दतिया में बीजेपी ने क्यों काटा नरोत्तम मिश्रा का टिकट, बवाल कर रहे कार्यकर्ताओं पर पुलिस का लाठीचार्ज, टियर गैस का प्रयोग

दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा आलाकमान ने चौंकाते हुए पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। 2008 से लेकर 2023 तक दतिया विधानसभा सीट से लगातार 15 साल विधायक रहे भाजपा के दिग्गज नेता नरोत्तम मिश्रा जो उपचुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर चुके थे और अपना नामांकन फॉर्म भी खरीद कर चुनाव प्रचार भी शुरु कर दिया था।
 

नरोत्तम मिश्रा के टिकट कटने के बाद दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का जबरदस्त बवाल किया है। गुस्साएं भाजपा कार्यकर्ताओं पुलिस पर पथराव कर दिया और पुलिस को कार्यकर्ताओं को काबू में करने के लिए आंसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। वहीं बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं को दतिया भाजपा दफ्तर में नजरबंद कर दिया गया है।


आखिर दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकट पार्टी ने क्यों काटा यह सवाल अब सियासी गलियारों में सबसे अधिक चर्चा के केंद्र में है।


पार्टी सर्वे में नरोत्तम के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी- भाजपा के दिग्गज नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा वर्ष 2008 से 2023 तक लगातार 15 वर्षों तक दतिया से विधायक रहे। वे शिवराज सिंह चौहान सरकार में गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी रहे। उनको 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा।
 

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2023 की हार के पीछे सबसे बड़ा कारण क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार के खिलाफ बढ़ी एंटी-इनकंबेंसी मानी गई। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं के बीच नाराजगी देखने को मिली थी और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था।
 

उपचुनाव से पहले पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य ईकाई ने दतिया में जो सर्वे कराया उसमें अब भी नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ क्षेत्र में अब भी जबरदस्त एंटी-इनकंबेंसी होना पाया गया। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जब पार्टी पहले ही विजयपुर उपचुनाव हार चुकी है तब पार्टी ग्वालियर-चंबल की महत्वपूर्ण सीट दतिया को एक बार फिर नहीं गंवाना चाहती थी, इसलिए पार्टी ने नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को टिकट दिया। 


स्थानीय संगठन और पुराने नेताओं में नाराजगी- नरोत्तम मिश्रा  का टिकट कटने की एक बड़ी वजह दतिया में बीजेपी के पुराने और सीनियर नेताओं और कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा होना रहा। दतिया में नरोत्तम मिश्रा पर पार्टी को हाईजैक करने  का आरोप लगाया गया, जिसको पार्टी नेतृत्व ने गंभीरता से लिया। वहीं भाजपा के कई स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना रहा कि पंचायत और नगर पालिका चुनावों में अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण संगठन के जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं ने खुद को उपेक्षित महसूस किया, जिससे चुनाव के दौरान संगठनात्मक एकजुटता प्रभावित हुई। उपचुनाव में भाजपा की ओर से नरोत्तम मिश्रा के साथ पार्टी के कई अन्य नेताओं ने खुलकर टिकट की दावेदारी कर दी।
 

ओवर कॉन्फिडेंस और चुनिंदा लोगों से घिर होने का आरोप- राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा रही कि डॉ. नरोत्त मिश्रा पर केवल कुछ चुनिंदा लोगों से घिरे रहने के आरोप लगते रहे। इससे भाजपा के कई पुराने नेताओं और प्रभावशाली कार्यकर्ताओं ने दूरी बना ली। माना जाता है कि इसका असर बूथ स्तर तक संगठन की सक्रियता पर पड़ा और दतिया में 2008 से 2003 तक लगातार पार्टी का वोट शेयर गिया, जिससे 2023 में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।
 

स्थानीय स्तर पर यह धारणा भी बनी कि विरोधियों के प्रति आक्रामक राजनीतिक शैली और अत्यधिक आत्मविश्वास का नुकसान भाजपा को उठाना पड़ा। विपक्ष लगातार उन पर राजनीतिक विरोधियों को दबाने की राजनीति करने का आरोप लगाता रहा।


परिवार को लेकर भी उठे सवाल-दतिया की राजनीति में डॉ. नरोत्तम मिश्रा के बेटे सुकुर्ण मिश्रा की भूमिका लगातार चर्चा का विषय रही। स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों और विपक्षी दलों ने उनके व्यवहार और प्रभाव को लेकर सवाल उठाए। विपक्ष और कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाए कि प्रशासनिक कार्यों में अनौपचारिक हस्तक्षेप की धारणा बनी, जिससे आम लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा।


जातीय समीकरण भी बने चुनौती- राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दतिया में जाटव, कुशवाह, यादव सहित एससी और ओबीसी वर्ग के मतदाताओं का बड़ा प्रभाव है। विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा कि भाजपा का स्थानीय नेतृत्व सभी वर्गों तक समान रूप से नहीं पहुंच पाया। इसका असर 2023 के चुनाव परिणामों में देखने को मिला।
 

भाजपा का संदेश: नए चेहरे पर भरोसा-इन सभी राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भाजपा ने इस बार आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर स्पष्ट संकेत दिया है कि पार्टी दतिया में नए नेतृत्व और नई रणनीति के साथ चुनाव लड़ना चाहती है। अब देखना होगा कि आशुतोष तिवारी संगठन की अपेक्षाओं पर कितना खरे उतरते हैं और भाजपा दतिया में अपनी खोई राजनीतिक जमीन वापस हासिल कर पाती है या नहीं।

 

PM मोदी बोले- 9 महीने में हुआ भारत-न्यूजीलैंड FTA, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

PM narendra modi on FTA with newzealand

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को दोनों देशों के रिश्तों में ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया। ऑकलैंड में उन्होंने 9 महीने में हुए इस समझौते, UPI सहयोग और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य साझा किया। ALSO READ: ऑस्ट्रेलिया से भारत को मिलेगा यूरेनियम, PM मोदी और अल्बानीज के बीच कई बड़े समझौते; रक्षा से लेकर ऊर्जा तक बढ़ी साझेदारी

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड ने सिर्फ 9 महीने के रिकॉर्ड समय में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किया है, जो अपने आप में एक उपलब्धि है। यह समझौता दोनों देशों के बिजनेस के लिए मार्केट एक्सेस, इन्वेस्टमेंट, सर्विस और टेक्नोलॉजी में नए दरवाजे खोलेगा।

उन्होंने ऑकलैंड में कहा कि भारत में, हमने रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म को अपने शासन की नींव बनाया है। भारत अब केवल एक बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक विकास का मजबूत लॉन्चपैड है। उन्होंने 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय करने की बात कही है। ALSO READ: 'ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत', मेलबर्न में भारतीयों से बोले पीएम मोदी; टॉप-3 इकोनॉमी बनने का दोहराया लक्ष्य

 

पीएम मोदी ने फिनटेक के क्षेत्र में हम भारत के UPI और न्यूजीलैंड के भुगतान प्रणाली को जोड़ने पर आगे बढ़ रहे हैं। कृषि, डेयरी और खाद्य प्रसंस्करण में हमने सहयोग का एक मजबूत खाका बनाया है। इसका लाभ हमारे किसानों और पशु पालकों को मिलेगा। पारंपरिक चिकित्सा में न्यूजीलैंड और भारत दोनों की समृद्ध और जीवंत परंपराएं हैं। 

उन्होंने कम समय में समझौते को अंतिम रूप देने के लिए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा लेकर आई है।

 

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में गवर्नमेंट हाउस में उनके आधिकारिक स्वागत के दौरान औपचारिक 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया।

खमेनेई के बाद ईरान: कितनी बदल जाएगी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था

शबनम फॉन हाइन

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मुज्तबा खमेनेई को एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था विरासत में मिली है जिसे उनके पिता ने दशकों की कड़ी मेहनत से बिल्कुल अपने सांचे में ढाला और तैयार किया था। ALSO READ: जर्मनी में गर्मी की वजह से इस साल 5,100 लोगों की मौत

 

इस्लामी गणराज्य ईरान एक नए राजनीतिक युग में प्रवेश कर रहा है। गुरुवार को ईरानी लोग मारे गए अपने पूर्व सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह अली खमेनेई को उत्तर-पूर्वी ईरान में स्थित उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक करने की तैयारियों में जुटे थे।

 

खमेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रम में दुनिया भर के लोग आए। ईरान के करोड़ों लोग सड़कों पर उतर कर श्रद्धांजलि देने निकले, लेकिन उनके बेटे और उत्तराधिकारी मुज्तबा खमेनेई अभी भी लोगों की नजरों से दूर हैं। 28 फरवरी को ईरान युद्ध की शुरुआत में हुए अमेरिकी हवाई हमले में उनके पिता की मौत हो गई थी और वे खुद भी उस हमले में बुरी तरह घायल हो गए थे, जिससे उनका चेहरा बिगड़ गया था। मुज्तबा खमेनेई 1979 की क्रांति के बाद इस्लामिक गणराज्य के तीसरे सर्वोच्च नेता बने हैं। हालांकि, अपने पिता के लिए आयोजित आधिकारिक शोक समारोहों में वे कहीं भी दिखाई नहीं दिए।

 

ईरान में हुआ यह सत्ता परिवर्तन सिर्फ सरकार के शीर्ष स्तर पर किसी एक नेता के बदलने भर का मामला नहीं है। असल में, यह उस बड़े और गहरे संस्थागत बदलाव का नतीजा है जो अली खमेनेई के लगभग चालीस साल के शासनकाल के दौरान धीरे-धीरे पूरे सिस्टम में किया गया था।

 

राजनीतिक विश्लेषक रजा तालेबी ने कहा कि खमेनेई ने धीरे-धीरे इस्लामी गणराज्य (ईरान) के पूरे पावर स्ट्रक्चर यानी सत्ता के ढांचे को ही बदल कर रख दिया। उन्होंने डीडब्ल्यू को बताया, “अयातोल्लाह रुहोल्लाह खौमेनी ने 1979 की क्रांति के बाद एक ऐसा सिस्टम बनाया था जो पूरी तरह से क्रांति की साख और उनकी अपनी व्यक्तिगत धाक पर टिका था। उनके उलट, अली खमेनेई ने सत्ता संभालते ही बहुत ही सोची-समझी योजना के साथ उस पूरे सिस्टम का ढांचा अंदर से बदलना शुरू कर दिया था।”

 

तालेबी आगे बताते हैं, “पिछले 37 सालों में, मुख्य राजनीतिक फैसलों पर बड़े धर्मगुरुओं और शिया मदरसों का असर लगातार कम हुआ है। इसकी जगह, देश की सुरक्षा से जुड़ी संस्थाओं, सर्वोच्च नेता के दफ्तर और उससे जुड़े राजनैतिक व सैन्य नेटवर्क का दबदबा पूरे सिस्टम पर बहुत तेजी से बढ़ गया है।” ALSO READ: मिस्र के रेगिस्तान में मिला सैंकड़ों साल पुराना शहर

 

राष्ट्रपति की भूमिका कम होती नजर आई

इस बड़े बदलाव ने ईरान की चुनी हुई संस्थाओं की भूमिका को भी पूरी तरह बदल दिया है। तालेबी का मानना है कि अब वहां के राष्ट्रपति चुनाव धीरे-धीरे महज ऐसे मुकाबले बनकर रह गए हैं, जो पहले से तय दायरे ‘पॉलिटिकल फ्रेमवर्क' के भीतर ही लड़े जाते हैं।

 

तालेबी ने कहा, “भले ही अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के राष्ट्रपति अपनी घरेलू प्राथमिकताओं, मसलन देश के अंदर के छोटे-मोटे मुद्दों पर अपने हिसाब से काम करने में कामयाब रहे, लेकिन जब बात विदेशी मामलों, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय विवादों जैसे बड़े रणनीतिक फैसलों की आई, तो उनके हाथ पूरी तरह बंधे हुए थे और उनके पास फैसले लेने की बहुत कम आजादी थी।”

 

ध्यान देने वाली बात यह है कि अली खमेनेई के लिए रखे गए छह दिनों के राजकीय शोक के कार्यक्रमों में, इस्लामी गणराज्य के तीन पूर्व जीवित राष्ट्रपतियों हसन रूहानी, महमूद अहमदीनेजाद और मोहम्मद खातमी में से कोई भी सत्ता के बाकी बड़े नेताओं के साथ कहीं नजर नहीं आए। इसके बजाय, आधिकारिक तस्वीरों में पूरा ध्यान सुरक्षा तंत्र के प्रतिनिधियों, खासतौर पर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कमांडरों और मौजूदा राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान पर ही रहा।

 

आम तौर पर यह माना जाता है कि पेजेश्कियान और मुज्तबा खमेनेई के बीच करीबी कामकाजी संबंध रहे हैं। उन्होंने ईरान युद्ध को खत्म करने के मकसद से हुई बातचीत और समझौतों में अहम भूमिका निभाई थी। यह संघर्ष 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इस्राएल के हमलों के साथ शुरू हुआ था और करीब छह हफ्ते बाद एक कमजोर युद्धविराम के साथ खत्म हुआ। इसके बाद कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुला, जिसे आखिरकार मुज्तबा खमेनेई ने भी अपनी मंजूरी दे दी।

 

इससे पहले, सरकारी मीडिया की ओर से जारी उनके एक बयान के मुताबिक, वह ‘सैद्धांतिक रूप से' बिल्कुल अलग सोच रखते थे। बयान में कहा गया है कि वह (मुज्तबा खमेनेई) इस बातचीत के लिए तब तैयार हुए, जब सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चेयरमैन के तौर पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने उन्हें यह भरोसा दिलाया कि वह “ईरानी जनता के हक और एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस के हितों की रक्षा करेंगे।” ALSO READ: फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता की सजा घटी लेकिन चुनौतियां नहीं

 

आईआरजीसी का बढ़ा मनोबल

राष्ट्रपति पेजेश्कियान के साथ-साथ, आईआरजीसी के पूर्व कमांडर और पार्लियामेंट के मौजूदा स्पीकर मोहम्मद बाघेर कलीबाफ ने भी अमेरिका के साथ बातचीत में अहम भूमिका निभाई है। 14 जून, 2026 को, अमेरिका और ईरान बड़े समझौते पर बातचीत के आधार के तौर पर बनाए गए एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर सहमत हुए।

 

हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालिया तनाव बढ़ने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने तेहरान के साथ बातचीत के भविष्य पर संदेह जताया है। साथ ही, अपने अगले कदमों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।

 

ईरान की विदेश और सुरक्षा नीति के जानकार हामिदरेजा अजीजी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स' पर लिखा, “ईरान, समझौते (एमओयू) की धारा-5 का मतलब यह निकाल रहा है कि 'इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान जरूरी इंतजाम करेगा' वाक्यांश का सीधा सा अर्थ यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए सारी शर्तें तय करने और व्यवस्था बनाने का हक सिर्फ ईरान के पास है।”

 

ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपने नियंत्रण को सबसे बड़ा रणनीतिक मोहरा यानी मोल-भाव का जरिया मानता है। इसलिए, तेहरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि उसकी मंजूरी के बिना कोई भी दूसरा वैकल्पिक समुद्री रास्ता न बने। जैसे, ओमान के समुद्री इलाके से गुजरने वाले रास्ते, जिनमें अमेरिका या कोई अंतरराष्ट्रीय संगठन शामिल हो।

 

अमेरिका के साथ बढ़ते टकराव में आईआरजीसी ने निर्णायक भूमिका निभाई है। फ्रांस में रहने वाली और उभरते हुए राजनीतिक व सामाजिक आंदोलनों की विशेषज्ञ शोधकर्ता मुज्तबा नजफी के मुताबिक, अमेरिका, इस्राएल और ईरान के बीच हुए इस युद्ध ने एक राजनीतिक और सामाजिक ताकत के रूप में आईआरजीसी के आत्मविश्वास को बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है। ALSO READ: ब्रिटेन का शाही परिवार कहां से और कैसे धन कमाता है

 

क्या सत्ता के लिए अंदरूनी लड़ाई जारी है?

इस संकट का मतलब यह नहीं है कि नरमपंथी गुटों का रसूख बढ़ गया है, जिसमें 2015 में परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी के समर्थक भी शामिल हैं।

 

नजफी ने डीडब्ल्यू को बताया, “इस बात की पूरी संभावना है कि आने वाले समय में हमें रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के अंदर ही सत्ता के लिए आपसी लड़ाई देखने को मिले। ईरान का भविष्य आगे किस दिशा में जाएगा, यह काफी हद तक इसी बात के इर्द-गिर्द तय होगा।”

 

उनके आकलन के मुताबिक, ईरान की मौजूदा सत्ता को अभी ऐसा कोई कारण नहीं दिखता कि वह अपने समूह से बाहर के उदार नेताओं के सामने झुके या उन्हें बड़ी छूट दे।

 

यह देखना अभी बाकी है कि क्या इस्लामी गणराज्य का मजबूत और पुराना सत्ताधारी गुट मुज्तबा खमेनेई के पीछे खड़ा होगा और उन्हें देश को एक नई दिशा देने देगा या फिर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे मुज्तबा खुद इन्हीं सत्ता केंद्रों के हाथों की कठपुतली बनकर रह जाएंगे।

‘अगर मेरी हत्या हुई तो ईरान पर बम गिरा देना’, ट्रंप का दावा; मैं लंबे समय से ईरान की हिट लिस्ट में हूं

Trump Iran statement

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि मैं काफी समय से उनके निशाने पर हूं। अगर मेरे साथ कुछ होता है तो मैंने ऐसे हमले के निर्देश दिए हैं जैसा ईरान ने पहले कभी देखा नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि अगर मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना। ALSO READ: क्या ईरान रच रहा है ट्रंप की हत्या की साजिश? इजराइली खुफिया रिपोर्ट का दावा

 

मीडिया खबरों के अनुसार, इजराइल ने हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बताया कि उनके पास खुफिया जानकारी है कि ईरान ट्रंप की हत्या की साजिश रच रहा है। इस इनपुट के बाद ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह ईरान के निशाने पर हैं और इसी खतरे का हवाला देते हुए उन्होंने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य नीति को उचित ठहराया।

 

ट्रंप ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा, 'नहीं, नहीं… इजरायल के पास ऐसा कोई नया इनपुट नहीं था. मैं काफी समय से ईरान की हिट लिस्ट में नंबर-1 हूं। अपने अंदाज में मजाक करते हुए ट्रंप ने कहा, 'उम्मीद है, अगर मैं नहीं रहा तो आप मुझे याद करेंगे।

 

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भविष्य में ईरान के साथ फिर टकराव होता है तो वह लंबा युद्ध नहीं होगा, बल्कि बहुत कम समय तक चलेगा। ALSO READ: Iran : तबाही देख दहली दुनिया, अयातुल्ला अली खामेनेई के गुप्त ठिकाने का 35 सेंकड का वीडियो, US-Israel की Airstrike के Unseen फुटेज

 

गौरतलब है कि ईरान 2020 में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की बगदाद के पास मौत के बाद से ईरान लगातार बदले की बात करता रहा है। अमेरिकी सेना ने ट्रंप के आदेश पर सुलेमानी को मार गिराया था। जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान ट्रंप पर हुए हमले में उनके कान को छूते हुए गोली निकल गई थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में इसे ईरान की साजिश बताया गया था, हालांकि अमेरिकी जांच एजेंसियों ने इसकी कभी सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की थी।

Top News 11 July: ट्रंप बोले- मेरी हत्या हुई तो ईरान पर बम गिरा देना, पीएम मोदी ने FTA को बताया मील का पत्थर

top news 11 july

Top News 11 July : अमेरिका राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश, अगर मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना। पीएम मोदी ने न्यूजीलैंड से एफटीए को मील का पत्थर बताया। आज नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि। दतिया विधानसभा उपचुनाव में टिकट कटने पर नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने किया हंगामा। स्पेन फीफा वर्ल्ड कप 2026 के सेमीफाइनल में पहुंचा। 11 जुलाई की बड़ी खबरें… 

 

मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना : ट्रंप

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा कि मैं काफी समय से उनके निशाने पर हूं। अगर मेरे साथ कुछ होता है तो मैंने ऐसे हमले के निर्देश दिए हैं जैसा ईरान ने पहले कभी देखा नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि अगर मेरी हत्या होती है तो ईरान पर बम गिरा देना।

 

न्यूजीलैंड से FTA मील का पत्थर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को दोनों देशों के संबंधों में एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने कम समय में समझौते को अंतिम रूप देने के लिए न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा लेकर आई है।

 

नौसेना में शामिल होगा स्वदेशी युद्धपोत महेंद्रगिरि

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े में छठे प्रोजेक्ट 17ए स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट महेंद्रगिरि को शामिल करेंगे। महेंद्रगिरि में उन्नत स्टील्थ विशेषताएं, रडार से बचने की क्षमता और उच्च स्तर का ऑटोमेशन शामिल है। यह युद्धपोत आधुनिक स्वदेशी हथियारों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस है। 

 

दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों ने किया हंगामा

दतिया में राज्य के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने पुलिस पर पथराव किया। वे इस बात का विरोध कर रहे थे कि BJP ने उन्हें आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए टिकट नहीं दिया। इस घटना में लोगों के घायल होने की खबर है। कल रात उनके हज़ारों समर्थकों ने NH-44 को जाम कर दिया, जिससे गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रैफ़िक पूरी तरह ठप हो गया। ALSO READ: दतिया उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने से समर्थक नाराज, NH-44 पर जाम लगाया, कई पार्षदों ने दिया इस्तीफा

 

स्पेन फीफा वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में

फाबियन रूइज और मिकेल मेरिनो के गोलों की मदद से स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर फीफा विश्व कप के सेमीफाइनल में प्रवेश किया। बेल्जियम की ओर से चार्ल्स डी केटेलारे ने एकमात्र गोल दागा। सेमीफाइनल में स्पेन का मुकाबला फ्रांस से होगा।

बिजनौर में मालन नदी का कहर, कुछ घंटों में 3 लोग लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

malan nadi

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते मालन नदी उफान पर पहुंच गई और उसने शुक्रवार को दो अलग-अलग घटनाओं में तीन परिवारों की खुशियां छीन ली। मालन नदी में एक व्यक्ति और दो किशोर तेज बहाव में बहने की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक तीनों का कोई पता नहीं चल सका था।

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पहला हादसा मंडावर थाना क्षेत्र के रावली-ब्रह्मपुरी रपटे पर हुआ। ग्राम कूकड़ा निवासी 43 वर्षीय रविंद्र पुत्र अतर सिंह रिश्तेदारी में गांव शहजादपुर जा रहे थे। उस समय मालन नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ था और रपटे के ऊपर से तेज गति से पानी बह रहा था। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वह उनकी बात को नजर अंदाज करते हुए पैदल ही रपटा पार करने लगा। 

 

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक रपटे के बीच पहुंचते ही रविंद्र का संतुलन बिगड़ गया और वह तेज बहाव में बहते हुए आंखों से ओझल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी की रफ्तार इतनी अधिक थी कि वह देखते ही देखते नदी के बहाव में बह गया। तभी वहां मौजूद किसी शख्स ने घटना का वीडियो अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करते हुए सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। 

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इसी दिन शाम करीब साढ़े पांच बजे मालन नदी में दूसरा हादसा सामने आया। किरतपुर कस्बे के राहतगंज मोहल्ले निवासी 16 वर्षीय शबान पुत्र सदाब और 15 वर्षीय अजीम पुत्र आजम नदी में नहाने गए थे। इसी दौरान अचानक नदी का बहाव तेज हो गया और दोनों किशोर गहरे पानी की चपेट में आकर बह गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और गोताखोरों की टीम मौके पर पहुंच गई। देर शाम तक नदी में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जाता रहा, लेकिन किसी का भी पता नहीं लग सका।

 

लगातार बारिश के कारण मालन नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन ने लोगों से नदी, रपटों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा है कि मौसम सामान्य होने तक किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं। एक ही दिन में हुए इन दो हादसों के बाद स्थानीय लोगों में गहरी चिंता है। उनका कहना है कि नदी के संवेदनशील स्थानों पर स्थायी बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, पुलिस निगरानी और राहत-बचाव दल की तैनाती की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

Corona Alert : 4 साल बाद Covid-19 से मौत, आंध्रप्रदेश में नए मामलों ने बढ़ाई चिंता

corona virus

आंध्रप्रदेश में लगभग 4 वर्षों बाद कोविड-19 (Covid-19) से पहली पुष्ट मौत दर्ज की गई है। राज्य के कडप्पा (Kadapa) जिले में 46 वर्षीय एक व्यक्ति की कोरोना संक्रमण के कारण मौत हो गई। हाल के दिनों में जिले में कोविड-19 के मामलों में दोबारा बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है।

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चार दिन तक चला इलाज, निमोनिया से बिगड़ी हालत

जानकारी के अनुसार, 46 वर्षीय मरीज का इलाज सीएमसी वेल्लोर में चल रहा था, जहां उसकी कोविड-19 जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। चार दिनों तक उपचार के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ और बुधवार को उसकी मौत हो गई। जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि मरीज के दोनों फेफड़े गंभीर रूप से संक्रमित हो चुके थे और उसे निमोनिया भी हो गया था, जिसके कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

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कडप्पा में मिले चार नए कोविड मरीज

इसी बीच, RT-PCR जांच में कडप्पा जिले में चार नए कोविड-19 संक्रमित मिलने की पुष्टि हुई है। इनमें से तीन मरीज होम आइसोलेशन में हैं, जबकि एक मरीज अस्पताल के विशेष कोविड वार्ड में भर्ती है और उसका इलाज जारी है।

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दूसरी मौत को लेकर फैली अफवाह पर प्रशासन ने दी सफाई

 

जिले में दो कोविड मौतों की खबरें सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। जिला कलेक्टर ने बताया कि जिन दो मौतों की चर्चा हो रही थी, उनमें से एक व्यक्ति की मौत सीधे कोविड-19 से नहीं हुई थी। वह पहले से हृदय और लीवर की गंभीर बीमारियों से पीड़ित था और कोरोना उसकी मृत्यु का मुख्य कारण नहीं था। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

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स्वास्थ्य विभाग ने जारी की सलाह

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोविड-19 का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। यदि किसी व्यक्ति को लगातार बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायत हो, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर जांच करानी चाहिए। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।

गोरखपुर-कुशीनगर के लिए खुशखबरी, CM योगी करेंगे 1,283 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास

CM Yogi in Pilibhit

शुक्रवार को गोरखपुर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आदित्यनाथ शनिवार 11 जुलाई को गोरखपुर और कुशीनगर जिले को 1283 करोड रुपये की सौगात देंगे। वह कुशीनगर में 525 करोड़ रुपये की लागत वाली 464 और गोरखपुर में करीब 758 करोड़ रुपये की 24 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे। 

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन करने के बाद पूर्वाह्न कुशीनगर जिले का दौरा करेंगे। वह टेकुआटार में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण व शिलान्यास समारोह में तीन विधानसभा क्षेत्रों रामकोला, हाटा  और कुशीनगर के लिए सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई से जुड़ी 525 करोड़ रुपये की 464 परियोजनाओं का उपहार देंगे। लोकार्पण और शिलान्यास समारोह के लिए दुल्हिन जगरनाथ कुंवरी इंटर कॉलेज परिसर में बने मंच से मुख्यमंत्री जनसभा को भी संबोधित करेंगे। इस अवसर पर वह कार्यक्रम स्थल के पास विकास प्रदर्शनी का भी निरीक्षण करेंगे। 

 

शनिवार को ही दोपहर बाद सीएम योगी गोरखपुर के पिपराइच विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत भटहट-बांसस्थान में फोरलेन सड़क सहित 758 करोड़ रुपये के 24 विकास कार्यों की सौगात देंगे। वह भटहट-बासंस्थान फोरलेन सड़क समेत 697 करोड़ 49 हजार रुपये की लागत वाली 5 सड़कों का लोकार्पण और सड़क निर्माण एवं पर्यटन से संबंधित 60 करोड़ 63 लाख 96 हजार रुपये की लागत वाले 19 विकास कार्यों का शिलान्यास करेंगे। लोकार्पण और शिलान्यास के ये सभी कार्य पिपराइच विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आते हैं। 

 

मुख्यमंत्री जिन सड़कों का लोकार्पण करेंगे, उनमें सबसे महत्वपूर्ण भटहट-बांसस्थान फोरलेन मार्ग है। 11.6 किमी लंबे इस मार्ग के फोरलेन में चौड़ीकृत होने जाने से न केवल एक बड़ी आबादी के लिए आवागमन सुगमता बढ़ी है बल्कि इसका फायदा आयुष विश्वविद्यालय जाने वालों को भी मिल रहा है। फोरलेन कनेक्टिविटी हो जाने से प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय में आयुष पद्धतियों से इलाज कराने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।।शिलान्यास की परियोजनाएं सड़क और पर्यटन विकास पर केंद्रित हैं।

 

आयुष विवि का निरीक्षण करेंगे मुख्यमंत्री

शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य के पहले, महायोगी गुरु गोरखनाथ राज्य आयुष विश्वविद्यालय का भी निरीक्षण करेंगे। उनके द्वारा आयुष विश्वविद्यालय में पुरुष व महिला छात्रवास का लोकार्पण भी संभावित है। पुरुष छात्रावास का नामकरण ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की स्मृति में किया गया है, जबकि महिला छात्रावास का नाम राप्ती रखा गया है। उल्लेखनीय है कि आयुष विश्वविद्यालय, सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में से एक है। उन्होंने इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास 28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों और लोकार्पण 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कर कमलों से कराया था।

 

गोरखपुर में पौधरोपण महायज्ञ में सम्मिलित होंगे मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार 12 जुलाई को गोरखपुर में, प्रदेशव्यापी पौधरोपण महायज्ञ में सम्मिलित होंगे। वह गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस के किनारे ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधा लगाएंगे और जनसभा कर प्रदेशवासियों को पौधरोपण महायज्ञ में जिम्मेदारीपूर्वक हिस्सेदारी करने का आह्वान करेंगे। इस महाभियान के जरिये प्रदेश सरकार ने इस बार 35 करोड़ पौधरोपण करने का लक्ष्य तय किया है।

गन्ना किसानों के हित में योगी सरकार सख्त, घटिया खाद-कीटनाशक देने वाली चीनी मिलों पर होगी बड़ी कार्रवाई

योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा और खेती की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ा निर्णय लिया है। अब प्रदेश की सभी चीनी मिलें किसानों को केवल प्रमाणित और गुणवत्ता परीक्षण से गुजरे उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व एवं कीटनाशक ही उपलब्ध करा सकेंगी। उत्तर प्रदेश गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने इस संबंध में प्रदेश की सभी चीनी मिलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

 

हर बैच की होगी एनबीएल लैब में जांच

नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक बैच के कृषि निवेश की गुणवत्ता की जांच एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य होगा। केवल वही उत्पाद किसानों तक पहुंचेंगे जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश 1985, कीटनाशक अधिनियम 1968 व अन्य वैधानिक मानकों पर खरे उतरेंगे। इससे किसानों को नकली और घटिया कृषि उत्पादों से राहत मिलेगी।

 

प्रतिबंधित कीटनाशकों पर पूरी तरह रोक

निर्देश में स्पष्ट किया है कि भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कीटनाशकों का वितरण किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद व कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित कृषि निवेशों और फसल सुरक्षा उत्पादों को ही प्राथमिकता दी जाएगी।

 

किसानों की सहमति के बिना नहीं होगा वितरण

इन दिशा-निर्देशों में किसानों के अधिकारों को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। किसी भी किसान को उसकी मांग और स्पष्ट सहमति के बिना कोई कृषि निवेश उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। व्यावसायिक लाभ के लिए लक्ष्य निर्धारित कर अनावश्यक कृषि निवेश का वितरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कृषि निवेश केवल किसान की वास्तविक आवश्यकता और गन्ना क्षेत्रफल के अनुसार ही उपलब्ध कराया जाएगा।

 

चीनी मिलों की तय होगी जवाबदेही

प्रदेश सरकार ने कृषि निवेश की गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिलों पर तय की है। चाहे वितरण स्वयं मिल करे या किसी एजेंसी के माध्यम से, गुणवत्ता व वितरण संबंधी सभी उत्तरदायित्व मिल के ही होंगे। इसके अलावा जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त नियमित निरीक्षण और निगरानी करेंगे।

 

चीनी मिल की बैंक गारंटी भी हो सकती है जब्त

अगर कोई चीनी मिल किसानों की सहमति के बिना या घटिया कृषि निवेश वितरित करती पाई गई तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होगी। ऐसे मामलों में गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की धनराशि की वसूली या समायोजन की व्यवस्था तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकेगी।

 

बाजार और सोशल मीडिया पर भी रहेगी निगरानी

गन्ना एवं कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाजार में उपलब्ध कीटनाशकों की नियमित सैंपलिंग और गुणवत्ता जांच करेंगे। वहीं भ्रामक प्रचार करने वाले विक्रेताओं व सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ भी कीटनाशक अधिनियम, 1968 और संबंधित नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

खेती होगी वैज्ञानिक, लागत घटेगी और बढ़ेगी आय

प्रदेश सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से गन्ना खेती अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और किसान केंद्रित बनेगी। गुणवत्ता युक्त कृषि निवेश उचित मूल्य पर उपलब्ध होने से खेती की लागत नियंत्रित होगी, मृदा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, गन्ने की उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही प्रदेश के गन्ना एवं चीनी उद्योग को भी नई मजबूती मिलेगी।

CM योगी की सख्ती का असर, एम डैशबोर्ड रैंकिंग में शाहजहांपुर बना नंबर-1, रामपुर-बरेली भी टॉप-3 में

yogi adityanath plantation drive on 12th july

योगी सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों से प्रदेश में सुशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का असर धरातल पर साफ देखा जा सकता है। सीएम डैशबोर्ड की जून माह की रैंकिंग में शाहजहांपुर ने पूरे प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। वहीं रामपुर ने दूसरा और बरेली ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है। शाहजहांपुर, रामपुर और बरेली ने जिलाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने यह उपलब्धि जनशिकायतों के प्रभावी निस्तारण, बेहतर फीडबैक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधारात्मक पहल से हासिल किया है।  

 

शाहजहांपुर ने 10 में से 9.43 अंक प्राप्त कर बाजी मारी

मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर जिलों का मूल्यांकन कई मानकों के आधार पर किया जाता है। इसमें जनशिकायतों का समयबद्ध निस्तारण, प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई, फीडबैक की गुणवत्ता और योजनाओं के क्रियान्वयन जैसे पहलू शामिल होते हैं। शाहजहांपुर के जिलाधिकारी धमेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रशासन ने इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। खासतौर पर जनशिकायतों के समाधान में जिले ने बेहतर कार्य करते हुए शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया। शिकायतों के निस्तारण के बाद प्राप्त सकारात्मक फीडबैक ने भी जिले की रैंकिंग को मजबूत किया। उन्होंने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की जून माह की रैंकिंग में शाहजहांपुर को 10 में से 9.43 अंक प्राप्त हुए। 

 

रामपुर ने 9.41 अंक हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया

रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की रिपोर्ट उन जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करती है, जिन्होंने प्रशासनिक दक्षता, विकास कार्यों और राजस्व प्रबंधन में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप रामपुर में विकास कार्यों को गुणवत्तापूर्ण समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है। इसके साथ ही सीएम डैशबोर्ड के जरिये मिलने वाली शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण तरीके से त्वरित निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि सीएम डैशबोर्ड की जून माह की रैंकिंग में रामपुर को 10 में से 9.41 अंक प्राप्त हुए। इसी के साथ रामपुर ने प्रदेशभर में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अलावा रामपुर पिछले कई माह से सीएम डैशबोर्ड की रैंकिंग में टॉप टेन में जिलों में बना हुआ है। बरेली के डीएम अविनाश सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप शासन की योजनाओं को धरातल पर प्राथमिकता के आधार पर उतारा जा रहा है। इसकी लगातार मॉनीटरिंग और समीक्षा की जाती है। वहीं वजह है कि जून माह की रैंकिंग में बरेली ने 9.30 अंक हासिल कर प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है।

 

टॉप टेन जिलों में महराजगंज, आजमगढ़, मैनपुरी ने स्थान प्राप्त किया

सीएम डैशबोर्ड की जून माह की रैंकिंग में कई जिलों ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए शीर्ष 10 में स्थान बनाया है। इसमें महराजगंज ने 9.25 अंक हासिल कर चौथा, आजमगढ़ और मैनपुरी ने 9.24 बराबर बराबर अंक हासिल कर पांचवा स्थान प्राप्त किया। इसी तरह सोनभद्र और हमीरपुर ने 9.23 बराबर बराबर अंक, बागपत ने 9.20 अंक और लखीमपुर खीरी ने 9.19 अंक हासिल कर टॉप टेन में जगह बनाई है।

इन सभी जिलों ने जनशिकायतों के समाधान, प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के जरिए अपनी स्थिति मजबूत की है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि प्रदेश के जिलों के बीच बेहतर कार्य करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही हैं।
 

मुख्यमंत्री डैशबोर्ड योगी सरकार का एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जिसके माध्यम से विभिन्न योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की नियमित समीक्षा की जाती है। इस डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के सहयोग से विकसित किया गया है। इसके माध्यम से योगी सरकार को जिलों के प्रदर्शन की वास्तविक समय में जानकारी मिलती है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होती है। जिन जिलों का प्रदर्शन कमजोर होता है, वहां प्रशासन को सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।