सोमवार को कनाडा के मॉन्ट्रियल के कोट-डेस-नीजेस इलाके में हुई गोलीबारी में मॉन्ट्रियल पुलिस (SPVM) के एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई। वहीं, एक अन्य अधिकारी घायल हो गया। स्थानीय खबरों के मुताबिक, यह हमला यहूदी कारोबारों को निशाना बनाकर किया गया था।कनाडा के समय के अनुसार सुबह करीब 11
सोमवार को कनाडा के मॉन्ट्रियल के कोट-डेस-नीजेस इलाके में हुई गोलीबारी में मॉन्ट्रियल पुलिस (SPVM) के एक पुलिस अधिकारी की मौत हो गई। वहीं, एक अन्य अधिकारी घायल हो गया। स्थानीय खबरों के मुताबिक, यह हमला यहूदी कारोबारों को निशाना बनाकर किया गया था।कनाडा के समय के अनुसार सुबह करीब 11
कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट रास लाफान के LNG कॉम्प्लेक्स में रविवार शाम विस्फोट हुआ। इसमें 13 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 66 लोग घायल हुए हैं। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। मरने वालों में भारत और पाकिस्तान के नागरिक शामिल हैं। भारतीय नागरिकों की सही संख्या अभी सामने नहीं आई है। अल-काबी ने बताया, विस्फोट रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी स्थित बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुआ। हादसे में घायल हुए लोगों में भारत, कतर, तंजानिया, पाकिस्तान, गिनी, नेपाल, बांग्लादेश, केन्या और नाइजीरिया के नागरिक शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह एक हादसा था। इसमें किसी साजिश या जानबूझकर की गई हरकत के संकेत नहीं मिले हैं। उनके मुताबिक, जरूरी मरम्मत के कारण दिसंबर 2025 से प्लांट का उत्पादन पूरी तरह बंद था और इसे सिर्फ दो दिन पहले ही दोबारा शुरू किया गया था। हादसे के कारणों की शुरू कर दी गई है। हादसे से जुड़ी दो तस्वीरें… राजधानी दोहा तक धमाके की आवाज सुनाई दी ऊर्जा मंत्री के मुताबिक, रविवार शाम ऑपरेशन शुरू करने की प्रक्रिया के दौरान बरजान लोकल गैस सप्लाई फैसिलिटी में विस्फोट और आग लगी थी। आपातकालीन टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और अब आग पर काबू पा लिया गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, धमाका इतना तेज था कि इसकी आवाज राजधानी दोहा तक सुनाई दी। 70 किलोमीटर दूर रहने वाले लोग भी घबरा गए। हालांकि, ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने कहा कि हादसे से पर्यावरण को कोई खतरा नहीं है और कतर से गैस की सप्लाई भी जारी रहेगी। जहां हादसा हुआ, वह बरजान गैस प्लांट कतर के सबसे बड़े गैस हब रास लाफान का हिस्सा है। इसी इलाके से दुनिया के कई देशों को गैस भेजी जाती है। यहां से घरेलू बिजली संयंत्रों और उद्योगों को भी गैस सप्लाई होती है। भारतीय दूतावस बोला- कतर के अधिकारियों से संपर्क में दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह कतर के अधिकारियों के लगातार संपर्क में है और मृतकों तथा घायलों के परिवारों को हरसंभव मदद दी जाएगी। दूतावास ने +974-55647502 और +975-55384683 हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। इसके अलावा cons.doha@mea.gov.in ईमेल के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। इससे पहले दूतावास ने कहा था कि कई लोग घायल हुए हैं और कुछ लोग लापता हैं। ईरान जंग में रास लाफान की 2 यूनिट को नुकसान पहुंचा रॉयटर्स के मुताबिक, मार्च में ईरान के मिसाइल हमले में रास लाफान की दो गैस यूनिट क्षतिग्रस्त हो गई थीं। इससे कतर की गैस निर्यात क्षमता का करीब 17% हिस्सा प्रभावित हुआ था। कतरएनर्जी के CEO के मुताबिक, इन यूनिटों की पूरी मरम्मत में तीन से पांच साल लग सकते हैं। ईरान युद्ध के दौरान कंपनी को करीब 10 हजार कर्मचारियों को गैस संयंत्रों से हटाना पड़ा था। हालांकि मार्च में हुए मिसाइल हमले में किसी के घायल होने की सूचना नहीं मिली थी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, LNG प्लांट को दोबारा शुरू करना बेहद जटिल प्रक्रिया होती है और इसे चरणबद्ध तरीके से किया जाता है, ताकि तापमान में अचानक बदलाव से उपकरणों को नुकसान न पहुंचे। ———————– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने ईरान के तेल बेचने पर प्रतिबंध हटाया:अगले 60 दिन भारत भी खरीद सकता है, ईरान में फिर तैनात होंगे UN के न्यूक्लियर इंस्पेक्टर अमेरिका ने ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगी पाबंदियों में 60 दिन की ढील दे दी है। यह फैसला स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बर्नहैम ने पीएम पद के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है। बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी। इस स्टोरी में जानिए पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले बर्नहैम कैसे इंग्लैंड के ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ बने… टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे। एंडी बर्नहैम का राजनीति में आने का फैसला किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक टीवी ड्रामा देखकर हुआ था। उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था। आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं। कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे। पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी। एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं। बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है। 31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने। इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया। गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी 2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई। पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा। आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं। सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की। कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया। अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं। हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि यह फैसला प्रधानमंत्री और लेबर नेता कीर स्टार्मर की सहमति से लिया गया था। पार्टी की हार से स्टार्मर पर सवाल उठे मई 2026 में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के चुनावों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से खराब रहा। वहीं नाइजल फराज की रिफॉर्म UK तेजी से मजबूत हुई। उसने उन इलाकों में भी बढ़त बनाई, जिन्हें एंडी बर्नहैम का गढ़ माना जाता था। खराब नतीजों के बाद कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। कुछ सांसदों ने नेतृत्व बदलने की मांग की, जबकि सरकार और पार्टी में इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया। इसी बीच लेबर सांसद जोश साइमंस ने मेकरफील्ड सीट छोड़ने का ऐलान किया, ताकि बर्नहैम संसद में वापसी कर सकें। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और अगले महीने हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर वेस्टमिंस्टर में वापसी कर ली। इस जीत को सिर्फ उनकी संसदीय वापसी नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अगले नेता की दौड़ में उनकी एंट्री के तौर पर देखा गया। दरअसल, पार्टी का नेता बनने के लिए सांसद होना जरूरी है और बर्नहैम ने यह शर्त पूरी कर ली थी। आम लोगों की भाषा बोलना बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर रॉबर्ट फोर्ड के मुताबिक, एंडी बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मुश्किल और तकनीकी मुद्दों को भी आम लोगों की भाषा में समझा देते हैं। फोर्ड का कहना है कि बर्नहैम सिर्फ अच्छे वक्ता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन कहानीकार भी हैं। वह लोगों को आसानी से समझा देते हैं कि वह किसके लिए राजनीति कर रहे हैं और क्या हासिल करना चाहते हैं। प्रोफेसर के मुताबिक, यही बात उन्हें कई दूसरे लेबर नेताओं और मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से अलग बनाती है। जहां स्टार्मर की राजनीति को अक्सर तकनीकी और प्रशासनिक माना जाता है, वहीं बर्नहैम आम मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में ज्यादा सफल दिखते हैं। इसी वजह से लेबर पार्टी के भीतर कई लोग उन्हें ऐसा नेता मानते हैं, जो पार्टी की घटती लोकप्रियता को रोककर समर्थकों में नया उत्साह पैदा कर सकता है। —————————– ये खबर भी पढ़ें ब्रिटिश PM स्टार्मर का इस्तीफा:100 से ज्यादा सांसद विरोध में थे; 10 साल में ब्रिटेन के पांचवें प्रधानमंत्री ने पद छोड़ा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। पूरी खबर पढ़ें
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष बढ़ रहा था। हाल के महीनों में कई सांसदों और मंत्रियों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। स्थानीय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और गिरती लोकप्रियता ने भी उनके ऊपर दबाव बढ़ा दिया था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एंडी बर्नहैम उनके उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। बर्नहैम ने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव जीतकर संसद में वापसी की है और उन्हें लेबर सांसदों के बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा। स्टार्मर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद बर्नहैम ने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। बर्नहैम के सहयोगी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने 19 जून को साफ कहा था कि मैं अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करूंगा। साथ ही लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी। ब्रिटेन को 7 साल में छठा प्रधानमंत्री मिलेगा स्टार्मर पिछले 10 साल में कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ने वाले छठे ब्रिटिश प्रधानमंत्री होंगे। इससे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे। 2016 में ब्रेक्जिट जनमत संग्रह में हार के बाद डेविड कैमरन ने इस्तीफा दिया था। उनके बाद प्रधानमंत्री बनीं थेरेसा मे संसद से ब्रेक्जिट समझौता पारित नहीं करा सकीं और 2019 में पद छोड़ना पड़ा। इसके बाद बोरिस जॉनसन ने कोविड लॉकडाउन के दौरान सरकारी आवास पर हुई पार्टियों और कई राजनीतिक विवादों के बीच 2022 में इस्तीफा दिया। जॉनसन के बाद लिज ट्रस प्रधानमंत्री बनीं, लेकिन उनकी आर्थिक नीतियों से बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई। वह सिर्फ 49 दिन ही पद पर रह सकीं और अक्टूबर 2022 में इस्तीफा देना पड़ा। उनके बाद ऋषि सुनक प्रधानमंत्री बने, लेकिन बढ़ती महंगाई, आर्थिक चुनौतियों और आम चुनाव में कंजर्वेटिव पार्टी की हार के बाद जुलाई 2024 में उन्होंने भी पद छोड़ दिया। अब कीर स्टार्मर के इस्तीफे के साथ ब्रिटेन को सात साल में छठा और 10 साल में सातवां प्रधानमंत्री मिलने जा रहा है ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हों। अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है। ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है, जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।
फिलीपींस के एक हाई स्कूल में सोमवार को हुई गोलीबारी में तीन छात्रों की मौत हो गई, जबकि पांच घायल हो गए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, दो लोगों ने टैकलोबान सिटी के सैन जोस नेशनल हाई स्कूल में गोलीबारी की। पुलिस ने दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक इसी स्कूल का छात्र है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गोलीबारी की वजह क्या थी और हमलावरों ने इस घटना को क्यों अंजाम दिया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। स्कूल और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और शुरुआती पूछताछ के आधार पर घटना के पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… जर्मनी में रिटायरमेंट की उम्र 70 साल करने की तैयारी
जर्मन सरकार पेंशन सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। प्रस्ताव के तहत रिटायरमेंट की उम्र 67 से बढ़ाकर 70 साल की जा सकती है। साथ ही 45 साल तक पेंशन फंड में योगदान देने वाले कर्मचारियों को मिलने वाली अर्ली रिटायरमेंट सुविधा भी समाप्त की जा सकती है। जर्मन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और श्रम मंत्री बार्बेल बास द्वारा गठित आयोग मंगलवार को अपनी सिफारिशें पेश करेगा। आयोग ने सुझाव दिया है कि रिटायरमेंट की उम्र को जीवन प्रत्याशा से जोड़ा जाए और इसे चरणबद्ध तरीके से 70 साल तक बढ़ाया जाए। आयोग ने ‘पेंशन एट 63’ नाम से लोकप्रिय उस योजना को खत्म करने की भी सिफारिश की है, जिसके तहत 45 साल तक योगदान देने वाले कर्मचारी बिना कटौती के जल्दी रिटायर हो सकते हैं। प्रस्ताव में कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं से अतिरिक्त 2% योगदान लेने की भी बात कही गई है। यह राशि एक नए सरकारी निवेश फंड में जमा होगी। फिलहाल जर्मनी में पेंशन के लिए 18.6% योगदान लिया जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार सरकार संसद के जुलाई अवकाश से पहले इस सुधार पैकेज को मंजूरी दिलाने की कोशिश में है। जर्मनी में तेजी से बढ़ती उम्रदराज आबादी और बड़ी संख्या में लोगों के रिटायर होने से पेंशन व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। यूरोप में हीटवेव: तापमान 40°C के करीब, फ्रांस में ट्रेनें रद्द; इटली-स्पेन में रेड अलर्ट
यूरोप के कई देश भीषण हीटवेव की चपेट में हैं। इटली, स्पेन, फ्रांस और जर्मनी में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया है। हालात को देखते हुए कई शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। गर्मी का असर परिवहन, पर्यटन और वन्यजीवों पर भी दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सहारा रेगिस्तान से उत्तर की ओर बढ़ रही गर्म हवा और “अफ्रीकन एंटीसाइक्लोन” नामक उच्च दबाव प्रणाली के कारण पश्चिमी और मध्य यूरोप के ऊपर “हीट डोम” बन गया है। इससे गर्म हवा फंस गई है और तापमान लगातार बढ़ रहा है। इटली में कई दिनों से तापमान 35°C से ऊपर बना हुआ है। इसके चलते बोलोन्या, फ्लोरेंस, मिलान और ट्यूरिन समेत 8 शहरों में रेड अलर्ट जारी किया गया है। स्पेन की मौसम एजेंसी AEMET ने देश के कई हिस्सों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। फ्रांस में भीषण गर्मी का असर रेल नेटवर्क पर पड़ रहा है। राष्ट्रीय रेल ऑपरेटर SNCF के अनुसार अधिक तापमान के कारण बिजली की ओवरहेड लाइनों और रेल पटरियों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। एहतियात के तौर पर प्रमुख मार्गों पर सोमवार तक 71 इंटरसिटी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। जर्मनी में तापमान 38°C तक पहुंच चुका है। मौसम विभाग DWD ने बर्लिन समेत पूर्वी क्षेत्रों में तेज आंधी और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों के बीच रविवार को स्विट्जरलैंड में करीब 80 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों देश 60 दिन के युद्धविराम को स्थायी शांति समझौते में बदलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पहली ही बैठक में दोनों पक्षों के बीच बड़े मतभेद सामने आ गए। ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, ईरान ने कहा कि आगे की बातचीत तभी संभव है जब इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहा संघर्ष पूरी तरह खत्म हो। फिलहाल यह साफ नहीं है कि दोनों पक्षों की अगली बैठक कब होगी। बातचीत में पाकिस्तान और कतर के अधिकारियों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। बीबीसी ने अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि, बातचीत में 3 अहम मुद्दों पर पेंच फंसा रहा। इनमें होर्मुज को फिर से पूरी तरह खोलने को लेकर ईरान के अलग-अलग बयानों को स्पष्ट करना, दक्षिणी लेबनान में सीजफायर लागू कराना और परमाणु समझौते से जुड़ी बातें शामिल थीं। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर उसने लेबनान में हिजबुल्लाह को नहीं रोका तो अमेरिका फिर से उस पर हमला कर सकता है। ईरान ने इस चेतावनी को खारिज करते हुए कहा कि वह किसी भी संघर्ष के लिए तैयार है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ट्रम्प बोले हिजबुल्लाह को रोको, वरना फिर हमला करेंगे: ट्रम्प ने कहा कि ईरान लेबनान में अपने समर्थक हिजबुल्लाह को तुरंत रोके। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर अमेरिका पिछले हफ्ते से भी ज्यादा सख्त कार्रवाई करेगा। 2. वेंस बोले- अमेरिका और ईरान मिलकर शांति के लिए काम करेंगे: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। उनके मुताबिक, दोनों देश मिलकर शांति और समृद्धि को बढ़ावा दे सकते हैं और ट्रम्प अगले 10 साल में पश्चिम एशिया की तस्वीर बदलना चाहते हैं। 3. होर्मुज स्ट्रेट पर सस्पेंस के बीच अमेरिका बोला- 24 घंटे में 67 जहाज गुजरे: ईरान के होर्मुज स्ट्रेट बंद करने के दावे के बावजूद अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि समुद्री यातायात जारी है। अमेरिका ने वैकल्पिक मार्ग भी खोला है और जहाजों को सुरक्षा मुहैया कराई जा रही है। 4. लेबनान में मौतों का आंकड़ा 4,100 के पार: लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, 2 मार्च से अब तक 4,106 लोगों की मौत और 12,153 लोग घायल हुए हैं। वहीं, इजराइली सेना प्रमुख इयाल जमीर ने कहा कि हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई दोबारा शुरू हो सकती है। 5. ईरान का दावा- कतर में फंसे 6 अरब डॉलर मिलेंगे: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए शुरुआती समझौते के तहत कतर में जमा ईरान के 6 अरब डॉलर वापस मिलेंगे। उन्होंने दावा किया कि समझौते की शर्तें तेहरान के पक्ष में हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सिंधु जल संधि स्थगित रहने को लेकर भारत को धमकी दी है। पाकिस्तानी चैनल एआरवाई न्यूज से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा, अगर हमें लगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है और पानी भी हमारी सुरक्षा का हिस्सा है तो हम निश्चित रूप से भारत के खिलाफ युद्ध करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर भारत तेजी से पाकिस्तान के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित करने की कोशिश करता दिखा तो सैन्य कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि बहाल नहीं की जाएगी। भारत-पाकिस्तान के बीच का सिंधु जल समझौता क्या है? सिंधु नदी प्रणाली में कुल 6 नदियां हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इनके किनारे का इलाका करीब 11.2 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसमें 47% जमीन पाकिस्तान, 39% जमीन भारत, 8% जमीन चीन और 6% जमीन अफगानिस्तान में है। इन सभी देशों के करीब 30 करोड़ लोग इन इलाकों में रहते हैं। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के पहले से ही भारत के पंजाब और पाकिस्तान के सिंध प्रांत के बीच नदियों के पानी के बंटवारे का झगड़ा शुरू हो गया था। 1947 में भारत और पाक के इंजीनियरों के बीच ‘स्टैंडस्टिल समझौता’ हुआ। इसके तहत दो मुख्य नहरों से पाकिस्तान को पानी मिलता रहा। ये समझौता 31 मार्च 1948 तक चला। 1 अप्रैल 1948 को जब समझौता लागू नहीं रहा तो भारत ने दोनों नहरों का पानी रोक दिया। इससे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की 17 लाख एकड़ जमीन पर खेती बर्बाद हो गई। दोबारा हुए समझौते में भारत पानी देने को राजी हो गया। इसके बाद 1951 से लेकर 1960 तक वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में भारत पाकिस्तान में पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चली और आखिरकार 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के PM नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच दस्तखत हुए। इसे इंडस वाटर ट्रीटी या सिंधु जल संधि कहा जाता है। सिंधु जल समझौता स्थगित करने का पाकिस्तान पर असर पाकिस्तान में खेती की 90% जमीन यानी 4.7 करोड़ एकड़ एरिया में सिंचाई के लिए पानी सिंधु नदी प्रणाली से मिलता है। पाकिस्तान की नेशनल इनकम में एग्रीकल्चर सेक्टर की हिस्सेदारी 23% है और इससे 68% ग्रामीण पाकिस्तानियों की जीविका चलती है। ऐसे में पाकिस्तान में आम लोगों के साथ-साथ वहां की बेहाल अर्थव्यवस्था और बदतर होने लगी है। पाकिस्तान के मंगल और तारबेला हाइड्रोपावर डैम को पानी नहीं मिल पा रहा है। इससे पाकिस्तान के बिजली उत्पादन में 30% से 50% तक की कमी आ सकती है। साथ ही औद्योगिक उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ेगा। ———————————– ये खबर भी पढ़ें… भारत बोला- PAK राष्ट्रपति का बयान नफरत फैलाने वाला: हमारे मामलों में दखल न दें पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के भारत की मस्जिद को लेकर दिए भड़काऊ बयान पर भारत ने रिएक्शन दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है। पूरी खबर पढ़ें…
रविवार को स्विट्जरलैंड में अहम कूटनीतिक बैठकों के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने माहौल को हल्का-फुल्का बनाते हुए अपनी जिंदगी के दो सबसे अहम लोगों का जिक्र किया – एक भारतीय और एक पाकिस्तानी।वेंस ने कहा, “मैंने मजाक में कहा था कि मेरी जिंदगी में दो बहुत-बहुत अहम लोग हैं: ए
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को साफ चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर ईरान अपने प्रॉक्सी संगठन हिजबुल्लाह को लेबनान में परेशानी पैदा करने से नहीं रोकता, तो अमेरिका ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगा।ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ईरान को तुरंत अपने महंगे प्रॉक्सी को ले

