गुजरात दौरे पर अमित शाह, भारत की पहली सहकारी टैक्सी सेवा ‘भारत टैक्सी’ का करेंगे शुभारंभ

Amit Shah

गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 27 और 28 जून को दो दिनों के लिए अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर आ रहे हैं। इस दौरे के दौरान वे नागरिकों को करोड़ों रुपये के विभिन्न विकास कार्यों की सौगात देंगे, साथ ही संगठन और प्रशासनिक तंत्र के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें भी करेंगे। गांधीनगर लोकसभा भाजपा मीडिया विभाग की प्रेस विज्ञप्ति में इस दौरे के कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी साझा की गई है।

 

भारत की पहली सहकारी टैक्सी सेवा का शुभारंभ

केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे के पहले दिन, यानी 27 जून को सुबह 11 बजे गांधीनगर के महात्मा मंदिर से एक ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। शाह के हाथों भारत की पहली ड्राइवरों के स्वामित्व वाली सहकारी टैक्सी सेवा “भारत टैक्सी” का गुजरात में भव्य शुभारंभ किया जाएगा। सहकारिता क्षेत्र में टैक्सी चालकों के उत्थान के लिए इसे एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

इसके बाद दोपहर 12:45 बजे गांधीनगर सर्किट हाउस में केंद्रीय मंत्री की अध्यक्षता में जिला स्तरीय जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA – दिशा) की महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें सरकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। ALSO READ: मानसून से पहले गुजरात सरकार की नई गाइडलाइन: जर्जर कमरों में नहीं लगेगी क्लास, स्कूलों में फर्स्ट एड किट अनिवार्य

अहमदाबाद में लोक दरबार

दोपहर के बाद अमित शाह अहमदाबाद के शाहीबाग इलाके में स्थित सर्किट हाउस एनेक्सी पहुंचेंगे। यहाँ वे ‘गांधीनगर लोकसभा – हरियाली लोकसभा’ अभियान के तहत चलाए जा रहे “सामूहिक वृक्षारोपण” के कार्यों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देंगे। शाम 6:30 बजे साबरमती विधानसभा क्षेत्र के रानीप और साबरमती वार्ड के नागरिकों के लिए श्री स्वामीनारायण इंटरनेशनल स्कूल में एक भव्य ‘लोकदरबार’ आयोजित किया जाएगा। गृह मंत्री भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे। ALSO READ: गुजरात के सरकारी दफ्तरों में अब AC अनिवार्य रूप से 24 डिग्री पर रखना होगा, नई गाइडलाइन जारी

 

PM Family Care Tracker का लोकार्पण

दौरे के दूसरे दिन, यानी 28 जून को दोपहर 2:30 बजे अमित शाह साबरमती विधानसभा के बूथ अध्यक्षों और शक्तिकेंद्र के प्रभारियों के ‘चिंतन शिविर’ में उपस्थित रहकर आगामी संगठनात्मक कार्यों को लेकर मार्गदर्शन देंगे।

 

 इस दौरे के अंतिम चरण में गांधीनगर के सेक्टर-17 स्थित टाउन हॉल में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसमें केंद्रीय गृह मंत्री के हाथों नागरिकों की स्वास्थ्य और कल्याण सुविधाओं को डिजिटली ट्रैक करने वाले अत्यंत महत्वाकांक्षी PM Family Care Tracker (FCT) प्रोग्राम का आधिकारिक तौर पर लोकार्पण किया जाएगा।

क्या अगले साल भारत आएंगे डोनाल्ड ट्रंप? अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिया बड़ा संकेत

donald trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अगले साल की शुरुआत में भारत दौरे पर आने की संभावना तेज हो गई है। इस संकेत के साथ भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी नई चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि ट्रंप की संभावित भारत यात्रा की तैयारियों पर काम चल रहा है और उम्मीद है कि यह दौरा अगले साल की शुरुआत में हो सकता है। ALSO READ: हैदराबाद में बनी Donald Trump Avenue, ट्रंप बोले- ऐसा सम्मान पाने वाला पहला अमेरिकी राष्ट्रपति

 

 

वॉशिंगटन डीसी में भारत-अमेरिका संबंधों पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान रुबियो ने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते पहले से कहीं अधिक मजबूत हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई मुलाकात बेहद सकारात्मक रही, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई गति मिली है।

 

रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, दोनों पक्ष समझौते को अंतिम रूप देने से केवल कुछ कदम दूर हैं और वार्ता काफी सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ रही है। ALSO READ: ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी हमला, तेहरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा

 

उन्होंने यह भी बताया कि क्वाड देशों की अगली बैठक जल्द होने वाली है। रुबियो ने कहा कि वह स्वयं इस साल के अंत तक भारत आने की उम्मीद कर रहे हैं और उसके बाद अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप की भारत यात्रा की तैयारियों को आगे बढ़ाया जाएगा। यदि यह दौरा तय होता है तो दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप की यह पहली भारत यात्रा होगी।

 

भारत दौरे को लेकर पूछे गए सवाल पर रुबियो ने कहा कि हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत का दौरा करेंगे। भारत अमेरिका का बेहद करीबी साझेदार और भरोसेमंद सहयोगी है।

 

ट्रंप मोदी की दोस्ती पर रुबियो का बड़ा बयान

रुबियो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के व्यक्तिगत संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत व्यक्तिगत तालमेल है, जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नेताओं के बीच आपसी विश्वास और व्यक्तिगत रिश्ते कई बार बड़े फैसलों को आसान बना देते हैं।

 

ट्रेड डील पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री?

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। अगर यह समझौता पूरा होता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और तकनीकी सहयोग को नई तेजी मिलेगी।

edited by : Nrapendra Gupta

हैदराबाद में बनी Donald Trump Avenue, ट्रंप बोले- ऐसा सम्मान पाने वाला पहला अमेरिकी राष्ट्रपति

trump avenue hyderabad

Hyderabad Donald Trump Avenue: हैदराबाद में अमेरिकी दूतावास से सटी सड़क का नाम बदलकर डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू कर दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैदराबाद में उनके नाम पर सड़क का नाम रखे जाने पर बेहद खुश नजर आ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पहले किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को इस तरह से सम्मानित नहीं किया गया। ALSO READ: ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी हमला, तेहरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा

 

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और भारत में अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने 24 जून को इस सड़क का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया था। ट्रंप एवेन्यू में कई अंतरराष्ट्रीय टेक्नोलॉजी कंपनियां भी मौजूद हैं। इनमें माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजॉन जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं।

 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'भारत के हैदराबाद में नया 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' इस तरह सम्मानित होने वाला मैं पहला अमेरिकी राष्ट्रपति हूं। धन्यवाद'। ट्रंप ने उद्घाटन समारोह की तस्वीर भी शेयर की है। ALSO READ: Top News: वेनेजुएला में भूकंप से 920 मौतें, ईरान पर अमेरिकी हमला, हैदराबाद में ट्रंप एवेन्यू

गौरतलब है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति के नाम पर सड़क का नामकरण करने का प्रस्ताव रखा था। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से सटी इस सड़क को पहले US कॉन्सुलेट रोड के नाम से जाना जाता था। 

edited by : Nrapendra Gupta

LIVE: पीएम मोदी 3 दिवसीय सेशेल्स यात्रा पर रवाना, वेनेजुएला में भूकंप

narendra modi

Latest News Today Live Updates in Hindi : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार सुबह 3 दिवसीय सेशेल्स यात्रा पर रवाना हो गए। वे राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे और वहां के राष्‍ट्रीय समारोह में शामिल होंगे। पल पल की जानकारी…

वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 हुई। लाखों लोग आपदा से प्रभावित। अंतरराष्ट्रीय मदद मिलने के बाद इस भूकंप प्रभावित देशों में राहत अभियान तेज कर दिए गए हैं। लोग अभी भी अपने टूटे हुए घरों में वापस जाने से डर रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से सेशेल्स की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। उनका यह दौरा तीन दिन का है।  वह सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉक्टर पैट्रिक हर्मिनी के विशेष आमंत्रण पर सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस स्वर्ण जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे।

पीएम मोदी सेशेल्स की संसद को संबोधित करेंगे और वहां रह रहे भारतीय समुदाय से मुलाकात और संवाद करेंगे।यात्रा के दौरान पीएम मोदी और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होगी। इसमें द्विपक्षीय सहयोग के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।वेनेजुएला में फिर लगे भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 4.9 रही।

इंसाफ मांगता अमेरिकी हमले में मारे गए भारतीय नाविक का परिवार

family seeks justice after indian sailor killed in us strike

-आदिल भट

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी हमले में मारे गए एक भारतीय नाविक के मामले से नाविकों की सुरक्षा, जवाबदेही और भारत की प्रतिक्रिया को लेकर जरूरी सवाल उठ रहे हैं। डीडब्ल्यू ने इस हादसे का शिकार हुए नाविक के परिवार से भी बात की। ALSO READ: नाटो प्रमुख से खुश लेकिन यूरोपीय साझेदारों से चिढ़े ट्रंप

 

सुशीला देवी गहरे सदमे और दुख में डूबी हुई हैं। उनके पति और भारतीय नाविक शिवानंद चौरसिया की बीते 9 जून को ओमान की खाड़ी में एक व्यापारिक जहाज ‘एमटी सेटेबेलो' पर हुए अमेरिकी हमले में मौत हो गई थी।

 

पेशे से इंजीनियरिंग फिटर, शिवानंद ने अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए सालों तक समंदर में काम करने की कड़ी ट्रेनिंग ली थी। लेकिन अब, उनका परिवार उनके बिना अपने भविष्य की कल्पना करने और इस कड़वे सच को स्वीकार करने की जद्दोजहद में जुटा है।

 

इस महीने की शुरुआत में जब अमेरिकी सेना ने पलाऊ के झंडे वाले इस तेल और केमिकल टैंकर जहाज पर हमला किया, तो उसमें तीन भारतीय नाविक मारे गए थे, जिनमें चौरसिया भी एक थे। अमेरिकी सेना का कहना था कि वे ईरान युद्ध के बीच ईरान से होने वाले तेल के निर्यात पर लगी पाबंदी या नाकेबंदी  को लागू कर रहे थे। इस हमले में चीफ इंजीनियर पटनाला सुरेश और डेक कैडेट आदित्य शर्मा भी मारे गए थे। जहाज पर मौजूद बाकी 21 भारतीय क्रू सदस्यों को बचा लिया गया था।

 

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि टैंकर में ईरानी तेल था और उसे बार-बार चेतावनी दी गई थी। वहीं, जहाज के मैनेजर ने इस बात का खंडन किया है। उनका कहना है कि जहाज का ईरान से कोई संबंध नहीं था और हमले से पहले उन्हें कोई चेतावनी नहीं मिली थी। ALSO READ: UN महासचिव ने AI कंपनियों से मांगा बिजली, पानी और जमीन का हिसाब

 

‘अमेरिका ने मेरे पति को मारा'

सुशीला देवी ने डीडब्ल्यू से कहा, “उन्होंने मेरी सारी खुशियां छीन ली। अमेरिका ने ही मेरे पति की जान ली है। इसीलिए प्रधानमंत्री [नरेंद्र] मोदी और [उत्तर प्रदेश के] मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुप हैं। उन्हें अपने लोगों के लिए आवाज उठानी चाहिए थी और पूछना चाहिए था कि उन्होंने हमारे साथ ऐसा क्यों किया।”

 

शिवानंद चौरसिया का परिवार पूर्वी उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के एक खेतिहर गांव में रहता है, जहां मुख्य रूप से धान की खेती होती है। गांव के ज्यादातर मकान मिट्टी और ईंट से बने हुए हैं। ईंट से बने अपने साधारण से घर के भीतर पूरा परिवार गुमसुम और शांत बैठा है। रिश्तेदार और पड़ोसी लगातार घर आ-जा रहे हैं और उन्हें सांत्वना दे रहे हैं। शिवानंद की बहन सोनी चौरसिया कहती हैं, “भाई की मौत से हमें बहुत ज्यादा दुख पहुंचा है। अब मेरा इस दुनिया में जीने का मन नहीं करता, क्योंकि परिवार ने अपनी एकमात्र उम्मीद खो दी है।”

 

परिवार को लगता है कि भारतीय सरकार की चुप्पी ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया है। किसी भी नेता ने शोक संतप्त परिवार से मुलाकात नहीं की है। सोनी ने कहा, “हम गरीब हैं। इसीलिए, मोदी सरकार को कोई परवाह नहीं है। अगर हम अमीर होते, तो वे हमसे मिलने जरूर आते।”

 

उत्तर प्रदेश के इस इलाके के ज्यादातर परिवारों की तरह, चौरसिया परिवार भी खेती-बाड़ी पर निर्भर है और बमुश्किल इतना अनाज उगा पाता है जिससे सबका पेट भर सके। समंदर की यह नौकरी शिवानंद चौरसिया के लिए तंगहाली से बाहर निकलने का रास्ता थी। उनके मरीन इंजीनियरिंग के कोर्स की फीस भरने के लिए परिवार ने अपनी जमीन बेच दी थी और करीब 8,60,000 रुपये का कर्ज लिया था। आखिरकार, उन्हें एक ऑयल टैंकर पर नौकरी मिल गई थी।

 

समंदर में कितने भारतीय कर्मचारी मौजूद

दुनिया भर के समुद्री जहाजों पर काम करने वाले कर्मचारियों का एक बहुत बड़ा हिस्सा भारत के लोगों का है। उद्योग के अनुमानों के मुताबिक, दुनिया के कुल नाविकों में से करीब 12 फीसदी भारतीय नागरिक हैं। इनमें से हजारों नाविक उन व्यापारिक जहाजों पर काम करते हैं, जो दुनिया के सबसे अशांत और खतरनाक समुद्री रास्तों से होकर गुजरते हैं।

 

चौरसिया के घर के पास एक पेड़ के नीचे कुछ लोग इकट्ठा होकर यह चर्चा कर रहे थे कि आखिर वहां क्या हुआ था और इससे उनके जीवन पर क्या असर पड़ेगा। उनमें से कई लोगों के रिश्तेदार समंदर में काम करते हैं, जिनमें से कुछ फारस की खाड़ी में भी तैनात हैं।

 

जो परिवार पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे थे, उनके लिए समंदर की यह नौकरी कभी गरीबी से बाहर निकलने के रास्ते के तौर पर दिखती थी। लेकिन अब यह एक ऐसा जुआ बन चुकी है, जहां दांव पर सीधे इंसान की जिंदगी लगी है। गांव के एक व्यक्ति ने कहा, “हम अब अपने आदमियों को समुद्र में नहीं भेजेंगे।” वहां मौजूद दूसरे लोगों ने भी सहमति जताते हुए अपना सिर हिलाया। ALSO READ: ईरान युद्ध के लक्ष्यों में डोनाल्ड ट्रंप को क्या हासिल हुआ

 

गए थे रोजी-रोटी के लिए, फंस गए जंग में

ईरान-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद, ईरानी हमलों में भी भारतीय नाविक घायल हुए हैं। भूमेश (जो सिर्फ अपने पहले नाम से जाने जाते हैं) एक ऐसे नाविक हैं जो 1 मार्च को ‘स्काईलाइट' नामक टैंकर जहाज पर हुए ईरानी हमले में बाल-बाल बचे थे। यह हमला तब हुआ था जब तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए नाकेबंदी कर रहा था। यह जहाज इस युद्ध के दौरान हमले का शिकार होने वाले सबसे शुरुआती जहाजों में से एक था।

 

जब हमला हुआ, उस वक्त भूमेश जहाज के मुख्य कंट्रोल रूम (ब्रिज) पर ही मौजूद थे। भूमेश ने बताया, “मुझे नहीं पता था कि मैं जिंदा बचूंगा या नहीं। मैं बस लगातार यही सोच रहा था कि मेरे बिना मेरा परिवार इस सदमे को कैसे झेलेगा और क्या मैं कभी सही-सलामत घर वापस लौट पाऊंगा।”

 

उस धमाके में जहाज के कप्तान और एक अन्य भारतीय नाविक की मौत हो गई थी। भूमेश के मुताबिक, इस हादसे की यादें आज भी उनका पीछा करती हैं। हफ्तों तक वे सो नहीं पाए। उन्होंने कहा, “नाविक वहां कोई जंग लड़ने नहीं जाते हैं। हम तो सिर्फ अपनी रोजी-रोटी कमाने वहां जाते हैं।” अब समंदर में वापस न जाने के कारण, वे दिल्ली के बाहरी इलाके में किराए के एक कमरे में रहते हैं और ट्रक चलाते हैं। तीन महीने से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन वे अब भी शिपिंग कंपनी से मिलने वाले मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।

 

भूमेश का यह अनुभव उन दर्जनों मामलों में से एक है, जिन पर भारतीय नाविक यूनियन लगातार नजर रखे हुए है। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव ने डीडब्ल्यू को बताया, “यह गंभीर चिंता का विषय है। बिना किसी चेतावनी के उन पर हमला क्यों किया गया?” यादव के पास फंसे हुए नाविकों के फोन दिन भर आते रहते हैं। ये नाविक बताते हैं कि खाड़ी में फंसे कई जहाजों पर खाने-पीने की चीजों और जरूरी सामान की भारी किल्लत हो रही है और वे बहुत मुश्किलों से जूझ रहे हैं। यूनियन के पास हर दिन उन नाविकों के परेशान और चिंतित घरवालों के भी ढेरों फोन आते हैं। यादव ने कहा, “वे जानना चाहते हैं कि क्या उनका बेटा सुरक्षित है? क्या उनका पति घर लौट रहा है?”

 

भले ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही है और समुद्री रास्ते (होर्मुज जलडमरूमध्य) में तनाव कम हो रहा है, लेकिन वहां फंसे हर एक जहाज को सुरक्षित बाहर निकालने में अब भी कई अड़चनें आ रही हैं। इसी हफ्ते, संयुक्त राष्ट्र की संस्था ‘अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन' (आईएमओ) ने होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे 11,000 से ज्यादा नाविकों और सैकड़ों जहाजों को वहां से सुरक्षित निकालने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

 

कूटनीति और परिवार की पीड़ा

हमले के कई दिनों बाद भी भारत के ज्यादातर नेता पूरी तरह चुप रहे। जबकि, पीड़ितों के परिवार पल-पल की जानकारी के लिए इंतजार करते रहे। नेताओं की यह चुप्पी जल्द ही एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई।

 

नई दिल्ली (भारत सरकार) ने एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक के सामने अपनी कड़ी आपत्ति और कड़ा विरोध दर्ज कराया। वहीं दूसरी ओर, भारत के जहाजरानी और बंदरगाह मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि यह ‘समुद्री क्षेत्र से जुड़े हमारे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी और गहरी क्षति' है।

 

विपक्ष ने सरकार पर बहुत कम कदम उठाने का आरोप लगाया और हमले को लेकर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए। आखिरकार, जी7 सम्मेलन के दौरान मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के सामने यह मुद्दा उठाया और दुनिया भर के शिपिंग रूट पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।

 

हालांकि, चौरसिया परिवार के लिए, यह उच्च-स्तरीय कूटनीति बहुत दूर की बात लग रही थी। उनके मन में अब भी कई ऐसे सवाल थे जिनका कोई जवाब नहीं मिला था। मसलन, क्या उन्हें कोई मुआवजा मिलेगा? क्योंकि उनके घर का कमाने वाला मुख्य सदस्य अचानक उनसे छिन चुका है और सिर पर कर्ज का भारी बोझ अब भी बना हुआ है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि क्या उन खतरनाक समुद्री रास्तों पर काम कर रहे अन्य भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं?

 

आखिरकार, वे बस यही चाहते थे कि उनके परिवार के सदस्य का शव उन्हें वापस मिल जाए। कई दिनों तक, शिवानंद चौरसिया के छोटे भाई रामप्रवेश का ध्यान बस अपने फोन पर ही लगा रहा। फोन की हर घंटी के साथ एक नई उम्मीद जगती थी। फिर, नौवें दिन, आखिरकार वह फोन कॉल आ ही गया। शिवानंद का पार्थिव शरीर आखिरकार उनके गांव पहुंचा।

 

कुछ घंटों बाद, सैकड़ों ग्रामीण शिवानंद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए, चिता से लहरे उठीं और अंतिम संस्कार पूरा हो गया। शिवानंद का शव देश में आने का इंतजार तो खत्म हो गया, लेकिन उनके परिवार के लिए, जवाबदेही, मुआवजे और न्याय की तलाश तो अभी शुरू ही हुई है।

ईरान के मिसाइल ठिकानों पर अमेरिकी हमला, तेहरान का पलटवार; मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा बढ़ा

us attack iran

US Iran Tension : अमेरिकी और ईरान के बीच तनाव उस समय बड़ गया जब अमेरिकी सेना ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों व तटीय रडार साइट्स पर हमले किए। यह कार्रवाई तब की गई, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया। बहरहाल इन 2 हमलों ने मीडिल ईस्ट में युद्ध के खतरे को और बढ़ा दिया है। ALSO READ: तेल निर्यात में राहत के बीच ट्रंप की चेतावनी, क्या मुश्किल में पड़ जाएगी US-Iran डील?

 

अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि उसने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों व तटीय रडार साइट्स पर हमले किए। अमेरिकी सेना के अनुसार, 25 जून को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में सिंगापुर के कार्गो शिप ‘एमवी एवर लवली’ पर ड्रोन हमला किया था।

 

क्या बोले जेडी वेंस?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे और अमेरिका उसका पालन कर रहा है। अगर समझौते को लागू करने को लेकर ईरान को कोई आपत्ति है तो वह बातचीत कर सकता है, लेकिन हिंसा का जवाब हिंसा से दिया जाएगा। ALSO READ: Top News: वेनेजुएला में भूकंप से 920 मौतें, ईरान पर अमेरिकी हमला, हैदराबाद में ट्रंप एवेन्यू

 

ईरान का पलटवार

अमेरिकी हमले के बाद ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की नौसेना के हवाले से दावा किया कि उसने जवाब में क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।

 

ईरान की संसद के सदस्य इब्राहिम अजीजी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, अमेरिका ने एक बार फिर बातचीत के बीच ईरान पर हमला किया है। युद्धविराम का यह उल्लंघन अमेरिका के लिए पीछे हटने और पछतावे की वजह बनेगा।

edited by : Nrapendra Gupta 

Top News: वेनेजुएला में भूकंप से 920 मौतें, ईरान पर अमेरिकी हमला, हैदराबाद में ट्रंप एवेन्यू

top news 27 june

Top News 27 June : वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 हुई। अमेरिका ने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों व तटीय रडार साइट्स पर हमले किए। हैदराबाद में डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर सड़क। आयरलैंड ने भारत को 34 रनों से हराया। फ्रांस फीफा विश्व कप के नॉकआउट दौर में पहुंचा। 27 जून की बड़ी खबरें : 

 

वेनेजुएला में भूकंप से 920 की मौत

वेनेजुएला में भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 920 हुई। लाखों लोग आपदा से प्रभावित। अंतरराष्ट्रीय मदद मिलने के बाद इस भूकंप प्रभावित देशों में राहत अभियान तेज कर दिए गए हैं। लोग अभी भी अपने टूटे हुए घरों में वापस जाने से डर रहे हैं।

 

ईरान पर अमेरिकी हमला

अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने कहा कि उसने ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण ठिकानों व तटीय रडार साइट्स पर हमले किए। यह कार्रवाई तब की गई, जब ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया।

 

हैदराबाद में ट्रंप के नाम पर सड़क

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हैदराबाद में उनके नाम पर सड़क का नाम रखे जाने पर खुशी जताई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा, 'भारत के हैदराबाद में नया 'डोनाल्ड ट्रंप एवेन्यू' इस तरह सम्मानित होने वाला मैं पहला अमेरिकी राष्ट्रपति हूं। धन्यवाद'।

 

आयरलैंड ने भारत को हराया

आयरलैंड ने विश्वकप विजेता भारत को 34 रनों से हराकर बड़ा उलटफेर किया। पहला मैच जीतकर आयरलैंड 2 मैचों की सीरीज में 1-0 से आगे हो गई। यह किसी भी प्रारुप में आयरलैंड की भारत पर पहली जीत है। ALSO READ: आयरलैंड ने विश्वकप विजेता भारत को 34 रनों से हराकर किया बड़ा उलटफेर

 

नॉकआउट में पहुंचा फ्रांस

फीफा विश्व कप 2026 में फ्रांस ने नॉर्वे को 4-1 से हराकर ग्रुप में शीर्ष स्थान पर रहकर अंतिम-32 में अपनी जगह पक्की कर ली। वहीं, सेनेगल ने इराक को 5-0 से रौंदते हुए नॉकआउट चरण में पहुंचने की उम्मीदें बरकरार रखीं।

edited by : Nrapendra Gupta

पासपोर्ट, आधार या वोटर आईडी नहीं… आखिर भारतीय नागरिकता का अंतिम प्रमाण क्या है?

Indian citizenship proof

पासपोर्ट भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं, तो फिर भारतीय नागरिक अपनी नागरिकता साबित कैसे करेगा?” यह सवाल अचानक पैदा नहीं हुआ, लेकिन हाल के दिनों में यह राष्ट्रीय बहस का विषय जरूर बन गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया के दौरान नागरिकता और पहचान से जुड़े मुद्दे राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गए। इसी बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने एक ऐसा बयान दिया जिसने इस बहस को और तेज कर दिया।

 

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज़ (Travel Document) है, नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं। पहली नजर में यह बयान चौंकाने वाला लग सकता है, क्योंकि आम धारणा यही रही है कि पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को  ही जारी किया जाता है। लेकिन कानूनी दृष्टि से स्थिति थोड़ी अलग और कहीं अधिक जटिल है।

पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम प्रमाण क्यों नहीं माना जाता?

कानूनी रूप से यह कोई नई बात नहीं है। भारत के पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 के तहत केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी भारतीय पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज़ जारी कर सकती है। यही कारण है कि कानून पासपोर्ट को नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं मानता।
 

हालांकि व्यावहारिक रूप से पासपोर्ट को नागरिकता का एक अत्यंत मजबूत संकेत माना जाता है, क्योंकि इसे जारी करने से पहले सरकार द्वारा पहचान और दस्तावेज़ों का विस्तृत सत्यापन किया जाता है और अधिकांश मामलों में यह केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी होता है।

भारत में नागरिकता की शुरुआत : संविधान से कानून तक

जब भारतीय संविधान का लागू होना हुआ, तब नागरिकता का प्रश्न संविधान के अनुच्छेद 5, 6 और 7 के माध्यम से तय किया गया। ये प्रावधान उस समय बनाए गए थे जब देश विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर जनसंख्या का भारत और पाकिस्तान के बीच पलायन हुआ था।
 

हालांकि संविधान निर्माताओं ने इन्हें स्थायी व्यवस्था के रूप में नहीं बनाया था। बाद में नागरिकता से जुड़ा पूरा ढांचा नागरिकता अधिनियम, 1955 के अंतर्गत लाया गया और संसद ने समय-समय पर इसमें कई संशोधन किए।

भारत में जन्म से नागरिकता पाने के नियम कैसे बदले?

पहला चरण: 1950 से 1987 तक — जन्म लिया, तो नागरिक बने

  • इस अवधि में भारत में जन्म लेने वाला हर व्यक्ति स्वतः भारतीय नागरिक माना जाता था।
  • माता-पिता की नागरिकता, राष्ट्रीयता या कानूनी स्थिति का कोई महत्व नहीं था।
  • इसे अंतरराष्ट्रीय कानून की भाषा में जस सोली (Jus Soli) कहा जाता है।

 

दूसरा चरण: 1987 से 2004 तक — कम से कम एक माता-पिता भारतीय होना जरूरी

  • 1986 में नागरिकता कानून में संशोधन किया गया और 1 जुलाई 1987 से नए नियम लागू हुए।
  • अब भारत में जन्म लेने वाला बच्चा तभी भारतीय नागरिक माना जाएगा जब उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक हो।

इस बदलाव के पीछे मुख्य कारण था:

  • असम आंदोलन, 
  • अवैध प्रवासन को लेकर बढ़ती चिंताएं, 
  • तथा असम समझौता के बाद बनी राजनीतिक सहमति। 

तीसरा चरण: 2004 से अब तक — नियम और सख्त हुए

3 दिसंबर 2004 से लागू संशोधन ने नागरिकता के नियमों को और कठोर बना दिया।
 

अब भारत में जन्म लेने वाला बच्चा तभी भारतीय नागरिक माना जाएगा यदि:

✔ दोनों माता-पिता भारतीय नागरिक हों,

या

✔ एक माता या पिता भारतीय नागरिक हो और दूसरा अवैध प्रवासी न हो।

यदि माता-पिता में से कोई एक अवैध प्रवासी है, तो भारत में जन्म लेने के बावजूद बच्चे को स्वतः भारतीय नागरिकता नहीं मिलेगी।

 

क्या इससे नागरिकताविहीन होने का खतरा पैदा हो सकता है?

यहीं से एक गंभीर मानवीय और कानूनी प्रश्न सामने आता है। मान लीजिए किसी बच्चे का पिता भारतीय नागरिक है लेकिन उसकी मां को अवैध प्रवासी घोषित कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में बच्चे को भारत में जन्म लेने के बावजूद नागरिकता नहीं मिल सकती। यदि दूसरा देश भी उसे अपना नागरिक स्वीकार न करे, तो बच्चा नागरिकताविहीन (Stateless) हो सकता है।

 

सीमावर्ती राज्यों जैसे:

  • पंजाब 
  • राजस्थान 
  • पश्चिम बंगाल 
  • असम 

में प्रशासन को समय-समय पर ऐसे मामलों का सामना करना पड़ा है।

 

तिब्बती शरणार्थियों के मामलों ने क्या सिखाया?

  • भारतीय नागरिकता कानून की सबसे चर्चित न्यायिक व्याख्याओं में तिब्बती शरणार्थियों के मामले शामिल हैं।
  • 2010 और 2016 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने महत्वपूर्ण फैसलों में कहा कि 30 जून 1987 से पहले भारत में जन्मे तिब्बती नागरिक भारतीय नागरिकता के पात्र हैं।
  • कारण साफ था। उस समय तक भारत में जन्म आधारित नागरिकता का सिद्धांत लागू था।
  • इन फैसलों के बाद चुनाव आयोग और विदेश मंत्रालय ने भी ऐसे तिब्बतियों के अधिकारों को मान्यता दी।
  • इन मामलों ने यह दिखाया कि नागरिकता कानून में केवल एक दिन का अंतर भी किसी व्यक्ति की कानूनी स्थिति को पूरी तरह बदल सकता है।

बिहार की SIR प्रक्रिया ने क्या उजागर किया?

  • बिहार की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया ने पहली बार बड़े पैमाने पर यह सवाल खड़ा किया कि आखिर भारतीय नागरिक अपनी नागरिकता साबित कैसे करे।
  • चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची में केवल भारतीय नागरिकों के नाम ही शामिल होने चाहिए।
  • लेकिन इस प्रक्रिया ने यह भी उजागर किया कि अधिकांश भारतीयों के पास ऐसा कोई एक दस्तावेज़ नहीं है जिसे हर परिस्थिति में नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जा सके।

क्या चुनाव आयोग नागरिकता तय कर सकता है?

नहीं। हाल ही में भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग का अधिकार केवल मतदाता सूची की पात्रता तक सीमित है। किसी व्यक्ति की नागरिकता निर्धारित करना उसका अधिकार क्षेत्र नहीं है। नागरिकता से जुड़े विवादों का निर्णय केवल कानून द्वारा अधिकृत सक्षम प्राधिकारी ही कर सकता है।

आधार, वोटर आईडी और पासपोर्ट की कानूनी सीमाएं

आधार कार्ड

  • आधार केवल पहचान और निवास का प्रमाण है।
  • यह नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

वोटर आईडी

  • यह केवल यह दर्शाती है कि व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दर्ज है।
  • यह भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है।

पासपोर्ट

  • यह अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी दस्तावेज़ है।
  • हालांकि व्यवहारिक रूप से इसे नागरिकता का मजबूत संकेत माना जाता है, लेकिन कानून इसे अंतिम प्रमाण नहीं मानता।

 

तो आखिर भारतीय नागरिकता साबित कौन करता है?

यही वह प्रश्न है जिसका कोई एक सार्वभौमिक उत्तर आज भी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार सबसे मजबूत दस्तावेज़ हैं:

  • नागरिकता पंजीकरण प्रमाणपत्र 
  • प्राकृतिककरण (Naturalization) प्रमाणपत्र, लेकिन ये केवल सीमित संख्या में लोगों के पास उपलब्ध होते हैं।


अधिकांश भारतीयों के लिए नागरिकता सिद्ध करने में निम्न दस्तावेज़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:

  • जन्म प्रमाणपत्र 
  • माता-पिता के दस्तावेज़ 
  • स्कूल रिकॉर्ड 
  • भूमि अभिलेख 
  • पुराने मतदाता रिकॉर्ड 
  • पारिवारिक दस्तावेज़ 
  • सरकारी रजिस्टर में दर्ज पुराने रिकॉर्ड 

NRC के दौरान 'लीगेसी दस्तावेज़' क्यों महत्वपूर्ण बने?

असम में हुई राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) प्रक्रिया के दौरान नागरिकता सिद्ध करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने तथाकथित “लीगेसी डॉक्यूमेंट्स” का उपयोग किया। इनमें दशकों पुराने भूमि रिकॉर्ड, मतदाता सूचियां, राजस्व दस्तावेज़ और पारिवारिक रिकॉर्ड शामिल थे। इस अनुभव ने दिखाया कि नागरिकता का प्रश्न अक्सर केवल एक पहचान पत्र से कहीं अधिक जटिल होता है।

दुनिया में क्या हो रहा है?

भारत अकेला देश नहीं है जिसने जन्म आधारित नागरिकता के नियमों को सीमित किया है। संयुक्त राज्य अमेरिका आज भी व्यापक रूप से जन्म आधारित नागरिकता को मान्यता देता है, हालांकि वहां भी समय-समय पर इसे सीमित करने की राजनीतिक मांग उठती रही है। भारत में नागरिकता कानून संसद के माध्यम से संशोधित किया जा सकता है और इसी कारण पिछले सात दशकों में इसके स्वरूप में कई बदलाव हुए हैं।

 

आगे की सबसे बड़ी चुनौतियां

यह पूरा विवाद तीन महत्वपूर्ण सवाल छोड़ जाता है:

1. नागरिकताविहीन बच्चों के लिए भारत की नीति क्या होगी?

2. क्या भारत को एक सार्वभौमिक नागरिकता दस्तावेज़ की आवश्यकता है?

3. भविष्य में नागरिकता कानून और नागरिक रजिस्टर किस दिशा में जाएंगे?

विदेश मंत्रालय के बयान का वास्तविक अर्थ क्या है?

विदेश मंत्रालय ने कोई नया कानून नहीं बनाया और न ही किसी नई व्याख्या की घोषणा की। उसने केवल उस कानूनी स्थिति को दोहराया है जो दशकों से भारतीय कानून का हिस्सा रही है। लेकिन इस बयान ने एक पुराने प्रश्न को फिर से राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है—
 

अगर पासपोर्ट, आधार और वोटर आईडी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, तो एक आम भारतीय नागरिक अपनी नागरिकता किस दस्तावेज़ से साबित करेगा?
 

शायद आने वाले वर्षों में भारत को इसी प्रश्न का स्पष्ट, सरल और सार्वभौमिक उत्तर तलाशना होगा।
 

क्योंकि पहचान और नागरिकता के बीच का यह अंतर केवल कानूनी बहस नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के अधिकारों, अवसरों और लोकतांत्रिक भागीदारी से जुड़ा प्रश्न है।

CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, हॉकी में गोल्ड जीतने वालों को ₹3 लाख, ब्रॉन्ज विजेताओं को ₹1 लाख मिलेगा

cm yogi

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 26 जून को पदक विजेता हॉकी खिलाड़ियों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी टीम में मध्यप्रदेश बढ़ता प्रतिनिधित्व एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले समय में मध्यप्रदेश के खिलाड़ी अन्य अंतर्राष्ट्रीय मुकाबलों में बेहतर प्रदर्शन करेंगे। मध्यप्रदेश सरकार खिलाड़ियों को पूरा प्रोत्साहन देगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने निवास पर भेंट के लिए आए अंडर 18 पुरुष और महिला हॉकी एशिया कप-2026 में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को बधाई दी। इस टूर्नामेंट का आयोजन जापान के काकामिगाहारा शहर में 29 मई से 6 जून 2026 तक किया गया था। पदक विजेता पुरुष और महिला खिलाड़ियों को श्रेष्ठ प्रदर्शन पर मध्यप्रदेश सरकार ने प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की है। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार सभी खेलों और खिलाड़ियों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश के भोपाल, जबलपुर, नर्मदापुरम, सिवनी और बड़वानी के खिलाड़ियों में से कुछ खिलाड़ी बहुत साधारण परिवार से हैं। अपनी प्रतिभा के दम पर इन खिलाड़ियों ने 6 स्वर्ण और 4 कांस्य पदक प्राप्त किए हैं। निश्चित ही यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आने वाले एशियाई खेलों में इन खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जो कभी हॉकी में कई ओलंपियन दे चुका है, कुछ वर्ष इस खेल में पीछे रहा, लेकिन अब हरियाणा जैसे राज्यों के समान अग्रणी हो रहा हैं। वहीं, खेल मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जापान में हुए टूर्नामेंट के लिए समीर दाद जैसे कोच खिलाड़ियों को दक्ष बनाने में लगे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पदक विजेता खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया और उनके साथ ग्रुप फोटोग्राफ भी लिया। 

 

टूर्नामेंट से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

* अंडर 18 पुरुष-महिला हॉकी एशिया कप में पुरुष वर्ग में एशिया के नौ देश (भारत, कोरिया, जापान, चीनी- ताइपे, कजाकिस्तान, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन) एवं महिला वर्ग में एशिया के आठ देश (भारत, कोरिया, मलेशिया, सिंगापुर, चीन, जापान, चीनी ताइपे, बांग्लादेश) ने भाग लिया।

* प्रतियोगिता में भारत की 18 सदस्यीय बालक-बालिका हॉकी टीम ने भाग लिया।

* भारतीय बालक हॉकी टीम में मप्र राज्य पुरुष हॉकी अकादमी, भोपाल के 6 बालक खिलाड़ी सदस्य रहे तथा स्वर्ण पदक अर्जित किया। 

* भारतीय बालिका हॉकी टीम में मप्र राज्य महिला हॉकी अकादमी, ग्वालियर की 4 बालिका खिलाड़ी सदस्य रही तथा कांस्य पदक अर्जित किया।

* मप्र राज्य महिला हॉकी अकादमी की खिलाड़ी नौसीन नाज ने प्रतियोगिता में 12 गोल कर टूर्नामेन्ट की 'टॉप स्कोरर' बनने का गौरव प्राप्त किया। 

* मप्र राज्य पुरुष हॉकी अकादमी के खिलाड़ी आयुष रजक ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 'बेस्ट गोलकीपर अवार्ड' प्राप्त किया । 

* मध्यप्रदेश सरकार ने वर्ग बालक के हॉकी स्वर्ण पदक विजेता खिलाड़ियों को 3 लाख प्रति खिलाड़ी एवं बालिका वर्ग के हॉकी कांस्य पदक विजेता खिलाड़ियों को 1 लाख प्रति खिलाड़ी प्रोत्साहन राशि प्रदान करने का निर्णय लिया है। 

 

इन खिलाड़ियों ने किया प्रतिनिधित्व

पुरुष खिलाड़ी :- आयुष रजक, पिता स्व अनिल रजक, जिला जबलपुर, स्वर्ण पदक। अंश बहुत्रा, पिता नीरज बहुत्रा, जिला नर्मदापुरम, स्वर्ण पदक। करन गौतम, पिता मनोज गौतम, जिला उमरिया, स्वर्ण पदक। अवि माणिपुरी, पिता जितेन्द्र माणिपुरी, जिला भोपाल, स्वर्ण पदक। सिद्धार्थ बेन, पिता लेखराम बेन, जिला जबलपुर, स्वर्ण पदक। गाजी खान, पिता महबूब खान, जिला नर्मदापुरम, स्वर्ण पदक।

 

महिला खिलाड़ी:- नौसीन नाज, पिता अहफाज खान, जिला सिवनी, कांस्य पदक। महक परिहार, पिता महरवान सिंह परिहार, कांस्य पदक। स्नेहा दावड़े , पिता राजेश दावड़े , जिला बड़वानी, कांस्य पदक। नम्मी गीताश्री, पिता नम्मी ताताराव, तिम्मापुरम, विशाखपट्टनम (आन्ध्रप्रदेश), कांस्य पदक। Edited by : Sudhir Sharma

Ayodhya Ram Temple donation scam case: सभी 8 आरोपी 29 जून तक पुलिस रिमांड पर, 79.85 लाख रुपए बरामद

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अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को अदालत ने 29 जून तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस दौरान जांच एजेंसियां आरोपियों से पूछताछ जारी रखेंगी। शुक्रवार को अभियोजन पक्ष के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

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 सभी आरोपियों को सोमवार तक पुलिस रिमांड पर भेजा है। इसके बाद उन्हें विशेष अदालत में दोबारा पेश किया जाएगा। इस मामले में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं। यह मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद और अन्य कीमती चढ़ावे के कथित गबन से जुड़ा है। विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। फिलहाल इस मामले की जांच एसआईटी और अयोध्या पुलिस संयुक्त रूप से कर रही हैं।

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जांच के दौरान अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं।  आरोपियों के खिलाफ लोक सेवकों द्वारा आपराधिक विश्वासघात (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं, क्योंकि आरोपी लोक सेवक होने के साथ-साथ कथित रूप से दान राशि के गबन में शामिल पाए गए हैं।

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गिरफ्तार आरोपियों में से पांच से छह लोग बैंक कर्मचारी हैं, जिन्हें मंदिर में प्राप्त नकद दान की गिनती के लिए तैनात किया गया था और वे बैंक से वेतन प्राप्त कर रहे थे। हालांकि, जांच प्रभावित न हो इसलिए उन्होंने फिलहाल संबंधित बैंक कर्मचारियों की पहचान सार्वजनिक करने से इनकार किया।  टिन्नू यादव बैंक कर्मचारी नहीं था, बल्कि वह चालक (ड्राइवर) के रूप में कार्यरत था। वहीं, सुभाष श्रीवास्तव दान राशि की गिनती की पूरी प्रक्रिया का प्रभारी था।  Edited by : Sudhir Sharma