दुनिया की सबसे लंबी उड़ान में 9 टाइम जोन पड़ेंगे:विमान में कृत्रिम सूर्योदय-सूर्यास्त, सिडनी-लंदन की नॉन-स्टॉप फ्लाइट 22 घंटे की होगी

कल्पना कीजिए कि आप एक विमान में बैठते हैं और बिना कहीं रुके, पूरे एक दिन यानी करीब 20 से 22 घंटे तक लगातार आसमान में सफर करते हैं। सात से नौ टाइम जोन को एक साथ पार करने का यह सफर किसी भी इंसान के शरीर और दिमाग को थकाकर चूर करने के लिए काफी है। लेकिन विज्ञान की मदद से अब इस थकाऊ सफर को आरामदायक और सेहतमंद बनाने का एक बड़ा प्रयोग होने जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई विमानन कंपनी ‘क्वांटस एयरवेज’ ने ‘सनराइज’ प्रोजेक्ट में दुनिया की सबसे लंबी नॉन-स्टॉप फ्लाइट (सिडनी से लंदन) के लिए विशेष रूप से बनाए एयरबस ए350-1000यूएलआर विमान पेश किया है। उड़ानें अगले साल शुरू होंगी। दावा है कि इसमें यात्रियों को जेटलैग (थकान और अनिद्रा) से बचाने के लिए विमान में कृत्रिम सूर्योदय-सूर्यास्त, विशेष खान-पान और टहलने के लिए ‘वेलनेस जोन’ है। एनिमेटेड लाइट जैविक घड़ी को दुरुस्त रखेगी इतने लंबे सफर में इंसान के जैविक चक्र (बायोलॉजिकल क्लॉक) को संतुलित रखना वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। प्रोजेक्ट के वैज्ञानिक अनुसंधान में शामिल रहे सिडनी यूनिवर्सिटी में नींद विज्ञान के प्रोफेसर पीटर सिस्टुली कहते हैं, ‘नौ टाइम जोन को एक साथ पार करना बड़ा जैविक संकट होता है। इसे मात देने के लिए हमने विमान के भीतर हर छोटी डिटेल पर काम किया है। टेकऑफ के तुरंत बाद भारी भोजन देने से बचा जाएगा और शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार ‘प्रोटेक्टिव स्लीप विंडो’ तय होगा। इसमें विमान की खास एनिमेटेड लाइटिंग की बड़ी भूमिका होगी।’ विमान के केबिन डिजाइनर डेविड कॉन ने बताया, ‘विमान में ऑस्ट्रेलिया के प्राकृतिक दृश्यों से प्रेरित 14 अलग-अलग लाइट ‘सिनेरियो’ प्रोग्राम किए हैं, जो सुबह या शाम होने का अहसास कराएगी। स्विमिंग पूल जैसा अहसास कराने वाला खास जोन भी विमान में बिखरी हुई, झिलमिलाती रोशनी होगी, जो यात्रियों को किसी स्विमिंग पूल के किनारे लेटने जैसा अहसास कराएगी, जहां वे खड़े होकर स्ट्रेचिंग कर सकेंगे और शरीर को आराम दे सकेंगे। वजन की पाबंदियों के कारण इस बड़े विमान में केवल 238 यात्री ही सफर करेंगे, जिससे आम इकोनॉमी क्लास में भी पैरों को फैलाने के लिए 33 से 34 इंच की अतिरिक्त जगह मिलेगी।

दावा- ब्रिटिश प्रधानमंत्री स्टार्मर कल तक इस्तीफा दे सकते हैं:पार्टी के 100 सांसद खिलाफ; 10 साल में 5 पीएम ने कार्यकाल से पहले पद छोड़ा

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार को इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं। साथ ही वे अपने पद छोड़ने का रोडमैप भी बता सकते हैं। यह दावा ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक स्टार्मर ने कैबिनेट मंत्रियों, सलाहकारों और ट्रेड यूनियन नेताओं से बातचीत के बाद तय किया है कि उनका पद पर बने रहना अब मुश्किल है। हालांकि, रॉयटर्स के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि स्टार्मर अभी भी प्रधानमंत्री के तौर पर अपने काम करने पर ध्यान दे रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक स्टार्मर की लेबर पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि पीएम को इस्तीफा दे देना चाहिए या अपने पद छोड़ने की समयसीमा घोषित करनी चाहिए। स्टार्मर के खिलाफ हुए सांसद, हाउस ऑफ कॉमन्स में पार्टी के कुल सांसदों का करीब एक चौथाई हैं। अगर स्टार्मर इस्तीफा देते हैं, तो ब्रिटेन के 10 साल के इतिहास में वे छठे ऐसे प्रधानमंत्री होंगे, जिन्हें यह पद छोड़ना पड़ा। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक अपना कार्यकाल खत्म करने से पहले ही पीएम पद छोड़ चुके हैं। स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा। स्टार्मर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद बर्नहैम ने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। बर्नहैम के सहयोगी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने 19 जून को साफ कहा था कि मैं अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करूंगा। साथ ही लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हों। अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है। ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है, जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए। 2011 में स्थिरता के लिए ‘फिक्स्ड टर्म कानून’ लाया गया था 2011 में फिक्स्ड-टर्म पार्लियामेंट्स एक्ट’ लाया गया था। इसका मकसद संसद का कार्यकाल तय रखना और सरकारों को समय से पहले गिरने से बचाना था। लेकिन बाद में इस कानून को खत्म कर दिया गया। आलोचकों का कहना है कि इसके बाद पुराने नियम फिर लागू हो गए, जिससे प्रधानमंत्री अपनी पार्टी के समर्थन और अचानक पैदा होने वाले राजनीतिक संकटों के ज्यादा भरोसे हो गए। ऐसे में पार्टी का समर्थन कम होते ही प्रधानमंत्री की कुर्सी खतरे में पड़ सकती है, जिससे नेताओं का कार्यकाल छोटा और अनिश्चित होता जा रहा है। ब्रेग्जिट के बाद कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2016 में ब्रेग्जिट पर हुए जनमत संग्रह के बाद ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। लोग अब सिर्फ पार्टी देखकर वोट नहीं देते, बल्कि महंगाई, टैक्स, सरकारी सेवाओं और बेहतर जीवन स्तर जैसे मुद्दों पर जल्दी नतीजे चाहते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसी वजह से नेताओं पर कम समय में अच्छे नतीजे देने का दबाव बढ़ गया है। अगर सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती, तो सत्तारूढ़ पार्टी के अंदर ही विरोध शुरू हो जाता है और नेता बदलने की मांग उठने लगती है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं:कश्मीर मूल की हैं; एपस्टीन फाइल्स विवाद से PM स्टार्मर की कुर्सी खतरे में अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े विवादों के कारण ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है। अब उनकी अपनी लेबर पार्टी के एक धड़े ने ही इस्तीफे की मांग कर दी है। हालांकि स्टार्मर अभी पद छोड़ने से इनकार कर रहे हैं। इस बीच, नए प्रधानमंत्री पद की होड़ में गृह मंत्री शबाना महमूद के साथ ही स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट स्ट्रीटिंग और पूर्व उपप्रधानमंत्री अंगेला रेनर का नाम सामने आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

पहले दिया 60 दिनों का अल्‍टीमेटम, फिर दिखाई ईरान को हेकड़ी… ट्रंप ने दी होर्मुज में टोल लगाने की धमकी; क्‍या युद्ध का खर्चा निकालने की है प्‍लानिंग?

Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच लगभग 100 दिनों के युद्ध के बाद समझौता हो गया है। समझौते की बाकी शर्तें किस तरह से पूरी होनी है, इसे लेकर अगले 60 दिनों में बात होगी। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि सीजफायर के दौरान 60 दिनों तक होर

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वर्ल्ड अपडेट्स:जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान लौटाया; बोले- यह यूक्रेनी जनता और सैनिकों के लिए था

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च राज्य सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ लौटा दिया है। यह कदम पोलैंड के राष्ट्रपति कारोळ नवरोत्स्की द्वारा सम्मान वापस लेने के फैसले के बाद उठाया गया। दोनों देशों के बीच द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास से जुड़ा विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। नवरोत्स्की ने जेलेंस्की से सम्मान वापस लेने का फैसला तब किया, जब यूक्रेन ने अपनी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्स की एक यूनिट का नाम यूक्रेनियन इंसर्जेंट आर्मी (UPA) के नाम पर रखा। पोलैंड UPA पर द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या का आरोप लगाता है। जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह सम्मान यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था। उन्होंने सम्मान पोलैंड के राष्ट्रपति कार्यालय को वापस भेजने की जानकारी देते हुए इसकी तस्वीरें और डाक रसीद भी साझा की। यह सम्मान पूर्व पोलिश राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने 2023 में जेलेंस्की को यूक्रेन की सुरक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवाधिकारों की रक्षा में योगदान के लिए दिया था। यूक्रेन के चार वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से मिले अपने राज्य सम्मान लौटाने की घोषणा की है। हालांकि, पूर्व प्रधानमंत्री आर्सेनी यात्सेन्युक ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि एक गलत फैसले का जवाब दूसरे गलत फैसले से नहीं दिया जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… रिपोर्ट- ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर सोमवार तक इस्तीफा दे सकते हैं; सरकार ने दावे को खारिज किया ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के जल्द इस्तीफा देने की अटकलें तेज हो गई हैं। ब्रिटेन के अखबार ‘द ऑब्जर्वर’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वह सोमवार तक इस्तीफे का ऐलान कर सकते हैं या पद छोड़ने का रोडमैप बता सकते हैं। हालांकि सरकार ने इन खबरों को खारिज किया है। रिपोर्ट में कहा गया कि, स्टार्मर की पार्टी लेबर पार्टी के 100 से ज्यादा सांसद उनसे इस्तीफा देने या पद छोड़ने की मांग कर चुके हैं। न्यूज एजेंसी ANI मुताबिक, हाल के महीनों में स्टार्मर पर पार्टी के अंदर से दबाव बढ़ा है। यह दबाव तब और बढ़ गया, जब लेबर पार्टी के नेता एंडी बर्नहम ने शुक्रवार को एक संसदीय सीट जीत ली। उन्हें स्टार्मर के संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, स्टार्मर ने शुक्रवार को साफ कहा था कि वह नेतृत्व को लेकर किसी भी चुनौती का सामना करेंगे और पार्टी को आपसी खींचतान से बचना चाहिए। जर्मनी में दो मालगाड़ियों की टक्कर, पुल से नीचे गिरे डिब्बे; एक की मौत
जर्मनी के म्यूनिख में शनिवार तड़के दो मालगाड़ियों की टक्कर हो गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो रेल डिब्बे पटरी से उतरकर पुल से नीचे सड़क पर जा गिरे। दुर्घटना शंटिंग ऑपरेशन के दौरान हुई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में दो रेल डिब्बे पुल से लटके और नीचे सड़क पर गिरे दिखाई दिए। घटनास्थल पर दमकल, पुलिस और भारी मशीनरी की मदद से राहत एवं रिकवरी अभियान चलाया गया। पुलिस के अनुसार नीचे गिरे डिब्बे खाली थे। हादसा केवल मालगाड़ियों के लिए इस्तेमाल होने वाले रेल मार्ग पर हुआ, इसलिए यात्री रेल सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं। रिकवरी कार्य पूरा होने तक आसपास की सड़कें बंद रखी गई हैं। इस हादसे से कुछ घंटे पहले ब्रिटेन में भी दो यात्री ट्रेनों की टक्कर हुई थी। उस दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत और 89 लोग घायल हुए थे। फ्रांस में भीषण गर्मी के बीच संगीत महोत्सव पर शराब बैन
फ्रांस में जारी भीषण हीटवेव के बीच सरकार ने राष्ट्रीय संगीत महोत्सव ‘फेट द ला म्यूजिक’ के दौरान कुछ आयोजनों में शराब के सेवन पर प्रतिबंध लगा दिया है। देश के लगभग एक-तिहाई हिस्से में रेड हीटवेव अलर्ट जारी है और कई क्षेत्रों में तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि राज्य और उससे जुड़ी एजेंसियों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में शराब नहीं परोसी जाएगी। रेड अलर्ट वाले क्षेत्रों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर भी रोक लगाई गई है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि सोमवार को गर्मी और बढ़ सकती है। कई दिनों से जारी हीटवेव के कारण दर्जनों ट्रेन सेवाएं रद्द करनी पड़ी हैं और कई क्षेत्रों में स्कूलों की कक्षाएं स्थगित की गई हैं। लोगों को राहत देने के लिए पेरिस प्रशासन ने शहर के पार्क और उद्यान पूरी रात खुले रखने का निर्णय लिया है। चार दशक से अधिक पुराने इस संगीत महोत्सव का आयोजन हर वर्ष ग्रीष्म संक्रांति के अवसर पर किया जाता है। पिछले साल पेरिस में ही करीब 20 लाख लोगों ने इसमें भाग लिया था।

ट्रम्प बोले-अमेरिका होर्मुज में टोल लगा सकता है:इससे मिडिल-ईस्ट में सुरक्षा पर खर्च की भरपाई करेंगे; स्विट्जरलैंड में आज US-ईरान की बातचीत

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर ईरान के साथ 60 दिनों में कोई समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट में टोल लगाने पर विचार कर सकता है। यह शुल्क मिडिल-ईस्ट में सुरक्षा पर हुए अमेरिकी खर्च की भरपाई के लिए होगा। हालांकि उन्होंने साफ किया कि सीजफायर के दौरान अगले 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर कोई टोल नहीं लगाया जाएगा। 60 दिन खत्म होने के बाद भी टोल नहीं लगाया जाएगा, जब तक यह अमेरिका की तरफ से नहीं लगाया गया होता। इस बीच अमेरिका और ईरान शांति वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। अमेरिकी डेलिगेशन में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर हैं। वहीं, ईरानी डेलिगेशन का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघच कर रहे हैं। संसद स्पीकर बाघेर गालिबाफ भी बातचीत में शामिल होंगे। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान की जहाजों को चेतावनी: ईरान की रिवोल्यूशनरी फोर्स (IRGC) ने जहाजों को होर्मुज के पास से न गुजरने की चेतावनी दी और कहा कि अगर वे ऐसा करते हैं तो उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं होगी। 2. ईरानी टीम स्विट्जरलैंड रवाना: अमेरिका से बातचीत करने ईरान की टीम स्विट्जरलैंड रवाना हो गई। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। 3. भारत से जुड़े 3 तेल टैंकर ने होर्मुज पार किया: भारतीय झंडे वाले तीन तेल टैंकर शनिवार को सुरक्षित रूप से होर्मुज पार कर भारत के लिए रवाना हो गए। इन जहाजों में 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल और 94 भारतीय क्रू मेंबर शामिल हैं। 4. नेतन्याहू बोले- हमले जारी रखेंगे: इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इजराइल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा, और दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह पर हमले जारी रखेगा। 5. ट्रम्प बोले- पाकिस्तान ने बहुत मदद की: अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि ईरान के साथ हुए समझौते (MoU) में पाकिस्तान ने अमेरिका की बहुत मदद की। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला:हमारे मामलों में दखल न दें; जरदारी बोले थे- वाराणसी की मस्जिद खतरे में, कार्रवाई रोकी जाए

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनिया भर में चर्चा होती है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से ऐसी बयानबाजी बेतुकी लगती हैं। अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है। दरअसल जरदारी ने कहा था कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया। जिसे रेलवे ने अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया है। जरदारी बोले थे- भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई से तनाव बढ़ सकता है पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को एक प्रेस नोट जारी किया। जिसमें जरदारी ने कहा कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया, जिसे उन्होंने करीब 1000 साल पुरानी मस्जिद बताया। जरदारी ने भारत से अपील की कि ऐसे धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। उनका कहना है कि इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करनी चाहिए। अब जानिए क्या है वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद विवाद… वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब परियोजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी कर 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा था। रेलवे का कहना है कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर बना अवैध ढांचा है और 1991 में दायर एक दीवानी मुकदमे में अगस्त 2024 में आए फैसले के बाद कार्रवाई की जा रही है। रेलवे का कहना है कि 1991 में दायर मुकदमा 28 अगस्त 2024 को खारिज होने के बाद मस्जिद हटाने का रास्ता साफ हो गया। वहीं, मस्जिद प्रबंधन समिति का दावा है कि मामला मस्जिद के अस्तित्व से नहीं, बल्कि उसके पूर्वी हिस्से की जमीन से जुड़ा था और रेलवे अदालत के फैसले की गलत व्याख्या कर रहा है। मस्जिद की 3 तस्वीरें… रेल प्रशासन का क्या कहना है, 4 पॉइंट… मस्जिद कमेटी का पक्ष; बोले- हाईकोर्ट जाएंगे —————————

भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला:हमारे मामलों में दखल न दें; जरदारी बोले थे- वाराणसी की मस्जिद खतरे में, कार्रवाई रोकी जाए

पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। विदेश मंत्रालय की तरफ से शनिवार को जारी प्रेस रिलीज में कहा गया कि मानवाधिकारों के मामले में पाकिस्तान का अपना रिकॉर्ड बहुत खराब रहा है, जिस पर दुनिया भर में चर्चा होती है। ऐसे में पाकिस्तान की तरफ से ऐसी बयानबाजी बेतुकी लगती हैं। अलग-अलग धर्मों के अल्पसंख्यकों को सुनियोजित तरीके से निशाना बनाने और उनका उत्पीड़न करने का पाकिस्तान का लंबा इतिहास जगजाहिर है। दरअसल जरदारी ने कहा था कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया। जिसे रेलवे ने अवैध निर्माण का नोटिस जारी किया है। जरदारी बोले थे- भारत में मुस्लिम धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई से तनाव बढ़ सकता है पाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय ने शनिवार को एक प्रेस नोट जारी किया। जिसमें जरदारी ने कहा कि भारत में कई ऐतिहासिक मुस्लिम धार्मिक स्थल खतरे में हैं। उन्होंने खास तौर पर वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद का जिक्र किया, जिसे उन्होंने करीब 1000 साल पुरानी मस्जिद बताया। जरदारी ने भारत से अपील की कि ऐसे धार्मिक स्थलों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को तुरंत रोका जाए। उनका कहना है कि इससे सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और देश में अस्थिरता पैदा हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत को अल्पसंख्यकों के अधिकारों और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करनी चाहिए। अब जानिए क्या है वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद विवाद… वाराणसी के काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास और मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब परियोजना के तहत रेलवे प्रशासन ने स्टेशन के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को नोटिस जारी कर 20 जून तक परिसर खाली करने को कहा था। रेलवे का कहना है कि मस्जिद रेलवे की जमीन पर बना अवैध ढांचा है और 1991 में दायर एक दीवानी मुकदमे में अगस्त 2024 में आए फैसले के बाद कार्रवाई की जा रही है। रेलवे का कहना है कि 1991 में दायर मुकदमा 28 अगस्त 2024 को खारिज होने के बाद मस्जिद हटाने का रास्ता साफ हो गया। वहीं, मस्जिद प्रबंधन समिति का दावा है कि मामला मस्जिद के अस्तित्व से नहीं, बल्कि उसके पूर्वी हिस्से की जमीन से जुड़ा था और रेलवे अदालत के फैसले की गलत व्याख्या कर रहा है। मस्जिद की 3 तस्वीरें… रेल प्रशासन का क्या कहना है, 4 पॉइंट… मस्जिद कमेटी का पक्ष; बोले- हाईकोर्ट जाएंगे —————————

‘वो हमसे दोस्ती करना चाहती हैं, लेकिन मैं नहीं करूंगा’, ट्रंप ने मेलोनी के बारे में फिर लिखी ऊल-जलूल बातें; कल इटली PM ने दिया था मुंहतोड़ जवाब

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी के बारे में एक बार फिर ऊल-जलूल बातें की हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि इटली में जैसी उनकी लोकप्रियता है, उसके अनुसार वो बहुत घटिया काम कर रही हैं।आपको बता दें कि इससे पहले भी उन्ह

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ट्रम्प ने अपना नया विमान ‘एयरफोर्स-1’ दिखाया:कहा- यह उड़ता हुआ व्हाइट हाउस, ऐसी लग्जरी कहीं नहीं; कतर ने पिछले साल गिफ्ट किया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को नया एयरफोर्स वन विमान दिखाया। यह विमान पहले कतर सरकार के पास था। पिछले साल मई में कतर ने बोइंग 747 का यह आधुनिक मॉडल ट्रम्प को उपहार में दिया था। बाद में इसे अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक विमान के रूप में तैयार किया गया। मैरीलैंड के जॉइंट बेस एंड्रयूज में ट्रम्प ने इस विमान को दुनिया का सबसे शानदार राष्ट्रपति विमान बताया। उन्होंने कहा, “इस विमान को उड़ते हुए व्हाइट हाउस की तरह बनाया गया है। इतनी लग्जरी शायद दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी।” नए एयरफोर्स-1 की 3 फोटोज पुराने एयरफोर्स-1 की पहचान खत्म, ट्रम्प की पसंद के रंगों में तैयार नए विमान का रंग-रूप मौजूदा एयर फोर्स वन से पूरी तरह अलग है। पुराने विमान के हल्के नीले रंग की जगह इसके निचले हिस्से को गहरे नेवी ब्लू रंग से रंगा गया है, जबकि उसके ऊपर लाल पट्टी बनाई गई है। विमान के उस हिस्से पर, जहां से राष्ट्रपति चढ़ते हैं, राष्ट्रपति की आधिकारिक मुहर लगाई गई है। वहीं पिछले हिस्से पर अमेरिकी झंडा बनाया गया है। ट्रम्प ने कहा कि जब यह प्लेन लंदन, जर्मनी या दुनिया के किसी अन्य एयरपोर्ट पर उतरेगा तो कोई भी इसकी बराबरी नहीं कर पाएगा। उन्होंने कहा, “हमारे देश का प्रतिनिधित्व इसी तरह होना चाहिए। रंग और डिजाइन मेरी पसंद के हैं, यह मैं मानता हूं।” उन्होंने यह भी बताया कि नया एयर फोर्स वन अगले महीने 4 जुलाई को अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान फ्लाईपास्ट करेगा। ट्रम्प NATO समिट में हिस्सा लेने नए प्लेन से जाएंगे ट्रम्प ने पुष्टि की कि वह अगले महीने तुर्किए की राजधानी अंकारा में होने वाले NATO समिट में इसी से जाएंगे। इसके बाद वे नवंबर में भी चीन दौरे पर इसका इस्तेमाल करेंगे। ट्रम्प ने कहा कि इस हफ्ते G7 समिट के दौरान फ्रांस दौरे पर उन्होंने आखिरी बार इस प्लेन का इस्तेमाल किया। 2028 तक ही कतर के गिफ्ट प्लेन का इस्तेमाल ट्रम्प सरकार का कहना है कि कतर से मिला यह प्लेन एक ‘ब्रिज एयरक्राफ्ट’ यानी अस्थायी समाधान है। इसका इस्तेमाल तब तक किया जाएगा, जब तक बोइंग नए राष्ट्रपति विमान तैयार नहीं कर देता। बोइंग के नए प्लेन 2024 में मिलने थे, लेकिन प्रोजेक्ट में देरी हो गई। अब उनकी डिलीवरी 2028 तक होने की संभावना है। ट्रम्प ने कहा, हम थोड़ी मुश्किल स्थिति में फंस गए थे क्योंकि नए प्लेन समय पर नहीं मिल रहे थे। इसलिए मैंने कतर के अमीर से पूछा कि क्या उनके किसी प्लेन का इस्तेमाल किया जा सकता है।सामान्य राष्ट्रपति ऐसा नहीं करते। वे इन सबसे दूरी बनाए रखना चाहते हैं। कतर के से मिले गिफ्ट पर उठे थे सवाल नए एयरफोर्स वन की अनुमानित कीमत करीब 40 करोड़ डॉलर (3600 करोड़ रुपए) बताई गई है। हालांकि विदेशी सरकार से इतना महंगा उपहार स्वीकार करने को लेकर अमेरिका में नैतिकता और कानूनी सवाल उठे थे। आलोचकों ने पूछा था कि क्या किसी विदेशी सरकार से इतना महंगा विमान लेना उचित है। ट्रम्प पहले कह चुके हैं कि राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद वह इस विमान का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उन्होंने कहा था कि बाद में इसे किसी राष्ट्रपति पुस्तकालय को दान कर दिया जाएगा। ट्रम्प की पहली पारी से जुड़ा है रंग बदलने का विवाद राष्ट्रपति विमान का रंग बदलने की ट्रम्प की योजना नई नहीं है। अपने पहले कार्यकाल में भी उन्होंने नए एयर फोर्स वन को अपने निजी विमान की तरह लाल, सफेद और नेवी ब्लू रंग देने का फैसला किया था। लेकिन मार्च 2023 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने यह फैसला बदल दिया था। एयर फोर्स की समीक्षा में कहा गया था कि गहरे रंगों के इस्तेमाल से लागत बढ़ सकती है और विमान की डिलीवरी में और देरी हो सकती है। हालांकि सत्ता में लौटने के बाद ट्रम्प ने फिर अपनी पसंद की रंग योजना लागू कर दी। एयर फोर्स ने यह भी बताया कि भविष्य में कैबिनेट मंत्रियों और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सरकारी विमानों पर भी इसी तरह का लाल, सफेद और नेवी ब्लू रंग इस्तेमाल किया जाएगा। पुराने एयरफोर्स वन अभी सर्विस में रहेंगे एयर फोर्स के एक अधिकारी के अनुसार मौजूदा राष्ट्रपति विमान, जिन्हें VC-25A कहा जाता है, अभी रिटायर नहीं होंगे। वे तब तक सेवा में बने रहेंगे जब तक नए VC-25B विमान पूरी तरह तैयार होकर बेड़े में शामिल नहीं हो जाते। इस दौरान कतर से मिला नया विमान और मौजूदा दोनों एयर फोर्स वन राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए उपलब्ध रहेंगे। राष्ट्रपति एयरलिफ्ट ग्रुप हर मिशन की जरूरत के हिसाब से तय करेगा कि किस यात्रा में कौन सा विमान इस्तेमाल किया जाएगा। पुराने एयरफोर्स वन के बारे में जानिए ट्रम्प अब तक बोइंग 747-200B का एयर फोर्स वन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। बोइंग 747-200B अपनी सुरक्षा, संचार, और कमांड क्षमताओं के कारण दुनिया का सबसे सुरक्षित विमान माना जाता है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए एक चलते-फिरते ऑफिस की तरह है। वैसे तो दो बोइंग 747-200B विमान हैं, जिन्हें एक साथ तैयार रखा जाता है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति की सवारी वाला विमान ही एयर फोर्स वन कहलाता है। नए एयरफोर्स वन में हवा में ईंधन भरने वाली खूबियां नहीं एयर फोर्स वन में हवा में ही ईंधन भरने वाली खूबियां हैं जो नए एयर फोर्स वन में नहीं है। पुराना विमान परमाणु युद्ध जैसी स्थिति में करीब 7 दिन तक बिना रुके आसमान में रह सकता था। नया विमान अधिकतम 16 घंटे (14,430 किमी) ही उड़ पाएगा। नए प्लेन को तैयार करने के बजट को कंट्रोल में रखने के लिए व्हाइट हाउस ने इस फीचर को हटाने का फैसला किया था, क्योंकि हवा में ईंधन भरने का सिस्टम लगाने में बहुत ज्यादा खर्च आता है। पिछले 30 साल के इतिहास में किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति के सवार रहते हुए कभी भी हवा में ईंधन नहीं भरा गया है। सुरक्षा कारणों से हमेशा सुरक्षित सैन्य ठिकानों पर ही ईंधन भरना पसंद किया जाता है। नए एयर फोर्स की अपनी बिना ईंधन भरे उड़ान भरने की रेंज पुराने वाले विमान से लगभग 1,100 मील (करीब 1,770 किलोमीटर) अधिक है। यह एक बार में बिना रुके लगभग 8,900 मील (14,300+ किमी) तक उड़ सकता है, जो कि राष्ट्रपति की यात्राओं के लिए काफी मानी गई है। —————————- ट्रम्प से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले-मेलोनी मेरे साथ फोटो खिंचाने के लिए बेताब थीं:इटली PM का जवाब- उनकी कहानी झूठी, विदेश मंत्री ने US दौरा रद्द किया इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान पर नाराजगी जाहिर की है। ट्रम्प ने दावा किया था कि G7 शिखर सम्मेलन के दौरान मेलोनी उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए बेताब थीं। इस पर मेलोनी ने कहा कि ट्रम्प की यह कहानी पूरी तरह झूठी और मनगढ़ंत है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

‘शांति समझौता’ के बहाने अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान की जोरदार किरकिरी, जेडी वेंस ने बताया PAK में क्यों नहीं हुआ MoU साइन

एक पॉडकास्ट में बात करते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उन सवालों का जवाब दिया, जिनमें कहा गया था कि 15 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अंतरिम समझौते की घोषणा के तुरंत बाद वाशिंगटन और तेहरान के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) का टेक्स्ट सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया

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