गौतमबुद्ध नगर बना देश का सबसे बड़ा निवेश केंद्र, CM योगी ने ₹2479 करोड़ की 70 परियोजनाओं का किया लोकार्पण

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गौतमबुद्ध नगर शापित नहीं है बल्कि आज नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना अथॉरिटी मिलकर देश का सर्वश्रेष्ठ निवेश गंतव्य बन रहे हैं। तीनों अथॉरिटी तेजी से कार्य कर रही हैं। वर्षों की जकड़न टूटी है, कार्य संस्कृति बदली है और नागरिकों व उद्यमियों की समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुझे विश्वास है कि यह नया कार्यालय विकास की नई पहचान बनेगा। मैं यहां के नागरिकों, किसानों, उद्यमियों, जनप्रतिनिधियों और अथॉरिटी को शुभकामनाएं देता हूं। 50 वर्ष के बाद नोएडा अथॉरिटी के पास अपना भव्य कार्यालय स्थापित होना किसी उपलब्धि से कम नहीं है।

 

अंतरराष्ट्रीय एमएसएमई दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गौतमबुद्ध नगर में नोएडा और दादरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत 2479 करोड़ से सेक्टर- 96 स्थित नोएडा प्राधिकरण के मुख्य प्रशासनिक भवन समेत 70 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। इसके साथ ही यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चतुर्थ संस्करण की कर्टेन रेजर सेरेमनी, ओडीओपी एवं विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के लाभार्थियों को टूल किट, एमएसएमई इकाइयों एवं तकनीकी उन्नयन योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी चेक, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के लाभार्थियों को चेक तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंकर्स को प्रशस्ति पत्र वितरित किए।

 

2017 से पहले गौतमबुद्ध नगर को शापित मानते थे तत्कालीन मुख्यमंत्री

 

सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्रियों के लिए गौतमबुद्ध नगर शापित माना जाता था। वे यहां आने से बचते थे। 2017 में मेरे मुख्यमंत्री बनने के बाद जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेट्रो के उद्घाटन के लिए यहां आने वाले थे, तब प्रधानमंत्री कार्यालय से संदेश आया कि किसी मंत्री को कार्यक्रम में भेज सकते हैं, क्योंकि नोएडा के बारे में मान्यता थी कि मुख्यमंत्री वहां नहीं जाते। सीएम योगी ने बताया कि मैंने स्पष्ट कहा कि मैं स्वयं नोएडा आऊंगा। मैं इन बातों को नहीं मानता। सरकार का काम जनता की समस्याओं का समाधान निकालना है।

 

बिल्डर-बायर्स विवाद का समाधान कर लाखों लोगों को दिलाया घर

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिल्डर-बायर्स विवाद की थी। हमारी सरकार ने एक वर्ष के भीतर सवा लाख बायर्स को आवास उपलब्ध कराया। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो नीति आयोग के सीईओ के नेतृत्व में हाई लेवल कमेटी बनाई गई। आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराकर तीन लाख से अधिक बायर्स को उनका आवास दिलाने में सफलता मिली। अब नोएडा अथॉरिटी का अपना भवन होने से नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। अन्नदाता किसान, उद्यमी, एसोसिएशन और आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान अब एक ही छत के नीचे होगा। अथॉरिटी यदि सभी सेवाएं ऑनलाइन कर दे तो व्यवस्था और प्रभावी होगी। इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से प्रत्येक कार्य की निगरानी की जा सकेगी।

 

जमीन लेकर निवेश नहीं करने वालों को नोटिस जारी करें

 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन लोगों ने अथॉरिटी से जमीन लेकर निवेश नहीं किया है, उन्हें समयसीमा निर्धारित कर नोटिस जारी किया जाए। फिर भी यदि निवेश नहीं किया जाता है तो नए निवेशकों को आमंत्रित किया जाए और नया लैंड बैंक तैयार किया जाए। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में बनी नोएडा अथॉरिटी और आज के समय में बहुत अंतर है। इसलिए वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने होंगे। आज उत्तर प्रदेश में कहीं भी जाइए, चारों ओर परिवर्तन दिखाई देता है। मैं 390 करोड़ रुपये की लागत से बने नोएडा अथॉरिटी के भव्य भवन के लिए बधाई देता हूं। आज लोग बदले हुए उत्तर प्रदेश को नजदीक से महसूस कर रहे हैं। नौ वर्ष पहले का उत्तर प्रदेश क्या था और आज क्या है, यह अंतर हर व्यक्ति देख सकता है।

 

जेवर एयरपोर्ट, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग बदल रहे हैं तस्वीर

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिवर्तन स्पष्ट दिखाई दे रहा है। मैं जेवर एयरपोर्ट पर उतरा हूं। वहां से घरेलू कमर्शियल उड़ानें शुरू हो चुकी हैं और जल्द ही अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी शुरू हो जाएंगी। लगभग 7000 करोड़ रुपये के निवेश से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट निर्माण की आधारशिला रखी गई है। वहीं 8200 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की भी आधारशिला रखी गई है। इससे गौतमबुद्ध नगर इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनेगा। एक समय यह प्रदेश का सबसे खतरनाक क्षेत्र माना जाता था। लोग शाम के बाद यहां आने से डरते थे। आज वहीं फिल्म सिटी, अपैरल पार्क, मेडिकल डिवाइस पार्क और बड़े-बड़े औद्योगिक निवेश हो रहे हैं। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि डबल इंजन सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिना रुके, बिना डिगे, बिना थके, बिना डरे और बिना झुके निर्णय लेने की क्षमता विकसित की।

 

एमएसएमई ही विकसित भारत की मजबूत नींव

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम किसी भी बड़े उद्योग की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा जब खुशहाल किसान, विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना और मजबूत मैन्युफैक्चरिंग पावर साथ-साथ आगे बढ़ेंगे। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में कारीगर और हस्तशिल्पी हतोत्साहित थे। न बाजार था, न डिजाइन, न तकनीक और न ही कोई सहायता। सरकार ने हाई लेवल कमेटी बनाकर ब्रांडिंग, नई डिजाइन, नई तकनीक और बाजार से जोड़ने की रणनीति बनाई।

 

ओडीओपी आज भारत की पहचान बन चुका है

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ भारत का ब्रांड बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला मानते हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां कार्य कर रही हैं, जिनमें सवा तीन करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार मिला है। कोविड काल में जब पूरी दुनिया ठहर गई थी, तब उत्तर प्रदेश का एमएसएमई सेक्टर चलता रहा। 40 लाख से अधिक श्रमिक वापस लौटे लेकिन सरकार ने उनके भोजन, राशन और रोजगार की जिम्मेदारी ली। एमएसएमई इकाइयों से अपील की गई कि वे एक-दो लोगों को रोजगार दें। परिणामस्वरूप 90 प्रतिशत से अधिक श्रमिक प्रदेश में ही रुक गए और आज विकास में योगदान दे रहे हैं।

 

यूपी आज 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्यात कर रहा

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने एमएसएमई को तकनीक, डिजाइन और कॉमन फैसिलिटी सेंटर उपलब्ध कराए। आज उत्तर प्रदेश दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के उत्पादों का निर्यात कर रहा है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर में लगातार उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय व्यापार शो आयोजित किया जा रहा है जिससे दुनिया भर के खरीदार प्रदेश के उत्पादों से जुड़ रहे हैं।  भारत के कुल मोबाइल निर्माण का 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का लगभग 60 प्रतिशत उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। यह प्रदेश की नई औद्योगिक ताकत का प्रमाण है।

 

मुख्यमंत्री ने इन लाभार्थियों को चेक, निवेशकों और बैंकर्स को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए

 

 

टीसीएस से एसके नायर 2300 करोड़ का निवेश (लगभग 30 हजार लोगों के लिए रोजगार सृजन)

 

फिजिक्स वाला के अलख पांडे 855 करोड़ का निवेश ( लगभग 3500 लोगों को रोजगार सृजन)

 

एलजी सॉफ्ट इंडिया 600 करोड़ का निवेश (500 लोगों को रोजगार सृजन)

 

डीएलएफ से 3500 करोड़ का निवेश (लगभग 10 हजार लोगों को रोजगार सृजन)

 

नरेश त्यागी व सुचित्रा त्यागी को आरक्षण पत्र दिया 

 

अंजू और मिथिलेश एसबीआई इंश्योरेंस में चिकित्सा कार्ड को दिया गया

 

सीएम युवा योजना के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले बैंक कर्मचारी शैलेंद्र कुमार, दीपक राकेश, कौशलेंद्र कुमार को सम्मान प्रति दिया

 

एमएसएमई के लाभार्थी अंकित शर्मा, आदित्य जिंदल लवली चौधरी को चेक दिया

 

संगीता वर्मा व तपन दीप, राजेश कुमार को टूल किट दी

 

 

इस अवसर पर रहे मौजूद 

 

इस अवसर पर मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', मंत्री भूपेंद्र चौधरी, राज्य मंत्री बृजेश सिंह, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा, सांसद डॉक्टर महेश शर्मा, राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र सिंह नागर, विधायक पंकज सिंह, विधायक धीरेंद्र सिंह, विधायक तेजपाल सिंह नागर, विधान परिषद सदस्य श्रीचंद्र शर्मा, विधान परिषद सदस्य नरेंद्र सिंह भाटी, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, क्षेत्रीय अध्यक्ष पश्चिम नवाब सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष अमित चौधरी, भाजपा जिलाध्यक्ष महानगर नोएडा महेश चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष गौतमबुद्ध नगर अभिषेक शर्मा आदि मौजूद रहे।

Pakistan के कराची में बड़ा आतंकी हमला, सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर धावा, 6 आतंकवादी ढेर, 4 जवानों की मौत

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पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में शनिवार रात बड़ा आतंकी हमला हुआ। आतंकवादियों ने सिंध रेंजर्स के भिट्टाई विंग मुख्यालय पर हमला बोल दिया। इसके बाद करीब 90 मिनट तक चली भीषण मुठभेड़ में 6 आतंकवादी मार गिराए गए। सुरक्षा बलों ने एक घायल आतंकवादी को जिंदा गिरफ्तार भी कर लिया। इस हमले में चार अर्धसैनिक जवानों की भी मौत हो गई।अक्टूबर 2024 के बाद कराची में इसे सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है।

धमाके के बाद चली ताबड़तोड़ गोलियां

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार शाम कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर इलाके में जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद भारी गोलीबारी शुरू हो गई। यह इलाका कई विश्वविद्यालयों और पाकिस्तान के मौसम विभाग के कार्यालय के पास स्थित है।

 

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पहले तेज धमाका सुनाई दिया और फिर लगातार गोलियों की आवाजें आने लगीं, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई।  प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार के आतंकवादियों ने रात करीब 8.30 बजे सिंध रेंजर्स के मुख्यालय पर धावा बोला।

 

आतंकवादियों और सुरक्षा बलों के बीच करीब 90 मिनट तक भीषण मुठभेड़ चली। बाद में स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (SSU), एंटी टेररिस्ट फोर्स (ATF) और रेंजर्स के संयुक्त अभियान में 6 आतंकवादी मार गिराए गए, जबकि एक घायल आतंकी को गिरफ्तार कर लिया गया।

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गाड़ी से तोड़ दिया मुख्य गेट, फेंके हैंड ग्रेनेड

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आतंकवादियों ने एक वाहन से रेंजर्स मुख्यालय के मुख्य गेट को तोड़कर परिसर में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने हैंड ग्रेनेड फेंके, जिससे कई विस्फोट हुए और पूरे परिसर में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू 1122 सिंध की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया।

 

पूरे इलाके को किया गया सील

 

हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने रेंजर्स मुख्यालय और आसपास के इलाकों को पूरी तरह घेर लिया। स्थानीय लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई, जबकि ऑपरेशन के दौरान आसपास के कुछ इलाकों में बिजली भी बाधित रही।

 

इस हमले की जिम्मेदारी जमात-उल-अहरार ने ली है। यह संगठन प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का एक उग्रवादी गुट है, जो मुख्य रूप से पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सक्रिय रहा है और सुरक्षा बलों, सरकारी अधिकारियों तथा आम नागरिकों पर कई हमले कर चुका है।

 

पाकिस्तान-अफगानिस्तान तनाव के बीच हमला

 

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। पाकिस्तान लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर आरोप लगाता रहा है कि वह TTP आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध करा रही है, जहां से वे पाकिस्तान में घुसकर हमलों को अंजाम देते हैं।

 

दूसरी ओर, पाकिस्तान की सेना भी हाल के महीनों में अफगानिस्तान के भीतर TTP के कथित ठिकानों और प्रशिक्षण शिविरों पर कई सैन्य कार्रवाई कर चुकी है। ऐसे में कराची में हुआ यह हमला क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। Edited by : Sudhir Sharma

हर विधानसभा क्षेत्र में विकास की गारंटी : CM योगी का बड़ा ऐलान, ₹6568 करोड़ की 1284 परियोजनाओं को मिली रफ्तार

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक निर्माण विभाग की मेरठ मंडल की वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना में जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं को सर्वोच्च महत्व देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सांसद एवं विधायक अपने-अपने लोकसभा तथा विधानसभा क्षेत्रों की विकास आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्तावों का प्राथमिकता क्रम निर्धारित करें, ताकि जनहित की परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति देकर समयबद्ध ढंग से क्रियान्वित किया जा सके। अब तक मेरठ मंडल में ₹6568.36 करोड़ लागत की कुल 1284 विकास परियोजनाएं अब तक चिन्हित की जा चुकी हैं।

 

शनिवार को गौतमबुद्धनगर में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने मेरठ मंडल के जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि विकास कार्यों के प्रस्ताव ऐसे क्षेत्रों के लिए तैयार किए जाएं, जहां इस प्रकार के कार्य पूर्व में नहीं हुए हैं, ताकि विकास का लाभ नए क्षेत्रों तक पहुंचे तथा उपलब्ध संसाधनों का संतुलित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित हो सके।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के विकास प्रस्तावों को कार्ययोजना में समुचित स्थान दिया जाए। कोई भी विधानसभा क्षेत्र विकास कार्यों से वंचित न रहे तथा संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित किया जाए। यदि किसी स्वीकृत परियोजना का कोई अवशेष कार्य शेष है, तो उसे भी कार्ययोजना में सम्मिलित कर शीघ्र पूर्ण कराया जाए, ताकि जनता को उसका लाभ समय पर मिल सके।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि धर्मार्थ कार्यों से संबंधित प्रस्ताव ऐसे स्थलों के लिए तैयार किए जाएं, जहां श्रद्धालुओं की संख्या अधिक हो तथा निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त एवं उपयुक्त स्थान उपलब्ध हो। ऐसे प्रस्ताव स्थानीय आवश्यकता एवं जनसुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किए जाएं।

 

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सभी कार्ययोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए, जिससे विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन बिना किसी अनावश्यक विलंब के प्रारंभ हो सके। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा समयबद्धता सुनिश्चित करते हुए जनप्रतिनिधियों के सुझावों एवं स्थानीय आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

 

बैठक में औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री श्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' जी, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री के. पी. मलिक जी, पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री नरेंद्र कुमार कश्यप जी, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री सोमेंद्र तोमर जी, लोक निर्माण विभाग के राज्य मंत्री एवं गौतमबुद्धनगर के प्रभारी मंत्री श्री बृजेश सिंह जी, जल शक्ति राज्य मंत्री श्री दिनेश खटीक जी, मेरठ मंडल के सांसदगण, विधायकगण, मंडलायुक्त मेरठ श्री भानु चंद्र गोस्वामी जी, मुख्य कार्यपालक अधिकारी नोएडा श्री कृष्णा करुणेश जी, पुलिस आयुक्त श्रीमती लक्ष्मी सिंह जी, जिलाधिकारी गौतमबुद्धनगर सुश्री मेधा रूपम सहित शासन, प्रशासन, प्राधिकरण एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। Edited by : Sudhir Sharma

Iran US conflict : मिडिल ईस्ट में फिर भड़की जंग? अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान की खुली धमकी, होर्मुज पर संकट के बादल

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मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। रविवार तड़के ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसकी नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने संयुक्त अभियान चलाकर कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया है। ईरान ने कहा कि यह कार्रवाई उसके क्षेत्र पर अमेरिका द्वारा किए गए ताजा सैन्य हमलों के जवाब में की गई है।

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अमेरिकी हमलों के जवाब में की कार्रवाई

IRGC के अनुसार, अमेरिका ने शनिवार को ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों तथा तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया था। ईरानी सरकारी मीडिया ने आरोप लगाया कि वॉशिंगटन ने होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज से जुड़े घटनाक्रम को आधार बनाकर ईरान के पांच तटीय ठिकानों पर भी हमला किया।

 

  कुवैत की सेना ने पुष्टि की है कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने कई “दुश्मन” मिसाइलों और ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने अब तक यह नहीं बताया है कि सैन्य ठिकानों को कितना नुकसान हुआ या कोई हताहत हुआ है या नहीं।

 

ईरान ने दी युद्धविराम टूटने की चेतावनी

 

IRGC ने अपने बयान में अमेरिका पर युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (Islamabad Memorandum of Understanding) का उल्लंघन जारी रहा तो सभी कूटनीतिक प्रक्रियाएं पूरी तरह ठप हो जाएंगी।

 

ईरान ने यह भी कहा कि भविष्य में जिन जहाजों को वह समझौते का उल्लंघन करते हुए पाएगा, उनके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही किसी भी “दुश्मन की आक्रामकता” का “करारा जवाब” देने की चेतावनी भी दी गई।

 

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अमेरिका ने फिर की एयर स्ट्राइक

 

ताजा तनाव उस समय और बढ़ गया जब अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर M/T Kiku पर हुए कथित हमले के बाद ईरान पर एक और सैन्य कार्रवाई की। लगातार दूसरे दिन अमेरिकी सेना ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से जुड़े घटनाक्रम के जवाब में एयर स्ट्राइक की।

 

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने युद्धविराम का पालन नहीं किया और एकतरफा हमला करने वाले ड्रोन से M/T Kiku को निशाना बनाया, जिसमें 20 लाख से अधिक बैरल कच्चा तेल लदा था।

 

इधर, दक्षिणी ईरान में भी कई धमाकों की खबरें सामने आई हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित सिरिक द्वीप पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि अमेरिकी प्रोजेक्टाइल ने क़ेश्म द्वीप के एक गांव को भी निशाना बनाया।

 

ट्रंप ने दी और बड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

 

हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि ईरान युद्धविराम का उल्लंघन जारी रखता है तो अमेरिका “सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह अंजाम देने” के लिए मजबूर हो सकता है।

 

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि अमेरिका ने युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के जवाब में ईरान के मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज तथा तटीय रडार ठिकानों पर हमला किया है। उन्होंने कहा कि यदि हालात नहीं सुधरे तो ईरान के खिलाफ और भी कठोर सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।

 

लगातार दूसरे दिन सैन्य टकराव

 

शनिवार की कार्रवाई से पहले अमेरिका ने गुरुवार को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे मालवाहक जहाज M/V Ever Lovely पर हुए हमले के जवाब में भी ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया था। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रहे जवाबी हमलों ने पूरे मध्य पूर्व में तनाव को बेहद बढ़ा दिया है। एक्पर्ट्‍स के मुताबिक सिर्फ 2 सप्ताह पहले हुआ नाजुक युद्धविराम अब पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच सकता है, जिससे क्षेत्र में व्यापक संघर्ष का खतरा और बढ़ गया है। Edited by : Sudhir Sharma

CM डॉ. मोहन यादव पहुंचे हिल स्टेशन कुकरू, ग्रामीणों और महिलाओं से संवाद कर जाना विकास का हाल

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 जून को दो दिन के प्रवास के लिए बैतूल के सुप्रसिद्ध हिल स्टेशन कुकरू पहुंचे। उन्होंने यहां कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने समूह द्वारा तैयार किए गए मावा और रबड़ी का स्वाद लिया तथा महिलाओं से आत्मीय संवाद कर उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने महिलाओं से समूह की गतिविधियों, आय के स्रोत तथा शासकीय योजनाओं से प्राप्त सहयोग की जानकारी ली और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए प्रोत्साहित किया। इसके अलावा उन्होंने कुकरू से सिपना सनसेट पॉइंट भी देखा। वे यहां के प्राकृतिक वातारवरण में खो से गए। 

 

मुख्यमंत्री डॉ यादव ने दुकान में उपलब्ध मावा  बनाने की प्रोसेस को देखा और महिलाओं से आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे प्रयासों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। इस अवसर पर कृष्णा आजीविका स्व-सहायता समूह कुकरू की अध्यक्ष शोभा गायने ने बताया कि समूह को विभिन्न योजनाओं के तहत सीसीएल से 3 लाख रुपये, सीआईएफ से 1 लाख रुपये, आरएफ से 11 हजार रुपये तथा पीएमएफएमई योजना के अंतर्गत 40 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। उन्होंने बताया कि समूह में 11 सदस्य कार्यरत हैं। आजीविका मिशन से मावा बनाने की स्वचलित मशीन क्रय की गई। इससे उन्हें लगभग 25 हजार रुपए की मासिक आय प्राप्त हो रही है। समूह की सदस्य महिलाओं ने मुख्यमंत्री को बताया कि वे पशुपालन, दुग्ध उत्पादन, मावा, रबड़ी एवं श्रीखंड निर्माण के साथ-साथ कृषि कार्य भी कर रही हैं। इन गतिविधियों के माध्यम से समूह की महिलाओं को लगभग 15 से 18 हजार की मासिक आय प्राप्त हो रही है। जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। 

 

सीएम डॉ. मोहन ने दिए ये निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कुकरू का भ्रमण भी किया। इस दौरान उन्होंने कुकरू स्थित सिपना सनसेट पॉइंट पर पहुंचकर सूर्यास्त के मनोहारी एवं अलौकिक दृश्य का अवलोकन किया तथा क्षेत्र की अनुपम प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लिया। वे कुकरू की रमणीय पर्वत श्रृंखलाओं, हरित वनों और प्राकृतिक वातावरण से अभिभूत नजर आए। उन्होंने कहा कि कुकरू प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में विकसित होने की अपार संभावनाएं रखता है। उन्होंने क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्राकृतिक संपदा से समृद्ध कुकरू न केवल पर्यटकों को आकर्षित करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेगा। Edited by : Sudhir Sharma

अफगानिस्तान में 6.2 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, दिल्ली-NCR तक महसूस हुए झटके

शनिवार शाम अफगानिस्तान में आए 6.2 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने पूरे क्षेत्र को हिला दिया। इसके झटके पाकिस्तान, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली-एनसीआर तक महसूस किए गए, जिससे लोगों में दहशत फैल गई।

 राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (National Centre for Seismology) के अनुसार, यह भूकंप शाम 7:04 बजे (IST) आया। इसका केंद्र अफगानिस्तान में 215 किलोमीटर की गहराई पर था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (United States Geological Survey) के मुताबिक, भूकंप का केंद्र उत्तर-पूर्वी अफगानिस्तान के जुर्म (Jurm) से लगभग 43 किलोमीटर दक्षिण में था।

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कई देशों में महसूस हुए झटके

 

भूकंप के झटके अफगानिस्तान के कई इलाकों—काबुल, बल्ख, बदख्शान, नंगरहार और खोस्त—में महसूस किए गए। काबुल में कई इमारतें हिल गईं और लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक इमारत की अंदरूनी दीवार में बड़ी दरार भी देखी गई। भारत में यह झटका दिल्ली-NCR और जम्मू-कश्मीर तक महसूस किया गया, जबकि पाकिस्तान के कई हिस्सों में भी कंपन दर्ज किया गया।

 

अफगानिस्तान भूकंप के लिए संवेदनशील क्षेत्र

 

अफगानिस्तान, विशेषकर हिंदूकुश पर्वत श्रृंखला, भूकंप के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है, जहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेट्स आपस में टकराती हैं।

 

हाल की बड़ी भूकंपीय घटनाएं

अप्रैल में बदख्शान में 5.8 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसमें 12 लोगों की मौत हुई थी। अगस्त 2025 में 6.0 तीव्रता के भूकंप ने 2,200 से अधिक लोगों की जान ले ली थी।  पाकिस्तान के बलूचिस्तान में भी लगातार भूकंप इसी बीच पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में शुक्रवार से अब तक कम से कम 5 भूकंप दर्ज किए गए हैं। शनिवार सुबह बर्खान और आसपास के क्षेत्रों में ताजा झटका आया।

 

अधिकारियों के अनुसार, इन भूकंपों में 5 लोग घायल हुए और कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। झटकों की तीव्रता 4.3 से 5.3 के बीच रही। पाकिस्तान मौसम विभाग के मुताबिक यह गतिविधि फॉल्ट लाइन पर हो रही है और वैश्विक भूकंपीय गतिविधियों से भी जुड़ी हो सकती है।  Edited by : Sudhir Sharma

Operation Sindoor में शहीद 6 जवानों के नाम जारी होने के बाद राजनीतिक घमासान तेज, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान पर विपक्ष का हमला

operation sindoor

सरकार द्वारा पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 6 सैन्यकर्मियों के नाम सार्वजनिक किए जाने के बाद सियासी विवाद गहरा गया है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बयान को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है।

 

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पर शहीदों के सम्मान में इन छह जवानों के नाम अंकित किए गए हैं। इनमें 5 सेना (Army) और 1 वायुसेना (IAF) के जवान शामिल हैं। यह पहली बार है जब ऑपरेशन के दौरान हुए सैन्य नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया गया है। कांग्रेस ने राजनाथ सिंह के पुराने बयान को साझा करते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने देश को गुमराह किया और शहादत को छिपाने की कोशिश की। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने संसद और जनता के सामने गलत जानकारी प्रस्तुत की।

इसके जवाब में रक्षा मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि विपक्ष बयान के संदर्भ को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप अधूरी और भ्रामक है, जिससे गलत धारणा बनाई जा रही है कि ऑपरेशन में कोई जवान शहीद नहीं हुआ।

 

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि रक्षा मंत्री का बयान उस समय चल रही “भ्रामक कथा” के जवाब में था, जिसमें कहा जा रहा था कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय पायलट मारे गए थे। मंत्री ने इसी गलत सूचना को खारिज किया था। संसद में 28 जुलाई को चर्चा के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा था कि ऑपरेशन में किसी भी भारतीय सैनिक को नुकसान नहीं पहुंचा। बाद में विपक्ष ने इसी बयान पर सवाल उठाए।

कांग्रेस नेताओं मनीष तिवारी और पवन खेड़ा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि या तो रक्षा मंत्री को तथ्यों की जानकारी नहीं थी या फिर उन्होंने जानबूझकर संसद को गुमराह किया। सरकार ने अब पहली बार आधिकारिक रूप से शहीद हुए 6 जवानों के नाम जारी किए हैं, जिनमें विभिन्न रेजिमेंट और वायुसेना के कर्मी शामिल हैं। इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट और दीवार पर अंकित किया गया है। Edited by : Sudhir Sharma

अयोध्या राम मंदिर घोटाला, करोड़ों की चोरी से लेकर इस्तीफों और गिरफ्तारियों तक की पूरी टाइमलाइन

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft

Ayodhya Ram Mandir Scam: अयोध्या के भव्य राम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। रूटीन ऑडिट में पकड़ी गई इस वित्तीय हेराफेरी के बाद यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी (SIT) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस महाघोटाले में जहां एक तरफ ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा को इस्तीफा देना पड़ा है, वहीं 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

क्या है पूरा मामला?

यह महाघोटाला तब सामने आया जब रूटीन ऑडिट के दौरान दान पेटियों से निकली राशि और बैंक में जमा रकम में भारी अंतर पाया गया। जांच में सामने आया कि मंदिर के कर्मचारियों, पैसों की गिनती करने वाले लोगों और पर्यवेक्षकों (सुपरवाइजरों) ने मिलकर दान में आए नकद, जेवरात और चांदी के आभूषणों की सुनियोजित तरीके से हेराफेरी की। ALSO READ: अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की खुलती जा रहीं परतें, SIT ने सौंपी रिपोर्ट, चंपत की भूमिका संदिग्ध

दिन-प्रतिदिन की कार्रवाई

6-7 जून 2026 : आंतरिक खुलासा व सार्वजनिक आरोप : दान पेटियों से करोड़ों रुपए गायब होने की आंतरिक आशंका सामने आई। सपा नेता तेज नारायण पांडेय ने 7 करोड़ से अधिक के गबन का सार्वजनिक आरोप लगाया।

 

8-9 जून 2026 : PM से CBI जांच की मांग : सोशल मीडिया पर मामला गरमाने के बाद बीजेपी नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की। पीएमओ (PMO) ने राम मंदिर ट्रस्ट से तत्काल रिपोर्ट मांगी। इसी दिन चंपत राय ने आरोपों को खारिज किया।

 

10-11 जून 2026 : बैठकों का दौर व पुराना वीडियो लीक : मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे और 4 घंटे लंबी बैठक की। अगले ही दिन पूर्व लेखापाल महिपाल सिंह का वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि 2021-2022 में भी चोरी पकड़ी गई थी, जिसके सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए। ALSO READ: हे राम! चढ़ावा चोरी के बाद अब 40% कमीशन के आरोप से गरमाई अयोध्या

 

13 जून 2026 :  मुख्यमंत्री का 'SIT' एक्शन : मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने त्वरित SIT जांच का आदेश दिया और 15 दिनों में रिपोर्ट सौंपने को कहा।

 

14 से 20 जून 2026 : SIT की सघन मैराथन जांच : एसआईटी ने मंदिर परिसर, सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय रिकॉर्ड को कब्जे में लिया। महासचिव चंपत राय, गोपाल राय और डॉ. अनिल मिश्रा से कई-कई घंटों तक तीखे सवाल-जवाब किए गए। बैंक अधिकारियों, कैशियरों और नोट गिनने वाली निजी एजेंसी के प्रतिनिधियों से पूछताछ हुई। सभी संदिग्धों के बैंक खातों को खंगाला गया।

 

CM योगी का बड़ा बयान : अयोध्या दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा— जहां 500 वर्षों का इंतजार किया, वहां केवल 15 दिनों का और इंतजार कर लो, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

 

23 जून 2026 : गृह विभाग को रिपोर्ट : एसआइटी ने 15 पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपी, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं और चोरी की पुष्टि करते हुए FIR दर्ज करने की सिफारिश की गई।

 

25 जून 2026 : आधिकारिक FIR दर्ज : एसआईटी की रिपोर्ट के बाद ट्रस्ट के कृष्ण मोहन की शिकायत पर रामजन्मभूमि थाने में धोखाधड़ी और चोरी की धाराओं में पहली आधिकारिक FIR दर्ज की गई।

 

26 जून 2026 : पुलिस एक्शन और इस्तीफे : पुलिस ने परिसर के भीतर जाकर जांच की। इसी दिन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, जिसकी पुष्टि कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पत्र के जरिए की (हालांकि FIR में इन दोनों का नाम शामिल नहीं है)।

SIT जांच रिपोर्ट के 4 सबसे बड़े खुलासे

70 से अधिक बार संदिग्ध गतिविधियां : सुरक्षा के कड़े घेरे के बावजूद मंदिर के भीतर सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में 70 से अधिक बार संदिग्ध हरकतें रिकॉर्ड पाई गईं।

 

2020 की ऑडिट रिपोर्ट में अंदेशा : जांच में सामने आया कि 2020 की ऑडिट रिपोर्ट में भी उचित दान रिकॉर्ड न होने, स्टॉक रजिस्टर मेंटेन न करने और वित्तीय प्रबंधन कमजोर होने जैसी गंभीर खामियां उजागर की गई थीं, जिन्हें नजरअंदाज किया गया।

 

भारी मात्रा में कैश व चांदी गायब : एसआईटी की पूछताछ में नकद पैसों के साथ-साथ कीमती जेवरात और 60 किलो चांदी के आभूषण गायब होने का आधिकारिक खुलासा हुआ।

 

कड़े सुरक्षा उपाय की सिफारिश : एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में दान की पारदर्शिता बढ़ाने, स्टॉक का सही रिकॉर्ड रखने और सीसीटीवी बैकअप क्षमता को 45 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन करने की मजबूत सिफारिश की है।

गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों के नाम

पुलिस ने मंदिर प्रबंधन और नोटों की गिनती करने वाले 8 नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनके पास से चोरी की गई रकम भी बरामद हुई है। इनमें लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, रमाशंकर यादव (टिन्नू यादव), मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, अविनाश शुक्ला, सुभाष, करुणेश शामिल हैं। साथ ही आगे की कार्रवाई और पुलिस अनुसंधान वर्तमान में जारी है।

Edited by: Vrijendra Singh Jhala

 

बॉलीवुड फ़िल्में जोड़ रही हैं भारत और लैटिन अमेरिका को

Bollywood in Latin America: अपने आप को हर क्षेत्र में बाकी दुनिया से श्रेष्ठ समझने का गर्व करने वाले यूरोप-अमेरिका के फ़िल्म समीक्षक भारतीय फ़िल्मों को गंभरता से नहीं लेते— बहुत अतिरंजित और छिछली मान कर टाल देते हैं। लेकिन, इधर कुछ समय से देखने में आ रहा है कि मुख्यतः लैटिन अमेरिकी देशों की आम जनता भारतीय फ़िल्मों की रसिक बन रही है।

 

मैक्सिको, ब्राज़ील, कोलंबिया, अर्जेंटीना और चिली जैसे दोशों में— जो वास्तव में स्पेनिश भाषी देश हैं— लाखों लोग स्पेनी सबटाइटल वाली भारतीय, मुख्यतः हिंदी फ़िल्में बड़े चाव से देखने लगे हैं। उन्हें अमेरिकन शो या अपने ही देशों के फ़िल्मी ड्रामों से अधिक बॉलीवुड लुभाने लगा है। भारतीय कथावस्तु (कंटेन्ट) वाली फ़िल्में इन देशों में नेटफ्लिक्स पर कई-कई सप्ताहों तक पहले नंबर पर रहती हैं। लगातार दो साल से यही हो रहा है। ब्राज़ील के साओ पाउलो शहर में कोई लड़की टिकटॉक पर बॉलीवुड डांस करने लगती है, तो कोलंबिया की राजधानी बोगोटा में कोई लड़का हिंदी में “आई लव यू” कहना सीखने लगता है। मेक्सिको सिटी में कोई परिवार किसी बॉलीवुड सीन से इतना भाव-विह्वल हो जाता है कि बार-बार रोने-सिसकने लगता है!

भारत से लैटिन अमेरिका 15,000 किलोमीटर दूर है

प्रश्न यह है कि ज़्यादातर लैटिन अमेरिकी लोगों ने 15,000 किलोमीटर दूर की जिन भारतीय फ़िल्मों को कभी देखा-सुना ही नहीं था, वे फ़िल्में उनके देशों में इतनी लोकप्रिय कैसे हो गईं? मुंबई में रची-बनी कहानी देखकर कोलंबिया में लोग बहुत भावुक क्यों हो जाते हैं? यह कोई सामान्य बात नहीं हो सकती! दुनिया “ग्लोबल कंटेंट” की बात करती है। लैटिन अमेरिका में मुख्यतः हॉलीवुड की, कोरियन ड्रामा की या फिर स्पेनिश फ़िल्में चलती रही हैं।

 

भारत और उसकी फ़िल्में पश्चिमी देशों में चर्चा का विषय कभी होती ही नहीं थीं। लेकिन, 2021 और 2024 के बीच हवा का रुख बदला! हुआ यह है कि भारतीय फ़िल्में लैटिन अमेरिकी देशों में नेटफ्लिक्स के “टॉप 10 चार्ट” पर पहुँचने लगीं। एक या दो बार नहीं, लगातार— हफ़्ते-दर-हफ़्ते! RRR, बाहुबली, बैटमैन सीरीज़, स्कैम 1992 और दिल्ली क्राइम जैसी फ़िल्में लोग सिर्फ़ देख ही नहीं रहे थे, उनके बारे में खूब बातें भी कर रहे थे; अनजान लोगों को इन फ़िल्मों के बारे में ऑनलाइन बता रहे थे। अतः दर्शकों की बढ़ती हुई संख्या को देख कर, नेटफ्लिक्स ने पहले से कहीं अधिक और तेज़ी से भारतीय फ़िल्में दिखाना शुरू कर दिया। स्वाभाविक है कि उसके चार्ट में सबसे अधिक बॉलीवुड की हिंदी फ़िल्में ही हुआ करती हैं।

भारत में हर साल 1500 से ज़्यादा फ़िल्में

वैसे तो, भारत में हमेशा ही फ़िल्में बनती रही हैं— दुनिया के किसी भी देश से अधिक; हिंदी में ही नहीं, तमिल, तेलुगु, मलयालम, बंगला आदि में भी— हर साल 1500 से ज़्यादा फ़िल्में। लेकिन, उनके दर्शक स्वयं भारतवासी और विदेशों में रहने वाले प्रवासी भारतीय ही हुआ करते थे। ये फ़िल्में प्यार-मोहब्बत, जोश-ख़रोश, मार-धाड़, गीत-संगीत, नाच-गाने, रोने-धोने और भावुकता से भरपूर होती हैं। मानवीयता, कर्तव्यबोध, परिवार के प्रति समर्पण और न्याय की विजय जैसे मूल्यों की भी कमी नहीं होती। कहानियाँ ऐसी कि हीरो हर असंभव को संभव बना देता है। विलेन को वही प्रतिफल मिलता है, जिसके वह लायक है। यूरोपीय और अमेरिकी समीक्षक इसे बहुत घिसा-पिटा, पुरातनपंथी और उबाऊ बताते हैं, जबकि स्पेनिश भाषी लैटिन अमेरिकी दर्शक उनमें अपनी ही छवि प्रतिबिंबित होती देखते हैं।

 

भारतीय या बॉलीवुड फ़िल्मों में अब भी कोई मौलिक नवीनता भले न मिले, तब भी उन्हें जिस तरह से गीत-संगीत, नाच-गानों और अंतर्मन झकझोर देने या मन मोह लेने वाले अभिनयों से सजा कर पेश किया जाता है, वह दुनिया में सबसे अलग और अनूठा है। इसीलिए, भारत से बाहर वास्तव में अब तक केवल दो प्रकार के दर्शक ही इन फ़िल्मों को देख रहे थे— विदेश में रहने वाले भारतीय और अफ्रीका तथा मध्य-पूर्व के कुछ ऐसे हिस्सों के लोग, जिनके बीच बॉलीवुड ने 1960 के दशक से अपनी पैठ बना ली थी। लैटिन अमेरिका में लगभग कुछ भी नहीं था। वहां बदलाव आया है नेटफ्लिक्स की बलिहारी से।

नेटफ्लिक्स को हॉलीवुड महंगा पड़ रहा था

नेटफ्लिक्स ने 2016 और 2020 के बीच नए देशों में तेज़ी से अपना विस्तार किया। उसे ऐसे कंटेंट (कथावस्तु) वाली फ़िल्मों की ज़रूरत थी, जो बहुत सस्ती, तेज़ी से सुलभ और ग्लोबल (वैश्विक) रुचि की हों— हॉलीवुड उसे बहुत महंगा पड़ रहा था। हर देश में स्थानीय पसंद को ध्यान में रख कर फ़िल्में बनाने में काफ़ी समय लगता। दूसरी ओर, भारत में ठीक-ठाक बनी हज़ारों तैयार फ़िल्में हर समय उपलब्ध थीं। वे लैटिन अमेरिकी देशों के लोगों के दिलो-दिमाग को छूने की दृष्टि से भी न केवल दिलचस्प थीं, हॉलीवुड फ़िल्मों की लाइसेंसिंग फ़ीस की अपेक्षा बहुत सस्ती भी थीं।

 

अतः नेटफ्लिक्स ने थोक के भाव में भारतीय फ़िल्में ख़रीदना शुरू किया। पहले तो यह एक प्रयोग-भर ही था। कुछ चुनी हुई फ़िल्में ही ख़रीदी गईं। लेकिन, बाद में जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह अनपेक्षित था। वे लैटिन अमेरिकी दर्शक, जो देर रात ऑनलाइन नेटफ्लिक्स ब्राउज़ कर रहे थे, उन्होंने स्क्रीन पर भारतीय फ़िल्मों के नाम देखते ही— जिज्ञासा या उत्सुकता-वश— उन पर क्लिक करना शुरू कर दिया। उन्हें कुछ भी पता नहीं था। बस, क्लिक किया और फ़िल्म देखने में खो गए।

 

दर्शकों की संख्या बढ़ती ही गई

समय के साथ, भारतीय फ़िल्मों के लैटिन अमेरिकी दर्शकों की संख्या तेज़ी से बढ़ती ही गई। नेटफ्लिक्स उनकी संख्या और पसंद आदि दर्ज करने लगा। उसका “एल्गोरिदम” लैटिन अमेरिकी यूज़रों को भारतीय फ़िल्में देखने की सलाह देने लगा। हर दिन ढेर सारे क्लिक होने लगे। भारतीय फ़िल्मों से जुड़ने का कारण धाँसू फ़िल्मी “एक्शन” नहीं होते। गीत-संगीत या नाच-गाने भी उतने बड़े कारण नहीं होते, जितने बड़े— भारतीयों के समान ही— लैटिन अमेरिकियों के भी अपने पारंपरिक पारिवारिक रिश्ते होते हैं। वे भी अपने प्रियजनों के लिए सब कुछ करने की उत्कट कामना और दृढ़ निश्चय की प्रबल भावना से ओत-प्रोत होते हैं।

 

इस रुझान पर शोध करने वालों ने पाया कि भारतीय फ़िल्मों के लैटिन अमेरिकी दर्शकों की टिप्पणियों में जो एक बात-बार-बार मिलती है, वह है 50 लाख की जनसंख्या वाले मेक्सिको के गुआदालाख़ारा शहर की एक महिला का यह कहना कि “भारतीय पारिवारिवाक ड्रामा देखना स्क्रीन पर अपने ही परिवार को देखने जैसा लगा।” ब्राज़ील के शहर रियो दे जनेइरो के एक आदमी ने बताया कि एक हिंदी फ़िल्म में माँ की भूमिका उसे अपनी माँ की इतनी याद दिलाने लगी, कि फ़िल्म ख़त्म होते ही उसने अपनी माँ को फ़ोन किया। कोई फ़िल्म— वह भी बहुत दूर के देश भारत की कोई फिल्म ऐसा भी जुड़ाव प्रेरित कर सकती है— मनोरंजन की दुनिया में किसी ने कभी इसकी कल्पना ही नहीं की होगी। यह तो दो सर्वथा पृथक संस्कृतियों के सदियों बाद मिलन जैसा है। 

भारतीय फ़िल्मों का भावुकता पक्ष

भारतीय सिनेमा सदा से बहुत भावप्रवण रहा है। एक-दूसरे के सामने रोना-धोना, जब शब्द काफी न लगें तो गाने लगना और परिवार के भले के लिए जान देना उसकी पहचान रहा है। हॉलीवुड में इसे पुरातन, अतिरंजित और भावुकता-भरा माना जाता है। लेकिन, लैटिन अमेरिका में भावुकता-भरी कहानी सुनाना-सुनाना दुर्बलता नहीं है। लैटिन अमेरिकन सोप ऑपेरा, जो दशकों से टेलीविज़न पर छाए हुए हैं, ठीक इसी ढर्रे पर बने होते हैं— परम प्रेम, परम धोखा, परम त्याग— और अंत में सब- कुछ भुला कर पुनर्मिलन! लैटिन अमेरिकी दर्शकों ने जब पहली बार भारतीय फ़िल्में देखीं, तो उनमें घुली भावुकता उन्हें पूरी तरह से स्वाभाविक लगी। ऐसी कहानियों के वे आदी थे।

 

अधिकतर हॉलीवुड फ़िल्मों और सीरीज़ों में परिवार बहुत जटिलता-भरे होते हैं — माता है तो पिता नहीं, पिता है तो माता नहीं। भाई-बहन हैं तो उनमें पटती नहीं। हीरो घर से भाग जाता है। आदमी से ज्यादा कुत्ते-बिल्ली की पूछताछ है। भारतीय सिनेमा में परिवार ही हर चीज़ का केंद्र है। हीरो घर से भागता नहीं, घर बचाने के लिए लड़ता है। मां को पवित्र माना जाता है, पिता का आदर-सम्मना किया जाता है— भले ही माता-पिता किसी मामले में ग़लत ही क्यों न हों। भाई एक-दूसरे के लिए जान की बाज़ी लगा देते हैं। बहनों की हर क़ीमत पर रक्षा की जाती है। 

परिवार के प्रति समर्पण बार-बार खींचता है

यही सब लैटिन अमेरिकी संस्कृति का भी अंग है। परिवार के प्रति निष्ठा वहां भी सबसे मूल्यवान सामाजिक गुणों में से एक है। मेक्सिको सिटी में एक मीडिया रिसर्च ग्रुप के 2023 के अध्ययन में पाया गया कि लैटिन अमेरिकी दर्शकों ने, खासकर परिवार के प्रति समर्पण को वह मुख्य कारण बताया, जिससे प्रभावित होकर वे भारतीय फ़िल्मों के पास बार-बार वापस आते हैं।

 

लैटिन अमेरिकी फ़िल्म प्रेमियों को यह बात भी बहुत सुहाती है कि भारतीय फ़िल्मों में दीन-हीन और अभागे, या छोटे-मोटे गांवों के ग़रीब लड़के भी अपने कामों से कई बार कथा-कहानी बन जाते हैं। कोई लड़की अपने समाज को चुनौती देती है और जीत जाती है। कोई ईमानदार आदमी भ्रष्ट व्यवस्था से अकेले ही लड़ बैठता है और एक उदाहरण बन जाता है। दूसरी ओर, लैटिन अमेरिका में सामाजिक असामानता कहीं ज़्यादा और सरकारी विभागों पर लोगों का विश्वास उतना ही कम है।

 

हिंदी फिल्मों का हीरो जब एक भ्रष्ट राजनेता से कहता है कि वह उसे आगे बढ़ने से रोक नहीं सकता, तब कोलंबिया और मेक्सिको में यह सीन देख रहे लगों को लगता है कि वे वास्तव में कुछ ऐसा देख रहे हैं, जिसे वे अपने देशों में भी वास्विकता बनते देखना चाहते हैं।

भारतीय सभ्यता-संस्कृति का भी प्रचार हो रहा है

नेटफ्लिक्स, लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय फ़िल्में दिखा कर निश्चित रूप से खूब कमाई कर रहा है। पर, उसकी कमाई के बहाने से इन देशों में पहली बार भारत की सभ्यता और संस्कृति का प्रचार भी हो रहा है। वहां के दर्शकों की पसंद को जानने के लिए नेटफ्लिक्स ने जो “एल्गोरिदम” बनाया है, वह उन्हें बताया करता है कि किस फ़िल्म के दर्शक को आगे क्या पसंद आ सकता है। अगली बार, स्क्रीन पर उसी प्रकार की फ़िल्मों के नाम और नमूने, नए सुझाव के तौर पर दिखाई पड़ते हैं। दर्शक को बस केवल चुनना होता है।

 

उदाहरण के लिए, चिली की राजधानी सांतियागो में यदि किसी ने अभी-अभी एक मैक्सिकन ड्रामा देखा था, तो उसे अगली सुबह अपनी प्रथम पसंद के तौर पर नेटफ्लिक्स की किसी भारतीय फिल्म का नाम मिल सकता है। उसने न तो उस फ़िल्म को कभी खोजा था और न कभी उसका नाम सुना था, लेकिन उसने तब भी क्लिक किया और फ़िल्म चालू हो गई। नेटफ्लिक्स के एल्गोरिदम ने ही दर्शकों को भारतीय सिनेमा तक पहुंचाया और उससे परिचित कराया। इन नव-परिचितों ने टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया के माध्य से अपने मित्रों-परिचितों को अपना अनुभव बताया। इस तरह, एक के बाद एक, अनेक लैटिन अमेरिकी भारतीय फ़िल्मों के रसिया बनते गए।

भाषा कोई बाधा नहीं

सबसे बड़ा कमाल तो यह है कि भारतीय फ़िल्मों की लोकप्रियता में भाषा कोई बाधा नहीं बनी। लैटिन अमेरिकी दर्शक स्पेनिश सबटाइटल के साथ भारतीय, विशेषकर हिंदी फ़िल्में घंटों देखने के आदी हो गए लगते हैं। उनकी जो पीढ़ी सबटाइटल के साथ विदेशी फ़िल्में देखकर बड़ी हुई है, उसके लिए यदि कहानी अच्छी है, तो भाषा मायने नहीं रखती। मायने रखती है दर्शक की अपनी संवेदनशीलता।

 

नेटफ्लिक्स ने भारतीय फ़िल्मों को अब “फ़िलर” (खाली जगह भरने की युक्ति) मानना छोड़ दिया है। एक रणनिति के तौर पर अब उसने— विशेषकर लैटिन अमेरिकी दर्शकों को ध्यान में रखकर—मौलिक किस्म की फ़िल्मों की सीरीज़ दिखाना शुरू किया है। ऐसी कहानियों वाली फिल्मों को चुना जाने लगा है, जो भारतीय और लैटिन अमेरिकी संस्कृतियों को जोड़ती हों। घिसी-पिटी परंपराओं को नकारती हों। फ़िल्मों की स्पेनी सबटाइटलों की गुणवत्ता को और अधिक सुधारने के लिए ऐसे अनुवादकों पर ख़र्च किया जा रहा है, जो न केवल स्पेन की स्पेनिश समझते हैं, अपितु मेक्सिकन, कोलंबियन और ब्राज़ीलियन लहज़े वाली स्पेनिश की विशेषताओं से भी सुपरिचित हैं।

नेटफ्लिक्स ने प्रयोग किया, परिदृश्य तेज़ी से बदला

भारतीय फिल्म निर्माताओं ने दशकों तक पश्चिमी देशों में— विशेषकर अमेरिका और ब्रिटेन में— पैर जमाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बहुत थोड़ी ही सफलता मिली। लैटिन अमेरिका उनके ध्यान में नहीं था। लेकिन, जब नेटफ्लिक्स ने यही प्रयोग किया, तो परिदृश्य तेज़ी से बदल गया। भारतीय फ़िल्मी सितारों ने स्पेनिश भाषा में इंटरव्यू तक देना शुरू कर दिया। नेटफ्लिक्स ने इसके लिए पहले लैटिन अमेरिकी सोशल मीडिया प्रेमियों के बीच अपनी पहुँच बनाई। उदाहरण के लिए, लैटिन अमेरिकी दर्शकों के लिए RRR के अभिनेता राम चरण की स्पेनी भाषा में एक छोटी-सी “वीडियो ग्रीटिंग” पोस्ट की। उस पर कुछ ही घंटों में लाखों लोगों की प्रतिक्रिय मिली।

 

नेटफ्लिक्स की इस अनोखी सफलता से पता चलता है कि भारतीय सिनेमा के लैटिन अमेरिकी रसिया निष्क्रिय उपभोक्ता नहीं हैं। वे यूट्यूब (YouTube) चैनलों पर बॉलीवुड फिल्मों की समीक्षा तक करने लगे हैं। हिंदी फिल्मों पर चर्चा करने वाली लाखों “फैन कम्युनिटीज़” बन गई हैं, जिन में लैटिन अमेरिका के हर देश के सदस्य हैं। अर्जेंटीना में एक महिला ने अपने शहर में “बॉलीवुड डांस क्लास” शुरू की है। वह सोच रही थी कि बहुत हुआ तो शायद 10-20 लोग सीखने आयेंगे, लेकिन पहले महीने में ही 200 से ज़्यादा लोगों ने आवेदन किया। ब्राज़ील में कुछ विश्वविद्यालयों के छात्र हिंदी सीख रहे हैं, क्योंकि वे हिंदी फ़िल्में को बिना सबटाइटल के हिंदी में ही देखना चाहते हैं।

भारतीय रेस्त्रां वालों का धंधा भी बढ़ा

लैटिन अमेरिकी देशों के बड़े शहरों में भारतीय रेस्त्रां भी पहली बार ग्राहकों की संख्या में अच्छी- खासी बढ़ोतरी देख रहे हैं। नए ग्राहक, नेटफ्लिक्स पर की किसी भारतीय फ़िल्म में दिखाई पड़े व्यंजनों को जानने और आज़माने के लिए आते रहते हैं। कहा जा सकता है कि नेटफ्लिक्स द्वारा लैटिन अमेरिका में दिखाई जा रही भारतीय फ़िल्मों के माध्यम से वहाँ के समाजों में एक नया सांस्कृतिक बदलाव आ रहा है।

 

मार्च 2023 में, तेलुगु फ़िल्म RRR के गाने “नाटु—नाटु” को ऑस्कर पुरस्कार मिलना लैटिन अमेरिका में लाखों लोगों ने लाइव देखा; इसलिए कि वे इस फ़िल्म और गाने को पहले से ही देख-सुन और शेयर कर चुके थे, खूब नाच-गा चुके थे। ऐसा लगता था, मानो कथा-कहानियों की रसिक दुनिया की दो महान संस्कृतियां एक-दूसरे को ढूँढ रही थीं, और अब उनका मिलन हो रहा है।
 

जानकार कहते हैं कि भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर, स्पेनिश भाषी लैटिन अमेरिकी देशों में भारतीय — बल्कि मुख्यतः हिंदी सिनेमा देखने की लहर— इसलिए नहीं पैदा हो गई कि भारतीय फिल्में हर दृष्टि से परिपूर्ण या असाधारण होती हैं। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि दो संसकृतियों ने एक-दूसरे की कथा-कहानियों को देखा-सुना, जाना-पहचाना और पाया कि उनके बीच कई समानताएँ हैं। एक बार जब ऐसी जान-पहचान जड़ पकड़ लेती है, तो कोई एल्गोरिदम इसे रोक नहीं सकता। हो सकता है कि लैटिन अमेरिका पर बॉलीवुड का जादू अभी लंबे समय तक चले।

सरकारी स्कूलों में बड़ा बदलाव! योगी सरकार ने गुणवत्ता सुधार के लिए तेज की अकादमिक टीम की तैनाती

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार विद्यालयी शिक्षा में गुणवत्ता आधारित परिवर्तन की दिशा में मानव संसाधनों का सबसे व्यापक अकादमिक ढांचा तैयार कर रही है। प्रदेश सरकार का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में स्थायी बदलाव केवल विद्यालय भवनों, स्मार्ट क्लास या आधारभूत सुविधाओं से नहीं, बल्कि प्रशिक्षित, सक्षम और जवाबदेह शैक्षणिक नेतृत्व से संभव है।

इसी नीति के अनुरूप एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन), जिला समन्वयक (निपुण), स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी), ईसीसीई एजुकेटर तथा विशेष शिक्षकों की नियुक्तियों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया है। अधिकांश जनपदों में चयन प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, जबकि कई श्रेणियों में नियुक्तियां पूरी कर विद्यालयों तक अकादमिक सहयोग तंत्र को मजबूत बनाया जा चुका है। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, निपुण भारत मिशन और प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा के लक्ष्यों को धरातल पर उतारने की दिशा में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है।

 

एआरपी बन रहे शिक्षा सुधार की नई ताकत

विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने एआरपी व्यवस्था को शिक्षा सुधार का प्रमुख आधार बनाया है। एआरपी अब केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेंगे। वे शिक्षकों को शैक्षणिक सहयोग, कक्षा शिक्षण में सुधार, सीखने के स्तर का विश्लेषण और विद्यालयों का सतत अकादमिक मार्गदर्शन भी करेंगे। वर्तमान प्रगति के अनुसार वाराणसी ने 100 प्रतिशत एआरपी उपलब्धता हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। देवरिया और हाथरस 98 प्रतिशत, बस्ती एवं कौशाम्बी 95 प्रतिशत, अलीगढ़ तथा सिद्धार्थनगर 94 प्रतिशत और कुशीनगर 93 प्रतिशत उपलब्धता के साथ अग्रणी जिलों में शामिल हैं। वहीं अधिकांश जिलों में रिक्तियां तेजी से भरी जा रही हैं, जिससे विद्यालयों का अकादमिक सपोर्ट सिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है।

 

निपुण भारत मिशन को मिलेगा मजबूत संस्थागत आधार

बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए सरकार जिला समन्वयक (निपुण) की नियुक्तियों को तेजी से पूरा कर रही है। 39 जनपदों में चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि शेष जिलों में इंटरव्यू, दस्तावेज सत्यापन, वित्तीय मूल्यांकन तथा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं। इन अधिकारियों के माध्यम से निपुण भारत मिशन के क्रियान्वयन, शिक्षक प्रशिक्षण, डाटा आधारित अनुश्रवण, सीखने के परिणामों के मूल्यांकन तथा शैक्षणिक योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग को नई गति मिलेगी।

 

एसआरजी और विशेष शिक्षक देंगे गुणवत्ता सुधार को नई धार

राज्य स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण, शैक्षणिक नवाचार और अकादमिक नेतृत्व को मजबूत बनाने के लिए एसआरजी व्यवस्था का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में एसआरजी के रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने की प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही विशेष शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित कर समावेशी शिक्षा को भी मजबूत किया जा रहा है, ताकि दिव्यांग बच्चों सहित प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा समान रूप से पहुंच सके।

 

ईसीसीई एजुकेटर नियुक्तियों से मजबूत होगी बुनियादी शिक्षा

नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बुनियादी शिक्षा को मजबूत बनाने के लिए ईसीसीई एजुकेटर की नियुक्तियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। पहले चरण में अनेक जनपदों में बड़ी संख्या में एजुकेटर कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं, जबकि दूसरे चरण में कई जिलों में नियुक्तियां पूरी हो चुकी हैं। अन्य जनपदों में तकनीकी मूल्यांकन, कार्यादेश, दस्तावेज सत्यापन, मेरिट सूची, विज्ञापन और निविदा प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों के बीच शैक्षणिक समन्वय मजबूत होगा तथा बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही गुणवत्तापूर्ण सीखने का वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

 

मानव संसाधनों के जरिए शिक्षा व्यवस्था में संस्थागत परिवर्तन

योगी सरकार शिक्षा सुधार को अल्पकालिक कार्यक्रम न मानते हुए दीर्घकालिक संस्थागत परिवर्तन के रूप में आगे बढ़ा रही है। एआरपी, निपुण जिला समन्वयक, एसआरजी, ईसीसीई एजुकेटर और विशेष शिक्षकों की व्यापक तैनाती से विद्यालयों में अकादमिक नेतृत्व मजबूत होगा, शिक्षकों की क्षमता संवर्धित होगी, सीखने के परिणामों की नियमित निगरानी होगी और प्रत्येक स्तर पर जवाबदेह शैक्षणिक व्यवस्था विकसित होगी। मजबूत मानव संसाधन, डाटा आधारित अनुश्रवण, सतत प्रशिक्षण और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता में व्यापक सुधार की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। Edited by : Sudhir Sharma