इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों मिजोरम और मणिपुर में रहने वाले बेने मेनाशे समुदाय के सभी शेष सदस्यों को अगले चार वर्षों में इजराइल लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह समुदाय यहूदी लोगों का अभिन्न हिस्सा है और इजराइल उनका घर है। हाल ही में इजराइल के नोफ हा-गलील शहर में बसे भारतीय मूल के यहूदी प्रवासियों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मजबूत संबंधों के कारण दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष की शुरुआत से अब तक समुदाय के करीब 600 सदस्य इजराइल पहुंच चुके हैं। वर्ष 2026 के अंत तक लगभग 600 और लोगों के आने की उम्मीद है। बेने मेनाशे का अर्थ है “मनश्शे के पुत्र”। यह समुदाय मुख्य रूप से मिजोरम और मणिपुर में रहता है। समुदाय के लोग सबाथ का पालन, यहूदी त्योहारों का आयोजन, कोषेर भोजन परंपरा और अन्य यहूदी रीति-रिवाजों का पालन करते हैं। वे स्वयं को इजराइल की “दस खोई हुई जनजातियों” में से एक मनश्शे जनजाति का वंशज मानते हैं, जिसे लगभग 2,700 वर्ष पहले असीरियाई साम्राज्य ने निर्वासित कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… पाकिस्तान में सैनिटरी पैड और गर्भनिरोधक प्रोडक्ट्स पर 18% टैक्स खत्म करेगा पाकिस्तान सरकार सैनिटरी पैड और गर्भनिरोधक प्रोडक्ट्स पर लगने वाला 18% सेल्स टैक्स खत्म करने की तैयारी कर रही है। पिछले हफ्ते पेश किए गए बजट में सरकार ने टैक्स हटाने का प्रस्ताव रखा था। पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा कि सैनिटरी प्रोडक्ट्स महिलाओं के स्वास्थ्य, सम्मान और सामाजिक जीवन में उनकी भागीदारी के लिए बेहद जरूरी हैं। इसके पीछे उन्होंने देश की तेजी से बढ़ती आबादी को वजह बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान आबादी के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है और परिवार नियोजन सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यूनिसेफ के अनुसार पाकिस्तान में केवल 12% महिलाएं और लड़कियां ही बाजार में मिलने वाले सैनिटरी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करती हैं। बाकी महिलाएं कपड़े या घर में तैयार किए गए अन्य विकल्पों का सहारा लेती हैं। यूनिसेफ के मुताबिक स्थानीय और अन्य टैक्स को जोड़ने के बाद पाकिस्तान में महिलाओं को सैनिटरी प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए करीब 40% अतिरिक्त टैक्स चुकाना पड़ता है। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और कमजोर वर्ग की महिलाओं पर पड़ता है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार 2025 के मध्य तक पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी प्रतिदिन 4.20 डॉलर (करीब 1,175 पाकिस्तानी रुपए) की आय वाली निम्न-मध्यम आय गरीबी रेखा से नीचे जीवन बिता रही थी।
वहीं एक पैकेट में मिलने वाले 10 सैनिटरी पैड की कीमत औसतन एक दिन की कमाई के एक-तिहाई से भी ज्यादा होती है। कई मामलों में एक पैकेट पूरे महीने के लिए पर्याप्त भी नहीं होता। अमेरिका में स्काइडाइविंग विमान हादसा: भारतीय टेक प्रोफेशनल समेत 12 की मौत
अमेरिका के मिसौरी राज्य में स्काइडाइविंग के लिए इस्तेमाल होने वाला एक विमान रविवार सुबह टेकऑफ के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में 24 वर्षीय भारतीय टेक प्रोफेशनल साई कार्तिक वर्मा दतला समेत सभी 12 लोगों की मौत हो गई। यह दुर्घटना बेट्स काउंटी स्थित बटलर मेमोरियल एयरपोर्ट के पास हुई। अधिकारियों के मुताबिक, स्काइडाइव कैनसस सिटी द्वारा संचालित पैसिफिक एयरोस्पेस P750XL विमान उड़ान भरने के कुछ देर बाद वापस लौटने की कोशिश करता दिखाई दिया। इसके बाद विमान एयरपोर्ट के नजदीक एक खेत में गिर गया और टक्कर के साथ उसमें आग लग गई। हादसे में विमान में सवार सभी लोगों की मौत हो गई। साई कार्तिक वर्मा दतला कैनसस सिटी क्षेत्र में कार्यरत भारतीय टेक प्रोफेशनल थे। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ सेंट्रल मिसौरी से पढ़ाई की थी और हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम कर रहे थे। उनकी विशेषज्ञता क्लाउड कंप्यूटिंग, डेवऑप्स इंजीनियरिंग और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर में थी। हादसे में यूनाइटेड स्टेट्स पैराशूट एसोसिएशन की टेक्नोलॉजी डायरेक्टर जेन शार्प, संगीत शिक्षक डेव हर्शबर्गर, कैंसर सर्वाइवर और अनुभवी स्काइडाइवर मैथ्यू स्वोप, वीडियोग्राफर डस्टिन मैककिनी, प्रशिक्षक बनने की तैयारी कर रहे विल फिशर समेत कई अनुभवी स्काइडाइवर्स और प्रशिक्षकों की भी मौत हुई। वियतनाम में बिल्ली तस्करी गिरोह का भंडाफोड़: कैट-मीट बाजार में बेचने की थी तैयारी
वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी में पुलिस ने पालतू बिल्लियों की चोरी और तस्करी करने वाले बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई में 400 से ज्यादा जिंदा बिल्लियों को बचाया गया, जिन्हें अवैध कैट-मीट बाजार में बेचने के लिए वधशालाओं तक पहुंचाने की तैयारी थी। मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। पालतू जानवरों की चोरी की लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर पुलिस ने गिरोह के सप्लाई नेटवर्क का पता लगाया और एक वितरण केंद्र पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान 400 से अधिक जिंदा बिल्लियां बरामद की गईं। वहीं, बर्फ में संरक्षित 80 मृत बिल्लियां भी मिलीं, जिन्हें कथित तौर पर खाद्य प्रसंस्करण के लिए तैयार रखा गया था। पशु अधिकार संगठनों ने इस कार्रवाई को वियतनाम के इतिहास में सबसे बड़े पशु बचाव अभियानों में से एक बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने इस युद्ध में अपने तय लक्ष्यों से भी ज्यादा हासिल किया है। फ्रांस में G7 समिट से इतर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा कि ईरान का नेतृत्व अब पहले जैसा नहीं रहेगा और वह आगे अलग तरीके से व्यवहार करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता तो युद्ध जारी रख सकता था, लेकिन आर्थिक तबाही से बचने के लिए शांति का रास्ता चुना। ट्रम्प ने चेतावनी दी कि अगर अगले 60 दिनों में अंतिम समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से ईरान पर बमबारी शुरू कर देगा। उन्होंने कहा, “हम कभी नहीं चाहेंगे कि ईरान के पास परमाणु हथियार हो। जरूरत पड़ी तो दोबारा हमला करेंगे।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. होर्मुज में सुरक्षित आवाजाही का भरोसा: ईरान और ओमान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी। दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन और क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया। 2. ट्रम्प बोले- हिजबुल्लाह से सीरिया निपट सकता है: डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अगर इजराइल हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई में आम लोगों की मौत नहीं रोक पा रहा है, तो सीरिया यह जिम्मेदारी संभाल सकता है। 3. लेबनान में जंग खत्म करने की मांग: ईरानी संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि सिर्फ ईरान में संघर्ष रुकना काफी नहीं है। उन्होंने मांग की कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो और इजराइली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे हटे। 4. अमेरिका-ईरान बातचीत पर चीन की चेतावनी: चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि मौजूदा सहमति अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का दूसरा चरण पहले से ज्यादा मुश्किल होगा और स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों को लगातार प्रयास करने होंगे। 5. कुछ दिनों में पूरा ईरान समझौता सार्वजनिक होगा: ट्रम्प ने कहा कि वह अगले कुछ दिनों में अमेरिका-ईरान समझौते का पूरा दस्तावेज सार्वजनिक करेंगे। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समझौते को शब्द-दर-शब्द पढ़कर भी सुनाएंगे, ताकि उसकी सही जानकारी सामने आ सके। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा- जब तक मैं प्रेसिडेंट हूं, व्हाइट हाउस में मोदी का हमेशा अच्छा दोस्त मौजूद रहेगा। अगर भारत या मोदी पर हमला होता है और मोदी लीडर होंगे तो हम उनकी मदद करेंगे। उन्होंने मोदी की तारीफ करते हुए कहा- जब तक मोदी लीडर हैं, इंडिया हर फील्ड में बड़ा रोल निभाएगा। मोदी शांत और जबरदस्त नेता हैं, लेकिन मैं मोदी की तरह नहीं हूं। वहीं ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय बैठक में मोदी ने कहा कि समुद्र में भारतीयों की सुरक्षा जरूरी है। उम्मीद है कि ईरान के साथ डील में भारतीयों की सुरक्षा पक्की की जाएगी। पीएम ने कहा कि होर्मुज खुला रहना जरूरी है। मैं वेस्ट एशिया में शांति की कोशिशों में ट्रम्प की लीडरशिप की तारीफ करता हूं। ट्रम्प के नेतृत्व में शांति की उम्मीद दिख रही है। फ्रांस के एवियन में दो दिवसीय 52वें G7 समिट का आयोजन हुआ। आज समिट का दूसरा दिन था। मोदी और ट्रम्प भी समिट में शामिल हुए थे। मोदी-ट्रम्प मुलाकात की 4 तस्वीरें… मोदी ने दोनों दिन भारतीय की मौत का मुद्दा उठाया पीएम मोदी ने G7 समिट में दोनों दिन होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा उठाया। उन्होंने समिट के पहले दिन मंगलवार को आउटरीच सेशन में कहा था कि इस अहम समुद्री मार्ग में कई भारतीयों ने जान गंवाई है और वैश्विक व्यापार को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की जिम्मेदारी है। मोदी के G7 दौरे से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोल्दोमीर जेलेंस्की को नजरअंदाज कर दिया। वायरल वीडियो में ट्रम्प अन्य नेताओं से मुलाकात और हाथ मिलाते नजर आते हैं, लेकिन जेलेंस्की से न तो उन्होंने हाथ मिलाया और न ही कोई खास बातचीत की। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब दोनों नेताओं के बीच व्हाइट हाउस में हुई तीखी बहस और तकरार को लेकर पहले भी चर्चा हो चुकी है। दरअसल, ट्रम्प और जेलेंस्की के संबंध पहले भी तनावपूर्ण रहे हैं। इसी साल व्हाइट हाउस में हुई एक बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसकी काफी चर्चा हुई थी। फ्रांस के शहर एवियन में G-7 शिखर सम्मेलन 2026 आयोजित हो रहा है। 15 से 17 जून तक होने वाली इस समिट में दुनिया के 7 देशों के नेता वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया की स्थिति, व्यापार, जलवायु परिवर्तन और सप्लाई चैन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। G-7 समिट के टॉप 8 मोमेंट्स… मोदी की मैक्रों, मेलोनी और ट्रम्प से मुलाकात ———————————- ये खबर भी पढ़ें… पीएम मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले, फ्रांस में G7 समिट में साथ बैठे, 5 मिनट बात की पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बात चली। मीटिंग में दोनों एक-साथ बैठे नजर आए। यह मुलाकात 16 महीनों के बाद हुई है। पूरी खबर पढ़ें…
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख विवाद का मुद्दा उठाया। उन्होंने भारत और चीन के बीच लिपुलेख दर्रे के इस्तेमाल को लेकर हुए समझौते पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यह व्यवस्था किस आधार पर बनाई गई और इसकी प्रकृति क्या है। इसके जवाब में वांग यी ने कहा कि यह मूल रूप से भारत और नेपाल के बीच का मामला है और इसका समाधान बातचीत से ही निकलेगा। उन्होंने कहा कि इस तरह के मुद्दे संबंधित देशों के बीच कूटनीतिक वार्ता के जरिए सुलझाए जाने चाहिए। नेपाल ने दोहराया कि कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। काठमांडू पहले भी नई दिल्ली और बीजिंग को विरोध नोट भेजकर कह चुका है कि उसकी सहमति के बिना इस इलाके से जुड़ा कोई समझौता स्वीकार नहीं होगा। 2020 में हुआ था भारत-चीन समझौता भारत और चीन ने 2020 में लिपुलेख दर्रे के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमा पार व्यापार को फिर से शुरू करने पर सहमति बनाई थी। दोनों देशों ने इस मार्ग को तीर्थयात्रा और व्यापार के लिए इस्तेमाल करने की व्यवस्था पर सहमति जताई थी। नेपाल ने उस समय इसका विरोध किया था। काठमांडू का कहना था कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं, इसलिए उससे बिना राय लिए इस मार्ग को लेकर कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसके बाद नेपाल ने भारत और चीन दोनों को राजनयिक विरोध नोट भेजा था। इसके बावजूद भारत और चीन कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीमावर्ती व्यापार के लिए इस मार्ग का इस्तेमाल करते रहे हैं। खनाल ने भारत दौरे पर नहीं उठाया था मुद्दा दिलचस्प बात यह है कि शिशिर खनाल ने हाल की भारत यात्रा के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया था। उस समय उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में भी कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख का जिक्र नहीं था। ऐसे में कूटनीतिक हलकों में इस बात पर चर्चा है कि नेपाल ने नई दिल्ली के मुकाबले बीजिंग में ज्यादा सख्त रुख दिखाया। विश्लेषकों का मानना है कि नेपाल दोनों पड़ोसियों के साथ संतुलन बनाए रखते हुए सीमा विवाद को जिंदा रखना चाहता है, लेकिन खुलकर टकराव से भी बचना चाहता है। भारत-चीन में लिपुलेख दर्रा से व्यापार शुरू भारत-चीन सीमा पर स्थित लिपुलेख दर्रे से व्यापार दोबारा शुरू होने जा रहा है। गलवान घाटी में 2020 में हुए संघर्ष के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। करीब छह साल बाद अब इस रास्ते से व्यापार बहाल करने की तैयारी शुरू हो गई है। उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले से करीब 300 व्यापारियों के नाम विदेश मंत्रालय को भेजे गए हैं। इन्हें पासपोर्ट और वीजा के बजाय ट्रेड पास के जरिए तिब्बत के तकलाकोट बाजार तक जाने की अनुमति दी जाएगी। इस बार सीमा तक सड़क पहुंचने से व्यापारियों को बड़ा फायदा मिलेगा। पहले सामान घोड़े-खच्चरों के जरिए ले जाया जाता था, लेकिन अब वाहन सीधे सीमा तक पहुंच सकेंगे। इससे व्यापार की लागत और समय दोनों कम होंगे। लिपुलेख दर्रा भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने व्यापार का हिस्सा रहा है। तिब्बती व्यापारी नमक, ऊन और बोरेक्स लेकर भारत आते थे, जबकि भारतीय व्यापारी कपड़ा, अनाज और मसाले तिब्बत ले जाते थे। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह मार्ग बंद हो गया था। 1991 में दोनों देशों के बीच समझौते के बाद इसे फिर खोला गया था। हालांकि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद व्यापारिक गतिविधियां बंद हो गई हुई थीं। दो नदियों से तय हुई भारत-नेपाल की सीमा भारत, नेपाल और चीन सीमा से लगे इस इलाके में हिमालय की नदियों से मिलकर बनी एक घाटी है, जो नेपाल और भारत में बहने वाली काली या महाकाली नदी का उद्गम स्थल है। इस इलाके को कालापानी भी कहते हैं। यहीं पर लिपुलेख दर्रा भी है। यहां से उत्तर-पश्चिम की तरफ कुछ दूरी पर एक और दर्रा है, जिसे लिंपियाधुरा कहते हैं। अंग्रेजों और नेपाल के गोरखा राजा के बीच 1816 में हुए सुगौली समझौते में काली नदी के जरिए भारत और नेपाल के बीच सीमा तय की थी। समझौते के तहत काली नदी के पश्चिमी क्षेत्र को भारत का इलाका माना गया, जबकि नदी के पूर्व में पड़ने वाला इलाका नेपाल का हो गया। काली नदी के उद्गम स्थल, यानी ये सबसे पहले कहां से निकलती है, इसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद रहा है। भारत पूर्वी धारा को काली नदी का उद्गम मानता है। वहीं नेपाल पश्चिमी धारा को उद्गम धारा मानता है और इसी आधार पर दोनों देश कालापानी के इलाके पर अपना-अपना दावा करते हैं। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. नेपाल बोला- भारतीय यात्री लिपुलेख से मानसरोवर न जाएं:ये हमारा इलाका; भारत बोला- नेपाल के दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं नेपाल सरकार ने पिछले महीने भारतीय तीर्थयात्रियों से लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा न करने की अपील की। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि 1816 की सुगौली संधि के मुताबिक लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी क्षेत्र नेपाल का हिस्सा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल की लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष बहुत लंबे समय से चल रहा है और इसमें बहुत से आम नागरिकों की जान जा रही है।ट्रंप ने सुझाव दिया क
अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस समय एक विरोधाभास से गुजर रही है, जहां एक ओर अरबपतियों की संपत्ति नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है, वहीं आम वर्कर्स बढ़ती महंगाई और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। पिछले सप्ताह इसकी झलक दो घटनाओं में दिखाई दी। बुधवार को लेबर ब्यूरो ने बताया कि ऊर्जा कीमतों(बिजली, पेट्रोल, गैस, डीजल) में बढ़ोतरी ने औसत अमेरिकी कर्मचारी की पिछले डेढ़ साल की वास्तविक वेतन वृद्धि लगभग खत्म कर दी। वहीं शुक्रवार को स्पेसएक्स के आईपीओ के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले खरबपति बन गए। अर्थशास्त्रियों गैब्रियल जकमैन और इमैनुएलसाएज के अनुसार, 19वीं सदी के उत्तरार्ध के तथाकथित “गिल्डेड एज’ में सबसे अमीर अमेरिकियों की संपत्ति देश के वार्षिक आर्थिक उत्पादन के लगभग 3% के बराबर थी। आज अमेरिका के शीर्ष 0.00001% यानी लगभग 20 लोगों की संपत्ति राष्ट्रीय उत्पादन (अमेरिकी कंपनियों द्वारा अमेरिका और अन्य देशों में सालाना किया जाने वाला उत्पादन ) के 12% तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी इतिहास में शीर्ष स्तर पर संपत्ति का इतना बड़ा केंद्रीकरण पहले कभी नहीं देखा गया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर स्टीफेनी स्टेंटचेवा केअनुसार, शेयर बाजार में लगातार उछाल ने लोगों में यह भावना पैदा की है कि आर्थिक व्यवस्था कुछ चुनिंदा लोगों के लिए अधिक काम कर रही है। हालांकि आधे से अधिक अमेरिकी परिवार प्रत्यक्ष रूप से या रिटायरमेंट फंड के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश रखते हैं और उन्हें भी लाभ मिला है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दशक में मध्यम वर्ग की संपत्ति अमीरों की तुलना में कहीं धीमी गति से बढ़ी है। ईरान से जुड़े तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण मई में अमेरिका की मुद्रास्फीति तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। महंगाई को समायोजित करने के बाद प्रति घंटे मिलने वाला वास्तविक वेतन लगातार तीन महीनों से घट रहा है। नतीजतन, ट्रम्प के मौजूदा कार्यकाल के शुरुआती दौर में हुई वेतनवृद्धि का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है। अमेरिकी परिवार पहले ही कोविड-19 महामारी,चार दशक की सबसे ऊंची महंगाई, ऊंची ब्याज दरों, टैरिफ और मंदी की आशंकाओं का सामना कर चुके हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) एक नई चिंता बनकर उभरा है। कई तकनीकी कंपनियों के प्रमुख चेतावनी दे चुके हैं कि एआई आने वाले वर्षों में अनेक श्रेणियों की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। कोलंबिया बिजनेस स्कूल के अर्थशास्त्री ग्लेन हबार्ड का कहना है कि जब तकनीकी कंपनियां स्वयं यह संदेश देती हैं कि उनकी तकनीक लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है, तो उसके खिलाफ प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। इसी वजह से अमेरिका में आर्थिक असमानता, सुपररिच वर्ग के बढ़ते प्रभाव और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बहस पहले से अधिक तेज हो गई है। महंगाई बढ़ने के साथ कमाई घटी – अमेरिका में महामारी के बाद महंगाई चार दशक में सबसे अधिक हो गई । – राष्ट्रीय आय में वर्कर्स के हिस्से में लगातार गिरावट। – अमीरों की तुलना में मध्यमवर्ग की संपत्ति में बढ़ोतरी की गति धीमी। – लंबे समय तक महंगाई रहने से कंज्यूमर खर्च से बचते हैं। – प्रति घंटा वेतनों में तीन माह से गिरावट जारी। एआई कंपनियों के कई बड़े आईपीओ आएंगे टेक कंपनियों को अभी हाल में शेयर मार्केट की तेजी से फायदा हुआ है। स्पेसएक्स के बाद एआई कंपनियों के बड़े-बड़े आईपीओ की श्रृंखला आ सकती है। महंगाई और आय में गिरावट की चिंता के बीच एआई में उछाल से लोगों का अमीरों की संपत्ति में बढ़ोतरी से असहज होना असामान्य नहीं है। कम आय वालों को करना पड़ रहा संघर्ष अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई के दौर से कंज्यूमर का आर्थिक व्यवहार लंबे समय तक प्रभावित रहता है। यह उनके बजट पर बोझ के साथ अनुचित भी है, क्योंकि अमीर लोग तो महंगाई का सामना अपेक्षाकृत आसानी से कर लेते हैं जबकि कम आय वाले परिवारों को संघर्ष करना पड़ता है। कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटरों का विरोध सर्वेक्षणों के अनुसार कई वर्कर्स करिअर पर एआई टेक्नोलॉजी के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। अमेरिका के कई राज्यों में वोटर अपने इलाके में डेटा सेंटरों के निर्माण पर विरोध जता चुके हैं। वे अपने बिजली के बिल, पानी सप्लाई और हवा की क्वालिटी पर इसके असर की बात कह रहे हैं।
USA Iran Peace deal: अमेरिका के एक प्रमुख विशेषज्ञ माइकल रुबिन ने कहा है कि ईरान समस्या को सुलझाने के लिए पाकिस्तान पर निर्भर रहना, द्वितीय विश्व युद्ध के समय नाजी जर्मनी की समस्या सुलझाने के लिए फासिस्ट इटली पर भरोसा करने जैसा है।माइकल रुबिन, मिडिल ईस्ट फोरम के पॉलिसी एनालिसिस ड
डोनाल्ड ट्रम्प इस हफ्ते 14 जून को 80 साल के हो गए। राष्ट्रपति पद पर रहते हुए 80 साल की उम्र देखने वाले वे अमेरिका के दूसरे राष्ट्रपति हैं। उनसे पहले राष्ट्रपति जो बाइडेन ने नवंबर 2022 में अपना 80वां जन्मदिन मनाया था। ट्रम्प दुनिया के सबसे उम्रदराज नेताओं में जरूर शामिल हो गए हैं, लेकिन वे दुनिया के सबसे बुजुर्ग शासक नहीं हैं। प्यू रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के 186 देशों के नेताओं में 16 नेता ऐसे हैं जो ट्रम्प से भी ज्यादा उम्र के हैं। रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प दुनिया के लगभग 91% राष्ट्रीय नेताओं से बड़े हैं। वहीं दुनिया के राष्ट्रीय नेताओं की औसत उम्र 63 साल है। दुनिया के सबसे उम्रदराज मौजूदा राष्ट्रीय नेता कैमरून के राष्ट्रपति पॉल बिया हैं। उनकी उम्र 93 साल है और वे 1982 से सत्ता में बने हुए हैं। उनके बाद सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद आते है, जिनकी उम्र 90 साल है और वे 2015 से देश के शासक हैं। अफ्रीकी देशों के नेताओं की सबसे ज्यादा उम्र रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दुनिया के सबसे ज्यादा उम्र वाले नेताओं में बड़ी संख्या अफ्रीकी देशों की है। इनमें युगांडा, इक्वेटोरियल गिनी, मलावी, आइवरी कोस्ट, जिम्बाब्वे और रिपब्लिक ऑफ कांगो के नेता शामिल हैं। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी की उम्र अब 82 साल है और वे करीब 40 साल से सत्ता में बने हुए हैं। वहीं इक्वेटोरियल गिनी के राष्ट्रपति तेओदोरो ओबियांग न्गुएमा म्बासोगो भी दुनिया के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। वे 1979 से देश पर शासन कर रहे हैं। 10 सबसे उम्रदराज नेताओं में 7 गैर-स्वतंत्र देशों के प्रमुख दुनिया के दस सबसे उम्रदराज नेताओं में से 7 ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें फ्रीडम हाउस ने नॉट फ्री यानी स्वतंत्र नहीं की श्रेणी में रखा है। दूसरे शब्दों में कहें तो इन देशों में लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और राजनीतिक अधिकार सीमित माने जाते हैं। ट्रम्प से ज्यादा उम्र वाले 16 नेताओं में से लगभग आधे ऐसे देशों का नेतृत्व कर रहे हैं जिन्हें इसी श्रेणी में रखा गया है। इस वजह से फिर से यह सवाल उठने लगा है कि क्या लंबे समय तक सत्ता में बने रहना लोकतांत्रिक जवाबदेही को प्रभावित करता है। ————————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन माना जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें
पाकिस्तान में 9 साल की ऑस्ट्रेलियाई बच्ची हानिया अहमद की पुलिस की गोलीबारी में मौत हो गई। हानिया अपने परिवार के साथ पाकिस्तान घूमने आई थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर के केवडेल इलाके का यह परिवार पंजाब के चकवाल शहर में अपने रिश्तेदारों से मिलने आया था। बुधवार रात वे किराये की कार से सफर कर रहे थे, तभी कुछ बदमाशों ने उनके गहने लूट लिए। बताया गया है कि मोटरसाइकिल पर सवार दो लुटेरे वारदात के बाद भाग रहे थे। इसी दौरान एक पुलिसकर्मी की नजर उन पर पड़ गई। लुटेरे मौके से फरार हो गए और परिवार की किराये की कार भी वहां से आगे बढ़ गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पुलिस ने गलती से परिवार की कार को लुटेरों की गाड़ी समझ लिया और उस पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोलियां लगने से 9 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसके पिता और बड़े भाई गंभीर रूप से घायल हो गए। बच्ची की मां सुरक्षित है। पुलिस बोली- लुटेरों ने पहले गोली चलाई, पिता ने नकारा पंजाब पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध लुटेरों ने एक पुलिस अधिकारी पर गोली चलाई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई। हालांकि हानिया के पिता ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि पुलिस ने ही सबसे पहले गोली चलाई थी। इस घटना पर बयान देते हुए ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए। जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि सबसे पहले परिवार और फिर बाकी लोगों को भी सच्चाई पता चल सके। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि वह मृत बच्ची के परिवार और घायल ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को हर संभव कांसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। मंत्रालय ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना भी व्यक्त की। रिपोर्ट के मुताबिक, यह परिवार हाल ही में मक्का की धार्मिक यात्रा (हज/उमरा) पूरी करके पाकिस्तान पहुंचा था। पंजाब पुलिस ने अधिकारी को निलंबित किया पुलिस ने गोली चलाने वाले अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। घटना की जांच के लिए एक संयुक्त जांच टीम (जॉइंट इन्वेस्टिगेशन टीम) भी बनाई गई है। पुलिस का कहना है कि लूटपाट में शामिल दो संदिग्ध लोगों को बाद में एक अलग मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस घटना के बाद पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों में लोगों में नाराजगी है। परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता था। पाकिस्तान के सीनियर पुलिस अधिकारियों ने इसे गलत पहचान की वजह से हुई एक दुखद घटना बताया है और कहा है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के जरिए परिवार को न्याय दिलाया जाएगा। इस मामले ने पाकिस्तान में पुलिस के कामकाज पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान बल प्रयोग और आम लोगों की मौत होने पर जवाबदेही तय करने के तरीकों पर चर्चा तेज हो गई है। मानवाधिकार संगठनों ने लंबे समय से पुलिस फायरिंग, हिरासत में दुर्व्यवहार और कथित फर्जी मुठभेड़ों को लेकर चिंता जताई है। वहीं अधिकारी भी मानते रहे हैं कि पुलिस की ट्रेनिंग और लोगों का भरोसा बढ़ाने के लिए सुधारों की जरूरत है। ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह पीड़ित परिवार की हर संभव मदद कर रहा है। मंत्रालय ने बताया कि वह मृत ऑस्ट्रेलियाई बच्ची के परिवार और इस घटना में घायल हुए दो ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों को काउंसुलर सहायता उपलब्ध करा रहा है। ———————– ये खबर भी पढ़ें PoK में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत:1100 गिरफ्तार; शरणार्थी सीटें खत्म करने के लिए आंदोलन, पाकिस्तानी सेना का विरोध पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK ) में बीते 4 दिनों से चल रहे आंदोलन में अब तक 46 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, चार दिनों में 1100 से ज्यादा लोगों की भी गिरफ्तारी हुई है। पूरी खबर पढ़ें

