TMC को बड़ा झटका, सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक BJP में शामिल, राज्यसभा उपचुनाव के लिए बने उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूर्व तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया। खास बात यह रही कि तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने के कुछ ही घंटों बाद पार्टी ने उन्हें टिकट भी दे दिया।

 

तीनों नेताओं ने पिछले महीने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के साथ ही तृणमूल कांग्रेस छोड़ दी थी। गुरुवार को उन्हें पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने साल्ट लेक स्थित पार्टी मुख्यालय में औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता दिलाई। पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर उपचुनाव 24 जुलाई को कराया जाएगा।

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BJP में शामिल होते ही ममता बनर्जी पर साधा निशाना

 

भाजपा में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि “ममता बनर्जी का राजनीतिक अध्याय अब समाप्त हो चुका है और TMC का भविष्य खत्म हो गया है।”

 

हालिया विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने मतदान प्रतिशत पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की लगातार सरकारों ने विकास की बजाय विरोध-प्रदर्शन, बंद और केंद्र सरकार से टकराव की राजनीति को प्राथमिकता दी।

राय ने कहा कि इसी वजह से बंगाल के युवाओं को रोजगार और बेहतर अवसरों की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां देश के अन्य राज्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत' विजन के साथ आगे बढ़ रहे हैं, वहीं पश्चिम बंगाल भ्रष्टाचार और कथित घोटालों में उलझा हुआ है।

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प्रकाश चिक बराइक ने भी लगाए आरोप

भाजपा में शामिल होने के बाद प्रकाश चिक बराइक ने भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस, दोनों सरकारों के दौरान राज्य और केंद्र के बीच समन्वय की कमी के कारण बंगाल के विकास को नुकसान पहुंचा। बराइक ने आरोप लगाया कि मनरेगा (100 दिन रोजगार योजना) सहित कई कल्याणकारी योजनाएं प्रभावित हुईं। उन्होंने केंद्र सरकार की उत्तर बंगाल में एम्स, नए मेडिकल कॉलेज, सिलीगुड़ी-दिल्ली बुलेट ट्रेन परियोजना और हासीमारा में प्रस्तावित एयरपोर्ट जैसी विकास योजनाओं का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

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TMC में बढ़ते असंतोष के बीच BJP का बड़ा दांव

 

तीनों नेताओं का भाजपा में शामिल होना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को पार्टी में शामिल नहीं करने की नीति अपनाई थी। हालांकि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने इसे 'असाधारण फैसला' बताते हुए कहा कि यह पार्टी की नीति में बदलाव नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों में लिया गया निर्णय है।

 

यह घटनाक्रम 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में TMC की हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती बगावत के बीच सामने आया है। विपक्ष के नेता के चयन को लेकर शुरू हुआ असंतोष धीरे-धीरे संसद तक पहुंच गया, जिसके बाद कई नेताओं ने TMC छोड़कर भाजपा नेतृत्व वाले NDA का समर्थन कर दिया।

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इन्हीं नेताओं में सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक भी शामिल हैं। पार्टी छोड़ने के बाद सुष्मिता देव ने ममता बनर्जी पर सीधे टिप्पणी करने से इनकार किया था, लेकिन उन्होंने इतना जरूर कहा था कि वे “एक साथ दो नावों पर सवार नहीं रहना चाहती थीं।

देश के ईवी बाजार में 18% हुई UP की हिस्सेदारी, 30 फीसदी तक पहुंचने का लक्ष्य

Uttar Pradesh EV market: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 का प्रभाव अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2025-26 में पिछले वर्ष के मुकाबले 241 प्रतिशत अधिक ईवी सब्सिडी के लिए आवेदन स्वीकृत हुए। वहीं देशभर में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में यूपी की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत तक हो चुकी है, जिसे जल्द ही 30 प्रतिशत तक पहुंचाने की योजना है।

 

यूपी परिवहन विभाग द्वारा संचालित ईवी सब्सिडी योजना के तहत अब तक 86,489 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवेदन लाभ प्राप्त करने की श्रेणी स्वीकृत हो चुके हैं, जिसमें 43 हजार से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। लगातार बढ़ते पंजीकरण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और डिजिटल एवं पारदर्शी सब्सिडी वितरण व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को देश के अग्रणी ईवी राज्यों में शामिल कर दिया है।

 

परिवहन विभाग के मुताबिक दोपहिया, चार पहिया, ई-बस और ई-गुड्स कैरियर (मालवाहक) की श्रेणी में 19 जुलाई 2023 से 31 मार्च 2024 के बीच 15,091 आवेदन स्वीकृत हुए थे। इसके बाद वित्तीय वर्ष 2024-25 में 13,950 आवेदन स्वीकृत हुए। 

पिछले वित्तीय वर्ष में 241 प्रतिशत की वृद्धि

वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 47,514 पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 241 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 से 22 जून 2026 तक केवल ढाई महीने से भी कम समय में 9,934 आवेदन स्वीकृत हुए। यह प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर लोगों का भरोसा और रुचि लगातार बढ़ने का प्रमाण है। वहीं सबसे अधिक मांग इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की रही है। अब तक 61,417 दोपहिया ईवी, 24,959 चारपहिया ईवी, 104 ई-गुड्स कैरियर और 9 ई-बसों के लिए सब्सिडी आवेदन स्वीकृत हुए हैं।

ईवी वाहनों में यूपी की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत

प्रदेश सरकार की ईवी नीति का प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। नीति आयोग की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार देशभर में बिकने वाले कुल इलेक्ट्रिक वाहनों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत है। राज्य सरकार और विशेषज्ञों का अनुमान है कि नई सब्सिडी व्यवस्था (440 करोड़ रुपए) के प्रभाव से अगले दो वर्षों में यह हिस्सेदारी बढ़कर 25 से 30 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

अब तक 2,316 चार्जिंग स्टेशन स्थापित

यूपी में 15 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या हो चुकी है। ईवी को बढ़ावा देने के साथ योगी सरकार चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी तेजी से कार्य कर रही है। पिछले 5 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 2,316 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए गए हैं, जिनमें 540 फास्ट चार्जर और 1,776 स्लो चार्जर शामिल हैं। 

 

नए चार्जिंग स्टेशन विकसित करने का भी प्लान

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य की बढ़ती मांग को देखते हुए राज्य में लगभग 38 हजार चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता होगी। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश नवीकरणीय एवं ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (यूपीआरईवी) के माध्यम से पीपीपी मॉडल पर एक्सप्रेसवे, प्रमुख शहरों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों व पर्यटन स्थलों पर नए चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर हाईस्पीड चार्जर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

इस प्रक्रिया के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन करें

प्रदेश सरकार ने ईवी सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को भी पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया है। 14 अक्टूबर 2022 से लागू उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण एवं गतिशीलता नीति-2022 के अंतर्गत विकसित upevsubsidy.in पोर्टल के माध्यम से आवेदन की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जा रही है।

 

1. पोर्टल पर 'अप्लाई ऑनलाइन' सेक्शन में जाकर आवेदक लॉगिन आईडी/पासवर्ड बनाएं। 

2. वाहन पंजीकरण संख्या दर्ज करने पर वाहन पोर्टल से जुड़ी जानकारी स्वतः भर जाती है, शेष विवरण (बैंक खाता, आईएफएससी आदि) आवेदक को भरना होता है। 

3. आधार कार्ड, पैन/जीएसटी (यदि लागू), बैंक पासबुक/कैंसिल चेक, वाहन की आरसी, मोबाइल नंबर व फोटो-हस्ताक्षर जैसे दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। 

4. आवेदन डीलर स्तर, पंजीकरण व विभागीय सत्यापन सहित बहुस्तरीय जांच से गुजरता है और अंतिम सत्यापन परिवहन निरीक्षक (टीआई) द्वारा किया जाता है। 

5. नई व्यवस्था के तहत ई-बस को छोड़कर सभी प्रकार के आवेदनों का निस्तारण व भुगतान अब संबंधित आरटीओ कार्यालय से किया जा रहा है। 

6. स्वीकृति के बाद सब्सिडी राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में स्थानांतरित की जाती है। 

7. आवेदक वाहन नंबर व चेसिस नंबर के अंतिम 5 अंक डालकर पोर्टल पर आवेदन की स्थिति भी जांच सकते हैं।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

महादेव ऐप सट्टेबाजी मामले में CBI ने दाखिल की, भोपाल के आहूजा ब्रदर्स सहित 66 आरोपियों पर शिकंजा

देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क महादेव ऐप मामले में  केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI)ने  बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 11 चार्जशीट दाखिल की हैं। इनमें भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में 6 और अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट से जुड़े मामले में 5 चार्जशीट शामिल हैं। सीबीआई ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में आरोपी आशिम दास, रोहित गुलाटी, विशाल छापरिया, अनिल धमानी, विशाल आहूजा और धीरेज आहूजा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की है। 

महादेव एप मामले में सीबीआई ने जिन दो भाई विशाल आहूजा और धीरज अहूजा के खिलाफ  चार्जशीट पेश की है वह भोपाल के है।  विशाल आहूजा और धीरज अहूजा भोपाल में एक ट्रेवल्स के संचालक है और सौरभ चंद्राकर के सहयोगी बताए जाते है। बताया जा रहा है कि इस मामले में ईडी के छापे के बाद  दोनों भाई इंदौर के रास्ते विदेश भाग गए थे अब उनके खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया है और दोनों के खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी है।

 

वहीं, महादेव ऐप के दूसरे मामले में सीबीआई ने 66 आरोपियों के खिलाफ 5 चार्जशीट दाखिल की हैं। इनमें सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और बेटिंग सिंडिकेट से जुड़े कई पैनलों के सदस्य शामिल हैं।वहीं जांच एजेंसी ने महादेव ऐप के मुख्य संचालकों सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सहित पहले चार्जशीट किए गए अन्य आरोपियों के खिलाफ भी अतिरिक्त साक्ष्य अदालत में पेश किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार इन्हीं पैनलों के माध्यम से अपराध से अर्जित पैसों का लेन-देन किया जाता था। इन मामलों में आईपीसी और छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

 

सीबीआई के मुताबिक, महादेव ऐप देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क में से एक है, जिसका संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था। जांच में सामने आया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल ने सोशल मीडिया के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच बनाकर देशभर में अवैध बेटिंग पैनल संचालित किए। इससे प्राप्त अवैध कमाई को म्यूल अकाउंट्स और अन्य माध्यमों से विदेश भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि अपराध से अर्जित धन का एक हिस्सा कथित रूप से कुछ लोक सेवकों को संरक्षण राशि के रूप में भी दिया गया।

 

सीबीआई ने बताया कि महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई सहयोगी कुछ वर्ष पहले पश्चिम एशियाई देशों में फरार हो गए थे और वहीं से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं। मामले के चार प्रमुख आरोपियों के खिलाफ पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए जा चुके हैं तथा उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।

 

सीबीआई ने कहा कि मामले की जांच जारी है। सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क, उसे मिले राजनीतिक और नौकरशाही संरक्षण तथा अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी चार्जशीट दाखिल की जाएंगी।

 

जीतू पटवारी का भाई नाना पुलिस हिरासत में, ड्रग नेटवर्क में आया नाम

Jeetu Patwari Bhai Nana Patwari detained: मध्य प्रदेश की सियासत और पुलिस महकमे से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस ने हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई 10 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) ड्रग्स की तस्करी और एक बड़े ड्रग नेटवर्क से जुड़े मामले में की गई है।

 

माना जा रहा है कि  हाल ही में पकड़े गए कुछ ड्रग तस्करों से पूछताछ के बाद इस हाई-प्रोफाइल नाम का खुलासा हुआ है, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाना पटवारी को पूछताछ के लिए उठाया है। इस बीच, पटवारी परिवार द्वारा पटवारी की ओर से पुलिस को दिए आवेदन में कहा कि नाना की गाड़ी मिली है, कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। परिवार ने सवाल किया है कि पुलिस बताए कि नाना पटवारी कहां है। 

क्या है पूरा मामला?

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, हाल ही में नार्कोटिक्स और स्थानीय पुलिस की संयुक्त सतर्कता के चलते कुछ संदिग्ध नशा तस्करों को दबोचा गया था। इनके पास से व्यावसायिक मात्रा में घातक एमडी ड्रग्स बरामद हुई थी। हिरासत में लिए गए ड्रग पैडलर्स और तस्करों से जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने अपने इस अवैध कारोबार के स्थानीय संपर्कों और मददगारों के नामों का खुलासा किया।

 

तस्करों के बयानों में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई 'नाना पटवारी' का नाम सामने आया। तस्करों ने दावा किया कि ड्रग्स की सप्लाई चेन और नेटवर्क में नाना पटवारी की भी संलिप्तता या संपर्क रहे हैं। ड्रग नेटवर्क जैसे गंभीर मामले में राजनीतिक रूप से रसूखदार परिवार का नाम आते ही पुलिस प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया।

फिलहाल नाना पटवारी को गिरफ्तार नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें सिर्फ हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। तस्करों द्वारा लगाए गए आरोपों और सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स) की जांच की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि इस ड्रग सिंडिकेट में उनकी भूमिका कितनी गहरी है। यदि पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों (जैसे बैंक ट्रांजेक्शन या कॉल रिकॉर्ड) में नाना पटवारी के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलते हैं, तो पुलिस उन्हें कोर्ट में पेश कर औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर सकती है।

क्या है कांग्रेस का आरोप? 

कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भ्रष्टाचार और उज्जैन जमीन मामले को लेकर आंदोलन की घोषणा की थी। यही कारण है कि सरकार ने बदले की भावना से उनके भाई को हिरासत में लिया है। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य विवेक तनखा ने भी अपनी सोशल मीडिया पर पोस्ट में कहा है कि इंदौर पुलिस ने बिना सूचना दिए नाना पटवारी को हिरासत में लिया है। 
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Sonam Wangchuk : Hunger Strike पर बैठे सोनम वांगचुक क्यों भड़के, क्या अभिजीत दीपके की ओर इशारा, सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग

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जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक का नाराजगी भरा वीडियो सामने आया है। जिसमें वे कहते दिखाई दे रहे हैं कि वे भूख हड़ताल पर बैठे हैं और लोग यहां ठूंस-ठूंसकर खा रहे हैं। कहीं उनका इशारा 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संस्थापक अभिजीत दीपके की ओर तो नहीं, क्योंकि अभिजीत दीपके के कथित तौर पर विरोध स्थल के पास खाना खाते हुए वीडियो वायरल हुए।

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सोनम वांगचुक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के विरोध में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक ने केवल स्वयं अनशन पर बैठने का फैसला किया था जबकि अन्य सदस्य प्रदर्शन के संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

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सोशल मीडिया पर अभिजीत दीपके के खाना खाते वीडियो वायरल होने के बाद एक नई बहस का जन्म हुआ। वे किसी वीडियो में भोजन थाली तो किसी में समोसा तो किसी में ब्रेड पकौड़े और नूडल्स खाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाए कि जब आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोग भूख हड़ताल की बात कर रहे हैं, तब आयोजन से जुड़े सदस्य सामान्य रूप से भोजन कैसे कर सकते हैं। इसके बाद सोनम वांगचुक एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें वे नाराजगी जाहिर करते हुए कहते हैं कि लोग ठूंस-ठूंसकर खा रहे हैं। कम से कम एक दिन का तो उपवास रखें।

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वीडियो वायरल होने के बाद आंदोलन की विश्वसनीयता को लेकर भी बहस छिड़ गई। सोनम का कहना था कि आंदोलन के लिए कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं और अपनी सेहत दांव पर लगा रहे हैं और आंदोलन स्थल पिकनिक जैसा नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि लंबे उपवास के कारण उनके स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा है और उनका वजन तथा ब्लड प्रेशर कम होने की खबरें भी सामने आई हैं।

यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स बनेंगे UP के कैंपस ब्रांड एम्बेसडर

UP RISE 2026

UP RISE 2026: उत्तर प्रदेश के युवा अब केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि योगी सरकार की योजनाओं और प्रदेश के बदलते विकास मॉडल को समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भी उठाना चाहते हैं। इसी सोच के साथ 'यूपी राइज 2026 : संवाद, संकल्प, सफलता' कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया, जिसमें भारी संख्या में प्रदेश भर से आए यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। इन स्टूडेंट्स ने ‘कैंपस ब्रांड एम्बेसडर’ के रूप में प्रदेश सरकार की नीतियों को हर युवा तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

 

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही कौशल विकास, स्वरोजगार, स्टार्टअप और नवाचार आधारित नीतियों का खुलकर समर्थन किया और कहा कि उत्तर प्रदेश अब सबसे ज्यादा और सबसे बड़े अवसरों वाला राज्य बन चुका है। कार्यक्रम का आयोजन उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग एवं टाइम्स नाऊ के संयुक्त तत्वाधान में किया गया।

बदल चुका है यूपी का विकास मॉडल

राजधानी लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न जिलों के विश्वविद्यालय व महाविद्यालय से आए छात्र-छात्राओं ने उत्तर प्रदेश के बदलते विकास मॉडल पर खुलकर अपने विचार रखे। उनका मानना था कि वर्ष 2017 के बाद जबसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली है, तब से कानून-व्यवस्था, आधारभूत ढांचे, निवेश, उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव आए हैं। पहले जहां बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार के लिए प्रदेश छोड़ना पड़ता था, वहीं अब उद्योग, स्टार्टअप और निवेश के नए अवसर युवाओं को वापस अपने प्रदेश की ओर आकर्षित कर रहे हैं। इस अवसर पर अन्य राज्यों से आए युवाओं ने भी उत्तर प्रदेश में बने सकारात्मक माहौल की खुलकर सराहना की।

जनसंपर्क का सशक्त माध्यम बनेगी सोशल मीडिया

कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण विषय ‘डिजिटल युग में सूचना की शक्ति और सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका’ रहा। स्टूडेंट्स ने इस पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सूचना सबसे बड़ा संसाधन होगी और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर समाज को सही जानकारी देने, महत्वपूर्ण एवं कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार करने तथा सकारात्मक बदलावों को लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएंगे। कैंपस ब्रांड एम्बेसडर की भूमिका निभाने वाले स्टूडेंट्स ने भी यूपी में आए क्रांतिकारी बदलावों को हर युवा तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल की बात कही। इस मौके पर ज्वलंत सामाजिक विषयों पर संवाद और रेडियो जैसे पारंपरिक माध्यमों की उपयोगिता पर भी चर्चा हुई।

महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित प्रदेश : सोनाली

कार्यक्रम के प्रेरक सत्र में कई छात्र-छात्राओं ने अपने जीवन संघर्ष और भविष्य के सपने साझा किए। शारदा यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा सोनाली राजन ने बताया कि कैसे उन्हें दोबारा जीवनदान मिला। उनकी मां ने उन्हें किडनी डोनेट की। इस कठिन दौर के बाद उन्होंने जीवन में कुछ बड़ा करने का संकल्प लिया। उन्होंने ठान लिया कि जीवन में जो भी अधूरी उम्मीदें थीं, उन सबको पूरा करना है। खुलकर जीना है। उन्होंने उत्तर प्रदेश को महिलाओं के लिहाज से सबसे सुरक्षित राज्य बनाने के लिए योगी सरकार के प्रति आभार भी व्यक्त किया। सोनाली सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को लगातार जागरूक भी करती हैं।

प्रयागराज की साक्षी का प्रेरक सफर

प्रयागराज (नैनी) की साक्षी ठाकुर ने बताया कि माता पिता और परिवार के अन्य सदस्यों की शुरू से इच्छा थी कि वह मेडिकल क्षेत्र में कुछ बड़ा काम करें। लेकिन साक्षी के मन में कुछ अलग ही चल रहा था। उन्होंने नीट पास किया, लेकिन इसके बाद सोशल मीडिया को अपना करियर चुना। आज वह सोशल मीडिया मैनेजर के रूप में कार्य कर रही हैं और जनोपयोगी सरकारी योजनाओं तथा सही जानकारियों को आम लोगों तक पहुंचा रही हैं। उनका सपना भविष्य में अपना बड़ा उद्यम स्थापित करना है।

युवा इंफ्लुएंसर कृष्णा ने कहा- बेहतर योजनाएं देती हैं अवसर

लखनऊ विश्वविद्यालय में एलएलबी के छात्र, ब्लॉगर व सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर कृष्णा मिश्रा ने कहा कि योगी सरकार की स्कॉलरशिप योजना ने उनकी पढ़ाई व करियर को मजबूती दी। जिस तरह उन्हें इस योजना का लाभ मिला, उसी तरह प्रदेश के हर पात्र छात्र तक इसका लाभ पहुंचना चाहिए। बेहतर सरकारी योजनाएं युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर देती हैं और अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इनके प्रति जागरूक होना चाहिए।

कानपुर की शिवांगी बोलीं- यूपी के युवा क्रिएटर्स को मिला बड़ा प्लेटफॉर्म

डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा में बीकॉम प्रथम वर्ष की छात्रा कानपुर निवासी शिवांगी श्रीवास्तव ने युवाओं के लिए योगी सरकार के कामों की खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम भी युवाओं के लिए बेहद उपयोगी और प्रेरणादायक रहा। इससे युवा क्रिएटर्स को बड़ा प्लेटफॉर्म मिला है। उन्हें प्रदेश भर से आए स्टूडेंट्स व सोशल मीडिया क्रिएटर्स से मिलने का अवसर मिला। कंटेंट क्रिएशन के भविष्य, नए अवसरों और बदलते डिजिटल परिदृश्य से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्राप्त हुईं।

यूपी राइज 2026 युवाओं का सशक्त मंच

मेरठ की बीकॉम द्वितीय वर्ष की छात्रा वैष्णवी तिवारी ने कहा कि यूपी राइज 2026 युवाओं को सरकार की नई योजनाओं, प्रोजेक्ट्स और अवसरों से जोड़ने वाला एक सशक्त मंच है। हमारी जिम्मेदारी है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और युवाओं के लिए उपलब्ध अवसरों की सही जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। वह कैंपस एम्बेसडर के रूप में अन्य छात्र-छात्राओं को प्रेरित करेंगी, जिससे वे सरकार की योजनाओं का लाभ उठाकर अपने भविष्य को बेहतर बनाएं। 'यूपी राइज' जैसे आयोजन युवाओं को नई संभावनाओं से जोड़ने के साथ उन्हें आगे बढ़ने और अपनी प्रतिभा को नई पहचान देने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी महत्वपूर्ण उपलब्धि

कार्यक्रम में मिशन शक्ति, ड्रोन दीदी, लखपति दीदी और महिला स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। स्टूडेंट्स तथा युवा सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर्स ने एक राय से कहा कि योगी सरकार की योजनाओं ने विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। महिला सुरक्षा और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी उत्तर प्रदेश के विकास मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उत्तर प्रदेश आज शिक्षा, निवेश, उद्योग, स्टार्टअप और रोजगार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है और प्रदेश के युवाओं के सामने पहले की तुलना में कहीं अधिक अवसर उपलब्ध हैं। विकसित उत्तर प्रदेश के निर्माण में उनकी सक्रिय भागीदारी बड़ी ताकत बनेगी।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार पर फिर किया दावा! खुद को बताया ‘असली’ हकदार

Donald Trump Nobel Peace Prize

Donald Trump Nobel Peace Prize: एक बार फिर नोबेल पुरस्कारों (Nobel Prizes) की घोषणा की तारीख करीब आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति‍ डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए अपना दावा ठोका है। उन्होंने कहा कि नोबेल शांति पुरस्कार के लिए किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में वह ज्यादा हकदार हैं। यह भी ध्यान रखने की बात है कि ट्रंप ने ईरान के साथ शांति समझौता तोड़ दिया है और अमेरिका लगातार वहां हमला कर रहा है। 

 

ट्रंप ने ‘एयर फोर्स वन’ (अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष विमान) में बातचीत के दौरान कहा कि कि भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष समेत 8 लड़ाइयों को सुलझाने की वजह से वह नोबेल शांति पुरस्कार के लिए किसी भी अन्य व्यक्ति की तुलना में ज्यादा हकदार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले साल मई में भारत-पाक संघर्ष में 11 लड़ाकू विमान नष्ट हो गए थे। ALSO READ: फिर भड़केगी महायुद्ध की आग? ट्रंप का बड़ा एलान- ईरान के साथ समझौता खत्म, रातभर बरसे बम

क्या वाकई ट्रंप नोबेल के हकदार हैं? 

ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट' नीति, बहुपक्षीय संधियों (जैसे पेरिस जलवायु समझौता या ईरान न्यूक्लियर डील) से पीछे हटना और उनका आक्रामक लहजा नोबेल समिति के पारंपरिक शांति के मानदंडों के खिलाफ माना जाता है। आलोचकों का यह भी तर्क है कि उनके द्वारा कराए गए कई समझौते (जैसे रवांडा-कांगो या इजराइल-हमास) दीर्घकालिक शांति स्थापित करने में पूरी तरह सफल नहीं रहे या उनकी कूटनीतिक भूमिका को लेकर अन्य देशों के दावे अलग हैं। नाटो (NATO) जैसे पारंपरिक सुरक्षा गठबंधनों के प्रति उनके सख्त और कभी-कभी उपेक्षापूर्ण रवैये को आलोचक वैश्विक स्थिरता के लिए खतरा मानते हैं। ALSO READ: डोनाल्ड ट्रंप ने फिर दी धमकी, बोले- चाहूं तो सबको खत्म कर दूं.. ईरान ने भी किया तीखा पलटवार

 

हालांकि उनके समर्थक मानते हैं कि उनके पहले कार्यकाल का सबसे बड़ा कूटनीतिक मील का पत्थर संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सूडान और मोरक्को के साथ इजराइल के ऐतिहासिक संबंधों को बहाल करना था। दशकों बाद मध्य पूर्व में शांति की दिशा में यह एक बड़ा कदम था। उनके समर्थक अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि दशकों बाद ट्रंप पहले ऐसे अमेरिकी राष्ट्रपति रहे, जिनके कार्यकाल में अमेरिका ने किसी नए बड़े युद्ध में सीधे तौर पर कदम नहीं रखा। हालांकि उनके समर्थक यह भूल जाते हैं कि ट्रंप ईरान के साथ युद्ध में सीधे तौर पर शामिल हैं। 

कब होती है नोबेल पुरस्कारों की घोषणा?

नोबेल पुरस्कारों  की घोषणा हर साल अक्टूबर के महीने में की जाती है। अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह में, लगातार कुछ दिनों के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों जैसे-  चिकित्सा, भौतिकी, रसायन, साहित्य, शांति और अर्थशास्त्र के विजेताओं के नामों की घोषणा की जाती है। इसके बाद, इन सभी विजेताओं को अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि यानी 10 दिसंबर (नोबेल दिवस) को स्वीडन के स्टॉकहोम (और शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे के ओस्लो) में एक भव्य समारोह में पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

अमृत सरोवर निर्माण UP शीर्ष पर, 19989 सरोवरों का किया गया निर्माण और पुनरुद्धार

Amrit Sarovar Scheme UP: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'अमृत सरोवर योजना' व 'अमृत सरोवर योजना 2.0' के तहत प्रदेश में 19,989 अमृत सरोवरों का निर्माण और पुनरुद्धार किया जा चुका है। 

 

ग्राम्य विकास विभाग के अनुसार, अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार के मामले में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष स्थान पर है। इस अभियान से जल संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

हरदोई बना प्रदेश में सबसे आगे

अमृत सरोवर निर्माण अभियान में प्रदेश पांच जिले हरदोई, आजमगढ़, गोरखपुर, महराजगंज व प्रयागराज टॉप पांच में शामिल हैं। यहां हरदोई प्रदेश में पहले स्थान पर है, जहां 1,202 सरोवरों का निर्माण किया जा चुका है। इसके अलावा आजमगढ़ में 797, गोरखपुर में 734, महराजगंज में 726 और प्रयागराज में 638 अमृत सरोवर विकसित किए गए हैं। प्रदेशभर में अब तक निर्माण एवं पुनरुद्धार का कुल आंकड़ा 19,989 तक पहुंच चुका है।

जल संरक्षण के साथ कृषि को भी मिल रहा लाभ

अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य केवल पुराने जल स्रोतों का संरक्षण करना नहीं है, बल्कि वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देकर भूजल स्तर में सुधार लाना भी है। इन सरोवरों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे कृषि गतिविधियों को मजबूती मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ने के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी बल मिला है।

गांवों में हरियाली और स्वच्छ वातावरण को बढ़ावा

योगी सरकार ने अमृत सरोवरों को केवल जल संचय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें ग्रामीण जीवन का आकर्षक केंद्र भी बनाया है। प्रत्येक अमृत सरोवर को कम से कम एक एकड़ क्षेत्रफल में विकसित किया गया है, जिसकी जल क्षमता लगभग 10 हजार घन मीटर है। सरोवरों के चारों ओर पक्के पैदल मार्ग, बैठने के लिए बेंच, प्रकाश व्यवस्था और व्यापक वृक्षारोपण की व्यवस्था की गई है। इससे गांवों में हरियाली और स्वच्छ वातावरण को बढ़ावा मिला है।

ग्रामीण रोजगार को मिला नया सहारा

अमृत सरोवर योजना का एक बड़ा लाभ ग्रामीण रोजगार के रूप में भी सामने आया है। सरोवरों की खुदाई, गाद निकालने और सुंदरीकरण के कार्यों को वीबी जी राम जी (पूर्व में मनरेगा) से जोड़ा गया है। इससे प्रदेश के लाखों ग्रामीण परिवारों को अपने ही गांव में रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर आय के नए स्रोत भी विकसित हुए हैं।

सतत विकास की दिशा में प्रभावी पहल

अमृत सरोवरों के निर्माण और पुनरुद्धार से जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को एक साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, हरियाली बढ़ाने और कृषि को सहयोग देने के साथ यह योजना गांवों में सतत विकास की मजबूत नींव तैयार कर रही है।

अन्य राज्यों के लिए बना मॉडल 

ग्राम्य विकास विभाग के अनुसार, अमृत सरोवर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण उत्तर प्रदेश देश के अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और ग्रामीण रोजगार को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल प्रदेश में ग्रामीण समृद्धि और आत्मनिर्भरता को नई गति दे रही है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

Amarnath Yatra 2026 : अमरनाथ गुफा में कैसे बनता है बर्फ का शिवलिंग ? क्या है विज्ञान और आस्था का सबसे बड़ा रहस्य, 5 दिन में बाबा बर्फानी का ‘अंतर्ध्यान’ बड़ी चेतावनी तो नहीं

amarnath mandir

समुद्र तल से करीब 3,888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्रकृति का अद्भुत चमत्कार भी है। यहां हर वर्ष प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग (बाबा बर्फानी) श्रद्धालुओं के लिए भगवान शिव का साक्षात स्वरूप माना जाता है, लेकिन इस साल प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग लगभग पूरी तरह पिघल गया है। 57 दिन चलने वाली यात्रा 5वें दिन ही शिवलिंग पूरी तरह से पिघल गया। इस साल यात्रा के लिए करीब 4 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। कठिनाई भरे रास्तों से बाबा एक झलक पाने के लिए कठिन रास्तों से पहुंचे भक्तों को निराशा हाथ लगी। शिवलिंग का इतनी जल्दी पिघलना कहीं प्रकृति का मानवों को एक बड़ी चेतावनी तो नहीं। 

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आखिर यह हिमलिंग बनता कैसे है

आखिर यह हिमलिंग बनता कैसे है? क्या यह केवल चमत्कार है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक प्रक्रिया भी काम करती है? इस बार यह सवाल इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों में हिमलिंग का आकार तेजी से छोटा हो गया है। बीएसएफ द्वारा 23 मई को जारी तस्वीरों में हिमलिंग की ऊंचाई लगभग 7 फुट दिखाई गई थी। 29 जून को पहली पूजा के समय भी इसकी ऊंचाई 5 फुट से अधिक थी, लेकिन 3 जुलाई तक इसका आकार घटकर करीब 4 फुट रह गया।

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जब यात्रा से पहले ही पिघले 

2006 में शिवलिंग तीर्थ यात्रा शुरू होने से पहले ही पवित्र गुफा से विलुप्त हो गया था। 2004 में तीर्थ यात्रा लगभग एक महीने तक चली और भगवान 15 दिनों के के अंदर बाबा बर्फानी पिघल गए थे। 2013 में 22 दिनों और 2016 में 13 दिनों में अंदर शिवलिंग पिघल गया था। 

 

कैसे बनता है अमरनाथ का प्राकृतिक हिमलिंग?

अमरनाथ गुफा के भीतर मौजूद शिवलिंग किसी कलाकार द्वारा बनाई गई बर्फ की कलकृति नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम है। अमरनाथ का हिमलिंग पूरी तरह प्राकृतिक भू-वैज्ञानिक प्रक्रिया से बनता है।गुफा की छत के ऊपर मौजूद चूना पत्थर और जिप्सम की चट्टानों के बीच से ग्लेशियरों का पिघला पानी धीरे-धीरे रिसता है। जब यह पानी बूंद-बूंद करके गुफा के फर्श पर गिरता है तो गुफा के भीतर मौजूद शून्य से नीचे तापमान में जमने लगता है।  समय के साथ ये जमी हुई परतें ऊपर की ओर बढ़ती जाती हैं और एक बर्फ का स्तंभ तैयार हो जाता है। यही प्राकृतिक बर्फ का स्तंभ श्रद्धालुओं के लिए बाबा बर्फानी या हिम शिवलिंग है।

प्रकृति ने बनाई है रहस्यमयी गुफा

अमरनाथ मंदिर किसी इंसान द्वारा निर्मित मंदिर नहीं है।  प्राकृतिक चूना पत्थर और जिप्सम की गुफा वर्ष के अधिकांश समय बर्फ से ढंकी रहती है। गुफा के भीतर मुख्य हिमलिंग के अलावा दो छोटे हिम स्तंभ भी बनते हैं जिन्हें श्रद्धालु माता पार्वती और भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। अमरनाथ गुफा दुनिया के रहस्यमयी स्थानों में शामिल है, जहां प्रकृति, विज्ञान और आध्यात्मिक आस्था एक साथ दिखाई देते हैं। विज्ञान हिमलिंग बनने की प्रक्रिया को समझाता है, जबकि श्रद्धालुओं के लिए यह भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है। यही कारण है कि अमरनाथ केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि विश्वास, प्रकृति और रहस्य का अद्भुत संगम बन चुका है।

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भगवान शंकर ने पार्वती को यहीं सुनाई थी अमर कथा

हिन्दू पौराणिक ग्रंथों के मुताबिक माता पार्वती ने भगवान शिव से उनकी अमरता का रहस्य पूछा था।  भगवान शिव उन्हें यह रहस्य बताने के लिए ऐसी जगह की तलाश में निकले जहां कोई जीवित प्राणी मौजूद न हो। इसी कारण उन्होंने अमरनाथ गुफा को चुना। रास्ते में उन्होंने  पहलगाम में नंदी को छोड़ा। चंदनवाड़ी में अपने मस्तक से चंद्रमा को अलग किया। शेषनाग झील के पास सर्पों को त्याग दिया। महागुणस पर्वत पर भगवान गणेश को छोड़ा।

 पंचतरणी में पंचमहाभूतों का त्याग किया। इसके बाद अमरनाथ गुफा में समाधि लगाकर उन्होंने माता पार्वती को अमर कथा सुनाई।  कथा सुनते समय माता पार्वती कुछ देर के लिए सो गईं, लेकिन गुफा में मौजूद कबूतरों के एक जोड़े ने पूरी कथा सुन ली और अमर हो गए। आज भी कई श्रद्धालु गुफा में कबूतरों का जोड़ा दिखाई देने का दावा करते हैं।

श्रद्धालुओं की भीड़ है शिवलिंग के पिघलने की जिम्मेदार 

क्या बाबा के 'अदृश्य' होने के पीछे केवल मौसम जिम्मेदार है या फिर हिमालय का बदलता पर्यावरण, बढ़ती गर्मी और इंसानी गतिविधियां भी इस पवित्र स्थल के प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित कर रही हैं? वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक यह केवल धार्मिक नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन की ओर इशारा है। इसके लिए केवल भीड़ को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि ग्लोबल वार्मिंग और बदलते मौसम की भूमिका इससे कहीं अधिक बड़ी मानी जा रही है। शिवलिंग  काआकार हर साल मौसम, बर्फबारी, तापमान और गुफा के भीतर मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

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यदि तापमान सामान्य से अधिक रहता है या बर्फबारी कम होती है तो हिमलिंग जल्दी पिघलने लगता है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर और पूरे हिमालयी क्षेत्र में मौसम का पैटर्न तेजी से बदला है। सर्दियों में अपेक्षाकृत कम बर्फबारी और गर्मियों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। गुफा के भीतर बर्फ लंबे समय तक टिक नहीं पा रही है। पहले जहां हिमलिंग अगस्त तक सुरक्षित रहता था, लेकिन अब यात्रा शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद बर्फ पिघलने से आकार तेजी से घटता है।

योगी सरकार में समस्याओं का त्वरित समाधान, 89.41 लाख रुपए के GPF का हुआ भुगतान

Swift resolution of issues under Yogi government, GPF payment of Rs 89.41 lakh made

– 'संध्या संवाद' में मंडलायुक्त के निर्देश पर जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं तेजी से पूरी कराकर दिलाया भुगतान     

– मुख्यमंत्री योगी की पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का दिखा असर

– सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चेहरे भुगतान मिलने के बाद खुशी से खिल उठे    

                                                                   

Uttar Pradesh news : योगी सरकार प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जनसमस्याओं के समयबद्ध समाधान को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी के तहत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास' के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए शासन स्तर पर लगातार ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं, जिनसे आम नागरिकों के साथ-साथ कर्मचारियों और सेवानिवृत्त कार्मिकों की समस्याओं का भी त्वरित समाधान सुनिश्चित हो सके। इसी कड़ी में देवीपाटन मंडल में मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने 'संध्या संवाद' कार्यक्रम के जरिए लोगों की समस्याओं का समाधान कराया।

 

मुख्यमंत्री योगी की निर्देशों के तहत शीघ्र की गई कार्यवाही 

देवीपाटन मंडल के श्रावस्ती में आयोजित 'संध्या संवाद' कार्यक्रम के सकारात्मक परिणाम सामने आए, जहां सेवानिवृत्त कर्मचारियों के जीपीएफ एवं अन्य सेवा संबंधी देयों का भुगतान कराया गया। इस पहल के तहत कुल 89 लाख 41 हजार 612 रुपए की जीपीएफ धनराशि संबंधित कर्मचारियों के खातों में पहुंचाई गई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के चेहरे भुगतान मिलने के बाद खुशी से खिल उठे। 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार अधिकारियों को निर्देश देते रहे हैं कि जनशिकायतों का निस्तारण केवल औपचारिकता न बनकर संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ किया जाए। उनकी प्राथमिकता है कि आम जनता से लेकर कर्मचारियों तक किसी भी व्यक्ति को अपने वैधानिक अधिकारों के लिए भटकना न पड़े। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए मंडल में 'संध्या संवाद' कार्यक्रम की शुरुआत की गई है, जिसके माध्यम से प्रशासन सीधे लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान कर रहा है।

 

कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके सेवा संबंधी देयों का भुगतान कराया गया

'संध्या संवाद' कार्यक्रम में कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने शिकायत रखी कि उनका जीपीएफ तथा अन्य सेवा संबंधी भुगतान लंबित है। इस पर मंडलायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। इसके बाद जिलाधिकारी श्रावस्ती अन्नपूर्णा गर्ग ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित किया।

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जिला प्रशासन ने सभी आवश्यक औपचारिकताएं तेजी से पूरी कराईं। परिणामस्वरूप जीपीएफ भुगतान का सफलतापूर्वक निस्तारण हो सका। सेवानिवृत्त कर्मचारी प्रकाश नारायण पाठक, राजेंद्र प्रसाद पाण्डेय, सुनील श्रीवास्तव, प्रेम नारायण वर्मा, कौशल्या देवी, अवधेश कुमार तथा भगवान दीन वर्मा सहित अन्य पात्र कर्मचारियों को उनके सेवा संबंधी देयों का भुगतान कराया गया। सभी लाभार्थियों को मिलाकर कुल 89 लाख 41 हजार 612 रुपए की धनराशि वितरित की गई।

 

ग्राम पंचायत टेण्डवा महन्थ से हुई थी कार्यक्रम की शुरुआत 

योगी सरकार ने मंडल में 'संध्या संवाद' कार्यक्रम की शुरुआत श्रावस्ती जिले की ग्राम पंचायत टेण्डवा महन्थ से की थी। कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को मौके पर सुना गया, उनका तत्काल समाधान कराया गया तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी पात्र लाभार्थियों तक पहुंचाया गया। 'संध्या संवाद' कार्यक्रम धीरे-धीरे प्रशासन और आमजन के बीच भरोसे का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है।