पौधरोपण महायज्ञ 2026 : योगी सरकार ने अफसरों को बनाया नोडल अधिकारी

Plantation Mahayagya 2026 UP: योगी सरकार ने पौधरोपण महायज्ञ-2026 के सकुशल क्रियान्वयन के लिए शासन के अधिकारियों को जनपदों का नोडल अफसर नामित किया है। नोडल अधिकारी विभिन्न जनपदों में पहुंचकर 12 जुलाई (रविवार) को होने वाले पौधरोपण महायज्ञ में केंद्र व प्रदेश सरकार के मंत्रियों, जनप्रतिनिधियों के साथ ही वन विभाग के समन्वय से अभियान को सफल बनाएंगे। विभिन्न जनपदों के शासन के अधिकारियों की घोषणा भी कर दी गई है। 

 

गोरखपुर में खेल सचिव सुहास एलवाई, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी शंभू कुमार वाराणसी के लिए  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पौधरोपण महायज्ञ का शुभारंभ गोरखपुर से करेंगे। यहां शासन की तरफ से खेल सचिव सुहास एलवाई को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी शंभू कुमार यह जिम्मेदारी संभालेंगे। जौनपुर में महानिदेशक मत्स्य धनलक्ष्मी के. मौजूद रहेंगी। परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन बलिया में रहेंगे। खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन की सचिव डॉ. रोशन जैकब बस्ती में रहेंगी। 

प्रमुख सचिव (सहकारिता) प्रयागराज, प्रमुख सचिव (कृषि) जाएंगे सहारनपुर

प्रमुख सचिव (सहकारिता) अजय कुमार शुक्ल प्रयागराज व प्रमुख सचिव (कृषि) रविंद्र सहारनपुर में पौधरोपण महायज्ञ की कमान संभालेंगे। खाद्य व रसद विभाग के प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद बहराइच, प्रमुख सचिव स्टांप व रजिस्ट्रेशन अमित गुप्ता अयोध्या रहेंगे। प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम आगरा, संयुक्ता समद्दार फिरोजाबाद, सौरभ बाबू बरेली, मनीष चौहान शाहजहांपुर, अनिल कुमार तृतीय मुरादाबाद, अजय चौहान मेरठ, कामिनी रतन चौहान गाजियाबाद में होने वाले महायज्ञ में शामिल रहेंगी।

प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम देवराज को बनाया गया लखनऊ का नोडल अफसर

प्रमुख सचिव (नियुक्ति) एम देवराज को राजधानी लखनऊ का नोडल अफसर बनाया गया है। प्रमुख सचिव (हथकरघा व वस्त्रोद्योग) अनिल कुमार सागर रायबरेली, प्रमुख सचिव (विज्ञान व प्रौद्योगिकी) पंधारी यादव उन्नाव, प्रमुख सचिव (आवास व शहरी नियोजन) पी. गुरु प्रसाद सीतापुर, प्रमुख सचिव (श्रम व सेवायोजन) डॉ. शनमुगा सुंदरम एमके कानपुर नगर, प्रमुख सचिव (राजस्व) अपर्णा यू कन्नौज में रहेंगी। अनिल गर्ग नोएडा, रंजन कुमार बागपत में पहुंचकर महायज्ञ की सफलता का कार्य देखेंगे। इनके अलावा अन्य सभी जनपदों में भी शासन के अधिकारियों को तैनात किया गया है।

E20 पेट्रोल से कितना घटेगा माइलेज, पेट्रोलियम मंत्रालय ने दिया यह जवाब

Statement by Ministry of Petroleum and Natural Gas regarding ethanol blended petrol

Ethanol blended Petrol News : पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर जारी बहस के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आज कहा कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता (माइलेज) 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाले ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन और बेहतर इंजन प्रदर्शन जैसे लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, ब्राजील वर्षों से E27 (27 प्रतिशत इथेनॉल) का इस्तेमाल कर रहा है और वहां इंजन खराब होने की कोई समस्या नहीं आई है। वहीं नितिन गडकरी ने भी ब्राजील द्वारा बहुत पहले ही E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) लागू किए जाने का हवाला देते हुए भारत में भी इसका स्तर बढ़ाने की बात कही है।

 

3 से 5 फीसदी तक घट सकता है माइलेज

पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को लेकर जारी बहस के बीच पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आज कहा कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता (माइलेज) 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है, लेकिन इसके बदले मिलने वाले ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन और बेहतर इंजन प्रदर्शन जैसे लाभ कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं।

 

इसे वर्षों तक वैज्ञानिक परीक्षण, वाहन विनिर्माताओं के साथ परामर्श और घरेलू एथनॉल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के बाद ही लागू किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि ई20, ई10 या शुद्ध पेट्रोल की तुलना में अधिक स्वच्छ, बेहतर गुणवत्ता वाला और अधिक दक्ष ईंधन है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने क्यों की तारीफ?

गहराते ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की आत्मनिर्भरता को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने बताया कि कैसे पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिश्रण (Ethanol Blending) की नीति आज भारत के लिए संकटमोचक साबित हो रही है। भारत ने 2025 में ही समय से पहले E20 ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया था, जो अब युद्ध जैसी विषम परिस्थितियों में देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत सुरक्षा चक्र बनकर उभरा है। 

 

'इथेनॉल पॉलिसी' पर क्‍या बोले नितिन गडकरी?

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई-20) नीति का जोरदार बचाव करते हुए अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया। गडकरी ने कहा कि इथेनॉल नीति से उन्हें कोई व्यक्तिगत फायदा नहीं होता और यह योजना देश में पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने, स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से लागू की गई है।

 

क्या दूसरे देश भी करते हैं E20 पेट्रोल का इस्तेमाल?

भारत में E20 पेट्रोल (20 फीसदी इथेनॉल-मिश्रित ईंधन) को लेकर छिड़ी बहस के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या दुनिया के अन्य देशों ने भी इस तकनीक को अपनाया है? जब भी भारत में इथेनॉल कार्यक्रम की बात आती है तो 'ब्राजील' का उदाहरण सबसे पहले दिया जाता है।

 

हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, ब्राजील वर्षों से E27 (27 प्रतिशत इथेनॉल) का इस्तेमाल कर रहा है और वहां इंजन खराब होने की कोई समस्या नहीं आई है। वहीं नितिन गडकरी ने ब्राजील द्वारा बहुत पहले ही E100 (100 प्रतिशत इथेनॉल) लागू किए जाने का हवाला देते हुए भारत में भी इसका स्तर बढ़ाने की बात कही है।

 

अरविंद केजरीवाल ने मांगा जवाब

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हीरो मोटोकॉर्प समेत 29 ऑटो कंपनियों को पत्र लिखकर E20 पेट्रोल को लेकर लिखित जवाब मांगा। उन्होंने 2023 से पहले बनी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल और संभावित नुकसान पर सवाल उठाए। उन्होंने पत्र में ऑटो कंपनियों से कहा कि वे जनता को बताएं कि क्या उनके 2023 के पहले बने प्रोडक्ट्स में E20 इस्तेमाल किया जा सकता है।

 

…तो क्या इंश्योरेंस क्लेम मिलेगा? 

E20 फ्यूल को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से अगर कार या बाइक का इंजन खराब हो जाता है तो वाहन मालिक को इंश्योरेंस क्लेम नहीं मिलेगा। इस दावे पर सरकार की ओर से स्पष्टीकरण सामने आया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत काम करने वाली PIB Fact Check Unit ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि E20 फ्यूल के इस्तेमाल से मोटर वाहन बीमा पर कोई असर नहीं पड़ता है।

अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण की मांग पर विचार के लिए CM डॉ. मोहन यादव ने कमेटी बनाने का किया एलान, कहा जो हो सकेगा वो करेगी सरकार

भोपाल। मध्यप्रदेश में अतिथि विद्वानों की नियमितिकण सहित अन्य मांगों पर विचार करने के लिए  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कमेटी बनाने का एलान किया है। भोपाल में रविंद्र भवन में आयोजित अतिथि विद्वान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि 'हमने भारतीय मजदूर संघ के बैनर तले समिति गठित की है। अटकाने-लटकाने-भटकाने का समय गया। अंग्रेज गए और कांग्रेस छोड़ गए। कांग्रेस केवल काम अटकाती थी। आज समय आगे बढ़ने का है। अतिथि विद्वान समिति के माध्यम से जिस भी राज्य का मॉडल लागू करवाना चाहें, उसका प्रस्ताव बनाकर लाएं। सरकार आपके साथ रहेगी। हमारे बीच ये भरोसा कायम रहेगा। हम अतिथि विद्वानों के कल्याण के लिए जो हो सकेगा वो करेंगे।' 
 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि वसुधा को कोई कुटुंबकम समझने वाली संस्कृति हो तो वो भारत की संस्कृति है। यह कदम-कदम पर दिखाई भी देता है। हमारे अतीत का गौरवशाली पृष्ठ बताता है कि भगवान श्री राम का कार्यकाल करीब 15 लाख वर्ष पुराना है। उनके कार्यकाल का एक घटनाक्रम याद करें, जिस समय भगवान श्रीराम भाइयों के साथ दशरथ जी के महल में थे, तब गुरु विश्वामित्र राक्षसों का दमन करने के लिए उनसे उनके पुत्र मांगते हैं। जब विश्वामित्र दशरथ जी से कहते हैं कि हम एक कठिनाई से गुजर रहे हैं, हम जब यज्ञ करते हैं तो उसमें बाधाएं आ जाती हैं। इसलिए हम आपकी मदद चाहते हैं। तब दशरथ जी ने उनसे कहा कि मैं सेना के साथ आपके साथ चलता हूं, लेकिन विश्वामित्र जी ने कहा कि आपको नहीं चलना है, वे उनसे श्रीराम और लक्ष्मण को मांगते हैं। यानी भविष्य गढ़ने और राम राज्य  की स्थापना के लिए गुरु की नजर बच्चों पर पड़ी।

पराक्रम-आत्मविश्वास का आधार होता है गुरु-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उस वक्त दशरथ जी मान-मनौव्वल करते हैं, लेकिन गुरु विश्वामित्र बच्चों को ले जाते हैं, क्योंकि उन्हें आत्मविश्वास था। इसी तरह शिक्षक का कॉन्फिडेंस भी भविष्य गढ़ता है। इतना ही नहीं गुरु वशिष्ठ उन्हें जनकपुरी ले गए और रावण सहित सबकी उपस्थिति में भगवान राम का पराक्रम दिखाया। इन सबके केंद्र गुरु ही थे। इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण ने भी कंस को मारने के बाद उज्जैन के सांदीपनि आकर उन्होंने अपने जीवन का नया रूप देखा। 64 कलाएं, 14 विद्याएं सीखीं और सुदामा के साथ मित्रता कर अमीर-गरीब की दोस्ती का उदाहरण प्रस्तुत किया। 

 

नवाचार-संवेदना और नैतिक मूल्यों पर टिकी शिक्षा व्यवस्था-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अतिथि विद्वान महज किसी पद को भरने के खाली स्थान नहीं हैं, ये पावन मंदिर के पुजारी हैं। उनके पढ़ाने से देश का भविष्य उज्ज्वल होगा। इनकी भूमिका छोटी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में बहुत कुछ कर रही है। देश में अगर सबसे पहले पीएम एक्सीलेंस कॉलेज कहीं खोले गए तो, मध्यप्रदेश में खोले गए। इसी तरह हमने नए विश्वविद्यालय खोलने का निर्णय किया।

हमारी सरकार सबसे ज्यादा ध्यान उच्च शिक्षा विभाग और तकनीकी विभाग पर दे रहे हैं। इसमें हमारी तरफ से कोई कमी नहीं है। आज स्कूलों में ड्रॉप आउट जीरो है। उन्होंने कहा कि अब नवाचार-संवेदना और नैतिक मूल्यों के आधार पर शिक्षा व्यवस्था हो रही है। भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आबादी के अनुपात में मध्यप्रदेश सबसे युवा राज्य है। इसलिए आपकी भूमिका कई गुना ज्यादा बढ़ जाती है। 

 

एवरेस्ट की तरह डंटे की चोट पर कर रहे काम-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार ने 13 आकस्मिक, 3 एच्छिक अवकाश दिया है। बहनों को प्रसूति अवकाश दिया गया है। एक वर्ष में निकट स्थान पर जाने की सुविधा भी दी थी। लोकसेवा में भी 25 फीसदी पद आरक्षित करते हुए दस वर्ष की छूट दी थी। 2022 में 117, 2024 में 48 अतिथि विद्वान नियुक्त किए जा चुके हैं। हमारी सरकार के बनते ही हमने तमाम प्रकार की बाधाओं के बीच भी डंके की चोट पर, हिमालय की एवरेस्ट चोटी की तरह लगातार काम कर रहे हैं।

हम किसान-युवा-महिला-गरीब सभी के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध हैं। एक तरफ हम इंफ्रास्ट्रक्चर के काम, तो दूसरी तरफ सेवाओं के कामों पर भी ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज स्थिति यह है कि रात के 2-2 बजे तक प्रमोशन हो रहे हैं। हर दिन नई लिस्ट निकल रही है। सरकार ने सारी बाधाएं हटा दी हैं। अगर सरकार का काम असरदार नहीं, तो वो सरकार ही नहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हम लगातार आगे बढ़ते रहेंगे। आज नक्सलियों को हमने उखाड़ फेंका, अब हम नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे। केंद्रीय गृह मंत्री के नेतृत्व में 2029 तक राज्य को नशा मुक्त करने का प्रयास करेंगे।

 

 

‘गिरफ्तार करें या मार दें, फिर भी बांग्लादेश लौटूंगी’— शेख हसीना का बड़ा ऐलान

sheikh hasina

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने दिसंबर में भारत से बांग्लादेश लौटने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब अपने देश लौटने का समय आ गया है। वे मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं, मुझे मार भी सकते हैं। लेकिन फिर भी मैं लौटूंगी।

 

मीडिया खबरों के अनुसार, बांग्लादेश लौटने के बाद शेख हसीना कोर्ट के सामने सरेंडर कर सकती हैं। उन्हें बांग्लादेश की एक अदालत ने फांसी की सजा सुनाई हुई है। उनकी पार्टी अवामी लीग को भी चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था।

 

शेख हसीना ने कहा कि वह और उनकी अवामी लीग के सदस्य स्वेच्छा से उस देश लौटना चाहते हैं जिसे वे दो साल पहले छोड़कर चली आई थीं और वो अदालत में पेश होना चाहती हैं। 

 

क्यों बांग्लादेश लौटना चाहती है शेख हसीना?

उन्होंने कहा कि मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को बहुत ज्यादा दमन का सामना करना पड़ रहा है। अगर मौत आनी ही है तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी जमीन पर आए जहां मेरे माता-पिता दफन हैं और जहां उनका खून बहा था।

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2024 को छात्रों के नेतृत्व में हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के कारण हसीना को पद छोड़ना पड़ा था। इसके बाद वह भारत आ गई थीं। इसके बाद से ही बांग्लादेश शेख हसीना के प्रत्यर्पण की बात कर रही है।

69 साल का ‘चार्ल्स शोभराज’ जैसा शातिर मेहमान, जिसने लक्जरी होटलों को 30 साल में लाखों-करोड़ों रुपए का चूना लगाया

vincent conmen

Vincent John Conman: “दो डफल बैग, सिर पर सफेद बाल, सूट-बूट और इतनी कमाल की अंग्रेजी कि सामने वाला देखते ही सर झुका दे! लेकिन किसे पता था कि फाइव स्टार होटलों के सूट (Suite) में रुकने वाला यह 'आदर्श मेहमान' दरअसल भारत का सबसे शातिर 'होटल चोर' है, जिसने कभी चेक-आउट ही नहीं किया। जानिए 30 साल तक लक्जरी होटलों की नाक के नीचे से करोडों की चपत लगाने वाले विंसेंट जॉन की पूरी कहानी।”

 

क्राइम थ्रिलर फिल्मों में आपने अक्सर ऐसे चोर देखे होंगे जो बेहद हाई-प्रोफाइल होते हैं और अपनी बुद्धिमानी से बड़ी-बड़ी सुरक्षा प्रणालियों को धता बता देते हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ की रायपुर पुलिस ने हाल ही में एक ऐसे ही रियल-लाइफ 'सुपर नटवरलाल' को गिरफ्तार किया है, जिसकी हकीकत जानकर अच्छे-अच्छे जासूसों के होश उड़ गए हैं।

 

यह कहानी है तमिलनाडु के थूथुकुडी जिले के रहने वाले 69 वर्षीय विंसेंट जॉन की। जॉन ने पिछले 30 सालों से देश भर के सैकड़ों फाइव स्टार और लक्जरी होटलों को अपनी उंगलियों पर नचाया और लाखों-करोड़ों रुपए का चूना लगाया।

मॉडस ऑपेरेंडी : कुख्यात 'चार्ल्स शोभराज' जैसी चालाकी

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, विंसेंट जॉन के अपराध करने का तरीका बेहद अनोखा और फुलप्रूफ था, जो काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय ठग चार्ल्स शोभराज से प्रेरित था। जब भी जॉन किसी आलीशान होटल में कदम रखता, तो उसके पास हमेशा दो बातें होती थीं—कमाल का कॉन्फिडेंस और दो डफल बैग।

अखबार से भरे बैग का 'मास्टरस्ट्रोक'

जॉन की सबसे बड़ी ट्रिक उसके दो बैग थे। वह कभी भी होटल के स्टाफ को अपना सामान छूने नहीं देता था। एक बैग में उसका असली सामान होता था, जबकि दूसरे बैग में वह सिर्फ रद्दी अखबार या तकिए भरकर रखता था। जब उसे होटल से भागना होता, तो वह असली सामान वाला बैग लेकर चुपके से निकल जाता और अखबारों वाला भारी बैग कमरे में ही छोड़ देता। होटल स्टाफ को लगता कि मेहमान का सामान अभी अंदर ही है, इसलिए वो अभी यहीं रुका हुआ है।

रायपुर में किया आखिरी शिकार : 1.48 लाख का लैपटॉप और विदेशी शराब गायब

हाल ही में 25 जून को जॉन ने खुद को एक बड़ा 'इवेंट ऑर्गनाइज़र' बताकर रायपुर के एक आलीशान फाइव स्टार होटल में चेक-इन किया। अपनी मीठी बातों और अंग्रेजी के दम पर उसने होटल के एक कर्मचारी को बेहतर नौकरी का लालच दिया और उससे 1.48 लाख रुपए का कीमती लैपटॉप ऐंठ लिया।

 

इतना ही नहीं, खुद नशा न करने के बावजूद उसने रोब जमाने के लिए कमरे में महंगी विदेशी सिगरेट और शराब की बोतलें मंगवाईं। 27 जून की सुबह, उसने रिसेप्शन पर अपने काल्पनिक बेटे के लिए एक और कमरा बुक करने का नाटक किया और बिना 63,755 रुपए का बिल चुकाए रफूचक्कर हो गया।

गिरफ्तारी की इनसाइड स्टोरी

होटल की शिकायत के बाद रायपुर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। तकनीकी सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन ट्रैक करते हुए पुलिस ने उसे ओडिशा के भुवनेश्वर से दबोच लिया। हालांकि, तब तक वह चोरी का लैपटॉप और शराब बेच चुका था।

एक 'अपमान' जिसने बना दिया 300 होटलों का लुटेरा

पूछताछ में जॉन ने जो खुलासे किए, वे चौंकाने वाले हैं। 1980 के दशक में वह दिल्ली में एक टूरिस्ट गाइड के रूप में काम करता था। इसी दौरान उसे आलीशान होटलों में रहने की लत लग गई।

 

  • बदले की आग : एक बार किसी नामी लक्जरी होटल के मैनेजमेंट ने उसकी किसी बात पर उसे बुरी तरह अपमानित कर बाहर निकाल दिया था। बस, उसी दिन से जॉन ने इन आलीशान जगहों से 'बदला' लेने की ठान ली और ठगी के रास्ते पर निकल पड़ा।
  • पूरे भारत में नेटवर्क : जॉन का दावा है कि वह अब तक 300 से अधिक लक्जरी होटलों को अपना शिकार बना चुका है। उसके खिलाफ दिल्ली, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, गोवा, केरल और तमिलनाडु समेत देश के लगभग हर बड़े राज्य में मामले दर्ज हैं। वह सबसे पहले 1996 में दिल्ली में, फिर 2016 में क्राउन प्लाजा (ओखला) और 2020 में नवी मुंबई में पकड़ा गया था।

होटलों की मजबूरी और जॉन की 'इमोशनल कहानी'

आखिर इतने सालों तक जॉन पुलिस की गिरफ्त से बच कैसे जाता था? इसके पीछे दो मुख्य कारण रहे:

ब्रांड वैल्यू खराब होने का डर: बड़े लक्जरी और फाइव स्टार होटल अक्सर अपनी साख और प्रतिष्ठा बचाने के चक्कर में छोटी-मोटी रकम (50 हजार से 1 लाख) के फ्रॉड के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं। जॉन इसी बात का फायदा उठाता था।

 

बुढ़ापे का इमोशनल कार्ड : जब भी पुलिस उसे पकड़ती, वह अपनी ढलती उम्र और सफेद बालों का हवाला देकर रोने लगता और पश्चाताप की झूठी कहानियां गढ़ता। इस बार भी उसने रायपुर पुलिस से रोते हुए कहा कि यह मेरी आखिरी चोरी थी, अब मैं सुधरकर गोवा के एक वृद्धाश्रम में अपनी जिंदगी बिताना चाहता हूं। 

पुलिस का क्या कहना है?

रायपुर के नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) रमाकांत साहू के अनुसार, विंसेंट जॉन एक आदतन और बेहद शातिर अपराधी है। वह हर बार, हर राज्य की पुलिस को गुमराह करने के लिए यही 'वृद्धाश्रम' वाली कहानी सुनाता है। इस बार कानून उसके झांसे में नहीं आने वाला और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।

 

सफेद बाल और संभ्रांत दिखने वाला हर व्यक्ति 'आदर्श' नहीं होता, विंसेंट जॉन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। उसने लक्जरी होटलों के उसी 'हॉस्पिटैलिटी और प्राइवेसी' के नियम का फायदा उठाया जो वो अपने मेहमानों को देते हैं। फिलहाल, यह शातिर बूढ़ा मेहमान अब पुलिस की मेहमाननवाज़ी का लुत्फ उठा रहा है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

अल्कोहल वाली दवाओं को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, दुकानों को भी रखना होगा रिकॉर्ड, जानिए क्‍या है नया नियम?

Government's major decision regarding alcohol-based medicines

New Drug Rules News : नशे के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खबरों के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज ड्रग्स रूल्स (दसवां संशोधन) नियम, 2026 में बदलाव कर 12 प्रतिशत से ज्यादा इथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी दवाओं को 'Schedule H1' में डाल दिया है। अब ये दवाएं बिना रजिस्टर्ड चिकित्सा विशेषज्ञ की पर्ची के नहीं बिकेंगी। केमिस्ट को अलग रजिस्टर भी रखना होगा। हालांकि नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किए जाएंगे। सरकार ने दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों को तैयारी के लिए 6 महीने का समय दिया है।

 

बिना डॉक्‍टर की पर्ची के नहीं बिकेंगी दवाएं

नशे के दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। खबरों के अनुसार, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज ड्रग्स रूल्स (दसवां संशोधन) नियम, 2026 में बदलाव कर 12 प्रतिशत से ज्यादा इथाइल अल्कोहल वाली और 30 मिलीलीटर से बड़ी दवाओं को 'Schedule H1' में डाल दिया है। अब ये दवाएं बिना रजिस्टर्ड चिकित्सा विशेषज्ञ की पर्ची के नहीं बिकेंगी। केमिस्ट को अलग रजिस्टर भी रखना होगा।

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ये हैं नए नियम   

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी करते हुए कहा है कि नए नियमों के तहत दवा दुकानदारों और फार्मासिस्टों की जिम्मेदारी होगी कि वे तय सीमा से अधिक अल्कोहल वाली दवाएं केवल डॉक्टर की पर्ची देखने के बाद ही उपलब्ध कराएं। इनमें कुछ कफ सिरप, टॉनिक और दूसरी लिक्विड दवाएं शामिल हो सकती हैं।

 

मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, इन दवाओं को ओवर-द-काउंटर (OTC) दवाओं की कैटगरी से बाहर रखा जाएगा। हालांकि हर अल्कोहल वाली दवा इस नियम के दायरे में नहीं आएगी। केवल तय सीमा से ज्यादा अल्कोहल और बड़ी पैकिंग वाली दवाओं पर यह नियम लागू होगा।

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कब लागू होंगे नए नियम?

नए नियम तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किए जाएंगे। सरकार ने दवा कंपनियों और मेडिकल स्टोर संचालकों को तैयारी के लिए 6 महीने का समय दिया है। इस अवधि में दवा कंपनियों को अपनी दवाओं की पैकेजिंग और लेबल पर जरूरी बदलाव करने होंगे। वहीं मेडिकल दुकानदारों को नए नियमों के अनुसार रिकॉर्ड रखने और बिक्री प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी करनी होगी। जनवरी 2027 से इन नियमों का पूरी तरह पालन करना अनिवार्य होगा।

 

मेडिकल स्टोर्स को रखना होगा रिकॉर्ड

मेडिकल स्टोर्स (फार्मेसी) को इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड (मरीज का नाम, दवा की मात्रा और डॉक्टर का नाम) एक अलग रजिस्टर में दर्ज करना अनिवार्य है। ये दवाएं मुख्य रूप से कफ सिरप, होम्योपैथिक दवाओं और कुछ स्वास्थ्य टॉनिक में पाई जाती हैं, जिन्हें घुलनशील बनाने के लिए अल्कोहल का उपयोग किया जाता है।

 

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

सरकार ने यह कदम अधिक मात्रा में अल्कोहल युक्त दवाओं के गलत इस्तेमाल और अनियंत्रित सेवन को रोकने के उद्देश्य से उठाया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस फैसले से दवाओं के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिलेगी। सरकार के इस फैसले का सीधा असर कई कफ सीरप और टॉनिक पर पड़ेगा।

 

नशे पर कसेगे नकेल

दरअसल अल्कोहल युक्त दवाओं का नशे के रूप में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। अलग-अलग राज्यों से कोडीन युक्त कफ सिरप की बड़े पैमाने पर तस्करी की बातें भी सामने आ चुकी हैं। इसी पर नकेल कसने के लिए सरकार ने ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन करते हुए यह बदलाव किया है।

फ्रांस की मोरोक्को की जीत के बाद पेरिस में भड़के दंगे (Video)

पिछली बार की तरह इस बार भी फ्रांस की मोरोक्को पर जीत के बाद फ्रांस की राजधानी पेरिस में दंगे भड़के। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों के मुताबिक पेरिस और आस पास के इलाकों में मोरोक्को से आए प्रवासियों को हार पची नहीं और उन्होंने तोड़ फोड़ को हथियार बनाया। ऐसा बताया जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर प्रवासी अवैध है। सोशल मीडिया पर वी़डियो वायरल हो रहे हैं जिसमें रुमानी शहर पेरिस दंगो की आग में झुलस रहा है।

काइलियन एमबाप्पे ने पहले हाफ में पेनल्टी किक चूकने के बाद शानदार वापसी करके एक गोल किया और एक गोल करने में मदद की जिससे फ्रांस ने गुरुवार को विश्वकप फुटबॉल के पहले क्वार्टर फाइनल में मोरक्को को 2-0 से हराकर लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में जगह बनाई।फ्रांस की तरफ से ओस्मान डेम्बेले ने दूसरा गोल किया। अब सेमीफाइनल में उसका मुकाबला मंगलवार को डलास में स्पेन या बेल्जियम में से किसी एक से होगा।

एमबाप्पे का 60वें मिनट में किया गया गोल उनके विश्व कप करियर का 20वां गोल था, जिससे वह अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेस्सी से सिर्फ एक गोल पीछे रह गए। डेम्बेले ने 66वें मिनट में टूर्नामेंट का अपना पांचवां गोल किया।कतर में 2022 में खेले गए सेमीफाइनल में फ्रांस ने मोरक्को को इसी स्कोर से हराया था। फ्रांस अब लगातार तीन विश्व कप के फाइनल में खेलने वाला तीसरा देश बनने की राह पर है।  

एमबाप्पे ने इस साल के विश्व कप में अपना आठवां गोल करने के बाद अपनी बाहें फैलाकर चारों ओर चक्कर लगाया। बाद में चोट लगने की आशंका के चलते मैदान से बाहर जाते समय उन्होंने स्टेडियम में मौजूद फ्रांस के प्रशंसकों का हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस स्टार स्ट्राइकर के दाहिने टखने में चोट गई थी।

मोरक्को के डिफेंडर ने एमबाप्पे को जोरदार टक्कर मारी थी जिसके लगभग 13 मिनट बाद, 76वें मिनट में वह मैदान पर गिर पड़े और एक मिनट बाद ही उन्हें दूसरे खिलाड़ी से बदल दिया गया। बेंच पर पहुंचकर उन्होंने अपने दाहिने टखने पर बर्फ की पट्टी लगा रखी थी लेकिन मैच समाप्त के बाद उन्होंने अपने दोनों जूते पहने और अपने साथियों के साथ जश्न मनाने के लिए दौड़ पड़े।

मोरक्को के गेंद को क्लियर करने में नाकाम रहने के बाद एमबाप्पे ने दूर वाले पोस्ट के ठीक अंदर सटीक शॉट लगाकर अपना गोल दागा। उन्होंने बॉक्स के ठीक बाहर गेंद हासिल की और फिर कुछ कदम आगे बढ़कर उसे नेट में डाल दिया। उन्होंने दोनों हाथ फैलाए और अपने साथियों के साथ जश्न मनाने के लिए साइडलाइन की ओर दौड़ पड़े।

फ्रांस ने दूसरा गोल तब किया जब एमबाप्पे ने पास लिया और उसे वापस डेम्बेले की तरफ भेजा। एमबाप्पे आगे बढ़ते रहे और डिफेंडर भी उनके साथ चले गए। इससे डेम्बेले को गोल करने का मौका मिल गया।

चंपत राय समेत 3 दिग्गजों की डिजिटल ID ब्लॉक, आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?

Champat Rai digital ID blocked

Champat Rai digital ID blocked: अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण के बाद अब एक और बड़ा भूचाल आ गया है। राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने एक बेहद कड़ा और अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव की डिजिटल ID को तुरंत प्रभाव से डीएक्टिवेट (ब्लॉक) कर दिया है। अब अयोध्या में इन दिग्गजों की सिफारिश पर VIP या VVIP एंट्री नहीं मिल पाएगी। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा माजरा और क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला।

क्यों ब्लॉक हुई डिजिटल ID?

दरअसल, यह पूरा एक्शन राम मंदिर में हुए चढ़ावा और दान चोरी प्रकरण से जुड़ा हुआ है। इस मामले की जांच कर रही SIT (विशेष जांच दल) की तफ्तीश में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। सूत्रों और SIT जांच के मुताबिक, ट्रस्ट के इन वरिष्ठ पदाधिकारियों की डिजिटल ID का दुरुपयोग करके भारी संख्या में VIP और VVIP दर्शन पास जारी किए गए थे। ALSO READ: अयोध्या आहत है… रामलला के घर 'लूट' ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— 'अब न्याय कब?'

 

डिजिटल ID का मुख्य काम मंदिर दर्शन के लिए विशेष पास बनाना था। पास जारी करने में किसी भी तरह की और अनियमितता या हेरफेर न हो, इसलिए ट्रस्ट ने यह 'डिजिटल स्ट्राइक' की है। दूसरी तरफ, चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों से SIT लगातार सघन पूछताछ कर रही है, जिससे कई और राज खुलने की उम्मीद है।

अब किसे मिली यह जिम्मेदारी?

ट्रस्ट में हुए इस बड़े फेरबदल के बाद अब जिम्मेदारी के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। यह सख्त फैसला ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन को नई जिम्मेदारी मिलने के ठीक बाद लिया गया है। अब चंपत राय और अनिल मिश्रा की जगह ट्रस्ट के सदस्य और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेन्द्र दास को विशिष्ट (VIP) पास जारी करने का अधिकार सौंप दिया गया है। ALSO READ: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

क्या है अयोध्या से जुड़ा यह पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान और चढ़ावे की रकम में हेराफेरी (चोरी) का मामला सामने आया था। करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़े इस मंदिर में वित्तीय गड़बड़ी की बात सामने आते ही हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच SIT को सौंपी गई।

 

जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसमें न सिर्फ पैसों की चोरी बल्कि VIP पास के काले खेल का भी पर्दाफाश हुआ। वीआईपी पास के जरिए अवैध रूप से लोगों को दर्शन कराने और उसमें इन डिजिटल आईडी के दुरुपयोग की आशंका सच साबित होती दिख रही है। इसी के बाद ट्रस्ट को अपनी साख बचाने और पारदर्शिता लाने के लिए अपने ही सबसे बड़े चेहरों (चंपत राय व अन्य) के खिलाफ इतना सख्त कदम उठाना पड़ा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

 

दतिया उपचुनाव: कांग्रेस में टिकट को लेकर सिरफुटौव्वल, अवधेश नायक और घनश्याम सिंह की बयानबाजी से बढ़ी तकरार

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भले ही अब तक बीजेपी और कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान नहीं किया हो लेकिन कांग्रेस के अंदर टिकट को लेकर दावेदारों के बीच सिरफुटौव्वल सामने आ गया है। कांग्रेस की चुनाव तैयारियों से जुड़ी  बैठक मं संभावित दावेदार अवधेश नायक औऱ घनश्याम सिंह के बीच खुलकर हुई बयानबाजी ने पार्टी के अंदर गुटबाजी को सतह पर ला दिया है। 

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कांग्रेस की ओऱ से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे बीजेपी से कांग्रेस में आए अवधेश नायक ने टिकट को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि, “टिकट कहां जा रहा है, यह सब समझ रहे हैं, मुझे भी अहसास है। 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए अवधेश नायक पाठ्य पुस्तक निगम के पूर्व उपाध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पहले उन्हें टिकट दिया था, लेकिन दतिया से लेकर भोपाल तक राजेंद्र भारती समर्थकों के विरोध के बाद उनका टिकट काट दिया गया और राजेंद्र भारती को प्रत्याशी बनाया गया था। वहीं अब उपचुनाव में अवधेश नायक खुलकर टिकट के लिए दावेदारी कर रहे है। 

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वहीं कांग्रेस की ओर से टिकट के दूसरे प्रमुख दावेदार घनश्याम सिंह ने बैठक में ही अवधेश नायक पर पलटवार करते हुए कहा कि, “टिकट पर पहला हक नायक का ही है, लेकिन आपका दिल बड़ा होना चाहिए”। टिकट को लेकर इन दो बड़े नेताओं के बयान ने कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को और हवा दे दी है। दतिया राजघराने से आने वाले पूर्व विधायक घनश्याम सिंह भी टिकट की दौड़ में शामिल हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी सक्रियता लगातार बनी हुई है। हालांकि 2023 में उन्होंने सेवढ़ा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद संगठन में उनकी पकड़ और क्षेत्रीय सक्रियता उन्हें दावेदारों की सूची में बनाए हुए है।

 

बताया जा रहा है कि दतिया उपचुनाव की तैयारियों को लेकर हुई कांग्रेस की रणनीति बैठक में भी टिकट के दावेदारों के समर्थकों के बीच तीखी बहस हुई। पार्टी नेतृत्व ने सभी नेताओं से अनुशासन बनाए रखने और अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा तक सार्वजनिक बयानबाजी से बचने की अपील की है। कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती टिकट वितरण के बाद संगठन को एकजुट रखना है। यदि असंतुष्ट नेताओं और उनके समर्थकों को समय रहते नहीं साधा गया, तो इसका सीधा असर उपचुनाव में पार्टी के प्रदर्शन पर पड़ सकता है।

 

दरअसल दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती उसके भीतर ही दिखाई दे रही है। पार्टी में टिकट के कई मजबूत दावेदार सामने हैं, जिससे आंतरिक खींचतान बढ़ गई है। वहीं कांग्रेस आज अपने उम्मीदवार के नाम का एलान कर सकते है।

सीएम योगी का सपा और कांग्रेस से सवाल, क्या जामा मस्जिद में हनुमान चालीस कराएंगे?

CM Yogi Adityanath in Ayodhya

राम मंदिर दान चोरी विवाद के बीच अयोध्या पहुंचे उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस और सपा पर हमला करते हुए कहा कि इन्होंने हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का पाप किया था। क्या ये जामा मस्जिद में हनुमान चालीस कराएंगे? ALSO READ: देश के ईवी बाजार में 18% हुई UP की हिस्सेदारी, 30 फीसदी तक पहुंचने का लक्ष्य

 

सीम योगी ने कहा कि ये लोग जो आस्था की बात करते हैं। इन्होंने तो हमारे पवित्र हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाने का काम किया था। क्या कभी कोई जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ कर पाएगा? क्या कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ऐसा कर पाएगी, फिर हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का काम कौन करवा रहा था?

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने अयोध्या की सांस्कृतिक राजधानी की फिर से स्थापना की। 2017 से पहले आप जाते थे, लोग आपको शक की निगाहों से देखते थे। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम की कृपा और पवनसुत हनुमान जी का भी असीम आशीर्वाद जब प्राप्त होता है तो अयोध्या के सारे काम अपने आप बढ़ते दिखाई देता है। ALSO READ: अमृत सरोवर निर्माण UP शीर्ष पर, 19989 सरोवरों का किया गया निर्माण और पुनरुद्धार

 

अयोध्या को 432 करोड़ की परियोजनाओं की सौगात

योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या जनपद को 432 करोड़ से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अयोध्या का विकास कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बुरा लग रहा है। यह नगरी तीनों लोकों से न्यारी है। आज महर्षि वाल्मीकि के नाम पर अयोध्या इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश के सभी प्रमुख शहरों के साथ जुड़ चुका है।