पेरू की पहली महिला राष्ट्रपति, 19 वर्ष में संभाली जिम्मेदारी:पढ़ाई छूटी, जेल गईं और बंकर में काटी रातें, केइको ने बिखरने नहीं दी पार्टी

पेरू में पहली बार कोई महिला राष्ट्रपति बनने जा रही हैं। यहां चौथी बार चुनाव लड़ रही दक्षिणपंथी नेता केइको फुजीमोरी (51) ने जीत हासिल की है। केइको को करीब 50.1% वोट मिले, जबकि वामपंथी उम्मीदवार रोबर्टो सांचेज को 49.9% वोट मिले। केइको 28 जुलाई को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। वह पूर्व राष्ट्रपति अल्बर्टो फुजीमोरी की बेटी हैं। चुनावी फंडिंग मामले में केइको 2018 से 2020 तक जेल में भी रह चुकी हैं। अब उनके सामने अपराध, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता से देश को संभालने की चुनौती होगी। पढ़िए केइको के जीवन से जुड़े किस्से… धमाकों के बीच भी पिता स्कूल भेजते 1990 के दशक में केइको के पिता अल्बर्टो फुजीमोरी राष्ट्रपति थे। तब पेरू उग्रवादी संगठन सेंडेरो लुमिनोसो के हमलों से दहल रहा था। उस समय राष्ट्रपति भवन भी उग्रवादियों के निशाने पर था, इसलिए बेटी केइको और उनके भाई-बहनों को सुरक्षा के लिए लंबे समय तक बंकरों में रहना पड़ता था। रात में धमाकों और हमलों की खबरें आतीं तो बच्चे डर जाते और स्कूल न जाने की जिद करते। लेकिन पिता अल्बर्टो फुजीमोरी का नियम था कि हालात जैसे भी हों, पढ़ाई नहीं रुकेगी। संकट के बीच सामान्य जीवन जीना उन्होंने यहीं सीखा। छात्रा से फर्स्ट लेडी बनीं 1994 में केइको अमेरिका की स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थीं। तभी उनके माता-पिता में विवाद के बाद दोनों अलग हो गए। उनकी मां सुजाना हिगुची ने अल्बर्टो के सहयोगियों पर भ्रष्टाचार व राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोप लगाए। विवाद के बीच केइको को पढ़ाई छोड़कर पेरू लौटना पड़ा। महज 19 की उम्र में पिता ने सुजाना को हटाकर केइको को फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी सौंपी। तब वे दुनिया की सबसे कम उम्र की फर्स्ट लेडी में गिनी जाने लगीं। उस दौरान केइको ने राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्सों को अपने पसंदीदा गुलाबी रंग से सजवा दिया था। उन्हें अनुभवहीन किशोरी कहकर आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन केइको ने इसे सामान्य बात बताया। बेटियों को हिम्मत देने के लिए जेल से लिखती थीं चिट्ठी केइको की दो बेटियां हैं। 2018 में मनी लॉन्ड्रिंग व चुनावी फंडिंग मामले में केइको जेल गईं। उस दौरान वे जेल से बेटियों को चिट्ठियां लिखती थीं, जिनमें पढ़ाई पर ध्यान देने, हिम्मत बनाए रखने और परिवार का ख्याल रखने की सलाह देती थीं। ये पत्र बेटियों के साथ खुद केइको के लिए भी मुश्किल दौर में मानसिक सहारा बने। करीब 13 महीने बाद वे रिहा हुई और राजनीति में सक्रिय हुईं।

वेनेजुएला में तबाही के बाद सड़कों पर लगे रिलीफ कैंप:अपनों से मिलकर रोए लोग, शहर मलबे में बदले; 15 PHOTOS-VIDEOS

वेनेजुएला में गुरुवार को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों से तबाही मच गई। 39 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। कई लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है। 40 सेकेंड के अंदर राजधानी कराकास की ऊंची इमारतें मलबे के ढेर में बदल गईं। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया। हजारों लोग घायल हैं। सड़कों पर रेस्क्यू कैंप्स में लोगों का इलाज चल रहा है। लोग अपने लोगों को ढूंढ रहे हैं। मलबा हटाने की कोशिशें की जा रही है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। 15 PHOTO-VIDEO में देखें, वेनेजुएला में रेस्क्यू , इलाज, तबाही और राहत का मंजर… मलबे से लोगों का रेस्क्यू, 4 तस्वीरें सड़कों पर लगे राहत शिविरों में रह रहे लोग, 4 तस्वीरें मलबे में बदला शहर, 4 तस्वीरें अपनों से मिलने की खुशी, 3 तस्वीरें

वेनेजुएला में तबाही के बाद सड़कों पर लगे रिलीफ कैंप:अपनों से मिलकर रोए लोग, शहर मलबे में बदले; 24 PHOTOS-VIDEOS

वेनेजुएला में गुरुवार को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों से तबाही मच गई। 39 हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। कई लोगों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका है। 40 सेकेंड के अंदर राजधानी कराकास की ऊंची इमारतें मलबे के ढेर में बदल गईं। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया। हजारों लोग घायल हैं। सड़कों पर रेस्क्यू कैंप्स में लोगों का इलाज चल रहा है। लोग अपने लोगों को ढूंढ रहे हैं। मलबा हटाने की कोशिशें की जा रही है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। 24 PHOTO-VIDEO में देखें, वेनेजुएला में रेस्क्यू , इलाज, तबाही और राहत का मंजर… मलबे से लोगों का रेस्क्यू, 5 तस्वीरें सड़कों पर लगे राहत शिविरों में रह रहे लोग, 5 तस्वीरें मलबे में बदला शहर, 4 तस्वीरें तबाही के पहले और बाद का मंजर; 4 तस्वीरें अपनों से मिलने की खुशी, 4 तस्वीरें दूसरे देशों से आ रही रेस्क्यू टीम्स, 2 तस्वीरें ———————————- ये खबर भी पढ़ें… भूकंप से बची तो बेटी को गले लगाकर रोई महिला:गिरती इमारतों से पालतू जानवरों को निकालकर लाए लोग; 35 PHOTOS-VIDEOS वेनेजुएला में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों से तबाही मच गई। 39 सेकेंड के अंदर राजधानी कराकस की ऊंची इमारतें मलबे के ढेर में बदल गईं। भूकंप ने कुछ ही सेकेंड में हजारों लोगों की जिंदगी बदल दी। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया, सैकड़ों लोग घायल हुए और बड़ी संख्या में लोगों को घर छोड़ना पड़ा। पूरी खबर पढ़ें…

ईरान बोला-NATO देशों ने जंग में अमेरिका का साथ दिया:इन्हें जवाबदेह ठहराया जाए; होर्मुज में जहाज पर हमला, पुल को नुकसान

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले में साथ देने वाले NATO मेंबर देशों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO चीफ मार्क रूट ने खुद माना है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया था। बघेई ने कहा कि इन्हें अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। होर्मुज स्ट्रेट में एक कॉमर्शियल जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल, यानी हमलावर हथियार से अटैक हुआ। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस, यानी UKMTO ने इसकी जानकारी दी है। जहाज ओमान के तट के पास था, तभी प्रोजेक्टाइल जहाज के दाहिने हिस्से से टकराया। इस हमले में जहाज के ब्रिज, जहां से जहाज को कंट्रोल किया जाता है को नुकसान पहुंचा। जहाज के कप्तान ने बताया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान ने होर्मुज में नए रूट पर आपत्ति जताई : ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नए समुद्री रास्ते, यानी इवैक्यूएशन लेन बनाने की बात कही गई थी। 2. होर्मुज को लेकर ईरान-अमेरिका आमने-सामने: ईरान ने कहा कि बिना नियम माने गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी। अमेरिका ने साफ किया कि होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा। 3. ट्रम्प ने युद्ध खर्च के लिए ₹8.3 लाख करोड़ मांगे: ट्रम्प सरकार ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर, यानी करीब ₹8.322 लाख करोड़ की अतिरिक्त फंडिंग मांगी। यह रकम युद्ध खर्च, सेना की तैयारी और हथियारों के भंडार के लिए इस्तेमाल होगी। 4. लेबनान में इजराइली हमले जारी: नाबातियेह के पास कार पर हमले में 3 लोगों की मौत हुई और 1 व्यक्ति घायल हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। 5. ईरान ने अमेरिका विरोधी नारों पर रोक की खबर खारिज की: ईरान ने कहा कि ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे या अमेरिकी झंडा जलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को गलत बताया। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

ईरान बोला-NATO देशों ने जंग में अमेरिका का साथ दिया:इन्हें जवाबदेह ठहराया जाए; होर्मुज में जहाज पर हमला, पुल को नुकसान

ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हुए हमले में साथ देने वाले NATO मेंबर देशों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO चीफ मार्क रूट ने खुद माना है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का साथ दिया था। बघेई ने कहा कि इन्हें अपने नागरिकों और पूरी दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने अमेरिका और इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ इस कार्रवाई का समर्थन क्यों किया। होर्मुज स्ट्रेट में एक कॉमर्शियल जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल, यानी हमलावर हथियार से अटैक हुआ। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस, यानी UKMTO ने इसकी जानकारी दी है। जहाज ओमान के तट के पास था, तभी प्रोजेक्टाइल जहाज के दाहिने हिस्से से टकराया। इस हमले में जहाज के ब्रिज, जहां से जहाज को कंट्रोल किया जाता है को नुकसान पहुंचा। जहाज के कप्तान ने बताया कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान ने होर्मुज में नए रूट पर आपत्ति जताई : ईरान ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए नए समुद्री रास्ते, यानी इवैक्यूएशन लेन बनाने की बात कही गई थी। 2. होर्मुज को लेकर ईरान-अमेरिका आमने-सामने: ईरान ने कहा कि बिना नियम माने गुजरने वाले जहाजों पर कार्रवाई होगी। अमेरिका ने साफ किया कि होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा। 3. ट्रम्प ने युद्ध खर्च के लिए ₹8.3 लाख करोड़ मांगे: ट्रम्प सरकार ने अमेरिकी संसद से 87.6 अरब डॉलर, यानी करीब ₹8.322 लाख करोड़ की अतिरिक्त फंडिंग मांगी। यह रकम युद्ध खर्च, सेना की तैयारी और हथियारों के भंडार के लिए इस्तेमाल होगी। 4. लेबनान में इजराइली हमले जारी: नाबातियेह के पास कार पर हमले में 3 लोगों की मौत हुई और 1 व्यक्ति घायल हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया। 5. ईरान ने अमेरिका विरोधी नारों पर रोक की खबर खारिज की: ईरान ने कहा कि ‘अमेरिका मुर्दाबाद’ के नारे या अमेरिकी झंडा जलाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। सरकार ने सोशल मीडिया पर चल रही खबरों को गलत बताया। ईरान पीस डील से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए….

अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा:क्विक एड जैसे फीचर्स ने रेपिस्ट को बच्ची तक पहुंचाया, भारत में एप के 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर

सोशल मीडिया एप स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप पर अमेरिका के मिसौरी में मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म 12 साल की बच्ची के बलात्कार के लिए जिम्मेदार है। आरोप लगाया गया है कि स्नैपचैट के क्विक एड और स्नैप मैप जैसे फीचर्स के जरिए हमलावर गैब्रियल जोएल वैलेंटीन-रियोस ने जेएफ नाम की लड़की को शिकार बनाया। एप की मदद से वह उससे जुड़ पाया और उसे बहला-फुसला सका। कथित तौर पर स्नैपचैट के क्विक एड फीचर ने 25 साल के वैलेंटीन-रियोस को जेएफ और उसी इलाके की अन्य नाबालिग लड़कियों से जुड़ने का सुझाव दिया। शिकायत के अनुसार, एप ने वैलेंटीन-रियोस को मिलनसार दिखने वाले लड़के के रूप में दर्शाया था। स्नैपचैट नाबालिगों को यह चेतावनी देने में विफल रहा कि ये यूजर्स अजनबी हो सकते हैं या उनसे जुड़ना खतरनाक हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ हजारों मामले मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), टिकटॉक (बाइटडांस), यूट्यूब (गूगल), और स्नैपचैट (स्नैप) सहित कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य की अदालतों में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लत से संबंधित दावों वाले 3,300 से अधिक मुकदमे लंबित हैं। नाबालिगों के लिए उतना सुरक्षित नहीं है प्लेटफॉर्म अदालत में कहा गया है कि स्नैप के अधिकारियों को डार्क वेब पर एक पुस्तिका मिली, जिसमें स्नैपचैट के फीचर का इस्तेमाल करके युवा यूजर्स को निशाना बनाने के तरीके बताए गए हैं। हीट इनिशिएटिव नामक संगठन के एक सर्वे के मुताबिक नाबालिग यूजर्स में से आधे ने पिछले साल स्नैपचैट पर ‘असुरक्षित सामग्री या संदेश’ देखे। स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है भारत स्नैपचैट की 25 से अधिक देशों में 13 से 24 साल की आयु के 90% लोगों तक पहुंच है। भारत स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। याहू फाइनेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्नैपचैट के 25 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मंथली यूजर हैं। यह कंपनी के वैश्विक यूजर बेस का लगभग 36% है। देश में उसके यूजर की संख्या लगातार बढ़ रही है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… यूजर्स का डेटा भारत से बाहर भेजने पर रोक: देश में ही स्टोर होगा रिकॉर्ड अब आपकी प्राइवेसी और पर्सनल डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को आपके फोन, इंटरनेट इस्तेमाल और कॉलिंग से जुड़ा सभी तरह का डेटा और लॉग्स अब भारत में ही स्टोर करना होगा। पूरी खबर पढ़ें…

अमेरिका में बच्ची से रेप केस में स्नैपचैट पर मुकदमा:क्विक एड जैसे फीचर्स ने रेपिस्ट को बच्ची तक पहुंचाया, भारत में एप के 25 करोड़ एक्टिव मंथली यूजर

सोशल मीडिया एप स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप पर अमेरिका के मिसौरी में मुकदमा दायर किया गया है। इस मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि प्लेटफॉर्म 12 साल की बच्ची के बलात्कार के लिए जिम्मेदार है। आरोप लगाया गया है कि स्नैपचैट के क्विक एड और स्नैप मैप जैसे फीचर्स के जरिए हमलावर गैब्रियल जोएल वैलेंटीन-रियोस ने जेएफ नाम की लड़की को शिकार बनाया। एप की मदद से वह उससे जुड़ पाया और उसे बहला-फुसला सका। कथित तौर पर स्नैपचैट के क्विक एड फीचर ने 25 साल के वैलेंटीन-रियोस को जेएफ और उसी इलाके की अन्य नाबालिग लड़कियों से जुड़ने का सुझाव दिया। शिकायत के अनुसार, एप ने वैलेंटीन-रियोस को मिलनसार दिखने वाले लड़के के रूप में दर्शाया था। स्नैपचैट नाबालिगों को यह चेतावनी देने में विफल रहा कि ये यूजर्स अजनबी हो सकते हैं या उनसे जुड़ना खतरनाक हो सकता है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के खिलाफ हजारों मामले मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), टिकटॉक (बाइटडांस), यूट्यूब (गूगल), और स्नैपचैट (स्नैप) सहित कई प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म गंभीर मुकदमों का सामना कर रहे हैं। अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य की अदालतों में सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लत से संबंधित दावों वाले 3,300 से अधिक मुकदमे लंबित हैं। नाबालिगों के लिए उतना सुरक्षित नहीं है प्लेटफॉर्म अदालत में कहा गया है कि स्नैप के अधिकारियों को डार्क वेब पर एक पुस्तिका मिली, जिसमें स्नैपचैट के फीचर का इस्तेमाल करके युवा यूजर्स को निशाना बनाने के तरीके बताए गए हैं। हीट इनिशिएटिव नामक संगठन के एक सर्वे के मुताबिक नाबालिग यूजर्स में से आधे ने पिछले साल स्नैपचैट पर ‘असुरक्षित सामग्री या संदेश’ देखे। स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है भारत स्नैपचैट की 25 से अधिक देशों में 13 से 24 साल की आयु के 90% लोगों तक पहुंच है। भारत स्नैपचैट के लिए दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। याहू फाइनेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में स्नैपचैट के 25 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मंथली यूजर हैं। यह कंपनी के वैश्विक यूजर बेस का लगभग 36% है। देश में उसके यूजर की संख्या लगातार बढ़ रही है। ————————— ये खबर भी पढ़ें… यूजर्स का डेटा भारत से बाहर भेजने पर रोक: देश में ही स्टोर होगा रिकॉर्ड अब आपकी प्राइवेसी और पर्सनल डेटा पूरी तरह से सुरक्षित रहेगा, क्योंकि अब टेलीकॉम कंपनियों को आपके फोन, इंटरनेट इस्तेमाल और कॉलिंग से जुड़ा सभी तरह का डेटा और लॉग्स अब भारत में ही स्टोर करना होगा। पूरी खबर पढ़ें…

वेनेजुएला भूकंप में अब तक 188 की मौत:1500 से ज्यादा घायल; सरकार बोली- 39,000 लोग लापता, मलबे के नीचे से आ रही आवाजें

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए दो भूकंप में अब तक 188 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। जबकि 1500 से ज्यादा लोग घायल हैं। वेनेजुएला में बुधवार को सन् 1821 के काराबोबो युद्ध की याद में राष्ट्रीय अवकाश था। इसलिए अधिकतर लोग घरों में थे और फीफा वर्ल्ड कप मैच देख रहे थे। इससे मलबे में दबने वालों की संख्या ज्यादा होने की आशंका है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मलबे के अंदर से आवाजें आ रहीं हैं। सरकार ने देर रात बताया कि 39 हजार से अधिक लोग लापता हैं। भूकंप की भयावहता की असल तस्वीर अभी आना बाकी है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप से 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की 44% आशंका है। वहीं, 30% आशंका एक लाख लोगों के जान गंवाने की भी है। इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को 9.5 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपातकाल लगा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोड्रिगेज से बात कर मदद की पेशकश की है। मैप में देखें, भूकंप की लोकेशन 126 साल में सबसे बड़ा भूकंप, देश में इमरजेंसी वेनेजुएला में यह पिछले 126 साल का सबसे बड़ा भूकंप है, इससे पहले 1900 में 7.7 का तीव्रता का भूकंप आया था। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। भूकंप से जुड़ी 3 तस्वीरें… वेनेजुएला भूकंप से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है। 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा, आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।” जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ। कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया। एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला आज भी किसी यात्री विमान पर हुआ दुनिया का सबसे घातक बम धमाका माना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 हमलों के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक चर्चा से बाहर हो गई, लेकिन कनाडा, भारत और आयरलैंड में इसे आज भी नहीं भुलाया गया है। कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए? भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं। 1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी 2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया। 2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा। 3. हमले को भारत का मामला समझा गया जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली। 4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया। 5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा। अब हालात कैसे बदले हाल के कुछ साल में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कनाडा अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को खुलकर काम करने देता है। इसी बीच CSIS ने अपनी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार कनाडा बेस्ट खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट (CBKE) को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल कर धन जुटाते हैं और उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। यह भी कहा गया कि इनकी हिंसक गतिविधियां कनाडा और उसके हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बनी हुई हैं। ———————————– कनिष्क प्लेन क्रैश से जुड़े मामले को यहां विस्तार से पढ़ें… जब खालिस्तानियों ने हवा में उड़ा दिया भारतीय विमान:329 लोग सवार थे, कोई नहीं बचा 23 जून 1985 की सुबह एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर ‘182′ कनाडा से लंदन होते हुए भारत आ रही थी। इसमें 307 पैंसेजर्स और 22 क्रू मेंबर सवार थे। यह बोइंग 747 विमान था, जिसे एयर इंडिया ने कनिष्क नाम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया:41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे

कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है। 23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा, आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई। इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।” जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ। कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया। एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला आज भी किसी यात्री विमान पर हुआ दुनिया का सबसे घातक बम धमाका माना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 हमलों के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक चर्चा से बाहर हो गई, लेकिन कनाडा, भारत और आयरलैंड में इसे आज भी नहीं भुलाया गया है। कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए? भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं। 1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी 2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया। सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया। 2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा। 3. हमले को भारत का मामला समझा गया जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली। 4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया। 5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा। अब हालात कैसे बदले हाल के कुछ साल में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कनाडा अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को खुलकर काम करने देता है। इसी बीच CSIS ने अपनी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार कनाडा बेस्ट खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट (CBKE) को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल कर धन जुटाते हैं और उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। यह भी कहा गया कि इनकी हिंसक गतिविधियां कनाडा और उसके हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बनी हुई हैं। ———————————– कनिष्क प्लेन क्रैश से जुड़े मामले को यहां विस्तार से पढ़ें… जब खालिस्तानियों ने हवा में उड़ा दिया भारतीय विमान:329 लोग सवार थे, कोई नहीं बचा 23 जून 1985 की सुबह एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर ‘182′ कनाडा से लंदन होते हुए भारत आ रही थी। इसमें 307 पैंसेजर्स और 22 क्रू मेंबर सवार थे। यह बोइंग 747 विमान था, जिसे एयर इंडिया ने कनिष्क नाम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…