख्या में चयनित अभ्यर्थी उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं, जिससे विशेषज्ञों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं एवं स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। मध्यप्रदेश लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (राजपत्रित) सेवा भर्ती नियम : 2022 के नियम 6 (4) के अंतर्गत विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए विभागीय स्तर से सीधी भर्ती की कार्यवाही किए जाने संबंधी प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने अनुमति प्रदान की है।

अब इसके तहत प्रत्येक माह की एक तारीख को एमपी ऑनलाइन पर विभाग की रिक्तियां प्रदर्शित की जाएंगी, जिनके आधार पर 15 तारीख तक आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। उक्त दिनांक तक प्राप्त सभी आवेदनों पर विभागीय समिति आगामी द्वितीय बुधवार को बैठक करेगी, जिसमें सभी अभ्यर्थियों को साक्षात्‌कार के लिए बुलाया जाएगा। साक्षात्कार के बाद इनकी उपयुक्तता का निर्धारण करते हुए विभागीय समिति चयन की अनुशंसा राज्य शासन को करेगी। समिति द्वारा जिस वर्ग से जितने अभ्यर्थियों की अनुशंसा की जायेगी, उस वर्ग से उतनी रिक्तियां एमपी ऑनलाइन में प्रदर्शित की जा रही रिक्तियों से आगामी माह के लिए कम कर दी जाएगी। विभागीय समिति की अनुशंसा के आधार पर राज्य शासन ऐसे चिकित्सकों के नियुक्ति आदेश सीधे जारी करेगा और उन अभ्यर्थियों को सूची में प्रदर्शित रिक्त स्थानों पर पदस्थ करेगा। यह नियुक्तियां प्रथम 3 वर्ष के लिए उन्हीं स्थानों पर की जाएंगी, जिन स्थानों को रिक्तियों में प्रदर्शित किया गया है। प्रथम 3 वर्ष तक ऐसे चिकित्सकों का स्थानांतरण नहीं किया जाएगा।

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के ‘पराक्रम’ वाले बयान पर घमासान, युवाओं को लेकर क्या कह गईं UP गवर्नर?

anandi Patele

Anandiben Patel Parakram Bayan: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल अपने एक बयान को लेकर चौतरफा विवादों से घिर गई हैं। लखनऊ के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (AKTU) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं के घर से भागने और शादी से पहले गर्भवती होने की स्थिति पर कटाक्ष करते हुए इसे युवाओं का 'पराक्रम' बता दिया। इस बयान के सामने आते ही विपक्षी दलों ने इसे युवाओं और महिलाओं का अपमान बताते हुए राजभवन को घेरना शुरू कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में लखनऊ के AKTU विश्वविद्यालय में 'मां-बेटी सम्मेलन' और दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया था। इस दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मुख्य अतिथि के रूप में छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को संबोधित कर रही थीं। युवाओं के स्वास्थ्य, करियर और आज के बदलते लाइफस्टाइल पर बात करते हुए उन्होंने राजधानी के 'सिद्धीखेड़ा बालिका गृह' का उदाहरण दिया।

 

उन्होंने समाज में बढ़ रहे एक विशेष चलन पर चिंता और नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कभी-कभी लड़के-लड़कियां (घर से) भाग जाते हैं और फिर बच्चे पैदा हो जाते हैं। उस बच्चे को न तो मायका स्वीकार करता है और न ही ससुराल वाले अपनाते हैं। ऐसे में उस बच्चे का मां-बाप कौन है? सरकार ही उसकी मां-बाप बनती है।

ऐसा पराक्रम मत करिए

राज्यपाल पटेल ने कहा कि यह आप सभी का 'पराक्रम' है… ऐसा पराक्रम आप लोग मत करिए। इन पराक्रमों से दूर रहिए। उन्होंने आगे युवाओं को नसीहत देते हुए कहा कि वह 'लव मैरिज' (प्रेम विवाह) की विरोधी नहीं हैं, लेकिन युवाओं को पैर पर खड़े होने और आत्मनिर्भर बनने के बाद ही यह कदम उठाना चाहिए, न कि करियर बर्बाद करके।

बयान पर क्यों मचा है बवाल?

राज्यपाल के इस बयान में इस्तेमाल किए गए 'पराक्रम' शब्द पर ही सारा विवाद है। समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान को आड़े हाथों लिया है। विपक्ष का आरोप है कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा युवाओं की निजी जिंदगी और गंभीर सामाजिक समस्याओं के लिए 'पराक्रम' जैसे गरिमामयी शब्द का इस तरह व्यंग्यात्मक इस्तेमाल करना अशोभनीय है। सोशल मीडिया पर भी एक धड़ा इसे बेटियों को कठघरे में खड़ा करने वाला बयान मान रहा है। आलोचकों का कहना है कि समाज को जागरूक करने के लिए अधिक संवेदनशील भाषा का इस्तेमाल किया जा सकता था।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

सीएम डॉ. मोहन यादव ने 10 साल बाद दिया प्रमोशन, गदगद हुए कर्मचारी, ढोल-नगाड़ों से किया स्वागत

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों-कर्मचारियों को दस साल से अपेक्षित बड़ी सौगात दी है। उन्होंने एक दशक बाद पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह प्रक्रिया शुरू होने पर अधिकारियों-कर्मचारियों ने सीएम डॉ. यादव का स्वागत किया। इस बीच कर्मचारियों ने यह भी मांग कर दी कि जिन विभागों में यह प्रक्रिया शुरू नहीं है, वहां भी जल्द शुरू की जाए। इस पर सीएम डॉ. यादव ने उन्हें आश्वासन दिया कि जो भी अधिकारी-कर्मचारी पदोन्नति का पात्र होगा, उसे वह दी जाएगी। सरकार की इस पहल से लाखों कर्मचारियों को लाभ पहुंचेगा।

 

गौरतलब है कि बुधवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कैबिनेट बैठक के लिए जैसे ही मंत्रालय पहुंचे, वैसे ही उनके स्वागत में ढोल-नगाड़े बजने लगे। अधिकारी-कर्मचारी उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़े। कर्मचारियों ने सीएम डॉ. यादव को गुलदस्ता भेंट किया। इस मौके पर कर्मचारियों ने कहा कि हम पदोन्नति की प्रक्रिया शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त करते हैं। 

 

इस अवसर पर कर्मचारी कल्याण समिति, मंत्रालय कर्मचारी संघ और अजाक्स  के पदाधिकारी मौजूद थे। बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कर्मचारी कल्याण के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने इस अवसर पर भी संघों के पदाधिकारियों को आश्वासन दिया कि कोई भी पात्र कर्मचारी अन्याय का शिकार नहीं होगा। उन्होंने पद संभालते ही कर्मचारी कल्याण के लिए पहल करनी शुरू कर दी थीं। उसी का परिणाम है कि आज लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा होने जा रहा है।

ललिता गौतम हत्याकांड : मेरठ में न्याय की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन, पुलिस का हल्का बल प्रयोग, 5 लोग हिरासत में

protests in Meerut over Lalita Gautam murder case

Lalita Gautam murder case : 21 वर्षीय छात्रा ललिता गौतम के अपहरण और निर्मम हत्या के मामले में एक बार फिर ग्रामीणों और पीड़ित परिवार का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाज के लोग कमिश्नरी पार्क पहुंचे और प्रदर्शन किया। बाद में प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट गेट पर धरने पर बैठ गए, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया और पांच लोगों को हिरासत में ले लिया।

 

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस इस जघन्य हत्याकांड में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर रही है। उनका कहना है कि मामले में कई अन्य आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पीड़ित परिवार पर दबाव और धमकियां दी जा रही हैं। ग्रामीणों ने सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।

 

गौरतलब है कि थाना रोहटा क्षेत्र की रहने वाली ललिता गौतम का विगत 15 मई को कथित रूप से अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई और शव पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर उसे जलाने का प्रयास किया गया। छात्रा का अधजला शव उकसिया के जंगल से बरामद हुआ था। इस घटना के बाद से क्षेत्र में लगातार आक्रोश बना हुआ है।

ALSO READ: मेरठ पुलिस का बड़ा एक्शन! शादी समारोह में गोलीबारी करने वाले इनामी बदमाश मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार

प्रदर्शन के दौरान पहले लोग कमिश्नरी चौराहे पर धरने पर बैठे, जिससे यातायात प्रभावित होने लगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट गेट पहुंच गए। हालात को संभालने के लिए एसपी देहात, एसपी ट्रैफिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। बाद में एसएसपी ने स्वयं मोर्चा संभाला। बातचीत विफल होने के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर धरना समाप्त कराया।

 

एसएसपी अविनाश पांडे ने कहा कि पुलिस इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। मुख्य आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अन्य संदिग्धों और सह-आरोपियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी।

 

एसएसपी ने यह भी आरोप लगाया कि महापंचायत के नाम पर कुछ बाहरी लोग माहौल बिगाड़ने का प्रयास कर रहे थे। पुलिस के अनुसार ऐसे लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। फिलहाल पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है।

ALSO READ: मेरठ में STF ने 1 लाख के इनामी जुबैर को किया ढेर, पास से मिलीं दो पिस्टल

उधर, पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
Edited By : Chetan Gour 

CM योगी ने चित्रकूट में योजनाओं के लाभार्थियों को वितरित किए चेक, मेधावी छात्रों का भी किया सम्मान

Chief Minister Yogi Adityanath distributed cheques to beneficiaries of schemes in Chitrakoot

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट में विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक व अन्य सहायता प्रदान की। इसमें मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मेधावी सम्मान योजना, मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना समेत अन्य योजनाओं से जुड़े लाभार्थी शामिल रहे।

मुख्यमंत्री ने योगी ने पोषण अभियान एवं सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र के तहत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को डिजिटल सुविधाओं से जोड़ने के लिए स्मार्टफोन वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने श्रीमती ममता सोनी और श्रीमती आकृति शर्मा को विभागीय योजनाओं के बेहतर संचालन और लाभार्थियों तक सेवाएं पहुंचाने के लिए स्मार्टफोन प्रदान किए। 

ALSO READ: योगी सरकार का बड़ा तोहफा, कैशलेस चिकित्सा योजना का किया शुभारंभ, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, छात्रों के खातों में ट्रांसफर किए 1320 करोड़

मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना

विजय कुमार– 5 लाख रुपए का चेक (मोबाइल रिपेयरिंग)

कुमारी सत्यम मिश्रा – 5 लाख का चेक (पेपर-प्लेट मेकिंग)

 

पोषण अभियान एवं सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र के अंतर्गत

श्रीमती ममता सोनी – स्मार्ट फोन (विभागीय योजनाओं के निष्पादन के लिए)

श्रीमती आकृति शर्मा – स्मार्ट फोन (विभागीय योजनाओं के निष्पादन के लिए)

ALSO READ: योगी सरकार का मेगा ग्रीन मिशन, गंगा-यमुना समेत 13 नदियों के किनारे लगेंगे 3.83 करोड़ से अधिक पौधे

मुख्यमंत्री आवास योजना ग्रामीण

श्रीमती संगीता – स्वीकृत आवास की चाबी

श्रीमती शिव कुमारी – स्वीकृत आवास की चाबी

 

मेधावी सम्मान योजना

बप्पा रावल सिंह – 1 लाख रुपए का चेक।

कुमारी मानषी तिवारी – 1 लाख रुपए का चेक।

ALSO READ: योगी सरकार का हाईटेक मिशन : साइबर अपराध पर लगाम के लिए उन्नत तकनीक और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना

श्रीमती मुन्नी देवी – 5 लाख रुपए का चेक।

 

दैवीय आपदा के अंतर्गत अहैतुक सहायता

श्रीमती आरती – 4 लाख रुपए का चेक।

Hardeep Singh Nijjar Case: कनाडा पुलिस बोली- भारतीय सरकार की भूमिका के सबूत नहीं, ट्रूडो के आरोपों से अलग दावा

2023 में कनाडा में खालिस्तानी समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या की जांच कर रही कनाडाई पुलिस ने बड़ा बयान दिया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि अब तक उन्हें ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे भारतीय सरकार या उसके अधिकारियों का इस हत्या से संबंध साबित हो सके। यह बयान उस समय के कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के उन आरोपों से अलग है, जिनके बाद भारत और कनाडा के रिश्तों में काफी तनाव पैदा हो गया था।

ALSO READ: Meta के नए AI Smart Glasses पर बड़ा खुलासा, हर आवाज और हर दृश्य को समझेंगे, प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

RCMP अधिकारी ने दिया बयान

यह जानकारी कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की डिप्टी कमिश्नर लीसा मोरलैंड ने दी। उनका बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका ने जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

ALSO READ: Yamaha Aerox Electric : 117Km रेंज और 95.5Km/h की टॉप स्पीड का दावा, जानिए क्या है यामाहा के नए स्कूटर की कीमत

'ऑपरेशन हार्डबॉल' के तहत हुई कार्रवाई

 

अमेरिका, कनाडा और यूरोप की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने संयुक्त अभियान 'ऑपरेशन हार्डबॉल' चलाकर भारत से जुड़े तीन संगठित अपराध गिरोहों के कथित नेटवर्क पर कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत कुल 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।  बताया गया है कि गिरफ्तार किए गए लोगों के तार लॉरेंस बिश्नोई गैंग समेत भारत आधारित संगठित अपराध समूहों से जुड़े होने के आरोप हैं। मामले की जांच अभी जारी है और संबंधित एजेंसियां विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

CM योगी ने स्वच्छ व हरित विद्यालयों के शिक्षकों का किया सम्मान, बच्चों द्वारा बनाए मॉडलों का किया अवलोकन

Chief Minister Yogi honored principals and headmasters of clean and green schools

– मुख्यमंत्री ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह, नाम और कक्षा के बारे में ली जानकारी, फिर चॉकलेट भी दी

– मुख्यमंत्री योगी ने दिव्यांग बच्चों की भी हौसलाअफजाई की

– मुख्यमंत्री ने 15 लाभार्थियों को दिया कैशलेस चिकित्सा कार्ड

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के 12 प्रधानाचार्यों/प्रधानाध्यापकों का सम्मान किया। स्वच्छ व हरित योजना के तहत स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, शौचालय, हाथ धुलाई, रखरखाव बेहतर विद्यालयीय वातावरण विकसित करने के उत्कृष्ट प्रयासों के लिए यह विद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर चयनित किए गए हैं। 

 

मुख्यमंत्री ने बच्चों से किया संवाद, बढ़ाया उत्साह 

मंच पर पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों से संवाद किया। उनका नाम जाना और प्रदर्शनी में उनके द्वारा लगाए गए विभिन्न मॉडलों का अवलोकन किया। मॉडल से जुड़ी जानकारी ली और बच्चों की जिज्ञासाओं के बारे में भी जाना। मुख्यमंत्री ने दिव्यांग बच्चों की भी हौसलाअफजाई की। मुख्यमंत्री ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें चॉकलेट भी प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने मंच से भी बच्चों की प्रशंसा की।

 

मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी में बच्चों के मॉडल की मंच से की सराहना 

मुख्यमंत्री योगी ने प्रदर्शनी में बच्चों के उत्साह की सराहना की। कहा कि निपुण भारत अभियान के तहत कक्षा-3 के बच्चे वाक्य बनाने और पढ़ने में निपुण दिख रहे थे। उनकी भाषा, अंकगणित के ज्ञान की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहाकि पीएम मोदी का विजन है कि निपुण भारत अभियान में हर बच्चे को उसके क्षेत्र में योग्य व पारंगत बना सकें क्योंकि सशक्त भवन सुदृढ़ नींव पर ही तैयार हो सकता है।

ALSO READ: योगी सरकार का बड़ा तोहफा, कैशलेस चिकित्सा योजना का किया शुभारंभ, 12 लाख शिक्षकों को मिलेगा सुरक्षा कवच, छात्रों के खातों में ट्रांसफर किए 1320 करोड़  

एसबीआई व शिक्षा विभाग ने आदान-प्रदान किया एमओयू 

मुख्यमंत्री के समक्ष सामाजिक सुरक्षा के अंतर्गत बेसिक माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा व भारतीय स्टेट बैंक लखनऊ सर्किल के सीजेएम दीपेश राज ने एमओयू का आदान-प्रदान किया। 

 

मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने वाले प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक 

1- संभल-  प्राथमिक विद्यालय इटैला माफी-    कपिल कुमार मलिक 

2- पीलीभीत-  प्राथमिक विद्यालय चोखापुरी-   मनीष कुमार 

3- चित्रकूट-   पूर्व माध्यमिक विद्यालय गढ़छापा-    हरिशंकर त्रिपाठी 

4- बरेली-     प्राथमिक विद्यालय सहजनी-  राजीव सिंह 

5- बदायूं-    कंपोजिट विद्यालय आमगांव-   संगीता शर्मा 

6- रायबरेली-   प्राथमिक विद्यालय दौतरा-   आशीष प्रताप सिंह 

7- सहारनपुर-   उच्च प्राथमिक विद्यालय लबडौला कुतुबपुर-   संजीव कुमार 

8- श्रावस्ती-   कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हरिहरपुर रानी   कैसर जहां 

9- जालौन-    कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कोंच-      वंदना वर्मा 

10- प्रयागराज-  एयरफोर्स स्कूल मनौरी-  जावेद खान 

11- वाराणसी-   जवाहर नवोदय विद्यालय गजोखर-      नागेश कुमार मिश्र 

12- मेरठ-      दयावती मोदी एकेडमी-     डॉ. ऋतु दीवान

ALSO READ: योगी सरकार का मेगा ग्रीन मिशन, गंगा-यमुना समेत 13 नदियों के किनारे लगेंगे 3.83 करोड़ से अधिक पौधे

मुख्यमंत्री ने 15 लाभार्थियों को दिया कैशलेस चिकित्सा कार्ड

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना के 15 लाभार्थियों को चिकित्सा कार्ड प्रदान किया। इनमें एक ही परिवार के चार लोग हैं।

 

बेसिक शिक्षा विभाग

1- सारिका साकोरिकर सहायक अध्यापक (प्राथमिक विद्यालय डुमरी, काशी विद्यापीठ)

2- अरविंद सिंह (कंपोजिट विद्यालय अइली, चिरईगांव वाराणसी)

3- शिक्षामित्र कुसुम देवी (प्राथमिक विद्यालय परिजनपुर, आराजी लाइन वाराणसी)

4- अनुराधा कुशवाहा (पूर्व माध्यमिक विद्यालय मुर्दहा, हरहुआ)

5- सोनी रसोइया (प्राथमिक विद्यालय दशनीपुर, हरहुआ) 

6- कल्पना (पूर्णकालिक शिक्षिका, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, शिवपुरी, नगर क्षेत्र, वाराणसी) 

ALSO READ: योगी सरकार का हाईटेक मिशन : साइबर अपराध पर लगाम के लिए उन्नत तकनीक और अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण

माध्यमिक शिक्षा

7- शालिनी कुमारी, सहायक अध्यापक (निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कॉलेज, महमूरगंज)

8- दीपक पटेल, सहायक अध्यापक (श्री अंबिका प्रसाद सिंह इंटर कॉलेज, भैरवनाथ)

9- नीरज कुमार, प्रवक्ता (प्रवक्ता, सुभद्रा कुमारी इंटर कॉलेज, बसनी)

10- सरफुद्दीन, सहायक अध्यापक (ए.ओ. मुस्लिम इंटर कॉलेज, लल्लापुरा) 

11- आशुतोष मिश्र   (श्री अन्नपूर्णा ब्रह्मचर्य ऋषिकुल आश्रम संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, शिवपुर) 

 

शिक्षक के परिवार के चार सदस्यों को दिया चिकित्सा कार्ड

पारिवारिक लाभ का प्रतीकात्मक संदेश देने के लिए सहायक अध्यापक नरेंद्र कुमार मौर्य (प्राथमिक विद्यालय जाल्हूपुर प्रथम, चिरईगांव) के परिवार का भी चयन किया गया। मुख्यमंत्री ने नरेंद्र मौर्या, उनकी धर्मपत्नी राजकुमारी मौर्या, पिता सुरेश कुमार मौर्य, माता राजेश्वरी मौर्या को भी कैशलेस चिकित्सा कार्ड प्रदान किया।

Meta के नए AI Smart Glasses पर बड़ा खुलासा, हर आवाज और हर दृश्य को समझेंगे, प्राइवेसी को लेकर उठे सवाल

सोशल मीडिया कंपनी Meta अपने अगली पीढ़ी के AI स्मार्ट ग्लास पर काम कर रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, ये स्मार्ट ग्लास सिर्फ फोटो या वीडियो लेने तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि आसपास की आवाज और दृश्यों को लगातार समझकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से यूजर को व्यक्तिगत (Personalised) जानकारी उपलब्ध कराएंगे। हालांकि, इस नई तकनीक को लेकर प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

ALSO READ: Yamaha Aerox Electric : 117Km रेंज और 95.5Km/h की टॉप स्पीड का दावा, जानिए क्या है यामाहा के नए स्कूटर की कीमत

कैसे काम करेंगे Meta के नए AI Smart Glasses?

 

रिपोर्ट के अनुसार, Meta इन स्मार्ट ग्लास को एक ऐसे AI डिवाइस के रूप में विकसित कर रहा है, जो लगातार आसपास की ऑडियो और विजुअल जानकारी को प्रोसेस करेगा। AI इन जानकारियों का विश्लेषण करके यूजर के सवालों के जवाब देगा। उदाहरण के तौर पर, यूजर ग्लास से पूछ सकेगा कि उसने दिन में पहले क्या देखा था, सामने रखी किसी वस्तु की पहचान कर सकेगा या दिनभर हुई किसी बातचीत के बारे में जानकारी मांग सकेगा। AI इन सवालों के जवाब यूजर के वास्तविक अनुभवों के आधार पर देगा।

 

प्राइवेसी को लेकर उठ रहे हैं सवाल

 

नई तकनीक के साथ सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी को लेकर है। फिलहाल Meta के Ray-Ban Smart Glasses में जब कैमरा रिकॉर्डिंग करता है, तब एक LED लाइट जलती है, जिससे आसपास के लोगों को रिकॉर्डिंग की जानकारी मिल जाती है।

 

लेकिन रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नए AI Smart Glasses में लगातार रिकॉर्डिंग के दौरान इस LED इंडिकेटर को बंद रखने पर विचार किया जा रहा है। यदि ऐसा होता है, तो आसपास मौजूद लोगों को यह पता ही नहीं चलेगा कि उनकी रिकॉर्डिंग हो रही है या नहीं। इससे सहमति (Consent) और निजता (Privacy) से जुड़े बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।

ALSO READ: Electric scooter : मेटल बॉडी वाले सस्ते इलेक्ट्रिक स्कूटर, दाम सुनेंगे तो चौंक जाएंगे

पुराने Ray-Ban Meta Glasses को भी मिल सकता है नया फीचर

 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि Meta सिर्फ नए हार्डवेयर पर ही नहीं, बल्कि मौजूदा Ray-Ban Meta Smart Glasses में भी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए यह “Super-Sensing” फीचर देने की योजना बना सकता है।

 

यदि ऐसा संभव हुआ, तो मौजूदा यूजर्स को नया डिवाइस खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, यह मौजूदा हार्डवेयर की क्षमता और Meta की अंतिम रणनीति पर निर्भर करेगा।

 

डेटा सर्वर पर नहीं, डिवाइस में ही हो सकती है प्रोसेसिंग

 

प्राइवेसी संबंधी चिंताओं को कम करने के लिए Meta ऐसा सिस्टम विकसित करने पर विचार कर रहा है, जिसमें ऑडियो और वीडियो का रॉ डेटा कंपनी के सर्वर पर स्टोर न किया जाए। इसके बजाय अधिकांश प्रोसेसिंग सीधे डिवाइस पर होगी और AI को केवल आवश्यक मेटाडेटा भेजा जाएगा। इससे यूजर का निजी डेटा क्लाउड पर कम स्टोर होगा और डेटा सुरक्षा बेहतर हो सकती है।

 

AI Wearables पर Meta का बड़ा दांव

 

Meta पिछले कुछ वर्षों से AI Wearables पर लगातार निवेश बढ़ा रहा है। Ray-Ban के साथ साझेदारी में कंपनी पहले ही स्मार्ट कैमरा और एडवांस्ड वॉयस कंट्रोल वाले स्मार्ट ग्लास बाजार में उतार चुकी है। यदि “Super-Sensing” तकनीक सफल होती है, तो भविष्य में Meta के AI Smart Glasses एक पर्सनल AI असिस्टेंट की तरह काम कर सकते हैं। हालांकि, कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती नई सुविधाओं और यूजर्स की प्राइवेसी के बीच संतुलन बनाए रखना होगी।

ममता बनर्जी को बड़ा झटका, ED ने फ्रीज किए 440 करोड़, क्या होगा TMC पर इसका असर

ED Freeze TMC Bank Accounts

ED Freeze TMC Bank Accounts: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कथित साइबर धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए TMC के तीन बैंक खातों में जमा 440 करोड़ रुपए के लेन-देन पर रोक लगा दी है। इस कार्रवाई ने बंगाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है, जिसे भाजपा और टीएमसी के बीच एक नए 'राजनीतिक युद्ध' के रूप में देखा जा रहा है।

 

चुनावों में भाजपा के हाथों सत्ता गंवाने वाली ममता बनर्जी के लिए यह समय सबसे नाजुक है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई को देखकर साफ लग रहा है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण और तेज होगा। भाजपा इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लगा रही है और इसे 'बंगाल की जनता की गाढ़ी कमाई की लूट' करार दे रही है। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध और टीएमसी को आर्थिक रूप से पंगु बनाने की केंद्र सरकार की सोची-समझी रणनीति बता रही है। ALSO READ: सांसद महुआ मोइत्रा पर फिर बरसाए अंडे, TMC भड़की, भाजपा पर लगाया आरोप

TMC पर क्या होगा असर?

इस कार्रवाई का असर तृणमूल कांग्रेस के भविष्य पर काफी गहरा और बहुआयामी पड़ सकता है। दरअसल, ईडी के इस कदम से टीएमसी आर्थिक रूप से पंगु हो सकती है। 440 करोड़ रुपए जैसी विशाल राशि का फ्रीज होना और 18 अन्य खातों का जांच के दायरे में आना TMC की राजनीतिक गतिविधियों को पूरी तरह ठप कर सकता है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने हमेशा खुद को और अपनी पार्टी को सादगी और शुचिता का प्रतीक बताया है। हवाई जहाज (बिजनेस जेट) और हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए पार्टी फंड से करोड़ों रुपए के कथित डायवर्जन के आरोपों से ममता बनर्जी की 'हवाई चप्पल और सूती साड़ी' वाली सादगी की छवि पर विरोधी तीखे हमले करेंगे। ALSO READ: ममता बनर्जी की बढ़ीं मुश्किलें, लगा एक और तगड़ा झटका, TMC की प्रदेश अध्‍यक्ष ने दिया इस्‍तीफा

पार्टी में हो सकता है और बिखराव

कई विधायक और सांसद टीएमसी का पहले ही साथ छोड़ चुके हैं। पार्टी के मुख्य फंड पर रोक लगने से कार्यकर्ताओं का मनोबल भी टूट सकता है। फंड की कमी के कारण जमीनी स्तर पर पार्टी कैडर को एकजुट रखना और भाजपा के आक्रामक रुख का सामना करना ममता बनर्जी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। इतना ही नहीं, ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन का एक बड़ा चेहरा रही हैं। इस तरह के गंभीर वित्तीय आरोपों के बाद राष्ट्रीय राजनीति में उनकी सौदेबाजी की शक्ति और साख कमजोर हो सकती है।

अब तक ED ने क्या-क्या कार्रवाई की?

इस मामले में केंद्रीय एजेंसी ने अब तक बेहद आक्रामक और गोपनीय तरीके से जांच को आगे बढ़ाया है। जून में दर्ज हुई एक साइबर धोखाधड़ी की FIR के बाद, मामले की गंभीरता को देखते हुए ED ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत जांच अपने हाथ में ली। मंगलवार को ED की टीमों ने कोलकाता में 5 प्रमुख ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इसमें 'केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज' के परिसर भी शामिल थे। ALSO READ: ममता बनर्जी ने संभाली TMC की कमान, बागी नेताओं को दी चुनौती, बोलीं- मुझे रोकना है तो मारना पड़ेगा…

18 बैंक खातों को खंगाल रही है ईडी

ED ने PMLA की धारा 17(1-ए) के तहत आदेश जारी कर TMC के तीन निजी बैंक खातों में जमा 440.42 करोड़ रुपए के लेन-देन पर तत्काल रोक लगा दी है। जांच में सामने आया कि अप्रैल 2023 से जून 2026 के बीच करीब 160 करोड़ रुपए केयरवेल एविएशन को भेजे गए। इसमें से 112 करोड़ रुपए का इस्तेमाल एक 'एम्ब्रेयर लेगेसी 600 बिजनेस जेट' और एक 'अगस्तावेस्टलैंड 109एसपी हेलीकॉप्टर' खरीदने के लिए किया गया, जो कथित तौर पर TMC को किराए पर दिए गए थे। ED के अधिकारी वर्तमान में TMC के कम से कम 18 बैंक खातों को खंगाल रहे हैं। साथ ही केयरवेल ट्रैवल्स, विंडबोर्न एविएशन और अनीता टूर्स जैसी संदिग्ध शेल कंपनियों के ट्रांजैक्शन की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

धरती के भीतर मिला महासागरों से भी बड़ा छिपा हुआ जल भंडार, वैज्ञानिकों की खोज ने चौंकाया

another ocean beneath the Earth surface

वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की सतह से सैकड़ों किलोमीटर नीचे एक विशाल जल भंडार की खोज की है, जो आकार में पृथ्वी के सभी महासागरों के कुल पानी से भी लगभग तीन गुना बड़ा हो सकता है। यह खोज पृथ्वी के भीतर पानी के चक्र और इसकी उत्पत्ति को समझने के नजरिए से एक क्रांतिकारी बदलाव है। हिंदू पुराणों में इस जलराशि का जिक्र मिलता है। इस छिपे हुए महासागर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

ALSO READ: धरती का विकल्प बन सकते हैं ये 4 ग्रह? जेम्स वेब और केप्लर की खोज ने चौंकाया

यह कहाँ स्थित है?

यह पानी पृथ्वी की सतह पर बहने वाले समंदरों की तरह नहीं है। यह ज़मीन से लगभग 660 किलोमीटर (410 मील) नीचे, पृथ्वी की मेंटल (Mantel) परत के 'ट्रांज़िशन ज़ोन' (Transition Zone) में छिपा हुआ है।

 

यह पानी किस रूप में है?

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह पानी तरल (Liquid) रूप में, बर्फ (Ice) के रूप में या भाप (Vapor) के रूप में नहीं है। बल्कि यह 'रिंगवूडाइट' (Ringwoodite) नाम के एक नीले रंग के चट्टानी खनिज के भीतर आणविक स्तर (Molecular Level) पर फंसा हुआ है। रिंगवूडाइट एक स्पंज की तरह काम करता है, जो अपने भीतर पानी को सोखकर रखने की अद्भुत क्षमता रखता है।

 

यह खोज कैसे हुई?

इलिनोइस के नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक स्टीव जैकबसेन और उनकी टीम ने इस बात का पता लगाया। इसके लिए उन्होंने:

 

  • पूरे अमेरिका में 2,000 से अधिक सीस्मोमीटर (Seismometers) का एक नेटवर्क इस्तेमाल किया।
  • उन्होंने 500 से अधिक भूकंपों से निकलने वाली सीस्मिक तरंगों (Seismic Waves) की गति का अध्ययन किया।
  • जब ये तरंगें पृथ्वी के केंद्र की ओर जाती हैं, तो पानी से भरी गीली चट्टानों (रिंगवूडाइट) से गुजरते समय इनकी गति धीमी हो जाती है। इसी गति के बदलाव से वैज्ञानिकों ने इस विशाल जल भंडार को डिकोड किया।

 

इस खोज का महत्व क्या है?

यह खोज इस पुराने सिद्धांत को मज़बूती देती है कि पृथ्वी पर पानी अंतरिक्ष से धूमकेतुओं (Comets) या उल्कापिंडों के टकराने से नहीं आया, बल्कि यह पृथ्वी के गर्भ से ही धीरे-धीरे सतह पर बाहर निकला है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर यह पानी रिंगवूडाइट चट्टानों के भीतर न फंसा होता और किसी तरह पृथ्वी की सतह पर आ जाए, तो दुनिया के ऊंचे-ऊंचे पहाड़ भी पानी में डूब जाएंगे और धरती पर सिर्फ समंदर ही नजर आएगा।

 

यह खोज कब हुई थी?

पृथ्वी के नीचे छिपे इस विशाल महासागर (जल भंडार) की खोज मुख्य रूप से वर्ष 2014 में हुई थी। इस खोज से जुड़ी वैज्ञानिक रिपोर्ट 13 जून 2014 को प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका 'साइंस' (Journal Science) में प्रकाशित की गई थी। नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के भू-भौतिकविद (Geophysicist) स्टीव जैकबसेन और उनकी टीम ने सालों के शोध और भूकंपीय तरंगों (Seismic Waves) के आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद इस साल दुनिया के सामने यह क्रांतिकारी जानकारी रखी थी।