Monsoon Health Tips: बारिश में फिट कैसे रहें?

An image providing information on staying healthy during the rainy season

Monsoon Immunity Tips: बारिश का मौसम जहां एक ओर भीषण गर्मी से राहत देता है, वहीं दूसरी ओर यह कई मौसमी बीमारियों और संक्रमणों का खतरा भी बढ़ा देता है। विशेष रूप से मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी मच्छरजनित बीमारियां मानसून के दौरान तेजी से फैल सकती हैं। बारिश के कारण जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बन जाता है, जिससे संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। ऐसे में केवल स्वादिष्ट मानसूनी व्यंजनों का आनंद लेना ही नहीं, बल्कि अपनी सेहत और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है।ALSO READ: बरसात के मौसम में ये 5 आसान योगासन कर सकते हैं आपकी इम्युनिटी की रक्षा

 

अगर आप भी इस मानूसन में बीमार पड़ने के बजाय रिमझिम फुहारों का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो इन 5 आसान टिप्स को अपनाकर आप खुद को बिल्कुल फिट रख सकते हैं:

 

1. डाइट में करें थोड़ा बदलाव यानी खान-पान पर कंट्रोल

बारिश के मौसम में पकौड़े और चाट-पकौड़ी खाने का मन सबसे ज्यादा करता है, लेकिन यही सबसे बड़ी गलती होती है।

 

स्ट्रीट फूड से तौबा: इस मौसम में बाहर का खुला खाना, कटी हुई सब्जियां, फल और गंदा पानी 'टायफायड' और 'डायरिया' जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं। इसलिए बाहर खाने से बचें।

 

हरी पत्तेदार सब्जियों को कहें 'ना': बारिश में पालक, मेथी, बंदगोभी जैसी पत्तेदार सब्जियों में कीड़े और बैक्टीरिया पनपने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। अगर खाएं भी, तो उन्हें गुनगुने पानी और नमक से अच्छी तरह धोकर, उबालकर ही खाएं।

 

इम्यूनिटी बूस्टर अपनाएं: अपनी चाय या काढ़े में अदरक, तुलसी, काली मिर्च, लौंग और हल्दी का इस्तेमाल बढ़ा दें।

 

2. पानी उबालकर ही पीएं

मानसून में जल जनित रोग बहुत तेजी से फैलते हैं क्योंकि इस मौसम में पीने के पानी के सोर्स जल्दी दूषित हो जाते हैं। हमेशा पानी को उबालकर और छानकर पीएं। अगर आप ट्रेवल कर रहे हैं, तो केवल सीलबंद भरोसेमंद ब्रांड का ही पानी पीएं। शरीर को हाइड्रेटेड रखना इस मौसम में भी उतना ही जरूरी है जितना गर्मी में।

 

3. पर्सनल हाइजीन/ व्यक्तिगत स्वच्छता का रखें खास ध्यान

नमी के कारण इस मौसम में फंगल इन्फेक्शन और स्किन एलर्जी बहुत आम हो जाती है।

 

भीगने पर तुरंत नहाएं: अगर आप बारिश के पानी में भीग गए हैं, तो घर आकर साफ पानी और एंटी-बैक्टीरियल साबुन से तुरंत नहाएं और खुद को अच्छी तरह सुखाएं।

 

गीले कपड़े और जूते न पहनें: कपड़ों या जूतों में थोड़ी भी नमी हो, तो उन्हें न पहनें। फंगल इन्फेक्शन से बचने के लिए पैरों को साफ और सूखा रखें।

 

एक छोटा सा मंत्र: इस मौसम में 'ताजा खाएं, उबला पानी पीएं और एक्टिव रहें'। मानसून का मजा तभी है जब आपकी सेहत एकदम चकाचक हो!

 

4. घर के अंदर ही करें वर्कआउट

बारिश की वजह से अक्सर मॉर्निंग वॉक या जिम जाना छूट जाता है, जिससे लोग सुस्त महसूस करने लगते हैं। लेकिन फिटनेस से नो कॉम्प्रोमाइज! अगर बाहर बारिश हो रही है, तो घर के अंदर ही योग, स्ट्रेचिंग, जुम्बा या स्किपिंग/ रस्सी कूदना जैसे कार्य करें। आप 20-30 मिनट का कोई भी होम वर्कआउट यूट्यूब की मदद से कर सकते हैं। इससे आपका मेटाबॉलिज्म सही रहेगा और वजन भी कंट्रोल में रहेगा।

 

5. मच्छरों से रहें सावधान

मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियां मानसून की ही देन हैं क्योंकि जमा पानी में मच्छर तेजी से अंडे देते हैं। अपने घर के आसपास, कूलरों में, गमलों या टायरों में पानी जमा न होने दें। सोते समय मच्छरदानी या मॉस्किटो रिपेलेंटका इस्तेमाल जरूर करें। पूरी आस्तीनके कपड़े पहनें।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के बारे में 10 रोचक तथ्य

A photograph of Dr. Syama Prasad Mookerjee, a renowned educationist and the founder of the Bharatiya Jana Sangh

Dr Syama Prasad Mukherjee History: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आधुनिक भारत के उन प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने शिक्षा, राष्ट्रनिर्माण और राजनीति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे एक प्रख्यात शिक्षाविद, विधिवेत्ता, सांसद और दूरदर्शी राजनीतिक नेता थे। कम आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बनने से लेकर स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य करने तक, उनका सार्वजनिक जीवन अनेक उल्लेखनीय उपलब्धियों से भरा रहा। 

 

वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना कर उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई वैचारिक दिशा देने का प्रयास किया, जिसका प्रभाव आगे के दशकों में भी दिखाई दिया। आज भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनके राष्ट्रसेवा के संकल्प, शिक्षा के प्रति समर्पण, प्रशासनिक क्षमता और राजनीतिक योगदान के लिए याद किया जाता है। 

 

1. सबसे कम उम्र के कुलपति

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी मेधावी छात्र थे। उन्होंने केवल 33 वर्ष की आयु में कलकत्ता (कोलकाता) विश्वविद्यालय के कुलपति का पद संभाला था। वह इस पद पर बैठने वाले सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे।

 

2. स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री

जब 1947 में भारत आजाद हुआ, तो प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया। वे देश के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री (Minister for Industry and Supply) बने। सन् 1943 से 1946 तक वे अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे थे।

 

3. नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा

जब नेहरू सरकार ने 1950 में पाकिस्तान के साथ 'नेहरू-लियाकत समझौते' पर हस्ताक्षर किए, तो डॉ. मुखर्जी इसके सख्त खिलाफ थे। पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के विरोध में उन्होंने केंद्रीय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

 

4. भारतीय जनसंघ की स्थापना

मंत्रिमंडल से हटने के बाद, उन्होंने 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ (BJS) की स्थापना की। यही संगठन आगे चलकर 1980 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रूप में पुनर्गठित हुआ।

 

5. एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे

वे जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 के घोर विरोधी थे। उन्होंने कश्मीर में अलग झंडे, अलग संविधान और वहां जाने के लिए परमिट (Permit) की व्यवस्था का कड़ा विरोध किया और 'एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे' का यह प्रसिद्ध नारा दिया।

 

6. बिना परमिट कश्मीर में प्रवेश और गिरफ्तारी

उस समय भारत के नागरिकों को भी कश्मीर जाने के लिए परमिट की जरूरत होती थी। डॉ. मुखर्जी ने इस कानून को चुनौती देने के लिए मई 1953 में बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश किया, जिसके बाद उन्हें वहां की सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया।

 

7. बैरिस्टर की उपाधि और राजनीति में प्रवेश

उन्होंने इंग्लैंड (लंदन) के 'द ऑनरेबल सोसाइटी ऑफ लिंक्न्स इन' से कानून की पढ़ाई की और 1927 में बैरिस्टर बने। भारत लौटने के बाद वे राजनीति में सक्रिय हुए।

 

8. बंगाल विभाजन में अहम भूमिका

जब 1947 में भारत का विभाजन हो रहा था, तब उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ा संघर्ष किया कि मुस्लिम लीग पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल न कर पाए। उन्हीं के प्रयासों के कारण हिंदू बहुल पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहा।

 

9. 'महाबोधि सोसाइटी' के अध्यक्ष

वे केवल राजनीति तक सीमित नहीं थे। वे बौद्ध धर्म और संस्कृति के प्रति गहरा सम्मान रखते थे। वे महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी रहे और उन्होंने सांची में बौद्ध अवशेषों को सुरक्षित रखने और एशियाई देशों में इसके प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 

 

10. रहस्यमयी परिस्थितियों में निधन

23 जून 1953 को कश्मीर में नजरबंदी के दौरान ही अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है, क्योंकि उनकी मां और कई बड़े नेताओं ने इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की थी, जिसे तत्कालीन सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। उन्हें 'महान देशभक्त और शहीद' के रूप में याद किया जाता है।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि, जानें 5 अनसुने तथ्य

Rashifal Today: आज के दिन सोच-समझकर लें कोई भी फैसला, जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। ये न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज के दिन आर्थिक मामलों में संतुलन और धैर्य बनाए रखना जरूरी है। नए अवसर जरूर मिल सकते हैं, लेकिन बिना पूरी जानकारी के कोई फैसला न लें। अपने वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार बदलाव करें। आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज धन से जुड़े मामलों में समझदारी से काम लेने की जरूरत है। बिना सोचे-समझे खर्च करने या जल्दबाजी में कोई आर्थिक फैसला लेने से बचें। अगर आप अपने भविष्य को सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो लंबी अवधि की योजना पर ध्यान दें। अपनी आय और खर्च का सही हिसाब रखें और केवल जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें। अनुशासित बजट अपनाने से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और आगे चलकर अच्छे परिणाम मिलेंगे।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आपको अपने पैसों की योजना विस्तार से बनाने की जरूरत है। बाजार में होने वाले बदलावों पर नजर रखें और सही अवसर मिलने पर ही निवेश करें। बजट को थोड़ा लचीला रखें ताकि अचानक आने वाले खर्चों को आसानी से संभाल सकें। धैर्य और समझदारी से लिए गए फैसले आपकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाएंगे और आपको आत्मविश्वास भी देंगे।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। ऐसे में भावनाओं में बहकर पैसा खर्च करने से बचें। अपनी जरूरतों को प्राथमिकता दें और बजट के अनुसार ही खर्च करें। अगर किसी बड़े खर्च की योजना बना रहे हैं तो पहले अच्छी तरह सोच लें। आर्थिक अनुशासन बनाए रखने से भविष्य में लाभ मिलेगा।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों को व्यवस्थित करने के लिए अच्छा है। अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें और केवल जरूरी जरूरतों पर ही धन खर्च करें। अगर निवेश करने का विचार है तो पूरी जानकारी लेकर ही कदम उठाएं। छोटी-छोटी बचत भविष्य में बड़ा सहारा बन सकती है। सोच-समझकर लिए गए फैसले आपकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेंगे।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक प्रबंधन के लिए अनुकूल है। अपनी आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बनाए रखें। लालच में आकर या अचानक किसी चीज पर पैसा खर्च करने से बचें। यदि निवेश करना चाहते हैं तो सभी विकल्पों को ध्यान से समझें। धैर्य और सही योजना के साथ किए गए प्रयास आपको भविष्य में अच्छे नतीजे देंगे।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आज आपकी आर्थिक स्थिति सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ सकती है। अपने बजट को व्यवस्थित करें और केवल जरूरी खर्चों पर ध्यान दें। बेवजह खरीदारी करने से बचें। अगर आप योजनाबद्ध तरीके से धन का उपयोग करेंगे तो आने वाले समय में आर्थिक रूप से मजबूत बने रहेंगे। सही वित्तीय योजना आपके लिए फायदेमंद साबित होगी।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आपका ध्यान आर्थिक स्थिरता पर रहेगा। फिजूलखर्ची से बचें, खासकर महंगी और लग्जरी चीजों पर खर्च करने से पहले अच्छी तरह सोचें। अगर निवेश करना चाहते हैं तो जल्दबाजी न करें। अपने लंबे समय के आर्थिक लक्ष्यों के अनुसार ही फैसले लें। सकारात्मक सोच और सही योजना आपको सफलता दिला सकती है।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज भविष्य को ध्यान में रखकर आर्थिक योजना बनाने का समय है। अपने निवेश और बजट की समीक्षा करें और देखें कि कहीं अनावश्यक खर्च तो नहीं हो रहा। जल्दबाजी में कोई वित्तीय निर्णय लेने से बचें। अगर आप अपने खर्चों पर नियंत्रण रखेंगे तो भविष्य में आर्थिक मजबूती हासिल कर पाएंगे।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में संतुलन और धैर्य बनाए रखना जरूरी है। नए अवसर जरूर मिल सकते हैं, लेकिन बिना पूरी जानकारी के कोई फैसला न लें। अपने वित्तीय लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार बदलाव करें। बचत बढ़ाने और खर्चों को नियंत्रित रखने पर ध्यान दें। समझदारी से किया गया निवेश आने वाले समय में आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Chaturmas 2026: 25 जुलाई को योग निद्रा में जाएंगे श्री हरि, मगर दिवाली तक चांदी काटेंगे 5 राशि के जातक

Chaturmas 2026: आषाढ़ का महीना 5 राशियों के जातकों के लिए बहुत शुभ संदेश लेकर आया है। ज्योतिषविदों का कहना है कि आषाढ़ से शुरू होने वाले चतुर्मास की अवधि पांच राशियों के लिए बहुत शुभ मानी जा रही है। इस माह में इन जातकों के जीवन में नई खुशियों का संचार होगा और धनधान्य की स्थिति बेहतर होगी। आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी व्रत किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद वह कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। इस दिन देवउठानी एकादशी मनाई जाती है। यह लगभग 4 महीने का समय होता है। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई से लेकर 20 नवंबर तक रहने वाला है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह समय 5 राशियों के लिए बहुत शुभ रहेगा। आइए जानें कौन सी हैं ये राशियां

वृष राशि : चातुर्मास की अवधि आपके लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन सकती है। पिछले कुछ समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। नौकरीपेशा लोगों की जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। परिवार का सहयोग रहेगा। धन संचय के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा।

कर्क राशि : चार महीनों में आपको नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और व्यापार में नए संपर्क लाभ पहुंचा सकते हैं। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए भी यह समय उत्साहजनक रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम पूरे होने लगेंगे।

तुला राशि : यह चार महीने रिश्तों और करियर दोनों के लिए सकारात्मक संकेत दे सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के नए रास्ते खुल सकते हैं। इस समय में साझेदारी में काम करने वालों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इस राशि के जातकों की सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ सकती है।

धनु राशि : भाग्य का संतुलन इस अवधि में आपके पक्ष में रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल रहेगा। विदेश से जुड़े कार्यों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

मीन राशि : परिवार में खुशियों का माहौल बनेगा और करियर में नई संभावनाएं बनेंगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिल सकती है। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी और भविष्य की योजनाओं पर आत्मविश्वास के साथ काम कर पाएंगे। व्यापार में लाभ बढ़ेगा और कारोबार में विस्तार होगा।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Shukra Gochar 2026: 4 राशियों के लिए शुभ संदेश लेकर आया है आज का दिन, शुक्र करने जा रहे हैं सूर्य की राशि सिंह में प्रवेश

Rashifal Today: आज किस मूलांक के लोगों की मूलांक की चमकेगी किस्मत, जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। ये न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज के दिन अपने बजट और पुराने निवेश की समीक्षा करने का सही समय है। अगर कहीं बदलाव की जरूरत महसूस हो तो उसे करने में देर न करें। जल्दबाजी में खर्च करने से बचें और हर आर्थिक फैसला सोच-समझकर लें। आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन पैसों के मामलों में सोच-समझकर आगे बढ़ने का है। बिना जरूरत के खर्च करने से बचें और अपनी आमदनी के अनुसार बजट बनाकर चलें। अगर भविष्य के लिए कोई निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो जल्दबाजी न करें। पहले पूरी जानकारी लें, फिर फैसला करें। बचत बढ़ाने पर ध्यान देना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में धैर्य रखना जरूरी है। अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें और भविष्य को ध्यान में रखकर योजना बनाएं। बचत और सही निवेश आपकी आर्थिक स्थिति को मजबूत बना सकते हैं। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए हर कदम सोच-समझकर उठाएं।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आपको पैसों से जुड़ा हर फैसला पूरी योजना के साथ लेना चाहिए। खर्च और निवेश का सही हिसाब रखें। नई आर्थिक योजनाओं या अवसरों पर नजर बनाए रखें, लेकिन किसी भी निर्णय से पहले पूरी जानकारी जरूर लें। जरूरत पड़ने पर अपने बजट में बदलाव करने के लिए तैयार रहें।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। इसलिए बजट बनाकर चलना आपके लिए बेहतर रहेगा। भावनाओं में आकर खर्च करने से बचें और केवल जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें। परिवार के साथ मिलकर भविष्य की आर्थिक योजना बनाना लाभदायक रहेगा।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का अच्छा मौका मिल सकता है। अपने खर्चों को व्यवस्थित रखें और बिना सोचे-समझे पैसा खर्च न करें। कोई नया आर्थिक अवसर सामने आए तो उसे ध्यान से परखें। सही योजना के साथ आगे बढ़ेंगे तो लाभ मिलने की संभावना है।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आज आपको अपने खर्चों पर खास नजर रखने की जरूरत है। गैर-जरूरी खर्च कम करें और बजट के अनुसार चलें। किसी भी बड़े आर्थिक फैसले से पहले अनुभवी व्यक्ति की सलाह लेना आपके लिए अच्छा रहेगा। सही योजना और अनुशासन से आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन भविष्य की आर्थिक योजनाएं बनाने के लिए अनुकूल है। दिखावे या लग्जरी चीजों पर पैसा खर्च करने से बचें। अगर निवेश करना चाहते हैं तो पूरी जानकारी लेकर ही फैसला करें। समझदारी से किया गया खर्च आने वाले समय में फायदा दिला सकता है।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज अपने बजट और पुराने निवेश की समीक्षा करने का सही समय है। अगर कहीं बदलाव की जरूरत महसूस हो तो उसे करने में देर न करें। जल्दबाजी में खर्च करने से बचें और हर आर्थिक फैसला सोच-समझकर लें। आपकी समझदारी भविष्य में अच्छे परिणाम दे सकती है।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आपके सामने कमाई या निवेश के नए मौके आ सकते हैं। हालांकि, किसी भी फैसले में जल्दबाजी न करें। अपने आर्थिक लक्ष्यों की समीक्षा करें और जरूरत के अनुसार बदलाव करें। धैर्य और समझदारी के साथ लिया गया फैसला भविष्य में आर्थिक मजबूती दिला सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Panchak 2026: जुलाई में ये 10 दिन होंगे भारी, दो बार लग रहे पंचक की जानें सही तारीख और नियम

Panchak 2026: जुलाई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने में हिंदी माह आषाढ़ रहेगा और इसमें कई प्रमुख व्रत और पर्व आएंगे। इसके अलावा इस माह में दो बार पंचक का संयोग भी बनेगा। हिंदू धमें में कुछ ऐसे दिन बताए गए हैं, जब कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। इनमें से एक है पंचक, जो पांच दिनों तक रहता है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा जब कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है तो उसे पंचक कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जुलाई 2026 के महीने में दो बार पंचक लग रहा है। जुलाई 2026 में पंचक की सही तारीखें, समय और इसके नियम नीचे दिए गए हैं :

जुलाई 2026 में पंचक की तिथियां

पहला पंचक (मृत्यु पंचक): 04 जुलाई 2026, शनिवार से प्रारंभ होकर 08 जुलाई 2026, बुधवार तक रहेगा। इस पंचक की शुरुआत शनिवार से होने के कारण इसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है। ज्योतिष में इसे बेहद संवेदनशील और अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

दूसरा पंचक (चोर पंचक): 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रारंभ होकर अगले महीने यानि 04 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। यह पंचक शुक्रवार से शुरू होगा, इसलिए ये ‘चोर पंचक’ कहा जाता है। इस दौरान धन हानि या चोरी का खतरा रहता है।

पंचक में ये न करें

शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान 5 कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान किए गए गलत काम का प्रभाव 5 गुना बढ़ जाता है:

  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
  • पंचक काल में मकान का लेंटर या छत डलवाने का काम पूरी तरह वर्जित होता है। ऐसा करने से धन हानि और घर में अशांति हो सकती है।
  • इन 5 दिनों में घर के निर्माण के लिए लकड़ी खरीदना, काटना या घास-फूस और ईंधन इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है। इससे आग का भय रहता है।
  • पंचक के दौरान नया पलंग, चारपाई बनाना या खरीदना शास्त्रों में मना है।
  • यदि पंचक काल में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो शव के अंतिम संस्कार के समय किसी योग्य पंडित की सलाह पर पांच कुश (घास) या आटे के पुतले बनाकर साथ में जलाने का विधान है, ताकि पंचक दोष शांत हो सके।

दिन के अनुसार तय होता है पंचक का नाम

पंचक कुल पांच प्रकार का होता है और इसका नाम दिन के अनुसार तय होता है। ज्योतिष के अनुसार, रविवार के दिन शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसी तरह सोमवार से लग रहा पंचक राज पंचक, मंगलवार को शुरू होने वाला अग्नि पंचक, शुक्रवार से प्रारंभ होने वाला रोग पंचक और शनिवार को प्रारंभ होने वाला मृत्यु पंचक कहलाता है।

Yogini Ekadashi Vrat 2026: कब है योगिनी एकादशी व्रत? इस दिन धन का मार्ग खोलने और कष्टों से मुक्ति के लिए जरूर करें ये आसान उपाय

घर की ‘एनर्जी’ बदल देंगी ये खास धूप, जानें किस धुएं में छिपा है क्या राज

Incense that purifies the home and fosters positivity. An image showing the traditional practice of burning incense

Burning incense at home: हिंदू परंपरा में घर के भीतर धूप और दीप प्रज्वलित करना केवल एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि एक गहरा विज्ञान है। हमारे पूर्वज जानते थे कि खास जड़ी-बूटियों को जलाने से निकलने वाला धुआं घर की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकारात्मकता का संचार करता है। वास्तु दोष, पितृ दोष और गृह-कलह जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए 'धूप' देना सबसे सरल और असरदार तरीका है।

 

1. गुग्गुल और लोबान: पारलौकिक और दैवीय कृपा

2. कपूर: दोषों का काल

3. गुड़-घी का देसी नुस्खा: ऑक्सीजन और शांति का स्रोत

4. षोडशांग और दशांग धूप: रोगों से सुरक्षा का कवच

5. धूप देने से क्या-क्या मिलेंगे फायदे?

6. धूप देने के खास नियम (न करें ये गलतियां):

 

आइए जानते हैं, घर को स्वर्ग बनाने वाली धूप के अलग-अलग प्रकार और उनके लाभ:

 

1. गुग्गुल और लोबान: पारलौकिक और दैवीय कृपा

गुग्गुल: इसकी मीठी सुगंध तनाव को कम करती है। अक्सर इसे गुरुवार और रविवार को जलाया जाता है ताकि घर की वायु शुद्ध रहे।

 

लोबान: इसे जलाने से मानसिक शक्ति बढ़ती है, लेकिन इसके नियम कड़े होते हैं। माना जाता है कि यह सूक्ष्म शक्तियों को आकर्षित करता है, इसलिए इसे विशेषज्ञों की सलाह पर ही जलाएं।

 

2. कपूर: दोषों का काल

कपूर जलाना अक्षय पुण्य का काम माना गया है। वैज्ञानिक रूप से इसकी गंध बैक्टीरिया और वायरस का नाश करती है। जिस घर में नियमित कपूर जलता है, वहां पितृ दोष या वास्तु दोष टिक नहीं पाते।

 

3. षोडशांग और दशांग धूप: रोगों से सुरक्षा का कवच

षोडशांग धूप: यह सबसे खास मानी गई है। इसमें चंदन, कपूर, जटामांसी और गुग्गुल जैसी 16 आयुर्वेदिक वस्तुओं का मिश्रण होता है। इसे उपले पर जलाने से घर में आकस्मिक दुर्घटनाओं और बीमारियों का भय कम होता है।

 

दशांग धूप: यह 10 विशेष सामग्रियों (जैसे गुड़, राल, जटामांसी) से बनती है। इसकी खुशबू घर के सदस्यों के बीच शांति और सामंजस्य बनाए रखती है।

 

4. गुड़-घी का देसी नुस्खा: ऑक्सीजन और शांति का स्रोत

अगर आप कुछ खास नहीं कर सकते, तो जलते हुए कंडे (उपले) पर बराबर मात्रा में गुड़ और घी रखें। यह मिश्रण वातावरण में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाता है और आपके दिमाग के तनाव को तुरंत शांत कर देता है।

 

5. धूप देने से क्या-क्या मिलेंगे फायदे?

वास्तु सुधार: घर के कोनों में दबी नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाती है।

 

मानसिक सेहत: घर के सदस्यों का मन शांत रहता है और बीमारियां दूर रहती हैं।

 

दैवीय आशीर्वाद: धूप से देवता और पितृ प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन की बाधाएं स्वतः समाप्त होने लगती हैं।

 

6. धूप देने के खास नियम (न करें ये गलतियां):

कब दें धूप? यदि रोजाना संभव न हो, तो अमावस्या, पूर्णिमा, तेरस और चौदस को सुबह-शाम धूप जरूर दें। याद रखें, सुबह की धूप देवताओं के लिए और शाम की पितरों के लिए होती है।

 

सही दिशा: धूप देने का सबसे श्रेष्ठ स्थान ईशान कोण (North-East) है। कोशिश करें कि इसका धुआं घर के हर कमरे में पहुंचे।

 

शांति का माहौल: जब धूप का धुआं घर में फैल रहा हो, तब तेज संगीत न बजाएं और कम से कम बात करें। यह समय आत्म-चिंतन और शांति का है।

 

पवित्रता: हमेशा स्नान के बाद और घर की साफ-सफाई करने के बाद ही धूप प्रज्वलित करें।

 

संक्षेप में कहा जाए तो 'धूप' केवल धुआं नहीं, बल्कि आपके घर की 'एनर्जी' को रिचार्ज करने का प्राचीन माध्यम है। आज ही अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार धूप का चयन करें और घर में खुशहाली का अनुभव करें।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

 

Swami Vivekananda Quotes: स्वामी विवेकानंद के 11 अनमोल कथन, जो हमें ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता से भर देंगे

A photograph of Swami Vivekananda- a great spiritual guru, social reformer, and source of inspiration for the youth of modern India

Swami Vivekananda 4 July quotes: आज 4 जुलाई को स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि मनाई जा रही है। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेंद्रनाथ दत्त था। वे बचपन से ही प्रखर बुद्धि के थे और उनके मन में ईश्वर को जानने की तीव्र जिज्ञासा रहती थी। स्वामी विवेकानंद ने मात्र 39 वर्ष की आयु में 4 जुलाई 1902 को देह त्याग दी, लेकिन उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं।ALSO READ: स्वामी विवेकानंद पुण्यतिथि विशेष: एक ज्योति जो आज भी भारत का पथ आलोकित कर रही है

 

Swami Vivekananda के विचार आज भी युवाओं, विद्यार्थियों और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। यहां उनके कुछ सबसे प्रसिद्ध और प्रेरणादायक कथन दिए गए हैं:

 

आत्मविश्वास और शक्ति पर विचार

1. 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।'

 

2. 'ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं। वो हमीं हैं जो अपनी आंखों पर हाथ रख लेते हैं और फिर रोते हैं कि कितना अंधकार है।'

 

3. 'लकीर के फकीर मत बनो। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते, तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते।'

 

4. 'खुद को कमजोर समझना सबसे बड़ा पाप है।'

 

5. 'तुम्हें अंदर से बाहर की तरफ विकसित होना है। कोई तुम्हें पढ़ा नहीं सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता। तुम्हारी आत्मा के अलावा तुम्हारा कोई दूसरा गुरु नहीं है।'

 

मन और स्वभाव पर विचार

1. 'जो तुम सोचते हो, वो तुम हो जाओगे। यदि तुम खुद को कमजोर सोचते हो, तुम कमजोर हो जाओगे; अगर तुम खुद को ताकतवर सोचते हो, तुम ताकतवर हो जाओगे।'

 

2. 'दिल और दिमाग के टकराव में हमेशा अपने दिल की सुनो।'

 

3. 'संगति आप जैसी रखते हैं, वैसे ही आपके विचार हो जाते हैं। इसलिए हमेशा महान और सकारात्मक लोगों के संपर्क में रहें।'

 

4. 'सत्य को हजार तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य ही होगा।'

 

कर्म और सफलता पर विचार

1. 'एक विचार लो। उस विचार को अपना जीवन बना लो- उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो।' अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो, और बाकी सभी विचारों को किनारे रख दो। यही सफल होने का तरीका है।

 

2. 'एक समय में एक काम करो, और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमें डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।'

 

3. 'जितना बड़ा संघर्ष होगा, जीत उतनी ही शानदार होगी।'

 

विवेकानंद जी ने भारत को हीनभावना से बाहर निकाला और विश्व पटल पर उसे 'विश्वगुरु' के रूप में स्थापित किया। उनका जीवन हमें साहस, संयम और परोपकार की सीख देता है।

 

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Ram Mandir: राम मंदिर दान विवाद के बीच ट्रस्ट के इस बैठक पर टिकी सबकी नजर, जानें पूरा समीकरण

करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र अयोध्या का राम मंदिर चढ़ावे को लेकर उठे सवालों ने देश की राजनीति और धार्मिक जगत में हलचल मचा दी है। आरोप हैं कि राम मंदिर के दानपात्र में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चंदे में गड़बड़ी हुई। अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों के बीच 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक होने जा रही है। इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की पेशकश की है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के आगे के कामकाज और भविष्य को लेकर बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। क्योंकि ट्रस्ट की व्यवस्था ऐसी है कि कुछ स्थायी ट्रस्टियों के पास ही फैसले लेने का सबसे ज्यादा अधिकार होता है।

ट्रस्ट की शुरुआत कैसे हुई?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन फरवरी 2020 में किया गया था। यह ट्रस्ट अयोध्या जमीन विवाद पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाया गया। अदालत ने केंद्र सरकार को राम मंदिर के निर्माण और उसके संचालन के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया था। नई दिल्ली में हुई पहली बैठक में महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया। विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय को महासचिव और गोविंद गिरि महाराज को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधान सचिव और पूर्व आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र को मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।

ट्रस्ट में कौन-कौन सदस्य हैं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 10 स्थायी ट्रस्टी हैं। हालांकि, ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद एक पद अभी खाली है।

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  • महंत नृत्य गोपाल दास: वे ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और राम जन्मभूमि आंदोलन के सबसे वरिष्ठ संतों में गिने जाते हैं। उनकी तबीयत ठीक नहीं है और वे अस्पताल में भर्ती हैं। ऐसे में संभावना है कि 6 जुलाई की बैठक में वे शामिल नहीं हो पाएंगे।
  • चंपत राय: वे विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष और ट्रस्ट के महासचिव हैं। अगस्त 2020 में मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद से ट्रस्ट के रोज़मर्रा के कामकाज और कई अहम फैसलों में उनकी प्रमुख भूमिका रही है।
  • डॉ. अनिल मिश्र: अयोध्या के होम्योपैथी डॉक्टर और ट्रस्ट के शुरुआती सदस्यों में से एक हैं। वे मंदिर से जुड़े प्रशासनिक कामकाज की जिम्मेदारी संभालते हैं।
  • गोविंद गिरि महाराज: पुणे के प्रसिद्ध संत हैं। वे ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष हैं और ट्रस्ट के आर्थिक व वित्तीय मामलों की देखरेख करते हैं।
  • स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती: प्रयागराज स्थित ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं। वे ट्रस्ट से जुड़े प्रमुख धार्मिक नेताओं में शामिल हैं।
  • स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ जी महाराज: कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ के प्रमुख हैं और मध्व परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं।
  • युगपुरुष परमानंद गिरि महाराज: हरिद्वार के संत और आध्यात्मिक गुरु हैं। वे भी ट्रस्ट के महत्वपूर्ण सदस्यों में शामिल हैं।
  • महंत दिनेंद्र दास: वे अयोध्या के निर्मोही अखाड़े के वरिष्ठ संत हैं। राम जन्मभूमि विवाद के दौरान वे इस मामले के प्रमुख पक्षकारों में शामिल रहे थे।
  • कृष्ण मोहन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े कार्यकर्ता हैं। उन्हें ट्रस्ट में कामेश्वर चौपाल के निधन के बाद सदस्य बनाया गया। कामेश्वर चौपाल उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने 1989 में प्रस्तावित राम मंदिर की पहली ईंट रखी थी।
  • खाली पद: अयोध्या के पूर्व शाही परिवार से जुड़े ट्रस्टी विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद ट्रस्ट में उनका पद अभी तक खाली है।

किसे वोट देने का अधिकार है और किसे नहीं?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सिर्फ स्थायी ट्रस्टियों को ही वोट देने का अधिकार है। सरकारी प्रतिनिधियों सहित पांच पदेन सदस्य बैठकों में शामिल तो होते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं है। इसलिए वे मतदान के जरिए किसी फैसले को बदल या प्रभावित नहीं कर सकते। यही वजह है कि ट्रस्ट के बड़े फैसलों का अधिकार स्थायी ट्रस्टियों के पास ही होता है। नए ट्रस्टी को शामिल करना हो या ट्रस्ट के कामकाज में कोई बड़ा बदलाव करना हो, इसके लिए स्थायी ट्रस्टियों के बहुमत की मंजूरी जरूरी होती है।

क्या चंपत राय और अनिल मिश्र पद छोड़ने के बाद भी ट्रस्ट में रह सकते हैं?

हां, ऐसा हो सकता है। ट्रस्ट से जुड़े लोगों के अनुसार, स्थायी ट्रस्टी को हटाने का कोई नियम नहीं है। अगर चंपत राय महासचिव का पद छोड़ देते हैं और अनिल मिश्र अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियां छोड़ देते हैं, तब भी वे ट्रस्ट के स्थायी सदस्य बने रहेंगे। वे तभी ट्रस्ट से बाहर होंगे, जब खुद अपना इस्तीफा देंगे। इसी वजह से 6 जुलाई की बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। ट्रस्ट में एक स्थायी पद पहले से खाली है और अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की तबीयत खराब होने के कारण उनके बैठक में शामिल होने की संभावना भी कम है। ऐसे में बैठक में वोट देने वाले सक्रिय सदस्यों की संख्या सीमित रह सकती है।

आमंत्रित सदस्य कौन हैं और उनकी क्या भूमिका होती है?

ट्रस्ट में कुछ आमंत्रित सदस्य भी हैं। ये लोग बैठकों में शामिल होते हैं और अपनी राय रखते हैं, लेकिन उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता। इनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश ‘भैयाजी’ जोशी और विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी दिनेश चंद्र शामिल हैं। इसके अलावा कर्नाटक से विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारी गोपाल नागरकट्टे भी आमंत्रित सदस्य हैं। वे जनवरी 2021 से राम मंदिर के निर्माण और दूसरे सिविल कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। हालांकि, आमंत्रित सदस्य चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं और अपने सुझाव दे सकते हैं, लेकिन ट्रस्ट के किसी भी फैसले पर वोट नहीं दे सकते।

International Plastic Bag Free Day: इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे कब और क्यों मनाया जाता है?

Image caption: A photo conveying the message of International Plastic Bag Free Day and providing information on tackling the serious issue of plastic pollution

antarrashtriya plastic bag mukt divas kab manaya jata hai: प्रत्येक वर्ष 3 जुलाई को दुनिया भर में 'इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे' यानी अंतरराष्ट्रीय प्लास्टिक बैग मुक्त दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मकसद बहुत सीधा और साफ है, सिंगल-यूज़ (एक बार इस्तेमाल होने वाले) प्लास्टिक बैग के हानिकारक प्रभावों के प्रति लोगों को जागरूक करना और उन्हें कपड़े या जूट के थैलों जैसे सुरक्षित विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

  • कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?
  • यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…
  • पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना
  • समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा
  • मानव स्वास्थ्य की रक्षा
  • ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना
  • हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

 

 

आइए जानते हैं कि इस खास दिन की शुरुआत कब हुई और इसे मनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी:

 

कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?

इंटरनेशनल प्लास्टिक बैग फ्री डे की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। इसे 'ज़ीरो वेस्ट यूरोप' (Zero Waste Europe) के एक सदस्य 'रीज़ेरो' (Rezero) द्वारा शुरू किया गया था। शुरुआत में यह अभियान सिर्फ यूरोप के कुछ देशों तक सीमित था। लेकिन धीरे-धीरे, जैसे-जैसे दुनिया को प्लास्टिक से होने वाले नुकसान का अहसास हुआ, यह एक वैश्विक (Global) आंदोलन बन गया। अब हर साल 3 जुलाई को दुनिया के दर्जनों देश मिलकर इस मुहिम का हिस्सा बनते हैं।

 

यह दिन क्यों मनाया जाता है? जानें इसके पीछे की बड़ी वजहें…

प्लास्टिक बैग हमारे लिए कुछ मिनटों की सुविधा तो लाते हैं, लेकिन यह हमारी धरती के लिए सैकड़ों सालों का सिरदर्द बन जाते हैं। इस दिन को मनाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

1. पर्यावरण को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाना

प्लास्टिक बैग 'नॉन-बायोडिग्रेडेबल' (Non-biodegradable) होते हैं, यानी ये प्राकृतिक रूप से कभी नष्ट नहीं होते। एक साधारण प्लास्टिक बैग को पूरी तरह से टूटने या गलने में 100 से 500 साल का समय लग सकता है। तब तक यह मिट्टी और पानी में मिलकर जहरीले सूक्ष्म कणों (Microplastics) में बदल जाता है, जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाते हैं।

 

2. समुद्री और वन्य जीवों की सुरक्षा

हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में पहुंचता है। समुद्री जीव- जैसे कछुए, मछलियां और व्हेल्स अक्सर प्लास्टिक बैग को खाना समझकर निगल लेते हैं, जिससे उनके पेट में ब्लॉक हो जाता है और दम घुटने से उनकी मौत हो जाती है। ठीक इसी तरह, शहरों में लावारिस घूमने वाले पशु- जैसे गाय कचरे के ढेर से प्लास्टिक बैग खा लेते हैं, जो उनके लिए जानलेवा साबित होता है।

 

3. मानव स्वास्थ्य की रक्षा

जब प्लास्टिक बैग मिट्टी में दबे रहते हैं, तो इनसे निकलने वाले हानिकारक केमिकल्स जमीन के अंदर के पानी (Groundwater) में मिल जाते हैं। जब पशु या मछलियां इसे अनजाने में खाते हैं, तो यह फूड चेन (खाद्य श्रृंखला) के जरिए इंसानों के शरीर तक पहुंच जाता है, जिससे कैंसर और हार्मोनल असंतुलन जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

 

4. ड्रेनेज सिस्टम का ब्लॉक होना

शहरी इलाकों में प्लास्टिक बैग्स का सबसे बड़ा साइड-इफेक्ट यह दिखता है कि ये नालियों और सीवर पाइपों में फंस जाते हैं। बारिश के मौसम में इसकी वजह से सड़कों पर पानी भर जाता है और बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है।

 

हम इस मुहिम में क्या योगदान दे सकते हैं?

बदलाव हमेशा घर से शुरू होता है। इस दिन को सार्थक बनाने के लिए हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ये छोटे बदलाव कर सकते हैं:

 

'नो' कहना सीखें: जब भी आप सब्जी या राशन लेने जाएं, तो दुकानदार से प्लास्टिक बैग लेने से साफ मना करें।

 

विकल्प अपनाएं: हमेशा अपनी गाड़ी में या जेब में एक कपड़े या जूट का थैला साथ रखें।

 

जागरूकता फैलाएं: अपने परिवार और दोस्तों को भी प्लास्टिक के नुकसान बताएं और उन्हें भी थैला इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करें।

 

एक कड़वा सच: एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में हर मिनट लगभग 20 लाख प्लास्टिक बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उनका औसत उपयोग समय सिर्फ 12 मिनट होता है। इस 12 मिनट की सुविधा के लिए हम अपनी धरती को सदियों का नुकसान पहुंचा रहे हैं।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।