पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में गुरुद्वारे के अंदर सिख केयरटेकर दंपती की हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, घटना पेशावर से करीब 60 किमी दूर मरदान के बाबू मोहल्ला इलाके में हुई। मरदान के जिला पुलिस अधिकारी मसूद अहमद ने बताया कि अज्ञात हमलावरों ने गुरुद्वारे के भीतर फायरिंग की। इसमें जगन्नाथ और उनकी पत्नी आसमा वंती की मौत हो गई। पुलिस हमले की वजह और आरोपियों का पता लगाने में जुटी है। हमले के बाद से गुरुद्वारे के CCTV फुटेज भी गायब हैं। इसे लेकर स्थानीय सिख नेताओं सवाल उठाए हैं। पुलिस भी इसे टारगेट किलिंग मानकर जांच कर रही है। गुरुद्वारे में घुसकर हमलावरों ने बरसाईं गोलियां पुलिस के अनुसार, यह वारदात बुधवार को उस समय हुई जब दंपती गुरुद्वारे में सेवा कर रहा था। अज्ञात हमलावर गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए और उन्होंने दंपती पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी गई। मरदान के जिला पुलिस अधिकारी मसूद अहमद ने बताया कि हत्या के पीछे की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और हमलावरों की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। पुलिस ने विशेष जांच टीमें बनाई हैं और फॉरेंसिक व तकनीकी मदद से जांच कर रही है। असेंबली के सदस्य ने उठाए सवाल खैबर पख्तूनख्वा असेंबली के सदस्य सुरेश कुमार ने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की और पुलिस को जांच में प्रगति दिखाने के लिए 24 घंटे का समय दिया। उन्होंने कहा कि इलाके में सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटना बेहद चिंताजनक है। सुरेश कुमार ने सीसीटीवी सबूतों के रखरखाव पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि घटनास्थल से डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर लापरवाही से हटाया गया, जिससे जांच की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 24 घंटे में गिरफ्तारी या ठोस प्रगति नहीं हुई तो मरदान, पेशावर और इस्लामाबाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन होंगे। हत्या के पीछे ये 2 वजहें मानी जा रहीं… सुराग मिटाने और साजिश का संदेह घटना के बाद स्थानीय असेंबली सदस्य सुरेश कुमार ने आरोप लगाया है कि घटनास्थल से सीसीटीवी के डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (DVR) को बेहद लापरवाही से हटाया गया। इस वजह से स्थानीय नेताओं और सिख संगठनों को संदेह है कि सबूतों को मिटाने या हत्या के पीछे के असली मकसद को छुपाने की कोशिश की जा रही है। घटना पर क्या बोले अकाल तख्त के जत्थेदार ॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान में सिख व्यक्ति की पगड़ी उतार नंगा कर पीटा, वीडियो वायरल किया पाकिस्तान में बैसाखी का त्योहार मनाते हुए सिख व्यक्ति को नंगा कर जमकर पीटा गया। यही नहीं, पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठन तहरीक ए लब्बैक पाकिस्तान (TLP) ने इस घटना का वीडियो भी बनाया। जिसे अब सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया। पढ़ें पूरी खबर…
अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे। डील पर दस्तखत करने के बाद ट्रम्प वर्साय पैलेस से बाहर आए। इस दौरान किसी रिपोर्टर ने उनसे पीस डील को लेकर पूछा, तो उन्होंने चिल्लाते हुए कहा, ‘डील साइन हो गई है।’ ट्रम्प के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने भी ईरान से इलेक्ट्रॉनिक दस्तखत किए। समझौते का ऐलान भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5:30 बजे किया गया। यह तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। इस समझौते के तहत ईरान और लेबनान में मिलिट्री एक्शन खत्म किया जाएगा। होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म की जाएगी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने भी गुरुवार को इस समझौते पर मध्यस्थ के तौर पर दस्तखत किए। उन्होंने X पर पोस्ट कर इसे ‘इस्लामाबाद समझौता’ बताया। पीस डील से जुड़ी 5 फोटोज… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिकी हमले में होर्मुज में जान गंवाने वाले हिमाचल प्रदेश के आदित्य शर्मा (23) पंचतत्व में विलीन हो गए हैं। आदित्य का आज (गुरुवार को) उनके पैतृक गांव भालू में अंतिम संस्कार किया गया। आदित्य को चचेरे भाई पार्थ ने उन्हें मुखाग्नि दी। इससे पहले आदित्य की पार्थिव देह को घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। जैसे ही बेटे आदित्य शर्मा की पार्थिव देह घर पहुंची तो मां सुषमा लखनपाल बेटे के शव से लिपट गईं। वह, बार-बार बेसुध हो रही हैं। पिता राजेश शर्मा समेत दूसरे परिजनों का भी रो-रो कर बुरा हाल है। क्षेत्र के सैकड़ों लोगों ने आदित्य शर्मा को नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इस दौरान आदित्य शर्मा अमर रहे के नारे गूंजे। आदित्य की अंतिम शव यात्रा में डीसी हमीरपुर और एसडीएम नादौन भी पहुंचे। दोनों ने परिजनों को इस मुश्किल घड़ी में ढांढस बंधाया। हमीरपुर अस्पताल में कराया पोस्टमार्टम आदित्य के शव का आज सुबह के वक्त हमीरपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया गया, क्योंकि परिजनों ने ओमान में पोस्टमार्टम को इंकार कर दिया था। आदित्य की पार्थिव देह औपचारिकताएं पूरी करने में देरी की वजह से आठ दिन बाद बुधवार रात को हमीरपुर लाई गई। हमले में जान गंवाने के लिए नौवें दिन अंतिम संस्कार हो पाएगा। आदित्य के घर पर सुबह से ही लोग जुटने शुरू हो गए थे। घर पर माता-पिता और दादी का रो-रोकर बुरा हाल है। 9 जून को अमेरिकी हमले में गई थी जान आदित्य की बीते 9 जून को अमेरिकी हमले में जान चली गई थी। आदित्य शर्मा अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। बीते कल मुंबई से हवाई मार्ग से डेडबॉडी चंडीगढ़ लाई गई। चंडीगढ़ से सड़क मार्ग से शव को हमीरपुर पहुंचाया गया। आदित्य के चाचा संजीव लखनपाल डेडबॉडी लेने चंडीगढ़ गए थे। डेक कैडेट थे आदित्य शर्मा वर्ल्ड मैरिटाइम एनर्जी लिमिटेड कंपनी के तेल टैंकर ‘MT सेत्तेबेल्लो’ पर आदित्य शर्मा बतौर डेक कैडेट तैनात थे। यह उनकी पहली नौकरी थी। घर पर उनके छुट्टी पर आने की खुशी थी। मगर इससे पहले ही आदित्य शर्मा अमेरिकी हमले का शिकार बन गए। इससे खुशिया मातम में तब्दील हो गई। 21 भारतीय क्रू मेंबर को सुरक्षित बचाया गया अमेरिकी हमले में आदित्य समेत तीन भारतीयों की मौत हो गई थी, जबकि जहाज पर सवार 21 भारतीय क्रू मेंबरों को सुरक्षित बचा लिया गया है। स्कॉटलैंड से की थी नॉटिकल इंजीनियरिंग आदित्य शर्मा हमीरपुर जिले की पंचायत हड़ेटा के गांव भालू के रहने वाले थे। उनके पिता पंजाब के जालंधर में व्यवसाय करते हैं। आदित्य ने जालंधर से 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद चैन्नई से मर्चेंट नेवी का कोर्स और स्कॉटलैंड से नॉटिकल इंजीनियरिंग की। फिर 24 नवंबर 2025 को मर्चेंट नेवी में उन्हें नौकरी मिली। आदित्य शर्मा की अंतिम शव यात्रा के PHOTOS..
PM Modi-Trump Bilateral Meeting: फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 समिट के इतर बुधवार, 17 जून 2026 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। शाम करीब साढ़े सात बजे शुरू हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं के
फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के बीच पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन सिख फार जस्टिस (SFJ) से जुड़े खालिस्तान समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। फ्रांस की खुफिया एजेंसी के अनुसार, ये सभी पीएम मोदी के दौरे के दौरान काफिले को रोकने की साजिश रच रहे थे। फ्रांस पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच बैठक के बाद ये खालिस्तानी समर्थक विरोध-प्रदर्शन करने वाले थे। और पीएम मोदी के काफिले को भी घेरने वाले थे। इसके बाद फ्रांसीसी सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी को गिरफ्तार कर लिया। पढ़ें क्या है पूरा मामला… भारत-फ्रांस के बीच खुफिया सहयोग की भूमिका जानकारी के अनुसार, पुलिस के इस एक्शन में भारत-फ्रांस के बीच सुरक्षा एवं खुफिया सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय के चलते किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को पहले ही आंक लिया गया। भारत-फ्रांस के मजबूत कूटनीतिक संबंध का उदाहरण हालांकि, फ्रांसीसी अधिकारियों की ओर से गिरफ्तार व्यक्तियों की संख्या और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, इस कार्रवाई को भारत-फ्रांस के मजबूत सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग का उदाहरण माना जा रहा है। G7 सम्मेलन के दौरान कार्रवाई गौरतलब है कि खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और SFJ से जुड़े मामलों को लेकर भारत लगातार विभिन्न देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है। G7 सम्मेलन के दौरान हुई यह कार्रवाई उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पढ़िए क्या है SFJ… सिख फॉर जस्टिस यानी SFJ सिखों के लिए अलग खालिस्तान की मांग करने वाला एक संगठन है। 2007 में अमेरिका में इसकी स्थापना की गई थी। आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू SFJ के संस्थापकों में से एक है। SFJ अपने अलगाववादी अभियान ‘रेफरेंडम 2020’ के तहत पंजाब को भारतीय से मुक्त कराने की बात करता है। SFJ ने अपने अगस्त 2018 में लंदन डिक्लेरेशन में भारत से अलग होने और पंजाब को एक स्वतंत्र देश के रूप में फिर से स्थापित करने के सवाल पर दुनिया भर में रहने वाले सिख समुदाय के बीच पहला जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी। SFJ ने नवंबर 2020 में जनमत संग्रह के लिए वोटिंग कराने की बात कही थी। पंजाब के साथ-साथ नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, केन्या और मध्य-पूर्वी देशों के प्रमुख शहरों में इसे आयोजित करने की योजना बनाई थी। ‘रेफरेंडम 2020’ नाम से बाकायदा एक वेबसाइट बनाई गई थी। इसमें लिखा था- एक बार जब भारत से आजादी को लेकर पंजाबी लोगों के भीतर आम सहमति बन जाएगी तो हम पंजाब को एक देश के रूप में एस्टैब्लिश करने के लक्ष्य के साथ संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से संपर्क करेंगे। G-7 समिट में मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले 15 जून से दो दिवसीय G-7 समिट के लिए मंगलवार दोपहर एवियन पहुंचने पर मोदी का फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्वागत किया। G-7 के देशों के राष्ट्राध्याक्षों ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बात हुई। मीटिंग में दोनों एक-साथ बैठे नजर आए। यह मुलाकात 16 महीनों के बाद हुई है। प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति G7 आउटरीच सेशन में भी साथ-साथ बैठे नजर आए। दोनों की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी। इसी बीच मोदी और इटालियन पीएम जॉर्जिया मेलोनी की बातचीत भी हुई। मेलोनी ने मोदी से कहा- दोबारा मिलकर अच्छा लगा, हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस हैं। मोदी पिछले महीने 5 देशों के दौरे पर गए थे। जहां उन्होंने रोम में पीएम मेलोनी को मेलोडी टॉफी दी थी। जिसका वीडियो वायरल हो गया था। ——————– यह भी पढ़ें- दिलजीत दोसांझ के शो से खालिस्तानी धक्के मारकर निकाले:टोरंटो के कॉन्सर्ट में झंडे लेकर पहुंचे, पुलिस ने भीड़ से खींच-खींचकर पकड़े पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के 31 मई की रात टोरंटो कॉन्सर्ट में खालिस्तानी झंडे लेकर पहुंच गए। कनाडा के टोरंटो स्थित फेमस रॉजर्स सेंटर स्टेडियम में शो के बीच कुछ दर्शकों ने खालिस्तानी झंडे लहराए और शो को खराब करने की कोशिश की। पूरी खबर पढ़ें…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ हुए एक महत्वपूर्ण समझौते (MoU) को लेकर साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यह समझौता अभी अंतिम नहीं है। अगर उन्हें यह पसंद नहीं आएगा या ईरान ने नियम नहीं माने, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है।अमेरिका और ईरान के बीच MoU पर शु
हरियाणा के करनाल जिले के रहने वाले 20 वर्षीय युवक की अमेरिका में हार्टअटैक से मौत हो गई। युवक अमेरिा के सैक्रामेंटो शहर में एक स्टोर पर जॉब करता था। घटना वाले दिन भी वह ड्यूटी खत्म कर रूप पर लौटा, खाना खाया और सोने चला गया। नाइट शिफ्ट शुरु होने से पहले उसके दोस्त उसे लेने पहुंचे तो रूम का दरवाजा अंदर से बंद था। कई बार आवाज लगाने के बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने दरवाजा तोड़ दिया। अंदर युवक को बेसुध हालत में पड़ा देख उनके होश उड़ गए। दोस्तों ने तुरंत उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके बाद दोस्तों ने ही परिवार को इसकी जानकारी दी। परिवार के मुताबिक, युवक दो साल पहले दो एकड़ जमीन बेचकर कनाडा गया था। कनाडा में कुछ दिन रहने के बाद वह अमेरिका चला गया था। मौत से दो दिन पहले परिवार की उससे बात हुई थी। युवक ने कहा था- चिंता ना करों, सारे कर्ज उतार दूंगा। बेटे की मौत से परिजन सदमे में है। उन्होंने परिवार ने सरकार, विदेश मंत्रालय और अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय से बेटे के शव को भारत लाने में मदद करने की गुहार लगाई है, ताकि बेटे को देश की मिट्टी नसीब हो सके। युवक के भारत से अमेरिका तक सफर की पूरी कहानी… युवक सुपनदीप के परिवार ने बताईं ये बातें… 5 महीने में करनाल के 6 लोगों की विदेश में मौत करनाल से कई बच्चे विदेश पढ़ने या परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश जाते हैं। कोई कनाडा तो कोई अमेरिका जाता है। मगर, बीते 6 महीनों में ही विदेशों में सात युवकों की मौत से राज्य और परिवारों को बड़ा झटका लगा है। ताजा मामला युवक सुपनदीप का है। इससे पहले छह युवकों की भी बीमारी, हादसों में मौत हो चुकी है। 14 दिन पहले ही अमेरिका के इंडियाना राज्य के प्लेनफील्ड इलाके में 12 मई को हुए सड़क हादसे में करनाल के शिव कॉलोनी निवासी प्रवीन (40) की मौत हो गई। वह रेड लाइट पर खड़ा था, तभी पीछे से तेज रफ्तार कार ने उसकी गाड़ी को टक्कर मार दी। हादसा इतना भीषण था कि युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, दो महीने पहले बसंत विहार निवासी युवक की रूस में मौत हो गई। युवक टूरिस्ट वीजा पर 16 मार्च को विदेश गया था। परिवार को उसकी मौत की सूचना वॉट्सऐप ग्रुप के माध्यम से मिली। बताया जा रहा है कि युवक की गिरने से मौत हुई। इसी तरह टेक्सास शहर में फूड स्टोर में लगी आग में जिंदा जलकर करनाल के ही गंगाटेहड़ी गांव निवासी सुखविंद्र सिंह (22) की मौत हो गई थी। दो महीने पहले ही घोघगड़ीपुर गांव के एक 20 वर्षीय युवक की अमेरिका में सड़क हादसे में मौत हो गई। युवक अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विदेश गया था। वहीं, कैमला गांव के युवक मुकेश कुमार की स्पेन में 5 महीने पहले हार्ट अटैक से मौत हो गई। इन्द्री के गांव समौरा के चेतक शर्मा की भी अमेरिका के जॉर्जिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई। युवक करीब दो साल पहले रोजगार की तलाश में विदेश गया था और वहीं पर स्टोर में काम कर रहा था। ——————————— यह भी पढ़ें- करनाल के युवक की अमेरिका में गोली मारकर हत्या:मौत से 3 घंटे पहले परिवार से वीडियो कॉल की, ₹60 लाख खर्च कर गया था करनाल जिला में इन्द्री क्षेत्र के गांव समौरा के एक युवक की अमेरिका के जॉर्जिया में गोली मारकर हत्या कर दी गई। युवक करीब दो साल पहले रोजगार की तलाश में विदेश गया था और वहीं पर स्टोर में काम कर रहा था। घटना के बाद वहां की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है और हत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
ब्रिटेन में मौजूद सबसे पुराने भारतीय रेस्तरां वीरास्वामी पर बंद होने का खतरा बढ़ गया है। जिस इमारत में यह रेस्तरां चलता है, उसका मालिक क्राउन एस्टेट है। क्राउन एस्टेट ब्रिटेन की एक बड़ी सरकारी संपत्ति संस्था है, जो राजा या रानी के नाम पर चलती है। अब क्राउन एस्टेट वीरास्वामी की इमारत में कुछ बदलाव और नया निर्माण करना चाहते हैं। इसी वजह से उन्होंने रेस्तरां का किराये का समझौता (लीज) आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है। वीरास्वामी रेस्तरां की जून 2025 में लीज खत्म हो गई थी। रेस्तरां का कहना है कि अगर लीज नहीं बढ़ाई गई तो उसे 100 साल पुरानी अपनी जगह छोड़नी पड़ेगी। इसलिए रेस्तरां ने इस फैसले को चुनौती देने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। 100 साल से चल रहा रेस्तरां वीरास्वामी की शुरुआत अप्रैल 1926 में हुई थी। यह सिर्फ एक रेस्तरां नहीं बल्कि ब्रिटेन में भारतीय खाने के इतिहास का अहम हिस्सा माना जाता है। पिछले एक सदी में यहां कई मशहूर लोग आ चुके हैं। इनमें ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल, अभिनेत्री विवियन ली, अभिनेता मार्लन ब्रैंडो, लॉरेंस ओलिवियर, चार्ली चैपलिन और यहां तक कि महारानी एलिजाबेथ द्वितीय भी शामिल हैं। रेस्तरां का मेन्यू भारत में जन्मे एडवर्ड पामर ने तैयार किया था। उन्हें हैदराबाद के शाही महल में बनने वाले व्यंजनों की रेसिपी अपनी दादी से मिली थी और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने यहां का खाना तैयार किया। करी के साथ बीयर पीने की परंपरा यहीं से शुरू हुई वीरास्वामी को 2016 में मिशेलिन स्टार मिला था। यह दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित रेस्तरां सम्मानों में से एक है। रेस्तरां से जुड़ा एक दिलचस्प दावा भी किया जाता है। कहा जाता है कि इंग्लैंड में करी के साथ बीयर पीने की आदत सबसे पहले इसी रेस्तरां से शुरू हुई थी। रेस्तरां के मालिकों के मुताबिक, डेनमार्क के राजा जब भी लंदन आते थे, तो वीरास्वामी में खाना खाने जरूर पहुंचते थे। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी पसंदीदा कार्ल्सबर्ग बीयर का एक पूरा पीपा रेस्तरां में रखवा दिया था ताकि जब भी वे करी खाने आएं, वही बीयर उन्हें परोसी जा सके। यह रेस्तरां दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जर्मन बमबारी (ब्लिट्ज) से भी बच गया। उसने रेस्तरां उद्योग के उतार-चढ़ाव भी देखे, लेकिन अब एक साल से चल रही कानूनी लड़ाई के बाद उसके अस्तित्व पर सवाल खड़ा हो गया है। 29 जून से 5 दिन चलेगी सुनवाई वीरास्वामी की मूल कंपनी एमडब्ल्यू ईट (MW Eat) 29 जून से शुरू होने वाली पांच दिन की सुनवाई में सेंट्रल लंदन काउंटी कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी। क्राउन एस्टेट का कहना है कि वह विक्ट्री हाउस नाम की इमारत के ऊपरी मंजिलों पर मौजूद दफ्तरों में बदलाव करना चाहता है। ये दफ्तर 2023 में आई बाढ़ के बाद बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से खाली पड़े हैं। योजना के तहत रेस्तरां और दफ्तरों की एंट्री पॉइंट के बीच की दीवार हटाकर एक बड़ा रिसेप्शन एरिया बनाया जाएगा। क्राउन एस्टेट का कहना है कि इससे वह ऑफिस का किराया काफी बढ़ा सकेगा। हालांकि, रेस्तरां के मालिक इस तर्क से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि मरम्मत और नवीनीकरण का काम रेस्तरां को हटाए बिना भी किया जा सकता है। क्राउन एस्टेट ने जून 2025 में वीरास्वामी रेस्तरां की सालाना 2.05 लाख पाउंड (करीब 2.6 करोड़ रुपए) की लीज को रेन्यू करने से मना कर दिया था। अगर अदालत में रेस्तरां हार जाता है तो जिस जगह पर वह अभी चल रहा है, उसे दफ्तरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। 50 लाख पाउंड तक पहुंच सकता है खर्च रेस्तरां की मालिक कंपनी एमडब्ल्यू ईट का कहना है कि अगर उसे 100 साल पुरानी इस जगह को छोड़ना पड़ा, तो मामला सिर्फ सामान उठाकर दूसरी जगह जाने का नहीं होगा। कंपनी के मुताबिक, सबसे पहले उसे लंदन के वेस्ट एंड जैसे महंगे इलाके में कोई नई जगह ढूंढनी पड़ेगी। इसके बाद उस जगह को वीरास्वामी जैसे प्रतिष्ठित रेस्तरां के स्तर के अनुरूप तैयार करना होगा। इसमें रसोई, डाइनिंग एरिया, इंटीरियर, फर्नीचर, बिजली-पानी की व्यवस्था और लाइसेंस जैसी कई चीजों पर बड़ा खर्च आएगा। इसके अलावा, स्थानांतरण के दौरान रेस्तरां को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ सकता है। इस दौरान उसकी आय पूरी तरह रुक जाएगी, जबकि कर्मचारियों का वेतन, प्रशासनिक खर्च और अन्य भुगतान जारी रहेंगे। कंपनी का कहना है कि 100 साल पुरानी पहचान वाली जगह छोड़ने से ग्राहकों का एक हिस्सा भी खो सकता है, जिसका आर्थिक असर अलग होगा। इन्हीं सभी खर्चों को जोड़कर एमडब्ल्यू ईट का अनुमान है कि नई जगह पर जाने की कुल लागत करीब 50 लाख पाउंड (लगभग 57-58 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकती है। कंपनी का आरोप है कि क्राउन एस्टेट ने जो आर्थिक मुआवजा देने की पेशकश की है, वह इस अनुमानित खर्च का केवल एक छोटा हिस्सा ही कवर करेगा। इसलिए उनके लिए दूसरी जगह जाना आर्थिक रूप से बेहद मुश्किल होगा।
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की है कि US इंडो-पैसिफिक कमांड (USINDOPACOM) का नाम बदलकर फिर से US पैसिफिक कमांड (USPACOM) कर दिया गया है। अब इस कमांड से ‘इंडो’ शब्द हटा दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस ने 2018 में कमांड के नाम में बदलाव किया था। उस समय अमेरिका ने कहा था कि हिंद महासागर (इंडियन ओशियन) क्षेत्र का रणनीतिक महत्व बढ़ रहा है और यह क्षेत्र प्रशांत महासागर (पैसिफिक ओशियन) की सुरक्षा व्यवस्था से पहले की तुलना में ज्यादा जुड़ गया है। इसलिए कमांड के नाम में इंडो (हिंद महासागर) को भी शामिल किया गया था। यूएस-पैसिफिक कमांड क्या है? अमेरिकी सेना पूरी दुनिया को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर चलती है। इनके लिए 11 कमांड हैं। इनमें से 6 स्ट्रैटेजिक और 5 फंक्शनल कमांड हैं। यूएस पैसिफिक स्ट्रैटेजिक कमांड का हिस्सा है। यह अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे अहम सैन्य कमांडों में से एक है। यह कमांड एशिया और प्रशांत महासागर इलाके में एक्टिव है।
अब नाम बदलने पर चर्चा क्यों है? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यूएस पैसिफिक कमांड नाम बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। इसे वापस लाने से सैनिकों को अपनी विरासत पर गर्व महसूस होगा। यह नाम कई बड़े युद्धों और महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़ा रहा है, इसलिए इसे फिर से अपनाया गया है। पेंटागन ने यह भी कहा कि कमांड का सिर्फ नाम बदला है, रणनीति और जिम्मेदारियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंडो शब्द हटने से यह मैसेज जा सकता है कि अमेरिका हिंद महासागर और भारत को पहले जितना प्रमुख महत्व नहीं दिखाना चाहता। अपने पहले कार्यकाल में ट्रम्प चीन को सबसे बड़ा खतरा मानते थे। तब वे दिखाना चाहते थे कि भारत उसकी एशिया रणनीति का अहम हिस्सा है और चीन को काउंटर करने में भारत की अहम भूमिका है। उन्होंने यह भी जताने की कोशिश की थी कि हिंद महासागर और प्रशांत महासागर को एक ही रणनीतिक क्षेत्र हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अब शायद ट्रम्प की प्राथमिकताएं बदल गई हैं। थरूर ने क्वाड के भविष्य पर जताई चिंता कमांड का नाम फिर से बदले जाने पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अमेरिकी आदेश की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लिखा, क्या यह क्वाड के ताबूत में एक और कील है? ————————- ये खबर भी पढ़ें… दुनिया के 16 नेताओं से छोटे हैं ट्रम्प:91% नेताओं से ज्यादा उम्रदराज, उनसे 10 साल ज्यादा सऊदी किंग की उम्र डोनाल्ड ट्रम्प इस हफ्ते 14 जून को 80 साल के हो गए। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 साल की उम्र देखने वाले वे अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नवंबर 2022 में अपना 80वां जन्मदिन मनाया था। ट्रम्प दुनिया के सबसे उम्रदराज नेताओं में जरूर शामिल हो गए हैं, लेकिन वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शासक नहीं हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के नेताओं में 16 नेता ऐसे हैं जो ट्रम्प से भी ज्यादा उम्र के हैं। पूरी खबर पढ़ें
फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान नेताओं की अनौपचारिक बातचीत माइक्रोफोन में रिकॉर्ड हो गई। इन नेताओं को सिगरेट, फुटबॉल, तोहफों जैसी बातों पर हल्के-फुल्के मजाक करते हुए सुना गया। इन सबमें से इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सिगरेट छोड़ देने वाली बातचीत की खूब चर्चा हो रही है। दरअसल, बैठक शुरू होने से पहले मेलोनी ने नेताओं से बातचीत में कहा कि आज उन्होंने 3 कप कॉफी पी है। यह सुनकर यूरोपीय यूनियन की चीफ उर्सला वॉन डेर लेयेन ने चौंकते हुए पूछा- क्या आज सुबह, उठने के लिए? इस पर जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज ने मजाक में कहा- और सिगरेट कितनी पी? मेलोनी ने इससे इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने एक महीने से सिगरेट नहीं पी है। यह सुनते ही कनाडा, ब्रिटेन, जापान और यूरोपीय संघ के नेताओं ने उन्हें बधाई दी। मेलोनी ने खुशी में दोनों हाथ उठा दिए। इसके बाद कनाडाई PM मार्क कार्नी ने मजाकिया अंदाज में अपने हाथ की ओर इशारा कर पूछा, क्या आपने निकोटिन पैच लगाया है? इस पर आसपास मौजूद लोग हंस पड़े। निकोटिन पैच शरीर की त्वचा पर लगाया जाता है। यह धीरे-धीरे शरीर में थोड़ी मात्रा में निकोटिन पहुंचाता है, जिससे सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू छोड़ने वाले लोगों को उसकी तलब कम लगती है और छोड़ने में आसानी होती है। इस बातचीत से जुड़ी 4 मोमेंट देखिए G7 में नेताओं की और भी मजेदार बातचीत सुनाई दी… मैक्रों ने फ्रांस फुटबॉल टीम का समर्थन किया अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में चल रहे फीफा विश्व कप के बीच नेता खेलों पर चर्चा करते नजर आए। मैक्रों ने फ्रांस की टीम का समर्थन करते हुए कहा, अलेज ले ब्लू यानी आगे बढ़ो फ्रांस। एक नेता ने पेरिस सेंट-जर्मेन (PSG) क्लब की हालिया चैंपियंस लीग जीत की तारीफ की। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी केप वर्डे की टीम की सराहना की, जिसने मौजूदा विश्व चैंपियन स्पेन के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ खेला था। स्टार्मर ने कहा, यह वास्तव में हैरान करने वाला प्रदर्शन था। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी फुटबॉल से इतर UFC मुकाबले का जिक्र किया। दरअसल, ट्रम्प के जन्मदिन 14 जून पर व्हाइट हाउस में UFC मुकाबला हुआ था। ट्रम्प ने इसके आयोजक डाना व्हाइट की खूब तारीफ की। ग्रीनलैंड का जिक्र करना नहीं भूले ट्रम्प समिट में एक रहस्यमय बातचीत भी रिकॉर्ड हुई। ट्रम्प यूरोपीय परिषद के चीफ एंटोनियो कोस्टा से बात कर रहे थे। बातचीत के दौरान ट्रम्प ने कहा, आप जानते होंगे। कुछ देर रुकने के बाद उन्होंने कोस्टा की तरफ देखते हुए कहा- ग्रीनलैंड। बातचीत का बाकी हिस्सा साफ नहीं सुनाई दिया। ट्रम्प की यह टिप्पणी इसलिए चर्चा में आ गई क्योंकि वह पहले भी कई बार डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जता चुके हैं। उनके इस प्रस्ताव ने पिछले वर्षों में कई यूरोपीय नेताओं को नाराज किया था। हालांकि, इस बार ट्रम्प का क्या मतलब था, यह स्पष्ट नहीं हो सका। मैक्रों घड़ी ले जाना भूले तो ट्रम्प ने कहा- ये मुझे दे दो सम्मेलन के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपनी घड़ी कहीं छोड़ गए। जब नेता दोपहर खाने के लिए जा रहे थे, तब कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, मैक्रों अपनी घड़ी यहां छोड़ गए हैं। हमारे पास उनकी घड़ी है। इस पर ट्रम्प ने तुरंत मजाक करते हुए कहा, अगर उन्होंने छोड़ दी है तो मुझे दे दो। उनकी बात सुनकर वहां मौजूद लोग हंस पड़े। समिट में तोहफों का आदान-प्रदान भी हुआ। मैक्रों ने सभी G7 नेताओं को व्यक्तिगत साइकिल भेंट की। ट्रम्प को साइकिल मिलने पर कई लोगों ने हैरानी जताई क्योंकि वह गोल्फ को छोड़कर अन्य शारीरिक गतिविधियों और खासकर साइकिल चलाने में रुचि नहीं दिखाते। हालांकि उस समय पास में कोई माइक्रोफोन नहीं था, इसलिए उनकी बातें रिकॉर्ड नहीं हो सकी। जर्मन चांसलर मर्त्ज भी ट्रम्प के लिए एक खास तोहफा लेकर पहुंचे। उन्होंने ट्रम्प को जर्मनी की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की जर्सी भेंट की, जिस पर ट्रम्प का नाम और 47 नंबर लिखा था। यह उनके अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति होने का संकेत था। ट्रम्प ने मुस्कुराते हुए जर्सी को कैमरों के सामने दिखाया और फोटो खिंचवाई। बाद में मर्त्ज ने इसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, आखिरकार हम एक ही टीम में हैं। मोदी से मेलोनी बोलीं- हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस इसी बीच मोदी और इटालियन पीएम जॉर्जिया मेलोनी की बातचीत भी हुई। मेलोनी ने मोदी से कहा- दोबारा मिलकर अच्छा लगा, हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस हैं। मोदी पिछले महीने 5 देशों के दौरे पर गए थे। जहां उन्होंने रोम में पीएम मेलोनी को मेलोडी टॉफी दी थी। जिसका वीडियो वायरल हो गया था। सम्मेलन के दौरान जब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आमने-सामने आए। मेलोनी ने मुस्कुराते हुए मोदी से कहा, आपसे फिर मिलकर अच्छा लगा। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इंस्टाग्राम का जिक्र किया, जिस पर मेलोनी ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया, हां, हम इंस्टाग्राम पर सबसे ज्यादा मशहूर हैं। उनकी इस टिप्पणी पर आसपास मौजूद लोग हंस पड़े। मैक्रों ने जेलेंस्की और ट्रम्प की मुलाकात कराने की बात कही सभी बातचीत मजाकिया नहीं थीं। एक माइक्रोफोन में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की बातचीत भी रिकॉर्ड हुई। यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रम्प के साथ हुई पिछली बातचीत का जिक्र करते हुए मैक्रों ने जेलेंस्की से कहा, कल कैमरों के सामने हमारी एक मुश्किल बातचीत हुई थी। इसके बाद उन्होंने पूछा कि क्या जेलेंस्की की ट्रम्प के साथ अलग से कोई बैठक तय है। जब जेलेंस्की ने बताया कि वह अगले दिन ब्रसेल्स जाने वाले हैं, तो मैक्रों ने जवाब दिया, ठीक है, मैं इसकी व्यवस्था कर दूंगा। कार्नी ने ट्रम्प को चीन के साथ हुए समझौते के बारे में बताया एक और बातचीत में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और ट्रम्प चीन से जुड़े एक समझौते पर चर्चा करते सुनाई दिए। कार्नी ने बताया कि चीन की हालिया यात्रा के दौरान एक ऐसा समझौता हुआ है जिसके तहत कनाडा में सीमित संख्या में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात की अनुमति होगी। ट्रम्प को यकीन दिलाने के लिए कार्नी ने कहा- यह हमारे बाजार का 3% से भी कम हिस्सा है, यानी लगभग 49 हजार कारें। हमने इस पर सख्त सीमा तय की है। मुझे लगा कि आपको यह पसंद आएगा। ट्रम्प ने कहा- यह अच्छा है, मुझे पसंद आया। ———————————– G7 समिट से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले:G–7 समिट में दोनों ने 5 मिनट बात की; मोदी से मेलोनी बोलीं- हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बात हुई। मीटिंग में दोनों एक-साथ बैठे नजर आए। यह मुलाकात 16 महीनों के बाद हुई है। प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति G7 आउटरीच सेशन में भी साथ-साथ बैठे नजर आए। दोनों की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी। पूरी खबर पढ़ें

