अमेरिकी उपराष्ट्रति जेडी वेंस ने इजराइल की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हुई डील की आलोचना करने वालों को हकीकत समझना चाहिए। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अगर वे नेतन्याहू सरकार में होते तो दुनिया में अपने सबसे ताकतवर सहयोगी अमेरिका पर सवाल नहीं उठाते। वेंस ने कहा- इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प ही ऐसे राष्ट्र प्रमुख हैं जो इजराइल के लिए सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने ट्रम्प की आलोचना करने वाले इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना की। उन्होंने नाम लेकर उनसे पूछा कि आपके पास ऑप्शन क्या है? इजराइल सिर्फ 90 लाख की आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मार कर नहीं किया जा सकता। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। 2. अमेरिका-ईरान प्रतिनिधि आज स्विट्जरलैंड में मिलेंगे: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होगी। 3. इजराइल बोला- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे: इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे। 4. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज: पीस डील पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। 5. लेबनान में इजराइली हमलों में 3 लोगों की मौत: पीस डील लागू होने के बाद भी इजराइल ने साउथ लेबनान में हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 3,900 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ हुए समझौते की आलोचना कर रहे इजराइली नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस डील का विरोध कर रहे हैं, उन्हें जमीनी हकीकत को समझना चाहिए। पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का हिस्सा होते, तो दुनिया में अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका पर इस तरह सवाल नहीं उठाते। वेंस ने कहा, “इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प ही ऐसे नेता हैं जो इजराइल के प्रति सबसे ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।” उन्होंने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से हर समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता। वेंस ने सवाल उठाया, “आपके पास दूसरा विकल्प क्या है? इजराइल सिर्फ 90 लाख आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। 2. अमेरिका-ईरान प्रतिनिधि आज स्विट्जरलैंड में मिलेंगे: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होगी। 3. इजराइल बोला- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे: इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे। 4. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज: पीस डील पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं। 5. लेबनान में इजराइली हमलों में 3 लोगों की मौत: पीस डील लागू होने के बाद भी इजराइल ने साउथ लेबनान में हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 3,900 लोग मारे जा चुके हैं। अमेरिका-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुरुवार को एक उत्साहजनक तस्वीर सामने आई। सऊदी अरब के तीन विशाल तेल टैंकर, जिनमें करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल भरा था, बिना किसी रुकावट के इस संवेदनशील जलमार्ग से गुजर गए। हफ्तों की तनातनी के बाद यह नजारा इस बात का संकेत था कि ईरान-अमेरिका के बीच कुछ बदल रहा है
यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें करीब 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र के एक ऑयल डिपो धमाके से तबाह हो गया, यहां मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। विस्फोट के बाद ऑयल डिपो टैंक का ढक्कन कई मीटर ऊपर उछल गया और आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पास के एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लग गई। ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। हमले के बाद मॉस्को के हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई। जेलेंस्की बोले- यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मॉस्को पर हुए हमले को पिछले हफ्ते कीव पर रूस की कार्रवाई का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो रूस के युद्ध अभियान को सहारा दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि अब समय आ गया है कि रूस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाए। उन्होंने यूक्रेन की विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई की तारीफ भी की। जेलेंस्की ने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।” हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेताओं के साथ शिखर बैठक में मौजूद थे। उन्होंने मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 2023 से रूसी राजधानी पर ड्रोन हमले बढ़े 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के ड्रोन हमले सीमित थे। 2023 में पहली बार उसके ड्रोन मॉस्को तक पहुंचे, लेकिन तब हमलों में कुछ ही ड्रोन इस्तेमाल किए जाते थे। अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है, जबकि रूस ने भी राजधानी के चारों ओर मजबूत एयर डिफेंस तैनात कर रखा है। इस वजह से युद्ध अब सिर्फ फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रहा। दोनों देश तेल डिपो, रिफाइनरी और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। G7 देशों ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया मॉस्को पर बड़े हमले के बीच G7 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य मदद बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि यूक्रेन को ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के हथियार दिए जाएंगे। इसके अलावा रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। G7 देशों ने सर्दियों से पहले यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मदद देने का भरोसा दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराना आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी वोलोदिमिर जेलेंस्की और व्लादिमिर पुतिन दोनों से अच्छी बातचीत हुई है और वह इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं। ———————— रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक मिसाइल से हमला किया:यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम; जेलेंस्की बोले- रूसी पागल हो चुके हैं रूस ने पिछले महीने यूक्रेन पर कई मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। हमलों का निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाके थे। रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेनी हमलों के जवाब में किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
यूक्रेन ने गुरुवार को रूस पर अब तक का सबसे बड़ा ड्रोन हमला किया। रूस के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रातभर में करीब 1,000 ड्रोन और चार क्रूज मिसाइलों को मार गिराया गया। इनमें करीब 200 ड्रोन राजधानी मॉस्को की तरफ बढ़ रहे थे। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक हमले में दक्षिणी रोस्तोव क्षेत्र का एक ऑयल डिपो धमाके से तबाह हो गया, यहां मौजूद एक व्यक्ति की मौत हो गई। वहीं मॉस्को की कपोतन्या ऑयल रिफाइनरी पर भी हमला हुआ। विस्फोट के बाद ऑयल डिपो टैंक का ढक्कन कई मीटर ऊपर उछल गया और आसमान में काले धुएं के गुबार छा गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पास के एक शॉपिंग सेंटर में भी आग लग गई। ड्रोन का मलबा गिरने से कुछ रिहायशी और व्यावसायिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। कई ऊंची इमारतों को खाली कराया गया। हमले के बाद मॉस्को के हवाई अड्डों पर कुछ समय के लिए उड़ानों पर रोक लगाई गई। जेलेंस्की बोले- यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मॉस्को पर हुए हमले को पिछले हफ्ते कीव पर रूस की कार्रवाई का जवाब बताया। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी सेना ने उन ठिकानों को निशाना बनाया, जो रूस के युद्ध अभियान को सहारा दे रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा कि अब समय आ गया है कि रूस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाए। उन्होंने यूक्रेन की विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई की तारीफ भी की। जेलेंस्की ने कहा, “हम यह युद्ध नहीं चाहते थे, लेकिन अगर यूक्रेन जलेगा तो मॉस्को भी जलेगा।” हमले के समय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन कजान में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के नेताओं के साथ शिखर बैठक में मौजूद थे। उन्होंने मॉस्को पर हुए इस बड़े हमले को लेकर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। 2023 से रूसी राजधानी पर ड्रोन हमले बढ़े 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन के ड्रोन हमले सीमित थे। 2023 में पहली बार उसके ड्रोन मॉस्को तक पहुंचे, लेकिन तब हमलों में कुछ ही ड्रोन इस्तेमाल किए जाते थे। अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है, जबकि रूस ने भी राजधानी के चारों ओर मजबूत एयर डिफेंस तैनात कर रखा है। इस वजह से युद्ध अब सिर्फ फ्रंटलाइन तक सीमित नहीं रहा। दोनों देश तेल डिपो, रिफाइनरी और दूसरे रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं। G7 देशों ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया मॉस्को पर बड़े हमले के बीच G7 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य मदद बढ़ाने का ऐलान किया है। संगठन ने कहा कि यूक्रेन को ज्यादा एयर डिफेंस सिस्टम, इंटरसेप्टर और लंबी दूरी के हथियार दिए जाएंगे। इसके अलावा रूस के तेल और गैस कारोबार पर प्रतिबंध और सख्त किए जाएंगे। G7 देशों ने सर्दियों से पहले यूक्रेन की बिजली और ऊर्जा जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त मदद देने का भरोसा दिया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगा था कि रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराना आसान होगा, लेकिन दोनों देशों के बीच गहरी दुश्मनी ने बातचीत को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी वोलोदिमिर जेलेंस्की और व्लादिमिर पुतिन दोनों से अच्छी बातचीत हुई है और वह इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं। 17 मई- यूक्रेनी हमले में 1 भारतीय समेत 4 की मौत इससे पहले यूक्रेन ने 17 मई को भी रूस के कई इलाकों पर 1000 से ज्यादा ड्रोन से हमला किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें कम से कम 4 लोगों की मौत हुई थी। इसमें 1 भारतीय भी शामिल था। रूस में भारतीय दूतावास ने इसकी पुष्टि की थी। दूतावास के मुताबिक 3 भारतीय घायल भी हुए थे। रूस के अधिकारियों ने बताया था कि ड्रोन हमले में मॉस्को में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि यूक्रेन सीमा से लगे बेलगोरोद इलाके में एक और व्यक्ति की जान गई। मॉस्को में कुल 12 लोग घायल हुए। इनमें तेल रिफाइनरी में काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं। यूक्रेन ने मॉस्को में सैन्य और ईंधन से जुड़े अहम ठिकानों को निशाना बनाया था। इनमें एंगस्ट्रेम प्लांट शामिल है, जो रूस की सेना के लिए सेमीकंडक्टर बनाता है। इसके अलावा मॉस्को ऑयल रिफाइनरी, सोलनेचनोगोर्स्क और वोलोडार्स्कोये ईंधन स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। पूरी खबर पढ़ें… ———————— रूस-यूक्रेन जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक मिसाइल से हमला किया:यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम; जेलेंस्की बोले- रूसी पागल हो चुके हैं रूस ने पिछले महीने यूक्रेन पर कई मिसाइलों और ड्रोनों से हमला किया। इस हमले में कम से कम 4 लोग मारे गए और दर्जनों घायल हुए। हमलों का निशाना यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास के इलाके थे। रूस ने कहा कि यह हमला यूक्रेनी हमलों के जवाब में किया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए समझौते पर डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। अमेरिका-ईरान की पीस डील 19 जून को स्विट्जरलैंड में होनी थी। ऐसे में किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि 2 दिन पहले ट्रम्प यह ऐतिहासिक फैसला करेंगे। ट्रम्प ने समझौते के दिन की शुरुआत ईरान को धमकी देने से शुरू की। उन्होंने G7 समिट के दौरान कहा कि अगर अगले 60 दिनों में समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बम बरसाएगा। रात होते-होते ट्रम्प नरम पड़ गए और पीस डील पर साइन कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस समय वहां मौजूद लोगों को कुछ मिनट पहले तक इसकी जानकारी नहीं थी। ट्रम्प के ईरान को धमकी देने से लेकर पीस डील पर साइन करने से जुड़ी 12 तस्वीरें… G7 वर्किंग सेशन और प्रेस कॉन्फ्रेंस PM मोदी से मुलाकात, लुक की तारीफ की ट्रम्प वर्साय पैलेस की ओर रवाना हुए ————————- पीस डील से जुड़ी ये खबरे भी पढ़ें… अमेरिका-ईरान समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल:होर्मुज सिर्फ 60 दिन फ्री, ईरान को ₹28 लाख करोड़ हर्जाना मिलेगा, बदले में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। पूरी खबर पढ़ें अमेरिका-ईरान जंग खत्म, तय तारीख से एक दिन पहले समझौता:दोनों प्रेसिडेंट ने दस्तखत किए, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। पूरी खबर पढ़ें
अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया। इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी। समझौते के मसौदे में शामिल 14 पॉइंट्स की पूरी डिटेल (क्रम बदल सकते हैं) पॉइंट-1: होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है। युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है। पॉइंट-2: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी। फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है। हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। ईरान ने 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा किया था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके। इन 11 टन सामग्री में करीब 440 किलो ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है। लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है। हालांकि, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। जैसे… पॉइंट-3: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है। हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं। पॉइंट-4: ईरानी तेल के निर्यात पर छूट समझौते के बाद अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा। इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके। यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था। पॉइंट-5: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें मानने के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों में छूट ही वह सबसे बड़ा फायदा है, जो अमेरिका ईरान को समझौते के बदले दे सकता है। यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी। हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं। पॉइंट-6: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां रिलीज होंगी समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को छोड़ देगा। हालांकि, यह पैसा कब और कैसे जारी होगा, यह दोनों देश बातचीत से तय करेंगे। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है। पॉइंट-7: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा। यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी। पॉइंट-8: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे। समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा। दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है। पॉइंट-9: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है। अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है। पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा। पॉइंट-10: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष कोई नया दबाव न बनाएं। ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा। पॉइंट-11: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि: न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा। पॉइंट-12: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आगे सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, मॉनीटरिंग कैसे होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं। पॉइंट-13: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं। हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है। पॉइंट-14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं। —————————————- अमेरिका- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने वर्चुअली एक 14-पॉइंट वाले मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर साइन किए हैं। इसका मकसद दोनों देशों के बीच जारी जंग को खत्म करना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम
अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित सेंट्रल पार्क में घोड़ा-गाड़ी दुर्घटना में 18 वर्षीय भारतीय पर्यटक रोमांच महाजन की मौत हो गई। बुधवार दोपहर करीब 3 बजे घोड़ा अचानक बेकाबू होकर दौड़ पड़ा, जिससे गाड़ी पलट गई और युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोमांच महाजन तीन अन्य यात्रियों के साथ घोड़ा-गाड़ी में सवार थे। ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन (TWU) के अनुसार, गाड़ी चालक यात्रियों की तस्वीर लेने के लिए कुछ देर के लिए गाड़ी से दूर गया था। इसी दौरान घोड़ा बेकाबू होकर दौड़ पड़ा। हादसे के दौरान दो यात्रियों ने चलती गाड़ी से छलांग लगा दी। रोमांच गाड़ी से गिर गए और उनके सिर में गंभीर चोट आई। उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं सके। अन्य यात्रियों ने उपचार लेने से इनकार कर दिया। घटना के बाद सेंट्रल पार्क की घोड़ा-गाड़ी व्यवस्था पर फिर सवाल उठने लगे हैं। हाल ही में एक अन्य घोड़ा काम के दौरान गिरकर मर गया था। सेंट्रल पार्क कंजर्वेंसी ने इस हादसे को सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर चेतावनी बताते हुए घोड़ा-गाड़ी सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने और ‘राइडर्स लॉ’ को लागू करने की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू, G7 में मोदी- स्टार्मर ने इसकी घोषणा की भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने बुधवार को इसकी घोषणा की। इस समझौते पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर हुए थे। दोनों नेताओं की फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन में मुलाकात हुई थी। यानी कारोबारियों को नई व्यवस्था की तैयारी के लिए 28 दिन मिलेंगे। पीएम मोदी ने इसे भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। भारतीय कपड़े, फुटवियर और कुछ खाद्य उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा। भारतीय कुशल प्रोफेशनल्स को ब्रिटेन में काम के दौरान दोहरे सोशल सिक्योरिटी योगदान से राहत मिलेगी। यह राहत 36 महीने से बढ़ाकर 60 महीने तक होगी। भारत में ब्रिटिश व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 40% होगा। ऑटोमोबाइल पर शुल्क कोटा के तहत 100% से घटकर 10% होगा। टेक्सास में हाईवे पर क्रैश हुआ प्राइवेट जेट, 1 की मौत 5 घायल अमेरिका के टेक्सास में एक प्राइवेट जेट इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान हाईवे पर क्रैश हो गया। हादसे में विमान में सवार 6 लोगों में से एक की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य घायल हो गए। हालांकि, हाईवे पर मौजूद किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, NetJets Cessna 680 Citation Latitude विमान मैक्सिको के लॉस काबोस से ऑस्टिन (टेक्सास) जा रहा था। उड़ान के दौरान आपात स्थिति घोषित किए जाने के बाद विमान को लारेडो इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर मोड़ दिया गया था।
हादसा विमान की लैंडिंग के दौरान एयरपोर्ट से करीब 4 किलोमीटर दक्षिण में हुआ। दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है। ऑस्ट्रेलियाई द्वीपों पर बर्ड फ्लू का कहर: 75% से ज्यादा बेबी सील्स की मौत
ऑस्ट्रेलिया के दूरदराज स्थित हर्ड और मैकडोनाल्ड द्वीपसमूह में H5N1 बर्ड फ्लू ने वन्यजीवों को भारी नुकसान पहुंचाया है। एक नए अध्ययन के अनुसार, दक्षिणी एलिफेंट सील के 17 हजार से ज्यादा बच्चों में से 13 हजार से अधिक की मौत हो चुकी है, जबकि किंग और जेंटू पेंगुइनों में भी सामान्य से अधिक मौतें दर्ज की गई हैं। शोध के मुताबिक, हर्ड द्वीप पर दक्षिणी एलिफेंट सील के 17,364 बच्चों में से 13,359 की मौत हो चुकी है। यह कुल आबादी का 75% से अधिक हिस्सा है। कुछ इलाकों में मृत्यु दर 97% तक दर्ज की गई। वैज्ञानिकों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि अंतिम सर्वेक्षण के दौरान भी सील के बच्चे मर रहे थे। वैज्ञानिकों ने अक्टूबर और जनवरी में ड्रोन सर्वे तथा जमीनी निरीक्षण के दौरान नौ प्रजातियों के नमूने जुटाए। इनमें से छह प्रजातियों में H5N1 संक्रमण की पुष्टि हुई। प्रभावित प्रजातियों में दक्षिणी एलिफेंट सील, किंग पेंगुइन, जेंटू पेंगुइन और अंटार्कटिक फर सील शामिल हैं। अध्ययन में कई सौ वयस्क किंग पेंगुइनों की मौत भी दर्ज की गई। हालांकि यह उनकी कुल आबादी का छोटा हिस्सा है, लेकिन सामान्य वर्षों की तुलना में यह संख्या अधिक है। अध्ययन की प्रमुख लेखक डॉ. जूली मैकिन्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के बाहरी क्षेत्र में H5N1 का यह पहला मामला है। स्टोनहेंज से 5 किमी दूर मिला उसका ‘सरल रूप’: 5,000 साल पुरानी संरचना सूर्य की दिशा से जुड़ी थी
ब्रिटेन के प्रसिद्ध स्टोनहेंज स्मारक से करीब 5 किलोमीटर दूर पुरातत्वविदों को एक 5,000 साल पुरानी संरचना के अवशेष मिले हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह स्टोनहेंज का शुरुआती और बेहद सरल रूप हो सकता है, जो ग्रीष्मकालीन सूर्योदय और शीतकालीन सूर्यास्त के दौरान सूर्य की दिशा के अनुरूप बनाया गया था। बुलफोर्ड गांव में मिली इस संरचना में पत्थरों की जगह केवल दो बड़े लकड़ी के खंभे थे। हालांकि लकड़ी समय के साथ नष्ट हो चुकी है, लेकिन जमीन में मौजूद गड्ढों से उनकी स्थिति का पता चला। दोनों खंभे करीब 120 मीटर की दूरी पर स्थित थे और उनकी अनुमानित ऊंचाई 2 से 4 मीटर थी। खुदाई का नेतृत्व करने वाले पुरातत्वविद फिल हार्डिंग ने बताया कि रेडियोकार्बन डेटिंग से पता चला कि यह संरचना लगभग 5,000 वर्ष पुरानी है। यह स्टोनहेंज के पत्थर लगाए जाने से करीब 500 वर्ष पहले की है। विशेषज्ञों का मानना है कि संभव है स्टोनहेंज के शुरुआती निर्माण से जुड़े लोग इसी क्षेत्र में रहते या एकत्रित होते रहे हों। खुदाई के दौरान सजावटी मिट्टी के बर्तनों के टुकड़े, चकमक पत्थर के औजार, जानवरों की हड्डियां और एक दुर्लभ डिस्क आकार का नवपाषाणकालीन चाकू भी मिला है। फिनलैंड ने हटाई परमाणु हथियारों पर रोक: NATO न्यूक्लियर तैनाती का रास्ता खुला
फिनलैंड की संसद ने देश में परमाणु हथियारों के आयात, ट्रांजिट और भंडारण पर लगी लंबे समय से चली आ रही रोक को समाप्त कर दिया है। सरकार का कहना है कि इससे फिनलैंड और NATO की सुरक्षा मजबूत होगी, जबकि आलोचकों का दावा है कि इससे देश रूस के संभावित परमाणु निशाने पर आ सकता है। बुधवार को संसद ने न्यूक्लियर एनर्जी एक्ट और क्रिमिनल कोड में संशोधन के पक्ष में 125 और विरोध में 61 वोट दिए। संशोधन के बाद अब फिनलैंड में परमाणु हथियारों के आयात, आपूर्ति, परिवहन और भंडारण की अनुमति होगी। रक्षा मंत्री एंटी हक्कानेन ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह ऐतिहासिक सुधार फिनलैंड और NATO दोनों की सुरक्षा को मजबूत करेगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब फिनलैंड NATO में शामिल होने के बाद अपनी सुरक्षा नीति में बड़े बदलाव कर रहा है। 2023 में NATO की सदस्यता लेने के बाद रूस और फिनलैंड के संबंधों में तनाव बढ़ा है। दोनों देशों के बीच करीब 1,340 किलोमीटर लंबी सीमा है। रूस ने पहले ही इस कदम को लेकर चेतावनी दी थी। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि यदि फिनलैंड अपने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की तैनाती की अनुमति देता है, तो इससे यूरोप में तनाव बढ़ सकता है और रूस उचित जवाबी कदम उठाएगा। UAE में 15 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध: ऐसा करने वाला पहला अरब देश
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने सोशल मीडिया उपयोग को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एक प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए सोशल मीडिया इस्तेमाल की न्यूनतम आयु 15 वर्ष तय कर दी है। इसके साथ ही UAE ऐसा नियम लागू करने वाला पहला अरब देश बन गया है। UAE सरकार के मीडिया कार्यालय के अनुसार, नए नियम के तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट बनाने या उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, इस आयु वर्ग के बच्चों की सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की सभी सुविधाओं तक पहुंच भी सीमित रहेगी। ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी सोशल मीडिया प्रतिबंध लागू कर चुके हैं। वहीं ब्रिटेन और मलेशिया ने भी नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच को सीमित करने संबंधी कानून पारित किए हैं। कई अन्य देशों में भी इस दिशा में कानून या प्रस्तावों पर काम चल रहा है।

