निठारी कांड में बरी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की आत्महत्या

देशभर में बहुचर्चित निठारी कांड बरी सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार को हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में चाय की दुकान के भीतर फंदे से लटका मिला।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कोली पिछले कुछ दिनों से यहां सप्त सरोवर रोड स्थित लालमाता मंदिर चाय की दुकान चला रहा था। इस घटना की सूचना मिलते ही सप्तऋषि पुलिस चौकी की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

शहर क्षेत्राधिकारी शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि मृतक का नाम सुरेन्द्र कोली है और वह उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले के भिकियासैंण क्षेत्र के मंगरुखाल गांव का रहने वाला था। पुलिस ने परिजनों को घटना की सूचना दे दी और मौत के कारणों तथा घटनाक्रम से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। 

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गौरतलब है कि 2006 में उत्तरप्रदेश में नोएडा के सेक्टर 31 के निठारी गांव में कोली को निचली अदालत ने दुष्कर्म, हत्या, सबूतों को नष्ट करने और अन्य आरोपों से जुड़े मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी। कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को सह अभियुक्त और बनाया गया था।

पंढेर की कोठी के पिछले वाले हिस्से के पास नाले में मानव कंकाल मिले थे। इसके बाद वर्ष 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कोली से जुड़े 12 मामलों में उसे बरी कर दिया साथ ही पंढेर के ख़िलाफ़ दर्ज दो मामलों में उसे दोष मुक्त किया था।

पिछले साल नवंबर में उच्चतम न्यायालय ने निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी रहे कोली को सबूतों के आभाव में बरी कर दिया था। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उसे जिन सबूतों के आधार पर पिछली अदालतों ने दोषी ठहराया और सज़ा दी गई थी, वह क़ानूनी तौर पर अवैध, अविश्वसनीय और विरोधाभासी थे। इस मामले में कोठी के मालिक पंढेर को अदालत पहले ही बरी कर चुकी थी।

Pic Credit : ANI

निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की मौत, हरिद्वार में फांसी लगाकर दी जान

देशभर में बहुचर्चित रहे 2006 के निठारी सीरियल हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने शुक्रवार को हरिद्वार में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कोली उत्तर हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में काफी समय से रह रहा था। वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। फिलहाल, उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है।

बताया जा रहा है कि, कोली की मौत सुप्रीम कोर्ट से आखिरी मामले में बरी होने और जेल से रिहा होने के एक साल से भी कम समय बाद हुई है।

क्या है पूरा मामला?

कोली को नोएडा के निठारी में 2005 और 2006 के बीच महिलाओं और बच्चों की मौत और उनके लापता होने से जुड़े कई मामलों में दोषी ठहराया गया था। बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 2023 में उसे 12 मामलों में बरी कर दिया, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में आखिरी लंबित मामले में उसकी दोषसिद्धि को पलट दिया।

नवंबर 2025 में, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने किशोरी रिम्पा हलदर की हत्या के मामले में कोली की क्यूरेटिव याचिका को मंजूरी दे दी। जिसके तहत कोर्ट ने उसकी दोषसिद्धि और मौत की सजा को बरकरार रखने वाले अपने पहले के फैसले को वापस ले लिया और आदेश दिया कि अगर वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे रिहा कर दिया जाए।

बता दें कि यह फैसला तब आया जब सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2025 में 12 अन्य मामलों में कोली और उसके पूर्व नियोक्ता मोनिंदर सिंह पंढेर को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा था।

वहीं, आखिरी मामले की सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा कोली के कबूलनामे, कथित बरामदगी और फोरेंसिक सबूतों पर किए गए दावों की बारीकी से जांच की। कोर्ट ने जांच और उन सबूतों में कई कमियां पाईं, जिनके आधार पर कोली को दोषी ठहराया गया था।

जानकारी के मुताबिक, निठारी हत्याकांड का पता दिसंबर 2006 में चला, जब निठारी में पंढेर के घर के पीछे एक नाले के पास इंसानी अवशेष मिले।

जांच के दौरान कोली (जो पंढेर के यहां घरेलू काम करता था) और पंढेर को गिरफ्तार किया गया। यह मामला इलाके से महिलाओं और बच्चों के गायब होने और उनकी कथित हत्याओं से जुड़ा था।

इसके बाद कोली को कई मामलों में दोषी ठहराया गया, जिनमें से कुछ मामलों में उसे मौत की सजा सुनाई गई। पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में ऊपरी अदालतों में चली कार्यवाही में उसे बरी कर दिया गया।

जुलाई 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में बरी किए जाने के खिलाफ CBI और पीड़ितों के परिवारों द्वारा दायर 14 अपीलें खारिज कर दीं।

उस समय सुनवाई के दौरान, तत्कालीन CJI गवाई ने इस मामले पर मीडिया के बहुत ज़्यादा ध्यान दिए जाने का जिक्र किया। गवाई ने कहा, “मीडिया का काफ़ी दबाव वगैरह रहा होगा,” और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फ़ैसला “मीडिया ट्रायल” से प्रभावित था।

उस समय सुनवाई के दौरान तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने इस मामले को मिली जबरदस्त मीडिया कवरेज का भी जिक्र किया। गवाई ने कहा, “मीडिया का काफी दबाव वगैरह रहा होगा,” और सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट का फैसला “मीडिया ट्रायल” से प्रभावित था।

वहीं, उस फैसले के बाद भी कोली जेल में ही रहा क्योंकि रिम्पा हलदर मामले में उसे मिली उम्रकैद की सजा अभी भी लागू थी। हालांकि, नवंबर 2025 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उसकी रिहाई में बची आखिरी कानूनी अड़चन भी दूर हो गई।

सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद कोली को रिहा कर दिया गया। जेल से रिहाई के कुछ महीनों बाद अब हरिद्वार से उसकी कथित मौत की खबर सामने आई है।

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