बुधवार सुबह उत्तरी कैलिफ़ोर्निया के एक दूर-दराज इलाके में 5.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि, इलाके में किसी बड़े नुकसान या चोट की कोई तुरंत खबर नहीं मिली है। US जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) ने बताया कि भूकंप की शुरुआती तीव्रता 5.6 मापी गई और यह स्थानीय स
इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।
इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने स्विट्जरलैंड में ईरान शांति वार्ता के दौरान पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर और उनके डेलिगेशन की हत्या की साजिश रची थी। यह दावा ब्राजील के पत्रकार पेपे एस्कोबार ने एक पॉडकास्ट में किया है। पत्रकार के दावे के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों को जब ये बात पता चली तो उन्होंने धमकी दी जिसके बाद इजराइल को अपना प्लान बदलना पड़ा। यह दावा उस समय से जुड़ा है जब पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में मौजूद थे। वहीं ईरान और अमेरिका के बीच पश्चिम एशिया के संघर्ष को खत्म करने के लिए बातचीत का पहला दौर पूरा हुआ था। दावा- पाकिस्तान ने इजराइल को धमकी भरा मैसेज भेजा पॉडकास्ट के दौरान पॉलिटिकल कमेंटेटर मारियो नॉफल के पॉडकास्ट में एस्कोबार ने कहा कि पाकिस्तानी सेना को बेहद विश्वसनीय जानकारी मिली थी कि इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के आदेश पर मोसाद हमला करने की तैयारी कर रहा है। एस्कोबार ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में इजराइल को जगह नहीं मिली, इसलिए वह इस प्रक्रिया से खुश नहीं था। उनका यह भी कहना है कि लेबनान में इजराइल के सैन्य अभियान ने शांति समझौते की राह और मुश्किल बना दी। एस्कोबार ने आगे कहा इस साजिश की जानकारी मिलने के बाद पाकिस्तान ने इजराइल को चेतावनी भी भेजी थी। उनके मुताबिक यह मैसेज शायद ओमान के जरिए पहुंचाया गया था। इसमें पाकिस्तान की ओर से कहा गया कि अगर पाकिस्तानी डेलिगेशन को कुछ हुआ तो इजराइल को नक्शे से मिटा दिया जाएगा। हालांकि यह दावा सामने आते ही पाकिस्तान की ओर से इसे खारिज कर दिया गया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने साजिश से इनकार किया एआरवाई न्यूज के चेयरमैन कमरान खान ने एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सुरक्षा अधिकारी के हवाले से कहा कि यह आरोप पूरी तरह बकवास और निरर्थक है। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असिम मुनीर का पूरा स्विट्जरलैंड दौरा तय कार्यक्रम के अनुसार और बिना किसी परेशानी के पूरा हुआ। अधिकारी के मुताबिक दौरे के दौरान किसी भी समय कोई सुरक्षा अलर्ट जारी नहीं किया गया था। न स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों ने और न ही अमेरिकी सुरक्षा टीमों ने किसी संभावित खतरे को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने यह भी कहा कि लूसर्न में प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की सुरक्षा व्यवस्था पूरे समय सामान्य और पूरी तरह सक्रिय रही। किसी तरह की हत्या की साजिश या सुरक्षा खतरे की कोई जानकारी नहीं मिली थी। उन्होंने इसे काल्पनिक कहानी बताया। पाकिस्तान आज भी इजराइल को देश नहीं मानता इजराइल और पाकिस्तान लंबे समय से एक-दूसरे को विरोधी मानते रहे हैं। दोनों देशों के बीच कोई रणनीतिक साझेदारी नहीं है। पाकिस्तान आज भी इजराइल को एक देश के रूप में मान्यता नहीं देता। इससे पहले पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय युद्धविराम प्रयासों पर चर्चा के दौरान इजराइल की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने इजराइल को बुराई और मानवता के लिए अभिशाप बताया था। साथ ही उस पर लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया था। पाकिस्तान दुनिया का एकमात्र परमाणु हथियार संपन्न इस्लामी देश है। वहीं, इजराइल को भी परमाणु शक्ति माना जाता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के इन बयानों पर इजराइली अधिकारियों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने आरोपों को खारिज करते हुए सवाल उठाया था कि जब पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ मंत्री इस तरह के बयान दे रहे हैं, तो क्या इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। पाकिस्तान के डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म डी करंट के अनुसार, कई पत्रकारों ने इस कहानी को निराधार और तथ्यों से रहित बताया।
US सेंट्रल कमांड सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जानकारी दी है कि US सेना ने पिछले हफ्ते उत्तर-पश्चिमी सीरिया में एक हवाई हमला किया, जिसमें इस्लामिक स्टेट का एक सीनियर लीडर मारा गया।X पर जारी एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को किया गया यह हमला “विदेशों में या US की जमीन पर अमेरिकि
US सेंट्रल कमांड सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में जानकारी दी है कि US सेना ने पिछले हफ्ते उत्तर-पश्चिमी सीरिया में एक हवाई हमला किया, जिसमें इस्लामिक स्टेट का एक सीनियर लीडर मारा गया।X पर जारी एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को किया गया यह हमला “विदेशों में या US की जमीन पर अमेरिकि
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता भेजा है। अयातुल्ला खामेनेई की 28 फरवरी को इजराइल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद 4 मार्च को उनका अंतिम संस्कार होना था लेकिन जंग की वजह से इसे टाल दिया गया था। अब इसकी शुरुआत 4 जुलाई से होगी। उनके शव को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफन किया जाएगा। अधिकारियों को उम्मीद है कि तेहरान, कुम और मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं। मोदी का ईरान जाने पर सस्पेंस ईरान ने अंतिम संस्कार समारोह के लिए दुनिया के कई देशों को निमंत्रण भेजा है। खास तौर पर पड़ोसी और मित्र देशों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं। भारत सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में भारत की ओर से कौन इस समारोह में शामिल होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की मई 2024 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद भी भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था। उस समय भारत सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए तेहरान पहुंचे थे और अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुए थे। खामेनेई मशहद में क्यों दफनाए जाएंगे खामेनेई का मुख्य अंतिम संस्कार समारोह तेहरान में होगा, जो कम से कम 24 घंटे तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां इमाम रजा के दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा। मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है और शिया मुसलमानों का सबसे प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। शहर की सबसे बड़ी पहचान इमाम रजा की दरगाह है। इमाम रजा शिया मुस्लिम परंपरा के आठवें इमाम थे। उनका दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। खामेनेई को मशहद में दफनाने से उनका नाम शिया इस्लाम के सबसे सम्मानित धार्मिक नेताओं की श्रेणी में और मजबूती से जुड़ जाएगा। IRGC के पास खामेनेई के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम संस्कार में हुई देरी इस्लामी परंपरा के लिहाज से असामान्य मानी जा रही है। आमतौर पर इस्लाम में किसी व्यक्ति को मौत के एक-दो दिन के भीतर दफना दिया जाता है। हालांकि ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, भारी भीड़ की उम्मीद और युद्ध के हालात के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई। तेहरान नगर निगम में सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों के उपप्रमुख मोहम्मद अली तवक्कोलीजादेह ने अंतिम संस्कार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने सरकारी टेलीविजन से कहा कि खामेनेई के लिए तीन दिन का सार्वजनिक जनाजा आयोजित किया जाएगा। अधिकारी ने यह नहीं बताया कि जनाजा कब होगा, लेकिन कहा कि यह इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत में हो सकता है, जो 21 जून के आसपास में पड़ता है। पूरे कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी IRGC के पास है। खोमैनी के जनाजे में 1 करोड़ लोग जुटे थे ईरान में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के 1989 के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। यह उस समय ईरान की कुल आबादी का लगभग छठा हिस्सा था। इस कार्यक्रम को आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है। इतनी भारी भीड़ उमड़ी थी कि भगदड़ मच गई थी। इसमें कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे। इस बार अधिकारी इससे भी बड़ी भीड़ को संभालने और किसी हादसे से बचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन युद्ध के प्रभाव से उबर रहे देश में इतना बड़ा आयोजन कराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है। अमेरिका-इजराइल हमलों में खामेनेई की मौत हुई थी अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया था। इस दौरान तेहरान समेत कई रणनीतिक ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गईं। हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर और उनके कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था। खामेनेई बंकर में मौजूद थे, लेकिन लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में ईरानी सुरक्षा सूत्रों ने उनकी मौत की पुष्टि की। हमलों में खामेनेई के साथ ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी भी मारे गए थे। ———————–
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत और चीन पर लगने वाले टैरिफ को लेकर एक मीटिंग में अपने ही अधिकारियों पर भड़क गए थे। एक नई किताब के मुताबिक, ट्रम्प को लगता था कि भारत अमेरिकी सामानों पर सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा टैक्स (टैरिफ) लगाता है। न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की किताब ‘रिजीम चेंज: इनसाइड द इम्पीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रम्प’ में दावा किया गया है कि ट्रम्प ने वाणिज्य मंत्री हावर्ड लुटनिक से कहा था कि उन्हें भारत और चीन के टैरिफ को लेकर सही जानकारी नहीं दी जा रही। किताब के अनुसार, जब लुटनिक ने आधिकारिक आंकड़े दिखाए, तो ट्रम्प ने उन्हें भी खारिज कर दिया। उनका कहना था कि यह आंकड़े बकवास हैं। भारत अमेरिकी सामानों पर कम से कम 175% टैरिफ लगाता है। भारत का औसत टैरिफ 16% विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में भारत का औसत ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ टैरिफ 15.8% था। यानी कि अगर भारत 100 तरह के सामान आयात करता है, तो उन सभी पर लगने वाले टैरिफ का औसत लगभग 16% बैठता है। वहीं 2023 में व्यापार-भारित औसत टैरिफ करीब 12% रहा। इसमें उन सामानों को ज्यादा महत्व दिया जाता है जिनका व्यापार अधिक होता है। यानी वास्तविक व्यापार में भारत पर आने वाला औसत टैरिफ लगभग 12% के आसपास पड़ता है। यही वजह है कि WTO और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की रिपोर्टों में भारत को उच्च टैरिफ वाला देश तो कहा जाता है, लेकिन कभी पूरे भारतीय टैरिफ इन्फ्रा के लिए 175% का आंकड़ा नहीं दिया गया है। हावर्ड लुटनिक, जो ट्रम्प की टैरिफ नीति के प्रमुख समर्थकों में रहे हैं, उन्होंने जनवरी 2025 में सीनेट में अपनी पुष्टि सुनवाई के दौरान भी भारत और चीन का उदाहरण दिया था। उनका तर्क था कि ऊंचे टैरिफ का मतलब हमेशा महंगाई नहीं होता, क्योंकि भारत और चीन में टैरिफ ज्यादा होने के बावजूद महंगाई नियंत्रित रही है। किताब के मुताबिक, बाद में लुटनिक ऐसी स्थिति में फंस गए जहां एक तरफ ट्रम्प राजनीतिक रूप से टैरिफ के बड़े दावे कर रहे थे और दूसरी तरफ सरकारी आंकड़े उन दावों से मेल नहीं खा रहे थे। ट्रम्प ने यूक्रेन जंग को लेकर कहा था- भारत नहीं मानेगा किताब में भारत का जिक्र केवल व्यापार विवाद तक सीमित नहीं है। इसमें एक और दिलचस्प दावा किया गया है कि ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत के कुछ दिनों बाद यूक्रेन युद्ध को लेकर हुई एक बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भारत का नाम संभावित शांति सेना भेजने वाले देशों में शामिल किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जनवरी 2025 को ओवल ऑफिस में हुई बैठक में ट्रम्प के रूस-यूक्रेन दूत कीथ केलॉग ने यूक्रेन युद्ध खत्म करने का एक प्रस्ताव पेश किया था। इस दौरान अमेरिका में यूक्रेन में शांति सैनिक भेजने को लेकर एक बैठक चल रही थी। बैठक में जब फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड जैसे नाटो (NATO) देशों के सैनिक भेजने का प्रस्ताव आया, तो जेडी वेंस ने इस पर चिंता जताई। वेंस का मानना था कि नाटो सैनिकों को यूक्रेन भेजने से रूस नाराज हो सकता है और अमेरिका भी सीधे युद्ध में फंस सकता है। इसके बाद जेडी वेंस ने सुझाव दिया कि क्यों न गैर-यूरोपीय देशों से मदद ली जाए। वेंस ने इस काम के लिए सऊदी अरब और भारत का नाम आगे बढ़ाया। किताब में दावा किया गया है कि वेंस का सुझाव सुनते ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हंस पड़े थे। उन्होंने कहा, ‘भारतीय ऐसा कभी नहीं करेंगे। वो इस तरह की किसी चीज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करेंगे।’ ट्रम्प ने कहा था- मोदी मुझे बहुत पसंद करते हैं किताब में यह भी दावा किया गया कि ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहा था कि वे उन्हें बहुत पसंद करते हैं। और उनसे मिलने अमेरिका आना चाहते हैं। ट्रम्प ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की पर भी निशाना साधा। उन्होंने जेलेंस्की को एक ‘खराब वार्ताकार’ बताया। उन्होंने कहा कि जेलेंस्की ने सही ढंग से बातचीत न करके अपने पूरे देश को बर्बाद कर दिया, लेकिन वो बाइडन सरकार से चीजें हासिल करने में बहुत अच्छे थे।
संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग ने इजराइल पर गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अब तक 20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। 44 हजार से अधिक घायल हुए हैं। इस दौरान कुल मौतों में लगभग 30% बच्चे शामिल रहे। आयोग के अध्यक्ष और भारत के पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि जांच में बच्चों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के पुख्ता सबूत मिले हैं। इजराइली सेना मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की मौतें हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और स्नाइपर फायरिंग में हुईं। कई मामलों में उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाया गया। आयोग के अध्यक्ष एस. मुरलीधर का पूरा बयान यहां सुनिए… सीजफायर के बाद भी बच्चों की मौत जारी रही अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच सीजफायर लागू होने के बाद भी फिलिस्तीनी बच्चों की मौत और घायल होने की घटनाएं जारी रहीं। हालांकि आयोग ने यह नहीं बताया कि युद्धविराम के बाद कितने बच्चे मारे गए। UNICEF ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि सीजफायर लागू होने के बाद भी औसतन हर दिन एक फिलिस्तीनी बच्चे की जान गई। UNICEF के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के मुताबिक बच्चे अपने घरों, स्कूलों, खेल के मैदानों और यहां तक कि समुद्र किनारे भी मारे गए। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 18 साल से कम उम्र के सभी लोगों को बच्चा माना है। रिपोर्ट के मुताबिक इन बच्चों को ‘आतंकवादी या भविष्य का आतंकवादी’ मानकर निशाना बनाया गया। आयोग के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच करीब 58 हजार बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुपोषण के कारण 151 बच्चों की मौत हुई और एक हजार से ज्यादा बच्चों के अंग काटने पड़े। इजराइल ने रिपोर्ट को खारिज किया रिपोर्ट सामने आने के बाद इजराइल ने उसे पूरी तरह खारिज कर दिया। जिनेवा में इजराइल के UN मिशन ने रिपोर्ट को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए कहा कि जांच आयोग शुरू से ही इजराइल के खिलाफ पक्षपाती रहा है। मिशन का कहना है कि आयोग का मकसद तथ्यों की जांच नहीं, बल्कि हर हाल में इजराइल को कटघरे में खड़ा करना है। इजराइली विदेश मंत्रालय ने भी रिपोर्ट पर सवाल उठाए। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट में हमास के हमलों में मारे गए और अगवा किए गए इजराइली बच्चों का जिक्र नहीं किया गया। इजराइल का आरोप है कि हमास ने युद्ध के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन UN रिपोर्ट ने इस मुद्दे को भी नजरअंदाज कर दिया। पांच साल से कम उम्र के 5 हजार बच्चों की मौत गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक युद्ध में 21 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी बच्चों की जान गई। इनमें 5,031 बच्चे ऐसे थे, जिनकी उम्र 5 साल से भी कम थी। मरने वालों में 1,029 बच्चे एक साल से कम उम्र के थे, जबकि करीब 420 नवजात ऐसे थे, जिन्होंने दुनिया में आने के कुछ ही समय बाद जान गंवा दी। आयोग ने बताया कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों, पत्रकारों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान आयोग ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद इजराइल को 13 बार सवाल और जानकारी के अनुरोध भेजे, लेकिन किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिला। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… संयुक्त राष्ट्र में इजराइली राजदूत ने UN अफसर को फटकारा:यौन हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट में इजराइल का नाम आने से नाराज थे संयुक्त राष्ट्र (UN) में 19 जून को एक बैठक के दौरान इजराइल के राजदूत डैनी डैनन और UN महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बैठक जंग के दौरान होने वाली यौन हिंसा को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर न्यूयॉर्क में आयोजित की गई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
दक्षिण कोरिया में कॉर्पोरेट कंपनियों को अपने कर्मचारियों को देश की संस्कृति और इतिहास की समझ सिखाना पड़ रहा है। कारण- अपनी संस्कृति और इतिहास को लेकर लोगों की जागरूकता।
कॉफी आउटलेट चेन स्टारबक्स को पिछले महीने मार्केटिंग अभियान में ‘टैंक डे’ शब्द का इस्तेमाल करना भारी पड़ गया। लोगों के विरोध की वजह से कंपनी को द. कोरिया में अपने 2,000 स्टोर्स को सोमवार को दोपहर बाद बंद कर 24 हजार शेफ समेत अन्य कर्मचारियों को संस्कृति, इतिहास की क्लास कराना पड़ी। द. कोरिया में स्टारबक्स के सभी स्टोर्स एक साथ बंद होने का यह पहला मामला भी है। क्या है ‘टैंक डे’ विवाद पिछले महीने स्टारबक्स कोरिया ने टंबलर (कॉफी मग का खास प्रकार) की नई सीरीज लॉन्च की। उसका नाम रखा- ‘टैंक डे’। इसकी शुरुआत पिछले महीने हुई, जो 1980 में 18 मई को द. कोरिया के ग्वांगजू में सैन्य तानाशाही के खिलाफ लोकतंत्र समर्थकों के प्रदर्शन हो रहे थे। तब क्रूर सैन्य शासन ने प्रदर्शनकारियों को कुचलने के लिए सड़कों पर ‘टैंक’ उतार दिए थे। इस नरसंहार में सैकड़ों लोग मारे गए थे। तब से कोरियाई लोगों के लिए ‘टैंक’ शब्द सामूहिक हत्या की स्मृति के गहरे दर्द से जुड़ा है। ऐसे में ‘टैंक डे’ शब्द का विज्ञापन में इस्तेमाल लोगों को पीड़ितों का क्रूर उपहास और गहरा अपमान लगा। विरोध की आग पूरे देश में फैल गई, तो स्टारबक्स कोरिया की पैरेंट कंपनी ‘शिनसेगाए ग्रुप’ ने डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू की। विज्ञापन हटाया, माफी मांगी और कंपनी के सीईओ को पद से हटा दिया। कंपनी ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि विज्ञापन अभियान के लिए नाम और स्लोगन तय करने के लिए कर्मचारियों ने एआई का इस्तेमाल किया और इस शब्द के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक संदर्भों की पड़ताल नहीं की। पहले भी विवाद – समाज को समझने में असफलता द. कोरिया में स्टारबक्स के प्रीपेड ग्राहकों के 2,100 करोड़ रु. जमा थे। विज्ञापन विवाद के बाद अधिकांश ने पैसे वापस मांगे। पहले हफ्ते में कार्ड से भुगतान वाले 26% ग्राहक कम हुए। पूरे महीने में यह नुकसान 10% रहा। कोरिया में करीब तीन साल पहले स्पोर्ट्स ब्रांड नाइकी तब विवादों में आ गई थी, जब विज्ञापन में गलत नक्शा दिखाने का आरोप गला था। नाइकी ने विज्ञापन वापस लेने के साथ ही माफी मांगी। कुछ माह पहले बीएचसी चिकन ने विज्ञापन में ‘ग्वांगजू’ शब्द का गलत संदर्भ में इस्तेमाल किया था। स्पष्ट है कि समाज काे न समझने का खमियाजा भुगतना पड़ता है।
पाकिस्तान की एक अदालत ने बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच और उनके दो सहयोगियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। क्वेटा की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने तीनों को हत्या और आतंकवाद से जुड़े मामले में दोषी ठहराया। जांच एजेंसियों के मुताबिक, महरंग बलोच, सिबगतुल्लाह और बलाच कादिर ने एक भीड़ को उकसाया था, जिसने अर्धसैनिक बल के जवान शब्बीर अहमद की हत्या कर दी थी। 33 वर्षीय महरंग बलोच बलोच यकजेहती कमेटी (BYC) की प्रमुख हैं और बलूचिस्तान में कथित जबरन गुमशुदगी के मामलों को लेकर लंबे समय से अभियान चलाती रही हैं। उन्हें पिछले साल मार्च में कई अन्य कार्यकर्ताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। फैसले के बाद पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने इसकी समीक्षा की मांग की है। आयोग का कहना है कि मानवाधिकारों की वकालत करने वालों के साथ चरमपंथियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। वहीं बलोच यकजेहती कमेटी ने फैसले को बलोच समुदाय के खिलाफ बताया है। स्वीडिश कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भी मुकदमे की आलोचना करते हुए इसे न्याय का मजाक करार दिया है। फैसले के बाद पाकिस्तान में मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… सिंगापुर की दो कंपनियों पर मजदूरों का वेतन रोकने का आरोप, 400 भारतीय-बांग्लादेशी बोले- महीनों से नहीं मिला पैसा सिंगापुर में काम कर रहे करीब 400 प्रवासी मजदूरों, जिनमें बड़ी संख्या भारतीयों और बांग्लादेशियों की है, ने दो कंपनियों पर वेतन नहीं देने का आरोप लगाया है। शिकायतों के बाद सिंगापुर का श्रम मंत्रालय जांच में जुट गया है, जबकि प्रवासी श्रमिकों की मदद करने वाले संगठन प्रभावित मजदूरों को भोजन और कानूनी सहायता दे रहे हैं। श्रम मंत्रालय ने सोमवार को KPA इंजीनियरिंग और SK इंडस्ट्रीज के खिलाफ जांच शुरू की थी। शुरुआत में करीब 100 मजदूरों ने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन बाद में प्रभावित कर्मचारियों की संख्या बढ़कर करीब 400 पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों के भुगतान नहीं करने के कारण भोजन सप्लाई करने वालों ने भी कुछ दिन पहले मजदूरों को खाना देना बंद कर दिया था। इसके बाद माइग्रेंट वर्कर्स सेंटर ने 300 से ज्यादा मजदूरों को भोजन और दूसरी मदद उपलब्ध कराई। सरकार ने कहा है कि प्रभावित मजदूर नई नौकरी भी तलाश सकते हैं। वहीं श्रमिक संगठनों का कहना है कि कई मजदूर नौकरी और वर्क परमिट खोने के डर से समय पर शिकायत नहीं करते। मामले की जांच जारी है। अधिकारियों के साथ-साथ कई गैर-सरकारी संगठन भी मजदूरों की शिकायतों और कंपनियों की स्थिति की जांच कर रहे हैं। उत्तर कोरिया को अगले पांच वर्षों तक हर साल 2 युद्धपोत बनाने चाहिए: किम
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने कहा है कि देश को अगले पांच वर्षों तक हर साल दो बड़े युद्धपोत बनाने चाहिए। उन्होंने मंगलवार को नए विध्वंसक युद्धपोत ‘चोए ह्योन’ के कमीशनिंग समारोह में कहा कि देश की नौसेना का आधुनिकीकरण तेज गति से आगे बढ़ेगा और इसकी परमाणु क्षमता भी मजबूत होगी। राज्य समाचार एजेंसी KCNA के मुताबिक किम ने नामपो बंदरगाह पर आयोजित समारोह में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम 5,000 टन क्षमता वाले बहुउद्देशीय विध्वंसक युद्धपोत चोए ह्योन की तैनाती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। किम ने कहा कि अगले पांच वर्षों में हर साल इसी क्षमता के दो युद्धपोत बनाए जाने चाहिए। उन्होंने बताया कि उत्तर कोरिया जल्द ही कांग कोन नामक एक और 5,000 टन क्षमता वाला विध्वंसक युद्धपोत तैनात करेगा। इसके अलावा 10,000 टन क्षमता वाले रणनीतिक युद्धपोतों को भी नौसेना में शामिल करने की योजना है। कांग कोन युद्धपोत पिछले वर्ष लॉन्चिंग समारोह के दौरान आंशिक रूप से पलट गया था, जिसके बाद उसकी मरम्मत की गई। किम जोंग उन ने कहा कि अब तक उत्तर कोरिया की नौसेना उसकी सैन्य शक्ति का सबसे कमजोर हिस्सा थी, लेकिन नए कार्यक्रमों के बाद इसकी क्षमता “कल्पना से परे” स्तर तक पहुंच जाएगी।

