Uttar Da Puttar Review: ‘परफेक्ट वास्तु’ वाले फिजिक्स प्रोफेसर की ये कहानी जीत लेगी आपका दिल, ड्रामा, कॉमेडी और ट्विस्ट से भरपूर है फिल्म

फिल्म- उत्तर दा पुत्तर

कलाकार- अन्नू कपूर, रुखसार रहमान, बृजेंद्र काला, पवन मल्होत्रा, जीवेशु अहलूवालिया, सुमित गुलाटी, राजेंद्र सेठी, नितिन अरोड़ा, वीनस सिंह, इश्तियाक खान

निर्देशक- रविंदर सिवाच

रेटिंग: 3.5/5

Uttar Da Puttar Review: अपने बेबाक बयानों से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले अभिनेता अन्नू कपूर इस बार अपनी नई हिंदी फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ के जरिए दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर करते हैं। यह एक ऐसी फैमिली एंटरटेनर है, जिसमें कॉमेडी, ड्रामा और इमोशन का बेहतरीन संतुलन देखने को मिलता है। फिल्म एक ऐसे फिजिक्स प्रोफेसर की कहानी है, जो विज्ञान पढ़ाता है लेकिन अपनी जिंदगी के हर फैसले वास्तु शास्त्र और टोटकों के हिसाब से लेता है।

फिल्म की कहानी

फिल्म की शुरुआत बेहद दिलचस्प अंदाज में होती है। प्रोफेसर साई राम टुटेजा (अन्नू कपूर) खुद को काले कपड़े में लपेटकर अपने कोचिंग सेंटर पहुंचते हैं। अंदर जाकर जैसे ही वह कपड़ा हटाते हैं, पता चलता है कि उन्होंने भीतर भी काले कपड़े ही पहन रखे हैं। वास्तु और शुभ-अशुभ में अटूट विश्वास रखने वाले प्रोफेसर की यह ड्रामेटिक एंट्री फिल्म का मूड तय कर देती है। साई राम टुटेजा अपने लिए एक “परफेक्ट वास्तु” वाला घर ढूंढ़ते हैं। नया घर मिलने पर वह अपने ससुर और साले को पूरे विश्वास से समझाते हैं कि सही वास्तु ही जीवन की हर समस्या का समाधान है। लेकिन तभी छत का पुराना पंखा गिर पड़ता है और दोनों घायल हो जाते हैं। यह दृश्य खूब हंसी बटोरता है।

इस घटना के बाद उनकी पत्नी गिन्नी (रुखसार रहमान) नाराज़ होकर घर छोड़ देती हैं। पत्नी को वापस लाने और अपनी जिंदगी फिर से संवारने के लिए प्रोफेसर अपने दोस्त मन्नू (बृजेंद्र काला) के साथ परफेक्ट वास्तु की तलाश में निकल पड़ते हैं। कहानी में आगे नेक चड्ढा (पवन मल्होत्रा), उनके सहायक चोपड़ा (नितिन अरोड़ा), वास्तुकार वर्मा (इश्तियाक खान) और एस.बी. सिद्धू (जीवेशु अहलूवालिया) जैसे कई अतरंगी किरदार जुड़ते हैं। इनके आने से कहानी में लगातार मजेदार मोड़ और हास्यास्पद परिस्थितियां पैदा होती हैं, जो दर्शकों का मनोरंजन बनाए रखती हैं।

फिल्म का निर्देशन

निर्देशक रविंदर सिवाच की यह पहली फिल्म है, लेकिन उनका निर्देशन किसी अनुभवी फिल्मकार की तरह आत्मविश्वास से भरा हुआ है। फिल्म बिना समय गंवाए सीधे अपने मूल कथानक पर आती है और पहले ही सीन से दर्शकों को अपने साथ जोड़ लेती है। लेखक संदीप कपूर की कहानी में दिल्ली के चिर-परिचित किरदार, रोजमर्रा की जिंदगी से निकली घटनाएं और दिलचस्प घुमाव हैं। यही वजह है कि कहानी मनोरंजक होने के साथ-साथ बेहद रिलेटेबल भी लगती है। निर्देशक इन किरदारों और परिस्थितियों को बड़े सहज और मनोरंजक अंदाज में पर्दे पर उतारते हैं। एक फिजिक्स प्रोफेसर का वास्तु और तंत्र-मंत्र पर अंधविश्वास फिल्म की सबसे बड़ी नॉवेल्टी बनकर सामने आता है, जिसे निर्देशक पूरी नाटकीयता के साथ विश्वसनीय बना देते हैं। कॉमेडी और ड्रामा का संतुलन भी पूरी फिल्म में बरकरार रहता है।

परफॉर्मेंस

अन्नू कपूर पूरी फिल्म की ये फिल्म खास हैं। प्रोफेसर साई राम टुटेजा के किरदार में उन्होंने शानदार काम किया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग कमाल की है, वहीं इमोशनल सीन्स में भी वह उतने ही प्रभावशाली नजर आते हैं। रुखसार रहमान ने गिन्नी के किरदार को बेहद सहजता और सादगी से निभाया है। पवन मल्होत्रा हर फिल्म की तरह इस बार भी अपने अभिनय से चौंकाते हैं। नेक चड्ढा के रूप में उनका किरदार हंसी के कई मौके लेकर आता है। इश्तियाक खान वास्तुकार वर्मा के रूप में सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद गहरी छाप छोड़ते हैं। नितिन अरोड़ा सरकारी कर्मचारी चोपड़ा के किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं। फिल्म का सबसे अतरंगी किरदार एस.बी. सिद्धू है, जिसे जीवेशु अहलूवालिया ने पूरे आत्मविश्वास के साथ निभाया है। उनका अभिनय फिल्म में अलग ही रंग भर देता है। राजेंद्र सेठी आनंद राज आनंद के रूप में प्रभावशाली हैं, जबकि सुमित गुलाटी (ज्ञान चंद उर्फ जी.सी.) भी अपने किरदार में प्रभावित करते हैं।

फिल्म देखें या नहीं

‘उत्तर दा पुत्तर’ सिर्फ हंसाने वाली फिल्म नहीं है, बल्कि यह मनोरंजन के बीच एक दिलचस्प सवाल का जवाब भी देती है—आखिर जिंदगी में कर्म बड़ा होता है या किस्मत? कॉमेडी, ड्रामा और इमोशन से भरपूर यह फिल्म अपने अतरंगी किरदारों और दिल्ली के देसी फ्लेवर की वजह से अलग पहचान बनाती है। फिल्म के सभी प्रमुख किरदार अच्छी तरह लिखे गए हैं और कलाकारों ने उन्हें पूरी ईमानदारी से निभाया है। यही वजह है कि दर्शक कहानी से जुड़ता भी है और पूरे समय मुस्कुराता भी रहता है।फिल्म की कहानी का कॉमिक सीक्वेंस को और प्रभावी बनाता है। दिल्ली का लोकल फ्लेवर और किरदारों की भाषा फिल्म को और अधिक वास्तविक बनाती है।

अगर आप ऐसी साफ-सुथरी फैमिली एंटरटेनर देखना चाहते हैं, जिसमें हंसी भी हो, दिल को छू लेने वाले पल भी हों और अंत में एक पॉजिटिव मैसेज भी मिले, तो ‘उत्तर दा पुत्तर’ आपके लिए एक बढ़िया विकल्प है। खासतौर पर अन्नू कपूर और पवन मल्होत्रा का शानदार अभिनय इस फिल्म को लंबे समय तक यादगार बनाता है।

Dulhaniya Le Aaeegi: कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा में पहचान बना रहीं खुशाली कुमार, ‘दुल्हनिया ले आएगी’ में बिखेरेंगी जलवा

Dulhaniya Le Aaeegi: खुशाली कुमार पिछले कुछ वर्षों से ऐसी फिल्मों और प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन रही हैं, जो सिर्फ उनके सरनेम की वजह से नहीं, बल्कि अपनी मजबूत कहानी और दमदार कंटेंट के कारण चर्चा में रहे हैं। उन्होंने लगातार कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों, स्वतंत्र (इंडिपेंडेंट) प्रोडक्शंस और नए फिल्मकारों के साथ काम करते हुए बतौर अभिनेत्री अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश की है।

हाल ही में भारत की सबसे ज्यादा रेटिंग पाने वाली ओटीटी सीरीज ‘सपने Vs एवरीवन 2’ में उनकी मौजूदगी ने दर्शकों को चौंका दिया। इस सीरीज में उनके अभिनय को ईमानदार और प्रभावशाली बताया गया, वहीं दर्शकों को उनका एक अलग पक्ष देखने का मौका मिला। इस प्रोजेक्ट ने यह भी दिखाया कि खुशाली पारंपरिक कमर्शियल फिल्मों तक सीमित रहने के बजाय मजबूत कहानी और बेहतरीन कंटेंट वाले प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दे रही हैं।

अब खुशाली अपनी अगली फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ में नजर आने वाली हैं। यह एक कॉमेडी फिल्म है, जिसका निर्देशन आकाश आदित्य लांबा ने किया है और इसे एक इंडिपेंडेंट प्रोडक्शन हाउस ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में खुशाली के साथ दिग्गज अभिनेता महेश मांजरेकर और पियूष मिश्रा भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे। अनुभवी और समीक्षकों द्वारा सराहे गए कलाकारों के साथ काम करना खुशाली के सोच-समझकर किए गए फिल्मी चयन को दर्शाता है।

खुशाली ऐसे समय में अलग तरह के प्रोजेक्ट्स चुन रही हैं, जब कंटेंट-आधारित फिल्मों को दर्शकों का अच्छा समर्थन मिल रहा है। उनकी फिल्मोग्राफी लगातार अलग-अलग शैलियों में विस्तार कर रही है। उन्होंने आर. माधवन के साथ थ्रिलर फिल्म ‘धोखा: राउंड डी कॉर्नर’, प्रतीक गांधी के साथ सामाजिक ड्रामा ‘डेढ़ बीघा ज़मीन’, चर्चित ओटीटी सीरीज ‘सपने Vs एवरीवन 2’ और अब कॉमेडी फिल्म ‘दुल्हनिया ले आएगी’ के जरिए अपने अभिनय के अलग-अलग रंग पेश किए हैं।

‘दुल्हनिया ले आएगी’ खुशाली कुमार की फिल्मोग्राफी में एक और नया अध्याय जोड़ने जा रही है। अलग-अलग जॉनर और परफॉर्मेंस-ड्रिवन कहानियों की तलाश में आगे बढ़ रहीं खुशाली की यह फिल्म 24 जुलाई, यानी इस शुक्रवार को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

Jana Nayagan: तमिलनाडु में विजय की ‘जना नायकन’ को लेकर लोग हुए क्रेजी, हाउसफुल चल रहे शोज

Jana Nayagan: चेन्नई में गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री सी. विजय जोसेफ की फिल्म ‘जना नायकन’ का ‘पहला शो’ देखने के लिए एक्साइटेज फैंस और TVK के जोशीले कार्यकर्ता सिनेमाघरों में उमड़ पड़े और उन्होंने इस विदाई फिल्म का जश्न अलग-अलग तरीकों से मनाया।

कई सिनेमाघरों में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान आतिशबाजी, म्यूजिक, ड्रोन लाइट शो और बड़े केक काटे गए। जोश से भरे फैंस नाच-गा रहे थे और कई लोगों ने कहा कि वे खुश भी हैं और दुखी भी। खुश इसलिए क्योंकि फिल्म काफी देरी के बाद रिलीज हो रही है और दुखी इसलिए क्योंकि ‘जन नायकन’ विजय की आखिरी फिल्म होगी।

रोहिणी सिल्वरस्क्रीन, वुडलैंड्स और कैसीनो जैसे सिनेमाघरों में ‘जना नायकन’ के बड़े-बड़े होर्डिंग देखे जा सकते थे। चेन्नई में लगे एक होर्डिंग में विजय को तमिलनाडु का “एकमात्र पावर सेंटर” बताया गया। इसके अलावा, पूरे राज्य में विजय की “शान” की तारीफ करते हुए दीवार पर पोस्टर लगाए गए और उनके कई फैंस और समर्थकों ने फिल्म की जबरदस्त सफलता के लिए प्रार्थना करने के लिए मशहूर मंदिरों का दौरा किया।

चेन्नई के पास एक शहर में फिल्म के स्वागत के लिए रथ जैसा वाहन तैयार किया गया था और एक फैन ने अपनी लग्ज़री कार पर विजय की बड़ी-बड़ी तस्वीरें बनवाकर सबका ध्यान खींचा। कई फैंस ‘थंगमे थलापति’ लिखी टी-शर्ट पहने हुए थे। जश्न के साथ-साथ टिकट की ज़्यादा कीमत के आरोप भी सामने आए और टिकट के दाम बढ़ने को लेकर बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।

उम्मीद है कि सीनियर मिनिस्टर एन. आनंद और प्रोड्यूसर वेंकट नारायण शहर में यह फिल्म देखेंगे। फैंस अपने पसंदीदा स्टार विजय का ज़बरदस्त अंदाज़ और तीखे डायलॉग देखने के लिए बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं, जिसमें वे अच्छी राजनीति के ज़रिए अच्छा शासन देने और देश की सेवा करने की बात करते हैं।

यह फिल्म तमिलनाडु के 1,000 से ज़्यादा सिनेमाघरों में से लगभग 950 में दिखाई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री विजय ने बुधवार शाम को कुछ अधिकारियों के साथ यहां फिल्म की एक स्पेशल स्क्रीनिंग देखी।

3 Idiots Re-Release: क्या सिनेमाघरों में री-रिलीज आमिर खान की ‘3 इडियट्स’? मेकर्स ने दी ये जानकारी

सोशल मीडिया पर इन दिनों आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ की काफी चर्चा हैं। सोशल मीडिया पर खबर फैली कि आमिर खान की सुपरहिट फिल्म ‘3 इडियट्स’ 4 सितंबर को सिनेमाघरों में री-रिलीज होगी। वहीं अब री-रीलीज की खबरों पर फिल्म के मेकर्स ने अपना रिएक्शन दिया है। प्रोडक्शन हाउस ने साफ किया है कि फिलहाल फिल्म की री-रिलीज को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है और सोशल मीडिया पर चल रही खबरें पूरी तरह से गलत हैं।

प्रोडक्शन हाउस ने अपने ऑफिशियल बयान में मीडिया और दर्शकों से अपील की है कि वे फिल्म से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल उनके आधिकारिक और वेरिफाइड प्लेटफॉर्म पर जारी अपडेट पर ही भरोसा करें। प्रोडक्शन हाउस ने कहा कि अफवाहों या बिना पुष्टि वाली खबरों पर विश्वास न करें।

मेकर्स ने दिया बयान

प्रोडक्शन हाउस की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “हाल ही में आई उन मीडिया रिपोर्ट्स के संबंध में, जिनमें दावा किया गया है कि ‘3 इडियट्स’ 4 सितंबर को दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज होगी, विधु विनोद चोपड़ा फिल्म्स स्पष्ट करना चाहता है कि ये खबरें पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। हम मीडिया और सभी प्रशंसकों से अनुरोध करते हैं कि वे केवल हमारे सत्यापित आधिकारिक चैनलों पर जारी की गई घोषणाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही, मीडिया संस्थानों से भी अपील है कि बिना पुष्टि की गई जानकारी को प्रकाशित या प्रसारित करने से बचें।”

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कब रिलीज हुई थी फिल्म

साल 2009 में रिलीज हुई ‘3 इडियट्स’ बॉलीवुड की सबसे सफल फिल्मों में गिनी जाती है। राजकुमार हिरानी के निर्देशन और विधु विनोद चोपड़ा के निर्माण में बनी इस फिल्म में आमिर खान, आर. माधवन, शरमन जोशी, करीना कपूर खान और बोमन ईरानी ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म तीन इंजीनियरिंग छात्रों की दोस्ती, कॉलेज जीवन और पढ़ाई के दबाव के बीच उनके संघर्ष और सपनों की कहानी दिखाती है, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था।

वांगचुक से इंस्पायर नहीं है फिल्म

आमिर खान ने ब्रिटिश फिल्म इंस्टीट्यूट (BFI) में आयोजित एक सवाल-जवाब सत्र के दौरान इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “जब हम ‘3 इडियट्स’ बना रहे थे, तब मैं मिस्टर सोनम के बारे में नहीं जानता था। मैंने हाल ही में चतुर का एक वीडियो देखा, जिसमें उन्होंने यह बात कही, लेकिन यह सही नहीं है।” आमिर ने बताया कि जब फिल्म की कहानी लिखी जा रही थी, तब न निर्देशक राजकुमार हिरानी और न ही लेखक अभिजात जोशी सोनम वांगचुक को जानते थे।

Zaid Darbar: ‘तुझे मेरी चीज पसंद आती है…’, कुशाल टंडन के कमेंट के बाद जैद दरबार ने गौहर खान से मांगी माफी

‘नारायण मूर्ति की बात सुनकर ज्यादा घंटे किया ऑफिस में काम, फिर भी 5% मिली हाइक, डेलॉइट के कर्मचारी ने 10 साल बाद छोड़ी नौकरी

लगभग एक दशक तक, अर्जुन सिंह (पहचान छिपाने के लिए नाम बदला गया है) को लगता था कि वे अपना पूरा करियर डेलॉइट (Deloitte) में ही बिताएंगे। हैदराबाद के रहने वाले इस टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल ने कॉलेज से निकलते ही इस बड़ी कंसल्टिंग कंपनी में नौकरी शुरू की थी। वे कंपनी के उस मज़बूत लॉन्ग-टर्म विज़न से सहमत थे, जिसमें कड़ी मेहनत करके आगे बढ़ने की बात कही जाती है।

लेकिन कंपनी में 10 साल बिताने के बाद, यह सीनियर कंसल्टेंट बुरी तरह थक-हारकर (बर्नआउट की स्थिति में) और सिर्फ़ पांच प्रतिशत सैलरी बढ़ोतरी के साथ नौकरी छोड़कर चला गया। अपने फ़ैसले के बारे में बात करते हुए, 30-35 साल की उम्र के इस टेक प्रोफेशनल ने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया कि बर्नआउट, उम्मीदों का असलियत से दूर होना और मेहनत व इनाम के बीच बढ़ती दूरी ने उन्हें नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर दिया, जबकि वे सालों से कंपनी के प्रति वफ़ादार रहे थे।

सिंह ने कहा, “मैंने नारायण मूर्ति की कही बातों से भी ज़्यादा घंटे काम किया, फिर भी मेरा प्रमोशन नहीं हुआ और सैलरी में सिर्फ़ पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी मिली।” उन्होंने इन्फोसिस के को-फ़ाउंडर का ज़िक्र किया, जिनके 70 घंटे के वर्क-वीक (हफ़्ते में 70 घंटे काम) वाले बयान ने वर्क कल्चर पर देशव्यापी बहस छेड़ दी थी। उन्होंने आगे बताया कि कई बार वे हफ़्ते में 74 घंटे तक काम करते थे।

कई प्रोफेशनल्स के उलट, जो कुछ सालों में कंपनियां बदलते रहते हैं, सिंह ने कहा कि उन्होंने कभी डेलॉइट (Deloitte) छोड़ने के बारे में नहीं सोचा। उन्होंने कहा, “जब आप युवा होते हैं, तो सीनियर लीडर्स को देखकर यह सोचना आसान होता है कि ‘एक दिन, मैं भी उनकी जगह हो सकता हूं।'”

सिंह के अनुसार, जब वे एक फ्रेशर के तौर पर शामिल हुए, तो डेलॉइट का पार्टनरशिप मॉडल और एक ही ऑर्गनाइज़ेशन में पूरा करियर बिताने की संभावना उन्हें काफी आकर्षक लगी। समय के साथ, सीखने के मौके, बड़े क्लाइंट प्रोजेक्ट्स, प्रमोशन और सीनियर साथियों से मिली मेंटरशिप ने उन्हें कंपनी में बने रहने के लिए काफी वजहें दीं।

उन्होंने कहा, “आप पहले ही दिन यह तय नहीं करते कि आपको कहीं 10 साल तक रहना है। आप हर साल वहां बने रहने का फैसला करते हैं।”सिंह का मानना ​​है कि कंसल्टिंग में सबसे बड़ी चुनौती ज़रूरी नहीं कि क्लाइंट का काम ही हो, बल्कि टाइट डेडलाइन, कम स्टाफ वाले प्रोजेक्ट्स और बिलिंग वाले काम के अलावा अतिरिक्त ज़िम्मेदारियों का मेल है।

उनके अनुसार, जिन प्रोजेक्ट्स के लिए असल में छह महीने में छह लोगों की ज़रूरत होती है, उनसे अब कॉम्पिटिशन के दबाव के कारण कम समय में छोटी टीमों द्वारा पूरा किए जाने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा, “अचानक छह लोगों की जगह चार लोग हो जाते हैं और समय सीमा भी पांच महीने की हो जाती है।”

हालांकि क्लाइंट के काम का अपना दबाव होता था, लेकिन सिंह ने कहा कि कर्मचारियों से इंटरनल पहलों, हायरिंग गतिविधियों, प्रपोज़ल बनाने और प्रैक्टिस-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में भी योगदान देने की उम्मीद की जाती थी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कर्मचारी पदानुक्रम (hierarchy) में ऊपर बढ़ते हैं, ऐसे कामों में भाग लेने की उम्मीद और मज़बूत होती जाती है।

सिंह ने कहा, “जैसे-जैसे आप रैंक में ऊपर बढ़ते हैं, इस तरह के ‘मुफ़्त’ काम (बिना बिलिंग वाले काम) और भी ज़्यादा होते जाते हैं।” सिंह के अनुसार, बर्नआउट (काम के तनाव से पूरी तरह थक जाने) की एक बड़ी वजह काम से अलग न हो पाना था। उन्हें याद है कि वे सोशल गैदरिंग के दौरान भी काम के फ़ोन कॉल लेते थे, कई काम के डिवाइस साथ रखते थे और ऑफ़िस के समय के बाद भी उपलब्ध रहते थे।

सिंह ने कहा कि कंसल्टिंग मॉडल अक्सर ऐसा माहौल बनाता है जहां कर्मचारियों को क्लाइंट की डेडलाइन, अंदरूनी कमिटमेंट और बिज़नेस बढ़ाने की कोशिशों के बीच लगातार तालमेल बिठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसका नतीजा यह होता है कि काम ज़िंदगी के ज़्यादातर हिस्सों पर हावी होने लगता है।

उन्होंने कहा, “आप हर समय काम में ही लगे रहते हैं।”हालांकि लंबे समय तक काम करना मुश्किल था, लेकिन सिंह ने कहा कि उन्हें ज़्यादा निराशा इस सोच से होती थी कि बहुत ज़्यादा मेहनत करने पर भी इनाम में बहुत मामूली फ़र्क ही मिलता था। उनके अनुसार, अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी में अक्सर उतनी ही बढ़ोतरी होती थी, जितनी उन साथियों की होती थी जो काम और निजी ज़िंदगी के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखते थे।

उन्होंने कहा, “इस साल लोगों की सैलरी में 5 परसेंट से भी कम बढ़ोतरी हुई।” उन्होंने यह भी कहा कि औसत और बेहतरीन परफॉर्मेंस के बीच का अंतर अक्सर बहुत कम लगता था। “जब काम की पहचान या तारीफ़ नहीं होती, तो इंसान थककर हार मान लेता है (बर्नआउट)।”

उन्होंने क्लाइंट के लिए डिटेल्ड प्रपोज़ल तैयार करने के लिए टेक्निकल स्टाफ़ पर डेलॉइट की निर्भरता की भी आलोचना की। उनका तर्क था कि इसके बजाय डेडिकेटेड सेल्स टीमों को यह काम संभालना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता।

उन्होंने कहा कि कर्मचारी अक्सर लाखों डॉलर के प्रपोज़ल तैयार करने में दिन-रात एक कर देते हैं, लेकिन उससे होने वाले फ़ायदे का कोई खास हिस्सा उन्हें नहीं मिलता। सिंह ने कहा, “बदलाव किसी एक बुरे प्रोजेक्ट या मुश्किल मैनेजर की वजह से नहीं आया। यह धीरे-धीरे हुआ।”

समय के साथ, उन्हें यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि क्या उसी रास्ते पर चलते रहने से उन्हें अपने करियर के अगले चरण में वे अनुभव मिल पाएंगे जिनकी उन्हें तलाश थी। इसके बाद सिंह हैदराबाद की एक दूसरी कंपनी में शामिल हो गए। उनके अनुसार, नई भूमिका में बेहतर सैलरी तो मिलती ही है, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी बात यह है कि उन्हें अपने समय और वर्क-लाइफ़ बैलेंस पर ज़्यादा कंट्रोल मिलता है।

पीछे मुड़कर देखने पर, उन्हें डेलॉइट में बिताए अपने दस सालों का कोई अफ़सोस नहीं है। “बल्कि, उन दस सालों ने मुझे अनुभव, आत्मविश्वास और नज़रिया दिया, जिससे मुझे यह समझ आया कि अब एक अलग रास्ता चुनने का सही समय आ गया है।” सिंह के लिए, नौकरी छोड़ने का मतलब किसी सपने को छोड़ना नहीं था। इसका मतलब यह समझना था कि 22 साल की उम्र में सफलता की जो परिभाषा उनके मन में थी, वह 35 साल की उम्र में वैसी नहीं रही।

Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पहुंच प्रदर्शन में शामिल हुईं शबाना आजमी, बोलीं- जावेद अख्तर ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

Jantar Mantar Protest: दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजमी रविवार, 19 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन प्रदर्शनकारियों का समर्थन करने पहुंचीं जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने और जावेद अख्तर ने समाधान खोजने के लिए बातचीत शुरू करने के मकसद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखा था। हालांकि, उन्हें अभी तक प्रधानमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है।

शबाना आजमी ने द रेड माइक से कहा, “जब पानी हद से गुज़र जाता है, जब भी बोलती हूं। हर छोटी बड़ी बात पर मैं नहीं बोलती हूं, क्योंकि अब मेरी 75 साल की उम्र हो गई है, मैं ये सब देख चुकी हूं… तो मैं बहुत, जब मुझे अंदर से कोई चीज़ झंझोड़ती है, तब मैं बोलती हूं।” यहां उनकी बातचीत पर एक नजर डालें:

उन्होंने आगे कहा, “मैंने जो है, प्रधानमंत्री को खत लिखा। जावेद साहब ने खत लिखा कि देखिए आप सिर्फ एक डायलॉग शुरू करिए, प्रेस के पास हम नहीं जा रहे। हम इसको एक पब्लिक मैटर नहीं बनाएंगे, हम सिर्फ राज्यसभा के एक्स-संसद हैं, तो हम उससे लिख रहे हैं, बात तो सुनिए। पहले तो।” हमें स्वीकारोक्ति आई कि 2 दिन मैं आपका जवाब मिलेगा, 2 दिन मैं नहीं आया, 3 दिन मैं नहीं आया, 4 दिन मैं नहीं आया तो फिर पांचवे दिन हम यहां आ गए।’

शबाना का विरोध प्रदर्शन में शामिल होना, क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के समर्थन में उनके सार्वजनिक बयान के कुछ दिनों बाद हुआ। सोनम वांगचुक ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व वाले आंदोलन में शामिल हुए थे और 28 जून से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। अपनी यात्रा के दौरान, शबाना ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के संस्थापक अभिजीत दिपके से मुलाकात की, जो खुद भी अभी भूख हड़ताल पर हैं।

शबाना आज़मी के अलावा, प्रकाश राज और पूनम पांडे जैसी हस्तियां भी जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में देखी गईं। इससे पहले, सोनी राज़दान, ज़ीनत अमान, अभय देओल, सोनाक्षी सिन्हा, ओमी वैद्य, इमरान खान, नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह ने सोशल मीडिया के ज़रिए सोनम वांगचुक और प्रदर्शनकारियों की भूख हड़ताल का समर्थन किया था।

Lock Upp 2: ‘मेरे पापा भी मुझे इतना किस नहीं करते’, राम कपूर के ऑन-कैमरा किस करने पर भड़की श्रेया कालरा

Lock Upp 2: ‘लॉक अप सच या सजा’ में हुई एक तीखी बहस ने कंटेस्टेंट श्रेया कालरा और राम कपूर को चर्चा में ला दिया है। हाल ही में हुए लीडरशिप टास्क के बाद, श्रेया ने अपने साथी कंटेस्टेंट पर पर्सनल बाउंड्री पार करने का आरोप लगाया और शिल्पा शिंदे से बात करते हुए कड़ी बातें कहीं।

यह बात तब सामने आई जब कंटेस्टेंट्स ने अपने टीम लीडर्स को चुनने के लिए वोट किया। शिवांगी जोशी को सबसे ज्यादा वोट मिले और वह टीम लीडर बनीं, जबकि आकांक्षा चमोला, जिन्हें दूसरे नंबर पर सबसे ज़्यादा वोट मिले, उन्हें दूसरा लीडर चुना गया। बाद में, लॉकर रूम एरिया में शिल्पा से बात करते हुए, श्रेया ने शिवांगी के टास्क के दौरान राम कपूर से जुड़ी एक घटना का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, “जब शिवांगी अपना टास्क कर रही थीं, तो राम सर उनके बहुत करीब आ गए। तब हर्षद ने कहा, ‘इतने करीब मत आइए’। जैसे ही वह पीछे हटे, उन्होंने सॉरी कहा। कैसा सॉरी? वह आदमी आता है और थूकता है। उनके मुंह पर कहो। उन्होंने सचमुच हर जगह थूक दिया था।”

श्रेया ने निजी सीमाओं को बनाए रखने के बारे में आगे बात की और आरोप लगाया कि राम ने उन्हें असहज महसूस कराया। “कुछ सीमाएं तो रखनी चाहिए। इस बार, अगर वह मुझे किस की कोशिश करेगा, तो मैं उसका मुंह पकड़ लूंगी और कहूंगी कि मेरे पिता भी मुझे इतना नहीं किस, अब मत किस करो। मैंने तुम्हें तीन बार बचाया है, और तुम एक उंगली भी नहीं उठाते। मुझे उसकी सीनियर्टी पर शर्म आती है। मैं ऐसे सीनियर्स पर थूकती हूं।”

जो लोग नहीं जानते, उन्हें बता दें कि एक एपिसोड में, श्रेया के टास्क जीतने और उस हफ्ते के लिए राम को सुरक्षित करने के बाद, राम ने उसके गाल पर किस किया था। ‘लॉक अप सच या सज़ा’ को अभी फराह खान और रितेश देशमुख होस्ट कर रहे हैं। कंटेस्टेंट्स की लिस्ट में आकांक्षा चौधरी, सुनीता आहूजा, राम कपूर, श्रेया कालरा, शिवांगी जोशी, हर्षद चोपड़ा, सूफी मोतीवाला, धीरज धूपर और वरुण यादव शामिल हैं।

‘लॉक अप’ का पहला सीज़न 2022 में शुरू हुआ था, जिसमें कंगना रनौत होस्ट थीं और करण कुंद्रा जेलर थे। मुनव्वर फारुकी इस पहले सीज़न के विनर बने थे। दूसरे सीज़न में 14 कंटेस्टेंट्स, दो जेलर और एक लॉक-अप है, और यह मुकाबला छह हफ़्ते तक चलेगा। कंटेस्टेंट्स को गेम में करेंसी कमाने के लिए टास्क पूरे करने होते हैं; इस करेंसी का इस्तेमाल खाना, ज़रूरी सामान और दूसरी सुविधाओं जैसी बेसिक चीज़ें पाने के लिए किया जाता है।

Prabhas: ‘कल्कि 2898 AD’ की जीत पर खुशी से झूम उठे प्रभास, जानें क्या बोले एक्टर

Prabhas: पूरे भारत के सुपरस्टार प्रभास एक बड़ी कामयाबी का जश्न मना रहे हैं क्योंकि उनकी ब्लॉकबस्टर फिल्म कल्कि 2898 AD को 72वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में सम्मानित किया गया है। फिल्म को बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट का प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिला, जिससे इसकी शानदार यात्रा में एक और मील का पत्थर जुड़ गया और हाल के भारतीय सिनेमा में सबसे बड़े सिनेमाई तमाशों में से एक के रूप में इसकी जगह पक्की हो गई।

इस प्रतिष्ठित सम्मान पर रिएक्ट करते हुए, प्रभास ने अपने लाखों फैंस के साथ ऑफिशियल अवॉर्ड अनाउंसमेंट पोस्टर शेयर करने के लिए अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज का सहारा लिया। एक्टर ने इस पहचान पर अपनी खुशी और गर्व जताया, और फिल्म के पीछे की पूरी टीम के साथ इस कामयाबी का जश्न मनाया। पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “पूरे Kalki2898AD परिवार के लिए गर्व की बात….” उनके दिल से निकले मैसेज में इस बड़े प्रोजेक्ट को असलियत में बदलने के लिए की गई सबकी कोशिश और इंडियन सिनेमा के सबसे बड़े अवॉर्ड में से एक मिलने की खुशी झलक रही थी।

रिलीज होने के बाद से, प्रभास की कल्कि 2898 AD ने अपने बड़े स्केल, शानदार विज़ुअल्स और ज़बरदस्त कहानी से दर्शकों का दिल जीत लिया है। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर ज़बरदस्त सफल रही और इंडियन फ़िल्ममेकिंग की सीमाओं को आगे बढ़ाने और एक ज़बरदस्त सिनेमाई अनुभव देने के लिए इसे बहुत सराहा गया।

नेशनल अवॉर्ड जीतना फ़िल्म की बहुत ज़्यादा तारीफ़ और लंबे समय तक चलने वाले असर का एक और सबूत है, जिसने अपनी पीढ़ी की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों में से एक के तौर पर इसकी पहचान को और मज़बूत किया है।

यह पहचान प्रभास के शानदार करियर में एक और गर्व की बात है। बिना किसी शक के पूरे भारत के सुपरस्टार माने जाने वाले प्रभास ने लगातार इंडियन सिनेमा की कुछ सबसे बड़ी फ़िल्मों में काम किया है, और अलग-अलग भाषाओं और इलाकों के दर्शकों से बहुत प्यार कमाया है। बॉक्स ऑफिस पर नए बेंचमार्क सेट करने से लेकर बड़े नामों वाली, हाई-कॉन्सेप्ट एंटरटेनर फिल्मों का हिस्सा बनने तक, वह अपने हर प्रोजेक्ट के साथ इंडियन सिनेमा के लेवल को नया आयाम देते रहते हैं।

कल्कि 2898 AD ने अब अपनी कामयाबियों की लंबी लिस्ट में एक बड़ा नेशनल अवॉर्ड जोड़ लिया है, और फिल्म की सक्सेस स्टोरी एक और ऊंचे मुकाम पर पहुंच गई है। जैसे-जैसे यह बिना किसी शक के पैन-इंडिया सुपरस्टार नई ऊंचाइयां छू रहा है, दर्शकों के पास उनकी आने वाली रोमांचक फिल्मों की लिस्ट में देखने के लिए बहुत कुछ है, जिसमें फौजी, स्पिरिट, सालार पार्ट 2: शौर्यंगा पर्वम, और कल्कि 2898 AD पार्ट 2 शामिल हैं। हर प्रोजेक्ट से पूरे देश में बेसब्री से इंतज़ार हो रहा है, प्रभास इंडियन सिनेमा के सबसे बड़े और सबसे मशहूर सितारों में से एक के तौर पर अपनी जगह मजबूत करते जा रहे हैं।

Anuradha Paudwal: वे समाज में क्या योगदान दे रहे हैं? अनुराधा पौडवाल ने शादी पर बात करते हुए LGBTQ समुदाय पर उठाए सवाल

Anuradha Paudwal: दिग्गज गायिका अनुराधा पौडवाल ने LGBTQ समुदाय के बारे में कमेंट करके विवाद खड़ा कर दिया है। गायिका एक पॉडकास्ट पर शामिल हुई थीं, जहां उनसे शादी और परिवार के ढांचे के बारे में बदलती सोच पर उनकी राय पूछी गई। शादी की “पवित्रता” पर बात करते हुए, उन्होंने समाज में LGBTQ लोगों के योगदान पर सवाल उठाए।

पॉडकास्ट के दौरान अनुराधा पौडवाल ने कहा, “शादी में अब पवित्रता नहीं रही। इसकी वजह LGBTQ समुदाय को दिए गए अधिकार हैं। वे समाज में क्या योगदान दे रहे हैं? मैं जानना चाहती हूं। वे किस तरह से योगदान दे रहे हैं?” पद्म श्री पुरस्कार विजेता ने कहा कि पारंपरिक रूप से, एक पुरुष और महिला के बीच रिश्ते, शादी और परिवार शुरू करने को ही सामान्य माना जाता था। LGBTQ रिश्तों का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने सवाल किया कि वे समाज की भलाई में कैसे योगदान देते हैं।

सिंगर ने आगे कहा- जब तक लड़का-लड़की शादी करके परिवार शुरू करते हैं, तब तक तो सब ठीक है। वे सही तरीके से ऐसा कर रहे हैं। लेकिन LGBTQ समुदाय के मामले में… मैं कुछ-कुछ दिनों में ऐसी चीजें देखती रहती हूं। इससे समाज के भले में क्या योगदान मिल रहा है?।

इसी बातचीत के दौरान, अनुराधा पौडवाल ने तलाक के बढ़ते मामलों और बच्चों पर उनके असर के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि तलाक के कुछ मामले सालों तक चलते हैं और सवाल उठाया कि क्या इसमें शामिल बच्चों पर पड़ने वाले भावनात्मक असर पर पर्याप्त ध्यान दिया जाता है।

अनुराधा पौडवाल ने कहा कि तलाक के ऐसे मामले भी हैं जो 12 साल से चल रहे हैं, और उनके बच्चे भी हैं। क्या किसी ने सोचा है कि बच्चे किस दौर से गुजर रहे हैं? बच्चे देखते हैं और सीखते हैं।

सिंगर ने भारत में लिव-इन रिलेशनशिप के बढ़ते चलन को बदलते पारिवारिक ढांचे से भी जोड़ा और कहा कि LGBTQ+ अधिकारों पर चर्चा करने से पहले ऐसे मुद्दों पर बात होनी चाहिए। अपनी टिप्पणियों पर आलोचना का सामना करने के बाद, अनुराधा पौडवाल ने इंस्टाग्राम पर एक बयान जारी किया।

उन्होंने कहा कि उनकी बातों को संदर्भ से हटकर पेश किया गया और सनसनीखेज बना दिया गया। उन्होंने कहा, “मुझ समेत हर नागरिक यह समझता है कि इस दुनिया में आगे बढ़ने और नेतृत्व करने के लिए शिक्षित होना जरूरी है। मैं हमेशा इस बात का समर्थन करती हूं। इस देश में हम सभी को सम्मानपूर्वक अपनी राय रखने की आजादी है।”

Salman Khan: क्या उनकी तबीयत ठीक नहीं है ? सलमान खान का हाल देख फैंस हुए परेशान

Salman Khan: मुंबई में सुपरस्टार सलमान खान के हालिया पब्लिक अपीयरेंस ने फैंस को चिंता में डाल दिया है। एक्टर का काफी दुबला-पतला शरीर ऑनलाइन चर्चा का मुख्य विषय बन गया है। जब उनके बाहर निकलने के वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं, तो कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने एक्टर की सेहत को लेकर चिंता जताई। बहुत से लोग यह सोच रहे हैं कि उनका वज़न इतना कम क्यों हो गया है और उम्मीद कर रहे हैं कि वे ठीक हों।

शुक्रवार को सलमान ने स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) के ऑफिस का दौरा किया, जहां उन्होंने अथॉरिटी के अत्याधुनिक डेटा कलेक्शन और वेरिफिकेशन सपोर्ट सेंटर (IT सर्वर रूम) का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम के दौरान, एक्टर ने लाभार्थियों को घरों की चाबियां भी सौंपीं।

सोशल मीडिया पर सलमान के दौरे के कई वीडियो सामने आए, लेकिन उनका लुक तेज़ी से चर्चा का विषय बन गया। एक्टर के शरीर की बनावट देखकर फैंस और शुभचिंतकों ने चिंता ज़ाहिर की। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर चिंता जताते हुए पूछा कि क्या उनकी सेहत ठीक है।

एक ने लिखा, “वह बीमार लग रहे हैं… भगवान आपका भला करे”, वहीं दूसरे ने कहा, “वह बीमार लग रहे हैं, मुझे लगता है कि उन्हें कोई हेल्थ प्रॉब्लम है”। एक ने पूछा, “मेरे किंग को क्या हुआ है?” “सलमान खान को क्या हो गया?? पहले तो मुझे लगा कि यह वो नहीं हैं, लेकिन मैंने वहां शेरा को भी देखा। उनकी उम्र धर्मेंद्र जैसी लग रही है,”।

एक परेशान फैन ने लिखा, “यकीन नहीं होता कि ये सलमान खान हैं,” और एक ने पूछा, “क्या सलमान खान और उनकी सेहत सब ठीक है..?” एक ने हैरानी जताते हुए कहा, “इसे देखकर सच में दुख होता है। आप साफ देख सकते हैं कि उनकी आंखों में कितनी थकान और अस्वस्थता दिख रही है। फिल्मों में तो भाई अकेले 50 लोगों से भिड़ जाते हैं, लेकिन अभी सलमान को देखिए, उनका वो जलवा पूरी तरह गायब हो गया है और साफ दिख रहा है कि उनकी सेहत पर असर पड़ रहा है। सलमान खान को क्या हुआ है? क्या उन्हें कोई बीमारी है?”

एक ने लिखा, “क्या ये सच में सलमान खान हैं? क्या वो ठीक हैं? ऐसा तो नहीं लग रहा।” दूसरे ने लिखा, “दोस्तों, सलमान खान को क्या हुआ है?” एक ने लिखा, “बस उनके चेहरे को देखिए, वो किसी दादाजी जैसे लग रहे हैं। वो ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं।” वहीं एक और ने पूछा, “सलमान खान को क्या हुआ है? भाई सच में 80 साल के बुज़ुर्ग जैसे लग रहे हैं।”

हालांकि, कुछ फ़ैन्स उनके बचाव में भी आए और लिखा, “किसी भारतीय फ़िल्म सुपरस्टार के लिए सबके सामने अपनी उम्र को ज़ाहिर करना बहुत हिम्मत का काम है। रजनीकांत ने ऐसा किया था। बॉलीवुड में कैमरे के सामने अपनी उम्र को शालीनता से स्वीकार करने की हिम्मत दिखाने के लिए सलमान खान बहुत सम्मान के हकदार हैं।”

एक ने लिखा, “बॉलीवुड सेलेब्स अपनी कमियों को छिपाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं, और यहाँ सलमान खान एक पब्लिक इवेंट में 60 साल के व्यक्ति जैसे दिख रहे हैं। वो ऐसे इसलिए आए क्योंकि या तो उन्होंने अपनी उम्र को शालीनता से स्वीकार कर लिया है या फिर उनके अंदर कुछ गड़बड़ है। मुझे यकीन है कि उनकी PR टीम ने उन्हें ऐसा न करने की सलाह दी होगी।”

सलमान जल्द ही ‘मातृभूमि’ में नज़र आएंगे, जिसमें बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। मार्च तक इस फ़िल्म का नाम ‘बैटल ऑफ़ गलवान’ था और कहा जा रहा था कि यह गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुई असल झड़प पर आधारित है। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट ने एक अलग मोड़ ले लिया है – इसका नाम बदल दिया गया है, चीन और गलवान घाटी के ज़िक्र को हटा दिया गया है, और कहा जा रहा है कि टीम बड़े पैमाने पर दोबारा शूटिंग कर रही है।

सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान द्वारा प्रोड्यूस और अपूर्व लाखिया द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मातृभूमि’ में सलमान एक इंडियन आर्मी कर्नल के रोल में हैं। इसमें चित्रांगदा सिंह भी हैं। अभी तक इसकी रिलीज़ डेट का ऐलान नहीं किया गया है।

हाल ही में, कई अफ़वाहों और बिना पुष्टि वाली खबरों में दावा किया गया था कि ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ को CBFC के साथ दिक्कतों का सामना करना पड़ा है, और अब यह फिल्म अनिश्चित काल के लिए टल सकती है या इसे रद्द भी किया जा सकता है। हाल ही में, सलमान खान फिल्म्स ने ऐसी सभी खबरों को खारिज करते हुए इन अटकलों को “गलत” और “पूरी तरह से बेबुनियाद” बताया। इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक बयान में, प्रोडक्शन बैनर ने साफ़ किया कि फिल्म को अभी तक सर्टिफिकेशन के लिए CBFC के पास नहीं भेजा गया है, इसलिए सर्टिफिकेशन में किसी भी तरह की आपत्ति या देरी की खबरें गलत हैं। अभी तक इसकी रिलीज़ डेट का ऐलान नहीं किया गया है।

उन्होंने नयनतारा के साथ अपनी आने वाली फ़िल्म के लिए ईद 2027 की तारीख़ भी तय कर ली है। इस फ़िल्म का नाम अभी तय नहीं हुआ है और फ़िलहाल इसे SVC63 कहा जा रहा है; इसे वामशी पैदिपल्ली डायरेक्ट करेंगे। एक्टर को हाल ही में ‘राजा शिवाजी’ में जीवा महाला के कैमियो रोल में देखा गया था, और सोशल मीडिया यूज़र्स को उनका ज़बरदस्त योद्धा वाला अवतार बहुत पसंद आया। ‘राजा शिवाजी’ में रितेश देशमुख और जेनेलिया देशमुख भी थे।