Delhi Weather Today: दिल्ली में आज सुहावने मौसम के बीच बढ़ी उमस, देखें अगले 5 दिन का वेदर फोरकास्ट

Delhi Weather Today: शनिवार सुबह दिल्ली में आसमान में बादल छाए रहे और मौसम उमस भरा रहा। इससे लोगों को तेज गर्मी से थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन उमस की वजह से परेशानी बनी रही। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने आज दिन में आंधी-तूफान के साथ बारिश की संभावना जताई है। इस दौरान राष्ट्रीय राजधानी का अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है।

शहर में उमस का स्तर करीब 95 प्रतिशत है, जिससे तापमान अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद मौसम काफी असहज महसूस हो रहा है।

बता दें कि दिल्ली में नमी (ह्यूमिडिटी) का स्तर करीब 95% है। इसलिए तापमान कम होने के बावजूद लोगों को उमस और चिपचिपाहट ज्यादा महसूस हो रही है।

IMD के अनुसार, शनिवार के लिए मौसम को लेकर कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि, दिन भर बारिश के साथ आंधी-तूफान जारी रहने की संभावना है। इसके साथ ही मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान लगाया है।

अगले 5 दिन कैसा रहेगा मौसम?

वहीं, रविवार (5 जुलाई) को भी दिल्ली में आसमान में आमतौर पर बादल छाए रहने और मध्यम बारिश होने की उम्मीद है। सुबह और दोपहर के समय बहुत हल्की से हल्की बारिश के साथ-साथ आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। शाम और रात के समय भी मौसम ऐसा ही रहने की उम्मीद है।

इस दौरान रविवार को अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस रहने की उम्मीद है, जबकि न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है।

6 जुलाई से 9 जुलाई के बीच, राजधानी में हर दिन आंधी-तूफान के साथ बारिश होने की उम्मीद है। अधिकतम तापमान रविवार को 32 डिग्री सेल्सियस से धीरे-धीरे गिरकर 7, 8 और 9 जुलाई तक लगभग 31 डिग्री सेल्सियस तक आ सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की उम्मीद है।

IMD ने लोगों को सलाह दी है कि वे मौसम की जानकारी से अपडेट रहें, खासकर आंधी-तूफान के दौरान, और यात्रा करते समय जरूरी सावधानी बरतें।

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Landslide in Uttarakhand: उत्तराखंड में बारिश का कहर, भूस्खलन से केदारनाथ-बद्रीनाथ मार्ग प्रभावित

Landslide in Uttarakhand: उत्तराखंड के कई इलाकों में भारी बारिश के कारण भूस्खलन जैसी घटनाएं हुईं, जिससे ट्रैफिक तो बाधित हुआ ही साथ ही देहरादून सहित कई जिलों में मौसम अलर्ट जारी कर दिया गया। वहीं, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी दी है। बता दें कि लगातार बारिश और पहाड़ों से गिरते मलबे के कारण कई प्रमुख सड़कों पर आवाजाही प्रभावित हुई है, जिनमें चमोली जिले का बद्रीनाथ नेशनल हाईवे और रुद्रप्रयाग जिले का केदारनाथ यात्रा मार्ग शामिल है।

इस भूस्खलन के कारण केदारनाथ यात्रा मार्ग पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर जमा हो गए, जिससे अधिकारियों को कुछ समय के लिए आवाजाही को नियंत्रित करना पड़ा। मलबे को हटाने और तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता बहाल करने के लिए राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के जवानों और स्थानीय अधिकारियों को तैनात किया गया।

इसके अलावा, चमोली जिले में भी बद्रीनाथ नेशनल हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ, जब अस्थिर पहाड़ियों से पत्थर और मलबा गिर गया। इसके बाद सड़क साफ करने वाली टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और रास्ता खोलने का काम शुरू किया, ताकि राज्य के इस महत्वपूर्ण धार्मिक और परिवहन मार्ग पर आवागमन फिर से सुचारू हो सके।

बारिश और भूस्खलन ने जनजीवन प्रभावित

बारिश की इस नई शुरुआत ने उत्तराखंड के कई हिस्सों में जनजीवन को प्रभावित किया है। प्रशासन ने नदियों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और संवेदनशील बस्तियों पर कड़ी निगरानी शुरू कर दी है।

मानसून से जुड़ी आपदाओं की आशंका के बीच, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को देहरादून में राज्य-स्तरीय प्री-मानसून मॉक ड्रिल का जायजा लिया और अधिकारियों को आपदा से निपटने की तैयारियों को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने आपात स्थिति से निपटने के लिए तेज प्रतिक्रिया प्रणाली, विभागों के बीच बेहतर समन्वय और आधुनिक तकनीक के उपयोग पर भी जोर दिया।

समीक्षा बैठक के दौरान धामी ने कहा, “आपदा प्रबंधन सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।” उन्होंने अधिकारियों से तैयारी, जोखिम कम करने और बचाव कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने को कहा।

मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

वहीं, IMD ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में भारी बारिश जारी रह सकती है, जिससे पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, चट्टानें गिरने और अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ सकता है।

जिसको देखते हुए अधिकारियों ने केदारनाथ, बद्रीनाथ और चार धाम के अन्य तीर्थस्थलों की यात्रा करने वाले लोगों और तीर्थयात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम की जानकारी और सड़कों की स्थिति के बारे में पता कर लें।

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El Nino को लेकर केंद्र सरकार अलर्ट, PM मोदी ने मंत्रालयों को आपात योजना बनाने के दिए निर्देश

देश के कई हिस्सों में कमजोर मानसून और बारिश की बढ़ती कमी को लेकर चिंता के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी संबंधित मंत्रालयों को ‘अल नीनो’ (El Nino) के संभावित असर से निपटने के लिए आपातकालीन योजनाओं के साथ तैयार रहने का निर्देश दिया है।

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने हाल ही में भारत पर ‘अल नीनो’ के संभावित असर का आकलन करते हुए यूरोप में बढ़ते तापमान जैसी चरम मौसम की घटनाओं के प्रभावों की समीक्षा की। बता दें कि यह समीक्षा केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान ऐसे समय में की गई है, जब देश के कई इलाकों में बारिश में 40% से अधिक की कमी देखी जा रही है।

सूत्रों ने बताया कि, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों से कहा है कि वे मानसून की बदलती स्थिति पर बारीकी से नजर रखें और खेती, जल संसाधनों, बिजली आपूर्ति और अन्य अहम क्षेत्रों पर पड़ने वाले किसी भी बुरे असर से निपटने के लिए तैयारी सुनिश्चित करें।

बारिश के पैटर्न में हो सकते हैं बदलाव

वहीं, सरकार का आकलन है कि अल नीनो के कारण बारिश के पैटर्न में बड़े बदलाव हो सकते हैं। कुछ इलाकों में बहुत कम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ अन्य इलाकों में बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ और पानी की कमी का खतरा एक साथ बढ़ सकता है।

फिलहाल, तैयारी को मजबूत करने के लिए, जल शक्ति, कृषि, बिजली, रेलवे और अन्य अहम विभागों सहित कई मंत्रालयों को अपने-अपने सेक्टर के हिसाब से आपातकालीन योजनाएं बनाने का निर्देश दिया गया है।

सूत्रों ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री मोदी साल की शुरुआत से ही नियमित बैठकों के जरिए देश की ‘अल नीनो’ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं।

इसके अलावा, बदलते हालात पर लगातार नजर रखने के लिए 10 मंत्रालयों के प्रतिनिधियों वाला एक अंतर-मंत्रालयी समूह भी बनाया गया है। गृह मंत्रालय इस समूह के लिए नोडल मंत्रालय के तौर पर काम करेगा और अलग-अलग विभागों के बीच तैयारी और उससे निपटने के उपायों में तालमेल बिठाएगा।

समीक्षा के दौरान, प्रधानमंत्री ने एक बार फिर कहा कि El Nino से पैदा होने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए “पूरी सरकार मिलकर काम करे” और सभी विभाग मिलकर समन्वय में काम करें।

बता दें कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि जुलाई में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। यह अनुमान तब आया है जब जून 2026, 1901 के बाद से भारत का पांचवां सबसे सूखा जून रहा। इस दौरान देश में बारिश लंबे समय के औसत से 39% कम दर्ज की गई। इससे पहले मौसम विभाग ने अनुमान लगाया था कि जून में मानसून की बारिश सामान्य औसत से 92% से भी कम रह सकती है।

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यूरोप में 40°C पर पिघलने लगीं सड़कें पर भारत में 45°C+ की गर्मी कैसे झेल जाते हैं हाईवे? Science Explained

अपनी ठंडी और बर्फीली वादियों के लिए मशहूर यूरोप के कई देश इन दिनों भीषण गर्मी और हीटवेव (Heatwave) की मार झेल रहे हैं। स्पेन, जर्मनी, स्विटजरलैंड, पुर्तगाल, डेनमार्क और फ्रांस समेत ज्यादातर देशों में तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इस भीषण गर्मी के बीच ब्रिटेन (यूके) के कुछ इलाकों में तेज गर्मी के कारण सड़कें नरम पड़ने और कुछ जगहों पर पिघलने की खबरें सामने आई हैं। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि जब भारत में गर्मियों के दौरान तापमान अक्सर 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है, तब यहां सड़कें इस तरह क्यों नहीं पिघलतीं?

दरअसल, इसकी सबसे बड़ी वजह सड़क निर्माण की गुणवत्ता नहीं, बल्कि स्थानीय मौसम के अनुसार सड़क बनाने की तकनीक है। हर देश में सड़कें वहां के मौसम और तापमान को ध्यान में रखकर तैयार की जाती हैं। इसलिए भारत और ब्रिटेन की सड़कों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और तकनीक अलग-अलग होती है।

क्यों पिघल रही हैं यूरोपीय देशों की सड़कें

ब्रिटेन समेत यूरोप के कई देशों में सड़कें वहां की कड़ाके की ठंड को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। इन देशों में सर्दियों के दौरान तापमान कई बार शून्य से नीचे चला जाता है और बर्फ बार-बार जमती और पिघलती रहती है। ऐसे मौसम का सामना करने के लिए सड़क निर्माण में ऐसे डामर (अस्फाल्ट) और बिटुमेन का इस्तेमाल किया जाता है, जो ठंड में लचीले बने रहें और सड़क में दरारें न पड़ें।

लेकिन यही सामग्री तेज गर्मी में समस्या बन जाती है। जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक पहुंच जाता है, तो बिटुमेन नरम पड़ने लगता है। ऐसे में भारी वाहनों के लगातार गुजरने से सड़क की सतह दब सकती है, उभर सकती है या कुछ जगहों पर पिघली हुई दिखाई देने लगती है। यही वजह है कि इन दिनों यूरोप के कई इलाकों में सड़कों के नरम पड़ने और खराब होने की घटनाएं सामने आ रही हैं।

भारत की सड़कें तेज गर्मी में क्यों नहीं पिघलतीं?

भारत में सड़कें यहां की भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। देश के कई हिस्सों में गर्मियों के दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस या उससे भी अधिक पहुंच जाता है। इसलिए सड़क निर्माण में ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है, जो तेज गर्मी को आसानी से सह सके। सड़क बनाने के लिए आमतौर पर वीजी-30 और वीजी-40 ग्रेड का सख्त बिटुमेन और बड़े पत्थरों (एग्रीगेट्स) वाले डामर का उपयोग किया जाता है। ये सामग्री ऊंचे तापमान में भी अपनी मजबूती बनाए रखती है और आसानी से नरम नहीं पड़ती।

यही वजह है कि भीषण गर्मी के बावजूद भारत की सड़कें यूरोप के कई देशों की तुलना में अधिक मजबूत रहती हैं और उनके पिघलने या खराब होने की संभावना काफी कम होती है।

भारत की सड़कें ज्यादा मजबूत क्यों रहती हैं?

भारत में सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला बिटुमेन ज्यादा गाढ़ा और मजबूत होता है। यही वजह है कि सड़कें तेज गर्मी के साथ-साथ भारी ट्रैफिक का दबाव भी आसानी से सहन कर लेती हैं। इससे सड़कों पर गड्ढे बनने, सतह उखड़ने या सड़क का आकार बिगड़ने जैसी समस्याएं कम होती हैं। इसलिए 45 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान में भी भारत की सड़कें सामान्य रूप से काम करती रहती हैं।

यूरोप और भारत की सड़कों के बीच सबसे बड़ा अंतर यह है कि दोनों जगह सड़कें वहां के मौसम को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। यूरोप में सड़कें कड़ाके की ठंड और बर्फबारी को झेलने के लिए तैयार की जाती हैं, इसलिए उनमें लचीली सामग्री का इस्तेमाल होता है। वहीं, भारत में सड़कें भीषण गर्मी को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं, इसलिए इनमें ऐसी सामग्री इस्तेमाल की जाती है जो ऊंचे तापमान में भी मजबूत बनी रहती है। इसी कारण यूरोप में असामान्य गर्मी पड़ने पर कुछ जगहों पर सड़कें नरम पड़ जाती हैं, जबकि भारत की सड़कें ऐसे ही, बल्कि इससे भी अधिक तापमान को आसानी से सहन कर लेती हैं।