Who is Champat Rai: प्रोफेसर से राम मंदिर ट्रस्ट के पावरफुल सेक्रेटरी बनने तक, जानें चंदा चोरी विवाद के बाद इस्तीफा देने वाले चंपत राय की पूरी कहानी

Ram Mandir Donation Theft Controversy: अयोध्या राम मंदिर से जुड़ी एक बड़ी खबर आई है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राम मंदिर दान चोरी विवाद के तूल पकड़ने के बाद उन्होंने यह बड़ा कदम उठाया है।

इस विवाद को लेकर अयोध्या में विश्व हिंदू परिषद (VHP) की एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-लेवल बैठक हुई, जिसके ठीक बाद चंपत राय के इस्तीफे की खबर आई। वीएचपी इस पूरे विवाद से संगठन की छवि को हो रहे नुकसान को लेकर बेहद चिंतित थी। आइए जानते हैं चंपत राय के इस्तीफे के पीछे की पूरी कहानी और एक केमिस्ट्री टीचर से राम मंदिर ट्रस्ट के सबसे ताकतवर पद तक पहुंचने का उनका पूरा सफरनामा।

क्यों देना पड़ा चंपत राय को इस्तीफा?

सूत्रों के अनुसार, अयोध्या में दान विवाद को लेकर FIR दर्ज होने से ठीक पहले वीएचपी की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा, निर्माण प्रभारी गोपाल राव के साथ-साथ वीएचपी के महासचिव बजरंग लाल बागरा और केंद्रीय संगठनात्मक सचिव मिलिंद परांडे समेत कई बड़े पदाधिकारी शामिल हुए थे।

इस बैठक में एसआईटी जांच और दान विवाद से उपजे हालातों पर गंभीर चर्चा हुई। चूंकि चंपत राय वीएचपी और राम मंदिर आंदोलन का एक बेहद प्रभावशाली चेहरा रहे हैं, इसलिए उनके इर्द-गिर्द खड़े हुए इस विवाद से संगठन की साख पर आंच आ रही थी। मामले में आरोपी टीनू यादव को चंपत राय का करीबी बताया जा रहा है, जबकि अन्य आरोपी लवकुश और अनुकल्प, अनिल मिश्रा के करीबी माने जा रहे हैं। इसी दबाव के बीच चंपत राय ने पद छोड़ने का फैसला किया।

कौन हैं चंपत राय? केमिस्ट्री टीचर से ट्रस्ट के महासचिव बनने का सफर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव होने के साथ-साथ चंपत राय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के उपाध्यक्ष भी हैं। राम मंदिर आंदोलन के सबसे मुखर चेहरों में शामिल चंपत राय की पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प रही है।

चंपत राय का जन्म वर्ष 1946 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ था। वह बचपन के दिनों से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से प्रभावित थे और संघ से जुड़ गए थे। उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को चुना और बिजनौर के धामपुर में स्थित आश्रम डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री के प्रोफेसर बन गए।

साल 1975 में जब देश में आपातकाल लागू हुआ, तब चंपत राय को 1977 में उनके कॉलेज से ही गिरफ्तार कर लिया गया था। राम जन्मभूमि आंदोलन और संघ की गतिविधियों से जुड़ाव के कारण उन्हें 18 महीने तक जेल की सलाखों के पीछे गुजारने पड़े थे। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने वापस कॉलेज जाने के बजाय पूरी तरह समाज सेवा और संगठन को अपना जीवन समर्पित कर दिया और साल 1980 में आधिकारिक रूप से वीएचपी में शामिल हो गए।

शंकराचार्य ने भी की थी हटाने की मांग, खड़ा हुआ था विवाद

यह पहली बार नहीं है जब चंपत राय विवादों या चर्चाओं में रहे हैं। राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के समय भी वह तब विवादों में आए थे जब उत्तर पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने उन्हें महासचिव पद से हटाने की मांग की थी।

शंकराचार्य का तर्क था कि चंपत राय ‘रामानंदी’ संप्रदाय से नहीं आते हैं, इसलिए वह इस धार्मिक ट्रस्ट के प्रमुख या महासचिव पद पर रहने के योग्य नहीं हैं। उन्होंने ट्रस्ट पर रामानंदी संप्रदाय की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया था।

चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। एसआईटी (SIT) इस समय दान चोरी मामले की बारीकी से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल केस में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पहली FIR दर्ज! इन 8 लोगों के नाम शामिल, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

Ram Mandir donation row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चढ़ावा एवं चंदा चोरी से जुड़े मामले में गुरुवार (25 जून) को पहली FIR दर्ज की गई। इससे दो दिन पहले मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंपी थी। पुलिस के एक अधिकारी ने पीटीआई से गुरुवार को पुष्टि की है कि इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। यह केस अयोध्या थाने में दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी का गठन किया था। यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

किसके खिलाफ दर्ज हुआ है केस?

सूत्रों के मुताबिक, इस FIR में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम नहीं है। हालांकि, बताया जा रहा है कि उनके ड्राइवर टिन्नू यादव का नाम शामिल किया गया है। इसके अलावा अनुकल्प मिश्रा और अविनाश शुक्ला के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, अभी यह दावा मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है। यूपी सरकार की तरफ से आधिकारिक बयान का इंतजार है।

पुलिस सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रमाशंकर यादव, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, लवकुश मिश्र, रमाशंकर मिश्र, सुभाष श्रीवास्तव तथा मनीष कुमार यादव नामक व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि एसआईटी ने कुछ कठोर सिफारिशें की हैं। अधिकारी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इस मामले को लेकर बहुत गंभीर हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित की गई थी।

यह कदम अयोध्या राम मंदिर को मिले चढ़ावे की रकम के दुरुपयोग के आरोप सामने आने के बाद उठाया गया था। एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

गंभीर धाराओं में FIR दर्ज

पुलिस के अनुसार चोरी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक षड़यंत्र समेत विभिन्न आरोपों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर BNS की धारा 306, 316 (5) , 317 (4) और 317 (5) लगाई गई हैं। मंदिर ट्रस्ट के एक सदस्य ने SIT की शुरुआती जांच के आधार पर यह FIR कराई है।

किसने दर्ज कराई FIR?

न्यूज 18 के मुताबिक, यह FIR श्री राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की लिखित शिकायत के आधार पर अयोध्या में दर्ज की गई है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर यह मामला दर्ज किया है। यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत दर्ज किया गया है, जिनमें धारा 306, 316(5) और 317 शामिल हैं।

यह घटनाक्रम तब हुआ जब दान में मिली रकम की चोरी के आरोपों की जांच कर रही SIT ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंप दी है। यह रिपोर्ट लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (होम) संजय प्रसाद को सौंपी, जो ट्रस्ट के पदेन सदस्य भी हैं।

राम मंदिर के लिए भक्तों द्वारा दिए गए दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों पर विवाद इस महीने की शुरुआत में तब शुरू हुआ, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि रिपोर्टों से पता चलता है कि दान के करोड़ों रुपये गायब हैं।

VHP ने की थी केस दर्ज करने की मांग

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अयोध्या में राम मंदिर को मिले चढ़ावे की कथित हेराफेरी मामले में FIR दर्ज करने और समयबद्ध जांच करने की मांग करते हुए कहा है कि दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। VHP के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अलोक कुमार ने पीटीआई से कहा कि जांच चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए और और आरोपियों को न्याय के दायरे में लाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हम मांग करते हैं कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले में FIR दर्ज होनी चाहिए, जांच में तेजी लाई जानी चाहिए, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में रोजाना सुनवाई होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।” कुमार ने कहा कि जांच चार महीने के भीतर पूरी होनी चाहिए ताकि दोषियों को बिना विलंब के सजा मिल सके।

VHP की यह मांग ऐसे समय में आई है जब दान राशि में कथित हेराफेरी के आरोपों की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। एसआईटी की यह रिपोर्ट लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी।

SIR जांच जारी

अधिकारियों ने बताया कि एसआईटी की जांच अभी जारी है और मामले से जुड़े तथ्यों का संकलन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर दान में कथित अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था।

एसआईटी द्वारा प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद पंत ने कहा कि टीम अगले 10 से 15 दिनों में अंतिम रिपोर्ट सौंपने का प्रयास कर रही है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को आरोपों से जुड़ी खबरों का हवाला देते हुए कहा था कि राम मंदिर को चंदे में मिले करोड़ों रुपये गायब हैं। उन्होंने अदालत से मामले का संज्ञान लेने की अपील की थी।

FIR पर अखिलेश का रिएक्शन

अयोध्या मामले में केस दर्ज होने के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव का बयान सामने आया है। अखिलेश ने X पर लिखा, “भाजपा राज में नाइंसाफी की दिखेगी ये झांकी… फुनगी को फांसी, शाखाओं को मिलेगी माफी! जनता कह रही है कि पहले SIT के बहाने सारे सबूत साफ कर दिये गये होंगे और ये निश्चित कर लिया गया होगा कि किन बड़ी मछलियों को बचाना है और किसको फंसाना है, उसके बाद FIR हो  रही है। लगता है SIT को पहले रिपोर्ट बनाकर दे दी गई होगी और उसके हिसाब से जांच की गई होगी मतलब निष्कर्ष पहले निकाल लिया गया होगा।”

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