ईरान ने जारी किया अयातुल्ला खामेनेई के घर पर हमले का वीडियो, मलबे में तब्दील दिखा पूरा परिसर

Ayatollah Ali Khamenei

Ayatollah Ali Khamenei News : ईरान सरकार ने बुधवार देर रात पहली बार दिवंगत सर्वोच्च नेता सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के आवासीय परिसर पर हुए हमले और उससे हुई तबाही का आधिकारिक वीडियो जारी किया। ALSO READ: अमेरिकी हमलों से दहले ईरान के 8 शहर, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के पास धमाके

 

35 सेकेंड का वीडियो ऐसे समय आया है, जब राजधानी तेहरान में खामेनेई के अंतिम संस्कार का कार्यक्रम चल रहा है। आज उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा। वीडियो में अयातुल्लाह अली खामेनेई के घर इमाम खुमैनी हुसैनीया हॉल में भारी तबाही और मलबा साफ देखा जा सकता है।

इससे पहले ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के शव को तेहरान के ग्रैंड मोसाला में अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था और उसे तेहरान और कोम की सड़कों से होते हुए जुलूस के रूप में ले जाया गया।

 

खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले के पहले दिन मारे गए थे। हमले में उनके परिवार के कई सदस्यों और 40 अफसरों की जान भी गई थी। इसमें खामेनेई की 14 महीने की पोती भी शामिल थी। अमेरिका-इजराइल ने एक साथ 35 मिसाइलें गिराई थीं। ALSO READ: West Asia Crisis : अमेरिका-ईरान में बढ़ते तनाव के बीच भारत का पहला रिएक्शन, जानिए क्या कहा

 

गौरतलब है कि अमेरिका और ईरान के बीच 20 दिनों के शांति के बाद एक बार फिर भीषण जंग छिड़ गई है। अमेरिका पिछले 2 दिनों से ईरान के कई शहरों में धमाके कर रहा है। वहीं ईरान भी खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को अपना निशाना बना रहा है।

धरती के बारे में 25 हैरान कर देने वाले तथ्य, जिन्हें जानकर आप भी रह जाएंगे दंग

25 amazing earth facts

धरती के बारे में आमतौर पर लोग यह जानते हैं कि इसके 75 प्रतिशत हिस्से पर समुद्र है। बाकि पर ज्वालामुखी, पहाड़, जंगल, नदियां, सागर, महासागर, रेगिस्तान, बर्फिले क्षेत्र, मैदान, पठार, सुनसान जगहें, दो ध्रुव, दिन-रात और ऊपर आसमान है। लेकिन यदि एक बार आप धरती को खंगालना शुरू करते हैं कि तो यह ग्रह वास्तव में कैसे काम करता है, तो चीजें बहुत जल्दी अजीब होने लगती हैं।  ये कुछ ऐसे तथ्य हैं जो सुनने में साइंस फिक्शन जैसे लगते हैं, लेकिन ये सभी बिल्कुल सच हैं।

 

अद्भुत और हैरान करने वाले तथ्य

1. पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है: धरती न तो गोल है और न ही चपटी। यह ध्रुवों (poles) पर थोड़ी चपटी है और भूमध्य रेखा (equator) पर थोड़ी उभरी हुई है क्योंकि यह घूमती है।

 

2. एक ऐसी जगह है जहाँ लगभग कभी बारिश नहीं होती: अंटार्कटिका की सूखी घाटियों (Dry Valleys) में पिछले लगभग बीस लाख वर्षों से बारिश नहीं हुई है।

ALSO READ: धरती के भीतर मिला महासागरों से भी बड़ा छिपा हुआ जल भंडार, वैज्ञानिकों की खोज ने चौंकाया

3. पृथ्वी का कोर (केन्द्र) बेहद गर्म है: धरती के केंद्र लगभग उतना ही गर्म है जितना कि सूर्य की सतह है।

 

4. दिन की लंबाई धीरे-धीरे बदल रही है: बहुत ज़्यादा तो नहीं, लेकिन पृथ्वी के घूमने की गति धीरे-धीरे कम हो रही है, जिसका मतलब है कि समय के साथ दिन लंबे होते जा रहे हैं।

 

5. गुप्त महासागर और समुद्री नदियां: धरती पर हिंद महासागर, अटलांटिक महासागर, दक्षिणी महासागर, आर्कटिक महासागर और प्रशांत महासागर सहित कुल 5 महासागर है 50 से अधिक सागर है। जैसे अरब सागर, भूमध्य सागर या लाल सागर, बंगाल सागर आदि। प्रशांत महासागर अविश्वसनीय रूप से विशाल है, क्योंकि दुनिया के सभी महाद्वीप इसमें समा सकते हैं, और फिर भी जगह बच जाएगी। लेकिन धरती के 660 किलोमीटर नीचे इन सभी महासागरों से भी बड़ा एक महासागर है। समुद्र के भीतर भी नदियाँ मौजूद हैं जो अत्यधिक खारा और भारी पानी महासागरों के तल पर बहता है।

 

6. समुद्र के भीतर एवरेस्ट से भी बड़ा पहाड़: धरती पर मौजूद एवरेस्ट के पहाड़ को सबसे ऊंचा पहाड़ माना जाता है लेकिन हवाई (Hawaii) का मौना केआ (Mauna Kea) पहाड़ समुद्र के अंदर सबसे बड़ा पहाड़ है। इसकी कुल लंबाई 10,210 मीटर है। यह माउंट एवरेस्ट से भी ज्यादा ऊंचा है। दूसरा तथ्‍य यह कि माउंट एवरेस्ट अभी भी बढ़ रहा है। विवर्तनिक हलचल (tectonic movement) के कारण यह हर साल कुछ मिलीमीटर बढ़ जाता है।

ALSO READ: धरती का विकल्प बन सकते हैं ये 4 ग्रह? जेम्स वेब और केप्लर की खोज ने चौंकाया

7. हमारा ग्रह हर समय कंपन करता है: यहाँ लगातार एक अनदेखा और अनसुना, कम आवृत्ति (low-frequency) का कंपन होता रहता है।

 

9. बिजली गिरना कभी पूरी तरह बंद नहीं होता: किसी भी एक समय पर, पृथ्वी पर कहीं न कहीं बिजली की कई कड़कड़ाहटें हो रही होती हैं।

 

10. बादल आश्चर्यजनक रूप से भारी होते हैं: एक बड़े बादल का वजन दस लाख टन से अधिक हो सकता है।

 

11. मारियाना ट्रेंच: महासागर का सबसे गहरा हिस्सा बेहद खतरनाक है। मारियाना ट्रेंच (Mariana Trench) की गहराई माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई से भी अधिक है।

 

12. ऐसी झीलें हैं जो अचानक जहरीली गैस छोड़ सकती हैं: यह सुनने में नाटकीय लगता है, लेकिन ऐसा पहले हो चुका है।

 

13. गुरुत्वाकर्षण हर जगह बिल्कुल एक समान नहीं है: आप ग्रह पर कहाँ हैं, इसके आधार पर इसमें थोड़ा अंतर आता है।

ALSO READ: क्या धरती से टकराएगा विशालकाय उल्कापिंड? जानें कब सच हो सकती है यह भविष्यवाणी

14. ऐसी नदियाँ हैं जो लगभग उबल रही हैं: अमेज़न के कुछ हिस्सों में, भू-तापीय गर्मी (geothermal heat) पानी के तापमान को उबाल के करीब पहुँचा देती है।

 

15. पृथ्वी का कुछ पानी सूर्य से भी पुराना हो सकता है: यह सौर मंडल के पूरी तरह से अस्तित्व में आने से पहले ही बन गया होगा।

 

16. आप अपनी सोच से कहीं ज़्यादा तेज़ गति से चल रहे हैं: शांत बैठे होने पर भी, आप अंतरिक्ष में भारी गति से यात्रा कर रहे हैं क्योंकि पृथ्वी लगातार घूम रही है। धरती 1674 किलोमीटर से प्रतिघंटे की रफ्तार से अपनी धूरी पर घूम रही है जबकि पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगभग 1,07,000 किलोमीटर प्रति घंटे (करीब 30 किलोमीटर प्रति सेकंड) की रफ्तार से लगा रही है। इसका अहसास आपको नहीं होता है। अंतरिक्ष से यह नजर आता है। करीब 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त होता है।

 

17. पृथ्वी के पास भी कभी छल्ले (rings) रहे होंगे: शनि ग्रह की तरह, लेकिन इसके इतिहास में केवल एक संक्षिप्त अवधि के लिए शनि ग्रह जैसे वलय होने की बात कही जाती है। इसमें लाखों मेटियोराइट्स हो सकते हैं।

 

18. हमारे ग्रह का कभी-कभी एक अस्थायी दूसरा चंद्रमा भी था: वैज्ञानिकों के अनुमान है कि कभी-कभी अंतरिक्ष के मलबे के छोटे टुकड़े हमारे गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में फंस जाते हैं जो एक अस्थाई चांद का निर्माण करते हैं। 

 

19: बड़े भूकंप वास्तव में ग्रह को खिसका सकते हैं: धरती पर 7.0 की तिव्रता से आने वाले भूकंप एक खतरा है इसके ज्याद के भूकंप पृथ्वी के घूर्णन (rotation) और अक्ष (axis) को थोड़ा बदल सकते हैं।

 

20. अंतरिक्ष इतनी दूर नहीं है: तकनीकी रूप से, आप पृथ्वी से लगभग 100 किलोमीटर ऊपर पहुँचते ही अंतरिक्ष में प्रवेश कर जाते हैं। इसका अर्थ है कि आप धरती के गुरुत्वाकर्षण से दूर उसकी कक्षा में प्रवेश कर जाते हैं। 

 

21. चुंबकीय ध्रुव समय-समय पर अपनी जगह बदलते हैं: ऐसे रिकॉर्ड दर्ज हैं जब उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों ने अपनी स्थिति आपस में बदल ली थी।

 

22. पृथ्वी नीले के अलावा दूसरे रंगों की भी हो सकती थी: शोधकर्ताओं का मानना है कि प्राचीन बैक्टीरिया द्वारा सूर्य की ऊर्जा का उपयोग करने के तरीके के कारण शुरुआती समुद्रों का रंग बैंगनी था।

 

23. ग्रह का अधिकांश हिस्सा अभी भी एक रहस्य है: हमने अपने महासागरों की तुलना में ग्रह का नक्शा बेहतर तरीके से तैयार किया है। महासागर का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आज भी अनन्वेषित (unexplored) है।

 

24. सहारा मरुस्थल में कभी झीलें, पेड़ और जानवर हुआ करते थे: कई हज़ार साल पहले इस शुष्क भूमि पर मीठे पानी के स्रोत हुआ करते थे।

 

25. पृथ्वी पर प्राकृतिक परमाणु प्रतिक्रियाएं हुई हैं: गैबॉन (Gabon) में, यूरेनियम के भंडारों ने कभी स्वतः चलने वाली (self-sustaining) परमाणु प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया था।

ALSO READ: विश्व पर्यावरण दिवस 2026: 'कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय', यही है धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश

जब आप इसे इस नज़रिए से देखते हैं, तो पृथ्वी सामान्य लगना बंद हो जाती है। यह सिर्फ वह जगह नहीं है जहाँ हम रहते हैं। यह एक लगातार बदलने वाला, थोड़ा अस्त-व्यस्त और आश्चर्यजनक रूप से अनोखा ग्रह है जिसे हम अभी भी पूरी तरह से समझने की कोशिश कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह कि यह ग्रह हमारी गैलेक्सी मिल्की वे में अरबों तारों के बीच एक रेत के कण जितना बड़ा है। ब्रह्मांड में 2 लाख से अधिक गैलेक्सियां खोजी गई है।

 

 

झारखंड में होगा 1.35 लाख करोड़ का निवेश, 20 हजार से ज्यादा लोगों को मिलेगा रोजगार

Jharkhand to see investment worth Rs 1.35 lakh crore, over 20000 people to get jobs

Jharkhand News : झारखंड सरकार ने आज नई दिल्ली स्थित ताज होटल में देश की प्रसिद्ध दर्जनभर कंपनियों के साथ 1.35 लाख करोड़ रुपए के निवेश को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खनन और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में ये करार महत्वपूर्ण होंगे। इसके लिए संबंधित विभागों के सचिव और मंत्री भी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार उससे 20 हजार से अधिक लोगों को अतिरिक्त रोजगार देने की तैयारी में है। प्रमुख कंपनियों में जिंदल की तीन (जिंदल स्टील, जिंदल न्यूक्लियर पावर और जिंदल रिन्यूएबल) कंपनियों के साथ अलग-अलग करार होगा।

झारखंड सरकार ने आज नई दिल्ली स्थित ताज होटल में देश की प्रसिद्ध दर्जनभर कंपनियों के साथ 1.35 लाख करोड़ रुपए के निवेश को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खनन और बिजली उत्पादन के क्षेत्र में ये करार महत्वपूर्ण होंगे। इसके लिए संबंधित विभागों के सचिव और मंत्री भी नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।

ALSO READ: दिल्‍ली में आज से 'नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन' का आगाज, CM हेमंत सोरेन की अध्‍यक्षता में होगा कार्यक्रम, पेश करेंगे झारखंड का डिजिटल रोडमैप

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार उससे 20 हजार से अधिक लोगों को अतिरिक्त रोजगार देने की तैयारी में है। प्रमुख कंपनियों में जिंदल की तीन (जिंदल स्टील, जिंदल न्यूक्लियर पावर और जिंदल रिन्यूएबल) कंपनियों के साथ अलग-अलग करार होगा। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में रूंगटा माइंस के साथ-साथ रूंगटा संस के साथ भी करार होगा।

सरकार ने टेक्सटाइल, अपैरल और फुटवियर नीति 2026 का ड्रॉफ्ट भी तैयार किया है। नई नीति के तहत राज्य में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। उद्योग विभाग द्वारा तैयार किए गए ड्राफ्ट में यह भी कहा गया है कि नई नीति में निवेशकों के लिए कई तरह की सब्सिडी के प्रावधान भी हैं। ड्राफ्ट में योग्य इकाइयों के लिए कॉम्प्रिहेंसिव प्रोजेक्ट इन्वेस्टमेंट सब्सिडी (सीपीआईएस) देने का प्रावधान है।

ALSO READ: झारखंड में इको टूरिज्म को मिलेगी नई रफ्तार, CM सोरेन ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, अधिकारियों को दिए अहम निर्देश

यह सब्सिडी 2 किस्तों में (पहले वर्ष के संचालन में 50 प्रतिशत और तीसरे वर्ष में शेष 50 प्रतिशत) दी जाएगी।ऑनलाइन आवेदन से लेकर विवाद निपटारे तक की सुविधा मिलेगी। इस पहल से झारखंड खुद को पूर्वी भारत के अग्रणी टेक्सटाइल, अपैरल और फुटवियर हब के रूप में स्थापित कर सकेगा। यह नीति 2016-2021 की टेक्सटाइल, अपैरल और फुटवियर नीति की अगली कड़ी है।

ALSO READ: झारखंड CM हेमंत सोरेन ने भरा SIR फॉर्म, लोगों से की अपील

2 दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन कार्यक्रम में गूगल के पब्लिक रिलेशन हेड राजेश रंजन ने मंच से कहा कि वह भी झारखंड की माटी से आते हैं। उन्होंने कहा कि मैं झारखंड के पलामू से आता हूं। उनके इस वक्तव्य पर पूरा हॉल तालियों से गूंज गया। उन्होंने कहा कि गूगल झारखंड का पूरा साथ देगा और राज्य के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर चलेगा।

जिम्मी मगिलिगन सेंटर जाकर, पहली बार शुद्ध हवा, पानी और मिट्टी से उगा, सोलर कुकर पर पका हुआ भोजन देख मंत्रमुग्ध हुए छात्र

Padma Shri Dr. Janak Palta McGilligan with students from Laurels School International during an educational visit to the Jimmy McGilligan Centre for Sustainable Development

लॉरेल्स स्कूल इंटरनेशनल के कक्षा आठ के छात्र अपने टीचर्स फ़िरदौस ग़ोरी खान, अतिसुची सिन्हा और अंजलि बालखे के साथ, जिम्मी मगिलिगन सेंटर फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट' शैक्षणिक भ्रमण पर आए। इस शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य क्लासरूम की थ्योरी और असल दुनिया की प्रैक्टिकल ग्रीन टेक्नोलॉजी के बीच के अंतर को कम करना था।

 

पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन की इस 'लिविंग लेबोरेटरी' (जीवंत प्रयोगशाला) में जाकर, ग्रामीण परिवेश में बड़े पैमाने पर ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी; जैव-विविधता: दुर्लभ, स्थानीय पेड़-पौधों की पहचान करना और पर्यावरण संरक्षण को देखना और समझना; सर्कुलर इकोनॉमी का अध्ययन।

ज़ीरो-वेस्ट सिस्टम कृषि-अवशेषों से फ़ूड प्रोसेसिंग, पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली और आत्मनिर्भरता से परिचित हुए, वह भी उनसे, जिन्हें प्यार से 'जनक दीदी' या 'ग्रीन हीरो' कहा जाता है। जीवन भर सोलर कुकर और साफ़-सुथरे खाना पकाने के तरीकों को आदिवासी और ग्रामीण महिलाओं को टिकाऊ कौशल का प्रशिक्षण दिया है, जिससे हज़ारों ग्रामीण समुदायों में बदलाव आया है।

 

सेंटर कैंपस पूरी तरह से ऑफ़-ग्रिड चलता है, जो ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भरता का एक बेहतरीन उदाहरण है। छात्रों ने सोलर और विंड पावर से साल भर रिन्यूएबल एनर्जी की लगातार आपूर्ति आंखों से देखी जनक दीदी ने एडवांस्ड सोलर ड्रायर सोलर डिहाइड्रेटर का इस्तेमाल करके दिखाया।

खुली हवा में धूप में सुखाने के विपरीत, ये बंद संरचनाएं खाने को धूल और कीड़ों से बचाती हैं और साथ ही गर्मी को अच्छी तरह बनाए रखती हैं। छात्रों ने देखा कि कैसे यह टेक्नोलॉजी बिना किसी केमिकल प्रिजर्वेटिव या बिजली की खपत के फलों और जड़ी-बूटियों के पोषक तत्वों, रंग और खुशबू को बनाए रखती है।

 

वनस्पति संबंधी चमत्कार: खास पेड़-पौधे और संरक्षण: यह फ़ार्म एक जीवित जीन बैंक के रूप में काम करता है, जो कई दुर्लभ और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों को संरक्षित करता है। डॉ. जनक ने व्यक्तिगत रूप से समूह को ऑर्गेनिक बाग की सैर कराई और खास प्रजातियों के बारे में बताया:

अरिठा, कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट और पर्सनल हाइजीन प्रोडक्ट्स के लिए 100% बायोडिग्रेडेबल और केमिकल-फ्री विकल्प के तौर पर काम करते हैं।

 

पारिजात: अपनी तेज़ खुशबू के लिए मशहूर इस पौधे के बारे में चर्चा हुई कि इसका इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाओं, सूजन कम करने वाले इलाज और ज़रूरी तेल निकालने में बड़े पैमाने पर किया जाता है।

 

हनुमान जी वाला सिंदूर (बिक्सा ओरेलाना/ एनाट्टो): इस अनोखे पौधे ने छात्रों का ध्यान खींचा क्योंकि इसके बीजों से एक चमकदार, प्राकृतिक लाल रंग मिलता है। यह खाने की चीज़ों और कॉस्मेटिक्स में इस्तेमाल होने वाले ज़हरीले सिंथेटिक रंगों का एक सुरक्षित विकल्प है।

 

इस विज़िट की एक खास बात थी फ़ार्म की ज़ीरो-वेस्ट किचन और प्रोसेसिंग यूनिट्स के बारे में जानना। खेतों में फ़सल के बचे हुए हिस्से, सूखी पत्तियां और टहनियां जलाने के बजाय—जिससे बहुत ज़्यादा वायु प्रदूषण होता है—फ़ार्म इस बिखरे हुए कचरे को इकट्ठा करके स्मोकलेस (धुआं-रहित) ब्रिकेट बनाते हैं।

डॉ. जनक पलटा मगिलिगन, सस्टेनेबल डेवलपमेंट की अनूठी मिसाल है। उनका सनावादिया स्थित घर और फ़ार्म, ज़ीरो वेस्ट और ज़ीरो यूटिलिटी बिल के साथ चलते हैं, जो यह साबित करता है कि पूरी तरह से सस्टेनेबल (टिकाऊ) जीवनशैली अपनाना मुमकिन है। भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को न केवल पर्यावरण एवं प्राकृतिक संसाधनों के उचित उपयोग की जानकारी से अवगत कराना था अपितु उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना भी था।

 

भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पर्यावरण-अनुकूल आवास तथा 'जीरो वेस्ट' एवं 'जीरो डिस्चार्ज' की अवधारणा को सरल एवं रोचक ढंग से समझा। फ़िरदौस ग़ोरी ने इस अवसर को अत्यंत गौरवपूर्ण बताते हुए कहा कि पद्मश्री सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ. पलटा मगिलिगन से प्रत्यक्ष संवाद एवं उनके सतत विकास मॉडल का अवलोकन विद्यार्थियों के लिए जीवनभर याद रहने वाला अनुभव रहेगा। 

 

संकाय नेतृत्वकर्ता: श्रीमती फिरदौस गोरी खान 

सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस ने की श्र्वेत पत्र लाने की मांग, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पूछा, MP के 7,669 करोड़ क्यों छोड़े?

भोपाल। सरदार सरोवर परियोजना को लेकर गुजरात को किए जाने वाले भुगतान को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गर्मा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरदार सरोवर बांध से जुड़े मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि मध्यप्रदेश के हितों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर विधानसभा में चर्चा कराने और श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।

 

अपने भोपाल स्थित निवास पर मीडिया से बात करते हुए जीतू पटवारी ने कहा कि वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सरदार सरोवर बांध को पूरी क्षमता तक भर दिया गया था, जिसके कारण मध्यप्रदेश के हजारों गांव डूब की चपेट में आ गए और व्यापक अव्यवस्था फैल गई। उन्होंने कहा कि यह मामला तत्कालीन शिवराज सिंह चौहान सरकार के समय का है। पटवारी ने कहा कि नर्मदा मैया पर पहला अधिकार मध्यप्रदेश के लोगों का है।

उन्होंने आरोप लगाया कि डैम में सबसे अधिक डूब मध्यप्रदेश की हुई, सबसे अधिक विस्थापन मध्यप्रदेश का हुआ और पुनर्वास का सबसे बड़ा बोझ भी प्रदेश ने ही उठाया। उनके अनुसार डूब प्रभावित 230 गांवों में से 178 गांव मध्यप्रदेश के हैं तथा 30,600 प्रभावित परिवार भी प्रदेश के हैं। इसके अलावा सबसे अधिक कृषि भूमि, वन भूमि और आदिवासी परिवारों का नुकसान भी मध्यप्रदेश को उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। ऐसे में सरकार यह स्पष्ट करे कि आखिर 7,500 करोड़ रुपये का दावा क्यों छोड़ दिया गया।

 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या इस विषय पर मंत्रिमंडल में मध्यप्रदेश के हितों पर चर्चा हुई थी क्या विपक्ष के नेताओं या पर्यावरणविदों से कोई राय ली गई। पटवारी ने कहा कि सरकार केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि 1,500 करोड़ रुपये की जगह 1,250 करोड़ रुपये बचाकर केवल 250 करोड़ रुपये दिए गए। 

 

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश को समृद्ध बनाने के लिए सरकार के कोई स्पष्ट विजन नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश लगातार कर्ज ले रहा है तो सरकार यह बताए कि कर्ज लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर श्वेत पत्र लाकर जनता के सामने पूरी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। पटवारी ने कहा कि जब उन्होंने “मोदी की गारंटी” को लेकर सवाल पूछा तो जवाब देने के बजाय उन्हें गालियां मिलीं। उन्होंने मांग की कि सरकार पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करे, सभी समझौतों और पूर्ववर्ती सरकारों के तर्कों को सार्वजनिक करे तथा विधानसभा में विस्तृत चर्चा और आधिकारिक वक्तव्य दे। 

 

क्या वर्ल्ड कप और फीफा के बिना अधूरा है फुटबॉल

FIFA World Cup

मैट पियर्सन

भले ही फुटबॉल वर्ल्ड कप की लोकप्रियता लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन इसका आयोजन करने वाली संस्था फीफा की साख आज शायद सबसे निचले स्तर पर है। सवाल उठ रहा है कि फुटबॉल को अब भी फीफा की जरूरत क्यों है? ALSO READ: पश्चिम बंगाल: पुलिस मुठभेड़ में अभियुक्त की मौत से उठे सवाल

 

पूरी दुनिया की निगाहें इस वक्त फुटबॉल वर्ल्ड कप पर टिकी हुई हैं। कोई या तो लियोनेल मेसी के गोल करने के रिकॉर्ड को देख रहा है या केप वेर्डे के उस गोलकीपर को जो रातों-रात मशहूर हो गया, या फिर फैंस के उन वीडियो क्लिप्स को जो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं।

 

यह एक जाना-पहचाना और स्वाभाविक तरीका है, जिससे लोगों का ध्यान उन विवादों से हटा दिया जाता है जो टूर्नामेंट शुरू होने से पहले चर्चा में थे। मसलन, अर्जेंटीना के कई फैंस को वीजा नहीं दिया गया, ताकि वे वहां जाकर मेसी को इतिहास रचते देख सकें। केप वेर्डे के लिए वोजिन्हा के शानदार प्रदर्शन के बाद ही उनकी मां को अमेरिका में आने के लिए वीजा बॉन्ड की शर्तों से छूट मिल सकी। इसके अलावा, टीवी पर दिखने वाले वे फैंस असल में उन चुनिंदा अमीर लोगों में से हैं जो टिकटों की इतनी भारी-भरकम कीमत चुका सकते हैं।

 

इनफानटिनो और ट्रंप के रिश्तों से फीफा पर कम हुआ भरोसा

फीफा को लेकर बढ़ती निराशा के कई कारण हैं। पिछले साल दिसंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फीफा के पहले ‘शांति पुरस्कार' से नवाजने के फैसले को लेकर कहा जा रहा है कि यह फीफा अध्यक्ष जियानी इनफानटिनो का एकतरफा फैसला था। यह पुरस्कार टूर्नामेंट में हिस्सा लेने वाले देश ईरान के साथ ट्रंप के युद्ध शुरू करने से ठीक पहले दिया गया था। इस कदम ने संस्था के भीतर और बाहर, दोनों जगह भरोसे को और ज्यादा कम कर दिया है।

 

फीफा वर्ल्ड कप की मेजबानी के लिए रोटेशन पॉलिसी (बारी-बारी से मौका देने का नियम) अपनाता है। इसका मतलब है कि हर कॉन्फेडरेशन को बारी-बारी से टूर्नामेंट की मेजबानी करने का मौका मिलना चाहिए। बस इसमें ओशिनिया अपवाद है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के एशियाई प्रतियोगिताओं में शामिल होने के बाद से ओशिनिया के पास जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। हालांकि, 2030 वर्ल्ड कप के मैच यूरोप, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में रखने की वजह से, सऊदी अरब के लिए बिना किसी चुनौती के 2034 टूर्नामेंट की मेजबानी पाने का रास्ता साफ हो गया। उसे मेजबानी का यह मौका बिना किसी चुनौती के और एशिया की बारी आने (जो 2042 में होती) से काफी पहले मिल गया।

 

कई जानकारों का मानना है कि इनफानटिनो अब फीफा के अध्यक्ष पद की तय 12 साल की समय-सीमा को पार करने वाले हैं और इस बार भी उनके सामने किसी चुनौती की उम्मीद नहीं है। यही वजह है कि फीफा को लेकर लोगों की नाराजगी आज अपने सबसे चरम स्तर पर है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बारे में कुछ किया भी जा सकता है? ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

फीफा अपनी ताकत कैसे बनाए रखता है?

फीफा की जिम्मेदारी दुनिया भर में फुटबॉल को आगे बढ़ाने की है, लेकिन साथ ही वह इस खेल से मोटी कमाई करने वाली व्यापारिक संस्था के रूप में भी काम करता है। शासन-प्रशासन के कई जानकारों ने इस दोहरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

 

वर्ल्ड कप ही फीफा की कमाई का मुख्य जरिया है। हाल ही में नए रूप में शुरू किया गया और बड़ा बनाया गया ‘क्लब वर्ल्ड कप' भी अब उसकी कमाई का एक और बड़ा स्रोत बन गया है। हालांकि, इस नए टूर्नामेंट की वजह से खिलाड़ियों और उनकी यूनियनों ने हर तरफ शिकायतें शुरू कर दी हैं। लगातार बढ़ते मैचों के शेड्यूल से तंग आकर खिलाड़ियों और प्लेयर यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है। उनका साफ कहना है कि यह व्यस्त कैलेंडर खिलाड़ियों को बुरी तरह थका रहा है। उनसे जरूरत से ज्यादा और अनुचित उम्मीदें की जा रही हैं।

 

बायर्न म्यूनिख और इंग्लैंड के स्ट्राइकर हैरी केन ने पिछले साल कहा था, “अगर मैं पूरी ईमानदारी से कहूं, तो मुझे नहीं लगता कि खिलाड़ियों की बात पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है।”

 

अगर संरचनात्मक तौर पर देखें, तो फीफा के सभी 211 सदस्य देश छह अलग-अलग महाद्वीपीय संघों (कॉन्फेडरेशन) में बंटे हैं। इन्हें हर चार साल में होने वाले अध्यक्ष पद के चुनाव में एक-एक वोट देने का अधिकार मिलता है। इसके बदले में, इन सदस्य संघों को अलग-अलग योजनाओं और कार्यक्रमों के जरिए, कम या ज्यादा आर्थिक फायदा पहुंचाया जाता है।

 

फीफा के गवर्नेंस, ऑडिट और कंप्लायंस कमेटी के पूर्व चेयरमैन मिगुएल मादुरो ने डीडब्ल्यू से कहा, “व्यवसायिक पहलू ही फीफा की सत्ता का असली आधार है। फीफा के अध्यक्ष इस पैसे का इस्तेमाल अपनी ताकत बढ़ाने और अपनी कुर्सी को पक्का करने के लिए करते हैं।” मादुरो को साल 2017 में इस पद से सिर्फ इसलिए हटा दिया गया था, क्योंकि उन्होंने रूस के मामले में राजनीतिक निष्पक्षता के नियमों को सख्ती से लागू करने की कोशिश की थी।

 

उन्होंने कहा, “यही वह चीज है जो संरक्षण की उस व्यवस्था को बनाए रखती है जिसके जरिए फीफा के अध्यक्ष अपने वफादारों को इनाम देते हैं और हर उस इंसान को सजा देते हैं जो किसी भी बात पर उनकी आलोचना करने की हिम्मत करता है। इससे यह भी पता चलता है कि क्यों मौजूदा अध्यक्षों को कभी कोई चुनौती नहीं देता और वे अनिश्चित काल के लिए कुर्सी पर जमे रहते हैं।” ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर

 

क्या राजनीति और ईयू, फीफा को बदलने के लिए मजबूर कर सकते हैं?

मादुरो की ही तरह, मानवाधिकार संगठन ‘फेयरस्क्वेयर' के निक मैक्गीहान का भी मानना है कि फीफा में कोई भी सुधार बाहर से ही करना पड़ेगा। चूंकि सदस्य देश बदलाव लाने के लिए न तो प्रेरित हैं और न ही ऐसा करने में सक्षम हैं, इसलिए वे यूरोपीय संघ से इस लड़ाई को आगे बढ़ाने की अपील कर रहे हैं।

 

उन्होंने डीडब्ल्यू से कहा, “इसके लिए राजनीतिक दखल की जरूरत है। फीफा को सुधारने का कोई और तरीका नहीं है। मुझे लगता है कि इसका स्पष्ट उदाहरण यूरोपीय संघ हो सकता है, जो खेल को उसी तरह नियम और कानून के दायरे में ला सकता है जैसे वह बड़ी टेक कंपनियों के मामले में करता है।”

 

मानवाधिकार संगठन ‘फेयरस्क्वेयर' ने ट्रंप और इनफानटिनो के बीच हुए लेन-देन और उनके रिश्तों को लेकर फीफा एथिक्स कमेटी के इन्वेस्टिगेटरी चैंबर में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं दूसरी तरफ, फुटबॉल फैंस के संगठन ‘फुटबॉल सपोर्टर्स यूरोप' (एफएसई) और एडवोकेसी ग्रुप ‘यूरोकंज्यूमर्स' ने भी वर्ल्ड कप शुरू होने के ठीक पहले, टिकटों की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ यूरोपीय आयोग में शिकायत दर्ज कराई है।

 

इस पूरे मामले पर यूरोपीय आयोग के एक प्रवक्ता ने कुछ भी कहने से मना कर दिया कि क्या यूरोपीय संघ वाकई फीफा के खिलाफ कोई सख्त कदम उठा सकता है। उन्होंने डीडब्ल्यू से सिर्फ इतना कहा कि एफएसई और यूरोकंज्यूमर्स की शिकायत पर ‘हमारे तय नियमों और सामान्य प्रक्रियाओं के मुताबिक' काम किया जा रहा है।

 

जब प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या वे वर्ल्ड कप टिकटों की इन संदिग्ध धांधलियों में दखल देंगे, तो उन्होंने साफ किया कि यूरोपीय संघ के कानून ‘इवेंट टिकटों जैसी चीजों और सेवाओं की कीमतों को तय या कंट्रोल नहीं करते।' लेकिन उन्होंने यह भी कहा, “व्यापारियों (टिकट बेचने वालों) के लिए यह जरूरी है कि वे ग्राहकों को टिकट की पूरी कीमत की सही जानकारी दें। साथ ही, वे लोगों को धोखा देने वाले तरीकों से बचें, जैसे कि शुरुआत में कम दाम दिखाकर ऐसे टिकटों का प्रचार करना जो असल में हैं ही नहीं, या जब ग्राहक ऑनलाइन लाइन (वर्चुअल क्यू) में इंतजार कर रहे हों, तो उन पर जल्दी खरीदने का अनुचित दबाव बनाना।”

 

हालांकि, इस दिशा में अब तक कोई निर्णायक राजनीतिक कदम नहीं उठाया गया है। इसके बावजूद, निक मैक्गीहान को अभी भी उम्मीद की किरण नजर आ रही है।

 

उन्होंने कहा, “आगे चलकर कहीं न कहीं कोई ऐसा नेता जरूर सामने आएगा, जो इन ताकतवर संस्थाओं से टक्कर लेने और उन्हें जवाबदेह बनाने के राजनीतिक फायदे को समझेगा। मुझे यह एक बहुत ही रोमांचक संभावना लगती है, क्योंकि मुझे लगता है कि मौजूदा हालातों को देखते हुए अब ऐसा होना तय है।” ALSO READ: नया रक्षा बैंक क्यों बनाना चाहता है नाटो का सदस्य कनाडा

 

क्या यूएफा और फीफा के बीच तनाव की वजह से कोई अलग गुट बन सकता है?

भले ही यूरोपीय फुटबॉल संघ (यूएफा) फीफा के नीचे काम करता है, लेकिन फीफा और इस ताकतवर यूरोपियन फेडरेशन के बीच अंदर ही अंदर गंभीर तनाव चल रहा है। यह तनातनी तब खुलकर सामने आ गई, जब यूएफा ने सोमालिया के रेफरी ओमार अर्टान को सुपर कप फाइनल की कमान सौंप दी। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह फैसला अर्टान को वर्ल्ड कप में रेफरी बनने के लिए अमेरिका में एंट्री न मिलने के ठीक कुछ दिनों बाद आया।

 

यूएफा के प्रेसिडेंट अलेक्जेंडर सेफरिन ने कहा, “फुटबॉल लोगों को जोड़ने के लिए बना है।”

 

पिछले साल, यूएफा के प्रतिनिधि फीफा कांग्रेस की बैठक को बीच में ही छोड़कर बाहर निकल गए थे। उन्होंने इनफानटिनो पर आरोप लगाया था कि वह खेल से ज्यादा अपने ‘निजी राजनीतिक हितों' को बढ़ावा दे रहे हैं। यह गुस्सा तब भड़का था जब इनफानटिनो, डॉनल्ड ट्रंप के साथ मध्य पूर्व के एक कूटनीतिक दौरे से लौटने के कारण फीफा की इस बेहद जरूरी मीटिंग में काफी देर से पहुंचे थे।

 

यूके में लिवरपूल यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स बिजनेस के प्रोफेसर ज्योफ वॉल्टर्स ने डीडब्ल्यू से कहा, “यूएफा और फीफा के बीच साफ तौर पर तनाव बना हुआ है। यूएफा एक बहुत बड़ा कॉन्फेडरेशन है। दुनिया के कुछ सबसे बड़े और फुटबॉल को लेकर इतिहास रचने वाले देशों पर उसका गहरा प्रभाव है। इसलिए अगर कभी फुटबॉल में अलग होकर नया संगठन बनाने की कोशिश हुई, तो उसकी शुरुआत यूएफा या उसके कुछ सदस्य देशों की ओर से हो सकती है।”

 

वह आगे कहते हैं, “लेकिन फुटबॉल की राजनीति में खुलकर अपनी बात कहना आसान नहीं होता, क्योंकि आपको दबा दिया जाता है। अगर आप किसी चीज के खिलाफ कुछ बोलते भी हैं, तो उसका अंजाम क्या होगा? क्या इससे आपके देश को बड़े टूर्नामेंट्स की मेजबानी मिलने के मौके खत्म हो जाएंगे, जो आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं? क्या इसका मतलब यह होगा कि आपको अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया जाएगा?”

 

जर्मनी इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। साल 2022 में कतर में अपने पहले मैच में जब जर्मनी के खिलाड़ियों ने विरोध जताने के लिए अपने मुंह पर हाथ रखा था, उसके बाद से टीम और उनके फुटबॉल संघ ने राजनीतिक मुद्दों पर खुलकर बोलने से दूरी बना ली है। ऐसा शायद उन्होंने भविष्य में साल 2034 या 2038 के वर्ल्ड कप की मेजबानी की दावेदारी को ध्यान में रखकर किया हो।

 

खुद यूएफा को भी साल 2021 में बड़े और अमीर क्लबों द्वारा बनाई जा रही एक अलग ‘सुपर लीग' के खतरे और उसके बाद पैदा हुए कानूनी पचड़ों का सामना करना पड़ा था। मादुरो ने कहा कि यह संगठन भी ‘ठीक उसी तरह की प्रशासनिक कमियों और कमजोरियों से जूझ रहा है जैसी फीफा में हैं। हालांकि, यूएफा में यह सब उतने खुलेआम और कड़े रूप में नहीं दिखता।

 

अगर कोई समूह फीफा से अलग होता है, तो बाकी दुनिया के लिए इसका क्या मतलब होगा?

दुनिया के बाकी फुटबॉल महासंघों के बीच यूएफा की साख शायद सेफरिन के उस हालिया बयान से भी कमजोर हुई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि बड़े स्वरूप (48 टीमों) वाले वर्ल्ड कप के कई मैच ‘पूरी तरह से उबाऊ और नीरस' हो जाते हैं। सेफरिन के गृह देश स्लोवेनिया के एक ऑनलाइन अखबार ‘जुर्नल24' में छपे इस बयान के बाद, अफ्रीका और एशिया के 13 फुटबॉल संघों के एक गठबंधन ने इसे एक सुर में ‘पूरी तरह से खारिज' कर दिया है।

 

यूरोप और दक्षिण अमेरिका, खासकर ब्राजील और अर्जेंटीना का जो रसूख दिखता है, वह असल में फीफा अध्यक्ष इनफानटिनो के एशिया और अफ्रीका वाले मजबूत गढ़ के सामने उतना मजबूत नहीं है जितना वह प्रतीत होता है। वॉल्टर्स बताते हैं कि यही एक और बड़ी वजह है जिसके कारण फीफा से अलग होकर कोई नई बगावत या नया महासंघ बनाना फिलहाल बहुत मुश्किल लगता है।

 

अगर इस बगावत की अगुआई दुनिया के बड़े और ताकतवर देश करते हैं, तो दुनिया भर के छोटे देशों का क्या होगा? उनके अपने देशों में फुटबॉल को बढ़ावा देने की क्षमता पर इसका क्या असर पड़ेगा?

 

इसके जवाब में वॉल्टर्स कहते हैं, “ग्लोबल स्पोर्ट्स में आज हम जो चुनौती देख रहे हैं, यह उसी का एक हिस्सा है। यह सिर्फ वर्ल्ड कप तक सीमित नहीं है, बल्कि कई अलग-अलग खेल लीगों में भी ऐसा ही हो रहा है, जहां बड़ी टीमें अब आगे बढ़कर खुद को अलग करने की कोशिश कर रही हैं। वे खेल से होने वाली कुल कमाई, कमर्शियल इनकम और रेवेन्यू का सबसे बड़ा हिस्सा सिर्फ अपने पास ही रखना चाहती हैं।”

 

क्या फीफा उन जगहों तक पहुंच रहा है जहां दूसरे नहीं पहुंच पाते?

भले ही कई अन्य लोगों ने फीफा के इन व्यावसायिक इरादों और पैसों की भूख पर गंभीर सवाल उठाए हैं, लेकिन इनफानटिनो लगातार इसी बात पर अड़े हुए हैं कि वह जो कुछ भी कर रहे हैं, वह सब फुटबॉल की भलाई और उसके हित के लिए ही है।

 

टूर्नामेंट की पूर्व संध्या पर, 10 जून को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “हम जो भी एक-एक डॉलर कमाते हैं, वह वापस फुटबॉल के खेल में ही लगा दिया जाता है। अगर हम भी बाकी लोगों की तरह अपने टीवी राइट्स ‘पे-टीवी' (पैसे देकर देखे जाने वाले चैनलों) को बेचते, तो हम चार गुना ज्यादा कमाई कर सकते थे। और रही बात टिकटों की, तो हम चाहें तो सारे टिकट मुफ्त में बांट सकते हैं, लेकिन तब भी वे आखिरकार ब्लैक मार्केट में ही बिकेंगे।”

 

उन्होंने आगे कहा, “फीफा अध्यक्ष होने के नाते हमें संतुलन बनाकर चलना पड़ता है। हम उन देशों में पैसा लगाते हैं जहां कोई और निवेश करने की सोचता तक नहीं, जैसे कि दक्षिण सूडान और भूटान। हमारे अलावा कोई भी यह काम नहीं कर रहा है।”

 

फिलहाल के लिए तो यह बात बिल्कुल सच भी है। अगर फुटबॉल की दुनिया के हिसाब से देखें, तो किसी भी दूसरी संस्था के पास न तो ऐसा अधिकार है और न ही इतना पैसा। जिस तरह फीफा इस खेल पर पूरी तरह हावी है, उसे देखते हुए इससे अलग होकर किसी नई बगावत या महासंघ के बनने की उम्मीद बहुत ही कम लगती है।

 

भले ही फीफा के खिलाफ लोगों की नाराजगी अपने चरम पर है, लेकिन जब तक कोई बड़ा महासंघ, देशों का गठबंधन या कोई ताकतवर इंसान आगे बढ़कर इस मुश्किल चुनौती का सामना नहीं करता, तब तक सुधार होने की गुंजाइश नाममात्र के बराबर ही है।

हिमलिंग पिघला, कम हुआ श्रद्धालुओं का उत्साह… अमरनाथ यात्रा के पहले 6 दिनों में रिकॉर्ड 1.42 लाख श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

amarnath yatra 2026

Amarnath Yatra 2026 : अमरनाथ यात्रा 2026 में हिमलिंग यात्रा के पांचवें दिन पिघल जाने के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और  उत्साह कोई कमी नहीं आई है। पहले छह दिनों में 1.42 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए, जो पिछले साल की तुलना में 30% अधिक है। सभी श्रद्धालुओं का एकमात्र मकसद हिमलिंग के जल्‍द से जल्‍द अमरनाथ दर्शन करना चाहते हैं। ALSO READ: बाबा बर्फानी अंतर्ध्यान: अमरनाथ यात्रा शुरू होने के सिर्फ 5 दिन में पिघला हिमलिंग, एक्सपर्ट्स ने बताई बड़ी वजह

 

1,42,861 श्रद्धालुओं ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन

अधिकारियों के मुताबिक, बुधवार शाम 7 बजे तक गुफा में 1,42,861 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए थे, जबकि पिछले साल इसी समय तक 1,11,975 तीर्थयात्रियों ने दर्शन किए थे। यानी तीर्थयात्रियों की संख्या में 30,886 की बढ़ोतरी हुई है। बुधवार को 29,047 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। इनमें 18,362 पुरुष, 9,737 महिलाएं, 404 बच्चे, 181 साधु, 13 साध्वियां, 11 ट्रांसजेंडर श्रद्धालु और 339 सुरक्षाकर्मी शामिल थे। जबकि सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, एक दिन में 15 हजार से ज्‍यादा श्रद्धालु गुफा के दर्शन नहीं कर सकते।

 

भीड़ को संभालने के लिए व्यापक इंतजाम

57 दिनों की अमरनाथ यात्रा 2026, 3 जुलाई को शुरू हुई और 28 अगस्त को खत्म होने वाली है। यह यात्रा कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था के तहत की जा रही है, जिसमें प्रशासन, पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य विभागों का लॉजिस्टिकल सहयोग मिल रहा है। ALSO READ: अमरनाथ गुफा के 6 बड़े रहस्य: आखिर कितने हजार साल पुरानी है यह पवित्र यात्रा?

 

अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले हफ़्तों में भी तीर्थयात्रियों का आना-जाना जोरों पर रहेगा। शुरुआत में ही बड़ी संख्या में लोगों के आने से यह उम्मीद और मजबूत हो गई है कि अगर मौजूदा ट्रेंड बिना किसी रुकावट के जारी रहा, तो 2026 की तीर्थयात्रा हाल के सालों में सबसे ज्‍यादा लोगों के शामिल होने वाले आयोजनों में से एक हो सकती है।

 

यात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण, हर सुबह जम्मू से बालटाल और नुनवान के दो बेस कैंपों के लिए तीर्थयात्रियों के बड़े-बड़े जत्थे रवाना हो रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिसमें यात्रा के दोनों रास्तों पर कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था और आपदा राहत टीमें तैनात करना शामिल है। ALSO READ: अमरनाथ यात्रा: क्या गुफा में आज भी दिखाई देते हैं 2 अमर कबूतर? जानें पूरा रहस्य

 

LG की तीर्थयात्रियों से अपील

तीर्थयात्रियों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने श्रद्धालुओं से रजिस्ट्रेशन शेड्यूल का सख्ती से पालन करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा है कि मैं सभी इच्छुक तीर्थयात्रियों से अपील करता हूं कि वे अपनी तय तारीख के लिए वैध रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने के बाद ही यात्रा करें। सालाना तीर्थयात्रा की सुरक्षा और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए तय रजिस्ट्रेशन शेड्यूल का पालन करना जरूरी है।
edited by : Nrapendra Gupta

ऑस्ट्रेलिया से भारत को मिलेगा यूरेनियम, PM मोदी और अल्बानीज के बीच कई बड़े समझौते; रक्षा से लेकर ऊर्जा तक बढ़ी साझेदारी

PM Modi with PM Albanese : India-Australia Comprehensive Strategic Partnership

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से मुलाकात की। इस दौरान 2015 के ऑस्ट्रेलिया-भारत परमाणु सहयोग समझौते के तहत शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए भारत को यूरेनियम निर्यात करने संबंधी समझौते को मंजूरी दी गई। साथ ही दोनों देशों में रक्षा और सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार करने पर भी सहमति बनी। 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि 2022 में किए गए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौता से हमारे व्यापार और निवेश का दायरा लगातार बढ़ा है। अब हमने व्यापक आर्थिक सहयोग समझौता यानी CECA पर तेजी से काम करने का निर्णय लिया है, जो दोनों देशों के लिए संतुलित, महत्वाकांक्षी और फायदे का सौदा होगा।

 

उन्होंने कहा कि PM सूर्य घर योजना को सपोर्ट करने के लिए हमने गुजरात में एक रूफटॉप सोलर ट्रेनिंग एकेडमी बनाई है ये युवाओं और महिलाओं की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आज हमने एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इससे ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति का मार्ग खुलेगा और हमारे स्वच्छ ताकत के उद्देश्यों को नई ताकत मिलेगी।

 

नॉलेज पार्टनरशिप में नया अध्याय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारतीय मूल के लोग आस्ट्रेलिया के आर्थिक और सामाजिक जीवन में सकारात्मक योगदान दे रहे हैं। आस्ट्रेलिया भारतीय छात्रों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन रहा है। भारत में आस्ट्रेलियन यूनिवर्सिटीज के कैंपस खुलने से हमारी नॉलेज पार्टनरशिप में नया अध्याय जुड़ा है। हम दोनों देशों के बीच स्टूडेंट्स, प्रोफेशनल्स और टूरिस्ट्स के बीच आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए प्रयास करते रहेंगे।

 

आतंकवाद पूरी मानवता के लिए चुनौती

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया मानते हैं कि आतंकवाद केवल किसी एक देश के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती है। इसलिए आतंकवाद के खिलाफ हमारी लड़ाई भी साझा है, हमारा संकल्प भी अटूट है और हमारा सहयोग भी लगातार मजबूत हो रहा है। हमारा यह भी मानना है कि विश्व के अनेक भागों में चल रहे तनावों और युद्धों का समाधान वार्ता और कूटनीति से ही संभव है। पूरे इंडो पैसिफिक क्षेत्र में हम मिलकर शांति, स्थिरता, आवाजाही की स्वतंत्रता और नियमों पर आधारित व्यवस्था को और मजबूत करेंगे।

 

क्या बोले ऑस्ट्रेलियाई पीएम?

प्रधानमंत्री मोदी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज ने कहा कि हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी के 6 साल बाद, भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के संबंध आज जितने महत्वपूर्ण हैं, उतने पहले कभी नहीं थे। हमारी साझेदारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हुई है। हम दोनों देशों के बीच संबंधों को और गहरा और विविध बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ताकि हम लगातार मजबूत होते रहें। उन्होंने कहा कि नए अहम समझौतों के साथ, हम रक्षा और सुरक्षा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्रों में अपने संबंधों का विस्तार कर रहे हैं। 

 

प्रधानमंत्री मोदी और मैंने अपनी व्यावहारिक साझेदारी को और गहरा करने के लिए रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया है। ऑस्ट्रेलिया भारत को एक शीर्ष-स्तरीय सुरक्षा भागीदार मानता है और यह घोषणापत्र शांतिपूर्ण, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हम रणनीतिक समन्वय को बढ़ाएंगे, अपने रक्षा अभ्यासों की जटिलता को बढ़ाएंगे और अपनी रक्षा सेनाओं के बीच आपसी तालमेल को और मजबूत करेंगे।

 

उन्होंने कहा कि हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा-संबंधी उन घटनाक्रमों पर परामर्श करने का संकल्प लेते हैं जो हमारे साझा हितों को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा हमने समुद्री सुरक्षा सहयोग के लिए एक संयुक्त रोडमैप का समर्थन किया है और साइबर, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर एक नई ऑस्ट्रेलिया-भारत साझेदारी पर सहमति व्यक्त की है।

डिजिटल क्षेत्र में गुजरात की बड़ी छलांग, CM पटेल ने लांच की नई ‘डेटा सेंटर पॉलिसी’

Chief Minister Bhupendra Patel launched developed Gujarat Data Centre Policy

Chief Minister Bhupendrabhai Patel : डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस आधुनिक युग में गुजरात सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गांधीनगर के महात्मा मंदिर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने आधिकारिक तौर पर 'विकसित गुजरात डेटा सेंटर पॉलिसी 2026-29' को लॉन्च किया। इस अवसर पर गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी, मुख्य सचिव और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के उच्च अधिकारी उपस्थित रहे। आज के समय में डेटा को एक अमूल्य संपत्ति माना जाता है, इसलिए राज्य में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल (ग्रीन) डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करना बेहद जरूरी हो गया है।

 

ऐसी पॉलिसी लाने वाला गुजरात देश का पहला राज्य बना

इस नीति की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि पूरे देश में इस समय डेटा सेंटर्स की काफी चर्चा है, लेकिन इस सेक्टर के लिए ऐसी विशेष और सुव्यवस्थित नीति घोषित करने वाला गुजरात देश का पहला राज्य बन गया है।

ALSO READ: अहमदाबाद 2008 सीरियल ब्लास्ट केस, गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की फांसी की सजा रखी बरकरार

उन्होंने आगे बताया कि सरकार ने राज्य के लिए 7.5 गीगावाट क्षमता की नीति तैयार की थी, लेकिन निवेशकों की ओर से अकेले धोलेरा (Dholera) क्षेत्र के लिए ही 10 गीगावाट क्षमता के डेटा सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव मिल चुके हैं। ये आंकड़े साबित करते हैं कि गुजरात वैश्विक स्तर पर निवेशकों के लिए एक मजबूत ब्रांड बनकर उभर रहा है।

 

6 लाख करोड़ रुपए का निवेश लाने का सरकार का बड़ा लक्ष्य

राज्य के मुख्य सचिव ने इस नई पॉलिसी के आर्थिक और भौगोलिक प्रभावों पर चर्चा की। सरकार ने इस नीति के माध्यम से राज्य में लगभग 6 लाख करोड़ रुपए का भारी निवेश आकर्षित करने और भविष्य की डिजिटल जरूरतों को पूरा करने का लक्ष्य रखा है।

ALSO READ: गुजरात के साणंद में 7,500 रुपए करोड़ के CG Semi सेमीकंडक्टर प्लांट से उत्पादन शुरू, जापान-मलेशिया को होगा चिप्स निर्यात

चूंकि डेटा सेंटर सेक्टर में संसाधनों की खपत बहुत ज्यादा होती है (उदाहरण के लिए 1 गीगावाट का डेटा सेंटर चलाने के लिए प्रतिदिन लगभग 3.5 करोड़ लीटर पानी और लाखों घरों के बराबर बिजली की आवश्यकता होती है) इसलिए गुजरात को अपनी रिन्यूएबल एनर्जी (नवीकरणीय ऊर्जा) उत्पादन की अग्रणी स्थिति का इसमें बहुत बड़ा फायदा मिलेगा।

 

51 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी का उपयोग करना होगा अनिवार्य

पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस पॉलिसी में एक बेहद खास और अनिवार्य शर्त रखी है। इसके तहत स्थापित होने वाले प्रत्येक डेटा सेंटर को अपनी कुल बिजली खपत का कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सा सौर ऊर्जा (सोलर), पवन ऊर्जा (विंड) या अन्य पर्यावरण-अनुकूल स्रोतों से ही हासिल करना होगा।

डेटा सेंटर स्थापित करने वाली कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा जमीन, पावर टैरिफ और स्टैम्प ड्यूटी में आकर्षक छूट दी जाएगी। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया को तेज और बाधामुक्त बनाने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को नोडल एजेंसी के रूप में 'सिंगल विंडो क्लीयरेंस' की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

ALSO READ: गुजरात सरकार का बड़ा फैसला, UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों को 1.55 लाख और छात्राओं को मिलेगी 2.05 रुपए लाख की सहायता

पावर और ग्रिड नेटवर्क को मजबूत करने की कवायद शुरू

डेटा सेंटर्स 24 घंटे बिना किसी रुकावट के चलते रहें, इसके लिए निरंतर बिजली आपूर्ति होना अनिवार्य है। इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए GUVNL (गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड) द्वारा राज्य के ट्रांसमिशन नेटवर्क और सब-स्टेशनों को अपग्रेड करने तथा उन्हें अधिक शक्तिशाली बनाने का काम शुरू कर दिया गया है। सरकार आने वाले वर्षों में राज्य की क्लीन एनर्जी उत्पादन क्षमता में भारी बढ़ोतरी करने जा रही है, ताकि इन नए डिजिटल उद्योगों को बिना किसी बाधा के लगातार ग्रीन पावर मिलती रहे।

Weather Update : दिल्‍ली से मुंबई तक बारिश का कहर, 23 राज्यों में IMD का अलर्ट

Rain havoc from Delhi to Mumbai, IMD issues alert for 23 states

Weather Update News : महाराष्‍ट्र, गुजरात, दिल्ली, पंजाब और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। अगले 2 से 3 दिन में मानसून पूरे देश को कवर कर सकता है। मौसम विभाग ने आज 23 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। दिल्ली-एनसीआर में आज रेड और कुछ इलाकों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश ने कई इलाकों में अचानक बाढ़, नदियों के उफान और इमारतों के ढहने जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर दी है। राजस्थान में कई जगह पर भारी बारिश हुई और राज्य में बारिश का दौर अभी कुछ दिन जारी रहने का अनुमान है।

 

दिल्ली-एनसीआर में अलर्ट

महाराष्‍ट्र, गुजरात, दिल्ली, पंजाब और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। अगले 2 से 3 दिन में मानसून पूरे देश को कवर कर सकता है। मौसम विभाग ने आज 23 राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। दिल्ली-एनसीआर में आज सुबह कई इलाकों में मूसलाधार बारिश हुई। दिल्ली-एनसीआर में आज रेड और कुछ इलाकों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। राजस्थान में कई जगह पर भारी बारिश हुई और राज्य में बारिश का दौर अभी कुछ दिन जारी रहने का अनुमान है।

ALSO READ: महाराष्ट्र में बाढ़ का खौफनाक मंजर! HPCL प्लांट से 3000 गैस सिलेंडर नदी में बहे

गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्रियों से ली स्थिति की जानकारी

असम कई हिस्सों में आंधी-तूफान और बिजली कड़कने के साथ भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। गुजरात के सूरत शहर में पिछले 24 घंटों में 358 मिमी बारिश हुई, जिससे कई इलाके में बाढ़ जैसे हालात बन गए। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने भारी बारिश से प्रभावित राज्यों की स्थिति की जानकारी लेने के लिए महाराष्ट्र, गुजरात, केरल और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्रियों से बातचीत की। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

ALSO READ: Weather Update : मानसून का कहर : महाराष्‍ट्र, गुजरात और राजस्थान में कई शहर पानी-पानी, IMD ने फिर जारी किया अलर्ट

कैसा है महाराष्ट्र का हाल?

महाराष्ट्र में लगातार बारिश से नदियों का जलस्तर बढ़ गया है और कई स्थानों पर जलभराव तथा भूस्खलन की घटनाएं हुई हैं। नासिक में गोदावरी नदी उफान पर है। मुंबई में भारी बारिश के कारण लोकल ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुईं और कई इलाकों में पानी भर गया। पालघर के वसई-विरार क्षेत्र में जलभराव के कारण गुजरात की ओर जाने वाली लंबी दूरी की ट्रेनें भी प्रभावित हुईं।

Rain havoc from Delhi to Mumbai, IMD issues alert for 23 states

मध्य प्रदेश के इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने आज मध्य प्रदेश के ग्वालियर, मुरैना, रतलाम, राजगढ़, आगर-मालवा, शिवपुरी, टीकमगढ़, दतिया और निवाड़ी जिले के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। यहां पर अति तीव्र बारिश (115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक) की चेतावनी दी गई है। हिमाचल के मंडी सहित कई जिलों में जमकर बारिश हुई, जिसके कारण भूस्खलन होने से पठानकोट-मंडी हाईवे सहित 26 मार्ग बाधित हो गए। पद्धार में लोगों के घरों में पानी घुस गया। वहीं जलभराव के कारण कई घरों का संपर्क भी कट गया।

ALSO READ: Weather Update : इन राज्यों में आगे बढ़ा मानसून, यहां बारिश और बाढ़ ने मचाई तबाही, कैसा है मुंबई का हाल?

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी

उत्तर प्रदेश के नोएडा-गाजियाबाद समेत कई जिलों में झमाझम बारिश हुई, जिससे मौसम पूरी तरह बदल गया है। प्रदेश में अगले तीन-चार दिन मानसूनी गतिविधियां बनी रहेंगी। मौसम विभाग ने आज लखनऊ से आगरा और वाराणसी तक लगभग पूरे प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी दी है।