Avatar Meher Baba: अवतार मेहेर बाबा कौन थे, कब और क्यों मनाया जाता है मौन पर्व?

The picture shows Avatar Meher Baba, who observed silence continuously for 44 years

Spiritual Guru Merwan Sheriar Irani: अवतार मेहेर बाबा 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक संत और गुरु थे। उनका वास्तविक नाम मेरवान शेरियार ईरानी था। वे प्रेम, करुणा, सेवा और मानव एकता का संदेश देने के लिए जाने जाते हैं। मेहेर बाबा का सबसे अनूठा संकल्प था कि उन्होंने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया और फिर कभी बोलकर संवाद नहीं किया। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व/ Silence Day मनाया जाता है।ALSO READ: कब है गुरु पूर्णिमा 2026 में? जानें तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

 

अवतार मेहेर बाबा कौन थे?

जन्म और मूल नाम: उनका जन्म 25 फरवरी 1894 को पुणे में एक पारसी (ईरानी) परिवार में हुआ था। उनका बचपन का नाम मेरवान शेरियर इरानी था। 'मेहेर बाबा' नाम उन्हें उनके शुरुआती शिष्यों ने दिया, जिसका अर्थ है 'दयालु पिता'।

 

आध्यात्मिक यात्रा: जब वे 19 वर्ष के थे, तब उनकी मुलाकात एक प्रसिद्ध सूफी संत हजरत बाबाजान से हुई, जिन्होंने मेरवान के भीतर आध्यात्मिक चेतना जागृत की। इसके बाद वे शिरडी के साईं बाबा, उपासना महाराज, नारायण महाराज और ताजुद्दीन बाबा जैसे महान आध्यात्मिक गुरुओं के संपर्क में आए।ALSO READ: Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी से शुरू होंगे चातुर्मास, 4 महीने के लिए लग जाएगी मंगल कार्यों पर रोक

 

कार्य: उन्होंने महाराष्ट्र के अहमदनगर के पास 'मेहेराबाद' को अपना मुख्य केंद्र बनाया। उन्होंने कुष्ठ रोगियों, गरीबों और मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों, जिन्हें वे 'मस्त' कहते थे की सेवा के लिए कई औषधालय, स्कूल और आश्रम खोले।

 

प्रसिद्ध संदेश: उनका सबसे प्रसिद्ध कथन है: 'I have come not to teach, but to awaken' (उन्होंने अपने प्रसिद्ध 'यूनिवर्सल मैसेज'/ Universal Message में कहा था, मैं यहां सिखाने नहीं, बल्कि जगाने आया हूं) और उनका एक सार्वभौमिक नारा है— 'Don't worry, be happy' (चिंता मत करो, खुश रहो)। 31 जनवरी 1969 को मेहराबाद, अहमदनगर (महाराष्ट्र) में उन्होंने महासमाधि ली। 

 

मौन पर्व (Silence Day) कब मनाया जाता है?

मेहेर बाबा के अनुयायियों और प्रेमियों द्वारा हर साल 10 जुलाई को 'मौन पर्व' के रूप में मनाया जाता है। आध्यात्मिक गुरु मेहेर बाबा के अनुयायियों के लिए आज का दिन बेहद खास है। मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 से आजीवन मौन धारण किया था, इसलिए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए प्रतिवर्ष 10 जुलाई को 'मौन दिवस' मनाया जाता है।

 

मौन पर्व क्यों मनाया जाता है?

मेहेर बाबा ने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था, जो उनके जीवन के अंत (1969 में देहत्याग) तक यानी 44 वर्षों तक लगातार जारी रहा। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है। 

 

बाबा के मौन रहने और इस पर्व को मनाए जाने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

 

शब्दों से परे संवाद: मेहेर बाबा का मानना था कि ईश्वर अनादि काल से मौन रहकर काम कर रहा है। इंसानों ने ईश्वर की वाणी यानी शब्दों को समझने के बजाय उन पर विवाद करना शुरू कर दिया। इसलिए उन्होंने कहा कि वे वाणी से नहीं, बल्कि सीधे लोगों के 'हृदय' से संवाद करेंगे।

 

आध्यात्मिक अनुशासन: जब बाबा मौन थे, तो वे शुरू में एक 'अल्फाबेट बोर्ड'/ अक्षर पट्टिका की मदद से और बाद में केवल हाथ के इशारों से बात करते थे। उन्होंने अपने शिष्यों को सिखाया कि जीभ का मौन दरअसल मन को शांत करने और आंतरिक ऊर्जा को संचित करने की पहली सीढ़ी है।

 

प्रेम की गहराई: बाबा के शिष्यों के अनुसार, बाबा का कहना था कि जब दो लोग गुस्से में होते हैं तो उनके दिलों की दूरी बढ़ जाती है, इसलिए वे चिल्लाते हैं। लेकिन जब दो लोग गहरे प्रेम में होते हैं, तो वे बहुत धीरे बोलते हैं, और जब प्रेम पराकाष्ठा पर होता है, तो शब्दों की जरूरत ही नहीं पड़ती; केवल मौन ही काफी होता है।

 

मौन पर्व कैसे मनाया जाता है?

हर साल 10 जुलाई को मेहेर बाबा के अनुयायी स्वेच्छा से 24 घंटे (9 जुलाई की आधी रात से 10 जुलाई की आधी रात तक) का पूर्ण मौन व्रत रखते हैं। आज भी इस दिन वे अपनी सामान्य दिनचर्या के काम करते हुए भी किसी शब्द का उच्चारण नहीं करते और ईश्वर के नाम का मानसिक स्मरण करते हैं। उनका प्रमुख आश्रम मेहराबाद (अहमदनगर, महाराष्ट्र) में स्थित है, जहां देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं। उनके अनुयायी भारत के अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अन्य देशों में भी बड़ी संख्या में हैं। 

 

अवतार मेहेर बाबा मौन पर्व- FAQs

 

1. अवतार मेहेर बाबा कौन थे?

वे 20वीं शताब्दी के प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु थे, जिन्होंने प्रेम, सेवा और मानव एकता का संदेश दिया।

 

2. मौन पर्व कब मनाया जाता है?

हर वर्ष 10 जुलाई को मौन पर्व मनाया जाता है।

 

3. मेहेर बाबा ने मौन कब धारण किया था?

उन्होंने 10 जुलाई 1925 को मौन धारण किया था।

 

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बकरी कान हिलाए तो समझो बारिश आए! हमारे किसान इन 5 पशुओं, पक्षियों, कीटों को देख बता देते थे कब और कितनी होगी बरसात

सालों से, भारतीय किसानों ने आसमान को समझने के अपने तरीके विकसित किए थे। ये कोई बिखरी हुई लोक-मान्यताएं या अलग-थलग परंपराएं नहीं थीं। कई इलाकों में, समुदाय बहुत ध्यान से देखे-परखे गए तरीकों को अपनाते थे। ये तरीके पीढ़ियों तक बेहतर बनाए गए, ग्रंथों में दर्ज किए गए और बहुत ही एकरूपता के साथ आगे की पीढ़ियों तक पहुंचाए गए।

खबरों के अनुसार, भारत में बारिश का अनुमान लगाने के कुछ सबसे पुराने तरीके खगोल विज्ञान से गहराई से जुड़े थे। खगोल विज्ञान और समय की गणना पर सबसे शुरुआती भारतीय ग्रंथों में से एक, ‘वेदांग ज्योतिष’ ने ‘पंचांग’ (हिंदू कैलेंडर) की नींव रखी, जिसका इस्तेमाल आज भी देश के कई हिस्सों में किया जाता है। सूरज, चांद और तारों की चाल पर नजर रखकर, इस तरीके से लोगों को मौसम में बदलाव और बारिश के पैटर्न का अंदाजा लगाने में मदद मिलती थी।

सदियों बाद, खगोलशास्त्री और विद्वान वराहमिहिर ने इन विचारों को और आगे बढ़ाया। छठी सदी ईस्वी में लिखी अपनी रचना ‘बृहत्संहिता’ में, उन्होंने बारिश, खगोलीय घटनाओं और वायुमंडलीय स्थितियों के बीच संबंधों का वर्णन किया। कुछ शोधकर्ताओं के अनुसार, इन अवलोकनों के कुछ हिस्से आधुनिक मौसम विज्ञान की अवधारणाओं से मिलते-जुलते हैं।

कई गांवों में, हिंदू नव वर्ष के दौरान ‘ग्राम जोशी’ या गांव का ज्योतिषी सालाना बारिश और फसल के बारे में भविष्यवाणियां पढ़कर सुनाता था। पीढ़ियों से चली आ रही गणनाओं पर आधारित ये भविष्यवाणियां अक्सर किसानों को आने वाले खेती के मौसम की योजना बनाने में मदद करती थीं।

कई रिपोर्टों के अनुसार, समय के साथ किसानों ने खगोलीय परंपराओं के साथ-साथ मौसम का अनुमान लगाने के स्थानीय तरीके भी विकसित किए। आंध्र प्रदेश की ऐसी ही एक परंपरा थी ‘तट्टा संकेतम’; इसमें अनाज से भरी टोकरी के ऊपर एक गिलास रखा जाता था और एक बच्चा उसे सावधानी से संतुलित करता था। गिलास अंत में जिस दिशा में गिरता था, उसे ग्रहों की स्थिति के साथ जोड़कर देखा जाता था और माना जाता था कि इससे आने वाले मॉनसून के मिजाज का पता चलता है।

पीढ़ियों से, किसान अपने घरों और खेतों के आस-पास होने वाले बदलावों को समझना भी सीख गए थे। बकरियों का बार-बार कान फड़फड़ाना, रात भर उल्लुओं का लगातार बोलना और लाल बालों वाली इल्लियों का तेजी से सुरक्षित जगह की ओर बढ़ना – ये सभी इस बात के संकेत माने जाते थे कि बारिश होने वाली है। बाद में वैज्ञानिकों ने पाया कि कई कीड़े इंसानों के महसूस करने से बहुत पहले ही अपने एंटीना से नमी में होने वाले बदलावों का पता लगा सकते हैं। शायद इसीलिए ऐसी बातें अक्सर सही साबित होती थीं।

मधुमक्खियों का जल्दी अपने छत्तों में लौटना और मकड़ियों का तेजी से अपने जाले ठीक करना बदलते मौसम की और चेतावनियां मानी जाती थीं। इसके अलावा, शाम के समय खाना पकाने से निकलने वाला धुआं, जो ऊपर उठने के बजाय नीचे ही रहता था, उसे हवा में नमी बढ़ने का संकेत माना जाता था।

खबरों के मुताबिक, किसान शायद ही कभी सिर्फ एक संकेत पर निर्भर रहते थे। इसके बजाय, वे बुवाई का फैसला करने से पहले कई संकेतों की जांच-पड़ताल करते थे और खेती से जुड़े फैसलों में वैसी ही सावधानी और अनुशासन बरतते थे, जिसकी अनिश्चितता के कारण जरूरत होती थी।

Shukra-Ketu transit in Leo: सिंह राशि में केतु और शुक्र का संयोग बनाएगा 4 राशियों को धनवान, जानें कौन सी हैं ये राशियां

Shukra-Ketu transit in Leo: सिंह सूर्य देव की राशि है। इसमें वर्तमान में दो काफी पावरफुल ग्रह विराजमान हैं। इनमें से एक हैं छाया ग्रह केतु और दूसरा सुख, सौंदर्य और प्रेम का कारक ग्रह शुक्र। केतु जहां इस राशि में 18 मई 2025 से हैं और 31 अक्टूबर 2026 तक यहीं रहने वाले हैं, वहीं भौतिक सुख और ऐश्वर्य के दाता शुक्र ने 4 जुलाई को इसमें प्रवेश किया है। सिंह राशि में इन दोनों ग्रहों के मिलन से एक दुर्लभ ‘शुक्र-केतु युति’ का निर्माण हुआ है।

ज्योतिष में शुक्र को सांसारिक सुख और केतु को आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि का कारक माना जाता है। सिंह राशि में इनका यह योग जातकों को भौतिक समृद्धि देने के साथ-साथ सही निवेश और सही निर्णय लेने की गहरी समझ भी प्रदान करेगा। इन दोनों ग्रहों की दुर्लभ युति 4 राशियों के लिए शुभ मानी जा रही है। यह अद्भुत संयोग अगले 27 दिनों तक यानी 1 अगस्त 2026 तक बना रहेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, शुक्र और केतु की यह जुगलबंदी 4 राशियों के लिए भाग्य के द्वार खोलने वाली मानी जा रही है।

मिथुन राशि : यह युति मिथुन राशि के तीसरे भाव में हो रही है। इससे आपके साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में आपकी संवाद शैली से लोग प्रभावित होंगे। भाई-बहनों और मित्रों के सहयोग से आपके बिगड़े काम बनेंगे। धर्म-कर्म में रुचि बढ़ेगी। किसी धार्मिक यात्रा के योग हैं।

सिंह राशि : सिंह राशि के जातकों के लग्न भाव में यह युति बन रही है। इससे इन्हें सबसे अधिक लाभ मिलेगा। काफी समय से चला आ रहा मानसिक तनाव और भ्रम समाप्त होगा। कला, मीडिया, लेखन या रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े लोगों को बड़ी प्रसिद्धि, मान-सम्मान और धन लाभ होगा।

तुला राशि : तुला राशि के जातकों के लिए यह गोचर ग्यारहवें भाव में हो रहा है। चूंकि शुक्र आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए यह समय आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। आपकी आमदनी में भारी बढ़ोतरी होगी और अटका हुआ धन वापस मिलेगा। व्यापार में कोई बड़ी और मुनाफे वाली डील फाइनल हो सकती है।

धनु राशि : यह युति इनके नवम भाव में होने जा रही है। अगले 27 दिनों तक भाग्य आपका पूरा साथ देगा। रुके हुए काम गति पकड़ेंगे। उच्च शिक्षा या नौकरी के लिए विदेश जाने का सपना देख रहे जातकों की बाधाएं दूर होंगी। नौकरीपेशा लोगों को बेहतर पैकेज के साथ नई नौकरी का ऑफर मिल सकता है।

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Shani Vakri 2026: इस तारीख से उल्टी होगी शनि की चाल, वृषभ और मिथुन सहित 4 राशियों को कर देगी मालामाल

Rashifal Today: आज के दिन किस मूलांक को होगा धन लाभ! जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। ये न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज के दिन आर्थिक मामलों में सोच-समझकर फैसले लेने का संकेत दे रहा है। आज ज्यादातर मूलांक वालों को अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने, बजट बनाने और भविष्य की आर्थिक योजनाओं पर ध्यान देने की सलाह दी गई है। आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन भविष्य की आर्थिक योजनाएं बनाने के लिए अच्छा रहेगा। खर्च करने से पहले अच्छी तरह सोचें और बिना जरूरत पैसा खर्च करने से बचें। अपने बजट का पालन करें और बचत पर ध्यान दें। सही योजना आपको आने वाले समय में आर्थिक मजबूती दे सकती है।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों से जुड़े मामलों में सावधानी रखने की जरूरत है। खर्चों पर नजर रखें और कोई भी बड़ा फैसला जल्दबाजी में न लें। बचत और निवेश की नई योजना बनाने के लिए दिन अच्छा है। किसी की सलाह मानने से पहले उसकी अच्छी तरह जांच जरूर करें।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज करियर और आय बढ़ाने के नए अवसर मिल सकते हैं। अपनी आर्थिक स्थिति पर ध्यान दें और समय-समय पर अपने बजट की समीक्षा करें। जरूरत पड़ने पर योजनाओं में बदलाव करने से न हिचकें। समझदारी से लिया गया फैसला भविष्य में लाभ देगा।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं। भावनाओं में आकर पैसा खर्च करने से बचें। जरूरी और गैर-जरूरी खर्चों में अंतर समझें। सही बजट और सोच-समझकर किए गए खर्च से आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रहेगी।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन आर्थिक मामलों में व्यस्त रह सकता है। बजट व्यवस्थित करें और फिजूलखर्ची से बचें। नए निवेश या कमाई के अवसर मिल सकते हैं। अगर आप योजना बनाकर आगे बढ़ेंगे तो आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आज अपने खर्चों का पूरा हिसाब रखें। केवल जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च करें। आपकी समझदारी और सही योजना भविष्य में आर्थिक मजबूती दिला सकती है। बजट बनाकर चलना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक सुरक्षा को प्राथमिकता दें। महंगी और लग्जरी चीजों पर खर्च करने से बचें। भविष्य को ध्यान में रखकर निवेश और बचत की योजना बनाएं। सही आर्थिक फैसले आने वाले समय में लाभ देंगे।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज का दिन लंबी अवधि की आर्थिक योजना बनाने के लिए अच्छा है। अपने निवेश और बजट की समीक्षा करें। भविष्य को ध्यान में रखकर लिए गए फैसले आर्थिक स्थिरता देंगे। अनावश्यक खर्चों से दूरी बनाए रखें।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज नए आर्थिक अवसर मिल सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी में कोई फैसला न लें। बढ़ते खर्चों पर नियंत्रण रखें और अपने वित्तीय लक्ष्यों की दोबारा समीक्षा करें। सोच-समझकर किया गया निवेश और सही योजना भविष्य में आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाएगी।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Monsoon Glow Secrets: उमस भरे मौसम में भी चेहरे पर रहेगा पार्लर जैसा निखार, नोट कर लें ये नेचुरल स्किन केयर टिप्स

A photo providing information on keeping the skin healthy and glowing during the rainy season

baarish ke mausam mein khubsurti ke tips: बदलते मौसम में आपकी त्वचा को खास देखभाल की जरूरत होती है। अपनी स्किन को हेल्दी और ग्लोइंग बनाए रखने के लिए इस आसान रूटीन को फॉलो करें:ALSO READ: घर पर BP चेक करते समय न करें ये गलतियां, जानें ब्लड प्रेशर नापने का सही तरीका

 

1. डीप क्लींजिंग है सबसे पहला कदम

उमस के कारण चेहरे पर पसीना, धूल और गंदगी जल्दी जम जाती है, जिससे रोमछिद्र (pores) बंद हो जाते हैं। तो दिन में कम से कम दो बार यानी सुबह और रात को सोने से पहले एक माइल्ड यानी हल्के फेस वॉश से चेहरा साफ करें।

 

ऑयली स्किन के लिए: अगर चेहरा बार-बार तैलीय हो जाता है, तो मुल्तानी मिट्टी या नींबू और शहद का होममेड फेस पैक लगाएं। यह त्वचा से एक्स्ट्रा ऑयल को सोख लेता है।

 

2. जेंटल एक्सफोलिएशन (सौम्य स्क्रब)

हफ्ते में 1 या 2 बार त्वचा से डेड स्किन सेल्स यानी मृत कोशिकाओं को हटाना जरूरी है, लेकिन ध्यान रहे कि स्क्रब बहुत ज्यादा हार्ड न हो।

 

नेचुरल उपाय: बेसन, हल्दी और ओटमील/ जई का आटा को मिलाकर घर पर ही एक बेहतरीन नेचुरल स्क्रब तैयार कर सकते हैं। यह बिना किसी नुकसान के त्वचा को साफ करता है।

 

3. हाइड्रेशन को न करें नजरअंदाज

अक्सर लोग सोचते हैं कि मानसून में हवा में पहले से नमी है, तो मॉइस्चराइजर की क्या जरूरत? यहीं पर सबसे बड़ी गलती होती है।

 

अंदर से हाइड्रेशन: दिन में 8 से 10 ग्लास पानी जरूर पिएं ताकि शरीर के टॉक्सिन्स/ विषाक्त पदार्थ बाहर निकल सकें।

 

सही मॉइस्चराइजर चुनें: भारी क्रीम की जगह वॉटर-बेस्ड या जेल-बेस्ड लाइट मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें। हयालूरोनिक एसिड (Hyaluronic Acid) और ग्लिसरीन वाले प्रोडक्ट्स त्वचा की नमी को बिना चिपचिपाहट के लॉक रखते हैं।

 

4. धूप न हो, फिर भी सनस्क्रीन है जरूरी

बादल होने का मतलब यह नहीं है कि आपकी त्वचा सुरक्षित है। सूरज की हानिकारक यूवी किरणें बादलों को पार करके भी आपकी स्किन को नुकसान पहुंचा सकती हैं और वक्त से पहले झुर्रियां ला सकती हैं।

 

टिप: घर से बाहर निकलते समय कम से कम SPF 30 या उससे ज्यादा वाली नॉन-कॉमेडोजेनिक यानी जो रोमछिद्रों को बंद न करे, यह सनस्क्रीन जरूर लगाएं।

 

5. लाइट मेकअप और पर्सनल हाइजीन

वॉटरप्रूफ मेकअप: इस मौसम में हैवी फाउंडेशन या थिक मेकअप से बचें। अगर मेकअप करना जरूरी हो, तो केवल लाइट और वॉटरप्रूफ प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें।

 

इन्फेक्शन से बचाव: यदि आप बारिश में भीग जाते हैं, तो तुरंत साफ पानी से नहाएं और खुद को अच्छी तरह सुखाएं। शरीर के मोड़ वाले हिस्सों- जैसे उंगलियों के बीच, गर्दन, अंडरआर्म्स को सूखा रखें ताकि फंगल इन्फेक्शन और खुजली की समस्या न हो।

 

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: समय रहते अगर हो जाए लक्षणों की पहचान, तो कैंसर जैसे रोगों का उपचार भी संभव

August 2026 eclipse: अगस्त में 15 दिनों के अंतर पर लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं, तारीख और सूतक काल

August 2026 eclipse: इस साल का अगला महीना अगस्त का होगा, जो दो बड़ी खगोल घटनाओं का गवाह बनेगा। इस माह में साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के एक सीधी रेखा में आ जाने पर लगता है। लेकिन यह धार्मिक और ज्योतिष रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण 15 दिनों के अंतराल पर लगेंगे। यह खगोलीय घटना सावन के महीने लगने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

सूर्य ग्रहण जहां 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, वहीं चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर रक्षा बंधन के दिन लगेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूतक काल लग जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। सूतक काल खत्म होने के बाद ही दोबारा मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ आदि धार्मिक कार्य शुरू होते हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है और विशेषज्ञ ग्रहण के प्रभावों का अध्ययन करते हैं।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त सावन अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा।

अगस्त 2026 में दूसरा चंद्र ग्रहण

अगस्त 2026 में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण, श्रावण मास की पूर्णिमा पर 28 अगस्त 2026 को लगेगा। इस दिन भारत में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार अप्रभावित रहेगा।

सूतक काल के नियम

सावन के माह में लगने वाले साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएंगे और इनका सूतक भी नहीं रहेगा। इसलिए इन दोंनों दिनों के पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रभाव नहीं होगा। हालांकि इसके ज्योतिषीय प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

  • सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।
  • ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

Yogini Ekadashi 2026 Vrat Niyam: योगिनी एकादशी व्रत में इन 4 में से एक भी काम किया, तो टूट जाएगा आपका व्रत, जानें योगिनी एकादशी व्रत के नियम और तारीख

Shani Vakri 2026: इस तारीख से उल्टी होगी शनि की चाल, वृषभ और मिथुन सहित 4 राशियों को कर देगी मालामाल

Shani Vakri 2026: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, शनि देव जातक को कर्मों के आधार पर फल देते हैं और न्याय करते हैं। जब भी शनि अपनी चाल बदलते हैं, तो माना जाता है कि इसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। इसलिए यह साल की सबसे महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटनाओं में से एक बन जाती है। इस समय मीन राशि में गोचर कर रहे शनि इस साल 27 जुलाई, 2026 को वक्री हो जाएंगे। यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है, जों कुछ राशियों के जातकों के लिए मुश्किल भरा हो सकता है। हालांकि, ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृषभ, मिथुन, वृश्चिक और कुंभ राशि वालों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है, जिससे करियर में तरक्की, फाइनेंशियल ग्रोथ और पर्सनल सफलता के मौके मिलेंगे।

शनि वक्री क्या है?

जब कोई ग्रह पीछे या अपने मार्ग से विपरीत दिशा में चलने लगा है, तो उसे वक्री कहा जाता है। हालांकि ग्रह असल में अपनी दिशा नहीं बदलता है, लेकिन इस ऑप्टिकल घटना को ज्योतिषीय रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि शनि के वक्री होने का समय उसके असर को बढ़ाता है। जब शनि किसी राशि में उल्टी चाल चलते हैं, तो वे व्यक्ति के पुराने कर्मों का हिसाब करते हैं।

इन 4 राशियों के लिए फायदेमंद होगी शनि की वक्री चाल

वृषभ राशि : शनि की वक्री चाल वृषभ राशि के जातकों के लिए वरदान साबित होगी। आपकी आय में अप्रत्याशित बढ़ोतरी होने के योग हैं। लंबे समय से अटका हुआ धन वापस मिलेगा और मान-सम्मान बढ़ेगा। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या मनचाहा ट्रांसफर मिल सकता है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि के जातकों के लिए शनि देव दशम भाव में वक्री होंगे, जो कि कर्म का भाव है। नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं, तो यह समय सर्वश्रेष्ठ है। पुराने निवेश से भी बड़ा मुनाफा होने की उम्मीद है। इस दौरान पैतृक संपत्ति से जुड़ा कोई बड़ा लाभ हो सकता है। पारिवारिक विवाद सुलझेंगे।

वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि की यह उल्टी चाल मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने वाली होगी। जो काम पिछले कई महीनों या सालों से अटके हुए थे, वे अब तेजी से पूरे होने लगेंगे। जो लोग विदेश जाने का सपना देख रहे हैं या विदेशी कंपनियों से जुड़े हैं, उन्हें कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।

कुंभ राशि : चूंकि शनि देव आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए मीन राशि में उनकी वक्री चाल आपके धन भाव को प्रभावित करेगी। इस अवधि में आपकी सुख-सुविधाओं में वृद्धि होगी और आप धन की बचत करने में सफल रहेंगे। आप कार्यस्थल पर लोगों को प्रभावित करने में सफल रहेंगे।

वक्री शनि के असर को कम करने के उपाय

  • शनिवार शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं।
  • शनिवार को किसी जरूरतमंद को काले तिल, काली उड़द की दाल या छाता दान करें।
  • शनि देव की कृपा पाने के लिए रोजाना 108 बार “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करें।

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Rashifal Today: 1 से लेकर 9 मूलांक वालों के लिए कैसा रहेगा आज का दिन, जानें किन बातों का रखना होगा खास ध्यान

Aaj Ka Rashifal: अंक ज्योतिष के अनुसार, हर इंसान की जन्मतिथि का अपना खास महत्व होता है। यह न सिर्फ उनके स्वभाव और व्यक्तित्व को बताता है, बल्कि उनके भविष्य के बारे में भी संकेत देती है। आज के दिन अंक ज्योतिष के अनुसार आज नए निवेश या बड़े खर्च से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। अपने बजट की समीक्षा करें और लंबी अवधि के आर्थिक लक्ष्यों पर ध्यान दें। संतुलित योजना आपको भविष्य में आर्थिक मजबूती देगी।

आइए जानते हैं कैसा होगा मूलांक 1 से 9 तक के लोगों का दिन

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सतर्क रहने की जरूरत है। बिना सोचे-समझे खर्च करने से बचें और भविष्य को ध्यान में रखते हुए वित्तीय योजना बनाएं। बजट का पालन करने और बचत पर ध्यान देने से आने वाले समय में आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज धन संबंधी मामलों में समझदारी से काम लें। अनावश्यक खर्चों से बचें और अपने बजट के अनुसार चलें। अगर निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो सही अवसर का इंतजार करें। लंबी अवधि की योजनाएं भविष्य में लाभ दिला सकती हैं।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आपकी आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव के संकेत हैं। नए अवसरों पर नजर रखें और बाजार की जानकारी लेते रहें। समय के अनुसार अपनी वित्तीय योजनाओं में बदलाव करने के लिए तैयार रहें। सोच-समझकर लिया गया फैसला भविष्य में फायदा देगा।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो घर और परिवार से जुड़े खर्च बढ़ सकते हैं, इसलिए जरूरी और गैर-जरूरी खर्चों में फर्क करें। भावनाओं में आकर पैसे खर्च करने से बचें। सही बजट और योजना से आर्थिक संतुलन बनाए रखना आसान होगा।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 14 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में अच्छी संभावनाएं बन रही हैं। व्यवस्थित बजट बनाकर चलें और अपनी क्षमताओं का सही उपयोग करें। नए निवेश या आय के अवसर मिल सकते हैं। जल्दबाजी की बजाय सोच-समझकर फैसले लेना लाभदायक रहेगा।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 24 तारीख को हुआ है, तो आज खर्चों को व्यवस्थित करने का दिन है। केवल जरूरी खर्चों पर ध्यान दें और फिजूलखर्ची से बचें। छोटी-छोटी वित्तीय बातों पर भी ध्यान देना जरूरी होगा। मेहनत और सही योजना से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाने के लिए अच्छा समय है। विलासिता की चीजों पर खर्च करने से बचें और निवेश से जुड़े फैसले सोच-समझकर लें। खर्चों पर नियंत्रण रखने से भविष्य में आर्थिक लाभ मिलेगा।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज अपनी आर्थिक रणनीति पर दोबारा विचार करें। बजट और निवेश योजनाओं की समीक्षा करें और जल्दबाजी में कोई खरीदारी न करें। धैर्य और समझदारी से लिए गए फैसले भविष्य में बेहतर आर्थिक परिणाम देंगे।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज नए निवेश या बड़े खर्च से पहले पूरी जांच-पड़ताल करें। जल्दबाजी में लिया गया फैसला नुकसान पहुंचा सकता है। अपने बजट की समीक्षा करें और लंबी अवधि के आर्थिक लक्ष्यों पर ध्यान दें। संतुलित योजना आपको भविष्य में आर्थिक मजबूती देगी।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

Ashadh Pradosh Vrat 2026 upay: आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत होगा कब, इस दिन खास उपाय करने वालों के घर जल्द बजेगी शादी की शहनाई

Ashadh Pradosh Vrat 2026 upay: हिंदी माह के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिश को समर्पित है। इस दिन प्रदोष व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान होते हैं। इस समय विधि-विधान से की गई भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना विशेष फल प्रदान करती है।

भगवान शिव और माता पार्वती के भक्त दिनभर उपवास रखकर प्रदोष काल में शिव परिवार की पूजा कर व्रत का पारण करते हैं। मान्यता है कि इस व्रत को करने वाली विवाहित महिलाओं के जीवन में सुख, शांति और सौभाग्य बढ़ता है। वहीं जो अविवाहित लोग सच्चे मन से यह व्रत रखते हैं, उनके विवाह के योग जल्दी बनने लगते हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, प्रदोष व्रत पर किए गए विशेष उपाय शादी में आ रही बाधाओं को दूर कर सकते हैं। आइए जानें आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत किस दिन किया जाएगा और इस दिन कौन से उपाय कर सकते हैं।

आषाढ़ का पहला प्रदोष व्रत

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई 2026 को सुबह 02 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और रात्रि 10 बजकर 29 मिनट के लगभग तक रहेगी। इसलिए आषाढ़ का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई रविवार को रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा। इस दिन प्रदोष काल पूजा मुहूर्त शाम 07 बजकर 22 मिनट से रात्रि 09 बजकर 24 मिनट तक रहेगा।

रवि प्रदोष व्रत का महत्व

रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव और सूर्यदेव की उपासना का अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने पर करियर और कारोबार में तरक्की के योग बनते हैं।

जल्द विवाह के लिए करें ये उपाय

विवाह में बार-बार रुकावटें आ रही हों, तो प्रदोष व्रत के दिन स्नान के बाद लाल वस्त्र पहनकर भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करें। पूजा के दौरान माता को सिंदूर अर्पित करें और उसी सिंदूर को माथे पर लगाकर शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें, इससे विवाह संबंधी बाधाएं दूर होने की मान्यता है।

विवाह में बार-बार अड़चनें आने का कारण कमजोर शुक्र ग्रह माना जाता है। प्रदोष व्रत पर भगवान शिव का शहद और सुगंधित जल से अभिषेक करें। इस उपाय से शुक्र ग्रह मजबूत होता है।

विवाह में बार-बार आ रही बाधाएं दूर करने के लिए प्रदोष व्रत पर भगवान शिव का विशेष अभिषेक करें। स्नान के बाद गंगाजल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर अर्पित करें। मान्यता है कि इससे ग्रह दोष शांत होते हैं और शीघ्र विवाह के शुभ योग बनने लगते हैं।

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बारिश के मौसम में चाय के साथ बनाएं ये 5 परफेक्ट कॉम्बिनेशन वाले क्रिस्पी स्नैक्स, हर कोई करेगा तारीफ

An image featuring delicious dishes to prepare during the rainy season, accompanied by a caption about monsoon-special snack recipes

Easy Snack Recipes: बारिश की बूंदें गिर रही हों और किचन से अदरक वाली चाय की खुशबू आ रही हो, तो पैर अपने आप स्नैक्स की तलाश में बढ़ जाते हैं। चाय का असली मजा तभी आता है जब साथ में कुछ बेहद कुरकुरा और चटपटा हो।ALSO READ: Monsoon Special Recipes: मानसून की 5 बेहतरीन रेसिपीज, देखते ही मुंह में आ जाएगा पानी

 

इस मानसून अपनी शाम की चाय का स्वाद दोगुना करने के लिए बनाएं ये 5 सुपर क्रिस्पी स्नैक्स, जिन्हें खाकर हर कोई आपकी कुकिंग की तारीफ करेगा:

 

1. कुरकुरे 'चावल के आटे के रिंग्स'

यह एक ऐसा स्नैक है जो चाय के साथ सबसे ज्यादा क्रिस्पी लगता है और इसे आप बनाकर कुछ दिनों के लिए स्टोर भी कर सकते हैं।

 

कैसे बनाएं: एक कप पानी में थोड़ा सा घी, नमक, अजवाइन, जीरा और तिल डालकर उबालें। पानी उबलने पर इसमें एक कप चावल का आटा मिलाकर गैस बंद कर दें और ढक दें। हल्का ठंडा होने पर इसे आटे की तरह गूंथ लें। अब छोटी-छोटी लोइयां लेकर पतली रस्सी जैसी बेलें और दोनों छोर जोड़कर रिंग्स यानी छल्ले बना लें। इन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें।

 

2. कैफ़े स्टाइल 'क्रिस्पी कॉर्न फ्रिटर्स' 

बारिश के मौसम में ताजे भुट्टे के दानों से बना यह स्नैक चाय के साथ एक परफेक्ट कॉम्बिनेशन है।

 

कैसे बनाएं: उबले हुए स्वीट कॉर्न के दानों में बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, थोड़ा सा बेसन और कुरकुरेपन के लिए बराबर मात्रा में चावल का आटा मिलाएं। इसमें चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर और हल्का सा पानी छिड़क कर एक गाढ़ा मिश्रण तैयार करें। चम्मच की मदद से इन्हें गरम तेल में डालें और एकदम क्रिस्पी होने तक डीप फ्राई करें।

 

3. लच्छा आलू पकौड़ा

अगर घर में कोई खास सब्जी नहीं है, तो सिर्फ आलू और प्याज से यह बेहद क्रिस्पी स्नैक मिनटों में बन जाता है।

 

कैसे बनाएं: कच्चे आलुओं को कद्दूकस कर लें और पानी से अच्छी तरह धोकर पूरा पानी निचोड़ लें। अब इन आलू के लच्छों में लंबा कटा प्याज, बारीक कटी हरी मिर्च, थोड़ा सा कॉर्नफ्लोर या अरारोट, मैदा, नमक और काली मिर्च मिलाएं। इसमें पानी बिल्कुल नहीं डालना है। इसके छोटे-छोटे लच्छेदार पकौड़े बनाकर तेज आंच पर तलें। यह बाजार के चिप्स से भी ज्यादा क्रिस्पी बनते हैं।

 

4. गार्लिक ब्रेड स्टिक्स

अगर आप चाय के साथ कुछ वेस्टर्न और क्रिस्पी ट्राई करना चाहते हैं, तो यह झटपट बनने वाली रेसिपी आपके लिए ही है।

 

कैसे बनाएं: कमरे के तापमान पर रखे मक्खन में बारीक कद्दूकस किया हुआ लहसुन, ऑरेगैनो, चिली फ्लेक्स और हरा धनिया मिलाकर एक गार्लिक बटर तैयार करें। अब रेगुलर ब्रेड स्लाइस को लंबे स्टिक्स के आकार में काट लें। इन स्टिक्स पर दोनों तरफ यह बटर लगाएं और तवे पर धीमी आंच पर दोनों तरफ से एकदम क्रिस्पी टोस्ट होने तक सेकें।

 

5. क्रिस्पी मूंग दाल भजिया 

रिमझिम बारिश में मूंग की दाल के मंगौड़े या भजिए मिल जाएं, तो शाम बन जाती है। यह ऊपर से बहुत कुरकुरे और अंदर से जालीदार होते हैं।

 

कैसे बनाएं: धुली मूंग की दाल को 2-3 घंटे के लिए भिगो दें। फिर इसे बिना पानी डाले या सिर्फ 1 चम्मच पानी के साथ दरदरा पीस लें। इस बैटर को 5 मिनट तक हाथ से अच्छे से फेंटें ताकि यह हल्का हो जाए। अब इसमें कुटा हुआ खड़ा धनिया, सौंफ, हींग, हरी मिर्च, अदरक का पेस्ट और ढेर सारा बारीक कटा प्याज और कढ़ी पत्ता मिलाएं। छोटे-छोटे भजिए गरम तेल में डालकर गोल्डन ब्राउन होने तक तलें।

 

चाय-स्नैक स्पेशल टिप: इन सभी क्रिस्पी स्नैक्स के साथ पुदीने-धनिया की तीखी हरी चटनी और लहसुन-टमाटर की चटपटी चटनी परोसें। और हां, चाय में अदरक के साथ थोड़ा सा दालचीनी का टुकड़ा या लौंग जरूर डालें, यह मानसून में गले को भी राहत देगा और स्वाद भी बढ़ाएगा।

 

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