सीएम डॉ. मोहन यादव ने कालापीपल को दी 30.86 करोड़ की सौगात, दोहराया UCC को लागू करने का संकल्प

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को शाजापुर जिले के कालापीपल को 30.86 करोड़ लागत के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने यहां कई कामों के लोकार्पण और भूमिपूजन किए। उन्होंने यहां आयोजित किसान समृद्धि संकल्प सम्मेलन एवं 'हरा-भरा कालापीपल' पौधरोपण अभियान का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इससे पहले कालापीपल में उनका 'रोड शो' हुआ। इस रोड शो में जनता ने अपने लाड़ले बेटे पर जमकर फूल बरसाए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शाजापुर को नई सड़कें और रेलवे ओवर ब्रिज देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इसी महीने राज्य में यूसीसी लागू करने के प्रयास किए जाएंगे। देश में अलग-अलग कानून नहीं होने चाहिए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कालापीपल अद्भुत क्षेत्र है। मां राज-राजेश्वरी की इस पर असीम कृपा है। आज यह क्षेत्र पौधरोपण में नया रिकॉर्ड बना रहा है। नेवज, लकुंदर, चिल्लर, पार्वती इन पांच नदियों की इस क्षेत्र को कृपा मिल रही है। परमात्मा ने शाजापुर को अद्भुत सौंदर्य दिया है। हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हमारे प्रदेश में शाजापुर जैसा जिला है। उन्होंने कहा कि एक गाना है, 'मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती, मेरे देश की धरती…'  इसी गाने की तरह शाजापुर हमारे लिए सोना उगलने वाली धरती भी है, कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ाने वाली धरती भी है, संगठन का सूर्य चमकाने वाली धरती भी है।

 

किसानों के लिए सबकुछ करने को तैयार-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा, 'जो धरती को हरियाली का उपहार देते हैं, वही आने वाले कल को आकार देते हैं'। 'किसान मुस्कुराए तो मुस्कुराता जहां है, इन्हीं की मेहनत से महकता अपना हिंदुस्तां है'। आज का यह आयोजन केवल भूमि-पूजन, लोकार्पण का औपचारिकता का कार्यक्रम नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों का 6-6 महीने के ब्याज का झंझट खत्म हो जाएगा। अब हम एक साल के लिए लोन देंगे। किसानों के लिए हमारी सरकार सबकुछ करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अलग पहचान बना रहा है। किसान सम्मान निधि से लेकर सभी योजनाएं लगातार जन कल्याण का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, मैं कांग्रेस के मित्रों से पूछना चाहता हूं कि आपको परेशानी क्या है। आप बताइए नर्मदा कहां और शाजापुर कहां। फिर भी, यहां के 118 गांवों में नर्मदा जल आता है। आने वाले दिनों में जो-जो गांव बचे हैं, वहां भी पानी देंगे, पूरे क्षेत्र में पानी देंगे। 

 

बीजेपी सरकार में बढ़ा सिंचाई का रकबा-मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा, रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून, पानी गए न ऊबरे, मोती-मानुस चून। खेत में किसान और सीमा पर जवान, दोनों का सम्मान, ये है भाजपा की पहचान। हमने पारस पत्थर तो नहीं देखा, लेकिन यह पक्की बात है कि अगर सूखे खेत को पानी मिल जाए, तो वह सोना उगलने लगता है। उन्होंने कहा कि राज्य से 250 से ज्यादा नदियां निकलती हैं। नर्मदा, पार्वती, कालीसिंध, चंबल, केन बेतवा जैसी नदियां बहती रहीं और कांग्रेस के लोग सरकार चलाते रहे। 1956 से मध्यप्रदेश बना है, लेकिन 2002-03 तक इन्होंने कुछ नहीं किया। उस काल तक सिंचाई का रकबा केवल साढ़े सात लाख हैक्टेयर होता था। लोगों को याद होगा 1956 के दौर में गेहूं का भाव 80 से लेकर 100 रुपये क्विंटल हुआ करता था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस 55 साल में गेहूं के भाव 400 रुपये भी नहीं बढ़ा पाई। जबकि, अभी किसानों ने गेहूं 2625 रुपये क्विंटल बेचा। यह बात कांग्रेसियों को सुनाओ कि यह है सरकार भाजपा की। यह है बीजेपी को वोट देने का परिणाम।  कांग्रेस केवल सत्ता चाहती है। जब बीजेपी की सरकार बनी तब जाकर सिंचाई का रकबा 44 लाख हैक्टेयर हुआ। 

 

कांग्रेस ने राज्यों को आपस में लड़वाया-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पहले रात में लाइट नहीं जलती थी, अब दिन में लाइट जलती है। किसान सिंचाई के लिए डीजल की टंकी लेकर दौड़ता था, जगह-जगह धक्के खाता था, लेकिन बिजली नहीं मिलती थी। हमारी सरकार में गांव की लाइट अलग, खेत की लाइट अलग है। आने वाले समय में हमारी सरकार और सौगात देगी। बरसात के बाद जब किसान गेहूं-चने की खेती करेंगे, तो आपको लाइट दिन में ही मिलेगी। आपको रात को पानी डालने की जरूरत ही नहीं होगी। कांग्रेस को अपने पापों के लिए किसानों से माफी मांगनी चाहिए। किसान को भगवान के समान पूजने के काम, अगर कोई सरकार करती है, तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार करती है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए हमारी सरकार एक के बाद एक काम करती जा रही है। किसान के लिए लागत कम, आमदनी डबल होनी चाहिए। अब हम किसान से एमएसपी पर फसल खरीदेंगे। कांग्रेसियों ने किसानों से कभी एक दाना नहीं खरीदा। किसानों को मंडी के भरोसे छोड़ दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनता से कहा कि अगर कोई कांग्रेसी आपके दरवाजे आए तो उनसे ये सारे सवाल करना। कांग्रेस ने एक राज्य के किसानों को दूसरे राज्य के किसानों से लड़ाया। कांग्रेस की सरकार में पानी के बंटवारे को लेकर दक्षिण भारत के राज्यों को आपस में लड़वा दिया। किसानों के खून की नदियां बहती थीं और कांग्रेसी मजे करते थे। उनका काम ही है लोगों को आपस में बांटो और राज करो। अंग्रेज चले गए और कांग्रेस छोड़ गए। और ये कांग्रेसी हम सबके सिर पर बैठ गए।

 

अब प्यासा नहीं रहेगा बुंदेलखंड-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा की राजस्थान और मध्यप्रदेश के बीच पानी को लेकर 20-30 साल तक झगड़ा चलता रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पार्वती-कालीसिंध परियोजना से इसका हल निकला। इस हल से 15 जिले राजस्थान के और 13 जिले प्रदेश के आनंद मनाएंगे। इस परियोजना का 90 फीसदी केंद्र सरकार वहन करेगी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोग बड़े जुझारू हैं, लेकिन केवल पानी की कमी की वजह से पलायन करते थे।

आज हमने उत्तप्रदेश के साथ केन-बेतवा नदी को लेकर एमओयू किया है। इस परियोजना के पूरा बुंदेलखंड पानी से सराबोर होगा। इसी तरह हमने महाराष्ट्र के साथ भी करार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा क्षेत्र बदल गया। सरदार सरोवर परियोजना के लिए हमें 1500 करोड़ रुपये देने थे, लेकिन अब हमें मात्र 231 करोड़ रुपये देने होंगे। यह हमारे काम करने का तरीका है। हमने सारी बातों का समाधान कर दिया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कंस को मारने के बाद श्री कृष्ण जब तक द्वारिकाधीश नहीं हुए, तब तक आनंद में नहीं आया। कांग्रेसियों ने बहनों को फूटी कौड़ी नहीं दी। हमारी सरकार जब योजना लाई, तो कांग्रेसी मजाक बनाते थे। कहते थे कि यह योजना केवल चुनाव तक सीमित है, पैसा कहां से लाएंगे। सरकार बर्बाद कर दी। मुझे गर्व है कि अभी तक 60 हजार करोड़ की राशि बहनों के खातों में जा चुकी है। हम हर महीने राखी मनाते हैं। एक हजार से चलने वाली यात्रा 1500 तक आ गई। इन पैसों से बहनें अलग-अलग काम करने लगीं। वे घर के लिए वरदान हैं। वे हमारे घर का आधार हैं। वे अपना पेट काटकर बच्चों के लिए सारी व्यवस्थाएं करती हैं। इधर, कांग्रेसी कहते हैं कि बहनें शराब पीती हैं, उन्हें रुपये मत दो। कांग्रेसियों को शर्म आनी चाहिए। सीएम डॉ. यादव ने महिलाओं से कहा कि काग्रेसियों की इस बात को वैसे ही याद रखना जैसे भगवान कृष्ण ने शिशुपाल की बात को याद कर रखा था। जैसे ही चुनाव आए आप अपना वोट देना और कांग्रेसी मुंह के बल गिर जाएंगे। इनका हिसाब-किताब चुकता हो जाएगा। जो जैसा करेगा, वैसा भरेगा। कांग्रेस के षडयंत्रों का खेल, झूठ बोलने का खेल चलने वाला नहीं है। 

 

अलग-अलग कानूनों की जरूरत नहीं-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खेत से लेकर खलिहान तक और खलिहान से लेकर बागबां तक हम सभी का सम्मान करते हैं। हमारी सरकार पूरे साल काम करती है। अभी तो कांग्रेसियों को और बड़ा झटका लगने वाला है। हमारे यहां हिंदू का कानून अलग, मुस्लमान का कानून अलग, ये अलग-अलग कानून क्यों होने चाहिए। कानून एक ही होना चाहिए। मुस्लिम बहनें भी हमारी बहनें हैं। उनके साथ जो होता है अब वो नहीं चलेगा। इन बहनों के आत्मसम्मान के लिए एक देश-एक विधान-एक प्रधान-एक राष्ट्रगान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इसलिए हम इसी महीने विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का प्रयास करेंगे। हम दूध उत्पादन के जरिये किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है। दस साल से सब इंस्पेक्टर की भर्ती टल रही थी, हमने वो भर्ती शुरू कर दी। हमने पदोन्नति दी और रोजगार के रास्ते खोले। आज मध्यप्रदेश में दस लाख करोड़ का निवेश हो चुका है।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आपके पास ही पेप्सिको प्लांट लगा रहा है। यह कंपनी आपसे आलू खरीदेगी। इसलिए अपनी फसल में आलू की गुंजाइश भी रखो। किसान रोड किनारे अपनी जमीन पर होम स्टे बनाए। उसमें हम कोई अलग से बिजली बिल नहीं मांगेंगे। सांदीपनि स्कूलों में बच्चों को पढ़ाएं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माध्यम से कई तरह काम हो रहे हैं।

Iran : तबाही देख दहली दुनिया, अयातुल्ला अली खामेनेई के गुप्त ठिकाने का 35 सेंकड का वीडियो, US-Israel की Airstrike के Unseen फुटेज

ayatullah khamnai fotage

ईरान के सरकारी मीडिया ने गुरुवार को पहली बार वह वीडियो जारी किया है, जिसमें पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के तेहरान स्थित परिसर के अंदर हुई भारी तबाही दिखाई गई है। यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है, जब एक सप्ताह तक चले अंतिम संस्कार के बाद खामेनेई को उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

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करीब 35 सेकंड के इस वीडियो में इमाम खुमैनी हुसैनिया के भीतर का भयावह मंजर दिखाई देता है। यही वह मुख्य सभागार था, जहां खामेनेई नियमित रूप से अहम बैठकों की अध्यक्षता करते थे और राष्ट्र को संबोधित किया करते थे। वीडियो में इमारत के कई हिस्से पूरी तरह ध्वस्त नजर आते हैं।  मुड़ी हुई लोहे की बीम, मलबे के विशाल ढेर और ढही हुई दीवारें इस बात का संकेत देती हैं कि संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हमले ने कितनी बड़ी तबाही मचाई।

 

ईरानी सरकारी मीडिया का दावा है कि यह पहली बार है जब हमले के बाद इस परिसर की तस्वीरें और वीडियो सार्वजनिक किए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की इस वर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमले में मौत हो गई थी। इस हमले में उनके परिवार के कई सदस्य, जिनमें उनकी 14 महीने की पोती भी शामिल थी, मारे गए थे। उनके बेटे मोजतबा अली खामेनेई, जिन्होंने बाद में सर्वोच्च नेता का पद संभाला, इस हमले में घायल हुए थे।

वीडियो जारी होने के साथ ही खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी पूरी हो गई। उनका अंतिम संस्कार एक सप्ताह तक चला, जिसमें तेहरान, क़ोम और इराक के शिया पवित्र शहर नजफ़ और कर्बला में लाखों लोगों ने श्रद्धांजलि अर्पित की। दफनाने से पहले उनका ताबूत तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में रखा गया था, जहां बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे।  इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान के कई ठिकानों पर नए हवाई हमले करने की पुष्टि की।

Honda WN7 Electric Motorcycle : पहली फुल-साइज इलेक्ट्रिक बाइक, 140KM की रेंज और 30 मिनट में फास्ट चार्जिंग

जापानी ऑटोमोबाइल कंपनी Honda ने यूरोप में अपनी पहली फुल-साइज इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल WN7 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। यह बाइक अब यूरोप के डीलरशिप पर उपलब्ध है और इसके साथ ही कंपनी ने प्रीमियम इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल सेगमेंट में कदम रख दिया है।

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Honda ने WN7 को केवल अधिकतम परफॉर्मेंस पर नहीं, बल्कि एक नेचुरल और सहज राइडिंग एक्सपीरियंस देने के उद्देश्य से तैयार किया है, ताकि नए और अनुभवी दोनों तरह के राइडर्स इसे आसानी से चला सकें। कंपनी का कहना है कि यह इलेक्ट्रिक बाइक आधुनिक तकनीक के साथ रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए डिजाइन की गई है और यूरोप में Honda के मजबूत सर्विस और डीलर नेटवर्क का भी लाभ मिलेगा।

9.3kWh बैटरी और 67 हॉर्सपावर की ताकत

Honda WN7 में 9.3kWh लिथियम-आयन बैटरी दी गई है, जिसे फ्रेम के निचले हिस्से में लगाया गया है। इससे बाइक का वजन संतुलित रहता है और हैंडलिंग बेहतर होती है। बैटरी का केसिंग फ्रेम को अतिरिक्त मजबूती भी प्रदान करता है, जिससे कम और अधिक दोनों स्पीड पर बाइक स्थिर बनी रहती है। इस इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल में लिक्विड-कूल्ड इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो 50kW (करीब 67 हॉर्सपावर) की अधिकतम पावर और 100Nm टॉर्क पैदा करती है।

A2 लाइसेंस वर्जन भी उपलब्ध

Honda के अनुसार, WN7 स्टार्ट होने के बाद शुरुआती 50 मीटर (164 फीट) की दूरी केवल 3.9 सेकंड में तय कर सकती है। कंपनी ने इसका A2 लाइसेंस वर्जन भी पेश किया है, जिसकी अधिकतम गति 129 किमी/घंटा है। वहीं सीमित लाइसेंस वाले राइडर्स के लिए 11.2kW पावर आउटपुट वाला एक अन्य वेरिएंट भी उपलब्ध कराया गया है।

चार राइडिंग मोड और एडजस्टेबल रीजनरेटिव ब्रेकिंग

Honda WN7 में चार अलग-अलग राइडिंग मोड दिए गए हैं, जिनकी मदद से राइडर पावर डिलीवरी और रीजनरेटिव ब्रेकिंग को अपनी जरूरत के अनुसार बदल सकते हैं। बाएं हैंडलबार पर दिया गया विशेष कंट्रोल रीजनरेटिव ब्रेकिंग के स्तर को एडजस्ट करता है। इससे एक्सिलरेटर छोड़ने पर बाइक को अधिक तेजी से धीमा किया जा सकता है या फिर उसे अधिक फ्री-रोलिंग मोड में चलाया जा सकता है।

30 मिनट से कम समय में होगी फास्ट चार्जिंग

Honda WN7 में इलेक्ट्रिक कारों की तरह Type-2 AC चार्जिंग और CCS2 DC फास्ट चार्जिंग का विकल्प दिया गया है। कंपनी के मुताबिक, 20% से 80% तक बैटरी चार्ज होने में 30 मिनट से भी कम समय लगता है। वहीं घर पर सामान्य AC चार्जर से बैटरी को पूरी तरह चार्ज होने में कई घंटे लगते हैं।

एक बार चार्ज करने पर मिलेगी 140KM तक की रेंज

Honda का दावा है कि WN7 एक बार फुल चार्ज होने पर 140 किलोमीटर (87 मील) तक चल सकती है। कंपनी इसे खास तौर पर डेली कम्यूटिंग और शहर के भीतर सफर के लिए एक व्यावहारिक इलेक्ट्रिक मोटरसाइकल के रूप में पेश कर रही है, जिससे बार-बार चार्जिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी।

‘ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखाई भारत की ताकत’, मेलबर्न में भारतीयों से बोले पीएम मोदी; टॉप-3 इकोनॉमी बनने का दोहराया लक्ष्य

PM Modi addressed Indians in Australia

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेलबर्न में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर, भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंध, विकसित भारत, टॉप-3 अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य और भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान पर विस्तार से बात की। ALSO READ: ऑस्ट्रेलिया से भारत को मिलेगा यूरेनियम, PM मोदी और अल्बानीज के बीच कई बड़े समझौते; रक्षा से लेकर ऊर्जा तक बढ़ी साझेदारी

दुनिया ने देखी भारत की ताकत

पीएम मोदी ने कहा कि भारत के डिफेंस प्लेटफॉर्म की कैपेबिलिटी और क्रेडिबिलिटी दुनिया देख रही है। आपने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान डेमो तो देखा ही होगा। धमाके आतंकियों के अड्डों पर हो रहे थे और गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही थी।

मेलबर्न लिटिल इंडिया

उन्होंने कहा कि मेलबर्न शहर एक दिन में ही चार सीजन के दर्शन करा देता है, लेकिन भारतीय समुदाय ने अपने कल्चरल कलर से इसे और वाइब्रेंट बना दिया है। यहां मेलबर्न में और आस पास काफी ऐसे स्थान हैं, मार्केट हैं जो भारतीयता के रंग से भरे हैं। कोई इसे लिटिल इंडिया कहता है, कोई मिनी इंडिया कहता है… नाम कोई भी हो लेकिन रंग भारतीयता से भरे हुए हैं।

एक सपने से जन्मे दूसरा सपना, सपने जन्मे हजार

प्रधानमंत्री ने कहा कि आप सभी आस्ट्रेलिया की ग्रोथ को अपने परिश्रम से सींच रहे हैं, लेकिन मैं जानता हूं कि आपकी एक नजर भारत पर लगातार रहती है। भारत क्या कर रहा है, भारत की प्रगति, भारत की गति, इसकी खोज खबर आप लेते रहते हैं। 21वीं सदी का भारत आज विकसित होने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। एक सपना पूरा होता है, तो नया सपना जन्म ले लेता है। पहले कहते थे, एक दीप से जले दूसरा, जलते दीप हजार। आज मैं कहता हूं, एक सपने से जन्मे दूसरा सपना, सपने जन्मे हजार।

 

उन्होंने कहा कि हम 140 करोड़ Aspiration से भरे राष्ट्र हैं। हम बेसब्र हैं, हम दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती इकोनॉमी हैं, लेकिन हम जल्द से जल्द दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी बनना चाहते हैं। क्योंकि यही हमारी प्रेरणा है- Grow more, Achieve more… भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसने चंद्रयान को चांद के दक्षिण ध्रुव तक पहुंचाया। अब हम गगनयान भेजेंगे।

 

पासपोर्ट देखकर मदद नहीं करते

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम पासपोर्ट का रंग देखकर मदद नहीं करते। संकट के समय मदद के लिए सबसे पहले आते हैं। तुर्किए, सीरिया की भी भूकंप के समय मदद की। भारत की मदद से यहां सैकड़ों लोगों की जानें बचीं। सब सुखी रहें यह भारत के संस्कार हैं। 

भजन क्लबिंग नया ट्रेंड

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आज कल भजन क्लबिंग का नया ट्रेंड चल रहा है, इसको हमारी Gen Z ड्राइव कर रही है और यहां ऑस्ट्रेलिया में मैंने सुना है कि आपका वीकेंड आस्था और आध्यात्म से भरा रहता है। कहीं किसी के घर भगवान सत्यनारायण की कथा, कहीं गुरुद्वारे में अरदास, कहीं बच्चों द्वारा भांगडा या भरतनाट्यम की प्रस्तुति, कहीं कोई क्रिकेट टूर्नामेंट चल रहा होता है। अब तो इंडियन फिल्म फेस्टिवल भी यहां आ गया है, कुछ दिन बाद ही यहां मेलबर्न में इंडियन फिल्म फेस्टिवल शुरू होने वाला है, मैं इसके सफल आयोजन की अभी से शुभकामनाएं देता हूं।

 

दिल और दिमाग पर छा जाते हैं अल्बनीज

अहमदाबाद जहां दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट ग्राउंड है और मेलबर्न जहां Iconic स्टेडियम है, हम दोनों जगह साथ रहे हैं। हम सभी ने देखा है, प्रधानमंत्री Albanese जी जब बोलते हैं तब भारतीयों के दिल और दिमाग में छा जाते हैं। सिडनी में भी आपने धूम मचाई थी और यहां भी आप छा गए।

 

12 साल में तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा

उन्होंने कहा कि मैं जब 2014 में ऑस्ट्रेलिया आया था, तब 28 साल के बाद भारत का कोई पीएम यहां पहुंचा था। और आप याद कीजिए, तब मैंने कहा था अब आपको 28 साल इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पिछले 12 वर्षों में मैं तीसरी बार यहां आया हूं, यानी इस बार यहां हैट्रिक लगी है। ये दिखाता है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते किस ऊंचाई पर हैं।

Share Bazaar में लौटी रौनक, Sensex 238 अंक उछला, Nifty में भी आई तेजी

Indian stock market rebounded after sharp one day decline

Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार में एक दिन की भारी गिरावट के बाद फिर से रौनक लौटी है। कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन यानी आज बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी हरे निशान पर रहे। कारोबार के अंत में सेंसेक्‍स 238.22 अंक (0.31%) की बढ़त के साथ 76741.82 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 80.75 अंक (0.34%) चढ़कर 23962.80 पर आ गया। इससे पहले यानी बुधवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी। निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक डूब गए थे।

 

भारतीय शेयर बाजार में एक दिन की भारी गिरावट के बाद फिर से रौनक लौटी है। कारोबारी सप्ताह के चौथे दिन यानी आज बीएसई का सेंसेक्स और एनएसई का निफ्टी हरे निशान पर रहे। कारोबार के अंत में सेंसेक्‍स 238.22 अंक (0.31%) की बढ़त के साथ 76741.82 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 80.75 अंक (0.34%) चढ़कर 23962.80 पर आ गया।

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आज कल्याण ज्वेलर्स, स्विगी और लोढा डेवलपर्स ने क्रमशः 18.40 फीसदी, 7.47 फीसदी और 6.91 फीसदी की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। कायन्स टेक और नुवामा वेल्थ के शेयरों में भी क्रमशः 6.80 फीसदी और 4.68 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई। बाजार में इस उछाल के पीछे कई कारण रहे।

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डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध फिर से शुरू होने की संभावना नहीं है। इस बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में आज बढ़त देखने को मिली है। यूरोपीय शेयर बाजार में DAX और CAC बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पहले यानी बुधवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट आई थी। निवेशकों के 8 लाख करोड़ रुपए से अधिक डूब गए थे।

अमेरिका ने चाबहार को बनाया निशाना, क्या है इस ईरानी शहर का भारत से कनेक्शन?

india chabhar connection

सीजफायर खत्म होते ही अमेरिका ने दक्षिण-पूर्वी बंदरगाह शहर चाबहार समेत कई ईरानी शहरों पर बड़ा हमला किया। अमेरिकी सेना की एयर स्ट्राइक से चाबहार और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इस हमले से चाबहार में दहशत फैल गई। ALSO READ: अमेरिकी हमलों से दहले ईरान के 8 शहर, बहरीन में अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के पास धमाके

 

अप्रैल में अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद से भारत की मदद के विकसित इस रणनीतिक बंदरगाह शहर पर अमेरिकी सेना ने पहली बार हमले किए हैं। बताया जा रहा है कि इस हमले में चाबहार को भारी नुकसान हुआ।

 

चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत प्रमुख भागीदार

ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में चाबहार बंदरगाह के विकास में भारत एक प्रमुख भागीदार है। यह बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और व्यापारिक महत्वाकांक्षाओं का केंद्र है। चाबहार बंदरगाह केवल एक व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि भारत के लिए भू-राजनीतिक सेतु है। यह अफगानिस्तान, मध्य एशिया और रूस के साथ व्यापार का मुख्य मार्ग है। यह 7,200 किलोमीटर लंबे अंतराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे का हिस्सा है, जो यूरोप तक पहुंच आसान बनाता है। ALSO READ: ईरान ने जारी किया अयातुल्ला खामेनेई के घर पर हमले का वीडियो, मलबे में तब्दील दिखा पूरा परिसर

 

2015 से चाबहार में निवेश कर रहा है भारत

भारत ने 2015 से इस परियोजना में निवेश शुरू किया और मई 2024 में भारत की कंपनी India Ports Global Limited (IPGL) ने ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का समझौता किया। भारत बंदरगाह के आधुनिकीकरण और संचालन में वित्तीय व तकनीकी सहयोग दे रहा है।

 

क्यों खास है चाबहार बंदरगाह 

भारत ने 2023 में चाबहार बंदरगाह का उपयोग अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं की सहायता भेजने के लिए किया था। इसके पहले 2021 में इसके जरिए ईरान को पर्यावरण के अनुकूल कीटनाशकों की आपूर्ति भी की गई थी। चाबहार बंदरगाह और ग्वादर के बीच समुद्र के रास्ते सिर्फ 100 किलोमीटर की दूरी है। इसे आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) से जोड़ने की योजना है। 7200 किलोमीटर लंबा ये गलियारा भारत को ईरान, अजरबैजान के रास्ते होते हुए रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से जोड़ेगा।

 

बजट में चाबहार के लिए नहीं था पैसा

केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा वित्तवर्ष 2026-27 के लिए पेश आम बजट में ईरान के चाबहार बंदरगाह परियोजना के लिए धनराशि आवंटित नहीं की गई थी।

मुख्यमंत्री योगी ने 2 महिलाओं को आंगनवाड़ी सहायिका पद के लिए सौंपे नियुक्ति पत्र

Chief Minister Yogi handed over appointment letters to two women for post of Anganwadi Assistant

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री ने जनसभा स्थल पर दो महिलाओं को आंगनवाड़ी सहायिका पद के लिए नियुक्ति पत्र प्रदान किये। इसके अलावा उन्होंने विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक, चाबी, प्रमाण पत्र आदि भी सौंपा। इस दौरान बांदा की विकास यात्रा पर आधारित लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री ने यहां बच्चों का अन्नप्राशन कराया, महिलाओं को पोषण से भरी पोटली दी। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन कर युवाओं से बातचीत भी की। बेसिक शिक्षा परिषद के स्टॉल पर स्कूल चलो अभियान व बच्चों द्वारा बनाए गए मॉडल की जानकारी ली और उन्हें चॉकलेट दी। स्थानीय प्रशासन की तरफ से मुख्यमंत्री को शजर पत्थर से निर्मित शिवालय भेंट किया गया।  

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मुख्यमंत्री के हाथों इन्हें मिला सम्मान…

1- पुष्पा देवी- आंगनवाड़ी सहायिका नियुक्ति पत्र 

2- पूजा- आंगनवाड़ी सहायिका नियुक्ति पत्र

3- रश्मि अग्रवाल- सहायक अध्यापिका- मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना 

4- अजीत सिंह- सहायक अध्यापक- मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना 

5- मंजू देवी व भारती सिंह- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 8.95 करोड़ से अधिक का चेक 

6- सरोज देवी- ई रिक्शा की चाबी 

7- सुमत देवी- सिलाई मशीन 

8- अनिल कुमार- मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 5 लाख का चेक 

9- मूरतध्वज- ट्रैक्टर की चाबी 

10- मुलायम- आयुष्मान कार्ड 

10- अरविंद कुमार- आयुष्मान कार्ड 

11- गेनिया- मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के तहत पांच लाख का चेक 

12- अभिषेक सोनी- मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 7500 का चेक 

13- अंशु- मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) का स्वीकृति पत्र 

14- रमेश प्रजापति- मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की चाबी

15- रामरतन- मुख्यमंत्री माटी कला टूल किट्स योजनान्तर्गत विद्युत चालित चाक प्रमाण पत्र 

16- वंदना गुप्ता- नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत प्रमाण पत्र 

17- शोभाराम कश्यप- पक्षी बचाओ कार्य के लिए आपदा विभाग की तरफ से प्रमाण पत्र।

अयोध्या आहत है… रामलला के घर ‘लूट’ ने आस्था को घायल किया, सरयू किनारे गूंज रहा एक ही सवाल— ‘अब न्याय कब?’

Ayodhya Ground Report

“परहित सरिस धरम नहिं भाई। पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥”
 

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखी यह चौपाई केवल धर्म का उपदेश नहीं, बल्कि सत्ता, समाज और व्यवस्था—तीनों के लिए मर्यादा का संदेश भी है। परहित सबसे बड़ा धर्म है और किसी की आस्था को पीड़ा देना सबसे बड़ा अधर्म। आज अयोध्या की गलियों में यही भाव बिना किसी प्रवचन के लोगों की बातचीत में सुनाई देता है।

 

रामलला के दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान में चोरी का मामला केवल एक आपराधिक जांच भर नहीं रह गया है। इसने करोड़ों लोगों की आस्था, विश्वास और मर्यादा पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। मामला अभी अदालत और जांच एजेंसियों के अधीन है, लेकिन अयोध्या की गलियों में इसकी सुनवाई भावनाओं की अदालत में पहले ही शुरू हो चुकी है।

“राम को क्या देंगे? हमारे पास तो केवल विश्वास है…”

अयोध्या में एक दिन बिताने के बाद सबसे पहले जो बात समझ आती है, वह यह कि यहां लोगों का गुस्सा राजनीतिक कम और भावनात्मक अधिक है। हनुमानगढ़ी के आसपास रिक्शा चलाने वाले एक बुजुर्ग कहते हैं— 
 

“रामजी को हम क्या दे सकते हैं? पैसा नहीं, सोना नहीं… सिर्फ अपनी श्रद्धा और विश्वास। अगर उसी पर चोट होगी तो दुख तो होगा ही।”

 

उनकी आंखों में गुस्सा कम और पीड़ा अधिक दिखाई देती है। ऐसा लगता है मानो पूरा शहर यही वाक्य दोहरा रहा हो।

Ayodhya Ground Report

दुकानदारों की चिंता : श्रद्धालु कम हुए तो बाजार भी सूना

रामपथ पर प्रसाद की दुकानें खुली हैं। अगरबत्ती की खुशबू पहले जैसी है। फूल-मालाओं से सजी दुकानें भी वैसी ही हैं, लेकिन कई दुकानदारों के चेहरों पर पहले जैसी सहज मुस्कान नहीं दिखती।

 

राम मंदिर परिसर के आसपास प्रसाद, फूल-माला और धार्मिक वस्तुओं की दुकानें चलाने वाले कई व्यापारियों की शिकायत लगभग एक जैसी है।

 

उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर लगातार चल रही खबरों और आरोपों के बाद श्रद्धालु असहज महसूस कर रहे हैं। कुछ दुकानदार दावा करते हैं कि पिछले कुछ दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या में कमी महसूस हुई है, जिसका सीधा असर उनकी रोजी-रोटी पर पड़ा है।

 

हालांकि श्रद्धालुओं की संख्या में कमी के आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन स्थानीय कारोबारियों का अनुभव बताता है कि विवाद का आर्थिक असर अब बाजार तक महसूस होने लगा है।

“गलती किसी की हो, बदनाम पूरी अयोध्या क्यों?”

अयोध्यावासियों की एक और पीड़ा है, जो लगभग हर बातचीत में सामने आती है। उनका कहना है कि सोशल मीडिया पर कई लोग पूरी अयोध्या को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, जबकि कथित आरोप कुछ व्यक्तियों पर हैं।

 

एक स्थानीय निवासी पूछते हैं— “अगर किसी व्यक्ति ने गलती की है तो बदनाम पूरी अयोध्या क्यों हो रही है? अयोध्या तो राम की नगरी है। यहां के लोगों की नीयत पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?” यह सवाल केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अनेक स्थानीय लोगों की भावना बन चुका है।

 

स्थानीय स्तर पर कई लोग ट्रस्ट के पदाधिकारियों, विशेषकर चंपत राय का नाम लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हैं और गंभीर आरोप लगाते हैं। हालांकि इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच एजेंसियां और न्यायालय ही करेंगे।

Ayodhya Ground Report

इसी बातचीत के बीच एक राजनीतिक संदेश भी बार-बार सुनाई देता है। यह किसी मंच से दिया गया भाषण नहीं, बल्कि चाय की दुकानों, रिक्शों और गलियों में चल रही चर्चाओं का निष्कर्ष है। कई स्थानीय लोग कहते हैं, “अगर रामनाम पर लूट करने वालों को सजा नहीं मिली, तो रामनाम पर वोट मांगने वालों के लिए जनता के बीच लौटना आसान नहीं होगा।”

 

अयोध्या में यह वाक्य किसी राजनीतिक नारे की तरह नहीं, बल्कि आस्था और जवाबदेही के बीच खिंची उस महीन रेखा की तरह सुनाई देता है, जिसे पार करने की कीमत सत्ता को भी चुकानी पड़ सकती है।

पुलिस की जुबान पर भी एक भरोसा

मंदिर की सुरक्षा और व्यवस्था में लगे कुछ पुलिस अधिकारियों से बातचीत में भी भरोसे का स्वर सुनाई देता है। एक अधिकारी ने औपचारिक बयान देने से बचते हुए इतना ही कहा— “अगर आरोपियों की रिमांड मिलती है तो पूरी सच्चाई सामने आएगी। कानून अपना काम करेगा।”

 

उनकी बातों से स्पष्ट था कि जांच अभी अधूरी है और कई परतें खुलना बाकी हैं। 

आस्था बनाम आरोप

तुलसीदास ने रामचरितमानस में लिखा है—
 

“रघुकुल रीति सदा चली आई। प्राण जाए पर वचन न जाई।।”
 

मर्यादा, विश्वास और वचन—यही राम की पहचान हैं।

 

राम मंदिर केवल पत्थरों का भव्य निर्माण नहीं है। यह करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहां चढ़ाया गया प्रत्येक रुपया किसी आर्थिक लेन-देन का हिस्सा नहीं, बल्कि विश्वास का प्रतीक है। इसलिए कथित चढ़ावा चोरी का मामला केवल वित्तीय अनियमितता का आरोप नहीं बनता, बल्कि लोगों की भावनाओं को भी गहराई से प्रभावित करता है। 

Ayodhya Ground Report


जब मैं रामलला के सामने खड़ा था…

दिन भर अयोध्या की गलियों में घूमने, लोगों से बात करने और उनके मन का दर्द सुनने के बाद शाम को मैं भी रामलला के दर्शन के लिए कतार में खड़ा था।

 

घंटियों की आवाज़, “जय श्रीराम” के उद्घोष और धीरे-धीरे आगे बढ़ती कतारों के बीच जैसे सारी दुनियावी बहसें पीछे छूट गईं।
 

उस क्षण न मुझे कथित चढ़ावा चोरी का विवाद याद रहा, न एफआईआर, न जांच, न आरोप और न राजनीति। मंदिर की चौखट पार करते ही जैसे सारी बहसें बाहर ही रह गई थीं। वहां केवल दो ही अस्तित्व थे—राम और उनका भक्त। कुछ क्षणों के लिए राम मेरे थे और मैं राम का।

 

दर्शन के बाद बाहर निकला तो लगा, शायद यही अनुभव उन हजारों श्रद्धालुओं का भी है जो देश के अलग-अलग कोनों से यहां आते हैं। वे किसी ट्रस्ट, किसी व्यवस्था या किसी व्यक्ति के दर्शन करने नहीं आते। वे उस आदर्श के सामने सिर झुकाने आते हैं जिसने मर्यादा को जीवन का सबसे बड़ा धर्म बनाया।

 

शायद यही कारण है कि यह विवाद अयोध्या और रामभक्तों को भीतर तक आहत करता है। यहां चर्चा किसी तिजोरी की नहीं, आस्था पर लगी चोट की है।

राम की सीख, समय की कसौटी

श्रीराम ने अपने जीवन से सिखाया कि सत्ता से बड़ा धर्म है, विजय से बड़ी मर्यादा है और अधिकार से बड़ा उत्तरदायित्व।
 

इतिहास गवाह है कि रावण से लेकर अनेक आक्रांताओं ने इस सभ्यता की आत्मा को चुनौती दी। मंदिर टूटे, साम्राज्य बदले, आक्रमण हुए, उपहास हुआ, लेकिन आस्था का दीप नहीं बुझा। सनातन की शक्ति किसी भवन, किसी सिंहासन या किसी पद में नहीं, बल्कि उस विश्वास में रही है जिसे करोड़ों लोगों ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने भीतर जीवित रखा।

 

आज भी प्रश्न वही है। यदि किसी व्यक्ति ने अपराध किया है तो उसे दंड मिलना ही चाहिए, क्योंकि न्याय ही रामराज्य की पहली शर्त है। लेकिन इस प्रक्रिया में अयोध्या, उसके निवासियों और करोड़ों श्रद्धालुओं की निष्ठा को कठघरे में खड़ा कर देना भी उतना ही अन्याय होगा।

अयोध्या किसका इंतजार कर रही है?

सरयू आज भी शांत बह रही है। रामलला की आरती पहले की तरह हो रही है। “जय श्रीराम” का उद्घोष भी उतना ही बुलंद है।
 

लेकिन इन सबके बीच अयोध्या जैसे एक ही बात कहती सुनाई देती है—
 

“राम नाराज़ न हों। क्योंकि राम जब न्याय करते हैं तो केवल अपराध नहीं देखते, मर्यादा भी देखते हैं।”

रामचरितमानस में कहा भी है- विनय न मानत जलधि जड़, गए तीनि दिन बीति। बोले राम सकोप तब, भय बिनु होइ न प्रीति।।

 

जब लौटते समय मैंने एक बार फिर मंदिर के शिखर की ओर देखा, तो लगा कि रामलला आज भी उतने ही शांत हैं। उन्हें अपने वैभव की चिंता नहीं, अपने भक्तों के विश्वास की है।

 

अयोध्यावासी किसी राजनीतिक जीत या हार की प्रतीक्षा नहीं कर रहे। उनकी अपेक्षा केवल इतनी है कि यदि कहीं अपराध हुआ है तो निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को दंड मिले और रामलला के नाम पर उठे हर संदेह का पारदर्शी समाधान सामने आए। 

 

अयोध्या आज नाराज़ कम, आहत अधिक है। वह केवल इतना चाहती है कि राम के नाम पर चढ़ाया गया विश्वास, राम की मर्यादा के अनुरूप सुरक्षित रहे।

 

क्योंकि इस नगरी में लोग मानते हैं—धन की चोरी की भरपाई हो सकती है, लेकिन आस्था पर लगी चोट का हिसाब केवल अदालत नहीं, इतिहास भी लिखता है।
 

दान की गणना पर चंपत राय ने उठाए सवाल! आखिर किस पर साधा निशाना

Champat Rai viral letter: राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक के बाद मंदिर में दान व चढ़ावे की चोरी को लेकर नित नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस पूरे प्रकरण में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान व चढ़ावे की चोरी के मामले में सबसे बड़ी जानकारी राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय के एक कथित पत्र से सामने आई है, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

​इस पत्र में चंपत राय ने दान की गिनती को लेकर बनाई गई गाइडलाइंस (SoP) पर अपने हस्ताक्षर होने से साफ इनकार किया है। उन्होंने दावा किया कि डॉ. अनिल मिश्रा और बैंक ने मिलकर दान के रुपयों की गिनती के तरीके तय किए थे, जिसकी जानकारी उन्हें एक साल बाद हुई। ALSO READ: राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद श्रद्धालुओं की संख्या घटी, अयोध्या की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर

​चंपत राय का तीखा सवाल

​चंपत राय के इस कथित पत्र में गणना प्रक्रिया को लेकर बेहद गंभीर बातें लिखी गई हैं। पत्र के अनुसार, 6 फरवरी 2025 को गणना प्रक्रिया के लिए जो दिशा-निर्देश (SoP) तय किए गए थे, उस पर न्यासी डॉ. अनिल मिश्र और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (अयोध्या शाखा) के मुख्य प्रबंधक गोविंद मिश्र के हस्ताक्षर हैं। इसमें लिखा है कि प्रतिलिपि महासचिव को भेजी गई, लेकिन मुझे इस पत्र की जानकारी 13 जून 2026 को अपने अकाउंट ऑफिस से हुई। मैं इस पत्र से सहमत नहीं हूं और इसे पूरी तरह अस्वीकार करता हूं। ALSO READ: कहां गई 5 करोड़ की 'सोने की रामचरितमानस'? 'महाग्रंथ' गायब होने पर अयोध्या में बवाल, केजरीवाल ने कहा- महापाप

 

​प्रक्रिया पर उठाया सवाल : चंपत राय ने पत्र में लिखा है कि अगस्त 2020 से जून 2026 तक जितने भी अनुबंध हुए, उन सभी पर केवल मेरे और दूसरे पक्ष के प्रमुख अधिकारी के हस्ताक्षर हैं। फिर गणना को लेकर बने इस दिशा-निर्देश पत्र पर मेरे हस्ताक्षर क्यों नहीं कराए गए? अगर मैं अयोध्या में नहीं था, तो मेरा इंतजार किया जाना चाहिए था।

क्या कहती है एसआईटी रिपोर्ट? 

​चढ़ावे व दान की गणना को लेकर जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एसआईटी के मुताबिक, ट्रस्ट ने मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए निजी एजेंसी एसआईएस (SIS) से अनुबंध किया गया है। नियम के तहत गणना कक्ष के ठीक बाहर एसआईएस का एक कर्मचारी तैनात रहना चाहिए, जिसका काम पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी करना है, लेकिन ट्रस्ट ने इस नियम का ठीक ढंग से पालन नहीं किया। एसआईटी ने रिपोर्ट में चंपत राय का नाम सीधे तौर पर तो नहीं लिखा, लेकिन ट्रस्ट पर ही नियमों की अनदेखी करने और सुरक्षा व्यवस्था को शिथिल (कमजोर) करने का सीधा आरोप लगाया है। ALSO READ: अयोध्या राम मंदिर घोटाला, करोड़ों की चोरी से लेकर इस्तीफों और गिरफ्तारियों तक की पूरी टाइमलाइन

कड़े नियमों को क्यों किया गया कमजोर?

​एसआईटी की जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ है कि दान की सुरक्षा से जुड़े नियमों को जानबूझकर बदला गया। फरवरी 2024 में ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक के बीच हुए एमओयू में स्पष्ट था कि चढ़ावे की रकम की गणना और उसे बैंक ले जाने के दौरान सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी ट्रस्ट की होगी। ट्रस्ट के पदाधिकारियों का दायित्व था कि वे एसआईएस के सुरक्षाकर्मियों के जरिए गणना कर्मियों के आने-जाने पर सघन तलाशी सुनिश्चित करवाएं। लेकिन, 6 फरवरी 2025 में ट्रस्ट और बैंक ने मिलकर तलाशी से जुड़े कड़े निर्देशों को शिथिल कर दिया।

 

​नियमित की जगह 'अचानक' तलाशी : पहले यह सहमति बनी थी कि गणना कक्ष में आने-जाने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षाकर्मियों द्वारा गहन जांच की जाएगी। लेकिन बाद में इस नियम को बदलकर नियमित तलाशी की जगह 'अचानक (रैंडम) तलाशी' का प्रावधान जोड़ दिया गया, जिससे गड़बड़ी की आशंका बढ़ गई।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

गुजरात के गोसाबारा तट से 30.67 लाख की चरस जब्त, नवा बंदर पुलिस को मिली बड़ी सफलता

Charas worth Rs 30.67 lakh seized off coast of Gosabara Gujarat

पोरबंदर जिले के गोसाबारा तट पर नवा बंदर पुलिस को फुट पेट्रोलिंग के दौरान एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस की टीम जब तटीय इलाके में सुरक्षा व्यवस्था के तहत गश्त कर रही थी, तभी लैंडिंग पॉइंट के पास संदिग्ध हालत में पड़ा एक बोरा नजर आया। इस लावारिस बोरे को देखकर पुलिस को शक हुआ और उन्होंने तुरंत इसकी जांच शुरू कर दी।

 

लाखों रुपए की कीमत का चरस का स्टॉक बरामद

पुलिस ने जब उस संदिग्ध बोरे को खोलकर देखा, तो उसमें से कुल 10 पैकेट बरामद हुए। इन पैकेटों की गहन जांच और वजन करने पर उसमें करीब 12.270 किलोग्राम चरस होने की बात सामने आई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब्त की गई इस चरस की अनुमानित कीमत करीब 30.67 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस ने इस पूरे नशीले पदार्थ को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

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समुद्री रास्ते से ड्रग्स की तस्करी होने की आशंका

प्रारंभिक जांच और सबूत सामने आने के बाद इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि चरस की यह बड़ी खेप समुद्री रास्ते से यहां लाई गई थी। हालांकि यह मादक पदार्थ किस देश या राज्य से यहां तक पहुंचाया गया, इसे किसने मंगवाया था और इस पूरे खेल के पीछे कौनसा गैंग या अवैध नेटवर्क काम कर रहा है, इस दिशा में नवा बंदर पुलिस ने सघन पूछताछ और जांच का दौर शुरू कर दिया है।

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पुलिस द्वारा जांच तेज और तटीय इलाकों में सुरक्षा सख्त

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने गोसाबारा और उसके आसपास के सभी इलाकों में भी जांच तेज कर दी है। उपलब्ध सबूतों और तकनीकी निगरानी (जैसे मोबाइल लोकेशन आदि) के आधार पर इस पूरी घटना की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उच्च पुलिस अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में तट पर इस तरह की किसी भी अवैध या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को रोकने के लिए पूरे तटीय क्षेत्र में सुरक्षा और पेट्रोलिंग को और कड़ा कर दिया गया है।