El Nino Impact in July: IMD के मंथली आउटलुक में जुलाई में भी मानसून वाली बारिश का हाल ठीक नहीं, अल नीनो का खतरा यहां तक पहुंचा

देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए अपना मासिक आउटलुक जारी कर दिया है। मौसम विभाग का यह पूर्वानुमान चिंता बढ़ाने वाला है। आईएमडी के मुताबिक जुलाई के महीने में देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून की बारिश का हाल ठीक नहीं रहने वाला है और इसके सामान्य से कम होने की पूरी संभावना है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो को माना जा रहा है। इसका खतरा अब और बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है।

जुलाई में सामान्य से कम रहेगी बारिश: IMD का पूर्वानुमान

IMD द्वारा मल्टी-मॉडल एनसेंबल फोरकास्टिंग सिस्टम के आधार पर अपने पूर्वानुमान जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक जुलाई के दौरान पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से कम (<94% of Long Period Average – LPA) रहने की सबसे अधिक संभावना है।

क्या है बारिश का सामान्य आंकड़ा (LPA)?

साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर जुलाई महीने के लिए पूरे देश की दीर्घकालिक औसत वर्षा लगभग 280.4 मिमी है। IMD का पूर्वानुमान है कि देश के अधिकांश हिस्सों में जुलाई में कम बारिश होगी। उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ हिस्सों, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र में बारिश सामान्य से ऊपर या सामान्य रहने की संभावना है।

मजबूत हो रहा है अल नीनो, न्यूट्रल रहेगा आईओडी

मौसम विभाग ने मानसून की बारिश पर असर डालने वाले वजहों के बारे में भी बताया है। IMD के मुताबिक अभी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के ऊपर कमजोर अल नीनो की स्थिति बनी हुई है। लेकिन मानसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम (MMCFS) और अन्य वैश्विक जलवायु मॉडलों के ताजा संकेत बताते हैं कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह अल नीनो स्थितियां और अधिक मजबूत हो सकती हैं।

इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) की स्थिति कैसी है?

इस समय हिंद महासागर में न्यूट्रल आईओडी की स्थिति देखी जा रही है। मॉडल के पूर्वानुमानों के अनुसार, पूरे दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान यह न्यूट्रल आईओडी स्थिति ही बनी रहने की संभावना है। इंडियन ओशन डाइपोल हिंद महासागर के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के समुद्री सतह के तापमान में अंतर को दर्शाने वाली जलवायु सिस्टम है। सामान्य तौर पर यदि IOD सकारात्मक रहता है तो यह भारतीय मानसून को मजबूत करने में मदद करता है। साथ ही अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक कम कर देता है। लेकिन इस बार IOD के तटस्थ रहने की संभावना है। इसका मतलब है कि यह मानसून को अतिरिक्त मजबूती नहीं दे पाएगा और अल नीनो का प्रभाव अधिक हावी रहेगा।

जुलाई में सताएगी गर्मी, तापमान रहेगा सामान्य से अधिक

कम बारिश के अनुमान के बीच जुलाई के महीने में देशवासियों को सामान्य से अधिक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है। जुलाई के दौरान, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है। हालांकि, पश्चिम-मध्य भारत के कुछ छिटपुट इलाकों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। रात के समय या न्यूनतम तापमान की बात करें तो देश के अधिकांश क्षेत्रों में यह भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है। सिर्फ मध्य और उत्तर-पूर्व भारत के कुछ अलग-अलग हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य रह सकता है।

कम बारिश से बढ़ेंगी चुनौतियां, तैयारी करने की सलाह

आईएमडी ने आगाह किया है कि जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने के कारण कई मोर्चों पर गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। बारिश की कमी के कारण कृषि, जल संसाधन, जलविद्युत उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता और पीने के पानी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने बताया कि वह नुकसान को कम करने के लिए विस्तारित अवधि के पूर्वानुमान, जिला-स्तरीय मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम विज्ञान सलाहकार सेवाएं और प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान जारी करता रहता है। ये किसान, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और बिजली क्षेत्र के योजनाकारों के लिए मददगार हैं।

अगला पूर्वानुमान कब?

आईएमडी द्वारा मानसून सीजन के दूसरे भाग (अगस्त + सितंबर 2026) के लिए और विशेष रूप से अगस्त महीने की बारिश का पूर्वानुमान जुलाई 2026 के अंत में जारी किया जाएगा

आम आदमी को लगने वाला है बड़ा झटका! मानसून की सुस्ती से दूध, दाल और टमाटर बिगाड़ेंगे आपका बजट; समझें पूरा गणित

Monsoon Impact on Food Prices: जून का महीना बीतने को है, लेकिन देश के कई हिस्सों में मानसून की रफ्तार अभी भी सुस्त है। मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, इस साल जून से सितंबर के दौरान औसत से कम बारिश होने की 84 फीसदी आशंका है। मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर अब आपकी जेब और रसोई के बजट पर पड़ने वाला है।

डेयरी इंडस्ट्री के दिग्गजों और कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर जुलाई और अगस्त में भी बारिश सामान्य से कम रही, तो दूध, दालों और हरी सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। आइए समझते हैं कि कमजोर मानसून आपके घर के राशन के बिल को कैसे बिगाड़ सकता है।

दूध की कीमतें: जुलाई-अगस्त में 4% तक और बढ़ सकते हैं दाम

मई के महीने में अमूल और मदर डेयरी जैसी बड़ी कंपनियों ने दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की थी। अब जुलाई या अगस्त में आम जनता को दूध का एक और झटका लग सकता है।

पराग मिल्क फूड्स के चेयरमैन देवेंद्र शाह के मुताबिक, दूध की कीमतें पहले ही 2-3 फीसदी बढ़ चुकी हैं। अगर मुख्य दूध उत्पादक राज्यों में बारिश कम होती है, तो हरे चारे और पशु आहार की भारी कमी हो जाएगी।

चारे की कमी से डेयरी किसानों की लागत बढ़ेगी, जिससे कंपनियां दूध के दाम 3 से 4 फीसदी तक और बढ़ा सकती हैं। इसका सीधा असर दही, पनीर, छाछ, मक्खन और घी की कीमतों पर भी पड़ेगा।

दालें और सब्जियां: थाली से गायब हो सकता है स्वाद

कमजोर मानसून का सबसे बड़ा झटका खरीफ फसलों की बुआई को लगा है। 25 जून 2026 तक देश में फसलों की बुआई पिछले साल के मुकाबले करीब 23 फीसदी कम हुई है।

अरहर (तुअर) और उड़द जैसी दालें पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर करती हैं। बारिश में देरी के कारण बुआई पिछड़ गई है, जिससे आने वाले दिनों में दालों की कीमतें आसमान छू सकती हैं।

टमाटर, प्याज और अन्य हरी सब्जियों की सप्लाई चेन थोड़ी सी भी कम बारिश से प्रभावित हो जाती है। खेतों में पानी की कमी से उत्पादन घटेगा और मंडियों में आवक कम होने से खुदरा दाम बढ़ेंगे।

सोयाबीन और मक्का जैसी तिलहन फसलों की बुआई भी सुस्त है, जिससे आने वाले समय में खाने के तेल की कीमतों पर भी दबाव दिख सकता है।

कैसा है महंगाई का मौजूदा हाल

सरकारी आंकड़ों (MoSPI) के अनुसार, मई के महीने में खुदरा महंगाई दर भले ही 3.93 फीसदी रही हो, लेकिन खाद्य महंगाई दर 4.78 फीसदी के उच्च स्तर पर थी। पीडब्ल्यूसी इंडिया के एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अल नीनो (El Niño) का असर सर्दियों तक खिंचा, तो खरीफ के साथ-साथ गेहूं जैसी रबी की फसलों पर भी इसका असर दिख सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा।

यानी कुल मिलाकर, आपकी रसोई का बजट अब पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि जुलाई और अगस्त के बचे हुए दो महीनों में मानसून देश को कितना भिगोता है।

AC Blast: धड़ाधड़ हो रहे हैं AC ब्लास्ट! अगर आपके घर में हो जाए ऐसा हादसा, तो क्या बीमा कंपनी देगी नुकसान का पैसा? जानें

गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाया, कहा-क्रूड में नरमी से इकोनॉमी पर घटा है दबाव

अमेरिका-ईरान में डील का पॉजिटिव असर इंडियन इकोनॉमी पर पड़ेगा। गोल्डमैन सैक्स ने भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ के अनुमान को बढ़ा दिया है। इनफ्लेशन को लेकर भी उसकी राय बदली है, क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज गिरावट के बाद महंगाई बढ़ने का खतरा कम हुआ है। साथ ही सरकार के इंपोर्ट बिल में कमी आई है।

क्रूड में नरमी से भारत के लिए अच्छी संभावनाएं

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि मध्यपूर्व में तनाव घटने और क्रूड ऑयल में नरमी से भारतीय इकोनॉमी के लिए संभावनाएं बेहतर हुई हैं। उसने कहा है, “इस साल की दूसरी तिमाही में जीडीपी ग्रोथ हमारे पहले के अनुमान से ज्यादा रह सकता है। इससे हमें ग्रोथ के अपने अनुमान को बढ़ाना पड़ा है।” अमेरिकी इनवेस्टमेंट बैंक ने इस साल यानी 2026 में भारत के ग्रोथ के अनुमान को 0.3 फीसदी बढ़ाकर 6.8 फीसदी कर दिया है।

सप्लाई बढ़ने से क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट 

अमेरिका-ईरान में डील के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से ऑयल टैंकर्स और दूसरे जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। इससे क्रूड ऑयल की सप्लाई बढ़ी है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इंपोर्ट करता है। भारत आने वाला काफी क्रूड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है। हालांकि, इस साल की दूसरी छमाही में गोल्डमैन सैक्स क्रूड की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान जताया है, जो इसकी मौजूदा कीमत से ज्यादा है।

गोल्डमैन सैक्स ने इनफ्लेशन के अनुमान को घटाया

गोल्डमैन सैक्स ने भारत में इनफ्लेशन के अपने अनुमान को भी घटाया है। उसने इसे 5.1 फीसदी से घटाकर 4.9 फीसदी कर दिया गया है। उसने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ग्लोबल यूरिया प्राइस में बड़ा करेक्शन आया है। इससे फर्टिलाइजर सब्सिडी में कमी आएगी। साथ ही क्रूड सस्ता होने से भी सरकार पर वित्तीय दबाव घटेगा।

मानसून में कम बारिश का अनुमान एक बड़ी चुनौती

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, पहले के मुकाबले स्थितियां पॉजिटिव होने के बावजूद भारत के लिए कुछ चुनौतियां नजर आ रही हैं। मौसम विभाग ने इस साल मानसून की बारिश कम होने का अनुमान जताया है। इस साल अल नीनो के असर का भी अनुमान जताया गया है। ऐसा होने पर ग्रामीण इलाकों में डिमांड पर असर पड़ सकता है।

यह भी पढ़ें: RBI ने बनाए नए नियम, डिजिटल पेमेंट में फ्रॉड के शिकार को मिलेगी बड़ी राहत

आरबीआई रेपो रेट 0.50 फीसदी बढ़ा सकता है

उसने कहा है कि आरबीआईआ इस साल रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर सकता है। हालांकि, पेट्रोकेमिकल्स की कीमतों में लगातार गिरावट से इनफ्लेशन पर दबाव घटेगा, जिससे आरबीआई अपनी पॉलिसी सख्त करने में देर कर सकता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान की लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थी। इससे भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतें बढ़ाने को मजबूर हुई। इससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया।

Monsoon Breaking: 25-30 जून के बीच दिल्ली-NCR में आ जाता है मानसून, इस बार कब आएगा IMD ने दी ये जानकारी, जानिए अभी कहां पहुंचा

Delhi-NCR Monsoon Update: दिल्ली-एनसीआर के लोगों को इन दिनों उमस और भीषण गर्मी के बीच मानसून की बारिश का बेसब्री से इंतजार है। आमतौर पर 25 से 30 जून के बीच दिल्ली में दस्तक देने वाला दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार थोड़ा सुस्त पड़ता नजर आ रहा है। मानसून के आने में हो रही देरी के बीच दिल्ली के कई इलाकों में तेज हवाओं, आंधी और हल्की बारिश का दौर शुरू हो चुका है। इससे तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने दिल्ली में धूल भरी आंधी और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना को देखते हुए अलर्ट भी जारी किया है। आइए जानते हैं कि मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार मानसून इस समय देश में कहां पहुंचा है, दिल्ली में यह कब तक दस्तक देगा और अगले तीन दिनों तक राजधानी के मौसम का क्या हाल रहने वाला है।

दिल्ली में कब आएगा मानसून? मौसम वैज्ञानिकों ने बताई देरी की वजह

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच सालों (2021 को छोड़कर) में मानसून आमतौर पर 25 से 30 जून के बीच दिल्ली पहुंच जाता है। साल 2020 में मानसून 25 जून को दिल्ली आया था। 2021 में यह काफी देरी से 13 जुलाई को पहुंचा। इसके बाद 2022 में 30 जून, 2023 में 25 जून, 2024 में 28 जून और पिछले साल यानी 2025 में मानसून ने 29 जून को दिल्ली में दस्तक दी थी।

इस बार मानसून की दिल्ली एंट्री में होगी देरी!

आईएमडी के एक अधिकारी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए बताया कि दिल्ली में मानसून के पहुंचने की सामान्य तारीख 28 जून के आसपास होती है, लेकिन इस साल इसमें देरी होगी। यह कब तक पहुंचेगा, इसकी अभी सटीक तारीख नहीं बताई जा सकती। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक सामान्यतः 18-19 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनता है। यह सिस्टम अरब सागर से नमी वाली हवाओं को भारतीय मुख्य भूमि की तरफ खींचने में मदद करता है। यह सिस्टम ओडिशा, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से होते हुए उत्तर-पश्चिम भारत (दिल्ली समेत) की तरफ बढ़ता है। इससे एक अनुकूल एंटी-क्लॉकवाइज साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनता है और मानसून आगे बढ़ता है।

जुलाई के पहले हफ्ते की उम्मीद

स्काईमेट वेदर के वाइस प्रेसिडेंट महेश पालावत के मुताबिक इस बार बंगाल की खाड़ी में वह जरूरी मौसमी सिस्टम नहीं बना जो बारिश वाली हवाओं को आगे धकेलता है। अब 25-26 जून के आसपास बंगाल की खाड़ी में एक अनुकूल सिस्टम बनने की उम्मीद है। इसके बाद मानसून 27 जून की सामान्य तारीख के बजाय जुलाई के पहले सप्ताह में दिल्ली पहुंच सकता है।

अभी कहां तक पहुंचा मानसून?

मौसम विभाग के लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक 25 जून दोपहर तक मानसून की उत्तरी सीमासूरत, इंदौर, मंडला, डालटनगंज, मोतिहारी से होकर गुजर रही है। आगामी 3 से 4 दिनों के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तरी अरब सागर, गुजरात के कुछ और हिस्सों, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के शेष भागों, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश तथा उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल बनी हुई हैं।

दिल्ली-एनसीआर का अगला 4 दिनों का वेदर फॉरकास्ट

दिल्ली में पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में 1°C और न्यूनतम तापमान में 1-3°C की गिरावट देखी गई है। सफदरजंग में अधिकतम तापमान 39.3°C (सामान्य से 0.7 डिग्री अधिक) रहा। उमस के कारण हीट इंडेक्स यानी महसूस होने वाला तापमान 45.8°C तक पहुंच गया था। न्यूनतम तापमान 22 से 25°C के बीच दर्ज किया गया, जो सामान्य से काफी नीचे है। आइए आपको दिल्ली एनसीआर का 28 जून तक वेदर फोरकास्ट बताते हैं-

25 जून: आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहेंगे। दोपहर या शाम के समय गरज-चमक, बिजली कड़कने और धूल भरी आंधी के साथ बहुत हल्की से हल्की बारिश होने की संभावना है। इस दौरान 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जो झोंकों में 60 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं। अधिकतम तापमान 39°C से 41°C के बीच रहेगा, जो सामान्य से 1.6°C से 3°C अधिक है।

26 जून: आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ दोपहर/शाम को बिजली कड़कने और तेज आंधी के साथ हल्की बारिश का एक दौर आ सकता है। हवा की रफ्तार 40-50 किमी प्रति घंटे (झोंके 60 किमी प्रति घंटे तक) रहने का अनुमान है। तापमान 25°C (न्यूनतम) से 41°C (अधिकतम) के बीच रहेगा।

27 जून: मौसम का मिजाज वैसा ही रहेगा। आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ दोपहर या शाम को गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ सकती हैं। 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी। अधिकतम तापमान 41°C तक जा सकता है।

28 जून: आसमान में आंशिक रूप से बादल तो रहेंगे लेकिन बारिश की संभावना कम है। दिन के दौरान 20-30 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलेंगी, जो कभी-कभी 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ सकती हैं। अधिकतम तापमान 39°C से 41°C और न्यूनतम तापमान 26°C से 28°C के बीच रहने का अनुमान है।

देश के बाकी हिस्सों का हाल: कहीं भारी बारिश तो कहीं हीट वेव

बेहद भारी बारिश का अलर्ट: अगले एक हफ्ते के दौरान पश्चिमी तट, पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी से बहुत भारी बारिश (7-20 सेमी) होने की संभावना है। इसके साथ ही 27 से 29 जून के दौरान उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में तथा 28 जून को असम और मेघालय में अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश होने का अनुमान है।

यहां चलेगी लू : जहां देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है, वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले 3-4 दिनों तक और बिहार व झारखंड में अगले 2 दिनों तक लू की स्थिति बनी रहने की आशंका जताई गई है।

बीते 24 घंटे का हाल

पिछले 24 घंटों में उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, मध्य महाराष्ट्र और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश (12-20 सेमी) दर्ज की गई। गोवा, असम, त्रिपुरा, तटीय व दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में भारी बारिश (7-11 सेमी) हुई, जबकि हिमाचल प्रदेश में कुछ जगहों पर ओलावृष्टि भी दर्ज की गई।

यह भी पढ़ें: India Weather Today: IMD ने इन 15 राज्यों में भारी बारिश और 19+ राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट दिया, दिल्ली से बंगाल तक ऐसा रहेगा मौसम

Monsoon Breaking: डाल्टेनगंज, मोतिहारी से गुजर रहा मानसून, अब IMD ने बताई यूपी में इसकी एंट्री की तारीख

Monsoon Entry in UP Forecast: उत्तर प्रदेश समेत देश के किसानों और आम जनता के लिए राहत की बड़ी खबर है। दो हफ्तों तक पश्चिमी भारत में सुस्त पड़े रहने के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून ने एक बार फिर जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक मानसून अब झारखंड के डाल्टेनगंज और बिहार के मोतिहारी से गुजर रहा है।

इसके साथ ही मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री की तारीख भी साफ कर दी है। केंद्रीय और पश्चिमी क्षेत्रों में मानसून के आगे बढ़ने से खरीफ फसलों की बुवाई को बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है। साथ ही लोगों को भीषण लू से भी बड़ी राहत मिलेगी।

डाल्टेनगंज और मोतिहारी पहुंची मानसून की सीमा

IMD के मुताबिक 23 जून को मानसून की उत्तरी सीमा अब देश के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को पार कर चुकी है। आज की तारीख में मानसून की यह रेखा दहानू, वर्धा, रायपुर, डाल्टेनगंज और मोतिहारी से होकर गुजर रही है। मानसून ने मध्य अरब सागर के बचे हुए हिस्सों, मुंबई सहित महाराष्ट्र के कुछ और इलाकों, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के कई नए क्षेत्रों को पूरी तरह कवर कर लिया है।

उत्तर प्रदेश में इस दिन होगी मानसून की एंट्री

IMD ने अपने लेटेस्ट वेदर बुलेटिन में देश के विभिन्न राज्यों में मानसून के आगे बढ़ने का एक अनुमानित टाइमफ्रेम जारी किया है। अगले 2-3 दिनों में उत्तर अरब सागर के कुछ हिस्सों, गुजरात, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ और इलाकों के साथ-साथ मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून दस्तक दे देगा।

मध्य प्रदेश में एंट्री के बाद मानसून अगले 3-5 दिनों में आगे बढ़ेगा और झारखंड व बिहार के बचे हुए हिस्सों को कवर करते हुए उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में प्रवेश कर जाएगा। यानी अगले एक हफ्ते के भीतर यूपी में मानसूनी बारिश का दौर शुरू होने की पूरी संभावना है।

दो हफ्ते तक क्यों अटका रहा मानसून?

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मानसून ने 8 जून को ही दक्षिणी महाराष्ट्र में दस्तक दे दी थी लेकिन इसके बाद करीब दो हफ्तों तक इसकी रफ्तार थम गई थी। मौसम अधिकारियों के मुताबिक भूमध्य सागर से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण मानसून की प्रगति रुक गई थी। पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत में बारिश और बर्फबारी लाते हैं लेकिन कभी-कभी ये मानसूनी हवाओं के मार्ग में रुकावट भी पैदा कर देते हैं। अब यह बाधा दूर हो चुकी है और मानसून दोबारा मोमेंटम पकड़ रहा है।

भारतीय अर्थव्यवस्था और खेती के लिए क्यों अहम है यह बदलाव?

भारत की लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लिए जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। देश की करीब आधी आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। भारत की लगभग आधी कृषि भूमि सिंचाई के लिए पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। यह चार महीने का मानसून देश की सालाना बारिश का लगभग 70% हिस्सा देता है। इससे जल स्रोतों की रीफिलिंग भी होती है।

जून में अब तक सामान्य से कम रही है बारिश

मौसम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि अल नीनो के प्रभाव के चलते इस साल जून के पहले 21 दिनों में भारत में औसत से 42.2% कम बारिश दर्ज की गई है। इस पूरे हफ्ते भी बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इससे पहले मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में कहा था कि चार महीने के इस मानसूनी सीजन में देश में दीर्घावधि औसत (LPA) की 90% बारिश होने की संभावना है जबकि अकेले जून महीने में एल नीनो के कारण एलपीए (LPA) की 92% बारिश होने का अनुमान जताया गया था।